All language subtitles for laapataa ladies 2024

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Original subtitles

सभी पात्र काल्पनिक हैं और किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से संबंध संयोगमात्र है।

इस फ़िल्म का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या समुदाय का अपमान करना नहीं है।

निर्मल प्रदेश, भारत जनवरी 2001

[एक महिला] रिंकू, क्या कर रहे हो? जल्दी आओ!

ये खोइछा पति की रक्षा और मंगल के लिए होता है।

इसे संभालकर रखना।

- [दूसरी महिला] ए, मुन्ना! - हाँ?

[दूसरी महिला] यहाँ आओ।

[एक महिला] दामाद जी, चलें?

चली जाएगी मेरी बेटी…

अरे संभलकर। लगी क्या, फूल?

नहीं।

एक बार घूँघट ले लिया,

तो आगे नहीं नीचे देखकर चलना सीखो।

बैठो…

♪ छोड़ के चली मैं घर, पिया जी के साथ ♪

♪ नाम उनका ही बोले मेहंदी के हाथ ♪

♪ पल्लू आँखों तक आया कैसे हो नज़रें चार ♪

♪ साइया जी संग हैं, तो लगेगा बेड़ा पार ♪

[एक आदमी] आ जाओ! बस आ गई! चलो सारे!

अरे अंदर जगह नहीं है, ऊपर चढ़िए।

- जल्दी, चढ़ो-चढ़ो। - अरविंद, सामान लो जल्दी!

- फूल… - [एक आदमी] चलो, चलो।

अपना ये सारा गहना-वहना उतार के…

हमको दे दो।

बस में बहुत भीड़ है ना।

चोरी हो जाएगा, पता भी नहीं चलेगा।

हमारे यहाँ एक कहावत है…

"जेवर चोरी दो दुख पाना। छोटा दुख चोरी, बड़ा दुख थाना।"

♪ हाय, पहना है सूट-बूट हमारा पिया ♪

♪ सातों जन्म का टिकट है लिया ♪

♪ अब इस सफर की हुई है शुरुआत ♪

♪ थामा इन्होंने जब हाथों में हाथ ♪

♪ अनजानी सी डगर है ये जिया बेकरार ♪

♪ सइयाँ जी संग हैं ♪

- ♪ तो लगेगा बेड़ा पार ♪ - बेलपुर-कटरिया वाले, आगे आना!

ये लो तृतीया पे बलि हुआ एक और जोड़ा आ गया।

शुभ दिन पे शादी कर के जैसे शंकर-पार्वती बन जाते हैं!

भैया, ज़रा बैठा लो, लेडीज हैं।

बैठने दो।

आइए, बहन जी। बैठिए।

अरे, सरक।

प्रदीप का इससे अच्छा है।

शादी में क्या मिला?

मोटर साइकिल तो कॉमन चल रहा है आज कल।

हाँ, हम को भी मिला है।

और वो भी टैंक फुल!

- हाँ? - हाँ।

हम को तो मोटर साइकिल,

- और डेढ़ लाख कैश, - हैं!

और मोबाइल मिला है।

हाँ, मोबाइल तो मिला, अब टावर क्या हमारे बाऊ जी लगवाएँगे!

रखो अपने पास।

तुमको क्या मिला बताए नहीं?

ज़रूर लड़के में कोई खोट होगा।

स्टेशन आने से पहले हम टॉइलेट होकर आते हैं, ठीक है?

- तुम यहीं बैठी रहना। - [एकदम धीमी आवाज़ में] हाँ।

[अनाउंसमेंट] यात्रीगण, कृपया ध्यान दें। गाड़ी नंबर…

- 1256… - पानी बोलो! पानी-पानी।

- [प्रदीप] ए, पानी! - हाँ, साहब।

एक पैकेट पानी दे।

- कितना हुआ? - एक रुपया।

अरे, अजीब आदमी है, यार!

अरे, स्टेशन पर ज़्यादा देर थोड़ी ना गाड़ी रुकता है।

पानी बोलो पानी? ठंडा पानी बोलो! पानी, पानी!

ये कोई तरीका हुआ? हैं?

- [एक आदमी] क्या तरीका? - पहले निकालना था।

जाओ आराम से।

[एक आदमी] गर्मा-गरम सिंघाड़ा! सस्ता सिंघाड़ा!

देख नहीं रही हो जगह खाली हुआ है?

- आ के बैठो। - [वही आदमी] गर्मा-गरम सिंघाड़ा!

खिसकिए ना उधर, जगह हो गई।

अच्छा से बैठेंगे अब।

[एक आदमी] अरे अंदर तरफ चलो ना। मिल जाएगा।

वो देखो वहाँ पे जगह है, देखो बन गया थोड़ा सा।

सरकिए जरा।

- [वही आदमी] पानी का बोतल ले लिए थे? - [दूसरा आदमी] हाँ, हाँ हम ले लिए थे।

धत!

इससे तो पहले ही अच्छा था।

उठो। स्टेशन आ गया उठो।

जल्दी चलो, आखिरी बस है निकल जाएगा।

[एक आदमी] अरे क्या हुआ? चलो।

एक सीट है वहाँ। जल्दी बैठो।

बैठो, बैठो।

पुष्पा ट्रेवल्स

अगले महीने ब्याह है ना।

तो सुहागरात का बहुत टेंशन है यार।

अब दीपू आए, तो सिस्टम थोड़ा समझेंगे।

भैया, हम जाएँ?

अर, हट!

तुम्हारे भरोसे गाना तैयार हुआ है और तुम कह रहे हो कि…

- अरे बस आ गई! बस आ गई! - अरे उठो!

अरे चलो, चलो।

चालू कर दो!

अरे दूल्हे राजा!

लाओ, लाओ।

ये क्या ले आए हो बे?

ताम झाम तो मतलब तुम एक दम…

कैसे किया?

अरे अभी से ही पूछ लोगे क्या, हैं! चलो जल्दी।

[एक आदमी] अरे भाभी,

[वही आदमी] चलिए।

चाचा, प्रणाम।

आपकी बहू।

- नई चाची आ गई! - नई चाची आ गई!

- अरे, सुनो! दीपू आ गया! - [बच्चे] नई चाची आ गई!

- [बच्चे] नई चाची आ गई! - आई।

आ गया तुम्हारा बेटा।

अरे, बबलू!

कहाँ छोड़ के चले गए थे हम को?

- आप ही चाची के पास रुक गए! - प्रणाम, बाऊ जी।

खुश रहो। बहुत देर कर दिया तुमने?

अरे वक़्त पे कुछ चलता ही कहाँ है इस देश में बाऊ जी?

- [भोजपुरी में] अम्मा, पाय लागूँ। - खुश रहो, बेटा। आ जाओ।

- अरे बहू को ले ले? - हम भूल ही गए। आ जा।

हम तो कब से चिंता में थे कि क्या हुआ।

- प्रणाम, दादी। - खुश रहो।

- [भोजपुरी में] यशोदा, मंदिर में मन्नत - हाँ?

[भोजपुरी में] का एक दीया जला दे।

रोटी से ज़्यादा घी इनके मन्नत का दीया पी जाता है।

- [यशोदा] ए पूनम, पूजा की थाली ले आओ तो। - दादा जी को प्रणाम कर लो।

[यशोदा] दिया जला के ले आना।

हँस के!

दादा, प्रणाम।

- जागते रहो! - अरे, आज तो "जीते रहो" कह देते!

अरे वो नहीं हो पाएगा!

श्रवण भैया शहर पहुँच गए क्या, भौजी?

आजा बेटा, यहाँ आ जा।

पूनम, थाली दे तो।

यशोदा, हम पूजा करेंगे।

लो कर लो, हाँ?

हमारी तेरहवीं का पूजा भी इन्हीं से करवाना।

नहीं, नहीं। अब तुम ही कर लो।

नहीं, नहीं कर लो, अम्मा।

क्या पता बबलू की शादी तक मौका मिले ना मिले।

नहीं, नहीं अब तुम ही करो।

लो।

दो फिर।

मेरा बच्चा…

अरे शाबाश!

घूँघट ऊपर उठा लो, बेटा। सब घर वाले ही हैं।

क्या हुआ?

घूँघट हटाओ, फूल।

[एक महिला] शर्मा रही है!

[एक महिला भोजपुरी में] हाँ, उठाओ घूँघट।

अरे, मैया!

- [एक आदमी] क्या हो गया? - [कुछ महिलाएँ] अरे, क्या हो गया?

- [एक महिला] अरे! - [दूसरी महिला भोजपुरी में] ये क्या हो गया!

[दूसरा आदमी] क्या हुआ?

- ये कौन है रे? - ये कौन है?

- तुम… कौन? - [एक महिला] कौन है?

[दूसरी औरत] तेरी दुल्हन नहीं है क्या?

हम? तुम…

हम ट्रेन में…

[एक महिला] ट्रेन में क्या हुआ?

[दीपू की आवाज़] क्या हुआ? चलो।

[बबलू] चाची बदली हो गईं?

चाची बदली हो गईं! चाची बदली हो गईं!

- [बबलू] चाची बदली हो गईं! - [दीपू के पापा] अरे, बबलू!

अरे, पूनम रोक उसको! पूरे गाँव में भौंकता फिरेगा।

अरे, बबलू!

भाभी को ही गुम कर दिया।

अरे धत!

हमारे बाप-दादा ने भी नहीं सुना, ऐसा गजब किया है, दीपक।

अरे साथ कौन चल रहा है वो कैस पता नहीं चला?

सामान बदल जाए, जूता बदल जाए।

साइकिल, छतरी, अटैची किसी और की उठा ले आदमी।

अरे, दूसरे की घर वाली, कैसे उठा लाता है कोई!

बाऊ जी, लाल साड़ी एक जैसी, कद-काठी एक जैसी,

- और घूँघट ओढ़ रखी, तो-- - एक दम चुप!

घूँघट था!

ठीक ही तो कह रहे हैं।

[एक महिला] ठीक कह रहे हैं?

इस तंबू जैसे घूँघट के पार, ना तो लेडीज का शक्ल दिखता है…

और ना लेडीज को जूते के अलावा कुछ और दिखता है।

अरे तो जूते ही पहचान लेती।

- [एक आदमी] हाँ! - [दूसरा आदमी] ऐसे कैसे हो गया?

पति भी नया, जूता भी नया।

कैसे पहचानती?

एक तो ट्रेन में इतनी भीड़।

एक ही डिब्बे में दो से तीन शादी वाला जोड़ा और था।

कोई भी गड़बड़ नहीं कर देगा क्या?

