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[अंग्रेजी में] हालात लगातार बिगड़ते जा रहें हैं,
माननीय प्रधानमंत्रीजी!
मुजाहीदीन की शक्ल में पाकिस्तानी सैनिक हैं वो।
जमीनी हालात में, कोई बदलाव नहीं है सर!
और अब,
उनकी तरफ से शेलिंग शुरू हो चुकी है।
और अब तक
उन्होंने हमारे काफी सिक्यारिटी पोस्ट पर
कब्जा भी कर लिया है।
[अंग्रेजी में] वें लगातार कारगिल को लेने की
कोशिश कर रहे हैं!
हम शांति चाहते हैं,
यह तो दुनिया ने देख लिया है
और शांति की रक्षा के लिए
हम क्या कर सकते हैं।
दुनिया अब यह देखेगी।
यदि हम चाहें तो पाकिस्तान का
हर शहर, गाँव, कस्बा
एक-एक इंच जमीन पर कब्जा कर लें,
पर नहीं!
हमारे संस्कार, हमारे मूल्य
इस बात की अनुमति नहीं देते।
इतनी छोटी सोच नहीं है हमारी।
इन मुफ्तखोरों को, आजादी का मोल समझाना पड़ेगा।
[अंग्रेजी में] सर! मुशर्रफ हमें न्युक्लियर अटैक की
धमकी दे रहें हैं।
यदि ऐसा हुआ,
तो कल का सूर्योदय पड़ोसी मुल्क का सूर्यास्त होगा।
बर्फ पिघलने से पहले विजय प्राप्त करेंगे हम।
[फ़ोन की घंटी बजने की आवाज़]
[अंग्रेजी में] प्रधानमंत्री सर!
पाकिस्तानी पीएम, फोन लाईन पर हैं।
हम वाघा में
आपको गले लगाकर
पूरी दुनिया में अमन का संदेश तो दे रहें थे
और आप हमारी पीठ पीछे
छुरा घोंपने की तैयारी कर रहे थे?
देखिये वाजपेयी साहब मेरा यकीन कीजिए
मैं मजबूर हूँ,
यह जनरल मुशर्रफ़ किसी की नहीं सुन रहा है।
वो सुनें - ना सुनें नवाब साहब!
हमें तो इस बात का डर है
कहीं उनकी वजह से
आपको पाकिस्तान दिखना भी बंद ना हो जाए।
अ... देखिए वाजपेयी साहब, मेरी बात...
हमें मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो
चिंगारी का खेल बुरा होता है,
औरों के घर आग लगाने का जो सपना,
वो अपने ही घर में सदा खरा होता है।
सलामती की प्रार्थना!
[टेलिफोन रखने की आवाज़]
अपनी आधी आँखें बंद करके
जब वो पूरी बात बोलते थे,
तब उनकी आवाज़
सात समुंदर पार तक गूँजती थी।
वैसे तो शांत स्वभाव के थे,
पर अपनी कविताओं द्वारा
इतनी गहरी बात कह देते थे,
कि सुनने वालों के मुँह बंद हो जाते थे।
[संगीत...]
♪ मैं अटल हूँ... ♪
[संगीत...]
[कोलाहल]
लो अटला भी आ गया,
क्या हुआ?
अरे, अरे कुछ तो बोल!
-भीतर क्यों चला गया? -अरे अटला
हे भगवान!
ये अटला को क्या हुआ?
कितनी मेहनत से एक-एक शब्द याद किया था,
बिना पढ़े, बिना रूके,
आईने के सामने एक सांस में भाषण बोलने के
कितने सफल प्रयत्न भी किये थे,
पर लोग इतना घूर-घूर कर देख रहे थे,
हम मंच पर जाते ही सब भूल गये।
[कुर्सी की आवाज़]
[कदमों की आहट]
[सेज़ पर बैठने की आवाज़]
देखो बेटा! ध्यान से सुनो,
तुमने पंक्तियाँ याद की थीं,
इसलिए तो भूल गए!
मुद्दा…
भाषण का मुद्दा समझोगे
तो तुम्हारे मुँह से
अपने आप पंक्तियाँ निकलेंगी,
और लोगों के कानों तक पहुँचेंगी।
और आइने में नहीं,
लोगों की आँखों में आँखें डालकर देखो,
कोई तुम्हें घूरे,
तो उसे और जोश से घूरो,
नजरें मिलेंगी, तो लोग तुम पर भरोसा करेंगे
और तुम्हारी बात भी मानेंगे।
[संगीत...]
आज के बाद से भाषण रटूँगा नहीं,
सिर्फ कहने को कह दिया,
या गांठ में भी बॉंध लिया?
कस के बॉंध लिया बाबू जी!
हमारा निर्णय पक्का है।
पक्के से काम नहीं चलेगा!
निर्णय अटल है?
जी, निर्णय अटल है।
आशीर्वाद।
[हँसते हुए] हा हा हा हा हा
ताजमहल! यह ताजमहल!
यमुना की रोती धार विकल
कल-कल चल-चल,
जब रोया ये हिन्दुस्तान सकल
तब बन पाया यह ताजमहल!
यह ताजमहल! यह ताजमहल!
वाह! क्या बात है
[तालियों की गड़गड़ाहट]
धन्यवाद।
[संगीत]
♪ हो हो हो हो... ♪
♪ हो हो हो हो... ♪
♪ हो हो हो हो... ♪
♪ हो हो... ♪
♪ हिन्दू तन मन हिन्दू जीवन ♪
♪ रग-रग हिन्दू मेरा परिचय ♪
♪ हिन्दू तन मन हिन्दू जीवन ♪
♪ रग-रग हिन्दू मेरा परिचय ♪
♪ मैं शंकर का वो क्रोधानल ♪
♪ कर सकता जगती क्षार-क्षार ♪
♪ डमरू की वो प्रलय ध्वनि हूँ ♪
♪ जिसमें नचता भीषण संहार ♪
♪ हिन्दू तन मन हिन्दू जीवन ♪
♪ रग-रग हिन्दू मेरा परिचय ♪
♪ हिन्दू तन मन हिन्दू जीवन ♪
♪ रग-रग हिन्दू मेरा परिचय ♪
♪ हिन्दू ♪
♪ हिन्दू ♪
♪ हिन्दू ♪
♪ मेरा परिचय ♪
अटल!
जी!
केवल बटेश्वर ही नहीं,
तुम्हारी कविताओं का पठन
आगरा की आसपास की
शाखाओं में भी होने लगा है।
धन्यवाद आचार्य जी!
नागपुर आओगे?
हेडगेवार जी मिलेंगे?
बिल्कुल!
अरे वो देखो,
गोलवलकर गुरूजी
कहाँ?
वो वो वो सामने!
हाँ, दिख गये, दिख गये।
और वो वो दीनदयाल जी
कहाँ?
उधर, उधर बाएँ,
काले कोट वाले।
हाँ हाँ, दिख गये, दिख गये।
अरे वाह अटल बाबू!
आप तो सबको जानते हो?
आते रहते हो क्या?
पहली बार आया हूँ नागपुर!
पर जिन्हें देखने की प्रबल इच्छा है
बस वही नहीं दिख रहे हैं।
हूँ...
हूँ...
फिर तो निराश होने की संभावना अधिक है,
सुना है हेडगेवारजी की तबीयत ठीक नहीं है,
मुझे लग रहा है
उनका इस आयोजन में आना कठिन है।
तुम जो कह रहे हो यदि वो सत्य हुआ,
तो इसमें तुम्हारे भी
निराश होने की संभावना अधिक है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
सत्य के आधार पर समाज को
जागृत एवम् एकत्रित करता है,
तो जब तक तुमसे कोई ये नहीं कह देता,
कि पूजनीय हेडगवार जी बीमार हैं
और आज का कार्यक्रम रद्द कर दिया है,
तब तक मैं नहीं मानता।
बिलकुल सही अटल बाबू,
वो देखो आ गये
कहाँ?
[संगीत...]
संघ संविधान
नमस्कार
संघ विश्राम
जब ह्रदय में राष्ट्र निर्माण की ज्वाला
दिन रात धधकती है।
तब बीमार शरीर भी
दौड़ कर मैदान में चला आता है
डाक्टरों की सलाह,
घर पर विश्राम करने की है,
इसीलिए मैं यहां चला आया,
क्योंकि यही मेरा घर है और
संघ ही मेरा परिवार।
इस सभा में
मैं एक अखंड हिन्दू राष्ट्र ही देख रहा हूँ,
बहुजन-हरिजन,
ऊँच-नीच,
जाति-धर्म से
बहुत आगे है संघ
अटल बाबू
बाहर आओ।
राजेश, बाहर आओ।
क्या हुआ?
[कोलाहल]
[संगीत...]
अपने सगों से भी अधिक लगाव है, प्रेम है
हम स्वयंसेवकों के बीच,
इसी भावना को
आगे बढ़ाना है
और भारत को आगे बढ़ाना है।
हम रहें, ना रहें,
भारत सदा रहना चाहिये,
देश की सुरक्षा का उत्तरदायित्व,
अब तुम्हारे कंधों पर है।
ए... पीछे हटो!
[कोड़ों की आवाज़]
[अंग्रेजी में] यह मेरी संपत्ति है।
[अंग्रेजी में] कब से?
-ए... क्या है? -ए... हटो
ये भारत की धरती है,
यहाँ जो कुछ भी है, वो सब भारत का है।
[अंग्रेजी में] क्या मैं ब्रिटिश राज की ओर से
आपको पूरा नेत्र परीक्षण प्रदान कर सकता हूँ?
क्या आप मुड़ सकते हैं?
मैं देखना चाहता हूँ कि क्या आपकी दृष्टी वह है
जो बिना चश्मे के सड़कों पर चलने के लिए आवश्यक है।
वहाँ ऊपर आप कौनसे देश के झंडे को देखते हैं?
क्या यह भारत का है?
तो चलिए, चलें।
क्योंकि इस मिट्टी पर खड़ी हर चीज़ हमारी है।
[घंटा नाद और डमरू की आवाज़]
[संगीत...]
[रात कीड़ों की आवाज़]
[कदमों की आहट]
[दरवाजे की आवाज़]
अटल बिहारी, प्रेम बिहारी
हाँ जी!
चलो उठाओ इनको!
अरे!
अरे!
चलो
-अरे! -चलो।
-भैया। -अटल।
अरे!
अरेरेरेरे...रे...
ऐसे कैसे...
क्या किया है इन्होंने?
झंड़ा गाड के आएँ हैं, सरकारी संपत्ति पे
ले चलो!
पिताजी
अरे सुनो
-सुनो... ए... -चलो चलो।
ए...
आम तौर पर जब एक अपराधी जेल जाता है
तो वो सुधर कर बाहर निकलता है,
पर जब एक क्रांतिकारी जेल जाता है,
तो वो बाहर निकलकर,
फिर से देश को सुधारने के रास्ते पर
चल पड़ता है।
देश की आज़ादी के लिए हम जेल भी गये थे
लेकिन देश की आजादी के साथ साथ
जरूरी है इंसान की आजादी
ये हैं हमारे मित्र
सुबोध महतो।
इन्हें कक्षा में पीछे बिठाया जाता है,
क्योंकि ये पिछडी जाति से आते हैं,
और हमें आगे
क्योंकि हम ब्राह्मण हैं।
यदि प्राध्यापक ही छात्रों से भेदभाव करेंगे
तो वो छात्र जो
देश का भविष्य है,
कभी सोचा है,
इस सीख का उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
क्या असर पड़ेगा?
