All language subtitles for [Hindi (auto-generated)] Pushpa 2 the rule (2024) Full Movie _ Allu Arjun, Rashmika M, Fahadh, Sreeleela __ Reviews & Facts [DownSub.com]

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Original subtitles

जरूर कौन है यह

आदमी नाम छोटा

[संगीत]

[प्रशंसा]

है अरे

दीवानो मुझे पहचानो

जब एक पति अपने बाइको की सुने तो

[संगीत]

क्या पुष्पा को नेशनल खिलाड़ी समझे

क्या या सात समंदर पार हो

पुष्पा का उसूल करने का

फसूल पार्टी होगी

पुष्पा इब होगी पार्टी इंटरनेशनल

ए पास सिर्फ एक नाम नहीं है लेकिन साउंड

बहुत

बड़ा होतर

पूरी दुनिया को दिखाएगा पुष्पा मतलब ब्रंड

श्रीवल्ली मेरी बाई को

[संगीत]

[प्रशंसा]

है इसे ना पैसों की परवाह है इसे कोई गहरी

चोट लगी

है ई अक्षर

ना पावर का

खौफ जो मेरे हक का पैसा है वो चार आना हो

या आठ आना वो सातव आसमान पर हो

बंदू हॉस्पिटल के सामने खड़े होकर फूफू कर

रहा है बीबी बीमार है अंदर है क्या हुआ

भाभी को वही औरतों वाली

बीमारी खर्चा इतना सिगरेट कितने की है

की 10 की और जेब में कितनी पड़ी एक और है

मरने के लिए तेरे पास पैसे हैं लेकिन बीवी

को मौत से बचाने के लिए पैसे नहीं है क्या

बकर

है ये देख मौत लिखी है इस पे मौत और यह

सैनिटरी पैड प

जिंदगी हसमत दो सिगरेट के पैसे से भाभी को

ऐसी खतरनाक बीमारी जो महावरी के वक्त गंदा

कपड़ा इस्तेमाल करने से हो सकती है उससे

बचा सकता है और सिगरेट ना पीने से अपने आप

को भी खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है

यानी कि मौत के पैसे से दो जिंदगी खरीद

सकता है तू एक अपनी और एक अपनी बीवी की

सोच अब

हस हीरोगिरी

यह पीने में नहीं है यह देने में है

नमस्कार दोस्तों दोस्तों स्वागत है आपका

आपके अपने चैनल द मिस्टीरियस मॉर्निंग में

दोस्तों 6 दिसंबर को पुष्प टू रिलीज हो

चुकी है और भाई क्या भौकाल मचा के रखा है

पुष्प टू ने आइए जानते हैं उसका रिव्यू

पुष्प टू ने बॉक्स ऑफिस पर लगाई आग दूसरे

दिन के कलेक्शन से मचा मचा दिया गदर पुष्प

टू के आने से बॉक्स ऑफिस पर हड़क मच गया

है रिलीज से पहले ही शानदार बिजनेस करने

वाली अल्लू अर्जुन और रश्मी का मंदाना

स्टार इस फिल्म को 100 करोड़ से ज्यादा की

ओपनिंग

मिली अब फिल्म के दूसरे दिन का अर्ली

कलेक्शन भी सामने आ चुका है जो काफी

इंप्रेसिव है सभी भाषाओं में फिल्म ने

कितना-कितना कलेक्शन किया है चलिए देखते

हैं आंकड़े

इस वक्त हर किसी की जुबान पर बस ढाई अक्षर

का शब्द है पुष्पा टू जिसकी धमक इतनी तेज

है कि बॉक्स ऑफिस थर्रा उठा है 5 सितंबर

को सिनेमा घरों में रिलीज हुई आइकन स्टार

अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा टू ने पहले

दिन तो धमाका ही धमाका ही कर दिया लेकिन

दूसरे दिन तो बॉक्स ऑफिस सुकुमार के

निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बवंडर हीला

दिया हिंदी तमिल तेलुगु मलयालम और कन्नड़

भाषा में रिलीज हुई स्पेन इंडिया रिलीज

फिल्म ने पहले दिन तो 72 से 72 करोड़ से

ओपनिंग की थी अब मूवी के दूसरे दिन के

अरली आंकड़े सामने आ गए हैं जिसे देखकर यह

साफ जाहिर है कि पुष्पराज अभी कई बड़ी

फिल्मों को धूल चटाने वाला

है मूवी ने शुक्रवार को यानी कि

दूसरे दिन बॉक्स ऑफिस पर टोटल कितनी कमाई

की चलिए यह देखते हैं आंकड़े पुष्पा टू को

रिलीज के पहले बस का पूरा पूरा फायदा मिला

है इस फिल्म की रिलीज से पहले तो एडवांस

बुकिंग जोरो सोरो से चल रही थी लेकिन

सिनेमा में आने के बाद भी फैंस ने वेकेंट

के टिकट पहले से ही बुक कर लिए लगभग

सभी शहरों में थिएटर खचाखच भरे हुए हैं

बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाली पुष्प टू को

आईएमडीबी पर कितनी कित पर मिली सिर्फ इतनी

रेटिंग जानकर लगेगा 440 वोल्ट का झटका

पहले दिन के मुकाबले शुक्रवार को मूवी के

बिजनेस में काफी फर्क आया लेकिन इसके

बावजूद घरेलू बॉक्स ऑफिस पर मूवी 300

करोड़ कमाने के बेहद नजदीक पहुंच चुकी है

टेक्निकल काम के अर्ली आंकड़ों से अर्ली

आंकड़ों के मुताबिक अल्लू अर्जुन और

रश्मिका मंदाना की मूवी पुष्पा टू ने

दूसरे दिन शुक्रवार को टोटल 90 करोड़ के

आसपास बिजनेस किया जिसमें तेलुगु में

फिल्म ने दूसरे दिन दो 27 करोड़ और हिंदी

में 55 करोड़ तमिल में तमिल में 5 करोड़

कन्नड़ में 6 लाख और मलयालम में डेढ़

करोड़ का बिजनेस किया

पुष्पा पुष्पा टू पहले ही केजीएफ से लेकर

जबान एनिमल कल की 2898 जैसी फिल्मों को को

कमाई करने के मामले में फ पीछे छोड़ चुकी

है दो दिन में 265 करोड़ कमाने वाली यह

मूवी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ के

क्लब में शामिल हो

जाएगी तेलुगु में तो यह फिल्म अच्छा

बिजनेस कर ही रही है लेकिन उससे ज्यादा

तेजी मूवी की कमाई हिंदी बेल्ट में हो रही

है जिस से अब दिवाली के मौके पर रिलीज हुई

दोनों बड़ी फिल्म फिल्मों भूलभुलैया थ और

सिंघम पर खतरा मंडरा रहा है पहली एंट्री

पर इतना बवाल नहीं करता जितना दूसरी

एंट्री पर करता है यह पुष्पा टू का ही

डायलॉग है और ऐसी ही यह फिल्म भी है

पुष्पा फ्लावर नहीं फायर था इस बार वोह

बोला मैं वाइल्ड फायर हूं और वो वाकई

वाइल्ड फायर ला पुष्पा टू में एक चीज

कूटकूट कर भरी हुई है वो है एंटरटेनमेंट

एंटरटेनमेंट और

एंटरटेनमेंट इस फिल्म को देखते हुए दिमाग

को पुष्पा की वाइल्ड फायर में डाल दिया

जाए और घबराहट

मत पुष्पा भाऊ आपके दिमाग को कुछ नहीं

होने देंगे तीन घंटे 20 मिनट बाद दिमाग

एकदम कड़क होकर निकलेगा आपको लॉजिक नहीं

लगाना है बस

एंटरटेनमेंट होना है और सिनेमा अगर लॉजिक

लगाने का मौका दिए बिना आपको लगभग साढ़े न

घंटे एंटरटेन करें तो वह कमाल का सिनेमा

होता है और ऐसा सिनेमा इसलिए भी जरूरी है

जो को सिनेमा जिंदा रहे और चलता रहे फलता

फूलता

रहे अब पुष्पा लाल चंदन का बड़ा स्मगलर बन

चुका है है और इस पूरे सिंडिकेट का मुखिया

है लेकिन आदमी आगे बढ़ता है तो दुश्मन

बढ़ते हैं यही जिंदगी में होता है और यही

फिल्म पुष्पा अपनी बीवी की हर बात मानता

है जब बीवी कहती है कि सीएम से मिलने जा

रहे हो तो फोटो क्लिक करा लेना और जब सीएम

एक स्मगलर के साथ फोटो नहीं खिंचवा आता तो

पुष्पा अ सीएम ही बदलने की लालिंग कर देता

है पुष्पा पुष्पा को इसके लिए 5000 करोड़

का लाल चंदन बजस इस स्मगलर करना

है क्या होगा और पुष्पा का दुश्मन पुलिस

वाला भवर सिंह सखावत क्या करेगा थिएटर में

जाकर देखिए मजा

आएगा यह पूरी तरह से मास एंटरटेनर है एक

फ्रेम एंटरटेनिंग है लॉजिक के बारे में आप

सोचते नहीं जो पुष्पा करता है उस पर यकीन

हो जाता है एक के बाद एक कमाल के सीन आते

हैं बहुत बार सीटी ताली बजाने वाले सीन

आते हैं पुष्पा का स्व गजब का है पुष्पा

सॉरी बोल देता है लेकिन पुष्पा को झुकना

नहीं है और फिर जो होता है उसके बाद बवाल

कहते हैं यह फिल्म ऐसा सिनेमा है कि लोग

थिएटर ने को मजबूर हो

जाएंगे फिल्म की लंबाई अखती नहीं है बल्कि

लगता है कि और कुछ भी होता तो मजा आता यह

सिनेमा हाल में देखने वाला एक्सपीरियंस है

जाकर लीजिए क्योंकि ऐसे सिनेमा से ही

सिनेमा जिंदा है सिनेमा में मास और क्लास

दोनों होंगे तो सिनेमा चलेगा और यह मास है

अल्लू अर्जुन का काम बवाल है आपको यकीन

दिला देते हैं कि जो कर रहे हैं वह हो

सकता है और पुष्पा कर सकता है उनका सुमेग

कमाल का है वह हर फ्रेम में छाए हुए हैं 5

साल की उनकी मेहनत साफ दिखती है अल्लू

अर्जुन ने हीरोगिरी और हीरो पंथ के मायने

बदल

दिए उन्होंने अब लकीर बड़ी कर दी है उनका

काम बहुत जबरदस्त है और अब किसी हीरो को

उनका स्वग मैच करने के लिए बहुत कुछ बड़ा

ही करना होगा रश्मि का मंदाना का कमाल भी

कमाल

है अल्लू अर्जुन जैसे हीरो के सामने

हीरोइन के करने को हीरोइन के करने को शायद

कुछ नहीं होता लेकिन रश्मिका आपकी छाप

छोड़ जाती है फहद फासिल ने भी जबरदस्त काम

किया है हीरो की हीरोगिरी तभी निकल कर आती

है जब बिलन जानदार हो और यह पुलिस वाले के

किरदार में भाद फासिल ने जान डाल दी

है जगदीश प्रताप भंडारी का काम अच्छा है

जगपत बाबू ने भी अच्छा काम किया है सौरभ

सचदेव ने भी कमाल का काम किया

है डायरेक्शन और

राइटिंग शिवकुमार की राइटिंग और डायरेक्शन

दोनों शानदार है उन्होंने एक ही चीज पर

फोकस दिया है सुवेग और

एंटरटेनमेंट और वह कामयाब रहे वह जो बनाना

चाहते थे

उससे भटके नहीं यही उनकी कामयाबी है एक के

बाद एक कमाल के सीन डाले ताकि एक सीन

देखकर दर्शक हैरान हो और सांस ले उसके

पहले दूसरा कमाल का सीन आ जाए सबसे पहली

बात जो पुष्पा टू के बारे में जाननी जरूरी

है वह यह

है कोई महान फिल्म नहीं है यह एक आम

मुजिया मसाला फिल्म जैसी एक्शन फिल्म है

और चूंकि एक हिट फिल्म की सीक्वल है

लिहाजा इसकी अपनी ब्रांड वैल्यू दर्शकों

को सिनेमा घरों तक खींच लाने में सफल रहा

किसी सुपरहिट का सीक्वल बनाना आसान नहीं

होता खास तौर से तब जब कहने को कोई खास

कहानी ना बची हो तेलुगु सिनेमा के दिग्गज

निर्देशक सुकुमार और निर्माता अल्लू

अर्जुन के अल्लू अरविंद के बेटे अल्लू

अर्जुन की फिल्म पुष्प टू की मेकिंग आसान

नहीं

रही इस फिल्म का मामला मले आलम फिल्म

अभिनेता फहद फासिल की तारीखों के चलते

बार-बार लटक लटका है फिल्म पुष्पा द

रैंपेज के ऐलान के साथ खत्म होती है और इस

ऐलान से पहले ही निर्देशक सुकुमार ने

फिल्म की सारी कमजोरी कमजोर कड़ियां

किनारे लगा

दी पुष्पराज ने पिछली फिल्म पुष्पा पुष्पा

द राइज में नारा लगाया था मैं झुकेगा नहीं

जबकि उसका ऐलान है मैं हरगिज नहीं

झुकेगा बीवी उसकी मां बनने वाली है है

काली मां से वह एक बेटी चाहता है ताकि वह

अपने ससुराल जाए तो उसे वहां का कुल नाम

मिल

सके बचपन से लेकर पुष्पा इसी कुल नाम को

लेकर ही तो बार-बार दुखी होता रहा

है पुष्पा की आवाज इस बार थोड़ा थोड़ी

कड़क है अभिनेता सीरियस तलपड़े ने फिर एक

बार पुष्पराज के किरदार को पर्दे पर खिला

दिया

है फ्लावर से वाइल्ड फायर बनने की कोशिश

करते पुष्पराज की कहानी यहां तक यहां

थोड़ा पीछे से शुरू होती

है छलांग लगाने के लिए वह पंजे भी सिलता

नजर आता है लेकिन बचपन का कोमल पुष्पा

बड़ा

होकर गर्द पराज कैसे बन गया

इसकी कहानी जबरदस्त है श्रीमती पुष्पराज

यानी की श्रीवल्ली का नैन मटक्का यहां भी

जारी है अपने सामी पर वह फिदा है पूजा पाठ

में भी नंबर वन है खास खाना हर बार नॉनवेज

ही बनाती है श्रीवल्ली को सुकुमार ने

घरेलू बीबी बनाया है और फिल्म में समानता

रूथ प्रभु की

पूरी करने के लिए इस बार श्रीलीला को आइटम

गल बनाया

है समानता जैसा ना तो नमक उनमें है और ना

ही उन जैसी चपलता मामला किस किस में कसक

भरकर लाल चंदन को लाल चंदन हो गया फिल्म

की सबसे कमजोर कड़ी है गाना काना ही है

अल्लू अर्जुन को प्रभु प्रभु जी कर चंदन

घिसते रहे

लेखक निर्देशक सुकुमार को लगता रहा कि

फिल्म पुष्पा वन की सफलता का श्र उन्हें

उतना ही मिल मिला जितना अल्लू अर्जुन और

रश्मिका को मिला रश्मिका को तो सीधे हिंदी

सिनेमा के हीरो नंबर वन रणवीर कपूर की

हीरोइन बनने में कामयाब

रही अल्लू अर्जुन की कहानी इस बार बचपन से

लेकर बुजुर्ग आत की दहलीज पर आ खड़े हुए

हैं पुष्पराज की कहानी और इस बार वाकई में

उनके लिए मामला आसान नहीं है रावड़ी बाय

पुष्पा और लीडर पुष्पा के बीच की जो लकीर

इस कहानी में फाद फासिल के आने से आई है

उसे पार करने में इस बार यह दोनों जिया ले

कमाल भरे कर दिए गए हो लेकिन भवर सिंह

सखावत का किरदार यहां कहानी में कुछ खास

करिश्मा कर नहीं

पाता सुकुमार को भी समझ आ गया कि यह

किरदार उनके लिए अब असेट नहीं लायबिलिटी

है तो लिहाजा उन्होंने वही किया जो ऐसे

में किसी भी काबिल निर्देशक को करना चाहिए

रश्म का मंदाना पूरी फिल्म में पुष्पराज

के आगे पछ डोलती शिवल्ली बनी है अदाकारी

दिखाने को उन्हें सिर्फ एक सीन मिला और जब

उस सीन सीन में उनकी एक चोट सो सुनार पर

भारी

पड़ी फिल्म पुष्पा द रूल यानी पुष्पा टू

की कहानी को जिस तरह सुकुमार पिछली बार

विदेश से समंदर के रास्ते रेखा चित्रों के

जरिए लाल चंदन के जंगलों तक लाए थे वैसा

ही स्विंग इस बार की कहानी में भी है

जापान के किसी बंदरगाह से शुरू होने वाली

यह फिल्म चूंकि तीन घंटे के करीब लंबी है

लिहाजा फिल्म की कहानी का विस्तार काफी

लंबा है इस विस्तार में अपने किरदारों से

सुकुमार को किसी जिस मदद की उम्मीद रही

होगी वह उन्हें

मिली जगदीश भंडारी जगपति बाबू राम रमेश और

ब्रह्मा जी सब अपने अपने किरदारों में

मुस्ते दिखते

हैं कहानी पिछली बार श्रीवल्ली का दिल जीत

दिल जीतने की थी और इस बार कहानी है अपनी

मां को अपने ही घर में वो सम्मान दिलाने

की जिसके लिए पुष्पराज बचपन से ही त्रास

झेल

रहा इस बार की चौपड़ में पुष्पा और भवर

सिंह ने तो पासे फेंके ही कुछ पासे उस