और जो ट्रेन में रह गई है ना…

वो भी तो घूँघट में है।

उसको तो पता भी नहीं होगा कि ये निकल आए हैं।

[एक औरत] वो वहाँ परेशान हो रही होगी।

[एक आदमी] बहुत गलत हो रहा है।

बाऊ जी…

स्टेशन जा रहे हैं।

- हाँ, जाओ। - [एक महिला] अब होश आ रहा है!

रूक, दीपू!

- हम भी आते हैं। - [दीपू के पापा] तू भी जा।

- चल! - अरे, चल चल।

इनका क्या करें?

इनकी भी तो ढूँढाई हो रही होगी ना?

- साथ में ले चलें? - हट!

डबल-सीट साइकिलबाजी करोगे, वो भी किसी और की औरत के साथ?

साला!

क्या नाम है तुम्हारा?

पुष्पा।

पुष्पा रानी।

- पति का नाम? - धत!

कोई औरत अपने मुँह से अपने पति का नाम लेती है?

[एक आदमी] हाँ, सही बात है।

[पुष्पा] पंकज।

कौन से गाँव में मायका है?

संबेला।

वो किधर पड़ता है?

- छत्तीसगढ़। - [एक महिला] छत्तीसगढ़!

छत्तीसगढ़!

कौन स्टेशन ससुराल जा रही थी?

याद नहीं।

घर में कोई फ़ोन है?

हाँ, तो नंबर लिखवाओ। अरे गुंजन, लिख रे नंबर।

[दीपू के पापा] ए पूनम, ये तुम्हारे कमरे में रहेगी।

[प्रदीप की माँ] टूटे ना कोई सामान देख के आना। हाँ।

[प्रदीप] चलो उठो!

[प्रदीप की माँ] उधर नीचे मत रखो। इधर रखो बगल में।

- अरे गिरो मत। - कहाँ चली गई?

- हाँ। - जया?

[प्रदीप] जया?

आराम से, हाँ। बस-बस।

ओ, जया!

कहाँ है?

जया!

माफ़ करना। हमने समझा कोई और है।

खो गई हो?

हम मदद कर दें?

- मिल जाए ना, बताते हैं इसको हम। - अरे मिली? बेटा, मिली?

अरे, नहीं।

- हे, भगवान कहाँ गई? - धत साला, फ़ोन भी उसी के पास है!

- [एक आदमी] रिक्शा! - [दूसरा आदमी] कहाँ जाना है, भैया?

- [एक आदमी] रिक्शा! - अभी रात को कुछ नहीं मिलने वाला है।

- रिक्शा? - आइए सस्ते में करा देंगे।

- अरे भैया, रिक्शा? - सस्ता है! आइए।

- कहाँ जाना है? - रिक्शा!

अकेली हैं! आओ ना दीदी!

- कौन से गाँव जाना है? - आइए दीदी, आइए ना।

अरे आइए, हम छोड़ देते हैं।

अरे आपका सामान किधर है?

- अरे दीदी, हमारे साथ… - अरे दीदी, सुनिए तो!

- हाय, कहाँ चली गई? - धत, साला!

फ़ोन हम को दे देते ना। पर नहीं।

बीवी आते ही, अम्मा तो काँटने को दौड़ती है ना।

- तुम चुप बैठोगी! - अरे चाचा, प्रणाम।

चाची…

- प्रणाम। - हाँ।

अरे क्या हुआ प्रदीप भैया?

- परेशान दिख रहे हो। - हाँ, आशीर्वाद!

- अरे जया नहीं मिल रही है ससूरी! - हाँ।

देखो ज़रा।

- नहीं मिल रही है। - हाँ, हाँ। मैं देखता हूँ।

- ए, शंभू! - हाँ, भैया?

- इन दोनों को ले जा गोकुलपुर। - हाँ।

- चाचा, चलो। - चल रहे हैं।

अरे ठीक से देखना!

हमारा चढ़ाया हुआ मंगलसूत्र, कंगन समेत

दहेज का 15 तोला सोना पहनी है।

एक तो थके-हारे सब… अब ये ढूँढने की खिटपीट।

अरे मिल जाएगा, चाची।

- अरे कैसे, चिंता तो होगी ना। - अरे देखो, लड़का ऐसे ही परेशान है।

- तुम उसकी परेशानी और बढ़ा देती हो। - चलो, चलो। जल्दी चलो।

प्रदीप भैया…

- अरे साला, ले आया? - हाँ, ले आया।

- शाबाश! जा। - हाँ।

- ठीक से देखना। - हाँ।

फूल!

फूल!

मूर्ती

दिल छोटा मत कर, दीपू।

हम ढूँढ निकालेंगे भाभी को।

जया भाभी?

भाभी!

प्रदीप भैया।

आखिर तक देखे हैं। कहीं नहीं मिली।

अरे भाड़ में जाए साला!

कल तक नहीं मिली ना,

- तो थाने और उसके मायके खबर भेज देंगे। - हाँ, ठीक है।

- ठीक है। - वैसे भी,

दहेज का फटफटिया तो आ ही चुका है ना घर में।

हैं?

चल, डोली के घर चलते हैं।

अरे, प्रदीप भैया!

अबे सुहागरात है, मनाना तो पड़ेगा ना!

- चलो। - हाँ!

मेरा इस्तेमाल करें

[भैंस के रंभाने की आवाज़]

जागते रहो!

[खर्राटे लेने की आवाज़]

[ट्रेन के हॉर्न की आवाज़]

ए, लड़की!

अरे, रुको तो! अरे, सुनो तो!

ए, अब्दुल!

क्यों पीछे पड़ा है बे?

देख।

डर गई बेचारी।

ट्रेन से गिर गया था, तो पैर कट गया।

यहाँ थोड़ा आगे मिला था पटरी पर।

तब ही से यहाँ है।

जितना डरावना दिखता है उतना है नहीं।

कहाँ जाना है तुमको?

खो गई हो?

हम मदद करेंगे।

आओ।

अरे आओ, डरो मत। चलो।

श्रीमती फूल कुमारी।

पति का नाम?

अरे अब नाम नहीं लोगी तो ढूँढेंगे कैसे?

दीपक।

तुम निकली कहाँ से थी?

घर से।

गंगापुर से।

इस देश में जहाँ गंगा जी नहीं बहती,

वहाँ भी हर चार गाँव पर गंगापुर पड़ता है।

दो गंगापुर तो यहाँ पतीला में ही है।

स्टेशन कौन सा?

अरे रेलगाड़ी कहाँ से पकड़ी थी तुम?

मेरे गाँव का कोई स्टेशन नहीं लगता है।

खेत के बीच में रेल की पटरी थी वहाँ से चढ़ाया हम को।

पति के साथ उतरी ना तुम?

और फिर वो गायब हो गया?

इसका मतलब चांस है कि तुम्हारा ससुराल पतीला में ही हो। यहीं कहीं।

बराबर?

हम आसपास के गाँव के नाम लेते हैं, शायद कोई याद आ जाए।

हम्म?

छतिहारी, गरौनी।

जिउल, खबरिया।

बानापुरी, रिवाल।

नेतियाली, मंगतिया।

लगौली, सिलपैंती।

इनमें से कोई नाम सुना है?

किसी फूल के नाम पर था ससुराल।

अरे लेकिन फूल तो तुम्हारा नाम है ना!

इसको नाम नंबर कुछ याद नहीं है, हम कैसे ढूँढें?

ए छोटु, इसको थाने में ले जाओ।

नहीं, नहीं। हम थाने नहीं जाएँगे।

वो हम को ढूँढते हुए आएँगे। पर हम थाने नहीं जाएँगे।

क्यों नहीं जाओगी थाने? हैं?

"जेवर चोरी दो दुख पाना।

छोटा दुख चोरी,

बड़ा दुख थाना।"

[गुनगुनाने की आवाज़]

डर गए हम!

अम्मा जी, हमारा ये गहना और कपड़ा संभाल के रख दोगी?

जाते वक़्त ले लेंगे हम आपसे।

[दीपू का दोस्त] दीपू, जल्दी आ।

- [दीपू] आया! - [यशोदा] रुक जा दीपू,

दो रोटी ले के जा, बेटा।

अम्मा, रहने दो, हम को देर हो जाएगी।

[यशोदा] हो गया, बेटा।

इधर आओ।

जी, बाऊ जी?

ये घड़ी और नया कमीज उतार लो, वरना पुलिस उतार लेगा।

थाने में समस्या बताओ, हैसियत नहीं।

जी, बाऊ जी।

- आ रहे हैं हम। - हाँ।

पुष्पा।

वो…

तुम भी थाना चलो।

एक ही बार में सारी पूछताछ हो जाएगी।

डर लगता है।

वो… कल रात तो कोई फ़ोन मिला नहीं,

पर हम आज तुम्हारे घर खबर कर देंगे कि तुम ठीक-ठाक हो।

हम अपनी गलती पर बहुत शर्मिंदा हैं।

तुम फिक्र मत करना।

फूल मिले ना मिले, हम तुम को सही ठिकाने पहुँचा देंगे।

ये वादा है तुमसे।

[यशोदा] ये ले, बेटा। रोटी ले।

♪ रंगी सारी… रंगी सारी… ♪

♪ गुलाबी चुनरिया रे ♪

♪ मुझे मारे नज़र सावरिया रे ♪

♪ मुझे मारे नज़र ♪

- ♪ सावरिया ♪ - बैठो, बैठो।

गाने का दस हज़ार रुपया कम किया है, मैडम।

जी।

♪ जाओ जी जाओ ♪

♪ करो ना बातें ♪

♪ जाओ जी जाओ ♪

- ♪ करो ना बातें ♪ - ओए, चल!

[भोजपुरी में] ♪ सुनो जी, बालिग ♪

- [श्याम मनोहर] वाह! क्या बात है! - ♪ सुनो जी, बालिग मेरी उम्र है ♪

दोबारा पी के मार-पिटाई मत करना।

मम्मी को प्रॉब्लम होता है।

ठीक है, जाइए।

अरे!

चल।

सर, हम गुंजन हैं, सर।

हम एमएलए साहब के खास हैं सर।

सर… ये हमारा दोस्त है दीपक।

दीपक कुमार।

इसकी तीन दिन पहले शादी हुई।

कल रात को विदा करा के वापस लौट रहा था,

तो रास्ते में इसकी बीवी खो गई, सर।

कैसे बे?

हम इतने साल से कोशिश कर रहे हैं, ससुरी खो ही नहीं रही है!

[एक आदमी के हँसने की आवाज़]

सर, मज़ाक लाइक करते हैं।

पंद्रह हज़ार रुपया।

ये तो पाँच है बे। बाकी दस?

ये भी गाना गा देगा, सर।

तुम गा दो।

ओह धत!