यह सत्य है
कि जाति हमें अपने पूर्वजों से मिलती है,
और ये भी परम सत्य है,
कि सबसे पहले हम सब हैं,
इस मातृभूमि के सपूत।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
यदि मेरा धर्म, मेरी जाति,
आप में से किसी एक के भी साथ
खड़े होने की अनुमति नहीं देता
तो मैं सबसे पहले अपने इस जनेऊ को
अपने तन से अलग करूँगा
और तब तक धारण नहीं करूँगा
जब तक देखने वाला यह ना मान ले
कि इसे पहनने वाला
और नहीं पहनने वाला इंसान
एक समान है।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
लाओ पर्चे दो
[संगीत...]
लो बंधु, पढ़ो और सोचो
ये लीजिए,
बहन लोग,
मतदान मुझे करना।
अरे!
आप… धन्यवाद!
एक वोट भी दे देना
आप बहुत अच्छा बोलते हैं।
धन्यवाद!
कुछ लोग जब बहुत ज्यादा बात करते हैं ना,
तो उनको चुप कराने का मन करता है
ऐसे लोग बहुत कम होते हैं
जो इतना मीठा बोलते हैं कि
ऐसे इच्छा होती है
बस उन्हें सुनते ही जाएँ।
जी! वो...
अटल बिहारी...
अटल जी आपका भाषण बहुत अच्छा था,
भाषण में लोग सिर्फ नफ़रत फैलाते हैं,
लेकिन आपके भाषण में,
इतना प्यार, इतना स्नेह देखकर
बहुत अच्छा लगा।
आप…? अ….
अअअ... राजकुमारी।
क्षमा चाहता हूँ राजकुमारीजी
पर मैंने अपने भाषण में,
प्रेम, स्नेह, मुहब्बत, प्यार
इन शब्दों का प्रयोग भी नहीं किया।
किया आपने!
कैसे?
आपके भाषण में देश के लिए प्रेम था?
हां!
यूथ के फ्युचर के लिए स्नेह था,
कास्ट सिस्टम के प्रति प्यार का पैगाम था,
आपके हर शब्द में प्रेम ही प्रेम था...
है ना?
एक वोट पक्का समझिए।
पक्का।
जी!
[संगीत]
♪ आँखों से तूने क्या कहा है ♪
♪ मन जरा भी अपने वश में ना रहा ♪
♪ ये प्यार है या और कुछ है ♪
♪ जो भी है ये, छोड़ दे चल अनकहा ♪
♪ जब मन तेरा गाने लगा तो ♪
♪ रोके रुका ना नदी सा ये मन बहा ♪
♪ ये प्यार है या और कुछ है? ♪
♪ जो भी है छोड़ दे चल अनकहा ♪
♪ पलकों तले तू काजल के जैसा ♪
♪ तेरे बिन ये नैन दीपक हैं बुझे ♪
♪ तू चंद्रमा है, मैं इक लहर हूँ ♪
♪ खींचता है बेतहाशा तू मुझे ♪
♪ हो तू कल्पना में ना समाये ♪
♪ कर चुका हूँ सौ जतन मैं बारहा ♪
♪ ये प्यार है या और कुछ है? ♪
♪ जो भी है यह छोड़ दे चल अनकहा ♪
♪ जब मन तेरा गाने लगा तो ♪
♪ रोके रुका ना नदी सा ये मन बहा ♪
सुनिए
सुनिए
जी!
आपकी ब... सहेली नहीं दिख रही है
कुछ दिनों से महाविद्यालय में,
सब ठीक तो है?
उनके दादा जी बहुत बीमार हैं
इसलिए पूरा परिवार दिल्ली चला गया।
अच्छा!!! कुछ और दिन लगेंगे आने में?
चला गया मतलब, रहने चला गया!
राजकुमारी अब वहीं रहेगी हमेशा के लिए
मैं चलती हूँ।
[भावपूर्ण संगीत...]
अटला! कहाँ खोया है बेटा?
हाँ?
कहीं नहीं।
थोड़े दिन और रूक जाता तो,
मुझे भी अच्छा लगता।
कानून महाविद्यालय,
आपके पति परमेश्वर
या मेरे पूज्य पिताजी का नहीं है
जब खुलेगा तब जाना पड़ेगा, हूँ?
और वैसे भी अब...
मुझे नितांत अकेले रहना है।
[ट्रंक बंद करने की आवाज़]
ठीक है, जैसी तेरी इच्छा।
अ... यह लड्डू बनाया है अपने हाथों से, ले जा।
अरे पर ये इतना अधिक?
या तो बर्बाद हो जायेगा, या मैं मोटा हो जाऊँगा।
रख ले बेटा, मीठा ही तो है!
कोई ना कोई नया मित्र तो हाथ मारेगा ही
[हँसते हुए]
-ठीक है, प्रणाम! -खुश रह!
चल ध्यान से जाना बेटा, हाँ?
जी, बाकी लोग कहाँ हैं?
भैया कानपुर जाने से पहले
इनकी दुविधा तो दूर करते जाइए।
अरे... अपनी भाभी को आश्वासन देना होगा...
लॉ की पढाई पूरी करते ही
अपना ब्रह्मचर्य छोड़ के
गृहस्थ आश्रम में आ जाओगे
ऐसा है,
मैंने शादी ना करने का निर्णय,
सिर्फ आपको देखकर नहीं लिया है,
स्वयं को देखकर भी लिया है।
अरे! पिताजी कहाँ है, दिख नहीं रहे हैं?
वो तो सुबह से गायब हैं।
मेरे जाने के पश्चात आ जाएंगे!
शुभ यात्रा।
चलो अम्मा
चल ध्यान रखना बेटा, हां!
ध्यान से जाना, पता देते रहना…
[संगीत...]
[घोड़ा गाड़ी की आवाज़]
बरसों से हम जिस ताजमहल की
सुंदरता का गुणगान करते आ रहे थे,
अपनी चार पंक्तियों द्वारा
अटल जी ने बड़े बड़ों को
उस स्मारक की पीड़ा का एहसास
अपने बचपन में ही दिला दिया था,
तो सोचिए!
जवानी में वो इंसान सिर्फ अपनी बोली से
कितनी बड़ी क्रांति लाने की
क्षमता रखता होगा।
अटल जी की इस निडरता से
एक व्यक्ति बहुत डरते थे।
अरे!
सफर कैसा रहा?
आप यहाँ?
हाँ! मैं यहाँ, आओ…
मुझे पता था,
आप मुझसे मिलने आएंगे!
पर यह पता नहीं था,
इतनी व्यवस्था कर लेंगे।
अब पूज्य पिताजी
हाँ जी।
छात्रावास में
रात को केवल छात्र ही रूक सकते हैं,
तो आप अपने रूकने की व्यवस्था स्वयं कर लें।
[हँसते हुए]
तुम्हें लगता है कि
मैं तुमसे मिलने आया हूँ?
देखो
[कुर्सी की आवाज़]
तुम्हें तो
घर गृहस्थी के चक्कर में पड़ना नहीं
इसलिए जहाँ जी चाहे घूमते हो
पर मेरे तो कई साल
परिवार पालन में निकल गये,
इसलिए कई सारी इच्छाएँ अधूरी रह गईं,
जिस तरह तुम यहाँ
अपने भविष्य के
अगले पड़ाव पर पहुँचे हो,
उसी तरह
मैं भी रिटायरमेंट के बाद में
वकालत पढ़ने का सपना पूरा करने आया हूँ।
अँ...
यह मेरे लिए है?
मेरे लिए ही होगा।
[डिब्बा खोलने की आवाज़]
आपको मुझ पर तनिक भी भरोसा नहीं है ना?
आपको ऐसा क्यों लगता है
कि मैं आपको
मुझ पर गर्व करने के अवसर नहीं दूँगा?
देखो बेटा!
पिता पुत्र के संबंध के हिसाब से
सबसे बड़ी समस्या यही है
कि बाप और बेटे के
विचार अक्सर नहीं मिलते,
तो मैं यहाँ
तुम्हारा मित्र बनके रहने के लिए आया हूँ,
क्योंकि दोस्ती के रिश्ते की
सबसे बड़ी खूबी यही है
कि विचार मिले न मिले
दोस्ती हमेशा रहती है।
लड्डू खाओ...
आहाहा!
अति उत्तम!
[संगीत]
[हँसते हुए]
बैठो।
सुफ़ियान सिद्दीकी लखनऊ से
बैठो।
अटल बिहारी वाजपेयी बटेश्वर से।
बैठो।
जी मैं कृष्ण बिहारी वाजपेयी बटेश्वर से।
भाई तो नहीं लगते आप दोनों?
नहीं, नहीं...
मैं तो इन्हें जानता भी नहीं!
जानते कैसे नहीं हो?
अरे बेटा है मेरा।
बेटा है बेटा
शांत!
♪ झीनी झीनी झीनी झीनी ♪
♪ झीनी झीनी झीनी झीनी ♪
♪ झीनी झीनी झीनी झीनी झीनी ♪
♪ अरे झीनी झीनी बीनी रे चदरिया ♪
♪ झीनी झीनी बीनी रे ♪
♪ ओ सुर नर मुनि सभी ने ओढ़ी ♪
♪ हे सुर नर मुनि सभी ने ओढ़ी ♪
♪ हे ओढ़ के मैली कीन्हीं चदरिया ♪
♪ झीनी झीनी बीनी रे चदरिया ♪
♪ झीनी झीनी बीनी रे ♪
♪ ओ सुर नर मुनि सभी ने ओढ़ी ♪
♪ हे सुर नर मुनि सभी ने ओढ़ी ♪
♪ हे ओढ़ के... ♪
लीखिए कृष्णाजी लीखिए,
स्पीड नहीं बढाई
तो जवानी का सपना
बुढ़ापे में भी पूरा नहीं कर पाओगे!
कम से कम छुट्टी तो नहीं ली हमने,
सिन्सिएरीटी भी तो देखिये प्रोफेसर साहब!
आपके बेटे नहीं आए हैं,
पर पूरे नोट्स आ गए हैं उनके
हैं कहाँ वो?
अच्छा, एक बात बताओ,
कानपुर का गोल गप्पा,
आगरे के गोल गप्पे जितना
गोल क्यों नहीं होता?
अरे अब…
गोलगप्पों में भी भेदभाव करोगे?
हूँ हूँ
-भेदभाव नहीं कर रहे है, -[भोंपू से आवाज़ गूँजती है] सुनो सुनो
-कारीगिरी की बात... -सुनो...
आज शाम सात बजे, चिनार मस्जिद पर
मोहम्मद अली जिन्ना साहब का
जलसा रखा गया है,
मौलवी साहब का फतवा है
कि कौम के सभी मर्द जलसे में हाज़िर रहें।
सुनो सुनो सुनो...
जिन्ना साहब को तो अलग मुल्क चाहिए,
भाई कोई आवाम से भी तो पूछें
कि उन्हें क्या चाहिए?
अरे जनता को तो धार्मिक मुद्दों पर लड़ा के
आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
सोने की चिड़िया
पिंजड़े से बाहर आने वाली है,
हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा
कि अंग्रेज जाते-जाते
इसके पर ना काट जाएँ।
[रेडियो पर अस्पष्ट खबरें]
[सीटी की आवाज़]
नमस्ते
नमस्कार बंधू
[सीटी की आवाज़]
[साइकिल की आवाज़]
और चाचा?
मुबारक हो,
देश आजाद होई गवा,
बधाई हो।
आप सबको बधाई हो भाई।
पंडितजी का बोले भाषण में?
