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अगर आपको करते हैं अपने पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़त पड़
आरा क्रेष्न.. क्रेष्न..क्रेष्न..
फिर से!
फिर से मेरे माग में आये तुम!
यिय यक्य तेव कि कि अठवे पुत्र की खोछ के लिये था!
पर तुम नहीं छाँते,
कि मैं यह पता लगा सकूमतल करते हूँ.
कि वो भविश्यवाणी वाला पालक कौन है?
कहाँ है?
इसलिए अपने खेल से मेरे यक्यों को भंग कर दिया.
कहते हैं, इस प्रित्वी के पालन हारों तुम.
तो ठीक है.
तो ठीक है.
तुम्हारे किये का दंड भी
इस प्रित्वी पर सबकों मिलेगा.
अकरूर.
आगे महराज.
ये पात्र कहां से मन कर आये था?
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
आगे महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
महराज, बरसना के कुमबकार ने
ये पात्र बनाया था.
जानते हों कुमार, क्या कर दिया तुमने?
जानते हों कुमार, क्या कर दिया तुमने?
तुम्हारे बनाय पात्र के कार
मेरा यग्गी भंग हो गया.
सारा पहिश्रम फेर्थ हो गया.
यग्गी पुन हो था
तो वो बालक सामने आ था.
महराज.
उसकी आओती इस यग्गी में दिता.
तुम्हारे कारण वो
आओती हो नहीं पाई.
और यग्गी भिना आओती रह जाए
तो इससे महराज घन्स के यश्व को ठेस भूचेगी.
महराज.
इसलिए इस यग्गी में
तुम्हारे आओती दिधी जाएगी.
महराज.
महराज.
महराज.
तुझे मार दिया तो मुक्त हो जाएगा.
हर कश्ट से.
ये बहुत सरल दंड होगा.
और गंस के यग्गी को बंग करने का दंड
प्रचंड होना चाहिए.
को मारगनत को संगनत को चक्रदरत को दर्शणम
तो दिन को पंत गानी क्रोध रूप कंस दूर तं
असम्य अध्याचारिन अशिष्ट तं अभध्रतं
तो रात्मा अनन्थ दुख दाई दुश्ट दूर जनम
गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, गंस, �
ये ऐसा एक भरेश है, दयाना जिसमें लेश है, मनुष्य का नशेश है, अहम है, आग द्वेश है,
अनिष्ट कारी, निर्दाई, नुरिशंस है, ये कंस है, ये छल, कपड का जंश है,
कुमार,
जब तक जियोगई उस शण के लिए पहस्टा ।
जब तुम ने ये पात्र बनाया,
तुमारी भूल का धर्ण इसलिए इसलिए तुमेंっ vit="Notify".
तुम्हारी भूल का धन सिर्फ तुम्हे ही नहीं
पूरे कुमार संग को मिलेगा.
आज से तुम
तुमारा परिवार
और बर्साने का पूरा कुमार संग
बैशक्रित हुआ.
ना तुम पात्र बनाओगे
ना बैचोगे.
ज़िवन व्यापन के लिए किसी ओर आजी में जाकर बसना चाहो
तो यह अनुमति भी नहीं है.
एक बात और
तुम से किसी ने पात्र कहरीदा
यह तुमारी साइता करने के चेष्टा की
तो वो महराज कन्स के कोप का भागी होगा.
अब हर्षिन मनना
तुमारे बच्चों को भूँग से पिलगता देखकर
तुमारे कुड़म को निर्दन्ता से लड़ता देखकर
अब तुमें
और पूरे ब्रिज़ को समझ में आएगा
कि महराज कन्स के इस यग्य का
क्या महत्तु था.
सत्य में, बड़े प्यारे हैं अबामाश्री.
धन्यवाद, मेरे और राधा की मिलन का कारण बनने के लिए.