हम को तो नहीं आता।

कोई बात नहीं। हम सीखा देंगे। बेला जी!

सर, आप कहें तो एमएलए साहब से फ़ोन पे बात करा दें, सर?

- दुबे जी। - जी।

रजिस्टर खोलिए।

जी। बोलो।

सर, हम सूरजमुखी गाँव से हूँ।

आज से चार दिन पहले, यानि 27 तारीख को मेरी शादी हुई थी गंगापुर की फूल कुमारी के साथ।

शादी की अगले ही सुबह मेरी पूरी फैमिली घर लौट गई, पर हम वहीं रुका।

क्योंकि फूल की मरी नानी की आखिरी मन्नत थी,

कि फूल की शादी पे उसकी कुल देवी को भोग चढ़ाने का।

तो उसी वजह से दो दिन हम ससुराल में साथ रहे।

दो दिन बीवी के साथ ससुराल में रुके ना?

चलो शादी का कुछ खर्चा तो वसूल हुआ, हैं ना दुबे जी?

कल विदाई था तो हम लौट रहे थे।

तो हम बेलपुर-कटरिया एक्स्प्रेस पर चढ़े, हम वहाँ से मूर्ती स्टेशन उतरे।

मूर्ती स्टेशन से बस पकड़ के सीधा घर पहुँचे।

सर, घर पहुँचे तो देखा कि जिसको हम अपने साथ ले आया हूँ…

वो मेरी फूल नहीं थी।

तो कौन थी?

पुष्पा।

किसी और की दुल्हन।

बढ़िया! मतलब तुम,

सिर्फ अपनी बीवी को नहीं खोया है, किसी और की बीवी भी उठा लाए हो।

सर, जान बूझकर नहीं किया है।

हम तो सपने में भी नहीं सोचे थे कि वो मेरी फूल नहीं है। कोई पुष्पा है।

क्या नाम बताया?

पुष्पा रानी।

किसकी बीवी है?

किसी पंकज की।

उसको क्यों नहीं लाए?

सर, हम कहे थे, वो थाने का नाम सुनकर डर गई।

अबे थाने में ऐसी कौन से डर की बात है बे?

अपनी वाली का फोटो लाए हो?

हाँ, सर। लाए हैं।

इकलौता फोटो है। शादी के दिन खिंचवाए थे।

वाह!

बहुत सुंदर है बे।

कोई निशानी, तिल, मस्सा, चोट का निशान है इसके शरीर पर?

हाँ, सर। उसके नाक के नीचे एक तिल है।

एकदम सरसों बराबर।

अरे, हम तो फोटो में मिस ही कर गए।

दुबे जी, लिखो!

नाक के नीचे तिल।

सरसों बराबर।

कितने का जेवर पहनी है?

सभी उतरवा लिए, सर।

जिसको लाए हो घर, वो कितने का पहनी है?

पहनी हुई है ठीक-ठाक।

कहाँ की है?

छत्तीसगढ़ की है, सर।

मायके में एक फ़ोन है मगर हर बार गलत नंबर मिल रहा है।

अच्छा?

ठीक है। ढूँढाई शुरू करते हैं। तुम लोग जाओ।

और हाँ…

कल ये पुष्पा रानी को ले आना।

जी।

सर, इन्हीं पे अपहरण का केस ठोक दें?

363 और 366 में दबोच लेते हैं सालों को।

उसकी कमीज़ देखी थी? हाँ?

पैदाइशी गरीब है।

उस साले को अंदर डाल के क्या मिलेगा?

असली सोने की चिड़िया तो है वो…

पुष्पा रानी।

देखते हैं आती है कि नहीं।

जी सर।

बदली हुई चाची खो गईं!

- बदली हुई चाची भी खो गईं! - हैं?

बदली हुई चाची भी खो गईं! बदली हुई चाची भी…

- खो गईं! - अम्मा, ये बबलू क्या कह रहा है?

वो पुष्पा रानी…

तुम वहाँ थाने गए वो यहाँ मंदिर गई,

मंदिर की ही हो के रह गई।

अरे तो जाने क्यों दिया अकेले?

तो भक्ति करने का फुर्सत किस को है घर में?

सतीश की साइकिल पर पूरा गाँव देख आए हम।

कहीं दिखी नहीं।

कोई सुनेगा तो क्या कहेगा?

कि कैसे गैर ज़िम्मेदार लोग हैं, दो दिन में दो औरत खो दी!

ऐसी दुर्घटना तो पहली बार सुनी मैंने।

तभी तो हम बोले कि, "मंजू माई की दुकान पर चल।

वो तोड़ निकालेगी।"

छोटा था तब से ही यहाँ काम करता हूँ।

माई बहुत दयालु है।

बर्तन माँझ तू।

गाँव का नाम-वाम पता होता तो किसी तरह पहुँचा देते हम।

वही तो!

कहती है किसी फूल के नाम से है गाँव का नाम।

गुलाब, कमल, चम्पा, चमेली, मोतिया, कनेर, धतूरा।

सब पूछ लिया।

फुलवारी का सब फूल ही खत्म हो गया

पर इस फूलकुमारी का ससुराल नहीं मिला।

और मायका कौन सा गंगापुर है, ये इसको पता नहीं।

और वो मिल भी जाए, तो इसको जाना नहीं।

क्यों बे?

बहुत बदनामी होगी, दादी।

सब कहेंगे कि फूल में ही कोई दोष-गुनाह होगा।

पति स्टेशन पर छोड़ आया।

कितना समोसा लिए थे?

दो।

तो चौथी बार चटनी क्यों ले रहा है?

चटनी चाटने की चीज़ है, पीने की नहीं।

गटको मत!

गाँव वालों के बारे में घर जा के सोचना।

पहले खोज-खाज के मायके चली जा चुपचाप।

एक चाय और ब्रेड पकोड़ा।

भले घर की बहू-बेटी बिना पति के मायके नहीं जाती।

ये लो।

"फ्रॉड" का मतलब जानती हो?

किसी को ठगने को, उल्लू बनाने को अंग्रेज़ी में "फ्रॉड" कहते हैं।

इस देश में लड़की लोगों के साथ हज़ारों सालों से एक फ्रॉड चल रहा है।

जिसका नाम है…

"भले घर की बहू-बेटी"।

मेरे साथ कोई फ्रॉड नहीं हुआ है।

हम को बहुत अच्छी शिक्षा दी गई है।

बहुत अच्छा बनाया गया है।

सलमान खान का पता बता छोटू?

गैलेक्सी अपार्टमेंट, बांद्रा, मुंबई।

छोटू जिस घर कभी जाने वाला नहीं, वहाँ का पता अपने आप याद कर लिया।

और तुम को जिस घर पूरी ज़िंदगी रहना है, वहाँ का पता तक याद नहीं।

तुम्हारी अम्मा ने तुम को अच्छा नहीं बनाया है,

बेवकूफ बनाया है।

हम बेवकूफ नहीं है।

हम को घर का सब काम आता है, दादी।

- कपड़ा सिलना, खाना बनाना, भजन, कीर्तन… - घर जाना आता है?

बेवकूफ होना शर्म की बात नहीं है।

बेवकूफ होने पे गर्व करना ये शर्म की बात है।

ले के जा इसको यहाँ से।

कहाँ जाएगी, मंजू माई?

- आप दो दिन रख लेती। - अरे चल भाग यहाँ से!

धर्मशाला खोली है क्या हमने?

[भोजपुरी में] कंधे पे बिठाओ तो तुरंत कान में मूत रही।

जय भोलेनाथ, दरोगा बाबू!

अरे, प्रदीप भैया!

सुबह-सुबह क्या कांड कर दिए कि थाना आना पड़ा?

फिर से मार-मरोड़ दिया क्या किसी को? हैं?

हमने ससुराल तक खबर भिजवा दी है।

सोचा आपको भी बता दें।

वरना पहली को जलाने का इल्ज़ाम लगाए थे,

बोलेंगे दूसरी को भी निगल गया।

पहले ही रिपोर्ट लिख लो।

अरे हुआ क्या?

बीवी खो गई है हमारी।

हाँ, बोलिए।

मिल गईं! बदली हुई चाची मिल गईं।

ए, चुप! वो चाची नहीं है तेरी।

तुम पुष्पा हो?

हाँ।

अरे, कहाँ चली गई थी?

अरे, बोल ही के तो गई थी कि मंदिर जा रहे हैं।

कीर्तन में ही बैठे थे।

पाँच घंटा कीर्तन की?

ससुराल जाना है कि सीधा स्वर्ग?

खुद तो मंदिर जाने के नाम पे मोच आ जाती है,

और जो हो के आई है उस पे चिल्ला रही है।

मंदिर तो गए थे हम,

तुम तो नहीं दिखी हम को।

वो, नए हैं ना इसलिए घूँघट लंबा खींच के रखे थे।

अरे, जान ले लेगा ये घूँघट ससुरा!

हाँ, और डांटो हमको कि फूल बदली हो गई तो कैसे पता नहीं चला।

अब पता चला कैसे पता नहीं चला?

ए, उल्टा जवाब मत दो बाऊ जी को, दीपू!

प्रसाद।

चलो अंदर।

मुँह क्या देख रही है?

[यशोदा] चाय चढ़ा, भूखे हैं सब।

वो ज्योतिष महाराज वेद प्रकाश से दक्षिणा वापस माँगो।

राम जाने कौन से मुहूर्त में शादी करवाए।

अम्मा, हम चाय नहीं पीएँगे।

[दीपू के पापा] क्या बोले दरोगा?

[दीपू] बोले खोजेंगे।

राशन कार्ड

[दीपू के पापा] कुछ माँगा क्या?

[दीपू] 15 माँगे।

[दीपू] पाँच दिए।

पुष्पा के घर फ़ोन किया हमने।

बार-बार गलत जगह लग रहा है।

दरोगा जी ने कल थाने में बुलाया है।

तुम को आना पड़ेगा, पुष्पा।

अच्छा सुनो, फूल के मायके तार कर दे क्या?

और उसमें लिखेंगे क्या?

"कि हम से फूल खो गई। हम को माफ़ कर दो।"

रुक ही जा दो दिन।

भगवान करें, ये फूल का पता लग जाए।

ये बताने-छिपाने की समस्या ही खत्म हो जाएगी।

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ कैसे कटे दिन-रात? ♪

♪ कैसे हो तुझसे बात? ♪

♪ तेरी याद सतावे रे ♪

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ कैसे कटे दिन-रात? ♪

♪ कैसे मिले तेरा साथ? ♪

♪ तेरी याद, तेरी याद सतावे रे ♪

इंग्लिश बोल के बताएँ?

