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अगर
तूने
कम
नहीं
किया
ना
तो
तुझे
कुछ
हासिल
नहीं
होगा
जो
समय
आज
आप
खराब
कर
रहे
हैं
ना
कल
वही
समय
खून
के
आंसू
रुला
देगा
मकान
ऊपर
से
नीचे
की
ओर
नहीं
बनता
बल्कि
नीचे
से
ऊपर
की
ओर
बनता
है
जो
इंसान
बिना
मेहनत
की
रोटी
खाता
है
ना
चोरी
की
रोटी
खाकर
सभी
बड़े
सपनों
का
कत्ल
करने
वाला
जो
शब्द
है
वो
है.
साथियों
कभी
सोचा
है
कि
इंसान
नंगा
ही
क्यों
पैदा
होता
है
इसी
बात
को
आज
गहराई
से
सोचना
कि
पैदा
होते
वक्त
किसी
भी
इंसान
के
तन
पर
वस्त्र
नहीं
होते
प्रकृति
उसे
कुछ
नहीं
देती
खाली
हाथ
भेजती
है
होना
तो
ऐसा
चाहिए
था
कि
इधर
बच्चा
पैदा
हुआ
उधर
कुदरत
में
आसमान
से
उसकी
ज़रूरत
की
सभी
चीज़ें
टपका
दी
गाड़ी
भेज
दी
मकान
भेज
दिया
ऐशो
आराम
की
सभी
चीजें
भेज
दी
खाने
पीने
की
चीजें
भेज
दी
कि
ले
भाई
खा
पी
और
ऐश
कर
लेकिन
कुदरत
ऐसा
कभी
नहीं
करें
क्या
कुदरत
के
पास
ये
सब
चीजें
होती
नहीं
है
जरूर
होती
है
पर
कुदरत
कहती
है
कर्म
करो
और
जो
चाहता
है
मुझसे
तेरी
जरुरत
की
हर
चीज
दुनिया
में
मौजूद
है
तेरे
मन
में
इच्छाएं
जन्म
लेती
रहेंगी
लेकिन
कम
करके
तो
अपनी
हर
इच्छा
पूरी
करते
रहना
कुदरत
कहती
है
सावधान
रहना
अगर
तूने
कम
नहीं
किया
ना
तो
तुझे
कुछ
हासिल
नहीं
होगा
और
फिर
एक
दिन
मैं
तुझे
ऐसी
ही
वस्त्र
हीन
वापिस
बुला
लूंगी
पृथ्वी
का
सारा
वैभव
मुझे
पृथ्वी
पर
ही
छोड़ना
होगा
कुछ
भी
तेरे
साथ
न
जाएगा
सुख
और
दुख
मेरे
दो
दूत
तेरे
साथ
रहेंगे
हमेशा
तो
जैसे
जैसे
कर्म
करेगा
तुझे
वैसे
वैसे
फल
मिलते
रहेंगे
साथियों
ये
है
नेचर
का
चमत्कार
प्रकृति
कहती
है
इस
संसार
में
सब
कुछ
है
जो
तुम
सोच
सकते
हो
और
वो
भी
जो
नहीं
सोच
सकते
पर
कर्महीन
के
लिए
इस
दुनिया
में
कुछ
नहीं
है
गोस्वामी
तुलसीदास
जी
ने
बेहद
शानदार
लिखा
है
कि
सकल
पदारथ
हैं
जग
माहीं
कर्महीन
नर
पावत
नाहीं
यानी
इस
संसार
में
सब
कुछ
है
जो
तुम्हें
चाहिए
लेकिन
जो
कर्म
न
करे
उसके
लिए
कुछ
भी
नहीं
गाँधी
कहते
थे
सबसे
बढ़िया
कमाई.