ब्रिज़ श्रिंगार श्रीद
राधा राणी
राधा राणी
देव्य मनोः हर
सुघर सुहाणी
निरक निरक छवी मन हर शाहे
थिरक थिरक ब्रिज़ धाम ये गाए
देव्य मनोः हर
सुघर सुहाण खोर तक भगफरमान
छुँ चुँ चरण जुंट चरण, जुंत चरण, जूण जुंट छट
जरन जुन जुन जरन जरन जरन जरन जरन के गर जन्या
मंद गुमन लहराय जली ते राय जली वर्काय जली
जब जान जुनर को छोर जून सब सुन गुत आदी गुमाय जली
गड़ारे नैन मिस्री से बैन
मुस्कान अधर पे छाय रही
गुमन का बोल ममरित से बोल
सुन खड़ता स्वयम रजाय रही
जमना के तीर होंके अदीर
नैना बिचाय मिन राह थके
मंद वारी नौन ब्रिज़ कांसिवार
ये रूम देख मरवान थके
जमना के तीर होंके अदीर
नैन मिस्री से बैन
मुस्कान अधर पे छाय रही
गुमन का बोल मुस्कान अधर पे छाय
जमना के तीर होंके अदीर
नैन मिस्री से बैन
मुस्कान अधर पे छाय रही
गुमन का बोल मुस्कान अधर पे छाय
जमना के तीर होंके अधर पे छाय
जमना के तीर होंके अधर पे छाय
जमना के तीर होंके अधर पे छाय
जमना के तीर होंके अधर पे छाय
LANDA
BHAIBHAYA
Few minutes later
वैसे आष्चर है कानय?
इतने वर्षोमें
पहली बार तुमने Baba से कहा
कि तुम्हें माखन के लिए मटकियां खरीदने हाड जाना है
भला, इतना बड़ा परिवर्तन तुम्हें कैसे?
ऐसी, अब बड़ा हो गया हो न?
सोचा, बाबा का हाथ बटाया करो.
अपनी बातों में न, भुले-भाले बाबा और मईया को फ़साना
मुझे नहीं.
बड़े आये, हाथ बटाने वाले.
यूँ कहो न,
कि जिसका हाथ थामना है, उसे देखने जा रहे हो.
क्यों?
राधा भी आ रही है न, वाँ?
पर होगा क्या, कानहा?
उसे याद तो आओगे नहीं तो.
उसे याद दिलाने जा भी कौन रहा है, दाओ?
मैं तो चाहता हूँ कि मुझे मिलने के पश्चाद
वो मुझे भुलाने का प्रयास करें.
अच्छा?
पर उससे क्या बतलेगा?
क्योंकि जिसे जितना भुलाने का प्रयास कर
वो उतना ही याद आता है.
Radha..
Radha, राधा..
यहाँ होँऻा?
कुछ नहीं मा,
मा, यह इतने सारे लोग क्यों आये हैं?
महराज कन्स ने हमारा बहिशकार कर रखा है।
हम जीवन यपन के लिए कहा जाया, आप बताईये।
महराज कन्स के महायज्जी के लिए
पात्र हमारे हाँ से गय थे।
हाँ से तुम और बर्साने का पुरा कुमार संग
बहिशकरित हुआ।
जीवन व्याबन के लिए किसी ओर राजी में जाकर बसना चाहो
तो ये हनुमती भी नहीं है।
तुम से किसी ने पात्र करिदा
यो तुमारी साइता करने के जेश्टा की
तो वो महाराज कन्स के कोप का भागी होगा।
चोटे-चोटे बालक, गुडे माता-पिता
कैसे पालन होगा?
हम तो भूखे मार जाएंगे, मुखिया जी.
आप तो हमारे मुखिया है.
विपत्ती में साइता कीजिए.
प्रियास करके देख चुके हैं
पर कोई लाब नहीं होगा.
कोई और समस्या होती, तो हम उसका निदान कर देखें.
पर शमाँ चाहते हैं,
महाराज कन्स का घिरोध मैं भी नहीं कर सकता।
आपी हाथ खड़े कर लेंगे तो, हमारा हाथ कौन था मेगा?