कल हम कूलर के मोटर की बाइंडिंग करा के आए।

पूरा नहीं है।

पर हमारे घर में इतना भी बस हम ही बोल पाते हैं।

फुल इंगलिश बोल के बताएँ?

आई लव यू।

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ कैसे कटे दिन-रात? ♪

♪ कैसे हो तुझसे बात? ♪

♪ तेरी याद सतावे रे ♪

दुबे जी…

सर।

ये फैक्स आया है।

रजिस्टर दो।

बेलपुर-कटरिया एक्स्प्रेस।

बेलपुर-कटरिया एक्स्प्रेस।

29 जनवरी।

29 जनवरी।

[फ़ोन की घंटी बजती है]

- हैलो। - [श्याम मनोहर] हैलो, पतीला थाना?

- त्रिभुवन जी बोल रहे हैं? - हाँ।

हम मूर्ती थाना से, इंस्पेक्टर मनोहर बोल रहे हैं।

जय हिन्द, इंस्पेक्टर मनोहर।

- कहिए। - जय हिन्द।

आपका फैक्स हम को अभी मिला।

प्रदीप की बीवी का?

जी, वो जया का।

- वो मिली क्या? - नहीं, वो तो नहीं मिली।

हाँ, लेकिन उसी दिन उसी ट्रेन से,

एक और दुल्हन गायब हुई थी।

उसका रिपोर्ट हमारे थाने में लिखवाया गया है।

एक ही गाड़ी पे से दो दुल्हन?

ये वही चाँदपुर वाला दुल्हन गैंग तो नहीं?

जो नकली शादी कर के जेवर लेके गायब हो जाता है।

हो सकता है।

लेकिन दिक्कत इस बात की है कि हमारी वाली जो फूल कुमारी है,

वो अपना पूरा गहना उतारकर गायब हुई है।

हमारी वाली जया तो 15 तोला सोना…

और मोबाइल फ़ोन ले के फरार है।

कितना?

15 तोला।

रिपोर्ट थाने में लिखवा दिए क्या?

नहीं, नहीं, अभी तो कच्चा काम किया है।

- अरे, उसको कच्चा ही रहने दीजिएगा। - ठीक है।

और उस लड़की का फोटो ज़रा हम को फैक्स करिए।

हाँ, मिलते ही भेजेंगे।

ठीक है, हम रखते हैं।

- जय हिन्द। - जय हिन्द।

पुष्पा रानी पे तो अब नज़र रखना पड़ेगा।

शान फ़िल्म देखी है?

"शाकाल" वाली?

वो गाता है ना…

♪ नाम अब्दुल है मेरा, सबकी खबर रखता हूँ ♪

नहीं देखी?

- ए, अब्दुल, तुमने देखी है ना? - हाँ, देखी है।

हाँ, वही से इसका नाम पड़ा है अब्दुल।

तभी तो हमारा नाम अब्दुल रखा है ये छोटू ने।

अच्छा है, ना?

इस कमरे को स्टेशन में सब "छोटू महल" कहते हैं।

आज तुम छोटू महल की मेहमान हो।

आ जाओ, भैया तुम।

चलो, अब्दुल,

आज की छुट्टी।

ये तो…

ये लंगड़ा नहीं है, बहुत तेज़ भागता है।

अरे, मेरे तो घर का नाम ही खरगोश है।

आओ। यहाँ सो जाओ।

चलिए, गुड नाइट!

ये दुनिया बहुत ही अजीब है।

यहाँ जो जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है।

और जैसा होता है, वैसा दिखता नहीं है।

सो जाओ।

[भैंस के रंभाने की आवाज़]

[दीपू के दादा] जागते रहो!

नोकिया

मंजू माई को दे दे, वो रख लेगी।

दादी…

हम्म।

ये हमारा खोइछा, इसको दुकान में संभाल के रखेंगी?

हल्दी, दूब और मुट्ठी भर चावल के दाना से रक्षा करेगी?

उस आदमी का जो खुद ही तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाया?

वो खोज रहे होंगे हम को।

आप भरोसा रखिए ना, दादी।

तू रख भरोसा। हम क्यों रखें भाई?

जान ना पहचान!

सुहागरात मना लिया, गहना उतरवा लिया, तेरे से पीछा छुड़वा लिया।

अब क्यों खोजता आएगा वो?

ले लो।

एक बार ले ही लो।

अरे लो!

हाँ बाबू, कुछ खाना है?

दो ब्रेड पकोड़ा।

अच्छा।

- दो चाय, एक समोसा दो। - अच्छा।

ए, फूल, मुँह सुजा के बैठी रहेगी क्या?

दो ब्रेड पकोड़ा गर्मागर्म तल दे।

चल जल्दी!

जा, जा!

अरे, जा ना!

जा, जा।

[रेडियो पर क्रिकेट मैच की कमेंट्री]

ए, गौरी, आजकल रात भर क्यों चिल्लाती रहती है? हैं?

अम्मा…

हम्म?

ये दादा आधी आँख खुली रख के सोते हैं या जागते रहते हैं?

अब दादा की दादा जानें।

वही 30 साल कलकत्ता में जो चौकीदारी की है ना,

वो घुस गया है खून में।

दिन-रात का भान भुला बैठे हैं।

जागते-सोते बस एक ही बात…

- जागते-- - [दीपू के दादा] जागते रहो!

[रेडियो पर कमेंट्री]

माँ जी बताई श्रवण भैया शहर में चौकीदारी की नौकरी करते हैं।

अकेले रहते हैं वहाँ?

आप नहीं जाएँगी उनके पास?

वैसे, बड़ा नाज़ हुआ उन पर।

गूंगी औरत से शादी करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए।

हम गूँगे नहीं हैं।

ऐसे ही छेड़ दिया आप को।

अगर गूंगी नहीं हों, तो फिर इतना चुप क्यों रहते हों?

अब बबलू के पापा तो हैं नहीं,

और है कौन जिससे बात करेंगे?

उनका नाम क्यों नहीं लेते हों आप?

पति का नाम नहीं लेते।

उस दिन तुमने सभी के सामने अपने पति का नाम लिया,

हम तो दंग ही रह गए।

अरे जब अच्छा खासा नाम रखा है, तो क्यों "एजी", "ओजी" कहते घूमेंगे?

कैसी अजीब बातें करती रहती हो।

क्या देख रहे हो, टुकुर-टुकुर?

कल हरि की चप्पल कोई मंदिर से उठा ले गया।

तो उसका बापू मंदिर से किसी और की चप्पल उठा लाया।

अरे!

ऐसे कैसे?

बोला, "चप्पल पर किसी का नाम थोड़ी लिखा है।

जो जिस के पैर में उसी की चप्पल।"

हरि बोला, "वैसे ही अब आप ही हमारे चाची हैं।

आप पर भी कोई नाम थोड़ी लिखा है।"

[बबलू की माँ] ए, चल बबलू, स्कूल नहीं जाना क्या।

- नहीं जाना है। - हाँ, ठीक है। चलो।

[सुपारी तोड़ने की आवाज़]

बेला जी, स्पोर्ट्स कोटा।

हम जो पूछें सच बताइएगा…

वरना ये पूछेगी।

नाम?

पुष्पा रानी।

पिता का नाम?

राजेंद्र प्रसाद।

घर का जो नंबर लिखवाई हो वो तो कोई सत्यदेव दर्जी के नाम पर है।

अपने घर का नंबर गलत याद कर लिया क्या?

[श्याम मनोहर] हम्म?

शक्ल छिपानी पड़े?

ऐसा कुछ किया है क्या?

घूँघट थोड़ा उठा लो।

दरोगा और डॉक्टर से कुछ छिपाते नहीं।

मदद कर रहे हैं तुम्हारी।

मायका कहाँ है?

संबेला?

[श्याम मनोहर] हम्म?

संबेला?

नाम सुना है क्या?

ऐसा तो कोई नाम नहीं सुना।

पहले इंद्रापुर था।

फिर अटल नगर,

और फिर मायागंज।

हमारे यहाँ सरकार के साथ-साथ, गाँव का नाम भी बदल दिया जाता है।

प्रदेश छत्तीसगढ़?

उसका नाम भी एक साल पहले मध्यप्रदेश था, सर।

जिस ट्रेन में चढ़ी, बेलपुर-कटरिया एक्स्प्रेस,

वो तो छत्तीसगढ़ से आती-जाती नहीं।

कहाँ से चढ़ी थी ट्रेन में?

पति जहाँ से पकड़ाए, वहीं से पकड़ लिए।

वैसे इसके पहले दो-तीन गाड़ी बदलकर, फिर इसमें चढ़े थे।

वो कौन बताएगा?

आप पूछे नहीं। तो…

ससुराल गाँव का नाम?

याद नहीं।

पति के गाँव का नाम याद नहीं!

एक बात बताओ।

दो दिन हो गया बीवी को खोए,

और वो तुम्हारे पति पंकज ने किसी थाने में जा के रिपोर्ट नहीं लिखवाई?

क्यों?

उन्होंने क्यों रिपोर्ट नहीं लिखवाई…

ये हम को क्या पता?

कोई निशान? कुछ गुदा हुआ है शरीर पर?

श्रेया?

नाम पुष्पा,

तो श्रेया क्यों गुदवाई हो?

बचपन में हमारे दादू हम को श्रेया कह के बुलाते थे।

उन्होंने ही गुदवाया हैं।

बेला जी, फोटो लीजिए इनकी।

सर, बेला जी पुलिस लाइन गई हैं।

वहाँ स्पोर्ट्स कोटा को नाश्ते में केला-अंडा मिलता है ना।

दुबे जी, इनके हाथ के गोदने का, इनके फेस का दोनों का फोटो लो।

और आसपास के सारे थाने में तुरंत भिजवाओ।

जाइए, मैडम। फोटो खिंचवाइए चलिए।

पुष्पा जी, कैमरा है,

एक्स-रे मशीन तो है नहीं।

जो घूँघट के आरपार झाँक लेगा।

बिना घूँघट के फोटो नहीं खिंचवाएँगे।

- बदनामी होगी। - अबे कैसे लोग हो बे?

गुमनामी से ज़्यादा बदनामी का डर?

फोटो नहीं खिंचवाओगी तो लोग पहचानेंगे कैसे?

तुम्हारे पति के घर तक हम पहुँचाएँगे कैसे?

ए, दुबे, घूँघट उठा और फोटो खींच।

दुबे, फोटो खींचो!

सर, गाँव खेड़े के लोग ज़्यादा सेंसिटिव होते हैं।

लेडी के सम्मान की बात है तो ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं कर सकते।

अँगूठे का निशान तो दे सकती है ना?