भ्रष्ट राजनीति के भी हैं जिनको पुष्पा

अपने बाएं हाथ का खेल समझता

है फिल्म को देखने आए दर्शकों को रश्मिका

और श्रीवल्ली दोनों से अलग-अलग आस रही

होगी रश्मिका को रश्मिका के भीतर एक

गुस्सा है यह गुस्सा उनके अभिनय में

किरदार किरदार की जरूरत के हिसाब से मौका

मिलते ही बाहर निकलता है लेकिन इस गुस्से

को प्रकट करने के नए तरीके उन्हें सीखने

होंगे हां फिलिंग बाला

फीलिंग्लेस उनका दमदार है लेकिन उनके

किरदार में यात्रा वाले दृश्य से पहले

ज्यादा गहराई नहीं दिखी यात्रा वाला दृश्य

उसके बाद लगातार आने वाले दो गाने और उसके

बाद काली के रूप में अल्लू अर्जुन का

तांडव नृत्य फिल्म का सबसे सफल सीक्वेंस

है और इसके

बाद भतीजी को बचाने निकल निकले चाचा का

क्लाइमैक्स वाला एक्शन भी तालियां बटो ले

गया दर्शकों को श्रीवल्ली में समानता जैसी

किस किस पूरी होने की कसक जगी थी लेकिन

उनका किस किसक सांग ज्यादा जमा

नहीं फिल्म की तकनीकी टीम में संगीतकार

श्रीदेवी प्रसाद होकर कॉन्फिडेंस का शिकार

साफ नजर आते हैं उनकी हिंदी पर कमजोर पकड़

भी इस बार उजागर हो गई फिल्म बनाने वालों

को भी डीएसपी की यह कमजोरी रिलीज से पहले

ही समझ आ गई इसलिए फिल्म के बैकग्राउंड

स्कोर में से एस थामस और सैम की एस की भी

मदद ली

गई फिल्म की तकनीकी टीम में जिस शख्स एक

शख्स की तारीफ करने का मन बार-बार होता है

वह पोलैंड के मूल निवासी सिनेमेट ग्राफ का

कुआ ब्रो जैक मिरोस्लाव फिल्म का

प्रोडक्शन डिजाइन काफी रंगीन है प्रीत सल

सिंह ने अल्लू अर्जुन के गेटअप पर काबिले

तारीफ काम किया

है नवीन नूली का संपादन बेहतर होता है

होता तो फिल्म कम से कम क 20 मिनट कम हो

सकती थी साउथ सिनेमा में इस साल हनुमान ने

जिस होशियारी से सिनेमा को सादा उसे नाग

अस्मिन कल की 29 में आगे बढ़ाया और अब आ

गया है पुष्पा राज अपने इलाके और बॉक्स

ऑफिस पर रूल करने के लिए अल्लू अर्जुन की

फिल्म पुष्पा टू थिएटर में रिलीज हो चुकी

है इस फिल्म में रश्मि का मंदाना उनकी

पत्नी का किरदार निभा रही हैं अल्लू

अर्जुन की पुष्प टू कैसी है क्या है इसे

थिएटर में जाकर देखना चाहिए यह जानने के

लिए हमारे रिव्यू को और आगे

जाने पुष्पा अल्लू अर्जुन की वो फिल्म थी

जिसे देखने के बाद राजेश खन्ना के पुष्पा

आई हेट टियर जैसे ओवर ग्रीन डायलॉग को भी

हमने भुला दिया इस फिल्म के रिलीज होने के

बाद से अब तक भारत का बच्चा बच्चा पुष्पा

का नाम समझकर फ्लावर समझे क्या फायर है

मैं जैसे यह डायलॉग बड़े स्वक से ही बोल

बोलता हुआ नजर आता है 3 साल पहले रिलीज

हुई पुष्पा द राइट ने अपनी सफलता से

बॉलीवुड को बहुत बड़ा सबक सिखाया

था इस फिल्म ने आंख बंद कर हॉलीवुड ट्रेड

फॉलो करने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को

बताया था कि वह आम लोगों के लिए फिल्में

बनाना भूल गए हैं पुष्प द राइज ने मुझे उस

एंग्री यंग मैन हीरो से मिलाया जो हिंदी

फिल्मों से गुम हो गए

थे अब जैसे पुष्पा द राइस पसंद आई हो उसका

पुष्पा द रूल देखना तो बनता है फिर क्या

था यह फिल्म भी देख डाली और इस फिल्म ने

मुझे निराश बिल्कुल नहीं

किया कहानी निर्देशन सिनेमेट ग्राफी और

म्यूजिक के मामले में अलग पुष्पा द राइज

फायर थी तो पुष्पा द रूल वार्ल्ड फायर है

रश्मिका मंदाना अच्छी है लेकिन पूरी फिल्म

में अल्लू अर्जुन से नजर नहीं हटती साउथ

की फिल्मों से मुझे अक्सर यह शिकायत रहती

है कि उन फिल्मों में महिला का सम्मान

नहीं किया जाता लेकिन अल्लू अर्जुन और

सुकुमार ने मुझे सरप्राइज किया उन दिनों

ने इस फिल्म में कुछ ऐसा कर दिया कि जिसे

करना किसी भी सुपरस्टार के लिए आसान नहीं

होता पर अल्लू अर्जुन ने वो हिम्मत दिखाई

इस फिल्म में जिस तरह से महिला का सम्मान

किया गया मुझे लगता है कि हर साउथ के

फिल्म मेकर्स को इससे सीखना चाहिए यह एक

शानदार फिल्म है और इस फिल्म के साथ अल्लू

अर्जुन ने इंडस्ट्री में एक नए ट्रेंड की

शुरुआत की है आइए अब इस फिल्म के बारे में

विस्तार से बातें करते

हैं रक्त चंदन यानी कि लाल चंदन की तस्करी

करने वाले पुष्पराज की कहानी आगे बढ़ती है

अब पुष्पराज वो मजदूर नहीं रहा वो बड़ा

आदमी बन गया है लेकिन आज भी शिवल्ली उसे

अपनी उंगलियों पर न चाती है अब पुपा के एक

इशारे पर राज का सीएम ही बदलता है लेकिन

उसके इस बिजनेस को लगा एसपी भवर सिंह

सखावत नाम का ग्रहण अब भी कायम है पुष्पा

आगे आगे और सखावत उसके पीछे पीछे क्या इन

दोनों के बीच की लड़ाई खत्म होगी पुष्पा

की जिंदगी में और क्या मोड़ आएंगे पुष्पा

के उस परिवार का क्या होगा जिसने पुष्पराज

से उसका नाम छीन लिया इन सारे सवालों के

जवाब जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर यह

फिल्म देखनी

होगी जब रिव्यू करने के लिए मैं फिल्म देख

देखता हूं तब अक्सर मोबाइल पर नोटपैड खुला

रहता है फिल्म में क्या ट इंटरेस्टिंग है

कौन सा दिलचस्प डायलॉग बोला गया है यह मैं

अक्सर इस नोटपैड में लिख लेता हूं लेकिन

अल्लू अर्जुन की पुष्पा एक ऐसी फिल्म है

जिसे देखते हुए मैं पूरी तरह से भूल गया

कि मुझे नोटपैड पर इससे जुड़ी बातें लिखनी

होंगी 3 घंटे 20 मिनट की यह फिल्म फिल्म

पूरी तरह से शुरुआत से लेकर अंत तक आपको

कनेक्ट करके रखती है एक पल के लिए भी आपको

यह महसूस नहीं होता कि आप बोर हो रहे हो

और इस बार का श्र फिल्म निर्देशक सुकुमार

को जाता

है जिस तरह से अ पुष्पा में अल्लू अर्जुन

और रश्मि का मंदाना के बीच एक बहुत ही

खूबसूरत केमिस्ट्री नजर आती है उसी उससे

भी बेहतरीन केमिस्ट्री अल्लू अर्जुन और

सुकुमार के बीच है फर्क सिर्फ इतना है कि

इसे हम देख तो नहीं सकते लेकिन फिर भी

फिल्म देखते हुए हम इसे महसूस कर सकते हैं

कि इस फिल्म के हर फ्रेम में एक नई सोच

दिखाई देती

है और यह नई सोच पुष्पा टू के हर सीन को

खास बना देती है उदाहरण के तौर पर बात की

जाए तो फिल्म में एक सीन है जहां पुष्पा

के 200 से ज्यादा साथियों को शिखा पकड़

लेता

है अब हम उम्मीद करते हैं कि सिंघम अगेन

में जिस तरह से अल्लू अर्जुन कपूर पुलिस

थाने में आए

थे और उन्हें सभी पुलिस वालों को मार

गिराकर अपने साथियों को छुड़ाया था ठीक

वैसे ही पुष्पा भी करेगा लेकिन वह जो कर

करता है वह आपके सभी सोच कभी नहीं सोच

पाएंगे कैमरा के पीछे बैठा हुआ निर्देशक

और उसके सामने परफॉर्म करने वाला एक्टर इन

दोनों के बीच यह कमाल की केमिस्ट्री बनाने

का आधा श्रेय हमें अल्लू अर्जुन को भी

देना

होगा अ आपने कभी सोचा था कि अपना एक कांदा

नीचे झुका कर चलने वाले दाढ़ी से लेकर सिर

पर तक जिसके बाल बड़े हो जो चमकीले से

अजीब रंग के कपड़े पहनता हो ऐसे किरदार को

पूरा देश पसंद करने लगेगा लेकिन अल्लू

अर्जुन ने वो कमाल करके दिखाया है अल्लू

अर्जुन एक मास हीरो हैं असल जिंदगी में हो

या फिल्मों में हमेशा उन्हें एक स्टाइलिश

लुक में देखा गया है लेकिन पुष्पा में

उन्होंने अपनी इमेज या लुक की परवाह ना

करते हुए इस

अ अपने परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया

है पुष्पा टू अल्लू अर्जुन के करियर की अब

तक की सबसे बेस्ट फिल्म है फिल्म के

ट्रेलर और पोस्टर में उन्हें साड़ी पहनकर

काली मां के अवतार में देखा गया था यह लुक

सिर्फ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के

लिए नहीं इसके पीछे एक क्रांतिकारी सोच है

और साड़ी पहनकर अल्लू अर्जुन ने जो

परफॉर्म दी है उसे यह फिल्म देखने वाले

लंबे समय तक भूल नहीं

पाएंगे रोहित शेट्टी की गोलमाल में अरद

वारसी अजदगन ने भी औरत औरतों के कपड़े

पहने थे रितेश देशमुख और सेफ अली खान ने

भी अपनी फिल्म में महिला बनकर सीन परफॉर्म

किया था लेकिन अक्सर हिंदी फिल्मों में

एक्टर का लड़की बनना कॉमेडी के लिए

इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अल्लू अर्जुन

ने साड़ी पहनकर जो सीन दिया है उसे देखते

हुए लग रहा है कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री

में नया ट्रेंड शुरू कर दिया है श्रीवल्ली

के किरदार में रश्मिका मंदाना ने जान डाल

दी है पुष्पा के पार्ट वन में उनके होने

ना होने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था

लेकिन पुष्प टू में रश्मिका के

रश्मिका यह बता देती है कि उनका इस फिल्म

में होना क्यों जरूरी है फहद फासिल भी

अच्छे हैं लेकिन इस बार उनके किरदार को

कॉमेडी का तड़का लगाकर पेश कर दिया था

पुष्प टू की और इस खास बात है इस फिल्म की

डबिंग और बैकग्राउंड म्यूजिक सीरियस

तलपड़े की आवाज पुष्पा के किरदार को पूरा

न्याय देती है फिल्म के गाने याद नहीं

रहते लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक पर खास

मेहनत की गई है जहां बैकग्राउंड में हिंदी

म्यूजिक की जरूरत थी वहां हिंदी म्यूजिक

लगाया गया है अक्सर पेन इंडिया फिल्म

बनाने में दिलचस्पी रखने वाले साउथ के

मेकर्स इस फोटो

अ साउथ के मेकर्स इस छोटी सी बात को भूल

जाते हैं अ पुष्पा बन की कहानी कुछ लोगों

को पसंद नहीं आई थी पुष्पा के मेकर्स ने

यह फीडबैक सीरियसली लिया और उन्होंने अपनी

कहानी पर काम किया पुष्प टू की कहानी पर

खूब मेहनत की गई पूरी कहानी में एक सीन भी

ऐसा नहीं है जहां हमें लगता है कि पुष्पा

गलत रहा है फिल्म में हिंसा भी है लेकिन

संदीप रेड्डी बांगा और रणवीर कपूर के

एनिमल की तरह बिना सोचे समझे की किए जाने

वाली हिंसा इस फिल्म में नहीं

है पुष्प टू में वायलेंस तो है लेकिन यह

वायलेंस अपने आप को जस्टिफाई करता है जहां

एनिमल का वायलेंस देख देख आंखें बंद करने

का मन करता है वहां कुछ पुष्पा की हिंसा

देखकर तालियां बजाते हुए कहते हैं कि कि

और मारो इस फिल्म में पुष्पा के बारे में

जो बात सबसे अच्छी लगी वह है उसकी पत्नी

और बाकी महिलाओं के लिए सम्मान पुस्पा टू

का यह हीरो महिलाओं के सम्मान सामने आसु

बहाने को अपनी कमजोरी नहीं समझता कभी-कभी

वोह फूट-फूट कर फूट फूट कर पर जाकर अपनी

बीवी को अपने पक्ष में बोलने का मौका देता

है उसके लिए जितनी खुद की खुशी जरूरी है

उतनी ही बीवी की भी देखने के लिए यह बहुत

छोटे से सीन है लेकिन यह सब सिनेमा की

बदलती हुई सोच दिखाता है और यह बदलता

बदलाव अच्छा लगता

है पुष्पा के एक्शन सीन का निर्देशन भी

कमाल का है हर एक्शन सीन एक खास तरीके से

डिजाइन किया गया है इसे देखने के बाद ऐसा

लगता है कि इसे हम पहली बार देख रहे हैं

इस फिल्म को थिएटर में देखना एक शानदार

एक्सपीरियंस होगा 100 बात की एक बात

पुष्पा पहली एंट्री पर इतना बवाल नहीं

करता जितना दूसरी एंट्री पर करता है तो

थिएटर में पुष्पा की दूसरी एंट्री हो चुकी

है और उसने क्या बबाल किया यह जानने के

लिए आपको थिएटर की तरफ रुख करना होगा

दोस्तों कैसी लगी हमारी वीडियो कमेंट में

जरूर बताएं और मूवी देखने जरूर जाएं

क्योंकि मूवी ने इस टाइम पे बवाल मचा के

रखा है हां दोस्तों वीडियो में मजा आ गया

और मूवी में क्या धमाकेदार मजा आया

है नमस्कार दोस्तों दोस्तों स्वागत है

आपका आपके अपने चैनल द मिस्टीरियस

मॉर्निंग में दोस्तों 6 दिसंबर को पुष्प

टू रिलीज हो चुकी है और भाई क्या भौकाल

मचा के रखा है पुष्प टू ने आइए जानते हैं

उसका रिव्यू पुष्प टू ने बॉक्स ऑफिस पर

लगाई आग दूसरे दिन के कलेक्शन से मचा मचा

दिया गदर पुष्प टू के आने से बॉक्स ऑफिस

पर हड़क मच गया है रिलीज से पहले ही

शानदार बिजनेस करने वाले अल्लू अर्जुन और

रश्मी का मंदाना स्टार इस फिल्म को 100

करोड़ से ज्यादा की ओपनिंग

मिली अब फिल्म के दूसरे दिन का अर्ली

कलेक्शन भी सामने आ चुका है जो काफी

इंप्रेसिव है सभी भाषाओं में फिल्म ने

कितना-कितना कलेक्शन किया है चलिए देखते

हैं

आंकड़े इस वक्त हर किसी की जुबान पर बस

ढाई अक्षर का शब्द है पुष्पा टू जिसकी धमक

इतनी तेज है कि बॉक्स ऑफिस

थर्रा उठा है 5 सितंबर को सिनेमा घरों में

रिलीज हुई आइकन स्टार अल्लू अर्जुन की

फिल्म पुष्प टू ने पहले दिन तो धमाका ही

धमाका ही कर दिया लेकिन दूसरे दिन तो

बॉक्स ऑफिस सुकुमार के निर्देशन में बनी

इस फिल्म ने ववन डर हीला दिया हिंदी तमिल

तेलुगु मलयालम और कन्नड़ भाषा में रिलीज

हुई स्पेन इंडिया रिलीज फिल्म ने पहले दिन

तो 72 से 72 करोड़ से ओपनिंग की थी अब

मूवी के दूसरे दिन के अर्ली आंकड़े सामने

आ गए हैं जिसे देखकर यह साफ जाहिर है कि

पुष्पराज अभी कई बड़ी फिल्मों को धूल

चटाने वाला

है मूवी ने शुक्रवार को यानी कि दूसरे दिन

बॉक्स ऑफिस पर टोटल कितनी कमाई की चलिए यह

देखते हैं आंकड़े पुष्पा टू को रिलीज के

पहले बस का पूरा पूरा फायदा मिला है इस

फिल्म की रिलीज से पहले तो एडवांस बुकिंग

जोरो सोरो से चल रही थी लेकिन सिनेमा में

आने के बाद भी फैंस ने वेकेंट के टिकट

पहले से ही बुक कर लिए लगभग

सभी शहरों में थिएटर खचाखच भरे हुए

हैं बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाली पुष्प