अरे पंडितजी तो भईया बहुतय कुछ बोले
लेकिन सब अंग्रेजी में।
हमरे तो कुछ समझ में नहीं आवा।
अब देश की आजादी की खुशी में,
चाय तो पिलाइए गरमागरम
हाँ हाँ जरूर,
बिलकुल अभी लो।
अटल बाबू
हॉं!
खत आया है नागपुर से
[खत खोलने की आवाज़]
और सब ठीक ना?
आह हा हा हा हा हा...
स्वतंत्र भारत में
सांस लेने का आनंद ही कुछ और है!
क्यों मित्र,
नहीं?
हूँ…
क्या हुआ?
अंग्रेजों से ज्यादा तो
तुम उदास दिख रहे हो
गोलवलकरजी ने पत्र लिख कर
लखनऊ बुलाया है।
इसे मैं सुखद समाचार समझूँ, या कुछ और?
यह भी तुम्हें ही बताना पड़ेगा ना
यदि मेरे पिता वास्तव में मेरे मित्र हैं,
तो उन्हें यह समझना पड़ेगा
कि मैं अब अपना सारा समय
संघ के कामों में देना चाहता हूँ,
पूर्णकालिक बिना किसी हिचकिचाहट के
पूर्ण रूप से स्वयं को
संगठन के प्रति समर्पित करना चाहता हूँ
और इसमें अड़चन सिर्फ इतनी है
कि यह कैसे होगा?
अगर मुझे हर समय यह चिंता रहेगी कि
आपको मेरी
कितनी चिंता है?
हर यशस्वी को अपना यश फैलाने से
कौन रोक पाया है मित्र?
जो सत्य की राह पर चल पड़ा हो,
उसे ना पिता रोक पाया है ना पुत्र,
जाओ
जाओ और हमें तुम पर गर्व करने के,
कई-कई अवसर दो।
लेकिन निर्णय पक्का है?
निर्णय अटल है।
आशीर्वाद।
[संगीत...]
जीते रहो!
अटल अपना ख्याल रखना
और आते रहना।
जी!
मिलना शायद कम हो।
[पानी में चप्पू चलने की आवाज़]
15 अगस्त का दिन कहता,
आज़ादी अभी अधूरी है
सपने सच होने बाकी हैं,
रावी की शपथ ना पूरी है
जिनकी लाशों पर पग धर कर,
आज़ादी भारत में आई
वे अब तक हैं खानाबदोश,
गम की काली बदली छाई
भूखों को गोली,
नंगों को हथियार पहनाए जाते हैं
सूखे कंठों से जेहादी नारे लगवाए जाते हैं
लाहौर कराची ढाका पर मातम की है काली छाया
पख्तूनों पर गिलगित पर है
गमगीन गुलामी का साया
दिन दूर नहीं खंडित भारत को
पुनः अखंड बनाएंगे
गिलगित से गारो पर्वत तक
आजादी पर्व मनाएंगे
आजादी पर्व मनाएंगे…
[गोली की आवाज़]
[अंग्रेजी में रेडियो समाचार] आज 5 बजकर 12 मिनट पर
राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी
के ऊपर 3 राउंड गोली चलायी गयी,
और जिसके 15 मिनट बाद ही उनका देहावसान हो गया।
अटल बाबू
[कोलाहल]
अटल बाबू
[हड़बड़ाहट में दरवाज़ा खोलने और बंद करने की आवाज़]
-क्या? क्या हुआ रवि बाबू? -अटल बाबू
किसी गोड़से नाम के आदमी ने
बापू की हत्या कर दी है।
क्या?
यह खबर भी चारों तरफ फैली हुई हैं कि
ये गोड़से कुछ दिनों के लिए संघ में भी था।
[लोगों के भीड़ की तोड़फोड़ और आगजनी करने की आवाज़]
[कांच तोड़ने की आवाज़]
[अस्पष्ट संवाद]
[कोलाहल]
[आलाप]
टूटे हुए तारों से फूटे बासंती सुर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात कोयल की कूहुक रात
प्राची में अरूणिम की रेख देख पाता हूँ
गीत नया गाता हूँ।
गीत नया गाता हूँ।
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अंतर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूँगा रार नहीं ठानूँगा
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ,
गीत नया गाता हूँ,
क्या हुआ दीनदयाल जी,
मैंने कोई भूल कर दी?
क्या कहें अटल
कहाँ से शुरू करें?
कुछ समझ ही नहीं आ रहा।
[दरवाजा खोलने की आवाज़]
[कदमों की आहट]
मुझे लगा... मेरे निड़र लेखन के कारण,
आपने राष्ट्र धर्म पत्रिका
चलाने का भार सौंपा
अनजाने में
या उत्तेजना में
मैंने अपनी मर्यादा पार कर दी हो,
मैं क्षमा चाहता हूँ।
हे भगवान!
दीनदयालजी
मेरे जीवन में आपका स्थान
पिता से भी बढ़कर है।
आपको असंतुष्ट करने के बजाय,
मैं त्यागपत्र देना उचित समझूँगा।
अटल! हमने सोचा था
साल दो साल में,
हम राष्ट्र धर्म पत्रिका द्वारा
देश के कोने-कोने तक
संघ का संदेश पहुँचाएँगे।
पर तुमने तो चंद महीनों में ही,
सरकार ही हिला दी!
मैं कुछ समझा नहीं?
जो तुम हमें देने की बात कर रहे थे,
वो केन्द्रीय मंत्री श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी
सरकार को देने वाले हैं!
क्या?
त्यागपत्र!
वो हमारे साथ जुड़कर
नई राजनीतिक पार्टी शुरू करना चाहते हैं,
गोलवलकरजी ने नागपुर बुलाया है,
श्यामा प्रसादजी से भेंट के लिए,
क्या कहते हो? छलांग लगाएँ?
पता नहीं
आप जानते हैं देश सुरक्षित नहीं है।
इसलिए तो हमने त्यागपत्र दिया है।
अगर हिन्दुस्तान को सही दिशा में ले जाना है
तो इसकी जिम्मेदारी भी
सही कंधों पर होनी चाहिये।
मुखर्जी बाबू!
यह हमारा सौभाग्य है
कि आप जैसा देश भक्त
हमारे विचारों से प्रभावित है,
पर संघ कभी राजनीतिक दल नहीं हो सकता,
हमारे विचार
सत्ता कारण के लिये नहीं बने हैं,
क्या कहते हो अटल?
जी ब ब सरकार पहले खुद की चिंता करती है,
उसके बाद देश की,
लेकिन संघ तो सिर्फ
देश की चिंता करता है,
गुरूजी, आपके पास संगठन है,
हमारे पास सपना,
दोनों अगर साथ आते हैं
तो सोचिये
हिन्दुस्तान कहाँ से कहाँ पहुँच सकता है,
यह तो आप भी जानते हैं।
[कुर्सी सरकाने की आवाज़]
मैं अपने हाथ
राजनीति में नहीं डालूँगा।
पर संघ से जुड़े उन लाखों लोगों की
भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाऊँगा।
जो राजनीति से
राष्ट्र संगठित करना चाहते हैं
मैं आपका साथ,
बिना संगठन छोड़े दे सकता हूँ!
धन्यवाद गुरूजी!
धन्यवाद गुरूजी!
संघ के इस निर्णय का परिणाम आप देखना
कि भारत किस गति से आगे बढ़ता है!
धन्यवाद!
धन्यवाद!
धन्यवाद!
आओ, अ... श्याम जी
यह है संघ का ओजस्वी कार्यकर्ता अटल।
तो आप हैं राष्ट्र धर्म के एडीटर?
संपादक।
[हँसते हुए]
तो संपादक महोदय!
आज से आपके संपादकीय उत्तरदायित्वों के साथ-साथ
आपके राजनीतिक जीवन का भी
शुभारंभ होने जा रहा है।
मैं समझा नहीं?
विश्व के इतिहास का सबसे बड़ा
राजनीतिक दल बनाना है,
हूँ
चलोगे हमारे साथ?
अरे...
चलें फिर?
हाँ हाँ, चलिए।
♪ आज दिल पे हाथ रख के ♪
♪ यह कसम लें हम सभी ♪
♪ ना झुकेगा देश अपना ♪
♪ ना झुकेंगे हम कभी ♪
♪ ज़िंदगी का क्या किया जो ♪
♪ सर उठाके मर ना पाया ♪
♪ हो गया वो खून पानी ♪
♪ जो वतन पे ना बहाया ♪
♪ चल लहू से लिख दे खाक पे ♪
♪ ऐ भारत माँ तेरी माटी तेरा देश पहले ♪
♪ दुनिया के सारे सुख पीछे हैं मेरा देश पहले ♪
♪ है तिरंगा शान अपनी देंगे इस पे जान अपनी ♪
♪ जन गण मन अधिनायक ♪
♪ जय हे तेरा संदेश पहले ♪
♪ दुनिया के सारे सुख पीछे हैं मेरा देश पहले ♪
[आवाज़ गूँजती है] बांग्लादेश से आये
सभी विस्थापितों की समस्याओं का समाधान
करने की ज़िम्मेदारी इस सरकार की है।
पर यह सरकार,
बांग्लादेश से आए
शरणार्थी विस्थापितों के लिए
कुछ नहीं कर रही।
अब इसकी जिम्मेदारी हमें लेनी होगी
भारतीय जनसंघ के लोग आपके साथ हैं
बोलिए भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
[तालियों की आवाज़]
[संगीत...]
वंदे
मातरम
वंदे
मातरम
इतने परिश्रम के बाद भी
3 प्रतिशत वोट मिले हैं हमें।
अब बताओ अटल क्या करें?
कांग्रेस पुरानी पार्टी है दीनदयाल जी
आप अखिल भारतीय जनसंघ के
कार्यकर्ताओं को थोड़ा समय और दीजिए
फिर देखिए प्रतिशत
3 से 30 कैसे हो जाते हैं,
भरोसा है मुझे।
[बंदूक की आवाज़]
हम क्या चाहते हैं?
आजादी।
हम क्या चाहते हैं?
आजादी।
हम क्या चाहते हैं?
आजादी।
हम क्या चाहते हैं?
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारतीय जनसंघ के लिए जम्मू और कश्मीर
भारत वर्ष का एक अभिन्न अंग है।
एक ही देश में दो प्रधान
दो विधान और दो निशान
कत्तई नहीं हो सकते
भारतीय जनसंघ का एक-एक कार्यकर्ता
भारत वर्ष की एकता के लिए
अपनी जान भी दे सकता है।
[टेलीफोन की आवाज़]
[टेलीफोन का रिसीवर उठाने की आवाज़]
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
एक राष्ट्र एक निशान एक विधान...
[पार्श्वध्वनि] मैं आशा करता हूँ कि हमारी बुलंद आवाज़
हिन्दुस्तान की संसद तक पहुंचेगी
सुनी जाएगी।
कि एक हिन्दुस्तानी को
कश्मीर जाने के लिए परमिट चाहिए?
वहाँ तिरंगा फहराना अपराध है?
मैं पूछता हूँ
यह आजादी भली कैसी आजादी हुई?