पसीने
की
उन्होंने
कहा
जो
इंसान
बिना
मेहनत
की
रोटी
खाता
है
न
चोरी
की
रोटी
खाता
है
स्वाभिमानी
इंसान
कभी
दूसरों
की
मेहरबानियों
पर
जिंदा
नहीं
रहते
और
इस
वीडियो
में
मैं
आपको
बताऊंगा
कि
कोई
भी
काम
कभी
छोटा
नहीं
होता
लोगों
की
दिक्कत
क्या
है
जानते
हैं
मैं
बताता
हूं
बड़ा
काम
मिल
नहीं
रहा
और
छोटा
करेंगे
नहीं
तो
फिर
जिंदगी
में
क्या
करेंगे
क्या
यूँ
ही
जिन्दगी
का
बेड़ा
गरक
हो
जाने
देंगे
आज
ज़रूर
कुछ
लोगों
के
पास
जिंदगी
के
कुछ
सहारे
होंगे
माँ
बाप
का
सहारा
होगा
इधर
उधर
का
कोई
सहारा
होगा
लेकिन
कल
यदि
वो
सहारे
नहीं
रहे
तो
याद
करेंगे
हुजूर
इस
बात
को
अच्छे
से
समझ
लें
कि
जो
समय
आज
आप
खराब
कर
रहे
हैं
ना
वही
समय
खून
के
आंसू
रुला
देगा
और
यह
दुनिया
आपकी
बर्बादी
का
तमाशा
देखेगी
हंसते
हंसते
कामचोर
और
कर
महीनों
की
यही
गति
होती
नोट
कर
लो
आज
मेरी
बाद
की
दुनिया
में
समझदार
लोग
किसी
काम
को
छोटा
नहीं
समझते
वह
समझते
हैं
कि
छोटे
से
ही
बड़ा
हुआ
जाता
है
अरे
दोस्त
तुम
पूरा
इतिहास
उठाकर
देख
हमेशा
हर
चीज
छोटे
से
बढ़ी
हुई
है
खुद
सोचो
दिमाग
लगाओ
आप
बड़े
पैदा
हुए
थे
कि
छोटे
सीधा
बीस
साल
के
तो
पैदा
नहीं
हुए
थे
ना
धीरेधीरे
ही
बड़े
हुए
एक
छोटा
सा
बीज
ही
पेड़
बनता
है
मकान
ऊपर
से
नीचे
की
ओर
नहीं
बनता
बल्कि
नीचे
से
ऊपर
की
ओर
बनता
है
नोट
करो
ईश्वर
सर्वशक्तिमान
है
सारा
ब्रह्मांड
उनके
ही
हाथ
में
है
मगर
वह
भी
जब
इस
धरा
पर
आए
तो
बाल
रूप
में
ही
आए
फिर
चाहे
राम
हों
कृष्ण
हों
नानक
हो
या
कोई
पीर
पैगम्बर
प्रकृति
नेचर
हमेशा
छोटे
से
बड़े
होने
को
सपोर्ट
करती
है
इसलिए
किसी
भी
काम
को
कभी
छोटा
मत
समझना
कोई
भी
काम
हाथ
में
लेकर
मेहनत
और
लगन
से
उसे
बड़ा
बना
दें
उठो
कमर
कस
लो
कसम
उठा
लो
की
दुनिया
को
कुछ
करके
दिखाना
है
या
कुछ
बनना
है
गुमनामी
की
मौत
नहीं
मरना
पूरी
दुनिया
के
लिए
नहीं
तो
कम
से
कम
अपने
देश
के
लिए
देश
के
लिए
न
सही
तो
राज्य
के
लिए
हो
राज्य
के
लिए
न
सही
तो
सोसाइटी
के
लिए
ही
सही
ऐसी
मिसाल
कायम
करनी
है
कि
लोग
आपको
और
आपकी
मेहनत
को
कालांतर
तक
याद
रखें
कि
कोई
इस
धरती
पर
आया
था
और
अपने
पैरों
के
निशान
छोड़
गए
यह
दुनिया
आपको
एक
कर्मवीर
की
तरह
याद
करे
ना
कि
कामचोर
और
निकम्मे
इंसान
के
तौर
पर
दोस्तों
जहां
हो
वहीं
से
शुरू
करें
जैसे
हो
वही
से
शुरू
करो
बस
शुरू
करो
बड़े
से
नहीं
छोटे
से
शुरू
करो
यहां
सिखों
के
पांचवें
गुरु
श्री
अर्जुन
देव
के
बारे
में
बात
करना
बहुत
जरुरी
है
उनको
याद
करना
बहुत
जरुरी
है
अर्जुन
देव
जब
चौथे
गुरु
के
अखाड़े
में
शामिल
हुए
तो
रिचुअल
के
अकॉर्डिंग
उन्हें
छोटे
छोटे
काम
करने
को
दिए
गए
उन
कामों
में
झूठे
बर्तन
साफ
करना
शामिल
था
अर्जुन
देव
जी
को
जो
भी
काम
बताया
गया
उन्होंने
बड़ी
लगन
और
ईमानदारी
से
उसे
पूरा
कर
दिया
उन्होंने
छोटे
काम
करने
में
कोई
संकोच
नहीं
किया
ना
ही
किसी
तरह
का
कोई
इनफिनिटी
कॉम्प्लेक्स
में
आए
वहां
मौजूद
बाकी
अन्य
शिष्य
सत्संग
का
आनंद
लेते
थे
मौज
ले
रहे
थे
परन्तु
श्री
अर्जुन
देव
आधी
आधी
रात
तक
काम
में
लगे
रहते
और
काम
पूरा
करके
ही
आराम