टू को आईएमडीबी पर कितनी अ पर मिली सिर्फ

तनी रेटिंग जानकर लगेगा 440 वोल्ट का झटका

पहले दिन के मुकाबले शुक्रवार को मूवी के

बिजनेस में काफी फर्क आया लेकिन इसके

बावजूद घरेलू बॉक्स ऑफिस पर मूवी 300

करोड़ कमाने के बेहद नजदीक पहुंच चुकी

है टेक्निकल काम के अर्ली आंकड़ों से अली

आंकड़ों के मुताबिक अल्लू अर्जुन और

रश्मिका मंदाना की मूवी पुष्पा टू ने

दूसरे दिन शुक्रवार को टोटल 90 करोड़ के

आसपास बिजनेस किया जिसमें तेलुगु में

फिल्म ने दूसरे दिन दो 27 करोड़ और हिंदी

में 55 करोड़ तमिल में तमिल में 5 करोड़

कन्नड़ में 6 लाख और मलयालम में डेढ़

करोड़ का बिजनेस

किया पुष्पा पुष्पा टू पहले ही केजीएफ से

लेकर जबान एनिमल कल की 2898 जैसी फिल्मों

को को कमाई करने के मामले में पीछे छोड़

चुकी है दो दिन में 265 करोड़ कमाने वाली

यह मूवी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ के

क्लब में शामिल हो

जाएगी तेलुगु में तो यह फिल्म अच्छा

बिजनेस कर ही रही है लेकिन उससे ज्यादा

तेजी मूवी की कमाई हिंदी बेल्ट में हो रही

है जिससे अब दिवाली के मौके पर रिलीज हुई

दोनों बड़ी फिल्म फिल्मों भूलभुलैया थरी

और सिंघम पर खतरा मंडरा रहा है पहली

एंट्री पर इतना बवाल नहीं करता जितना

दूसरी एंट्री पर करता है यह पुष्पा टू का

ही डायलॉग है और ऐसी ही यह फिल्म भी है

पुष्पा फ्लावर नहीं फायर था इस बार वह

बोला मैं वाइल्ड फायर हूं और वह वाकई

वाइल्ड फायर निकला पुष्पा टू में एक चीज

कूटकूट कर भरी हुई है वो है एंटरटेनमेंट

एंटरटेनमेंट और

एंटरटेनमेंट इस फिल्म को देखते हुए दिमाग

को पुष्पा की वाइल्ड फायर में डाल दिया

जाए और घबराहट

मत पुष्पा भाऊ आपके दिमाग को कुछ नहीं

होने देंगे 3 घंटे 20 मिनट बाद दिमाग एकदम

कड़क हो होके निकलेगा आपको लॉजिक नहीं

लगाना है बस

एंटरटेनमेंट होना है और सिनेमा अगर लॉजिक

लगाने का मौका दिए बिना आपको लगभग साढ़े

घंटे एंट एंटरटेन करें तो व कमाल का

सिनेमा होता है और ऐसा सिनेमा इसलिए भी

जरूरी है जो को सिनेमा जिंदा रहे और चलता

रहे फलता फूलता

रहे अब पुष्पा लाल चंदन का बड़ा स्मगलर बन

चुका है और इस पूरे सिंडिकेट का मुखिया है

लेकिन आदमी आगे बढ़ता है तो दुश्मन बढ़ते

हैं यही जिंदगी में होता है और यह

फिल्म पुष्पा अपनी बीवी की हर बात मानता

है जब बीवी कहती है कि सीएम से मिलने जा

रहे हो तो फोटो क्लिक करा लेना और जब सीएम

एक स्मगलर के साथ फोटो नहीं खिंचवा तो

पुष्पा सीएम ही बदलने की प्लानिंग कर देता

है पुष्पा पुष्पा को इसके लिए 5000 करोड़

का लाल चंदन विष स्मगलर करना है

क्या होगा और पुष्पा का दुश्मन पुलिस वाला

भवर सिंह सखावत क्या करेगा थिएटर में जाकर

देखिए मजा

आएगा यह पूरी तरह से मास एंटरटेनर है एक

फ्रेम एंटरटेनिंग है लॉजिक के बारे में आप

सोचते नहीं जो पुष्पा करता है उस पर यकीन

हो जाता है एक के बाद एक कमाल के सीन आते

हैं बहुत बार सीटी अ ताली बजाने वाले सीन

आते हैं पुष्पा का स्व गजब का है पुष्पा

सॉरी बोल देता है लेकिन पुष्पा को झुकना

नहीं है और फिर जो होता है उसके बाद बवाल

कहते हैं यह फिल्म ऐसा सिनेमा है कि लोग

थिएटर जाने को मजबूर हो

जाएंगे फिल्म की लंबाई अखती नहीं है बल्कि

लगता है कि और कुछ भी होता तो मजा आता

यह सिनेमा हल में देखने वाला एक्सपीरियंस

है जाकर लीजिए क्योंकि ऐसे सिनेमा से ही

सिनेमा जिंदा है सिनेमा में मास और क्लास

दोनों होंगे तो सिनेमा चलेगा और यह मास है

अल्लू अर्जुन का काम बवाल है आपको यकीन

दिला देते हैं कि जो कर रहे हैं वो हो

सकता है और पुष्पा कर सकता है उनका सुमेग

कमाल का है वह हर फ्रेम में छाए हुए हैं 5

साल की उनकी मेहनत साफ दिखती है अल्लू

अर्जुन ने हीरोगिरी और हीरोपंती के मायने

बदल

दिए उन्होंने अब लकीर बड़ी कर दी है उनका

काम बहुत जबरदस्त है और अब किसी हीरो को

उनका स्वग मैच करने के लिए बहुत कुछ बड़ा

ही करना होगा रश्मि का मंदाना का कमाल भी

कमाल

है अल्लू अर्जुन जैसे हीरो के सामने

हीरोइन के करने को हीरोइन के करने को शायद

कुछ नहीं होता लेकिन रश्मिका आपकी छाप

छोड़ जाती है फहद फासिल ने भी जबरदस्त काम

किया है हीरो की हीरोगिरी तभी निकल कर आती

है जब बिलन जानदार हो और यह पुलिस वाले के

किरदार में भाद फासिल ने जान डाल दी है

जगदीश प्रताप भंडारी का काम अच्छा है जगपत

बाबू ने भी अच्छा काम किया है सौरभ सचदेव

ने भी कमाल का काम किया

है डायरेक्शन और

राइटिंग सुकुमार की राइटिंग और डायरेक्शन

दोनों शानदार है उन्होंने एक ही चीज पर

फोकस दिया है सुवेग और

एंटरटेनमेंट और वह कामयाब रहे वह जो जो

बनाना चाहते थे

उससे भटके नहीं यही उनकी कामयाबी

है एक के बाद एक कमाल के सीन डाले ताकि एक

सीन देखकर दर्शक हैरान हो और सांस ले उसके

पहले दूसरा कमाल का सीन आ जाए सबसे पहली

बात जो पुष्पा टू के बारे में जाननी जरूरी

है वह यह

है कोई महान फिल्म नहीं है एक आम मुजिया

मसाला फिल्म जैसी एक्शन फिल्म है और चूंकि

एक हिट अ फिल्म की सीक्वल है लिहाजा इसकी

अपनी ब्रांड वैल्यू दर्शकों को सिनेमा

घरों तक खींच लाने में सफल रहा किसी

सुपरहिट का सीक्वल बनाना आसान नहीं होता

खास तौर से तब जब कहने को कोई खास कहानी

ना बची हो तेलुगु सिनेमा के दिग्गज

निर्देशक सुकुमार और निर्माता अल्लू

अर्जुन के अ अल्लू अरविंद के बेटे अल्लू

अर्जुन की फिल्म पुष्प टू की मेकिंग आसान

नहीं

रही इस फिल्म का मामला मले आलम फिल्म

अभिनेता फहद फासिल की अ तारीखों के चलते

बार-बार लटक लटका है फिल्म पुष्पा थ्री द

रैंपेज के ऐलान के साथ खत्म होती है और इस

ऐलान से पहले ही निर्देशक सुकुमार ने

फिल्म की सारी कमजोरी कमजोर कड़िया किनारे

लगा

दी पुष्पराज ने पिछली फिल्म पुष्पा पुष्पा

द राइज में नारा लगाया था मैं झुकेगा नहीं

जबकि उसका ऐलान है मैं हरगिज नहीं

झुकेगा बीवी उसकी मां बनने वाली है काली

मां से वह एक बेटी चाहता है ताकि वह अपने

ससुराल जाए तो उसे वहां का कुल नाम मिल

सके

बचपन से लेकर पुष्पा इसी कुल नाम को लेकर

ही तो बार-बार दुखी होता रहा

है पुष्पा की आवाज इस बार थोड़ा थोड़ी

कड़क है अभिनेता सीरियस तलपड़े ने फिर एक

बार पुष्पराज के किरदार को पर्दे पर खिला

दिया

है फ्लावर से वाइल्ड फायर बनने की कोशिश

करते पुष्पराज की कहानी यहां तक यहां

थोड़ा पीछे से शुरू होती

है छलांग लगाने के लिए वह पंजे भी सिकता

नजर आता है लेकिन बचपन का कोमल पुष्पा

बड़ा

होकर गर्द पुष्पराज कैसे बन गया इसकी

कहानी जबरदस्त है श्रीमती पुष्पराज याने

की श्रीवल्ली का नैन मटक्का यहां भी जारी

है अपने सामी पर वह फिदा है पूजा पाठ में

भी नंबर वन है खास खाना हर बार नॉनवेज ही

बनाती है श्रीवल्ली को सुकुमार ने घरेलू ब

भी बनाया है और फिल्म में समानता रूथ

प्रभु की कमी पूरी करने के लिए इस बार

श्रीलीला को आइटम गल बनाया

है समानता जैसा ना तो नमक उनमें है और ना

ही उन जैसी चपलता मामला किस किस में कसक

भरकर लाल चंदन को लाल चंदन हो गया फिल्म

की सबसे कमजोर कड़ी है गाना गाना ही है

अल्लू अर्जुन को प्रभु प्रभु जी मानकर

चंदन घिसते रहे

लेखक निर्देशक सुकुमार को लगता रहा कि

फिल्म पुष्पा बन की सफलता का श्रय उन्हें

उतना ही मिल मिला जितना अल्लू अर्जुन और

रश्मिका को मिला रश्मिका को तो सीधे हिंदी

सिनेमा के हीरो नंबर वन रणवीर कपूर की

हीरोइन बनने में कामयाब

रही अल्लू अर्जुन की कहानी इस बार बचपन से

लेकर बुजुर्ग यात की दहलीज पर आ खड़े हुए

हैं पुष्पराज की कहानी और इस बार वाकई में

उनके लिए मामला आसान नहीं है रावड़ी बाय

पुष्पा और लीडर पुष्पा के बीच की जो लकीर

इस कहानी में फाद फासिल के आने से आई है

उसे पार करने में इस बार यह दोनों जिया ले

कमाल भरे कर दिए गए हो लेकिन भव सिंह

सखावत का किरदार यहां कहानी में कुछ खास

करिश्मा कर नहीं

पाता सुकुमार को भी समाज आ गया कि यह

किरदार उनके लिए अब एसेट नहीं लायबिलिटी

है तो लिहाजा उन्होंने वही किया जो ऐसे

में किसी भी काबल निर्देशक को करना चाहिए

रश्मी का मंदाना पूरी फिल्म में पुष्पराज

के आगे पीछे डोलती शिवल्ली बनी है अदाकारी

दिखाने को उन्हें सिर्फ एक सीन मिला और जब

उस सीन सीन में उनकी एक चोट शो सुनार पर

भारी

पड़ी फिल्म पुष्पा द रूल यानी पुष्पा टू

की कहानी को जिस तरह सुकुमार पिछली बार

विदेश से समंदर के रास्ते रेखा चित्रों के

जरिए लाल चंदन के जंगलों तक लाए थे वैसा

ही रिवर्स स्विंग इस बार की कहानी में भी

है जापान के किसी बंदरगाह से शुरू होने

वाली यह फिल्म चूंकि 3 घंटे के करीब लंबी

है लिहाजा फिल्म की कहानी का विस्तार काफी

लंबा है इस विस्तार में अपने किरदारों से

सुकुमार को किसी जिस मदद की उम्मीद रही

होगी वह उन्हें

मिली जगदीश भंडारी जगपति बाबू राम रमेश और

ब्रह्मा जी सब अपने अपने किरदारों में

मुस्ते दिखते

हैं कहानी पिछली बार श्रीवल्ली का दिल जीत

दिल जीतने की थी और इस कहानी है अपनी मां

को अपने ही घर में वह सम्मान दिलाने की

जिसके लिए पुष्पराज बचपन से ही त्रास झलता

रहा इस बार की चोपड़ में पुष्पा और भवर

सिंह ने तो पासे फेंके ही कुछ पासे उस

भ्रष्ट राजनीति के भी हैं जिनको पुष्पा

अपने बाएं हाथ का खेल समझता

है फिल्म को देखने आ दर्शकों को रश्मिका

और श्रीवल्ली दोनों से अलग-अलग आस रही

होगी रश्मिका को रश्मिका के भीतर एक

गुस्सा है यह गुस्सा उनके अभिनय में

किरदार किरदार की जरूरत के हिसाब से मौका

मिलते ही बाहर निकलता है लेकिन इस गुस्से

को प्रकट करने के नए तरीके उन्हें सीखने

होंगे हां फिलिंग वाला फिलिंग्स वाला पूरा

सीक्वेंस उनका दमदार है

लेकिन उनके किरदार में जात्रा वाले दृश्य

से पहले ज्यादा गहराई नहीं दिखी यात्रा

वाला दृश्य उसके बाद लगातार आने वाले दो

गाने और उसके बाद काली के रूप में अल्लू

अर्जुन का तांडव नृत्य फिल्म का सबसे सफल

सीक्वेंस है और इसके

बाद भतीजी को बचाने निकल निकले चाचा का

क्लाइमैक्स वाला एक्शन भी तालियां बटोल ले

गया दर्शकों को श्रीवल्ली में समानता जैसी

किस किस पूरी होने की कसक जगी थी लेकिन

उनका किस किस सांग ज्यादा जमा

नहीं फिल्म की तकने की टीम में संगीतकार

श्रीदेवी प्रसाद होकर कॉन्फिडेंस का शिकार

साफ नजर आते हैं उनकी हिंदी पर कमजोर पकड़

भी इस बार उजागर हो गई

फिल्म बनाने वालों को भी डीएसपी की यह

कमजोरी रिलीज से पहले ही समझ आ गई इसलिए

फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर में से एस थमन

और सैम की एस की भी मदद ली

गई फिल्म की तकनीकी टीम में जिस शख्स एक

शख्स की तारीफ करने का मन बार-बार होता है

वह पोलैंड के मूल निवासी सिनेमेट ग्राफ का

कुआ ब्रो जैक मिरोस्लाव फिल्म का

प्रोडक्शन डिजाइन काफी रंगीन है प्रीत शल

सिंह ने अल्लू अर्जुन के गेटअप पर काबिले

तारीफ काम किया

है नवे नूली का संपादन बेहतर होता है होता

तो फिल्म कम से कम 20 मिनट कम हो सकती थी

साउथ सिनेमा में इस साल हनुमान ने जिस

होशियारी से सिनेमा को सादा उसे नाग

अस्मिन कल की 2898 में आगे बढ़ाया और अब आ

गया है पुष्पा राज अपने इलाके और बॉक्स

ऑफिस पर रूल करने के लिए अल्लू अर्जुन की

फिल्म पुष्प टू थिएटर में रिलीज हो चुकी

है इस फिल्म में रश्मिका मंदाना उनकी

पत्नी का किरदार निभा रही हैं अल्लू

अर्जुन की पुष्पा टू कैसी है क्या है इसे

थिएटर में जाकर देखना चाहिए यह जानने के

लिए हमारे रिव्यू को और आगे

जाने पुष्पा अल्लू अर्जुन की वो फिल्म थी

जिसे देखने के बाद राजेश खन्ना के पुष्पा

आई हेट टेयर जैसे ओवर ग्रीन डायलॉग को भी

हमने भुला दिया इस फिल्म के रिलीज होने के

बाद से अब तक भारत का बच्चा बच्चा पुष्पा

का नाम समझकर फ्लावर समझे क्या फायर है

मैं जैसे यह डायलॉग बड़े स्वक से ही बोल

बोलता हुआ नजर आता है 3 साल पहले रिलीज

हुई पुष्पा द राइट ने अपनी सफलता से

बॉलीवुड को बहुत बड़ा सबक सिखाया

था इस फिल्म ने आंख बंद कर हॉलीवुड ट्रेड

फॉलो करने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को

बताया था कि वह आम लोगों के लिए फिल्में

बनाना भूल गए हैं पुष्प द राइज ने मुझे उस

एंग्री मैंने हीरो से मिलाया जो हिंदी

फिल्मों से गुम हो गए थे अब जैसे पुष्पा द

राइस पसंद आई हो उसका पुष्प द रूल देखना

तो बनता है फिर क्या था यह फिल्म भी देख

डाली और इस फिल्म ने मुझे निराश बिल्कुल

नहीं

किया कहानी निर्देशन सिनेमेट ग्राफी और

म्यूजिक के मामले में अलग पुष्पा द राइज

फायर थी तो पुष्पा द रूल वर्ल्ड फायर है

रश्मिका मंदाना अच्छी है लेकिन पूरी फिल्म

में अल्लू अर्जुन से नजर नहीं हटती साउथ

की फिल्मों से मुझे अक्सर यह शिकायत रहती

है कि उन फिल्मों में महिला का सम्मान

नहीं किया जाता लेकिन अल्लू अर्जुन और

सुकुमार ने मुझे सरप्राइज किया उन दिनों

ने इस फिल्म में कुछ ऐसा कर दिया कि जिसे

करना किसी भी भी सुपरस्टार के लिए आसान

नहीं