अखिल भारतीय जनसंघ
एवं ये पूरा देश
धारा 370 का विरोध करता है।
मैं सरकार को चेतावनी देना चाहता हूँ
कि यदि हमारे नेता
श्यामा प्रसाद मुखर्जीजी
दिल्ली नहीं पहुँचे,
तो परिणाम बुरा होगा
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
भारत माता की
जय
एक राष्ट्र, एक निशान, एक प्रधान
एक राष्ट्र, एक निशान, एक प्रधान
एक विधान
एक निशान एक प्रधान
एक विधान
कश्मीर भारत का
अटूट अंग है
कश्मीर भारत का
अटूट अंग है
कश्मीर भारत का
अटूट अंग है
एक विधान
एक निशान एक प्रधान
एक विधान
एक निशान एक प्रधान
[उदासीन संगीत]
अमर रहें अमर रहें,
श्यामा प्रसाद अमर रहें
[पानी की आवाज़]
आज़ादी के बाद भी
यह देश हमारा है यह बताने के लिए
यदि बलिदान देना पड़े तो
यह कैसा लोकतंत्र है?
लोकतंत्र को बदलने के लिए
लोकतंत्र में जीतना होगा बंधू!
रही बात कश्मीर की
तो जहां हुए बलिदान मुखर्जी
वो कश्मीर हमारा है।
श्यामा प्रसादजी के
अधूरे सपने को पूरा करना होगा
अब हमें रोना नहीं है
कांग्रेस को रोकना है
इलेक्शन आ रहा है
जनसंघ की आवाज़ देश तक पहुँचाने के लिए
हमें संसद तक पहुँचना होगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सभाओं में
उन्हें कई बार दूर-दूर से देखने के बाद
यह निर्णय लिया
कि अब आगे का जीवन
उनके करीब रहकर ही बिताना है।
अटलजी!
प्रणाम!
नमस्ते!
आ... अडवाणी
आइए।
देखिए आम तौर पर जब कोई मिलता है
तो कहते हैं कि
आपके बारे में बहुत सुना है
हाँ
पर आप वो व्यक्ति हैं
जिनके बारे में हमने सिर्फ सुना नहीं
बल्कि औरों को भी आपके बारे में बताया है
जी हाँ!
पकड़-पकड़ कर लोगों को
आपकी कविताएँ सुनाई है
धन्यवाद अडवाणीजी!
श्रीमान इसकी दस प्रतियाँ बना दें।
जी
सारे दफ्तरों में जाना है।
देखिए,
लालजी कहेंगे तो हमें लगेगा कि आप भी
सदैव हमारे परम मित्र बनने के इच्छुक हैं,
वरना जिस तरह अचानक से आपके सामने आ गये
उसी तरह अचानक से
आपकी आँखों से ओझल हो जाएँगे
कोई दिक्कत नहीं।
लालकृष्ण अडवाणी!
हिन्द का सच्चा बेटा जो है सिंध से आया
मिलते ही कवि हृदय प्रेम भर आया
आ हा हा हा
अब गिनते जाओ मित्र!
कवि के मुख से कितनी बार
लाल जी निकल के आया।
आह हा हा हा
वैसे इलेक्शन में आपके
कहाँ से खड़े होने की बात हो रही है?
कहाँ से नहीं, कहाँ-कहाँ से...
लखनऊ, मथुरा और…
और?
[पार्श्वध्वनि] बलरामपुर में
सभी यात्रियों का स्वागत है
[रेल्वे की अनाउंसमेंट]
नमस्कार नमस्कार अटल जी!
[कोलाहल में संभाषण]
जनसंघ का प्रचारक।
ओ हो नमस्कार नमस्कार
बलरामपुर में आपका स्वागत है।
[किताब गिरने की आवाज़]
उतरते ही आपके बलरामपुर ने
सुकरात के फिलोसोफी को धूल चटा दी!
अब तो मुझे भी इस धरती पे
माथा रगड़ना पड़ेगा,
इसका वंदन करना पड़ेगा...
[सभी हँसते हैं]
चलिए
हां बलरामपुर!
चलिए, आइए अटल जी,
[ट्रेन की आवाज़]
[संगीत...]
सुनो सुनो सुनो बलरामपुरवासियों
आपके बलरामपुर से
भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी
श्री अटल बिहारी वाजपेयीजी को
अपना अमूल्य मत दे कर
भारी बहुमत से विजयी बनायें
और बलरामपुर में विकास का दीया जलायें
बलरामपुर!
बलरामपुर में
आज से पहले जितनों पे आप सब ने भरोसा किया
सब के सब लूट के चले गए
मैं भी आप सब से कुछ छीनने ही आया हूँ!
नेताओं द्वारा दिए गए झूठे वायदे से
मिली हुई आपको आपकी निराशा...
जमीनदारों के अत्याचार से मिला हुआ डर
और इस प्रकार के लोगों द्वारा
अपने आप को ठग कर
आपके जीवन को बर्बाद करने का भय,
मैं आपसे आपकी निराशा, दुख, डर
यह सब आपसे छीनने आया हूँ।
ना मेरे पास बाप-दादा की दौलत है,
ना कुबेर का ख़जाना,
मेरे पास यदि कुछ है
तो सिर्फ और सिर्फ भारत माता का आशीर्वाद।
[तालियों की आवाज़]
मुझे आपसे रूपए-पैसे नहीं चाहिए,
केवल इतना चाहिए,
यदि आप में से किसी को भी
यह भरोसा है कि
हमारी परेशानियों की चोरी करने वाला
यह लूटेरा यदि सत्य बोल रहा है,
तो आपका आशीर्वाद चाहिए,
स्नेह चाहिए... बस!
[तालियों की आवाज़]
[पार्श्व में आलाप]
आप सब के थोड़े-थोड़े सहयोग से
जो ताकत मिलेगी, ऊर्जा मिलेगी
बलरामपुर से जो बल मिलेगा,
वो उस पर भारी पड़ेगा
जो अकेला खुद को
सर्व शक्तिशाली समझ बैठा है।
[ढोल नगाड़े बजने का संगीत]
♪ होहोहो... राम रंग में मन उजियाला ♪
♪ राम रंग में मन उजियाला ♪
♪ हो राम रंग में मन उजियाला ♪
♪ अटल हो मांझी का रखवाला ♪
♪ मन में उड़त गुलाल केसरी ♪
♪ मन में उड़त गुलाल केसरी ♪
♪ मन में उड़त गुलाल केसरी ♪
♪ मन में उड़त गुलाल केसरी ♪
♪ मन में उड़त गुलाल केसरी ♪
♪ केसरी केसरी ♪
त्वं गणानां त्वं गणपति गुम् हवामहे
क्रियाणां त्वं क्रियापदे गुम् नमामहे
विधिनां त्वं विधिपते गुम् नमामहे
वासुमम्....
[कोलाहल]
अगले सदस्य हैं अटल बिहारी वाजपेयी
आदरणीय अध्यक्ष महोदय!
और माननीय प्रधानमंत्री जी!
सदन में उपस्थित सत्ता पक्ष
और विपक्ष के सभी साथियों को
अटल बिहारी वाजपेयी का सादर प्रणाम।
लोकसभा में पहली बार चुन के आया हूँ।
505 सदस्यों की लोकसभा,
जिनमें 403 कांग्रेस और उनके साथी,
102 – प्रतिपक्ष,
उसमें हम भारतीय जनसंघ के चार...
[सब हँसते हुए]
आप सब को लग रहा होगा,
इतनी संख्या में क्या कर पाएँगे?
पर यही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आनंद है।
आप भले ही हमें सुनें या ना सुनें?
पर संख्या बल में कम होने के कारण
और नियमों के अनुसार,
हमें बोलने के समय और अवसर खूब मिलेंगे।
[सब हँसते हुए]
और आप सबको पता चलेगा,
यदि भारत एक कल्पवृक्ष है
तो उसका वासी, उस विशाल वृक्ष की जड़ें,
उन्हीं वासियों में से एक मैं हूँ
और स्वयं प्रधानमंत्रीजी भी हैं।
मैं माननीय प्रधानमंत्रीजी से आग्रह करूँगा,
वो सत्तापक्ष और विपक्ष सब को साथ लेकर बढ़ें
और इस देश को एक शक्तिशाली देश बनाएं।
[मेज थपथपाने की आवाज़]
-प्रणाम प्रणाम -बैठिए बैठिए
-नमस्ते -प्रणाम पंडितजी
प्रणाम!
[अंग्रेजी में] तुम बहुत अच्छा बोलते हो नौजवान!
मैं देख सकता हूँ तुम्हारा उज्वल भविष्य!
धन्यवाद प्रधानमंत्रीजी!
हमें देश का भविष्य उज्वल दिखता है।
कोई कह रहा था,
तुम कविताएँ भी लिखते हो?
जी!
प्रेम और सद्भाव बढ़ाने के लिए कविता करता हूँ
और अनुचित को उचित करने की लिए भाषण…
[अंग्रेजी में] देखना
एक दिन यह ज़रूर भारत का प्रधानमंत्री बनेगा!
[विस्फोट की आवाज़...]
[रेड़ियो समाचार] अभी-अभी प्राप्त सूचना के अनुसार
चीन ने भारत की सीमाओं पर युद्ध छेड़ दिया है!
लद्दाख और मैकमहन की रेखा पर
चीनी सेना ने भारतीय बलों के लिए
कठिन परिस्थितियां खड़ी कर दी हैं!
[माईक पर] वही तो मैं कह रहा था
चीन का स्वागत करने के पहले
हमारी सीमाएँ सुरक्षित क्यों नहीं थी?
[अंग्रेजी में] शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म...
हमारे 3000 वीर सपूत सैनिक शहीद हो गए।
पूरा देश इस सरकार से अपना भरोसा हार गया,
और प्रधानमंत्रीजी विदेश नीति से हार गए!
[रेडियो सामचार] भारत की जनता के लिए
अत्यंत दुखद समाचार!
देश के सर्वप्रथम प्रधानमंत्री
श्री पंडित जवाहरलाल नेहरूजी का
दोपहर १ बजकर ४४ मिनिट पर
निधन हो गया!
नेहरू जी 16 साल 9 महीने 12 दिनों तक
भारत के प्रधानमंत्री रहे।
मैं लालबहादुर शास्त्री,
ईश्वर की शपथ लेता हूँ कि
मैं विधि द्वारा स्थापित,
भारत के संविधान के प्रति,
सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा।
चीन पहले से ही
अणुबम बनाने की तैयारी में जुट चुका है,
हमारा दुश्मन पड़ोसी
दूसरा हमला कर दे,
उससे पहले हमें अणुशक्ति बनना होगा!
[कटाक्ष आवाज़] यह देखो कवि चले हैं बम बनाने।
[सभी हँसते हुए]
[नभ में विमान की गड़गड़ाहट]
[विस्फोट की आवाज़]
[रेड़ियो समाचार] पाकिस्तानी सेना ने गुजरात
और कश्मीर की सीमाओं पर हमला बोल दिया है।
[गोलियों की आवाज़]
[पत्रकार] देश में एक के बाद एक हमले हो रहे हैं,
पहले चीन और अब पाकिस्तान!
देखिए देश के पहले प्रधानमंत्रीजी भी चुप थे
और अब आपकी सरकार भी?
कहा तो यह भी जा रहा है कि...
आपकी पार्टी के कुछ लोग आपसे नाराज़ हैं?
और आपसे त्याग-पत्र की मांग कर रहे हैं!
इस बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे?
शास्त्री जी, शास्त्री जी, कुछ बोलेंगे?
[कोलाहल]
शास्त्री जी! शास्त्री जी! शास्त्री जी!
[कैमरा फ़्लैश की आवाज़ें]
आभास होता है कि
आपकी पार्टी का कीमती समय
आंतरिक राजनीति में ही व्यस्त है!
त्याग-पत्र देने के दबाव में आने से पहले
यह जान लीजिए...