करते
थे
वहां
के
लोगों
में
यह
परसेप्शन
बन
गई
कि
गुरूजी
अर्जुनदेव
को
तुच्छ
समझते
हैं
इसलिए
छोटे
मोटे
काम
ही
इनको
देते
हैं
मगर
उन्हें
नहीं
पता
था
कि
गुरुजी
सच्चे
पार
की
है
गुरुजी
की
समाधि
का
वक्त
आया
समाधि
लेने
से
पहले
गुरुजी
ने
अपने
शिष्यों
में
से
एक
उत्तराधिकारी
चुना
और
उसका
नाम
एक
लिफाफे
में
डालकर
लिफाफा
बंद
कर
दिया
उनकी
समाधि
लेने
के
बाद
जब
वह
लिफाफा
खोला
गया
तो
सब
हैरान
हो
गए
उसमें
अर्जुन
देव
जी
का
नाम
लिखा
था
तब
अन्य
शिष्यों
को
समझ
आया
कि
जिस
काम
को
तुम
छोटा
समझते
हो
ना
उसी
में
गुरु
आपकी
असली
परीक्षा
लेते
हैं
कि
जो
इंसान
छोटा
काम
नहीं
कर
सकता
वह
बड़ा
काम
कैसे
करेगा
जो
इंसान
कम
वजन
ना
उठा
सके
उसे
भारी
वजन
कैसे
दिया
जा
सकता
है
स्वामी
विवेकानंद
कहा
करते
थे
कोई
काम
छोटा
नहीं
यदि
मनपसंद
काम
मिल
जाए
तो
मूर्ख
भी
उसे
पूरा
कर
लेते
हैं
किन्तु
बुद्धिमान
इंसान
वही
है
जो
हर
काम
को
अपने
लिए
पसंद
का
काम
बना
ले
और
उसी
में
रम
जाए
आपको
जानकर
बड़ी
हैरानी
होगी
मेरे
दोस्त
की
कभी
ब्रिटेन
के
अंदर
बेकारी
का
दंड
दिया
जाता
था
यानी
जो
इंसान
बेकार
बैठा
है
उसे
दंडित
यानी
पनिशमेंट
मिलती
थी
पहली
बार
किसी
को
बेकारी
के
जुर्म
में
पकड़े
जाने
पर
उस
इंसान
को
जज
के
सामने
पेश
कर
उसका
गुनाह
सबमिट
किया
जाता
था
दूसरी
बार
अगर
वही
इंसान
बेकारी
के
जुर्म
में
पकड़ा
जाता
था
उसके
हाथ
दाग
दिए
जाते
थे
कोड़े
मारे
जाते
थे
और
कान
का
ऊपर
का
भाग
काट
दिया
जाता
था
तीसरी
बार
उसे
कैद
की
सजा
सुनाई
जाती
थी
और
चौथी
बार
मृत्यु
धन
भी
दे
दिया
जाता
था
और
यह
लॉस
सिर्फ
ब्रिटेन
में
नहीं
था
पूरे
यूनान
में
भी
बेकारी
के
अपराध
का
दण्ड
भोगना
पड़ता
था
आप
सोचकर
देखिए
अगर
पूरी
दुनिया
में
जो
खाली
और
बेकार
बैठे
हैं
निकम्मे
और
आलसी
हैं
अगर
उनको
ऐसी
पनिशमेंट
मिल
जाए
तो
क्या
होगा
यह
दुनिया
कहाँ
से
कहाँ
पहुँच
जायेगी
सभी
बड़े
सपनों
का
कत्ल
करने
वाला
जो
शब्द
है
वो
है
आलस
आलस
एक
बहुत
ही
मीठा
दुश्मन
है
यह
बड़ी
धीरे
से
आपको
बोलेगा
अरे
भाई
अगर
थक
गये
हो
तो
थोडा
आराम
करना
क्यों
शरीर
खराब
कर
रहे
हो
कोल्हू
के
बैल
की
तरह
लगे
हो
थोडा
आराम
पर
काम
तो
रोज
करना
इस
आलस
की
वजह
से
ही
खरगोश
जैसा
जानवर
कछुए
से
रेस
हार
जाता
है
कि
चलो
थोडा
आराम
कर
लें
कछुआ
तो
अभी
बहुत
दूर
है
दोस्त
इस
दुनिया
में
आलस
से
बड़ा
कोई
दुश्मन
नहीं
इसे
तुरंत
मार
डालो
दुनिया
के
एक
बहुत
बड़े
लेखक
हुए
खलील
जिब्रान
वह
कहते
थे
तुम
बहुत
भले
हो
जब
अपने
गोल
की
और
पूरी
ताकत
से
बढ़ते
लेकिन
बुरे
तुम
तब
भी
नहीं
जब
अपने
गोल
की
ओर
लंगड़ाते
लंगड़ाते
जाते
क्योंकि
लंगड़ाते
हुए
चलने
वाले
लोग
भी
कभी
पीछे
की
ओर
नहीं
जाते
इसलिए
दौड.
दौड़
नहीं
सकते
चलो
चल
नहीं
सकते
तो
रेगो
बस
बैठूंगा
साथियों
अगर
आप
हमारे
चैनल
पर
नए
हैं
तो
इसे
सब्सक्राइब
जरूर
करें
ताकि
अगले
वीडियो
का
नोटिफिकेशन
आपको
मिल
सके
अगले
किसी
और
शानदार
वीडियो
के
साथ
आपसे
जल्दी
ही
मिलता
हूँ
खूब
मेहनत
करिए
खूब
मेहनत
करिए
खूब
मेहनत
करिए
जय.
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