आप तो हमारे मुखिया है.
मुखिया नहीं कर देखें.
वही तो समस्या है.
मेरे पिता बरसाने के मुखियां है.
उन्पर केवल आपकी हिनदा नहीं होती,
वो पिता भी पीछते हैं,
तो कोई लाइव का जाएगा.
मैं पुछा लाइव का जाएगा,
मैं पुछा लाइव का जाएगा.
वही तो समस्या है.
मेरे पित्ता बर्साने के मुख्यां हैं.
उन्पर केवल आपकी ही नहीं
पूरे बर्साने के सुरक्षा का उतरदायत्व है.
उन्पर पतका भार भी होगा
और कन्स के गुप्सचरों के दृश्टी भी.
वो आपकी सहायता नहीं कर पाएंगे.
किन्टु मैं ना मुख्या हूँ
ना ही मुझे किसी पत का दबाव है.
मैं करूँगे आपकी सहायता.
यह हासी खेल नहीं है, रादा.
समस्या विकट है.
हम मत्रा जनपत के आधीन हैं.
महाराजा कंस के विरुद कोई नहीं जा सकता.
हम मत्रा जनपत पर आश्रित हैं
तो यह कुमार हम पर आश्रित है, बाबा.
क्या दोश्य है इनका?
कि महाराज के यग्ये के लिए पात्र बनाए?
अपनी मृत्यों की भविष्यवानी का दंड
इन निर्दनों पर क्यूं?
मनुष्य की तो सांसो का ही नहीं पता
कब तूट जाए.
मृत्यों आ जाने पर कोई अमराज को दंड देता है.
तो एक पात्र के तूटने का दंड
इन अभोत बालको और विरुदों को क्यूं, बाबा?
जीत जी तो मार डाला, महाराज कंस ने इन्हें.
ना यहां रहकर कोई काम कर सकते हैं
ना यहां से कहीं भार जा सकते हैं.
यदि बर्साने में ये भूँक से बिलख कर मरेंगे
तो क्या मन का एक भी दाना खा पाएंगे, बाबा?
आप सीमा तोड रही हैं, रादा जी जी.
आप बाबा की लाडली हैं, इसका अर्थ ये नहीं
कि आप भरी सभा में बाबा की निर्णे के विरुद जायें.
मत्थुरा के महाराज के विरुद जाना भरीती नहीं है.
मत्थुरा के महाराज के विरुद जाना भरीती नहीं है.
मैं बाबा के विरुद कभी नहीं जा सकती, दामा.
पर इन अवसाहायों का साथ देना चाहती हूँ.
और रही बात रीती की,
सामाज की रीती तो एक शक्तिशाली व्यक्ति ही निश्चत करता है.
निर्बल को तो बस उसे बोच समझ कर ढोना पड़ता है.
मुझे आज बोलना पड़ा क्योंकि बाबा नहीं सिखाया है
कि उचित और अनुचित में अंतर करके
उचित का साथ देना चाहिए.
अब आप ही बताईए, बाबा.
क्या इन्हें भूखे मरने देना उचित होगा?
सुन रहे हैं, बाबा. समझाए जीजी को.
जीजी का ये प्रयास पुरे परिवार का मानसमान भंग कर देगा.
और मेरा ये मानना है कि मेरे प्रयास से
ना केवल बाबा के मानसमान की
बल्कि उनकी देख कर्तव्य की, उनकी वचन की भी रक्षा होगी.
किस वचन, किस कर्तव्य की विशय में बात कर रही हैं तुम, रादा?
ये लोग आज आपके सामने अपने जीवन की आशा लेकर आए हैं, बाबा.
इन लोगों की सहायता करने से ही आपका मानसमान बढ़ेगा.
हर मुख्या का कर्तव्य होता है, अपने लोगों की रख्षा.
हर मुख्या पद ग्रहन करते समे अपने लोगों की सुरख्षा
वचन देता है, जो आपने भी तो लिया है.