युद्ध की इस घड़ी में
जनसंघ और पूरा देश आपके साथ है।
[युद्ध की विध्वंसक आवाज़ें]
[रेडियो समाचार] भारत और पाकिस्तान के बीच
चली जंग में
भारत ने जीत हासिल करते हुए
युद्ध विराम घोषित किया!
दोनों पड़ोसी मुल्क में चल रही जंग को,
भविष्य के लिए समाप्त करने हेतु
प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री
ताशकंद पहुँचे थे।
ताशकंद समझौते पर
हस्ताक्षर करने के कुछ ही समय बाद ही
प्रधानमंत्री लाल बहादूर शास्त्री के नींद में
निधन हो जाने की सनसनीखेज खबर प्राप्त हुई।
कहा यह भी जा रहा है कि
उनकी इस आकस्मिक मृत्यु की
निष्पक्ष जांच की मांग भी
भारत सरकार की ओर से की जा चुकी है।
मेरे प्यारे बंगाल के भाइयो और बहनों
शास्त्रीजी के रूप में इस देश को
बहुत बड़ा नुकसान हुआ है!
दुख इस बात का भी है
जो लड़ाई जवानों ने जीती थी,
हम कागज़ पर हार गए।
लेकिन इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री बनना
मतलब वंशवाद की राजनीति की शुरूआत है!
[अंग्रेजी में] मैं इंदिरा गांधी
ईश्वर की शपथ लेती हूँ,
कि मैं विधि द्वारा स्थापित,
भारत के संविधान के प्रति,
सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगी।
इसीलिए अखिल भारतीय जनसंघ को
विकल्प के रूप में आगे आना होगा।
पिछले लोकसभा चुनाव में हमें 34 सीटें मिली थीं,
मतलब हमारी ताकत ज्यादा है
और यह बात पता है उनको...
हमारी ताकत को तोड़ने का काम
यह सरकार करेगी,
इसलिए हमें एकत्रित होकर
इस कांग्रेस को हटाना है!
इंदिरा राज खत्म करना है!
जिस तेजी से भारत में बदहाली बढ़ रही है,
उससे दुगुनी रफ्तार से दीनदयालजी
भारत भ्रमण कर रहे हैं!
आज पटना पहुँचेंगे।
कल हम एक आम सभा करेंगे!
आप सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से
कहें कि तैयारी में लग जाएं...
-जी ठीक है चलिए -ठीक है...
-नमस्ते... -नमस्ते...
-जी ठीक है चलिए ... -चलिए...
अरे अटलजी! क्या करने बैठ गए आप?
चलिए, कहीं घूम कर आते हैं!
अरे!!! अभी बहुत काम है लालजी!
अरे अटलजी! काम भी अच्छे से तभी हो पाता है
जब इंसान अच्छे से आराम कर पाता है!
अपनी इस सोच को थोड़ी देर के लिए
छुट्टी दे दीजिए
और चलिए मेरे साथ... [हँसते हुए]
कहाँ चलें?
साथी देखने!
[हँसते हुए] अरे लालजी!
यह उम्र है कोई साथी देखने की?
आप भी गलत अनुमान लगा रहे हैं!
मेरा मतलब था...
राजेन्द्र कुमार और वैजयंतीमाला...
ओह [हँसते हुए]
अरे चलिए...
[गुनगुनाते हुए]
[फोन की घंटी की आवाज़]
इस फोन को भी अभी बजना था।
नमस्कार! जनसंघ कार्यालय।
नमस्कार! मैं शर्मा बोल रहा हूँ,
पटना जनसंघ कार्यालय से...
जी?
[संगीत...]
[रेडियो समाचार] अभी-अभी प्राप्त सूचना के अनुसार
अखिल भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष
पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी का
आकस्मिक निधन हो गया!
मुगलसराय स्टेशन पर दीनदयाल उपाध्याय जी का शव
संदिग्ध अवस्था में पाया गया।
इस रहस्यमय मृत्यु को लेकर
कई सवाल भी खड़े हो उठे हैं।
तुम्हारे साथ लम्बी यात्रा करने में
हमें संकोच नहीं होता
हम जानते हैं
यदि बीच रास्ते में हम रूक भी गए
तो लक्ष्य को पाने के लिए
हमारा पुत्र आगे बढ़ जायेगा।
राम नाम सत्य है
राम नाम सत्य है
राम नाम सत्य है
राम नाम सत्य है
राम नाम सत्य है
राम नाम...
सत्ता के विरोध में जिन्होंने आवाज़ उठाई
वो दबा दी गई
श्यामा प्रसादजी
और दीनदयालजी की मृत्यु जिन हालात में हुई,
उन पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं!
जिनका उत्तर हो सकता है
हम कभी जान ना पाएँ!
अब निर्णय आप सभी को लेना है।
अखिल यानी पूर्ण
पर इस समय अखिल भारतीय जनसंघ
अपने अध्यक्ष के बिना
अधूरा महसूस कर रहा था।
एक तरफ मृत्यु का भय
लोगों को उल्टे पाँव चलवा रहा था
और दूसरी तरफ...
देश की लम्बी आयु की चिन्ता
किसी के कदमों को आगे बढ़ा रही थी।
[भारत माता की जय के नारे]
यदि भारत माता के चरणों में
लहू बहाकर ही आगे जाना है,
तो मैं इस पद को ग्रहण करने के लिए
पूर्ण रूप से तैयार हूँ।
[भारत माता की जय के नारे]
[थिएटर में घंटी बजने की आवाज़]
[कोल्ड्रिंक की बोतल की आवाज़]
लाल जी...
आपको सिनेमा क्यों पसंद है?
[हँसते हुए]
क्यों पसंद है?
भईईई… कहानी है!
संवाद है!
संगीत है!
गाने हैं!
अर्थात मनोरंजन, सपने
अब आप बताइए आपको क्यों पसंद है?
जिस सुख समृद्धि की हम कल्पना करते हैं
यह सिनेमा वाले उसे दिखा देते हैं,
पर्दे पर जो हमें दृश्य दिखता है
हम उसे मान लेते हैं!
ऐसा ही एक पर्दा सिनेमा घरों के बाहर है,
जो इस देश के भोले-भाले नागरिकों की
आँखों के सामने लगा हुआ है।
उन्हें जो दिखाओ,
वो सच मान लेते हैं।
हम जब भी कुछ,
देश के लिए अच्छा करना चाहते हैं।
हम पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा कर,
जनता को यह बताया जाता है,
समझाया जाता है
कि हिन्दू पार्टी
देश के लिए खतरा हो सकती है।
जब कि देश की उन्नति के लिए
हम बेहतर काम कर सकते हैं
और यह सच
तब तक लोगों को नज़र नहीं आ सकता!
जब तक कांग्रेस के इस झूठ के पर्दे को
जनता की ऑंखों के सामने से उतार ना दें।
[थिएटर में घंटी बजने की आवाज़]
गरीबी हटाओ का नारा देकर
कांग्रेस ने फिर से सत्ता तो पा ली,
पर कम होने की बजाय
बदहाली और भी बढ़ गयी।
जहाँ जनता को खाने को पैसे नहीं थे,
वहाँ इंदिरा सरकार ने पेट्रोल के दाम को
सातवें आसमान तक पहुँचा रखा था।
अटल जी शांत थे
और वही उनकी सबसे बड़ी शक्ति थी
क्योंकि जब वो खामोश होते थे
तब उनके दिमाग में
तूफानी ख्याल बह रहे होते थे!
[कोलाहल]
भारत के प्रथम प्रधानमंत्रीजी ने
स्वतंत्रता मिलने के बाद
देश को जिस तरह चलाया
देश उन पर गर्व करता है।
[मेज पीटने की आवाज़]
अध्यक्ष महोदय!
पर केन्द्र में उनकी पार्टी
आज तक एक सक्षम नेता नहीं बना पाई
यह हम सब के लिए दुख की बात है।
सुनने में आया है कि
प्रधानमंत्रीजी का अधिकतर समय,
अपने ही तंत्र को
संभालने में खर्च हो जा रहा है।
[सांसद] आप सही तरीके से नहीं बोल रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय!
और हम आशा करते हैं
कि आज हमें बैलगाड़ी में आता देख
सरकार यह देख पायेगी
कि देश में गरीबी इस समय किस अवस्था में है!
आप तो गरीब नहीं हुए,
फिर यह बैलगाड़ी का दिखावा किस बात का?
[सभी हँसते हुए]
आदरणीय सदस्य महोदय!
जनता ने
जिन कामों के लिए हमें चुनकर यहाँ भेजा है,
यदि वो काम हम नहीं कर पा रहे हैं,
तो हमें कोई अधिकार नहीं है,
इस सदन में भीड़ लगा के
सरकारी पैसे का दुरूपयोग करने का।
[अंग्रेजी में] शर्म, शर्म, शर्म, शर्म, शर्म...
[संगीत...]
वापसी में साथ चलने के लिए
सवारियाँ तो नहीं ढूँढ़ रहे हैं अटलजी?
सिर्फ सरकारी खर्चा कम करने से
देश की हालत नहीं सुधरेगी!
मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूँ प्रधानमंत्रीजी!
बहुत काम करना होगा!
जैसा कि अब...
पूर्व-उत्तर के सांसद जी ने
स्त्रियों के अधिकारों के लिए किया!
मैं इनके कठिन प्रयासों की
सराहना कर रहा था।
[अंग्रेजी में] और मुझे यह जानकर खुशी हुई
कि कुंवारे होने के बावजूद,
आपको देश की महिलाओं की भी काफी चिंता है!
मैं अविवाहित हूँ,
पर कुंवारा भी नहीं हूँ!
[संगीत...]
हम पड़ाव को समझें मंजिल,
हम पड़ाव को समझें मंजिल,
लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल।
वर्तमान के मोह-जाल में,
आने वाला कल न भुलाएँ,
आओ फिर से दीया जलाएँ।
आओ फिर से दीया जलाएँ।
वाह! क्या बात है!
[सभी की तालियाँ]
अब मैं
हमारे मुख्य अतिथि अटलजी से निवेदन करता हूँ कि
वो मंच पर पधारें और दो शब्द कह कर,
छात्रों को प्रोत्साहित करें।
[सभी की तालियाँ]
प्रोत्साहन तो
इस बच्ची का बढ़ाना चाहिए,
जिसने इतनी सुंदरता से
मेरी ही लिखी कविता का पाठ किया।
[सभी की तालियाँ]
बच्चों
आप इस देश के भविष्य हैं।
आगे चल के
बाधायें आएंगी
चुनौतियाँ आएंगी आपके भी जीवन में,
पर मनुष्य को चाहिए,
परिस्थितियों से लड़े!
एक स्वप्न टूटे तो दूसरा जड़ें!
[सभी की तालियाँ]
हाँ! अब लग रहा है
यदि आप का निमंत्रण स्वीकार नहीं करता,
तो आपकी इस होनहार बिटिया से
मिल नहीं पाता!
भारी भूल हो जाती!
अटलजी! एक निमंत्रण और भी है!
वो क्या?
मैं जानती हूँ!
आप देश के कार्यों में
हमेशा व्यस्त रहते हैं
पर यदि आपके पास थोड़ा सा समय हो तो
हमारे घर लंच...
दोपहर के भोजन के लिए आइए
हम यहीं पास में रहते हैं।
अअअ क्षमा चाहता हूँ बिटिया
आ नहीं पाऊंगा।
चलिए शिव कुमारजी।
क्या है
मुझे आज दिन भर उपवास रहना पड़ेगा,
तब जाके कल दोपहर में
भर पेट स्वादिष्ट व्यंजन का
आनंद उठा पाऊँगा,
तुम्हारे साथ।
करो तैयारी,
आ रहे हैं अटल बिहारी!