होता पर अल्लू अर्जुन ने वह हिम्मत दिखाई

इस फिल्म में जिस तरह से महिला का सम्मान

किया गया मुझे लगता है कि हर साउथ के

फिल्म मेकर्स को इससे सीखना चाहिए यह एक

शानदार फिल्म है और इस फिल्म के साथ अल्लू

अर्जुन ने इंडस्ट्री में एक नए ट्रेंड की

शुरुआत की है आइए अब इस फिल्म के बारे में

विस्तार से बातें करते हैं

रक्त चंदन यानी कि लाल चंदन की तस्करी

करने वाले पुष्पराज की कहानी आगे बढ़ती है

अब पुष्पराज व मजदूर नहीं रहा वह बड़ा

आदमी बन गया है लेकिन आज भी शिवल्ली उसे

अपनी उंगलियों पर न चाती है अब पुष्पा के

एक इशारे पर राज का सीएम ही बदलता है

लेकिन उसके इस बिजनेस को लगा एसपी भवर

सिंह सखावत नाम का ग्रहण अब कायम है

पुष्पा आगे आगे और सखावत उसके पीछे पीछे

क्या इन दोनों के बीच की लड़ाई खत्म होगी

पुष्पा की जिंदगी में और क्या मोड़ आएंगे

पुष्पा के उस परिवार का क्या होगा जिसने

पुष्पराज से उसका नाम छीन लिया इन सारे

सवालों के जवाब जानने के लिए आपको थिएटर

में जाकर यह फिल्म देखनी

होगी जब रिव्यू करने के लिए मैं फिल्म देख

देखता हूं तब अक्सर मोबाइल पर नोटपैड खुला

रहता है फिल्म में क्या टर इंटरेस्टिंग है

कौन सा दिलचस्प डायलॉग बोला गया है यह मैं

अक्सर इस नोटपैड में लिख लेता हूं लेकिन

अल्लू अर्जुन की पुष्पा एक ऐसी फिल्म है

जिसे देखते हुए मैं पूरी तरह से भूल गया

कि मुझे नोटपैड पर इससे जुड़ी बातें लिखनी

होंगी 3 घंटे 20 मिनट की यह फिल्म फिल्म

पूरी तरह से शुरुआत से लेकर अंत तक आपको

कनेक्ट करके रखती है एक पल के लिए भी आपको

यह महसूस नहीं होता कि आप बोर हो रहे हो

और इस बार का श्रेय फिल्म निर्देशक

सुकुमार को जाता

है जिस तरह से पुष्पा में अल्लू अर्जुन और

रश्मि का मंदाना के बीच एक बहुत ही

खूबसूरत केमिस्ट्री नजर आती है उसी उससे

भी बेहतरीन केमिस्ट्री अल्लू अर्जुन और

सुकुमार के बीच है है फर्क सिर्फ इतना है

कि इसे हम देख तो नहीं सकते लेकिन फिर भी

फिल्म देखते हुए हम इसे महसूस कर सकते हैं

कि इस फिल्म के हर फ्रेम में एक नई सोच

दिखाई देती

है और यह नई सोच पुष्पा टू के हर सीन को

खास बना देती है उदाहरण के तौर पर बात की

जाए तो फिल्म में एक सीन है जहां पुष्पा

के 200 से ज्यादा साथियों को सखावत पकड़

लेता है अब हम उम्मीद करते हैं कि सिंघम

अगेन में जिस तरह से अल्लू अर्जुन कपूर

पुलिस थाने में आए

थे और उन्हें सभी पुलिस वालों को मार

गिराकर अपने साथियों को छुड़ाया था ठीक

वैसे ही पुष्पा भी करेगा लेकिन वो जो कर

करता है वह आपके सभी सोच कभी नहीं सोच

पाएंगे

कैमरा के पीछे बैठा हुआ निर्देशक और उसके

सामने परफॉर्म करने वाला एक्टर इन दोनों

के बीच यह कमाल की केमिस्ट्री बनाने का

आधा श्रेय हमें अल्लू अर्जुन को भी देना

होगा आपने कभी सोचा था कि अपना एक कांदा

नीचे झुकाकर चलने वाले दाढ़ी से लेकर सिर

पर तक जिसके बाल बड़े हो जो चमकीले से

अजीब रंग के कपड़े पहनता हो ऐसे किरदार को

पूरा देश पसंद करने लगेगा लेकिन अल्लू

अर्जुन ने वो कमाल करके दिखाया है अल्लू

अर्जुन एक मास हीरो हैं असल जिंदगी में हो

या फिल्मों में हमेशा उन्हें एक स्टाइलिश

लुक में देखा गया है लेकिन पुष्पा में

उन्होंने अपनी इमेज या लुक की परवाना करते

हुए इस

अ अपने परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया

है पुष्पा टू अल्लू अर्जुन के करियर की अब

तक की सबसे बेस्ट फिल्म है फिल्म के

ट्रेलर और पोस्टर में उन्हें साड़ी पहनकर

काली मां के अवतार में देखा गया था यह लुक

सिर्फ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के

लिए नहीं इसके पीछे एक क्रांतिकारी सोच है

और साड़ी पहनकर अल्लू अर्जुन ने जो

परफॉर्म दी है उसे यह फिल्म देखने वाले

लंबे समय तक भूल नहीं

पाएंगे रोहित शेट्टी की गोलमाल में अरद

वारसी अजदगन ने भी औरत औरतों के कपड़े

पहने थे रितेश देशमुख और शेफ अली खान ने

भी अपनी फिल्म में महिला बनकर सीन परफॉर्म

किया था लेकिन अक्सर हिंदी फिल्मों में

एक्टर का लड़की बनना कॉमेडी के लिए

इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अल्लू अर्जुन

ने साड़ी पहनकर जो सीन दिया है उसे देखते

हुए लग रहा है कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री

में नया ट्रेंड शुरू कर दिया है श्रीवल्ली

के किरदार में रश्म का मंदाना ने जान डाल

दी है पुष्पा के पार्ट वन में उनके होने

ना होने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था

लेकिन पुष्प टू में रश्मिका के रश्मिका यह

बता देती है कि उनका इस फिल्म में होना

क्यों जरूरी है फहद फासिल भी अच्छे हैं

लेकिन इस बार उनके किरदार को कॉमेडी का

तड़का का लगाकर पेश कर दिया था पुष्पा टू

की और इस खास बात है इस फिल्म की डबिंग और

बैकग्राउंड म्यूजिक सीरियस तलपड़े की आवाज

पुष्पा के किरदार को पूरा न्याय देती है

फिल्म के गाने याद नहीं रहते लेकिन

बैकग्राउंड म्यूजिक पर खास मेहनत की गई है

जहां बैकग्राउंड में हिंदी म्यूजिक की

जरूरत थी वहां हिंदी म्यूजिक लगाया गया है

अक्सर पेन इंडिया फिल्म बनाने में

दिलचस्पी रखने वा साउथ के मेकर्स इस फोटो

अ साउथ के मेकर्स इस छोटी सी बात को भूल

जाते हैं अ पुष्पा बन की कहानी कुछ लोगों

को पसंद नहीं आई थी पुष्पा के मेकर्स ने

यह फीडबैक सीरियसली लिया और उन्होंने अपनी

कहानी पर काम किया पुष्प टू की कहानी पर

खूब मेहनत की गई पूरी कहानी में एक सीन भी

ऐसा नहीं है जहां हमें लगता है कि पुष्पा

गलत रहा है फिल्म में हिंसा भी है लेकिन

संदीप रेड्डी बांगा और रणवीर कपूर के

एनिमल की तरह बिना सोचे समझे की किए जाने

वाली हिंसा इस फिल्म में नहीं

है पुष्पा टू में वायलेंस तो है लेकिन यह

वायलेंस अपने आप को जस्टिफाई करता है जहां

एनिमल का वायलेंस देख देख आंखें बंद करने

का मन करता है वहां कुछ

पुष्पा की हिंसा देखकर तालियां बजाते

हुए कहते हैं कि कि और मारो इस फिल्म में

पुष्पा के बारे में जो बात सबसे अच्छी लगी

वह है उसकी पत्नी और बाकी महिलाओं के लिए

सम्मान पुस्पा टू का यह हीरो महिलाओं के

सम्मान सामने आसु बहाने को अपनी कमजोरी

नहीं समझता कभी-कभी वो फूट फूट कर अ फूट

फूट कर पर कर अपनी बीवी को अपने पक्ष में

बोलने का मौका देता

है उसके लिए जितनी खुद की खुशी जरूरी है

उतनी ही बीवी की भी देखने के लिए यह बहुत

छोटे से सीन है लेकिन यह सा सिनेमा की

बदलती हुई सोच दिखाता है और यह बदलता

बदलाव अच्छा लगता

है पुष्पा के एक्शन सीन का निर्देशन भी

कमाल का है हर एक्शन सीन एक खास तरीके से

डिजाइन किया गया है इसे देखने के बाद ऐसा

लगता है कि इसे हम पहली बार देख रहे हैं

इस फिल्म को थिएटर में देखना एक शानदार

एक्सपीरियंस होगा स बात की एक बात पुष्पा

पहली एंट्री पर इतना बवाल नहीं करता जितना

दूसरी एंट्री पर करता है तो थिएटर में

पुष्पा की दूसरी एंट्री हो चुकी है और

उसने क्या बवाल किया यह जानने के लिए आपको

थिएटर की तरफ रुख करना होगा दोस्तों कैसी

लगी हमारी वीडियो कमेंट में जरूर बताएं और

मूवी देखने जरूर जाएं क्योंकि मूवी ने इस

टाइम पे बवाल मचा के रखा है हां दोस्तों

वीडियो में मजा आ गया और मूवी में क्या

धमाकेदार मजा आया

है नमस्कार दोस्तों दोस्तों स्वागत है

आपका आपके अपने चैनल द मिस्टीरियस

मॉर्निंग में दोस्तों 6 दिसंबर को पुष्प

टू रिलीज हो चुकी है और भाई क्या भौकाल

मचा के रखा है पुष्प टू ने आइए जानते हैं

उसका रिव्यू पुष्पा टू ने बॉक्स ऑफिस पर

लगाई आग दूसरे दिन के कलेक्शन से मचा मचा

दिया गदर पुष्प टू के आने से बॉक्स ऑफिस

पर हड़क मच गया है रिलीज से पहले ही

शानदार बिजनेस करने वाले अल्लू अर्जुन और

रश्मी का मंदाना स्टार इस फिल्म को 100

करोड़ से ज्यादा की ओपनिंग

मिली अब फिल्म के दूसरे दिन का अर्ली

कलेक्शन भी सामने आ चुका है जो काफी

इंप्रेसिव है सभी भाषाओं में फिल्म ने

कितना किना कलेक्शन किया है चलिए देखते

हैं

आंकड़े इस वक्त हर किसी की जुबान पर बस

ढाई अक्षर का शब्द है पुष्पा टू जिसकी धमक

इतनी तेज है कि बॉक्स ऑफिस थर्र उठा है 5

सितंबर को सिनेमा घरों में रिलीज हुई आइकन

स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा टू ने

पहले दिन तो धमाका ही धमाका ही कर दिया

लेकिन दूसरे दिन तो बॉक्स ऑफिस सुकुमार के

निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बवंडर हीला

दिया हिंदी तमिल तेलुगु मलयालम और कन्नड़

भाषा में रिलीज हुई स्पेन इंडिया रिलीज

फिल्म ने पहले दिन तो 72 से 72 करोड़ से

ओपनिंग की थी अब मूवी के दूसरे दिन के

अरली आंकड़े सामने आ गए हैं जिसे देखकर यह

साफ जाहिर है कि पुष्पराज अभी कई बड़ी

फिल्मों को धूल चटाने वाला

है मूवी ने शुक्रवार को यानी कि दूसरे दिन

बॉक्स ऑफिस पर टोटल कितनी कमाई की चलिए यह

देखते हैं आंकड़े पुष्प टू को रिलीज के

पहले बस का पूरा-पूरा फायदा मिला है इस

फिल्म की रिलीज से पहले तो एडवांस बुकिंग

जोरों सोरों से चल रही थी लेकिन सिनेमा

में आने के बाद भी फैंस ने वेकेंट के टिकट

पहले से ही बुक कर लिए लगभग अ सभी शहरों

में थिएटर खचाखच भरे हुए

हैं बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाली पुष्प

टू को आईएमडीबी पर कितनी अ कित पर मिली

सिर्फ इतनी रेटिंग जानकर लगेगा 440 वोल्ट

का झटका पहले दिन के मुकाबले शुक्रवार को

मूवी के बिजनेस में काफी फर्क आया लेकिन

इसके बावजूद

घरेलू बॉक्स ऑफिस पर मूवी 300 करोड़ कमाने

के बेहद नजदीक पहुंच चुकी

है टेक्निकल काम के अर्ली आंकड़ों से

अर्ली आंकड़ों के मुताबिक अल्लू अर्जुन और

रश्मि का मंदाना की मूवी पुष्पा टू ने

दूसरे दिन शुक्रवार को टोटल 90 करोड़ के

आसपास बिजनेस किया जिसमें तेलुगु में

फिल्म ने दूसरे दिन दो 27 करोड़ और हिंदी

में 55 करोड़ तमिल में तमिल में 5 करोड़

कन्नड़ में 6 लाख और मलयालम में डेढ़

करोड़ का बिजनेस

किया पुष्पा पुष्पा टू पहले ही केजीएफ से

लेकर जवान एनिमल कल की 2898 जैसी फिल्मों

को को कमाई करने के मामले में फ पीछे छोड़

चुकी है दो दिन में 265 करोड़ कमाने वाली

यह मूवी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ के

क्लब में शामिल हो जाएगी

तेलुगु में तो यह फिल्म अच्छा बिजनेस कर

ही रही है लेकिन उससे ज्यादा तेजी मूवी की

कमाई हिंदी बेल्ट में हो रही है जिससे अब

दिवाली के मौके पर रिलीज हुई दोनों बड़ी

फिल्म फिल्मों भुलभुलैया थ और सिंघम पर

खतरा मंडरा रहा है पहली एंट्री पर इतना

बवाल नहीं करता जितना दूसरी एंट्री पर

करता है यह पुष्पा टू का ही डायलॉग है और

ऐसी ही यह फिल्म भी है पुष्पा फ्लावर नहीं

फायर था इस बार वह बोला मैं वाइल्ड फायर

हूं और वह वाकई वाइल्ड फायर निकला पुष्पा

टू में एक चीज कूटकूट कर भरी हुई है वोह

है एंटरटेनमेंट एंटरटेनमेंट और

एंटरटेनमेंट इस फिल्म को देखते हुए दिमाग

को पुष्पा की वाइल्ड फायर में डाल दिया

जाए और घबराहट

मत पुष्पा भाऊ आपके दिमाग को कुछ नहीं

होने देंगे 3 घंटे 20 मिनट बाद दिमाग एकदम

कड़क होके निकलेगा आपको लॉजिक नहीं लगाना

है बस

एंटरटेनमेंट होना है और सिनेमा अगर लॉजिक

लगाने का मौका दिए बिना आपको लगभग साढ़े

घंटे एंटरटेन करें तो वो कमाल का सिनेमा

होता है और ऐसा सिनेमा इसलिए भी जरूरी है

जो को सिनेमा जिंदा रहे और चलता रहे फलता

फूलता

रहे अब पुष्पा लाल चंदन का बड़ा स्मगलर बन

चुका है और इस पूरे सिंडिकेट का मुखिया है

लेकिन आदमी आगे बढ़ता है तो दुश्मन बढ़ते

हैं यही जिंदगी में होता है और यही फिल्म

पुष्पा अपनी बीवी की हर बात मानता है जब

बीवी कहती है कि सीएम से मिलने जा रहे हो

तो फोटो क्लिक करा लेना और और जब सीएम एक

स्मगलर के साथ फोटो नहीं खिंचवा आता तो

पुष्पा सीएम ही बदलने की प्लानिंग कर देता

है पुष्पा पुष्पा को इसके लिए 5000 करोड़

का लाल चंदन

बजेस स्मगलर करना

है क्या होगा और पुष्पा का दुश्मन पुलिस

वाला भवर सिंह सखावत क्या करेगा थिएटर में

जाकर देखिए मजा

आएगा यह पूरी तरह से मास एंटरटेनर है एक

फ्रेम एंटरटेनिंग है लॉजिक के बारे में आप

सोचते नहीं जो पुष्पा करता है उस पर यकीन

हो जाता है एक के बाद एक कमाल के सीन आते

हैं बहुत बार सीटी ताली बजाने वाले सीन

आते हैं पुष्पा का स्वय गजब का है पुष्पा

सॉरी बोल देता है लेकिन पुष्पा को झुकना

नहीं है और फिर जो होता है उसके बाद बवाल

कहते हैं यह फिल्म ऐसा सिनेमा है कि लोग

थिएटर जाने को मजबूर हो

जाएंगे फिल्म की लंबाई अखती नहीं है बल्कि

लगता है कि और कुछ भी होता तो मजा आता यह

सिनेमा हाल में देखने वाला एक्सपीरियंस है

जाकर लीजिए क्योंकि ऐसे सिनेमा से ही

सिनेमा जिंदा है सिनेमा में में मांस और

क्लास दोनों होंगे तो सिनेमा चलेगा और यह

मांस है अल्लू अर्जुन का काम बवाल है आपको

यकीन दिला देते हैं कि जो कर रहे हैं वह

हो सकता है और पुष्पा कर सकता है उनका

सुमेग कमाल का है वह हर फ्रेम में छाए हुए