मैडम, कृपा कर के अँगूठे का निशान ही दे दीजिए।

और दे के जा सकती हैं आप।

चलते हैं।

चलते हैं, सर जी।

जया?

हमारी चूड़ी…

आपके मेज पर रह गई है।

♪ जया… जया… जया… जया… ♪

- रिक्शा? - हैलो भाई, कहाँ जाना है?

- अरे दीदी, रिक्शा? - चल-चल हट!

चलिए ना।

- आजा। - आइए, भैया।

- आइए… रिक्शा? - रिक्शा?

- रिक्शा? - रिक्शा?

आजा।

सोच ले।

यहाँ रहेगी कि स्टेशन ही अच्छा था।

[बिल्ली की आवाज़]

[मंजू] हाँ, हाँ, खिलाती हूँ।

भूख लगी है?

आटा पड़ा है। रोटी बना ले।

एक मेरे लिए भी बना देना।

अकेले रहती हों, दादी?

हाँ।

भगा दिया सब को।

मर्द, बेटा, सब को।

एक तो साला सब बैठ के मेरी कमाई खाएँ।

ऊपर से दारू पी के हम ही को मारे।

ऊपर से कहते हैं…

"जो प्यार करता है उसे मारने का हक होता है।"

एक दिन हमने भी घुमा के हक जता दिया।

डर नहीं लगता अकेले?

खुद के साथ अकेले खुशी से रहना बहुत मुश्किल होता है, फूल।

हाँ…

पर वो एक बार सीख लिया,

फिर कोई तुम को तकलीफ नहीं पहुँचा सकता।

हम कल कुछ बना दें क्या दुकान के लिए?

कुछ मीठा?

रसोई पराई है, ठीक से बना सकेगी?

पराई रसोई को अपना बनाना…

यही तो चीज़ सिखाई है मेरी अम्मा ने।

शादी के कपड़े बदलेगी कि नहीं?

वैसे मेरे पास कुछ खास है नहीं,

फिर भी देख ले।

नहीं, दादी।

वो जब लेने आएँगे तो पहचानेंगे कैसे?

अच्छा सुन!

मोगरा?

मोगरा है क्या गाँव का नाम?

भँवरा बना के रख दी हम सब को।

[मंजू के हँसने की आवाज़]

यहाँ आओ।

हमने तो आज चटनी ली ही नहीं।

कलाकंद खाओ, लो।

बस पाँच रुपए थे। उसका समोसा खा लिया।

एक चम्मच फ्री है। ले लो।

दादी, पहले आप तो चख लो।

हाँ! मुँह मीठा करने के लिए कुछ खास है नहीं मेरी ज़िंदगी में।

फर्स्ट क्लास! बहुत ही बढ़िया है।

एक चम्मच और ले लो।

सुन…

पारिजात?

नालिनी?

अम्मा, हम बाज़ार जा रहे हैं।

[दुबे] इस वक़्त मंदिर क्यों आई होगी?

क्योंकि मंदिर ही वो जगह है, पूरे इलाके में,

जहाँ मोबाइल का टावर ऊँचा पकड़ता है।

मोबाइल फ़ोन!

अबे, पीछा कर उसका!

ओए, उसने क्या बेचा है, रे?

ये बेचा है।

बेचना नहीं।

- ज़रूरत पड़ा तो लेने आएँगे, समझे? - हाँ।

♪ अरे बहुत ज़्यादा शेडी है ♪

♪ बहुत सयानी लेडी है ♪

♪ अरे बहुत ज़्यादा शेडी है ♪

♪ बहुत सयानी लेडी है ♪

♪ क्या वो गड़बड़ है जिस को करने को ये तो रेडी है? ♪

♪ ये सुतली वाला बम ♪

♪ माचिस की प्रियतम ♪

♪ अरे शक है हम को कर देगी तबाह ♪

♪ मन करता है शाउटवा ♪

♪ इस कन्या पे डाउटवा ♪

♪ मन करता है शाउटवा ♪

♪ इस कन्या पे डाउटवा ♪

भैया।

मेरी बीवी खो गई है।

देखी है?

अब इसमें क्या देखे?

अरे घूँघट से तो पूरा चेहरा ढका हुआ है।

चेहरा ही तो सब कुछ होता है।

चेहरा ढक देना मतलब पहचान ढक देना।

चाय।

♪ हाय बहुत ही शार्प लुगाई है ♪

♪ जाने कहाँ से ये आई है ♪

♪ इसके पीछे सीआईए और आगे सीबीआई है ♪

पिछली खोजी हुई जानकारी मिटा दी गई है

अरे साली चोरनी! सब मिटा दिया।

क्या कर रही है वो?

आओ।

♪ ये सुतली वाला बम ♪

♪ माचिस की प्रियतम ♪

♪ अरे शक है हम को कर देगी तबाह ♪

♪ मन करता है शाउटवा ♪

♪ इस कन्या पे डाउटवा ♪

♪ बुद्धि है नॉक-आउटवा ♪

♪ इस कन्या पे डाउटवा है ♪

♪ मन करता है शाउटवा ♪

♪ इस कन्या पे डाउटवा ♪

♪ मन करता है शाउटवा ♪

♪ इस कन्या पे डाउटवा ♪

चिड़िया उड़ने वाली है।

बैठ, बैठ!

अगले आठ स्टेशन हो के आए।

इतनी तो गाड़ी स्टेशन नहीं आती है, जितना हम आ रहे हैं।

तो क्या करें?

ढूँढना छोड़ दें?

हम ये कह रहे हैं कि गुंजन एमएलए मनी सिंह का खास है।

एक बार मिल लो उनसे।

और एमएलए साहब ने फ़ोन कर दिया ना, तो प्रेशर पड़ेगा।

[पुष्पा के गुनगुनाने की आवाज़]

मीठा गाती हो।

- आप भी खेती करते हैं? - नहीं, नहीं।

हम तो प्रिन्टर हैं।

कार्ड, पोस्टर, सब ही छापते हैं।

यहाँ सब की शादी का कार्ड भी हमने ही छापा है।

बस… अपनी का नहीं।

क्यों?

अभी तक हुई नहीं ना।

ये एमएलए साहब की भी सारी पोस्टरबाज़ी… हम ही देखते हैं।

पब्लिसिटी?

आपने इंटर किया है क्या?

एक ही साल में हो गया होगा।

बातों से पता चलता है।

इतनी पढ़ी लिखी हों, तो थाने में अँगूठा क्यों लगाया?

- वो… - [दीपू के पापा] आ गए गुंजन?

हाँ जी, चाचा जी।

प्रणाम।

खुश रहो।

ग्रहण समय में साँप निकला है, गुंजन।

किस्मत की तरह, फसल में भी कीड़े लग गए हैं।

दीपक वैसे ही परेशान है।

अब तुम ही दोस्त लोग कीटनाशक छिड़क दो, तो शायद फसल बच जाए मेरी।

हम देख लेंगे, चाचा जी।

कीटनाशक जहर होता है।

कीड़ों को तो मारेगा पर धान का पोषण भी मार देगा।

कीड़ों को मारने के और भी बहुत तरीके हैं।

अब चप्पल लेके एक-एक कीड़े को कहाँ तक मारेंगे?

हम चप्पल की नहीं, हम स्टीकी ट्रेप की बात कर रहे हैं।

"स्टीकी" क्या?

तेल के डिब्बे का, एक तरफ का पतरा साफ कर के, उसको पीला रंग लगा दो।

डिब्बे के हाथ पीले करने से हम को क्या मिलेगा?

रंग सूखने के बाद उस पर गोंद या लाई लगाकर

उस पतरे को फसल के एक हाथ ऊपर खड़ा कर दो।

बस!

ये जो कीड़े हैं ना पीले रंग से आकर्षित होते हैं,

खुद ही आके चिपक जाते हैं।

तुमने बहुत कृषि-दर्शन देखा है क्या?

वो,

मेरे बाऊ जी की बहुत बड़ी खेती है।

शहर से लोग सिखा कर गए थे।

बहुत जानती हो खेती-बाड़ी के बारे में?

बहुत नहीं, थोड़ा।

ये जो था, वो थोड़ा था?

बचपन से बाऊ जी का थोड़ा-थोड़ा खेत बिकते हुए देखते रहे हम।

जो जमीन सोना उगा सके…

वो मेरी माँ का सोना बिकवाती रही।

वो इसलिए, दीदी कि हमारे देश में किसान दो ही चीज़ पर चलता है,

एक मेहनत और दूसरा विश्वास।

फिर चार किताब पढ़े तो समझ आया,

कि खेती विश्वास के नहीं, विज्ञान के सहारे होनी चाहिए।

बस, तभी से कृषि विज्ञान के बारे में सीख लिया हमने।

भूख है तुम्हारी आँखों में।

[श्याम मनोहर] एक में भी चेहरा साफ नज़र नहीं आ रहा है।

वो पतीला थाने से जया की फोटो आई?

अभी नहीं, सर।

इस फोटो को पतीला थाने को फैक्स करो।

धत!

वो गुंजन का दोस्त दीपक आया है।

आओ भाई।

तुम्हारी बीवी खो गई है?

हाँ, साहब।

वोट तो देते हो ना, हमारी पार्टी को?

सात लोगों के परिवार में से 20-22 वोट जाता है आपको।

[माइक पर एक आदमी] हैलो, चैक।

नेता जी, मंच तैयार है।

[माइक पर आदमी] हैलो, हैलो।

- चलो, आ जाओ सब। - [माइक पर आदमी] माइक चैक।

- देखते हैं हम। - [माइक पर आदमी] माइक टेस्टिंग, हैलो।

[माइक पर आदमी] चैक।

तुम ऊपर आओ मंच पर।

हाँ, साहब।

- [एक आदमी] जन जागरण पार्टी! - जिंदाबाद!

- [एक आदमी] जन जागरण पार्टी! - जिंदाबाद!

हमारी विरोधी पार्टी ने,

राजनीति को गुंडागर्दी बना के रख दिया है।

हमारी पार्टी के कर्मकर्ताओं को डराने के लिए,

उनके साथ घिनौनी हरकत करने लगे हैं।

अब देखिए इनको।

अरे भेजिए।

विरोधी पार्टी के गुंडों ने…

क्या नाम है?

दीपक कुमार।

दीपक कुमार।

विरोधी पार्टी ने…

दीपक जी की बीवी का अपहरण किया है।

- सिर्फ दीपक जी की बीवी नहीं खोई है, - सर,

लोकतंत्र खोया है।

समाजवाद खोया है।

देश का विकास खोया है।

जनता का विश्वास खोया है।

बहुत कुछ "मिसिंग" है यार!

- हाँ। - [एमएलए] हमारे साथ कहिए…

लोकतंत्र वापस…

आएगा!