चलिए शिव कुमारजी।
[संगीत...]
बहुत बहुत स्वागत है आपका अटलजी!
[हँसते हुए] आइए आइए! अरे वाह!
पैर छुओ बेटा!
प्रणाम!
स्वागत है आपका!
-बहुत सुंदर निवास है। -आइये
धन्यवाद!
आइये अटलजी! स्वागत है आपका।
ओह...
ये, ये क्या?
मैं तो हैरान था।
आपको मेरी कविताएँ याद हैं?
यह भी पता है
मुझे मिठाई बहुत प्रिय है
भई तुम तो नन्हीं जादूगरनी निकली!
सिर्फ इतना ही नहीं,
कॉलेज में आप स्टूडेंट्स फेडरेशन के सेक्रेटरी थे!
दहेज प्रथा के विरूद्ध आपने आंदोलन किया था।
जात-पात नहीं मानते
और भी बहुत कुछ जानते हैं।
अरे भाई
आपने तो पूरी कुंडली निकाल रखी है मेरी।
कहाँ से एकत्रित की इतनी जानकारी?
[संगीत... आलाप]
[कोयल की कुहू कुहू की आवाज़]
अटलजी
हूँ...
हम दोनों आपकी खूब बातें करते हैं।
अब चर्चा तो आपकी जीवनशैली का
मुख्य हिस्सा है।
हूँ!
प्लीज
जी।
और रिश्तेदार तो
हमें पैदा होने से पहले ही मिल जाते हैं ना!
जीवन में जो दोस्त हमें मिलते हैं,
वो बहुमूल्य होते हैं!
और किसी कारण वो दोस्त आपसे अलग होकर,
आपको वापिस मिल जाएँ,
तो आप बहुत भाग्यशाली होते हैं।
देखिए, यह बात सुनने में
थोड़ी सी अजीब लगेगी आपको।
हम चाहते हैं
कि आप हमारे परिवार का एक हिस्सा बनें।
और हम यह भी जानते हैं
कि जितनी ये बात सुनने में अजीब है ना,
आपके लिए समझने में उतनी ही आसान है।
[अंग्रेजी में] क्योंकि, आप अपने समय से
हमेशा आगे रहते हैं,
तो आपके जैसे प्रोग्रेसिव इंसान का
हमारी फैमिली के साथ फ्यूचर में
कॉर्डिअल रिलेशनशिप हो।
मुझे नहीं लगता,
इससे आपको कोई भी प्रोब्लम होनी चाहिए?
आप चाहें तो मना कर सकते हैं।
आपके जवाब का इंतजार रहेगा।
[संगीत...]
[खराश की आवाज़]
ऐसा है,
इंतजार तो पहले ही बहुत लंबा हो गया।
आपके सवाल का जवाब
अभी दिए देता हूँ।
राजकुमारी जी, मैं...
...पूरी दुनिया से
सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने निकला हूँ,
और ऐसे में कोई व्यक्ति,
मुझे अपने जीवन का हिस्सा बनाये,
परिवार का हिस्सा बनाए
और मैं मना कर दूँ,
यह तो मेरे अपने ही विचारों का
विरोध करने जैसा हो जाएगा।
कौल साहब!
मेरी जीवन-शैली का मुख्य हिस्सा,
सिर्फ झूठे वायदे करने वालों के साथ बीतता है,
ऐसे में सच बोलने वाले
और ऐसा सच
जिसे हर कोई छुपाना चाहे,
ऐसे धुरंधर परिवार के साथ मेल-जोल रखके
किस्मत वाले आप नहीं,
[हँसते हुए] मैं होऊँगा।
[गँहरी साँस छोड़ते हुए]
आइये! दोपहर का भोजन करते हैं।
चलिए भोजन करते हैं।
[हँसते हुए] आइए…आइए…
चलें।
[टाइपराइटर की आवाज़]
[अंग्रेजी में] जेठमलानीजी,
आप कार्यवाही आगे बढ़ा सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन में
देश के प्रतिनिधि के तौर पर
माननीय प्रधानमंत्री यूरोप गयी हैं,
तो मैं इस कोर्ट से निवेदन करता हूँ
कि उन्हें अगली डेट दे दी जाए।
[अंग्रेजी में] अनुमति मंजूर।
अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।
इनका केस स्ट्रॉंग हो रहा है,
कुछ समझ रहे हैं?
मैडम को इनफॉर्म कीजिए।
-वो तकलीफ में आ सकती हैं। -जी
और हाँ! सरकार भी गिर सकती है।
शिमला समझौता,
स्टॉकहोम सम्मेलन,
या बांग्लादेश लिब्रेशन,
जब-जब प्रधानमंत्रीजी के हाथों अच्छे कार्य हुए
हमने पुरजोर सराहना की।
[मेज पीटने की आवाज़]
लेकिन आज
सरकार के प्रमुख के ऊपर ही
अपने चुनाव में हुई गड़बड़ी के कारण
उच्च न्यायालय में आरोपी बन के
खड़ा होना पड़ रहा है।
गरीबी हटाने का नारा देकर,
सत्ता हाथ में लेने वाले,
आज स्वयं गरीबी और बेरोज़गारी के
प्रमुख कारण बन गए हैं।
आप इस प्रकार प्रधानमंत्री पर उंगली नहीं उठा सकते।
अरे अभी और सुनिए।
कुशासन का स्तर देखिये।
महोदय! कुशासन का स्तर देखिये,
एक मोटरकार कंपनी की प्लांट लगाने के नाम पर,
बेचारे गरीब किसानों से उनकी ज़मीनें,
रद्दी के भाव पर ली जा रही हैं।
उनके साथ धोखा किया जा रहा है।
और इस महा घोटाले में स्वयं प्रधानमंत्रीजी
और इनके सुपुत्र पे उंगलियाँ उठ रही हैं।
संदेह किया जा रहा है।
अटलजी ने जो मुद्दा उठाया है, वो बिलकुल सही है।
[पार्श्वध्वनि] आजादी के 27 साल बाद भी,
जनता को भुखमरी और मंहगाई से
मरना पड़ रहा था।
इंदिरा हटाओ, देश बचाओ।
इंदिरा हटाओ, देश बचाओ।
इंदिरा हटाओ, देश बचाओ।
[गोलियों की आवाज़]
[कोलाहल]
[पार्श्वध्वनि] छोटे-बड़े कई आंदोलन हुए,
पर कांग्रेस सरकार की नींव हिलाने के लिए
संपूर्ण क्रांति की ज़रूरत थी।
श्री जे. पी. नारायण के नेतृत्व में
इस संपूर्ण क्रांति ने ऐसा शोर मचाया
कि इंदिरा सरकार के विरुद्ध
पूरा देश आवाज़ उठाने लगा,
और साथ साथ इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने
बरेली चुनाव में मतों की धांधली के आरोप में
प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को दोषी करार दिया
और छह वर्षों तक किसी भी पद को
संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया।
पर इस्तीफा देने की बजाय
उन्होंने एक अभूतपूर्व घोषणा की।
भाइयों और बहनों
राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।
इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है।
[अंग्रेजी में] राष्ट्रपतिजी ने आपातकाल की घोषणा की है।
इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है।
[बच्चे के रोने की आवाज़]
[सायरन की आवाज़]
[कोलाहल]
[पार्श्वध्वनि] आपातकाल की घोषणा के साथ ही,
भारत के सभी पक्ष, विपक्षी नेताओं,
सर्वोच्च अधिकारियों, पत्रकारों, कलाकारों से लेकर
सामान्य नागरिकों पर मौलिक एवं
अभिव्यक्ति के अधिकारों पर
पाबंदी लगाई गई।
25 जून 1975 की रात
इंदिरा सरकार के विरोध में,
आवाज़ उठाने वाले विपक्ष के बड़े नेताओं को,
मिसा कानून के तहत
गिरफ्तार किया गया।
21 महीने तक चले आपातकाल के इस समय में,
10 हजार से ज्यादा लोगों को बिना मुकदमा चलाये,
जेलों में डाला गया।
जहाँ पर 22 लोगों की मौत हुई।
करीब 10 लाख लोगों की
जबरन नसबंदी कराई गयी।
आपातकाल का यह समय,
भारतीय लोकतंत्र पर काला धब्बा था।
आपातकाल से परेशान हुई,
जनता के आक्रोश को देखकर,
दो साल बाद भारत सरकार ने
23 जनवरी 1977 को
देश में पुनः लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने
चुनाव की घोषणा की
और आपातकाल को हटाया गया।
[दरवाजा खुलने की आवाज़]
[बरसात की आवाज़]
[भारत माता की जय के नारे]
[संगीत...]
[इंदिरा हटाओ, देश बचाओ के नारे]
बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने,
[सभी] हेहेहेहे...
कहने सुनने को है बहुत से अफसाने,
[सभी] हेहेहेहे...
जरा खुली हवा में साँस तो ले लेने दो,
कब तक रहेगी यह आज़ादी भला कौन जाने?
वाह! वाह! हेहेहे [सभी की तालियाँ]
पिछले दो वर्षों से
पूरे देश को जेल बनाए रखा।
लोगों को उनकी इच्छा के विरूद्ध
कार्य करने को बाध्य किया जा रहा था।
देश में बढ़ती जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर
मनुष्यों को जानवरों की तरह
ट्रकों में भर-भर के
जबरन नसबंदी करायी जा रही है।
एक माँ और उसके बेटे ने,
भारत माँ और उनके बच्चों को जो प्रताड़ना दी है,
जो पीड़ा दी है,
उसका कोई अनुमान भी नहीं लगा सकता।
[इंदिरा हटाओ, देश बचाओ के नारे]
अब समय आ गया है।
अपनी मनमानी करने वालों को
गद्दी से उतार कर,
धरती पर लाने का।
भारत माता की जय
पर इतिहास में कोई इस देश को,
अपने बाप की जागीर ना समझें,
इस भ्रम को तोड़ने के लिए,
जिस नई पार्टी का जन्म हुआ है,
उसका नाम है... जनता पार्टी!
[तालियाँ]
अब इस देश को प्रगति की राह पकड़ने से,
कोई नहीं रोक सकता।
कोई भी नहीं।
क्योंकि, जनता पार्टी के लोकनायक
जयप्रकाश नारायण नहीं,
चौधरी चरण सिंह नहीं,
मोरारजी देसाई नहीं,
जे. बी. कृपलानीजी नहीं,
जार्ज फर्नांडिस नहीं,
लाल कृष्ण अडवाणी
और अटल बिहारी वाजपेयी भी नहीं है।
मेरे भारत को महान बनाने की जिद्द
इस समय सबसे ज़्यादा
किसी को है,
तो भारत की जनता को है।
[भारत माता की जय के नारे]
[संगीत...]
[पार्श्वध्वनि] देश के हुए छठे लोकसभा चुनाव में
जे. पी. नारायण जी के नेतृत्व में,
जनता पार्टी ने 345 सीटों पर विजय प्राप्त कर,
आम चुनाव में अपना बहुमत हासिल किया है।
भारतीय राजनीति के इतिहास में,
जनता पार्टी के रूप में पहली बार,
गैर-कांग्रेसी सरकार जनता की आवाज़ बनी है,
जनता पार्टी सरकार के प्रधानमंत्री होंगे...