हैं 5 साल की उनकी मेहनत साफ दिखती है

अल्लू अर्जुन ने हीरो गिरी और हीरो पंथ के

मायने बदल

दिए उन्होंने अब लकीर बड़ी कर दी है उनका

काम बहुत जबरदस्त है और अब किसी हीरो को

उनका स्वग मैच करने के लिए बहुत कुछ बड़ा

ही करना होगा रश्मिका मंदाना का कमाल भी

कमाल

है अल्लू अर्जुन जैसे हीरो के सामने

हीरोइन के करने को हीरोइन के करने को शायद

कुछ नहीं होता लेकिन रश्मिका आपकी छाप

छोड़ जाती है फाद फासिल ने भी जबरदस्त काम

किया है हीरो की हीरोगिरी तभी निकल कर आती

है जब बिलन जानदार हो और यह पुलिस वाले के

किरदार में पाद फासल ने जान डाल दी

है जगदीश प्रताप भंडारी का काम अच्छा है

जगपत बाबू ने भी अच्छा काम किया है सौरभ

सचदेव ने भी कमाल का का काम किया

है डायरेक्शन और

राइटिंग सुकुमार की राइटिंग और डायरेक्शन

दोनों शानदार है उन्होंने एक ही चीज पर

फोकस दिया है सुवेग और

एंटरटेनमेंट और वह कामयाब रहे वो जो बनाना

चाहते थे

उससे भटके नहीं यही उनकी कामयाबी है एक के

बाद एक कमाल के सीन डाले ताकि एक सीन

देखकर दर्शक हैरान हो और सांस ले उसके

पहले दूसरा कमाल का सीन आ

जाए सबसे पहली बात जो पुष्पा टू के बारे

में जाननी जरूरी है वह यह

है कोई महान फिल्म नहीं है एक आम मुजिया

मसाला फिल्म जैसी एक्शन फिल्म है और चूंकि

एक हिट फिल्म की सीक्वल है लिहाजा इसकी

अपनी ब्रांड वैल्यू दर्शकों को सिनेमा

घरों तक खींच लाने में सफल रहा किसी

सुपरहिट का सीक्वल बनाना आसान नहीं होता

खास तौर से तब जब कहने को कोई खास कहानी

ना बची हो तेलुगु सिनेमा के दिग्गज

निर्देशक सुकुमार और निर्माता अल्लू

अर्जुन के अल्लू अरविंद के बेटे अल्लू

अर्जुन की फिल्म पुष्प टू की मेकिंग आसान

नहीं

रही इस फिल्म का मामला मले आलम फिल्म

अभिनेता फहद फासिल की तारीखों के चलते

बार-बार लटक लटका है फिल्म पुष्पा थ्री द

रैंपेज के ऐलान के साथ खत्म होती है और इस

ऐलान से पहले ही निर्देशक सुकुमार ने

फिल्म की सारी कमजोरी कमजोर कड़ियां

किनारे लगा

दी पुष्पराज ने पिछली फिल्म पुष्पा पुष्पा

द राइज में नारा लगा था मैं झुकेगा नहीं

जबकि उसका ऐलान है मैं हरगिज नहीं

झुकेगा बीवी उसकी मां बनने वाली है काली

मां से वह एक बेटी चाहता है ताकि वह अपने

ससुराल जाए तो उसे वहां का कुल नाम मिल

सके बचपन से लेकर पुष्पा इसी कुल नाम को

लेकर ही तो बार-बार दुखी होता रहा

है पुष्पा की आवाज इस बार थोड़ा थोड़ी

कड़क है अभिनेता सीरियस तलपड़े ने फिर एक

बार पुष्पराज के किरदार को पर्दे पर खिला

दिया

है फ्लावर से वाइल्ड फायर बनने की कोशिश

करते पुष्पराज की कहानी यहां तक यहां

थोड़ा पीछे से शुरू होती

है छलांग लगाने के लिए वह पंजे भी सिलता

नजर आता है है लेकिन बचपन का कोमल पुष्पा

बड़ा

होकर गर्द पराज कैसे बन गया इसकी कहानी

जबरदस्त है श्रीमती पुष्पराज यानी की

श्रीवल्ली का नैन मटक्का यहां भी जारी है

अपने सामी पर वह फिदा है पूजा पाठ में भी

नंबर वन है खास खाना हर बार नॉनवेज ही

बनाती है श्रीवल्ली को शिवकुमार ने घरेलू

बी बनाया है और फिल्म में सनथा रूत प्रभु

की कमी पूरी करने के लिए इस बार श्री लीला

को आइटम गल बनाया

है समानता जैसा ना तो नमक उनमें है और ना

ही उन जैसी चपलता मामला किस किस में कसक

भरकर लाल चंदन को लाल चंदन हो गया

फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है गाना गाना ही

है अल्लू अर्जुन को प्रभु प्रभु जी मानकर

चंदन घिसते रहे

लेखक निर्देशक सुकुमार को लगता रहा कि

फिल्म पुष्पा बन की सफलता का श्रे उन्हें

उतना ही मिल मिला जितना अल्लू अर्जुन और

रश्मिका को मिला रश्मिका को तो सीधे हिंदी

सिनेमा के हीरो नंबर वन रणवीर कपूर की

हीरोइन बनने में कामयाब

रही अल्लू अर्जुन की कहानी इस बार बचपन से

लेकर बुजुर्ग यात की दहलीज पर आ खड़े हुए

हैं पुष्पराज की कहानी और इस बार वाकई में

उनके लिए मामला आसान नहीं है रावड़ी बाय

पुष्पा और लीडर पुष्पा के बीच की जो लकीर

इस कहानी में फाद फासिल के आने से आई है

उसे पार करने में इस बार यह दोनों जिया ले

कमाल भरे कर दिए गए हो लेकिन भवर सिंह

सखावत का किरदार यहां कहानी में कुछ खास

करिश्मा कर नहीं

पाता सुकुमार को भी समझ आ गया कि यह

किरदार उनके लिए अब असट नहीं लायबिलिटी है

तो लिहाजा उन्होंने वहीं किया जो ऐसे में

किसी भी काबल निर्देशक को करना चाहिए रश्म

का मंदाना पूरी फिल्म में पुष्पराज के आगे

पीछे डोलती शिवल्ली बनी है अदाकारी दिखाने

को उन्हें सिर्फ एक सीन मिला और जब उस सीन

सीन में उनकी एक चोट सो सुनार पर भारी

पड़ी फिल्म पुष्पा द रूल यानी पुष्पा टू

की कहानी को जिस तरह कुमार पिछली बार

विदेश से समंदर के रास्ते रेखा चित्रों के

जरिए लाल चंदन के जंगलों तक लाए थे वैसा

ही रिवर्स स्विंग इस बार की कहानी में भी

है जापान के किसी बंदरगाह से शुरू होने

वाली यह फिल्म चूंकि 3 घंटे के करीब लंबी

है लिहाजा फिल्म की कहानी का विस्तार काफी

लंबा है इस विस्तार में अपने किरदारों से

सुकुमार को किसी जिस मदद की उम्मीद रही

होगी वो उन्हें

मिली जगदीश भंडारी जगपति बाबू राम रमेश और

ब्रह्मा जी सब अपने अपने किरदारों में

मुस्ते दिखते

हैं कहानी पिछली बार श्रीवल्ली का दिल जीत

दिल जीतने की थी और इस बार कहानी है अपनी

मां को अपने ही घर में व सम्मान दिलाने की

जिसके लिए पुष्पराज बचपन से ही त्रास झलता

रहा

इस बार की चोपड़ में पुष्पा और भवर सिंह

ने तो पासे फेंके ही कुछ पासे उस भ्रष्ट

राजनीति के भी हैं जिनको पुष्पा अपने बाएं

हाथ का खेल समझता

है फिल्म को देखने आए दर्शकों को रश्मिका

और श्रीवल्ली दोनों से अलग-अलग आस रही

होगी रश्मिका को रश्मिका के भीतर एक

गुस्सा है यह गुस्सा उनके अभिनय में

किरदार किरदार की जरूरत के हिसाब से मौका

मिलते ही बाहर निकलता

है लेकिन इस गुस्से को प्रकट करने के नए

तरीके उन्हें सीखने होंगे हां फिसिंग वाला

फीलिंग्लेस उनका दमदार है लेकिन उनके

किरदार में यात्रा वाले दृश्य से पहले

ज्यादा गहराई नहीं दिखी यात्रा वाला दृश्य

उसके बाद लगातार आने वाले दो गाने और उसके

बाद काली के रूप में अल्लू अर्जुन का

तांडव नृत्य फिल्म का सबसे सफल सीक्वेंस

है और इसके

बाद भतीजी को बचाने निकल निकले चाचा का

क्लाइमैक्स वाला एक्शन भी तालियां बटो ले

गया दर्शकों को श्रीवल्ली में समानता जैसी

किस किस पूरी होने की कसक जगी थी लेकिन

उनका किसी

सांग ज्यादा जमा

नहीं फिल्म की तकनीकी टीम में संगीतकार

श्रीदेवी प्रसाद होकर कॉन्फिडेंस का शिकार

साफ नजर आते हैं उनकी हिंदी पर कमजोर पकड़

भी इस बार उजागर हो गई फिल्म बनाने वालों

को भी डीएसपी की यह कमजोरी रिलीज से पहले

ही समझ आ गई इसलिए फिल्म के बैकग्राउंड

स्कोर में से एस थामस और सैम की एस की भी

मदद ली

गई फिल्म की तकनीकी टीम में जिस शख्स एक

शख्स की तारीफ करने का मन बार-बार होता है

वह पोलैंड के मूल निवासी सिनेमेट ग्राफ का

कुआ ब्रो जैक मिरोस्लाव फिल्म का

प्रोडक्शन डिजाइन काफी रंगीन है प्रीत सल

सिंह ने अल्लू अर्जुन के गेट पर काबिले

तारीफ काम किया

है नवे नूली का संपादन बेहतर होता है होता

तो फिल्म कम से कम 20 मिनट कम हो सकती थी

साउथ सिनेमा में इस साल हनुमान ने जिस

होशियारी से सिनेमा को सादा उसे नाग

अस्मिन कल की 289 में आगे बढ़ाया और अब आ

गया है पुष्पा राज अपने

के और बॉक्स ऑफिस पर रूल करने के लिए

अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्प टू थिएटर में

रिलीज हो चुकी है इस फिल्म में रश्मिका

मंदाना उनकी पत्नी का किरदार निभा रही हैं

अल्लू अर्जुन की पुष्प टू कैसी है क्या है

इसे थिएटर में जाकर देखना चाहिए यह जानने

के लिए हमारे रिवू को और आगे

जाने पुष्पा अल्लू अर्जुन की वो फिल्म थी

जिसे देखने के बाद राजेश खन्ना के पुष्पा

आई हेट टियर जैसे ओवर ग्रीन डायलॉग को भी

हमने भुला दिया इस फिल्म के रिलीज होने के

बाद से अब तक भारत का बच्चा बच्चा पुष्पा

का नाम समझकर फ्लावर समझे क्या फायर है

मैं जैसे यह डायलॉग बड़े स्वक से ही बोल

बोलता हुआ नजर आता है 3 साल पहले रिलीज

हुई पुष्पा द राइट ने अपनी सफलता से

बॉलीवुड को बहुत बड़ा सबक सिखाया

था इस फिल्म ने आंख बंद कर हॉलीवुड ट्रेड

फॉलो करने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को

बताया था कि वह आम लोगों के लिए फिल्में

बनाना भूल गए हैं पुष्प द राइज ने मुझे उस

एंग्री यंग मैन हीरो से मिलाया जो हिंदी

फिल्मों से गुम हो गए थे अब जैसे पुष्पा द

राइस पसंद आई हो उसका पुष्प द रूल देखना

तो बनता है फिर क्या था यह फिल्म भी देख

डाली और इस फिल्म ने मुझे निराश बिल्कुल

नहीं

किया कहानी निर्देशन सिनेमेट ग्राफी और

म्यूजिक के मामले में अलग पुष्पा द राइज

फायर थी तो पुष्पा द रूल वर्ल्ड फायर है

रश्मिका मंदाना अच्छी है लेकिन पूरी फिल्म

में अल्लू अर्जुन से नजर नहीं नहीं हटती

साउथ की फिल्मों से मुझे अक्सर यह शिकायत

रहती है कि उन फिल्मों में महिला का

सम्मान नहीं किया जाता लेकिन अल्लू अर्जुन

और सुकुमार ने मुझे सरप्राइज किया उन

दिनों ने इस फिल्म में कुछ ऐसा कर दिया कि

जिसे करना किसी भी सुपरस्टार के लिए आसान

नहीं

होता पर अल्लू अर्जुन ने वो हिम्मत दिखाई

इस फिल्म में जिस तरह से महिला का सम्मान

किया गया मुझे लगता है कि हर साउथ के

फिल्म मेकर्स को इससे सीखना चाहिए यह एक

शानदार फिल्म है और इस फिल्म के साथ अल्लू

अर्जुन ने इंडस्ट्री में एक नए ट्रेंड की

शुरुआत की है आइए अब इस फिल्म के बारे में

विस्तार से बातें करते

हैं रक्त चंदन यानी कि लाल चंदन की तस्करी

करने वाले पुष्पराज की कहानी आगे बढ़ती है

अब पुष्पराज वो मजदूर नहीं रहा

वो बड़ा आदमी बन गया है लेकिन आज भी

शिवल्ली उसे अपनी उंगलियों पर न चाती है

अब पुष्पा के एक इशारे पर राज का सीएम ही

बदलता है लेकिन उसके इस बिजनेस को लगा

एसपी भवर सिंह सखावत नाम का ग्रहण अब भी

कायम है पुष्पा आगे आगे और सखावत उसके

पीछे पीछे क्या इन दोनों के बीच की लड़ाई

खत्म होगी पुष्पा की जिंद जिंदगी में और

क्या मोड़ आएंगे पुष्पा के उस परिवार का

क्या होगा जिसने पुष्पराज से उसका नाम छीन

लिया इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए

आपको थिएटर में जाकर यह फिल्म देखनी

होगी जब रिव्यू करने के लिए मैं फिल्म देख

देखता हूं तब अक्सर मोबाइल पर नोटपैड खुला

रहता है फिल्म में क्या ट इंटरेस्टिंग है

कौन सा दिलचस्प डायलॉग बोला गया है यह मैं

अक्सर इस नोटपैड में लिख लेता हूं लेकिन

अल्लू अर्जुन की पुष्पा एक ऐसी फिल्म है

जिसे देखते हुए मैं पूरी तरह से भूल गया

कि मुझे नोटपैड पर इससे जुड़ी बातें लिखनी

होंगी 3 घंटे 20 मिनट की यह फिल्म फिल्म

पूरी तरह से शुरुआत से लेकर अंत तक आपको

कनेक्ट करके रखती है एक पल के लिए भी आपको

यह महसूस नहीं हो होता कि आप बोर हो रहे

हो और इस बार का श्रेय फिल्म निर्देशक

सुकुमार को जाता

है जिस तरह से पुष्पा में अल्लू अर्जुन और

रश्मि का मंदाना के बीच एक बहुत ही

खूबसूरत केमिस्ट्री नजर आती है उसी उससे

भी बेहतरीन केमिस्ट्री अल्लू अर्जुन और

सुकुमार के बीच है फर्क सिर्फ इतना है कि

इसे हम देख तो नहीं सकते लेकिन फिर भी

फिल्म देखते हुए हम इसे महसूस ू कर सकते

हैं कि इस फिल्म के हर फ्रेम में एक नई

सोच दिखाई देती

है और यह नई सोच पुष्पा टू के हर सीन को

खास बना देती है उदाहरण के तौर पर बात की

जाए तो फिल्म में एक सीन है जहां पुष्पा

के 200 से ज्यादा साथियों को सिखावन पकड़

लेता है अब हम उम्मीद करते हैं कि सिंघम

अगेन में जिस तरह से अल्लू अन कपूर पुलिस

थाने में आए

थे और उन्हें सभी पुलिस वालों को मार

गिराकर अपने साथियों को छुड़ाया था ठीक

वैसे ही पुष्पा भी करेगा लेकिन वो जो कर

करता है वह आपके सभी सोच कभी नहीं सोच

पाएंगे कैमरा के पीछे बैठा हुआ निर्देशक

और उसके सामने परफॉर्म करने वाला एक्टर इन

दोनों के बीच यह कमाल की केमिस्ट्री बनाने

का आधा श्रय हमें अल्लू अर्जुन को भी देना

होगा आपने कभी सोचा था कि अपना एक कांधा

नीचे झुकाकर चलने वाले दाढ़ी से लेकर सिर

पर तक जिसके बाल बड़े हो जो चमकीले से

अजीब रंग के कपड़े पहनता हो ऐसे किरदार को

पूरा देश पसंद करने लगेगा लेकिन अल्लू

अर्जुन ने वो कमाल करके दिखाया है अल्लू

अर्जुन एक मास हीरो हैं असल जिंदगी में हो

या फिल्मों में हमेशा उन्हें एक स्टाइल

लेस लुक में देखा गया है लेकिन पुष्पा में

उन्होंने अपनी इमेज या लुक की परवाह ना

करते हुए इस

अ अपने परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया

है पुष्पा टू अल्लू अर्जुन के करियर की अब

तक की सबसे बेस्ट फिल्म है फिल्म के

ट्रेलर और पोस्टर में उन्हें साड़ी पहनकर

काली मां के अवतार में देखा गया था यह लुक

सिर्फ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के

लिए नहीं इसके पीछे एक क्रांतिकारी सोच है