समाजवाद वापस…

आएगा!

हमारी पार्टी वापस सत्ता में…

- आएगी! - साहब।

लोकतंत्र वगैरह तो सब सही है,

पर एक बार मेरी बीवी का नाम आप माइक पर कह देंगे तो।

हाँ!

दीपक जी की बीवी हमारी ही नहीं,

पूरे मूर्ती की भाभी है!

इसलिए,

हम दीपक की ज्योती ढूँढ के रहेंगे।

- दीपक की ज्योती… - ढूँढ के रहेंगे!

दीपक की ज्योती…

- [भीड़] ढूँढ के रहेंगे! - फूल नाम है, साहब। ज्योति नहीं है।

फूल नाम है! ज्योति नहीं है, साहब।

साहब, फूल नाम है! ज्योति नहीं है!

हैलो?

हैलो?

हम बबलू बोल रहे हैं।

हैलो?

- बबलू! - अरे!

ये कहाँ से आया?

हमारा है।

तो छुपाया क्यों था?

छुपाया कहाँ था?

गद्दे के नीचे था।

अम्मा सब वहीं छुपाती है।

लेमन की गोली, छुट्टा पैसा और बाबा का फोटो भी।

छुपाया नहीं तो सबको दिखा दें?

अम्मा!

शैतान! बैठो यहाँ, बैठो।

ये देखो!

इसमें ना एक बहुत बढ़िया खेल है…

ये देखो।

ये।

तुमको रोज़ थोड़ी देर खेलने देंगे…

पर किसी को इसके बारे में बताना नहीं।

खाओ कसम।

लेमन गोली की कसम। अब दो खेलने।

अभी नहीं। रात में देंगे। हाँ?

चलो, भागो!

भागो-भागो।

ये आपने बनाया है?

बबलू के पापा हैं?

श्रवण कुमार।

इनका अकेले का एक ही फोटो था।

वो राशन कार्ड में लग गया।

देखने का मन करता था।

तो क्या करते? खुद ही बना लिया।

और क्या-क्या बनाया है?

कुछ नहीं। ये फिजूल काम के लिए समय ही कहाँ है?

कला फिजूल है?

आपके पास कला कहाँ से आई?

ये तो…

अपने आप आ जाती है।

अपने आप आ जाती, तो सबको आती ना?

कला सरस्वती देती है।

और देवी माँ कोई फिजूल चीज़ देगी?

अच्छा, हम ये स्टिकी ट्रैप लगा कर आते हैं।

देखो तो, गुटर-गूँ, गुटर-गूँ।

एक बकरा अभी हलाल हुआ नहीं,

कि दूसरे को चारा डाला जा रहा है।

सर, किसी हेमा त्रिपाठी को 5000 का पाँच मनी ऑर्डर भेजा है…

आलम सराई में।

कोई एक ही इंसान को पाँच मनी ऑर्डर क्यों भेजेगा, सर?

दुबे, जैसे तुम्हारे दिमाग का एक लिमिट है ना,

वैसे भारत सरकार ने भी मनी ऑर्डर का लिमिट रखा है 5000 का,

तो 5000-5000 करके 25,000 उसने भेजा है।

सर, हमारा गट फीलिंग कहती है ना, इसका व्यवहार ठीक नहीं है।

दबोच लें क्या इसको?

कोर्ट में तुम्हारी "गट फीलिंग" की

पतंग बना कर उड़ाएँगे मैजिस्ट्रेट साहब।

सबूत कौन जमा करेगा? हमारे बाबू जी?

झुक के चलना।

चल।

एक सौ बारह चाय बिका है आज।

नीचे देख, छोटी सी किताब है। उसमें लिख दे। मंजु माई…

नंबर लिखना तो आता है ना?

हाँ, तो लिख।

आ गया ना काम?

काम ही काम को सिखाता है रे। तू फालतू की चिंता करती है।

तुम कितने साल से काम कर रहे हो, छोटू?

सात साल का था, तब से।

अनाथ हो?

नहीं! अम्मा-बाबा हैं, भाई-बहन हैं।

हर महीने पैसा भेजते हैं उनको हम।

[एक आदमी] ए छोटू!

हम लड़कियों को क्यों मौका नहीं देते हैं, दादी?

क्यों हमको इतना लाचार बना देते हैं?

डर से शायद।

देख, फूल।

औरत अनाज उगा भी सकती है, पका भी सकती है।

बच्चा पैदा भी कर सकती है, बड़ा भी कर सकती है।

देखने जाए तो औरतों को मर्दों की कोई खास ज़रूरत वैसे है नहीं।

पर ये बात अगर औरतों को पता चल गई,

तो मर्द बेचारे का बाजा नहीं बज जाएगा?

अब समझी क्या "फ़्रौड" चल रहा है?

हमने तय किया है, दादी।

घर जाकर,

भले ही छोटा-मोटा, पर कोई ना कोई काम ज़रूर करेंगे।

उनका हाथ बँटाएँगे।

"उनका?"

पहले उनका नाम लेने से शुरुआत कर।

वो भी बहुत है।

♪ कैसे घने रे बादल घिरें ♪

♪ तेरी कमी की बारिश लिए ♪

♪ सैलाब जो मेरे सीने में है ♪

♪ कोई बताए ये कैसे थमे? ♪

♪ तेरे बिना अब कैसे जिएँ? ♪

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ कैसे कटे दिन-रात? ♪

♪ कैसे हो तुझ से बात? ♪

♪ तेरी याद सताए रे ♪

कमल-ककड़ी की सब्जी बहुत अच्छी बनी है, अम्मा।

बढ़िया स्वाद है!

भक!

- कोई खाने की भी तारीफ करता है? - ले जाइए।

हमारी अम्मा बनाती थीं ऐसा।

- हाँ? - हाँ।

प्याज़-लहसुन के छौंक वाला।

हमको बहुत अच्छा लगता है।

दीपक और उसके बाऊ जी छूते भी नहीं हैं। तो हम बनाना ही छोड़ दिए।

छोड़ क्यों दिया?

आपको तो पसंद है ना।

अपने लिए बनाती।

तो क्या अब औरतों की पसंद का खाना बनेगा?

दिक्कत तो ये है,

कि हमको अब वो भी याद नहीं कि हमको क्या पसंद है।

ए, पूनम! ये बबलू कहाँ है?

बबलू स्कूल का काम कर रहा है, अम्मा।

आजकल ज़्यादा ही पढ़ने लगा है लड़का।

ध्यान रख, पूनम।

गलती से कहीं डॉक्टर, इंजीनियर ना बन जाए।

- डॉ. बबलू! - ये आपके लिए लाए हैं।

कितने दिन बाद पूनम की हँसी सुनी है।

श्रवण शहर नौकरी करने क्या गया,

इसका मुस्कुराना तक छुट गया।

यहाँ है भी कौन उसके साथ हँसी-मज़ाक करने वाला?

[पुष्पा] ये भी लाई हूँ।

प्रार्थना करो, अम्मा…

अपनी फूल जब भी आए ना,

सहेली बन के आए।

घर की औरतें सास, ननद, जेठानी, देवरानी, सब बन जाती हैं,

सहेली नहीं बन पाती एक दूसरे की।

अच्छा है ना?

अम्मा,

आप और हम सहेली बन सकते हैं क्या?

ट्राइ करें?

ये लो।

[पार्श्व में संगीत बजता है]

ए, दीपक। दुल्हन मिली क्या?

ए! तुमको क्या है बे?

चल भाग यहाँ से!

अरे भाभी मिल जाएगी।

यार दीपू, एक बात बोलें?

आज चार दिन हो गए हैं भाभी को खोए हुए।

हम सब मिल के ढूँढे उनको, इज़्ज़त से ढूँढें।

पर अब नहीं मिल रहीं तो क्या करें?

फूल भाभी को भी किसी तरीके से आना होता,

तो आ ही गई होतीं अब तक।

है कि नहीं?

अरे रघु, बस कर।

अरे तुमको चढ़ गई है बे।

हाँ, चढ़ गई है। तभी तो ना सही बात बोल रहा हूँ।

भाभी जी का ठीक-ठाक होना अब हमको थोड़ा मुश्किल ही लग रहा है।

अरे दल्ले घूमते हैं गली-गली।

वो देखी नहीं, "राम तेरी गंगा मैली" में?

कैसे धर लिया था उस गौरे-चिट्टे ने मन्दाकिनी को?

हैं, बिलास?

अरे फ़िल्म में बिलास वहाँ तक पहुँचा ही नहीं।

और झरने में मन्दाकिनी को नहाते देख के टिकट वसूल हो जाता था इसका।

भक साला!

पर बात तो सही है।

जानवर जात पड़े हैं सब।

अब तीन-चार साल की बच्ची को भी नहीं छोड़ते हैवान साले।

तो ये तो…

ऊपर वाला सब हिसाब बराबर करके ही सारा जुगाड़ किया है।

वो तो साफ है।

तो अब समझा ले इस मन को और चुपचाप पुष्पा के साथ ब्याह कर ले।

ए पागल हो गया है क्या?

शादी ना हुई, मज़ाक हो गया!

अरे पूजा-मंत्र, सात फेरों का कोई मतलब है कि नहीं है?

इसका घर फिर से बस रहा है।

उसमें तेरी क्यों जान जल रही है बे?

साला यहाँ भाभी के कारण दारू पीए बैठा है,

पता चला वो किसी और के साथ बैठ के इमली खा रही है!

- ए दीपू! - ए दीपू!

- दीपू, दीपू! - दीपू!

भाई, तुम तो दिल पे ले लिए, भाई।

हम तो ऐसे ही बड़बड़ा रहे थे।

ए दीपू, रुक जा!

दीपू!

उठो!

आराम से।

फूल।

ये देखो!

- हम बनाए। - अरे!

दीदी, हमारे लिए एक फोटो बनाओगी?

हाँ!

पर किसी से कहना मत।

अब बारह बजे एक्स्प्रेस आएगी।

दस-पंद्रह कप भर दे।

चार दिन हो गए। और कितना राह देखेगी?

अब तो पुलिस थाना चल।

तुमको क्या लगता है, छोटू?

हम इतने दिन घर के बाहर आवारा की तरह रहे, स्टेशन पर सोए।

वो मिल भी गए तो अपनाएँगे क्या हमको?

छोड़ वो गया था तुझे स्टेशन पर।

पतिदेव अपनाए भी, तो इस बार तू ठुकरा देना।

ये रख।

- नहीं, ये हम-- - रख।

कलाकंद सफाचट हो रहा है।

मेहनत का पैसा है।

रख।

सर, ये देखिए।

अबे!