अपने वचन पर बने रहने के सीख
आपी से तो मिली है, बाबा.
तो आपको वचन तोड़ते कैसे देखूँ मैं?
आज तक तुम्हें आशिवात देता आया हूं, मेरा दाव.
धन्यवाद कैसे दो, सब समझ में नहीं आते.
कभी-कभी माता-पिता स्वेम वो सीख गुल जाते हैं
जो वो जीवन भार पिर संतान को देते हैं.
तुमने वो सीख याद दिलाकर मुझे एक अपराद करने से रोग दिया.
बोलो, रादा. कैसे करें हम इनकी साथा?
आप बस प्रयास कीजे कि किसी प्रकार महाराज कन्स तक
इनकी आचना पहुँचा सकें.
इनकी विकट परिस्तिती समझाकर उनका मन बदल सकें.
तब तक, इनके बनाय पात्रो हाट में बेचने मैं जाओंगे.
असम्बव.
बाबा, उस्पास है ना मुझे?
उम्पर है, कन्स के सैनिकों पर नहीं.
उन्हें जात ही नहीं होगा कि पात्रो बरसाने से आये है.
अनुमती दीजे ना, बाबा.
एक शर्त पर, तुम्हारे साथ सुरक्षा के लिए कुछ लोग जाएंगे.
स्विकार है.
कैसा बनाएं, काटी?
वस्तु का आकार नहीं.
उसे बनाने में लगी सोच का आधार बड़ा होता है, बिट्या.
इसका आकार जैसा हो.
तुम्हारी मम्ता में इस सोच का तेज इसमें जलग रहा है.
राधा, सुनो.
हम जो कर रहे हैं, वो उचित तो है न, राधा?
हाँ, विशाखा. हम उचित कर रहे हैं.
नजाने क्यों मुझे बार-बार आभास हो रहा है
कि ये घटना, किसे शुब यात्रा को जनन देने वाली है.
फुर्रा!
फुर्रा!
क्या बात है दाओ?
आज कस्र इतनी हुई यहाँ बेलो को भोजन नहीं मिला.
यह बैल गाड़ी कुछ अधिखार है.
ये बहलगारी कुछ अधीक ही दीले नहीं चलरी?
हाँ.
क्योंकि आज मेरा मन
शीतल हवा खाते खाते जाने का कर रहा है.
क्योंतो
तुम्हारा मन शीगर पहुँचने के लिए
इतना क्यों मचल रहा है, काना?
यही तो प्रेम की विशेष्टा है न, दाव?
अब देखिए न,
सागर से मिलने के लिए नदिया लंबी यात्रा देख करती है.
पर जब सागर सामनी हो
धीरज कतक छूट ही जाता है.
बस अब और प्रतिक्षा नहीं.
अरे!
अरे!
कहा भागे जा रहे हो?
अरे, रुखो!
दाव, दो प्रेमीयों के मिलन के बीच में बादा नहीं बनते.
मैं आ रहा हूँ, रादिया.
प्रेमीयों के बीच में बादा नहीं बनते.
अरे, रुखो!
दाव, दो प्रेमीयों के मिलन के बीच में बादा नहीं बनते.
अरे, रुखो!
दाव, दो प्रेमीयों के बीच में बादा नहीं बनते.
अरे, रुखो!
दाव, दो प्रेमीयों के बीच में बदा नहीं बनते.
अरे, रुखो!
दाव, दो प्रिमीयों के बीच में बनते.
सम्माल करें!
बहुत बतलवार वो किलिए!
वालिया यूट्यूब पर तो पर प्रावोर् auspicious to be with you forever.
तुम प्रेम हो..
मेरे नेत्रों में तुम्हारी रूप का प्रवेश तो हो गया है।
मेरी वास..
अब समय आगया है कि इस कहानी में मेरा प्रवेश हो जाये।
तुम प्रेम हो तुम पीत हो मनमीत हो राधे मेरी मनमीत हो
मैं बरसाना की एक लड़की से प्रेम करता हूँ
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