मैं मोरारजी देसाई,
ईश्वर की शपथ लेता हूँ
कि मैं विधि द्वारा स्थापित,
भारत के संविधान के प्रति,
सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा।
मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा,
मैं संघ के प्रधानमंत्री के रूप में
अपने कर्तव्यों का श्रद्धा पूर्वक
और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा।
यहाँ नेहरूजी की पोर्ट्रेट हुआ करती थी,
कहाँ गई?
वो आपके विपक्षी नेता थे तो...
[हँसते हुए] विपक्षी तो हम थे,
वो देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे।
जी
आप लगवाइए उनकी पोर्ट्रेट यहाँ।
जी।
और आगे से जब भी पार्लियामेंट आना
तो दोनों हाथ जोड़ कर
पंडितजी को नमन करना।
लगवाइए तस्वीर, विपक्षी [हँसते हुए]
[संगीत...]
मैं भारत की जनता की ओर से
राष्ट्रसंघ के लिए शुभकामनाओं का संदेश लाया हूँ।
भारत विश्व के सभी देशों से,
मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है।
किसी पर अपना प्रभुत्व स्थापित करना नहीं चाहता।
हम चाहते हैं इस धरा का हर पुरूष, स्त्री, बच्चे
किसी को भी किसी प्रकार की
पीड़ा यंत्रणा से ना गुजरना पड़े।
हम अपना-अपना देश चलाने में इतने व्यस्त हैं,
कि यह भूल जाते हैं
कि यह विश्व भी एक परिवार जैसा है।
वसुधैव कुटुंबकम् भारत की प्राचीन प्रेरणा है,
जिस पर हमें विश्वास है,
जिस दिन यह भावना विश्व के
हर देश को समझ आयेगी
उस दिन दुनिया का हर इंसान
मानव कल्याण के लिए
तथा उसके गौरव के लिए
अपने त्याग और बलिदान से
कभी पीछे नहीं हटेगा।
जय जगत! धन्यवाद!
[तालियाँ]
[संगीत...]
विदेश मंत्रालय के कार्यों की खबरें
लगभग रोज अखबारों में आ रही हैं।
हूँ
और अटलजी की वजह से भारत का नाम
विदेशों में भी गूँज रहा है।
भई राजनीति के भारी भरकम काम तो हो ही रहे हैं,
पर एक व्यक्तिगत काम है
जो अटका पड़ा है।
आइए-आइए
कौल साहब
मेरी बातों को अन्यथा मत लीजिएगा।
एक बात है जो
बहुत दिनों से सता रही है।
क्या हुआ अटल जी?
देखिए आप लोगों ने
मुझे अपने परिवार का हिस्सा तो बना लिया।
यह कहकर कि
हमारे विचार उदार और प्रगतिशील हैं।
पर सच्चाई यह है कि हम तीनो झूठे हैं।
हमने समाज की परवाह किए बिना,
अपना परिवार तो बढ़ा लिया,
लेकिन भला ये कैसा परिवार,
जहाँ एक की खबर दूसरे को
ये अखबार के माध्यम से मिले?
देखिए, हम तीनों पीछे नहीं,
आगे देखने वाले हैं।
और यह बात मैं तभी मानूँगा,
जब हम सब एक परिवार की तरह रहे।
पर यह कैसे होगा, अटलजी।
अरे ब ब ब राजकुमारी से कॉलेज के जमाने से
जान-पहचान मुलाकात।
आप में एक परम मित्र की झलक।।
और आपकी बिटिया से मेरा अपार स्नेह।
क्या ये अच्छे कारण नहीं हैं,
एक छत के नीचे रहने के?
मेरी मन्शा को किसी मंत्री का आदेश मत समझना।
आप मना भी कर सकते हैं,
पर मुझे जवाब का इंतज़ार रहेगा।
क्या है मंत्री तो बन गये हैं,
पर परिवार नहीं है हमारे पास।
[संगीत...]
मैडम सर,
दर्जनों पार्टियों की गठबंधन की सरकार चलाना,
बहुत मुश्किल काम है।
किसी एक के सपोर्ट से सत्ता ज्यादा टिक पाती है।
यह तो हम भी शुरू से मानते आए हैं।
मेरी राय में
आप जल्द-से-जल्द
प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करें।
जी!
[टेलिफोन की आवाज़]
हैलो
मैं चौधरी चरण सिंह,
ईश्वर की शपथ लेता हूँ,
सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ
कि मैं विधि द्वारा स्थापित,
भारत के संविधान के प्रति,
सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा...
अभी बहुत कुछ करना था लालजी।
विएतनाम युद्ध में चीन को हमारी भूमिका बतानी थी,
यह
पाकिस्तान से सुलह करनी थी।
पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच
समझौते चल ही रहे थे।
अभी अभी तो
आपातकाल से निकले थे,
जनता ने साँसें लेनी शुरू की
कि गला घोंट दिया।
यह जनता पार्टी के प्रयोग का
इतना दर्दनाक अंत कर दिया।
ज्यादातर कांग्रेस से ही थे,
गैर-कांग्रेसी सरकार बनाने में,
वहाँ वापिस लौट के उन्हें धोखा ही मिलेगा।
आप याद रखना लालजी, मेरी बात।
हाँ तो क्या करें?
क्या करें अटलजी?
यह राजनीति है, राजनीति।
इस बगीचे में गुलाब कम और कांटे ज्यादा होते हैं,
अरे तो नहीं करनी ऐसी राजनीति,
जहाँ चलते-चलते पीठ पे छुरा चल जाए,
नहीं करनी...
तो कैसी करनी है?
आज जो हमारे साथ हुआ है,
आगे भी कितनी बार होगा।
आदत डालो,
नहीं तो फिर...
संन्यास ले लो पॉलिटिक्स से।
संन्यास तो हम लेने से रहे, लालजी।
और आदत तो दूसरों को डालनी पड़ेगी।
अटल बिहारी वाजपेयी को गिरा कर,
दुबारा खड़े होते देखने की।
दलों के इस दलदल के बीच
एक कमल खिलाना होगा।
[संगीत...]
[बरसात की आवाज़...]
[तालियों की गड़गड़ाहट]
जनता पार्टी छोड़ के सब चले गए,
पर हम यहीं रहे।
क्योंकि जनता ने जो हमें विश्वास दिया था,
उसे हम तोड़ना नहीं चाहते थे।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
जिस निष्ठा और लगन से,
आप सब ने अपने-अपने क्षेत्र में कार्य किया है,
उसे पिछले दिनों बड़ी ध्यानपूर्वक हमने देखा है।
आप सभी का देश के प्रति
प्रेम और भक्ति को देखकर
मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूँ,
कि ऐसे कार्यकर्ता जिस राजनीतिक दल में होंगे,
उसे भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने से,
कोई नहीं रोक सकता।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
भाई कवि आदमी हूँ, बोलता ही जाऊँगा,
और आप सब चुपचाप सुनते भी रहेंगे।
[सभी हँसते हुए]
इसलिए यह मौन व्रत तोड़िए,
दो दो पंक्तियाँ आप सब भी बोलिए।
नमस्ते! मैं प्रमोद महाजन, मुंबई से हूँ,
मैं आपको जानता हूँ, मानता हूँ, पहचानता हूँ,
इसलिए अब मैं आपके साथ दिल्ली में
काम करना चाहता हूँ।
नमस्कार! अरूण जेटली, एमरजेंसी के 19 महीनों में,
मैंने अपनी वकालत की तैयारी जेल से ही की थी।
नमस्कार! मेरा नाम सुषमा स्वराज है।
कुछ लोग कहते हैं, मैं अच्छा बोलती हूँ।
कुछ लोग कहतें हैं, मैं बहुत बोलती हूँ।
सच तो यह है मैं केवल सत्य बोलती हूँ।
[तालियों की गड़गड़ाहट...]
आप सभी का
भारतीय जनता पार्टी में
हार्दिक स्वागत है।
[तालियों की गड़गड़ाहट...]
[पार्श्वध्वनि] 1980 में
भारतीय जनता पार्टी ने जन्म तो ले लिया,
पर जितनी नई पार्टी,
उम्र में कांग्रेस उससे उतनी ही बड़ी।
और उनकी सत्ता उतनी ही शक्तिशाली।
पर शक्ति का दुरूपयोग करना,
स्वयं के लिए दुर्भाग्यवश होता है।
1984 में खालिस्तानी आतंकी
पवित्र स्वर्ण मंदिर में घुस बैठे
और इस संकट को मिटाने के लिए
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर,
फौज भेजी गयी।
इस ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार की वजह से
सिख समुदाय में बेहद क्रोध फैल गया और…
[टीवी समाचार] आज सवेरे नई दिल्ली में
प्रधानमंत्री के निवास स्थान पर
श्रीमती गांधी की हत्या करने की कोशिश की गयी।
[पार्श्वध्वनि] इंदिराजी गांधी की हत्या के बाद
भावुक भारत ने उनके पुत्र राजीव गांधी को
प्रधानमंत्री की गद्दी पर बिठाया।
और बीजेपी के हाथ में आई केवल दो सीटें।
विचार अलग हो सकते हैं,
पर लक्ष्य तो एक ही था।
1948 से चल रही
राम जन्मभूमि की माँग जोर पकड़ रही थी।
और हम अपनी हार से निराश होने की बजाय
राम जन्मभूमि की राह पर निकल पड़े।
चमत्कार कहो या साक्षात भगवान का आशीर्वाद।
उस समय सिर्फ हम ही नहीं,
पूरा देश राम धुन में ऐसा मग्न था,
कि भारतीय जनता पार्टी और
भारत की जनता साथ चलने लगी थी।
♪ उठ जगत का नहीं भरोसा ♪
♪ एक भरोसा एक ही नाम ♪
♪ जय श्री राम ♪
♪ जय श्री राम ♪
♪ जय श्री राम ♪
♪ बाहर बाहर भटक रहे ♪
♪ और भीतर-भीतर बैठे राम ♪
♪ जय श्री राम ♪
♪ जय श्री राम ♪
♪ जय श्री राम ♪
♪ जब धुनकी लागी राम नाम की ♪
♪ भूल गए सब काम ♪
♪ राम धुन, राम धुन, राम धुन, राम धुन ♪
♪ राम धुन, राम धुन, राम धुन, राम धुन ♪
♪ राम धुन, राम धुन, राम धुन, राम धुन ♪
♪ राम धुन, राम धुन, राम धुन, राम धुन ♪
नौवें भारतीय लाकेसभा चुनाव के नतीजे
सामने आ रहे हैं,
सत्ता में रह चुकी कांग्रेस आई को
197 सीटें प्राप्त हुई हैं
कांग्रेस से अलग हुए
वी पी सिंह के नेतृत्व में
जनता दल ने 143 सीटें जीती हैं।
इसके पहले
जिस भारतीय जनता पार्टी के पास
महज दो सीटें थीं,
अब उन्हें अच्छे परिणाम प्राप्त हुए!
भारतीय जनता पार्टी ने 85 सीटों के साथ,
अपना विजयी ध्वज लहराया है,
जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी
लोकसभा चुनाव की सबसे बड़ी
निर्णायक पार्टी बन गई है।
♪ जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम ♪
♪ जय श्रीराम, जय श्रीराम, जय श्रीराम ♪
♪ आज सबकी डोर वही है थामे ♪
♪ राम परम सुख धाम... ♪
सोच रहा हूँ,
भारत का भविष्य आपके हाथों में सौंप कर,
अब थोड़ी छुट्टी ले लें।
बीस सालों बाद
छुट्टी करने के दिन आए हैं अटलजी!
हम आपको कहीं नहीं जाने देंगे,
अब अपनी सरकार बनेगी
बीजेपी और जनता दल के गठबंधन से!