अबे!

जय हिन्द। हम मूर्ति थाना से मनोहर बोल रहे हैं।

फोटो मिल गया। धन्यवाद।

कंगन भी जया का ही है।

प्रदीप की माता जी ने पहचान कर ली है।

ठीक, हम खबर करते हैं। रख रहे हैं। जय हिन्द।

इसको कहते हैं सबूत।

- बेला जी को बुलाओ। - जी, सर।

[मनोहर] ऊँट उड़।

[एक आदमी] अब क्या हो गया?

[मनोहर] हाथी उड़।

गाय उड़।

चिड़िया उड़।

आप हमारी चिड़िया उड़ने क्यों नहीं दे रहें?

अरे पुलिस वाले हैं ना, बेटा। ऐसे-कैसे चिड़िया उड़ने देंगे?

ये सब क्या हो रहा है, सर?

दिखाओ।

जया।

श्रीमति जया देवी।

तृतीया के दिन इनका ब्याह हुआ था

पतीला के प्रदीप सिंह के साथ।

बस नाम ही की शादी थी।

शादी के बाद, कुल शादी के जेवर लेके

दुल्हन फरार।

इतने दिन से तुम्हारे घर में क्यों रह रही थी जानते हो?

पुलिस से बचने के लिए।

नहीं! झूठ है ये।

ये इसने छुपाया था।

तुम्हारे पास ये फ़ोन था?

तुमने खुद अपने घर खबर क्यों नहीं की?

अपने बाऊ जी को? पंकज को?

- कोई रिश्तेदार को? - अरे दीपक बाबू…

इस कहानी के सारे किरदार काल्पनिक हैं।

ना कोई बाऊ जी था।

ना कोई पंकज बाबू है।

ना कोई संबेला गाँव।

पेशेवर चोर है ये।

नहीं। हम कोई चोर-वोर नहीं हैं।

दीपक, हमारी बात सुनो--

तो क्यों अपना नाम पुष्पा बताया?

अपने पति का नाम पंकज क्यों बोला?

वो कंगन लेजा के उस अग्रवाल सुनार को बेचा ना रे?

वो पैसा मनी ऑर्डर किया अपनी गैंग मेम्बर वो…

- हेमा त्रिपाठी को। किया कि नहीं? - नहीं।

- ये झूठ है, दीपक। - हमारी फूल को कहाँ गायब किया?

दीपक, हम क्यों गायब करेंगे फूल को?

हम तो खुद ही गलती से ट्रेन में से तुम्हारे साथ उतरे थे।

अरे तो गलती क्यों नहीं सुधारी?

एक के बाद एक नया झूठ, एक के बाद एक नई कहानी क्यों सबको सुना रही थी?

बोल रे!

हम तो तब से खुद ही को दोष दिए जा रहे थे।

कि हम अपनी फूल को पहचानने में गलती कैसे कर दिए?

- दीपक, हम भी गलती से ही आए हैं-- - ए तू बस!

ये अपना झूठ का पिटारा ना बंद कर लो तुम!

साला धोखा देने की भी कोई लिमिट होती है कि नहीं?

हमने तुम्हें धोखा नहीं दिया है, दीपक।

- एक बार हमारी बात तो सुनो। - अरे बहुत बेवकूफ बना रही हो तुम, पुष्पा।

या जया… जो भी नाम है तुम्हारा।

पहले से ही बहुत परेशान हैं हम, अब और नहीं भटकाना।

सर, ये चोरी का गहना बरामद हुआ है।

ये हमारे गहने हैं।

दीपक, हमारी बात सुनो।

- हमने कुछ नहीं किया है। - दरोगा जी।

हमारी पूरी बात तो सुनो एक बार।

- चलो। चलो! - दीपक, एक बार मेरी पूरी बात तो सुनो। दीपक!

तुम फूल की जगह काँटा ले आए थे।

हमने निकाल दिया।

दरोगा जी, हमारी फूल?

कार्रवाई चल रही है। मिलते ही बता देंगे।

[जया] दरोगा जी। दरोगा जी, हमको जाने दीजिए।

हाथ जोड़ते हैं।

हमारे गहने, पैसे, सब रख लो। लेकिन हमको जाने दो।

दरोगा जी, एक बार बात तो सुनिए ना।

- [एक आदमी] हैलो। - हैलो, त्रिभुवन। हाँ।

- वो मिली क्या? - वो मिल गई।

- ठीक-ठीक। - ठीक।

- जय हिन्द। - जय हिन्द।

पुष्पा चाची ये भूल गईं हमारे बस्ते में।

ए, वो चाची नहीं है तेरी।

दीपू!

ए दीपू, ये हमने क्या सुना रे?

पुष्पा जी को पुलिस ले गई।

उसका नाम पुष्पा नहीं है, जया है।

कोई ठग गैंग की चोर निकली।

फूल चाची को अगवा किया है।

अरे भक!

अगवा किया है!

अगवा किया होता तो फूल भाभी को ढूँढ क्यों रही है?

ये देखो।

ये कौन बनाया?

हमसे बनवाई वो।

हमने देखा था ना फूल भाभी को शादी के समय।

अरे सदर बाज़ार में कंप्यूटर पर ये भाभी का पोस्टर बनवाया,

और हमारे पास छपवाया,

फिर हर जगह इसको चिपकाने के लिए बोला उसने।

जागते रहो!

[यशोदा] ये सब क्या हो रहा है?

हम को तो कुछ समझ नहीं आ रहा है।

मंजू माई, ये यही लड़की है क्या?

पढ़ के बताओ।

"फूल कुमारी।

मिले तो संपर्क करो, दीपक कुमार, गाँव सूरजमुखी।"

फ़ोन नंबर भी दिया है।

सूरजमुखी!

अरे, हमारे ससुराल गाँव का नाम सूरज…

- सूरजमुखी? - छोटू, सूरजमुखी!

ये तुम्हारी फोटो है?

- दिखाओ। - ये देखो, छोटू।

- सूरजमुखी। - दादी!

इस नंबर पे कोई फ़ोन उठा नहीं रहा है।

ये अमरेली-कटरिया खड़ी है।

वो जाएगी मूर्ती।

दस मिनट में निकलेगी।

भेज दें इस को?

आते रहेंगे, दादी।

अब ये स्टेशन हमारा दूसरा मायका है।

हे!

- जीती रह। - हाँ।

खुश रह।

अरे, छोटू को तो साथ ले के जाओ।

- अकेले फिर खो जाओगी, फूल। - चुप!

जा।

यहाँ से नौवाँ बड़ा स्टेशन।

भैरवा के बाद आएगा, मूर्ती।

गिनती रहना!

बोलो।

अम्मा, हमें शादी नहीं करनी है।

हमें खेती-बाड़ी के बारे में पढ़ना है।

पागल हो गई है क्या?

अरे, शादी है हफ्ते भर में।

खेती देखेगी तो चूल्हा-चौका कौन करेगा?

पति तुम्हारा?

और जो खेत बेचकर तुम्हारे दहेज का इंतजाम किया है उसका क्या?

भीड़ में जोड़कर भेड़ मत बनाओ हम को, अम्मा।

अव्वल आई हूँ 800 लड़कों और 86 लड़कियों में।

देहरादून जाकर कोर्स करना चाहती हूँ।

अम्मा, "ओर्गेनिक फ़ार्मिंग" का नाम सुना है?

जैविक खेती।

आज से दस साल बाद उसका डंका बजेगा, अम्मा। ये लिखवा के ले लो हमसे।

पंद्रह दिन बाद दाखिले का तारीख है।

और अगले हफ्ते तुम्हारे ब्याह का।

अच्छे घर का लड़का है, अमीर है।

प्रेम से बात करोगी, तो शायद आगे पढ़ने भी देगा।

और अगर आगे नहीं पढ़ने दिया तो?

तो भाग्य तुम्हारा।

अगर हफ्ते भर में तुम्हारी डोली ना उठी,

तो हमारी अर्थी उठेगी।

तुम्हारे बाऊ जी की कसम।

अम्मा आप…

अमराई गाँव में हनुमान मंदिर के सामने घर है हमारा।

शादी भी असली है और उसको करने का दुख भी असली।

वो तो शादी के वक़्त हम को रिश्तेदार से पता चला कि…

बच्चा ना होने के कारण प्रदीप की पहली बीवी जलकर मर गई।

अब जल गई कि जलाई गई,

वो भगवान जाने।

दहेज में दस हजार रुपया कम था,

तो सब के सामने हमारी माँ को गाली दे दिया।

अब ऐसा आदमी हम को आगे कहाँ पढ़ने देता?

इतना ही प्रॉब्लम था, तो शादी के पहले भागती…

मंडप से भागती, रेलगाड़ी से भागता है कोई?

भागने का कौन कमबख़्त सोचा था।

हम तो घूँघट ओढ़कर अपनी किस्मत से समझौता कर लिए थे।

कि फिर ये हमारा हाथ पकड़कर हम को रेलगाड़ी से उतार लिए।

अब किस्मत इतना बड़ा इशारा करे और हम वापस मुड़ जाएँ।

इतने बड़े बुड़बक थोड़ी ना हैं!

आपने पुलिस की नज़र से देखा इसलिए आपको हर बात में चोरी दिखी।

हेमा त्रिपाठी बहन है हमारी।

एक वही है जो हमसे हमदर्दी रखती है।

कंगन बेचकर मनी ऑर्डर भेजा दीदी को,

ताकि वो कोर्स और हॉस्टल का फीस भर सके।

कंप्यूटर की दुकान से कोर्स का एप्लिकेशन प्रिंट किए।

तीन दिन में कोर्स शुरू हो रहा है हमारा।

ये देखिए।

मूर्ती से पटना। पटना से दिल्ली। दिल्ली से देहरादून।

कल रात की बस थी हमारी।

इतना झूठ बोले एक बार सच ही बोल देते?

सच बोलते तो क्या मान जाते?

रहने देते हम को अकेले?

क्या माँगे थे हम अपनी सगी माँ से?

थोड़ा वक़्त।

वो भी क्यों?

पढ़ने के लिए, कुछ बनने के लिए।

मिला?

दीपक, ये समाज ही ऐसा है।

उट-पटांग झूठ गले उतरता है। लेकिन एक सादा सच नहीं पचता किसी को।

हम को बस एक हफ्ता छुपे रहना था।

लेकिन पूरी दुनिया जुट गई हम को घर पहुँचाने में।

हम चुराएँ हैं तो बस एक वो मौका चुराए हैं, अपने लिए जिंदगी से।

यहाँ से भी निकल ही रहे थे पर…

फिर दीपक को फूल के लिए इतना परेशान देखा, तो लगा मदद करनी चाहिए।

सोचा दो दिन रुक जाते हैं।

तभी तो फूल का पोस्टर छापे ताकि कोई अगर पोस्टर पढ़ा हो तो हमारे फ़ोन पे…

हमारा फ़ोन किधर है?