और साड़ी पहनकर अल्लू अर्जुन ने जो

परफॉर्म दी है उसे यह फिल्म देखने वाले

लंबे समय तक भूल नहीं

पाएंगे रोहित शेट्टी की गोलमाल में अरद

वारसी अजदगन ने भी औरत औरतों के कपड़े

पहने थे रितेश देशमुख और सेफ अली खान ने

भी अपनी फिल्म में महिला बनकर सीन परफॉर्म

किया था लेकिन अक्सर हिंदी फिल्मों में

एक्टर का लड़की बनना कॉमेडी के लिए

इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अल्लू अर्जुन

ने साड़ी पहनकर जो सीन दिया है उसे देखते

हुए लग रहा है कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री

में नया ट्रेंड शुरू कर दिया है श्रीवल्ली

के किरदार में रश्मिका मंदाना ने जान डाल

दी है पुष्पा के पार्ट वन में उनके होने

ना होने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था

लेकिन पुष्प टू में रश्मिका के रश्मिका यह

बता देती है कि उनका इस फिल्म में होना

क्यों जरूरी है फहद फासिल भी अच्छे हैं

लेकिन इस बार उनके किरदार को कॉमेडी का

तड़का लगाकर पेश कर दिया था पुष्प टू की

और इस खास बात है इस फिल्म की डबिंग और

बैकग्राउंड म्यूजिक सीरियस तलपड़े की आवाज

पुष्पा के किरदार को पूरा न्याय देती है

फिल्म के गाने याद नहीं रहते लेकिन

बैकग्राउंड म्यूजिक पर खास मेहनत की गई है

जहां बैकग्राउंड में हिंदी म्यूजिक की

जरूरत थी वहां हिंदी म्यूजिक लगाया गया है

अक्सर पेन इंडिया फिल्म बनाने में

दिलचस्पी रखने वाले साउथ के मेकर्स इस

फोटो साउथ के मेकर्स इस छोटी सी बात को

भूल जाते हैं

पुष्पा बन की कहानी कुछ लोगों को पसंद

नहीं आई थी पुष्पा के मेकर्स ने यह फीडबैक

सीरियसली लिया और उन्होंने अपनी कहानी पर

काम किया पुष्प टू की कहानी पर खूब मेहनत

की गई पूरी कहानी में एक सीन भी ऐसा नहीं

है जहां हमें लगता है कि पुष्पा गलत रहा

है फिल्म में हिंसा भी है लेकिन संदीप

रेड्डी बांगा और रणवीर कपूर के एनिमल की

तरह बिना ना सोचे समझे कि किए जाने वाली

हिंसा इस फिल्म में नहीं

है पुष्प टू में वायलेंस तो है लेकिन यह

वायलेंस अपने आप को जस्टिफाई करता है जहां

एनिमल का वायलेंस देख देख आंखें बंद करने

का मन करता है वहां कुछ पुष्पा की हिंसा

देखकर तालियां बजाते

हुए कहते हैं कि कि और मारो इस फिल्म में

पुष्पा के बारे में जो बात सबसे अच्छी लगी

वो है उसकी पत्नी और बाकी महिलाओं के लिए

सम्मान पुष्पा टू का यह हीरो महिलाओं के

सम्मान सामने आसु बहाने को अपनी कमजोरी

नहीं समझता कभी-कभी वो फूट फूट कर अ फूट

फूट कर पर जाकर अपनी बीवी को अपने पक्ष

में बोलने का मौका देता

है उसके लिए जितनी खुद की खुशी जरूरी है

उतनी ही बीवी की भी देखने के लिए यह बहुत

छोटे से सीन है लेकिन यह सा सिनेमा की

बदलती हुई सोच दिखाता है और यह बदलता अ

बदलाव अच्छा लगता

है पुष्पा के एक्शन सीन का निर्देशन भी

कमाल का है हर एक्शन सीन एक खास तरीके से

डिजाइन किया गया है इसे देखने के बाद ऐसा

लगता है कि इसे हम पहली बार देख रहे हैं

इस फिल्म को थिएटर में देखना एक शानदार

एक्सपीरियंस होगा स बात की एक बात पुष्पा

पहली एंट्री पर इतना बवाल नहीं करता जितना

दूसरी एंट्री पर करता है तो थिएटर में

पुष्पा की दूसरी एंट्री हो चुकी है और

उसने क्या बबाल किया यह जानने के लिए आपको

थिएटर की तरफ रुख करना होगा दोस्तों कैसी

लगी हमारी वीडियो कमेंट में जरूर बताएं और

मूवी देखने जरूर जाएं क्योंकि मूवी ने इस

टाइम पर बवाल मचा के रखा है हां दोस्तों

वीडियो में मजा आ गया और मूवी में क्या

धमाकेदार मजा आया

है नमस्कार दोस्तों दोस्तों स्वागत है

आपका आपके अपने चैनल द मिस्टीरियस

मॉर्निंग में दोस्तों 6 दिसंबर को पुष्प

टू रिलीज हो चुकी है और भाई क्या भौकाल

मचा के रखा है पुष्प टू ने आइए जानते हैं

उसका रिव्यू पुष्प टू ने बॉक्स ऑफिस पर

लगाई आग दूसरे दिन के कलेक्शन से मचा मचा

दिया गदर पुष्प टू के आने से बॉक्स ऑफिस

पर हड़क मच गया है रिलीज से पहले ही

शानदार बिजनेस करने वाली अल्लू अर्जुन और

रश्मी का मंदाना स्टार इस फिल्म को 100

करोड़ से ज्यादा की ओपनिंग

मिली अब फिल्म के दूसरे दिन का अर्ली

कलेक्शन भी सामने आ चुका है जो काफी

इंप्रेसिव है सभी भाषाओं में फिल्म ने

कितना-कितना कलेक्शन किया है चलिए देखते

हैं

आंकड़े इस वक्त हर किसी की जुबान पर बस

ढाई अक्षर का शब्द है पुष्पा टू जिसकी धमक

इतनी तेज है कि बॉक्स ऑफिस थर्रा उठा है 5

सितंबर को सिनेमा घरों में रिलीज हुई आइकन

स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्प टू ने

पहले दिन तो धमाका ही धमाका ही कर दिया

लेकिन दूसरे दिन तो बॉक्स ऑफिस सुकुमार के

निर्देशन में बनी इस फिल्म ने ववन र ला

दिया हिंदी तमिल तेलुगु मलयालम और कन्नड़

भाषा में रिलीज हुई स्पन इंडिया रिलीज

फिल्म ने पहले दिन तो 72 से 72 करोड़ से

ओपनिंग की थी अब मूवी के दूसरे दिन के

अरली आंकड़े सामने आ गए हैं जिसे देखकर यह

साफ जाहिर है कि पुष्पराज अभी कई बड़ी

फिल्मों को धूल चटाने वाला

है मूवी ने शुक्रवार को यानी कि दूसरे दिन

बॉक्स ऑफिस पर टोटल कितनी कमाई की चलिए यह

देखते हैं आंकड़े पुष्पा टू को रिलीज के

पहले बस का पूरा पूरा फायदा मिला है इस

फिल्म की रिलीज से पहले तो एडवांस बुकिंग

जोरो सोरो से चल रही थी लेकिन सिनेमा में

आने के बाद भी फैंस ने वेंट के टिकट पहले

से ही बुक कर लिए लगभग

सभी शहरों में थिएटर खचाखच भरे हुए हैं

बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाली पुष्प टू को

आईएमडीबी पर कितनी कित पर मिली सिर्फ इतनी

रेटिंग जानकर लगेगा 440 वोल्ट का झटका

पहले दिन के मुकाबले शुक्रवार को मूवी के

बिजनेस में काफी फर्क आया लेकिन इसके

बावजूद घरेलू बॉक्स ऑफिस पर मूवी 300

करोड़ कमाने के बेहद नजदीक पहुंच चुकी है

टेक्निकल काम के अर्ली आंकड़ों से अर्ली

आंकड़ों के मुताबिक अल्लू अर्जुन और

रश्मिका मंदाना की मूवी पुष्पा टू ने

दूसरे दिन शुक्रवार को टोटल 90 करोड़ के

आसपास बिजनेस किया जिसमें तेलुगु में

फिल्म ने दूसरे दिन दो 27 करोड़ और हिंदी

में 55 करोड़ तमिल में तमिल में 5 करोड़

कन्नड़ में 6 लाख और मलयालम में डेढ़

करोड़ का बिजनेस किया

पुष्पा पुष्पा टू पहले ही केजीएफ से लेकर

जबान एनिमल कल की 2898 जैसी फिल्मों को को

कमाई करने के मामले में फ पीछे छोड़ चुकी

है दो दिन में 265 करोड़ कमाने वाली यह

मूवी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ के

क्लब में शामिल हो

जाएगी तेलुगु में तो यह फिल्म अच्छा

बिजनेस कर ही रही है लेकिन उससे ज्यादा

तेजी मूवी की कमाई हिंदी बेल्ट में हो रही

है जिससे अब दिवाली के मौके पर रिलीज हुई

दोनों बड़ी फिल्म फिल्मों भूलभुलैया थ और

सिंघम पर खतरा मंडरा रहा

है पहली एंट्री पर इतना बवाल नहीं करता

जितना दूसरी एंट्री पर करता है यह पुष्पा

टू का ही डायलॉग है और ऐसी ही यह फिल्म भी

है पुष्पा फ्लावर नहीं फायर था इस बार वह

बोला मैं वाइल्ड फायर हूं और वह वाकई वाइ

फायर निकला पुष्पा टू में एक चीज कूटकूट

कर भरी हुई है वो है एंटरटेनमेंट

एंटरटेनमेंट और

एंटरटेनमेंट इस फिल्म को देखते हुए दिमाग

को पुष्पा की वाइल्ड फायर में डाल दिया

जाए और अ घबराहट

मत पुष्पा भाऊ आपके दिमाग को कुछ नहीं

होने देंगे तीन घंटे 20 मिनट बाद दिमाग

एकदम कड़क हो होके निकलेगा आपको लॉजिक

नहीं लगाना है बस

एंटरटेनमेंट होना है और सिनेमा अगर लॉजिक

लगाने का मौका दिए बिना आपको लगभग साढ़े

घंटे एंटरटेन करें तो वो कमाल का सिनेमा

होता है और ऐसा सिनेमा इसलिए भी जरूरी है

जो को सिनेमा जिंदा रहे और चलता रहे फलता

फूलता

रहे अब पुष्पा लाल चंदन का बड़ा स्मगलर बन

चुका है और इस पूरे सिंडिकेट का मुखिया है

लेकिन आदमी आगे बढ़ता है तो दुश्मन बढ़ते

हैं यही जिंदगी में होता है और यही फिल्म

पुष्पा अपनी बीवी की हर बात मानता है जब

बीवी कहती है कि सीएम से मिलने जा रहे हो

तो फोटो क्लिक करा लेना और जब सीएम एक

स्मगलर के साथ फोटो नहीं खिंचवा आता तो

पुष्पा अ सीएम ही बदलने की प्लानिंग कर

देता है पुष्पा पुष्पा को इसके लिए 5000

करोड़ का लाल चंदन

बजस स्मगलर करना

है क्या होगा और पुष्पा का दुश्मन पुलिस

वाला भवर सिंह सखावत क्या करेगा थिएटर में

जाकर देखिए मजा

आएगा यह पूरी तरह से मास एंटरटेनर है एक

फ्रेम एंटरटेनिंग है लॉजिक के बारे में आप

सते नहीं जो पुष्पा करता है उस पर यकीन हो

जाता है एक के बाद एक कमाल के सीन आते हैं

बहुत बार सीटी ताली बजाने वाले सीन आते

हैं पुष्पा का स्वय गजब का है पुष्पा सॉरी

बोल देता है लेकिन पुष्पा को झुकना नहीं

है और फिर जो होता है उसके बाद बवाल कहते

हैं यह फिल्म ऐसा सिनेमा है कि लोग थिएटर

जाने को मजबूर हो

जाएंगे फिल्म की लंबाई अखती नहीं है बल्कि

लगता है कि और कुछ भी होता तो मजा आता यह

सिनेमा हाल में देखने वाला एक्सपीरियंस है

जाकर लीजिए क्योंकि ऐसे सिनेमा से ही

सिनेमा जिंदा है सिनेमा में मास और क्लास

दोनों होंगे तो सिनेमा चलेगा और यह मास है

अल्लू अर्जुन का काम बवाल है आपको यकीन

दिला देते हैं कि जो कर रहे हैं वो हो

सकता है और पुष्पा कर सकता है उनका सुमेग

कमाल का है वह हर फ्रेम में छाए हुए हैं 5

साल की उनकी मेहनत साफ दिखती है अल्लू

अर्जुन ने हीरोगिरी और हीरोपंती के मायने

बदल

दिए उन्होंने अब लकीर बड़ी कर दी है उनका

काम बहुत जबरदस्त है और अब किसी हीरो को

उनका स्वैग मैच करने के लिए बहुत कुछ बड़ा

ही करना होगा रश्मिका मंदाना का कमाल भी

कमाल

है अल्लू अर्जुन जैसे हीरो के सामने

हीरोइन के करने को हीरोइन के करने को शायद

कुछ नहीं होता लेकिन रश्मिका आपकी छाप

छोड़ जाती है फाद फासिल ने भी जबरदस्त काम

किया है हीरो की हीरोगिरी तभी निकल कर आती

है जब बिलन जानदार हो और यह पुलिस वाले के

किरदार में भाद फासल ने जान डाल दी

है जगदीश प्रताप भंडारी का काम अच्छा है

जगपत बाबू ने भी अच्छा काम किया है सौरभ

सचदेव ने भी कमाल का काम किया

है डायरेक्शन और

राइटिंग सुकुमार की ट और डायरेक्शन दोनों

शानदार है उन्होंने एक ही चीज पर फोकस

दिया है सुवेग और

एंटरटेनमेंट और वह कामयाब रहे वह जो बनाना

चाहते थे

उससे भटके नहीं यही उनकी कामयाबी है एक के

बाद एक कमाल के सीन डाले ताकि एक सीन

देखकर दर्शक हैरान हो और सांस ले उसके

पहले दूसरा कमाल का सीन आ जाए

सबसे पहली बात जो पुष्पा टू के बारे में

जाननी जरूरी है वह यह

है कोई महान फिल्म नहीं है आम मुजिया

मसाला फिल्म जैसी एक्शन फिल्म है और चूंकि

एक हिट फिल्म की सीक्वल है लिहाजा इसकी

अपनी ब्रांड वैल्यू दर्शकों को सिनेमा

घरों तक खींच लाने में सफल रहा किसी

सुपरहिट का सीक्वल बनाना आसान नहीं होता

खास तौर से तब जब कहने को कोई खास कहानी

ना बची हो तेलुगु सिनेमा के दिग्गज

निर्देशक सुकुमार और निर्माता अल्लू

अर्जुन के अल्लू अरविंद के बेटे अल्लू

अर्जुन की फिल्म पुष्प टू की मेकिंग आसान

नहीं

रही इस फिल्म का मामला मले आलम फिल्म

अभिनेता फहद फासिल की तारीखों के चलते

बार-बार लटक लटका है फिल्म पुष्पा थी द

रैंपेज के ऐलान के साथ खत्म होती है और इस

ऐलान से पहले ही निर्देशक सुकुमार ने

फिल्म की सारी कमजोरी कमजोर कड़ियां

किनारे लगा

दी पुष्पराज ने पिछली फिल्म पुष्पा पुष्पा

द राइज में नारा लगाया था मैं झुकेगा नहीं

जबकि उसका ऐलान है मैं हरगिज नहीं

झुकेगा बीवी उसकी मां ने वाली है काली मां

से वह एक बेटी चाहता है ताकि वह अपने

ससुराल जाए तो उसे वहां का कुल नाम मिल

सके बचपन से लेकर पुष्पा इसी कुल नाम को

लेकर ही तो बार-बार दुखी होता रहा

है पुष्पा की आवाज इस बार थोड़ा थोड़ी

कड़क है अभिनेता सीरियस तलपड़े ने फिर एक

बार पुष्पराज के दार को पर्दे पर खिला

दिया

है फ्लावर से वाइल्ड फायर बनने की कोशिश

करते पुष्पराज की कहानी यहां तक यहां

थोड़ा पीछे से शुरू होती

है छलांग लगाने के लिए वह पंजे भी सिलता

नजर आता है लेकिन बचपन का कोमल पुष्पा

बड़ा

होकर गर्द पराज कैसे बन गया इसकी कहानी

जबरदस्त है श्रीमती पुष्पराज यानी की

श्रीवल्ली का नैन मटक्का यहां भी जारी है

अपने सामी पर वह फिदा है पूजा पाठ में भी

नंबर वन है खास खाना हर बार नॉनवेज ही

बनाती है श्रीवल्ली को सुकुमार ने घरेलू ब

भी बनाया है और फिल्म में समंता रूथ प्रभु

की कमी पूरी करने के लिए इस बार श्रीलीला

को आइटम गल बनाया

है समानता जैसा ना तो नमक उनमें है और ना

ही उन जैसी चपलता मामला किस किस में कसक

भरकर लाल चंदन को लाल चंदन हो गया फिल्म

की सबसे कमजोर कड़ी है गाना गाना ही है

अल्लू अर्जुन को प्रभु प्रभु जी मानकर

चंदन घिसते रहे

लेखक निर्देशक सुकुमार को लगता रहा कि

फिल्म पुष्पा वन की सफलता का श्र उन्हें

उतना ही मिल मिला जितना अल्लू अर्जुन और

रश्मिका को मिला रश्मिका को तो सीधे हिंदी

सिनेमा के हीरो नंबर वन रणवीर कपूर की

हीरोइन बनने में कामयाब

रही अल्लू अर्जुन की कहा इस बार बचपन से