कोई पोस्टर पढ़ के फ़ोन किया होगा।

- फ़ोन किधर है? - वो फ़ोन कहाँ है?

सर।

बारह मिस कॉल।

आप नंबर लगाइए ना।

हैलो।

अरे क्या इस नंबर पे फ़ोन किया था क्या?

हाँ।

हैलो। हाँ जी।

- कौन, फूल कुमारी? - हाँ।

हाँ जी, फूल कुमारी।

हैलो, आपका आवाज़ कट रहा है।

एक मिनट… आपका आवाज़… हैलो?

जी, जी। कहाँ?

हैलो।

पतीला स्टेशन?

हाँ।

हैलो…

ट्रेन… हैलो।

ट्रेन का क्या?

धत! बैटरी खत्म हो गई।

क्या बताए साहब? फूल मिली?

लगता है पोस्टर काम कर गया।

फूल कुमारी है पतीला स्टेशन। चलो दौड़ो सब!

- पतीला स्टेशन। - अरे, मैडम। आप कहाँ?

चोर नहीं हों,

पर शादीशुदा हों।

पति से भागी हों।

पति ने रिपोर्ट दर्ज़ की है।

तो केस तो बंद करना पड़ेगा।

क्या मतलब?

प्रदीप आ रहा है तुम को लेने।

उस को क्यों बताया इंस्पेक्टर साहब?

कल रात को हमने आप से कहा था ना,

हमारा गहना, पैसा सब ले लो लेकिन हम को उसके साथ मत भेजना।

हम नहीं जाएँगे उसके साथ।

बालिग हैं हम। आप हमारे साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते।

सर वो नहीं जाना चाहती है और वो नहीं जाएगी।

तुम्हारी बीवी फिर से गुम हो जाए, उसके पहले तुम जाते हो,

कि इसके साथ तुम को भी रोक लें? चलो, निकलो!

सर, जया को यहाँ ऐसे छोड़ के नहीं जाएँगे हम।

- बेला जी! - सर।

चल।

सर, हमारा… सर…

- दीपक। - मैडम…

- हमारा बात सुनो! - दीपक!

दीपक, हमारी बात सुनो हम यहाँ सिर्फ फूल के लिए रुके थे।

अगर फूल नहीं मिली तो हमारा रुकना बेकार हो जाएगा।

तुम जाओ तुम को हमारा कसम।

- जल्दी, जाओ दीपक! - अरे यार।

तुम तो निकलो।

सर।

सर, देख लीजिए, सर।

अब तुम्हारे लिए क्या हम खीर पूड़ी मँगवाएँ?

ए, दुबे जी। निकालो इसको बाहर। चल!

इंस्पेक्टर मनोहर?

प्रदीप सिंह। पतीला से।

आइए। बैठिए।

- दुबे! - जी, सर।

देखिए,

फिज़ूल की बदनामी होगी ये सोच के,

हमने पेपर वर्क किया नहीं।

अब आप ही बताइए कैसा केस बनाएँ?

चोरी का?

भागने का?

या खो जाने?

खो जाने का।

ठीक है।

बेला जी, जया को लाना।

और…

पी टी उषा।

चर्बी घर चलकर उतारेंगे तुम्हारी।

ये तो सिर्फ मुँह दिखाई था।

गहना किधर है?

गहना इधर है।

इसमें से एक कंगन वो पहले बेच चुकी है।

ये गहना हमारा है।

बाऊ जी के खून पसीने का है।

अम्मा ने खेत बेच के खरीदा है।

दहेज दूल्हे का होता है।

कंगन तो फिर से वसूलेंगे तुम्हारी अम्मा से।

तुम घर तो चलो, रानी।

धन्यवाद, इंस्पेक्टर साहब।

बहुत मदद किए आप।

अरे नहीं, हम तो अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।

चलो।

अरे प्रदीप बाबू, एक मिनट।

अभी हमारी ड्यूटी पूरी नहीं हुई।

देखो मैडम भागी,

आपने एफआईआर दर्ज़ किया।

मैडम हम को मिली,

हम आपको लौटाए।

केस खत्म।

अब वो मिली, वो एक बात है,

अब मैडम लौटना नहीं चाहती,

ये वो नया और अलग मसला है।

क्या है कि…

मैडम बालिग हैं।

मन मर्ज़ी की मालिक हैं।

जबरदस्ती तो नहीं कर सकते।

और अभी जो तुमने ये किया है ना थाने में।

दहेज लेने की बात।

औरत पर हाथ उठाने की हिम्मत।

डराना, धमकाना।

ये अपराध है, प्रदीप बाबू।

क्या?

ये क्या बकवास है बे?

कानून कहते हैं इसे।

ये यदि शारीरिक शोषण और दहेज का केस दर्ज़ करवा दे ना,

तुरंत आपको हम को अंदर करना पड़ेगा।

खुद को मिला के,

एक, दो, तीन… चार गवाह हैं इस कमरे में।

उसके बाद जो पुरानी अफवाह है,

उसको जोर मिलेगा,

फाइल खुलेगा।

पहली बीवी जली थी…

कि जलाई गई थी?

समझ रहे हो ना?

सब समझ रहे हैं।

इसको लौटाने का नीयत नहीं लगता है आपका, इंस्पेक्टर साहब।

अरे हमारी नीयत तो इस केस को पूरी तरह बंद करने का है। तुम समझ ही नहीं रहे हो।

आखिरी मौका दे रहे हैं। आपस में सुलह कर लो।

नहीं तो जाओ जेल, कोर्ट-कचहरी का झंझट पालो।

या चुपचाप इस लड़की को यहाँ से जाने दो।

इसकी आज़ादी के बदले में, हम तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज़ नहीं करेंगे।

हमारा वादा है तुम को।

हाँ, लेकिन ज़िंदगी में इसको खोज के तुम परेशान किए,

तो दुनिया के किसी भी कोने से हम खुद चलकर आएँगे,

और तुम को हथकड़ी पहनाएँगे। ये वचन देते हैं।

हम आपको देख लेंगे। बता दे रहे हैं।

अरे!

ऑन-ड्यूटी ऑफिसर को धमकाना समझ रहे हो कौन सी धारा लगेगी।

क्यों अपने लिए परेशानी बढ़ा रहे हो, मेरे भाई?

- चलते हैं, प्रदीप भाई। - प्रदीप भाई!

- छोड़ो यार। - प्रदीप भैया, चलो।

- देख लेंगे। - अरे सुनो!

गहना कहाँ लेते जा रहे हो?

वो गहना दे जाओ नहीं तो चोरी का भी केस लग जाएगा। लाओ, लाओ।

अरे दो।

हमारा पैसा?

वो रिश्वत दिया था क्या?

अरे, दुबे। थाने में रिश्वत दिया है हम को। पकड़ो इसको ठूसो अंदर।

- पकड़ो इस को! - ए! चलो रे!

- जेल में ठूस। - देख लेंगे बाद में!

हट तेरी भैंस की आँख!

शुक्रिया।

अच्छे से पढ़ाई करना।

ये हमारा नहीं है।

और अब ये भी।

चलते हैं।

दुबे।

ये लड़की बहुत दूर जाएगी।

हाँ, सर। देहरादून 800 किलोमीटर के आसपास तो पड़ेगा।

दुबे!

ये गाड़ी पतीला जाएगी क्या?

- अरे जल्दी बोलो बे! - वो तो कब की निकल गई।

ये अमरेली जाती है।

- पतीला की अगली ट्रेन कब है? - रात को है नौ बजे।

क्या करें?

- बस ले लें? - हाँ, कुछ करते हैं। चलो।

दीपक!

दीपक!

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ सजनी ♪

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ सजनी ♪

♪ ओ सजनी रे ♪

♪ ओ सजनी रे ♪

मिल गईं, फूल चाची मिल गईं!

मिल गईं फूल चाची मिल गईं!

फूल ले आया तू, हाँ?

- ठीक हो तुम? - जी।

खुश रहो, खुश रहो।

अरे हम ट्रेन से उतरे, तो एक दम अकेले थे!

फूल घर पहुँच गई!

फूल घर पहुँच गई!

- छोटू, फूल घर पहुँच गई! - पहुँच गई!

फूल घर पहुँच गई!

फूल घर पहुँच गई।

- फूल घर पहुँच गई। - फूल घर पहुँच गई।

लो।

आप भी खाओ ना मंजू, माई।

ये लो, पैसा।

फूल।

आजा, बेटा।

बबलू, बबलू…

- चल। - जया!

गुंजन, ये बैग पकड़ो।

- [दीपू] बिलास, सीट रोको फटाफट। - आओ, रघु।

[दीपू] चलो।

तुम को याद करेंगे हम।

हम भी।

चलो, बस निकल जाएगी।

खुश रहो।

खेत में फसल लहराएगी, तो याद करेंगे।

ये लो।

कमल ककड़ी की सब्जी और रोटी।

पहुँच के खबर देना।

अच्छा, बेटा।

ए, चवन्नी!

सही से पढ़ना। हाँ?

फिर हमारे ही कॉलेज में दाखिला लेना।

अरे, अरे!

ये क्या कर रही हो?

आप नहीं होतीं,

तो हम कभी ना मिलते।

अगर तुम नहीं होती ना,

तो हम को हम नहीं मिलते।

ये आपकी टिकट।

बहुत तकलीफ दी हमने आपको।

माफ़ करना।

सपना देखने का माफ़ी नहीं माँगते।

चलते हैं।

अपना घर समझ के आती रहना।

अपना घर समझ के आती रहना।

हम सब को तुम्हारा इंतज़ार रहेगा।

हम सब को तुम्हारा इंतज़ार रहेगा।

चिट्ठियाँ लिखती रहना।

चिट्ठियाँ लिखती रह-- खुद ही चले जाओ!

♪ नया सफर है, एक नया हौसला ♪

♪ बाँधा चिड़ियों ने नया घोंसला ♪

♪ नई आशा का दीपक जला ♪

♪ चला सपनों का नया काफिला ♪

♪ कल को करके सलाम ♪

♪ आँचल हवाओं का थाम ♪

♪ देखो उड़ी एक धानी चुनरिया हो ♪

♪ धीमे-धीमे चले पुरवैया ♪

♪ बोले, "थाम तू मेरी बइयाँ" ♪

♪ संग चल मेरे रोके क्यों जीया ♪

♪ धीमे-धीमे चले पुरवैया ♪

नोकिया

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