लेकर बुजुर्ग यात की दहलीज पर आ खड़े हुए

हैं पुष्पराज की कहानी और इस बार वाकई में

उनके लिए मामला आसान नहीं है रावड़ी बाय

पुष्पा और लीडर पुष्पा के बीच की जो लकीर

इस कहानी में फाद फासिल के आने से आई है

उसे पार करने में इस बार यह दोनों जिया ले

कमाल भ

कर दिए गए हो लेकिन भवर सिंह सखावत का

किरदार यहां कहानी में कुछ खास करिश्मा कर

नहीं

पाता सुकुमार को भी समझ आ गया कि यह

किरदार उनके लिए अब असेट नहीं लायबिलिटी

है तो लिहाजा उन्होंने वही किया जो ऐसे

में किसी भी काबल निर्देशक को करना

चाहिए रश्मी का मंदाना पूरी फिल्म में

पुष्पराज के आगे पीछे डोलती शिवल्ली बनी

है अदाकारी दिखाने को उन्हें सिर्फ एक सीन

मिला और जब उस सीन सीन में उनकी एक चोट सो

सुनार पर भारी

पड़ी फिल्म पुष्पा द रूल यानी पुष्पा टू

की कहानी को जिस तरह सुकुमार पिछली बार

विदेश से समंदर के रास्ते रेखा चित्रों के

जरिए लाल चंदन के जंगलों तक लाए थे बैसा

रिवर्स स्विंग इस बार की कहानी में भी है

जापान के किसी बंदरगाह से शुरू होने वाली

यह फिल्म चूंकि तीन घंटे के करीब लंबी है

लिहाजा फिल्म की कहानी का विस्तार काफी

लंबा है इस विस्तार में अपने किरदारों से

सुकुमार को किसी जिस मदद की उम्मीद रही

होगी वह उन्हें

मिली जगदीश भंडारी जगपति बाबू राम रमेश और

ब्रह्मा जी सब अपने अपने किरदारों में

मुस्ते दिखते

हैं कहानी पिछली बार श्रीवल्ली का दिल जीत

दिल जीतने की थी और इस बार कहानी है अपनी

मां को अपने ही घर में वो सम्मान दिलाने

की जिसके लिए पुष्पराज बचपन से ही त्रास

झेल

रहा इस बार की चोपड़ में पुष्पा और भवर

सिंह ने तो पासे फेंके ही कुछ पासे उस

भ्रष्ट राजनीति के भी हैं जिनको पुष्पा

अपने बाएं हाथ का खेल समझता

है फिल्म को देखने आए दर्शकों को रश्मिका

और श्रीवल्ली दोनों से अलग-अलग आस रही

होगी रश्मिका को रश्मिका के भीतर एक

गुस्सा है यह गुस्सा उनके अभिनय में

किरदार किरदार की जरूरत के हिसाब से मौका

मिलते ही बाहर निकलता

है लेकिन इस गुस्से को प्रकट करने के नए

तरीके उन्हें सीखने होंगे हां फिलिंग बाला

फीलिंग वाला पूरा सीक्वेंस उनका दमदार है

लेकिन उनके किरदार में जात्रा वाले दृश्य

से पहले ज्यादा गहराई नहीं दिखी यात्रा

वाला दृश्य उसके बाद लगातार आने वाले दो

गाने और उसके बाद काली के रूप में अल्लू

अर्जुन का तांडव नृत्य फिल्म का सबसे सफल

सीक्वेंस है और इसके

बाद भतीजी को बचाने निकल निकले चाचा का

क्लाइमैक्स वाला एक्शन भी तालियां बटो ले

गया दर्शकों को श्रीवल्ली में समानता जैसी

किस किस पूरी होने की कसक जगी थी लेकिन

उनका किस किसक सांग ज्यादा जमा

नहीं फिल्म की तकनी की टीम में संगीतकार

श्रीद देवी प्रसाद होकर कॉन्फिडेंस का

शिकार साफ नजर आते हैं उनकी हिंदी पर

कमजोर पकड़ भी इस बार उजागर हो गई फिल्म

बनाने वालों को भी डीएसपी की यह कमजोरी

रिलीज से पहले ही समझ आ गई इसलिए फिल्म के

बैकग्राउंड स्कोर में से एस थामस और सैम

की एस की भी मदद ली

गई फिल्म की तकनीक की टीम में जिस शख्स एक

शख्स की तारीफ करने का मन बार-बार होता है

वह पोलैंड के मूल निवासी सिनेमेट ग्राफ का

कुआ ब्रो जैक मिरोस्लाव फिल्म का

प्रोडक्शन डिजाइन काफी रंगीन है प्रीत सल

सिंह ने अल्लू अर्जुन के गेटअप पर काबिले

तारीफ काम किया

है नवीन नूली का संपादन बेहतर होता है

होता तो फि कम से कम 20 मिनट कम हो सकती

थी साउथ सिनेमा में इस साल हनुमान ने जिस

होशियारी से सिनेमा को सादा उसे नागा

अस्वीन कल की 289 में आगे बढ़ाया और अब आ

गया है पुष्पा राज अपने इलाके और बॉक्स

ऑफिस पर रूल करने के

लिए अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्प टू थिएटर

में लीज ली हो चुकी है इस फिल्म में

रश्मिका मंदाना उनकी पत्नी का किरदार निभा

रही हैं अल्लू अर्जुन की पुष्पा टू कैसी

है क्या है इसे थिएटर में जाकर देखना

चाहिए यह जानने के लिए हमारे रिव्यू को और

आगे

जाने पुष्पा अल्लू अर्जुन की वो फिल्म थी

जिसे देखने के बाद राजेश खन्ना के पुष्पा

आई हेट टियर जैसे ओवर ग्रीन डायलॉग को भी

हमने भुला दिया इस फिल्म के रिलीज होने के

बाद से अब तक भारत का बच्चा बच्चा पुष्पा

का नाम समझकर फ्लावर समझे क्या फायर है

मैं जैसे यह डायलॉग बड़े स्वक से ही बोल

बोलता हुआ नजर आता है 3 साल पहले रिलीज

हुई पुष्पा द राइट ने अपनी सफलता से

बॉलीवुड को बहुत बड़ा सबक सिखाया

था इस फिल्म ने आंख बंद कर हॉलीवुड ट्रेड

फॉलो करने वाली हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को

बताया था कि वह आम लोगों के लिए फिल्में

बनाना भूल गए हैं पुष्प द राइज ने मुझे उस

एंग्री यंग मैन हीरो से मिलाया जो हिंदी

फिल्मों से गुम हो गए थे अब जैसे पुष्पा द

राइस पसंद आई हो उसका पुष्पा द रूल देखना

तो बनता है फिर क्या था यह फिल्म भी देख

डाली और इस फिल्म ने मुझे निराश बिल्कुल

नहीं

किया कहानी निर्देशन सेन मेट्रो ग्राफी और

म्यूजिक के मामले में अलग पुष्पा द राइज

फायर थी तो पुष्पा द रूल वर्ल्ड फायर है

रश्मिका मंदाना अच्छी है लेकिन पूरी फिल्म

में अल्लू अर्जुन से नजर नहीं हटती साउथ

की फिल्मों से मुझे अक्सर यह शिकायत रहती

है कि उन फिल्मों में महिला का सम्मान

नहीं किया जाता लेकिन अल्लू अर्जुन और

सुकुमार ने मुझे सरप्राइज किया उन दिनों

ने इस फिल्म में कुछ ऐसा कर दिया कि जिसे

करना किसी भी सुपरस्टार के लिए आसान नहीं

होता पर अल्लू अर्जुन ने वह हिम्मत दिखाई

इस फिल्म में जिस तरह से महिला का सम्मान

किया गया मुझे लगता है कि हर साउथ के

फिल्म मेकर्स को इससे सीखना चाहिए यह एक

शानदार फिल्म है और इस फिल्म के साथ अल्लू

अर्जुन ने इंडस्ट्री में एक नए ट्रेंड की

शुरुआत की है आइए अब इस फिल्म के बारे में

विस्तार से बातें करते

हैं रक्त चंदन यानी कि लाल चंदन की तस्करी

करने वाले पुष्पराज की कहानी आगे बढ़ती है

अब पुष्पराज वो मजदूर नहीं रहा व वो बड़ा

आदमी बन गया है लेकिन आज भी शरबी उसे अपनी

उंगलियों पर न चाती है

अब पुष्पा के एक इशारे पर राज का सीएम ही

बदलता है लेकिन उसके इस बिजनेस को लगा

एसपी भवर सिंह सखावत नाम का ग्रहण अब भी

कायम है पुष्पा आगे आगे और सखावत उसके

पीछे पीछे क्या इन दोनों के बीच की लड़ाई

खत्म होगी पुष्पा की जिंदगी में और क्या

मोड़ आएंगे पुष्पा के उस परिवार का क्या

होगा जिसने पुष्पराज से उस का नाम छीन

लिया इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए

आपको थिएटर में जाकर यह फिल्म देखनी

होगी जब रिव्यू करने के लिए मैं फिल्म देख

देखता हूं तब अक्सर मोबाइल पर नोटपैड खुला

रहता है फिल्म में क्या ट इंटरेस्टिंग है

कौन सा दिलचस्प डायलॉग बोला गया है यह मैं

अक्सर इस नोटपैड में लिख लेता हूं लेकिन

अल्लू अर्जुन की पुष्पा एक ऐसी फिल्म है

जिसे देखते हुए मैं पूरी तरह से भूल गया

कि मुझे नोटपैड पर इससे जुड़ी बातें लिखनी

होंगी 3 घंटे 20 मिनट की यह फिल्म फिल्म

पूरी तरह से शुरुआत से लेकर अंत तक आपको

कनेक्ट करके रखती है एक पल के लिए भी आपको

यह महसूस नहीं होता कि आप बोर हो रहे हो

और इस बार का श्रे फिल्म निर्देशक सुकुमार

को जाता है

जिस तरह से पुष्पा में अल्लू अर्जुन और

रश्मिका मंदाना के बीच एक बहुत ही खूबसूरत

केमिस्ट्री नजर आती है उसी उससे भी

बेहतरीन केमिस्ट्री अल्लू अर्जुन और

सुकुमार के बीच है फर्क सिर्फ इतना है कि

इसे हम देख तो नहीं सकते लेकिन फिर भी

फिल्म देखते हुए हम इसे महसूस कर सकते हैं

कि इस फिल्म के हर फ्रेम में एक नई सोच

दिखाई देती

है और यह नई सोच पुष्पा टू के हर सीन को

खास बना देती है उदाहरण के तौर पर बात की

जाए तो फिल्म में एक सीन है जहां पुष्पा

के 200 से ज्यादा साथियों को सिखावन पकड़

लेता है अब हम उम्मीद करते हैं कि सिंघम

अगेन में जिस तरह से अल्लू अर्जुन अ कपूर

पुलिस थाने में आए

थे और उन्हें सभी पुलिस वालों को मार

गिराकर अपने साथियों को छुड़ाया था ठीक

वैसे ही पुष्पा भी करेगा लेकिन वो जो कर

करता है वह आपके सभी सोच कभी नहीं सोच

पाएंगे कैमरा के पीछे बैठा हुआ निर्देशक

और उसके सामने परफॉर्म करने वाला एक्टर इन

दोनों के बीच यह कमाल की केमिस्ट्री बनाने

का आधा श्रेय हमें अल्लू अर्जुन को भी

देना

होगा अ आपने कभी सोचा था कि अ अपना एक

कांदा नीचे झुकाकर चलने वाले दाढ़ी से

लेकर सिर पर तक जिसके बाल बड़े हो जो

चमकीले से अजीब रंग के कपड़े पहनता हो ऐसे

किरदार को पूरा देश पसंद करने लगेगा लेकिन

अल्लू अर्जुन ने वो कमाल करके दिखाया है

अल्लू अर्जुन एक मास हीरो हैं असल जिंदगी

में हो या फिल्मों में हमेशा उन्हें एक

स्लेस लुक में देखा गया है लेकिन पुष्पा

में उन्होंने अपनी इमेज या लुक की परवाह

ना करते हुए

इस अपने परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया

है पुष्पा टू अल्लू अर्जुन के करियर की अब

तक की सबसे बेस्ट फिल्म है फिल्म के

ट्रेलर और पोस्टर में उन्हें साड़ी पहनकर

काली मां के अवतार में देखा गया था यह लुक

सिर्फ लोगों का ध्यान अपनी खींचने के लिए

नहीं इसके पीछे एक क्रांतिकारी सोच है और

साड़ी पहनकर अल्लू अर्जुन ने जो परफॉर्म

दी है उसे यह फिल्म देखने वाले लंबे समय

तक भूल नहीं

पाएंगे रोहित शेट्टी की गोलमाल में अरद

वारसी अजदगन ने भी औरत औरतों के कपड़े

पहने थे रितेश देशमुख और शेफ अली खान ने

भी अपनी फिल्म में महिला बनकर सीन परफॉर्म

किया था लेकिन अक्सर हिंदी फिल्मों में

एक्टर का लड़की बनना कॉमेडी के लिए

इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अल्लू अर्जुन

ने साड़ी पहनकर जो सीन दिया है उसे देखते

हुए लग रहा है कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री

में नया ट्रेंड शुरू कर दिया है श्रीवल्ली

के किरदार में रश्मिका मंदाना ने जान डाल

दी है पुष्पा के पार्ट वन में उनके होने

ना होने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था

लेकिन पुष्प टू में रश्मिका के रश्मिका यह

बता देती है कि उनका इस फिल्म में होना

क्यों जरूरी है फहद फासिल भी अच्छे हैं

लेकिन इस बार उनके किरदार को कॉमेडी का

तड़का लगाकर पेश कर दिया था पुष्प टू की

और इस खास बात है इस फिल्म की डबिंग और

बैकग्राउंड म्यूजिक सीरियस तलपड़े की आवाज

पुष्पा के किरदार को पूरा न्याय देती है

फिल्म के गाने याद नहीं रहते लेकिन ब

म्यूजिक पर खास मेहनत की गई है जहां

बैकग्राउंड में हिंदी म्यूजिक की जरूरत थी

वहां हिंदी म्यूजिक लगाया गया है अक्सर

पेन इंडिया फिल्म बनाने में दिलचस्पी रखने

वाले साउथ के मेकर्स इस

फोटो साउथ के मेकर्स इस छोटी सी बात को

भूल जाते हैं अ पुष्पा बन की कहानी कुछ

लोगों को पसंद नहीं आई थी पुष्पा के

मेकर्स ने यह फीडबैक सीरियसली लिया और

उन्होंने अपनी कहानी पर काम किया पुष्प टू

की कहानी पर खूब मेहनत की गई पूरी कहानी

में एक सीन भी ऐसा नहीं है जहां हमें लगता

है कि पुष्पा गलत रहा है फिल्म में हिंसा

भी है लेकिन संदीप रेड्डी बांगा और रणवीर

कपूर के एनिमल की तरह बिना सोचे समझे किए

जाने वाली हिंसा इस फिल्म में नहीं

है पुष्प टू में वायलेंस तो है लेकिन यह

वायलेंस अपने आप को जस्टिफाई करता है जहां

एनिमल का वायलेंस देख देख आंखें बंद करने

का मन करता है वहां कुछ पुष्पा की हिंसा

देखकर तालियां बजाते

हुए कहते हैं कि कि और मारो इस फिल्म में

पुष्पा के बारे में जो बात सबसे अच्छी लगी

वो है उसकी पत्नी और बाकी महिलाओं के लिए

सम्मान पुष्पा का यह हीरो महिलाओं के

सम्मान सामने आसु बहाने को अपनी कमजोरी

नहीं समझता कभी कभी वो फूट फूट कर अ फूट

फूट कर पर जाकर अपनी बीवी को अपने पक्ष

में बोलने का मौका देता

है उसके लिए जितनी खुद की खुशी जरूरी है

उतनी ही बीवी की भी देखने के लिए यह बहुत

छोटे से सीन है लेकिन यह सा सिनेमा की

बदलती हुई सोच दिखाता है और यह बदलता

बदलाव अच्छा लगता

है पुष्पा के एक्शन सीन का निर्देशन भी

कमाल का है हर एक्शन सीन एक खास तरीके से

डिजाइन किया गया है इसे देखने के बाद ऐसा

लगता है कि इसे हम पहली बार देख रहे हैं

इस फिल्म को थिएटर में देखना एक शानदार

एक्सपीरियंस होगा सो बात की एक बात पुष्पा

पहली एंट्री पर इतना बवाल नहीं करता जितना

दूसरी एंट्री पर करता है तो थिएटर में

पुष्पा की दूसरी एंट्री हो चुकी है और

उसने क्या बबाल किया यह जानने के लिए आपको

थिएटर की तरफ रुख करना होगा दोस्तों कैसी

लगी हमारी वीडियो कमेंट में जरूर बताएं और

मूवी देखने जरूर जाएं क्योंकि मूवी ने इस

टाइम पर बवाल मचा के रखा है हां दोस्तों

वीडियो में मजा आ गया और मूवी में क्या

धमाकेदार मजा आया है

नमस्कार दोस्तों दोस्तों स्वागत है आपका

आपके अपने चैनल द मिस्टीरियस मॉर्निंग में

दोस्तों 6 दिसंबर को पुष्प टू रिलीज हो

चुकी है और भाई क्या भौकाल मचा के रखा है

पुष्प टू ने आइए जानते हैं उसका रिव्यू

पुष्पा टू ने बॉक्स ऑफिस पर लगाई आग दूसरे

दिन के कलेक्शन से मचा मचा दिया गदर पुष्प

टू के आने से बॉक्स ऑफिस पर हड़क मच गया

है रिलीज से पहले ही शानदार बिजनेस करने

वाली अल्लू अर्जुन और रश्मी का मंदाना

स्टार इस फिल्म को 100 करोड़ से ज्यादा की

ओपनिंग

मिली अब फिल्म के दूसरे दिन का अ अर्ली

कलेक्शन भी सामने आ चुका है जो काफी

इंप्रेसिव है सभी भाषाओं में फिल्म ने

कितना कितना कलेक्शन किया है चलिए देखते

हैं

आंकड़े इस वक्त हर किसी की जुबान पर बस

ढाई अक्षर का शब्द है पुष्पा टू जिसकी अ

धमक इतनी तेज है कि बॉक्स ऑफिस थर्रा उठा

है 5 सितंबर को सिनेमा घरों में रिलीज हुई

आइकन स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म अ

पुष्पा टू ने पहले दिन तो धमाका ही धमाका

ही कर दिया लेकिन दूसरे दिन तो बॉक्स ऑफिस

सुकुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने

अ ववन र हीला दिया हिंदी तमिल तेलुगु

मलयालम और कन्नड़ भाषा में रिलीज हुई स्पन

इंडिया रिलीज फिल्म ने पहले दिन तो 72 से

72 करोड़ से ओपनिंग की थी अब मूवी के

दूसरे दिन के अरली आंकड़े सामने आ गए हैं

जिसे देखकर यह साफ जाहिर है कि पुष्पराज

अभी कई बड़ी फिल्मों को धूल चटाने वाला

है मूवी ने शुक्रवार को यानी कि दूसरे दिन

बॉक्स ऑफिस पर टोटल कितनी कमाई की चलिए यह

देखते हैं आंकड़े पुष्प टू को रिलीज के प

पहले बस का पूरा पूरा फायदा मिला है इस

फिल्म की रिलीज से पहले तो एडवांस बुकिंग

जोरो सोरो से चल रही थी लेकिन सिनेमा में

आने के बाद भी फैंस ने वेकेंट के टिकट

पहले से ही बुक कर लिए लगभग

सभी शहरों में थिएटर खचाखच भरे हुए

हैं बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने वाली पुष्प

टू को आईएमडीबी पर कितनी कि पर मिली सिर्फ

इतनी रेटिंग जानकर लगेगा 440 वोल्ट का

झटका पहले दिन के मुकाबले शुक्रवार को

मूवी के बिजनेस में काफी फर्क आया लेकिन

इसके बावजूद घरेलू बॉक्स ऑफिस पर मूवी 300

करोड़ कमाने के बेहद नजदीक पहुंच चुकी

है टेक्निकल काम के अर्ली आंकड़ों से

अर्ली आंकड़ों के मुताबिक अल्लू अर्जुन और

रश्मी का मंदाना की मूवी पुष्पा टू ने

दूसरे दिन शुक्रवार को टोटल 90 करोड़ के

आसपास बिजनेस किया जिसमें तेलुगु में

फिल्म ने दूसरे दिन दो 27 करोड़ और हिंदी

में 55 करोड़ तमिल में तमिल में 5 करोड़

कन्नड़ में 6 लाख और मलयालम में डेढ़

करोड़ का बिजनेस

किया पुष्पा पुष्पा टू पहले ही केजीएफ से

लेकर जबान एनिमल कल की 2898 जैसी फिल्मों

को को कमाई करने के मामले में फ पीछे छोड़

चुकी है दो दिन में 265 करोड़ कमाने वाली

यह मूवी घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ के

क्लब में शामिल हो

जाएगी तेलुगु में तो यह फिल्म अच्छा

बिजनेस कर ही रही है लेकिन उससे ज्यादा

तेजी मूवी की कमाई हिंदी बेल्ट में हो रही

है जिससे अब दिवाली के मौके पर रिलीज हुई

दोनों बड़ी फिल्म फिल्मों भूलभुलैया थरी

और सिंघम पर खत मंडरा रहा है पहली एंट्री

पर इतना बवाल नहीं करता जितना दूसरी

एंट्री पर करता है यह पुष्पा टू का ही

डायलॉग है और ऐसी ही यह फिल्म भी है

पुष्पा फ्लावर नहीं फायर था इस बार वह

बोला मैं वाइल्ड फायर हूं और वोह वाकई

वाइल्ड फायर निकला पुष्पा टू में एक चीज

कूटकूट कर भरी हुई है वो है एंटरटेनमेंट

एंटरटेनमेंट और एंटरटेनमेंट इस फिल्म को

देखते हुए दिमाग को पुष्पा की वाइल्ड फायर

में डाल दिया जाए और घबराहट

मत पुष्पा भाऊ आपके दिमाग को कुछ नहीं

होने देंगे 3 घंटे 20 मिनट बाद दिमाग एकदम

कड़क हो होके निकलेगा आपको लॉजिक नहीं

लगाना है बस

एंटरटेनमेंट होना है और सिनेमा अगर लॉजिक

लगाने का मौका दिए बिना आपको लगभग 32 घंटे

ंट एंटरटेन करें तो वह कमाल का सिनेमा

होता है और ऐसा सिनेमा इसलिए भी जरूरी है

जो को सिनेमा जिंदा रहे और चलता रहे फलता

फूलता

रहे अब पुष्पा लाल चंदन का बड़ा स्मगलर बन

चुका है और इस पूरे सिंडिकेट का मुखिया है

लेकिन आदमी आगे बढ़ता है तो दुश्मन बढ़ते

हैं यही जिंदगी में होता है और यही फिल्म

पुष्पा अपनी बीवी की हर बात मानता है जब

बीवी कहती है कि सीएम से मिलने जा रहे हो

तो फोटो क्लिक करा लेना और जब सीएम एक

स्मगलर के साथ फोटो नहीं खिंचवा आता तो

पुष्पा सीएम ही बदलने की प्लानिंग कर देता

है पुष्पा पुष्पा को इसके लिए 5000 करोड़

का लाल चंदन

बजस स्मगलर का

है क्या होगा और पुष्पा का दुश्मन पुलिस

वाला भवर सिंह सखावत क्या करेगा थिएटर में

जाकर देखिए मजा

आएगा यह पूरी तरह से मास एंटरटेनर है एक

फ्रेम एंटरटेनिंग है लॉजिक के बारे में आप

सोचते नहीं जो पुष्पा करता है उस पर यकीन

हो जाता है एक के बाद एक कमाल के सीन आते

हैं बहुत बार सीटी ताली बजाने वाले सीन

आते हैं पुष्पा का स्वय गजब का है पुष्पा

सोरी बोल देता है लेकिन पुष्पा को झुकना

नहीं है और फिर जो होता है उसके बाद बवाल

कहते हैं यह फिल्म ऐसा सिनेमा है कि लोग

थिएटर जाने को मजबूर हो

जाएंगे फिल्म की लंबाई अखती नहीं है बल्कि

लगता है कि और कुछ भी होता तो मजा आता यह

सिनेमा हल में देखने वाला एक्सपीरियंस है

जाकर लीजिए क्योंकि ऐसे सिनेमा से ही

सिनेमा जिंदा है सिनेमा में मास और क्लास

दोनों होंगे तो सिनेमा चलेगा और यह मास है

अल्लू अर्जुन का काम बवाल है आपको यकीन

दिला देते हैं कि जो कर रहे हैं वह हो

सकता है और पुष्पा कर सकता है उनका सुमय

कमाल का है वह हर फ्रेम में छाए हुए हैं 5

साल की उनकी मेहनत साफ दिखती है अल्लू

अर्जुन ने हीरोगिरी और हीरोपंती के मायने

बदल

दिए उन्होंने अब लकीर बड़ी कर दी है उनका

काम बहुत जबरदस्त है और अब किसी हीरो को

उनका स्वग मैच करने के लिए बहुत कुछ बड़ा

ही करना होगा रस का मंदाना का कमाल भी

कमाल

है अल्लू अर्जुन जैसे हीरो के सामने

हीरोइन के करने को हीरोइन के करने को शायद

कुछ नहीं होता लेकिन रश्मिका आपकी छाप

छोड़ जाती है फाद फासिल ने भी जबरदस्त काम

किया है हीरो की हीरोगिरी तभी निकल कर आती

है जब बिलन जानदार हो और यह पुलिस वाले के

किरदार में भाद फासिल ने जान डाल दी

है जगदीश प्रताप भंडारी का काम अच्छा है

जगपत बाबू ने भी अच्छा काम किया है सौरभ

सचदेव ने भी कमाल का काम किया

है डायरेक्शन और

राइटिंग सुकुमार की राइटिंग और डायरेक्शन

दोनों शानदार है उन्होंने एक ही चीज पर

फोकस दिया है सुवेग और

एंटरटेनमेंट और वह कामयाब है वो जो बनाना

चाहते थे

उससे भटके नहीं यही उनकी कामयाबी है एक के

बाद एक कमाल के सीन डाले ताकि एक सीन

देखकर दर्शक हैरान हो और सांस ले उसके

पहले दूसरा कमाल का सीन आ

जाए सबसे पहली बात जो पुष्पा टू के बारे

में जाननी जरूरी है वह यह

है कोई महान फिल्म नहीं है एक आम मुजिया

मसाला फिल्म जैसी एक्शन फिल्म है और चूंकि

एक हिट फिल्म की सीक्वल है लिहाजा इसकी

अपनी ब्रांड वैल्यू दर्शकों को सिनेमा

घरों तक खींच लाने में सफल रहा किसी

सुपरहिट का सीक्वल बनाना आसान नहीं होता

खास तौर से तब जब कहने को कोई खास कहानी

ना बची हो तेलुगु सिनेमा के दिग्गज

निर्देशक सुकुमार और निर्माता अल्लू

अर्जुन के अल्लू अरविंद के बेटे अल्लू

अर्जुन की फिल्म पुष्पा टू की मेकिंग आसान

नहीं

रही इस फिल्म का मामला मले आलम फिल्म

अभिनेता फहद फासिल की तारीखों के चलते

बार-बार लटक लटका है फिल्म पुष्पा थ्री द

रैंपेज के ऐलान के साथ खत्म होती है और इस

ऐलान से पहले ही निर्देशक सुकुमार ने की

सारी कमजोरी कमजोर कड़ियां किनारे लगा

दी पुष्पराज ने पिछली फिल्म पुष्पा पुष्पा

द राइज में नारा लगाया था मैं झुकेगा नहीं

जबकि उसका ऐलान है मैं हरगिज नहीं

झुकेगा बीवी उसकी मां बनने वाली है काली

मां से वह एक बेटी चाहता है ताकि वह अपने

ससुराल जाए तो उसे वहां का कुल नाम मिल

सके बचपन से लेकर पुष्पा इसी कुल नाम को

लेकर ही तो बार-बार दुखी होता रहा

है पुष्पा की आवाज इस बार थोड़ा थोड़ी

कड़क है अभिनेता सीरियस तलपड़े ने फिर एक

बार पुष्पराज के किरदार को पर्दे पर खिला

दिया

है फ्लावर से वाइल्ड फायर बनने की कोशिश

करते पुष्पराज की कहानी यहां तक यहां

थोड़ा पीछे से शुरू होती

है छलांग लगाने के लिए वह पंजे भी सिकता

नजर आता है लेकिन बचपन का कोमल पुष्पा

बड़ा

होकर गर्द पराज कैसे बन गया इसकी कहानी

जबरदस्त है श्रीमती पुष्पराज यानी की

श्रीवल्ली का नैन मटक यहां भी जारी है

अपने स्वामी पर वह फिदा है पूजा पाठ में

भी नंबर वन है खास खाना हर बार नॉनवेज ही

बनाती है श्रीवल्ली को सुकुमार ने घरेलू

बीबी बनाया है और फिल्म में समानता रूथ

प्रभु की कमी पूरी करने के लिए इस बार

श्रीलीला को आइटम गल बनाया

है समानता जैसा ना तो नमक उनमें है और ना

ही उन जैसी चपलता मामला किस किस में कसक

भरकर लाल चंदन को लाल चंदन हो गया फिल्म

की सबसे कमजोर कड़ी है गाना ना ही है

अल्लू अर्जुन को प्रभु प्रभु जी मानकर

चंदन घिसते रहे

लेखक निर्देशक सुकुमार को लगता रहा कि

फिल्म पुष्पा वन की सफलता का श्र उन्हें

उतना ही मिल मिला जितना अल्लू अर्जुन और

रश्मिका को मिला रश्मिका को तो सीधे हिंदी

सिनेमा के हीरो नंबर वन रणवीर कपूर की

हीरोइन बनने में कामयाब

रही अल्लू अर्जुन की कहानी इस बार बचपन से

लेकर बुजुर्ग जात की दहलीज पर आ खड़े हुए

हैं पुष्पराज की कहानी और इस बार वाकई में

उनके लिए मामला आसान नहीं है रावड़ी बाय

पुष्पा और लीडर पुष्पा के बीच की जो लकीर

इस कहानी में फाद फासिल के आने से आई है

उसे पार करने में इस बार यह दोनों जियाल

कमाल भरे कर दिए गए हो लेकिन भवर सिंह

सखावत का किरदार यहां कहानी में कुछ खास

करिश्मा कर नहीं पाता

सुकुमार को भी समझ आ गया कि यह किरदार

उनके लिए अब असट नहीं लाइब्रेरी है तो

लिहाजा उन्होंने वही किया जो ऐसे में किसी

भी काबिल निर्देशक को करना चाहिए रश्म का

मंदाना पूरी फिल्म में पुष्पराज के आगे

पीछे डोलती शिवल्ली बनी है अदाकारी दिखाने

को उन्हें सिर्फ एक सीन मिला और जब उस

सीन में उनकी एक चोट शो सुनार पर भारी

पड़ी फिल्म पुष्पा द रूल यानी पुष्पा टू

की कहानी को जिस तरह सुकुमार पिछली बार

विदेश से समंदर के रास्ते रेखा चित्रों के

जरिए लाल चंदन के जंगलों तक लाए थे वैसा

ही रिवरस स्विंग इस बार की कहानी में भी

है जापान के किसी बंदरगाह से शुरू होने

वाली यह फिल्म चूंकि तीन घंटे के करीब

लंबी है लिहाजा फिल्म की कहानी का विस्तार

काफी लंबा है इस विस्तार में अपने

किरदारों से सुकुमार को किसी जिस मदद की

उम्मीद रही होगी वह उन्हें

मिली जगदीश भंडारी जगपति बाबू राम रमेश और

ब्रह्मा जी सब अपने अपने किरदारों में

मुस्त दिखते

हैं कहानी पिछली बार श्रीवल्ली का दिलजीत

दिल जीतने की थी और इस बार कहानी है अपनी

मां को अपने ही घर में वह सम्मान दिलाने

की जिसके लिए पुष्पराज बचपन से ही त्रास

झेल

रहा इस बार की चोपड़ में पुष्पा और भवर

सिंह ने तो पासे फेंके ही कुछ पासे उस

भ्रष्ट राजनीति के भी हैं जिनको पुष्पा

अपने बाएं हाथ का खेल समझता है

फिल्म को देखने आए दर्शकों को रश्मिका और

श्रीवल्ली दोनों से अलग-अलग आस रही होगी

रश्मिका को रश्मिका के भीतर एक गुस्सा है

यह गुस्सा उनके अभिनय में किरदार किरदार

की जरूरत के हिसाब से मौका मिलते ही बाहर

निकलता है लेकिन इस गुस्से को प्रकट करने

के नए तरीके उन्हें सीखने होंगे हां

फिलिंग वाला फिलिंग्स वाला पूरा सीक्वेंस

उनका दमदार है लेकिन उनके किरदार में

जात्रा वाले दृश्य से पहले ज्यादा गहराई

नहीं दिखी यात्रा वाला दृश्य उसके बाद

लगातार आने वाले दो गाने और उसके बाद काली

के रूप में अल्लू अर्जुन का तांडव नृत्य

फिल्म का सबसे सफल सीक्वेंस है और इसके

बाद भतीजी को बचाने निकल निकले चाचा का

क्लाइमैक्स वाला एक्शन भी तालियां बटो ले

गया दर्शकों को श्रीवल्ली में समानता जैसी

किस किस पूरी होने की कसक जगी थी लेकिन

उनका किस किसक सांग ज्यादा जमा

नहीं फिल्म की तकनी की टीम में संगीतकार

श्रीदेवी प्रसाद होकर कॉन्फिडेंस का शिकार

साफ नजर आते हैं उनकी हिंदी पर कमजोर पकड़

भी इस बार उजागर हो गई फिल्म बनाने वालों

को भी डीएसपी की यह कमजोरी रिलीज से पहले

ही समझ आ गई इसलिए फिल्म के बैकग्राउंड

स्कोर में से एस थामस और सैम की एस की भी

मदद ली

गई फिल्म की तकनीकी टीम में जिस शख्स एक

शख्स की तारीफ करने का मन बार-बार होता है

वह पोलैंड के मूल निवासी सिनेमेट ग्राफ का

कुवा ब्रो जैक मिरोस्लाव फिल्म का

प्रोडक्शन डिजाइन काफी रंगीन है प्रीत सल

सिंह ने अल्लू अर्जुन के गेटअप पर काबिले

तारीफ काम किया

है नवीन नूली का संपादन बेहतर होता है

होता तो फिल्म कम से कम 20 मिनट कम हो

सकती थी साउथ सिनेमा में इस साल हनुमान ने

जिस होशियारी से सिनेमा को सादा उसे नागा

अस्वीन कल की 290 में आगे बढ़ाया और अब आ

गया है पुष्पा राज अपने इलाके और बॉक्स

ऑफिस पर रूल करने के लिए

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