और देश का सपना भी पूरा होगा,
राम जन्मभूमि का।
♪ राम राम ♪
♪ छल छद्मों से भरा चराचर ♪
♪ सत्य शाश्वत राम का नाम ♪
♪ राम राम ♪
♪ राम राम ♪
♪ युग परिवर्तन हुआ आरंभ ♪
♪ कण-कण गूंजे जय सिया राम ♪
♪ जय सियाराम, जय सियाराम, जय सियाराम ♪
♪ जय सियाराम, जय सियाराम, जय सियाराम ♪
♪ जगमग- जगमग सकल अयोध्या ♪
♪ प्रगट भये श्रीराम ♪
[लाठीचार्ज की आवाज़ें]
[गोली चलने की आवाज़]
[सायरन की आवाज़]
[गंभीर संगीत]
प्रधानमंत्री चाहते,
तो यह हादसा होने से रोक सकते थे!
जिनके बल पर उनकी सरकार बनी है,
उन्हीं के ऊपर सरकारी बल का प्रयोग,
यह लोकतंत्र की हार है।
चाहे कुछ भी हो जाय,
वी पी सिंह की सरकार गिरनी चाहिए,
प्रमोद!
जी
विरोधी पूछ रहे हैं ना,
कारसेवा क्यों होनी चाहिए?
मैं बताऊँगा!
सभा का आयोजन करो,
मैं आऊँगा अयोध्या।
[संगीत]
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने,
हमें अधिकार दिया है कि हम कारसेवा करें।
तो रूकने का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
कारसेवा होगी और माननीय
उच्च न्यायालय के सम्मान के साथ होगी।
जय श्रीराम
जय श्रीराम
कारसेवा का मतलब क्या है?
राम लल्ला की पूजा, अर्चना,
भजन, कीर्तन सेवा
जो बैठ के होती है।
अब नुकीले पत्थरों पे भला कौन बैठेगा?
धरती को समतल करना पड़ेगा।
बैठने लायक बनाना पड़ेगा
और जब यज्ञ होगा, पूजा होगी,
तो कुछ निर्माण भी होगा।
जय श्रीराम
जय श्रीराम
जय श्रीराम का नारा लगाते हुए
राम जन्मभूमि पर आये कारसेवक
अचानक बेकाबू हो गये।
जिन्हें रोकने की जी तोड़ कोशिश की गई,
जो नाकाम रही।
इस घटना से सारे भारत में भय का माहौल खड़ा हुआ
और कई जगह साम्प्रदायिक दंगे शुरू हुए।
[गोली की आवाज़]
[पंछियों की आवाज़]
जो कुछ भी हुआ,
अच्छा नहीं हुआ।
कभी-कभी लगता है,
राजनीति में आये ही क्यों?
हम कभी नहीं चाहे कि राजनीतिक कारणों से,
किसी की जान जाए।
राजनीतिक परिस्थतियों को देखकर,
मेरे भीतर का कवि व्यथित हो जाता है।
क्योंकि हमेशा हमारी लड़ाई,
नफ़रत मिटाने की थी।
तो कहाँ खतम हुई आपकी लड़ाई?
जितना सरल प्यार बाँटना है,
नफ़रत को मिटाना उतना ही कठिन।
और हमारे देश से
नफ़रत वही मिटा सकता है,
जो इस देश से अत्यंत प्रेम करता हो।
[मधुर संगीत]
कहते हैं...
जब एक कलाकार राजनेता बनता है ना,
तो उसका राज एकदम खूबसूरत होता है।
क्योंकि उसके राज में सिर्फ प्यार होता है।
नफ़रत नहीं होती
और मुझे यकीन है
कि जब आप जैसा कलाकार
इस देश का राजनेता बनेगा,
तो हमारा देश बेहद ख़ूबसूरत हो जाएगा।
तीन साल होने को आए
पर बाबरी का दुख,
अभी भी बहुत गहरा है उनके मन में।
शायद आज भी अटलजी नहीं आएंगे।
ऐसा ही लगता है।
पार्टी के कार्यों में बहुत व्यस्त रहते हैं,
लेकिन पार्टी की मीटिंग्स
बहुत कम अटेंड करते हैं।
[अंग्रेजी में] आप ने इस पर गौर किया?
सही कहा अरुणजी।
मुझे भी कुछ समय से यही लग रहा है
सुषमाजी,
अरे बैठिए, बैठिए
सुषमाजी,
क्या कह रहीं थीं आप?
एक बार फिर कहें।
अडवाणीजी,
हम सबको यही लग रहा है,
कि अटलजी
उनके राजनीतिक जीवन में
रहने की इच्छा से
दूर जा रहे हैं।
अगर आप उनसे बात कर लें तो...
[संगीत]
अटल जी हमेशा के लिए
पॉलिटिक्स से दूर जा चुके थे,
और सब को डर था,
कि कहीं पार्टी अपने लीडर के बिना,
किसी गलत दिशा में ना चली जाए।
[मधुर संगीत]
[कोलाहल]
[कैमरा फ़्लैश की आवाज़ें]
[कोलाहल]
[अपना नेता अब की बारी अटल बिहारी अटल बिहारी के नारे]
नमस्कार।
आइए... आइए...।
[अपना नेता अब की बारी अटल बिहारी अटल बिहारी के नारे]
लालजी,
45 साल की गहरी मित्रता है हमारी।
है ना?
आज पता नहीं क्यों,
मुझे संदेह हो रहा है।
[हँसते हुए] अरे
ऐसा भी क्या कर दिया मैंने?
[अपना नेता अब की बारी अटल बिहारी अटल बिहारी के नारे]
आज मुझे यहाँ
कुछ गड़बड़ी लग रही है।
मामला गड़बड़ है।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
आज हम
उस दौर से गुजर रहे हैं,
जहाँ एक-दूसरे से जुड़ने की बजाय,
राजनेता
अलग हो रहे हैं।
टूट रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में जो सरकारें बनी हैं,
उनका समय से पहले गिर जाना,
इस बात का प्रमाण है,
इस चलन को
बदलना होगा।
और इसे बदलने की क्षमता
केवल उसी पार्टी में हो सकती है,
जिसके पास दिशा हो।
और भारतीय जनता पार्टी
वो पार्टी है।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
भारतीय जनता पार्टी,
वो पार्टी है,
जिसके पास दिशा भी है,
और उस दिशा में आगे ले जानेवाला,
नेता भी है।
चुनाव प्रचार से पहले
हमने अपनी पार्टी का
प्राइम मिनिस्टीरियल कैन्डीडेट चुन लिया है,
मैं
लालकृष्ण अडवाणी
बीजेपी के
अगामी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार की
घोषणा करने जा रहा हूँ
और वो है
श्री.
अटल बिहारी वाजपेयी।
अरे वाह!
[तालियों की गड़गड़ाहट]
बच्चे-बच्चों से लेकर
बड़े-बुजुर्गों की जुबान पर,
सिर्फ आपका नाम है, अटलजी।
सबसे पूछा
तभी तो लिया
हम से भी पूछ लिए होते।
ठीक है।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
13 दिन की सरकार के बाद
एक बार फिर
अटल बिहारी वाजपेयीजी के नेतृत्व में,
भारतीय जनता पार्टी ने
181 सीटों पर विजय प्राप्त की।
एनडीए गठबंधन के साथ
वाजपेयीजी भारत के
10 वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।
मैं
मैं
अटल बिहारी वाजपेयी
ईश्वर की शपथ लेता हूँ
सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ कि
मैं विधि द्वारा स्थापित
भारत के संविधान के प्रति
सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा।
♪ आज दिल पे हाथ रख के ♪
♪ ये कसम लें हम सभी ♪
♪ ना झुकेगा देश अपना ♪
♪ ना झुकेंगे हम कभी ♪
♪ आज दिल पे हाथ रख के ♪
♪ ये कसम लें हम सभी ♪
♪ ना झुकेगा देश अपना ♪
♪ ना झुकेंगे हम कभी ♪
♪ ज़िंदगी का क्या किया जो ♪
♪ सर उठाके मर ना पाया ♪
♪ हो गया वो ख़ून पानी ♪
♪ जो वतन पे ना बहाया ♪
♪ चल लहुँ से लिख दे ख़ाक पे ♪
मैं भारत की प्रभुता
और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा।
मैं संघ के प्रधानमंत्री के रूप में
अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक
और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूँगा।
तथा मैं भय या पक्षपात...
40 साल का परिश्रम सफल हुआ
और अटलजी भारत के 10 वें प्रधानमंत्री बने।
और धरती के इस सपूत ने
गद्दी पर बैठते ही
धरती का कल्याण करना शुरू कर दिया।
मैं 1970 से कहते आ रहा हूँ,
पर कुछ लोगों को इसमें
सिर्फ खतरा नजर आता है।
पर मेरा मानना है
कि ये आत्मरक्षा की वो लाठी है,
जिसे हम
अपने घरों में दरवाजे के पीछे रखते हैं।
[अंग्रेजी में] बिल्कुल प्रधानमंत्रीजी!
आप ठीक बोलते हैं।
मैं चाहता हूँ,
इस बार बुद्ध पूर्णिमा की पूजा आप करें।
यस सर
ॐ
कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि॥
अब सभी लोग आरती ले लें।
अरे लालजी,
तैयारी रखना,
देश पर आर्थिक संकट आने वाला है।
क्यों?
आएगा
हैलो।
[अंग्रेजी में] बधाई सर,
आखिरकार बुद्ध हँसे।
हमारा पोखरण परीक्षण सफल रहा।
भारत अब परमाणु संपन्न राष्ट्र बन गया।
[अंग्रेजी में] बहुत अच्छा काम टीम।
भारत को सदैव आप पर गर्व रहेगा।
धन्यवाद सर।
भाई शिवकुमार जी
जी
अरे वो मिठाई का डब्बा लाइए,
खिलाइए सबको।
दीजिए...
[हँसते हुए] अरे
लीजिए...
क्यों भाई? आज मिठाई खाने वाले,
मिठाई बांट रहे हैं?
[हँसते हुए] ऐसी क्या बात है?
लीजिए...
ऐसा है...
नेशनल सिक्योरिटी की वजह से
ये बात गुप्त रखी गई है।
पोखरण में परीक्षण सफल हुआ है।
भारत अब न्युक्लियर पॉवर बन चुका है।
[तालियों की गड़गड़ाहट]
आखिर कवि ने धमाका कर ही दिया।
ये लीजिए, आप भी तो मुँह मीठा कीजिए।
[अंग्रेजी में] आज १५:४५ बजे,
भारत ने पोखरण रेंज में तीन भूगर्भीय परमाणु परीक्षण किए,
मुख्य उत्पादन अपेक्षित मूल्य के साथ हैं
मैं उन वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स को हार्दिक बधाई देता हूँ
जिन्होंने इस सफल परीक्षण को संपन्न किया है।
जय जवान। जय किसान। जय विज्ञान।
[पार्श्वध्वनि] भारत के परमाणु शक्ति बनने के
कुछ ही दिनों के अंदर,
अब पाकिस्तान भी न्युक्लियर पॉवर बन गया,
जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में
यही चर्चा चल रही है कि
शायद दो पड़ोसी मुल्कों में
दुश्मनी के कारण
न्युक्लियर वॉर हो सकता है।
कहा ये भी जा रहा है
कि भारत की तरफ से दोस्ती का
पैगाम भेजा गया है।
अब देखना ये है
कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान
हमारा यह दोस्ती का
पैगाम स्वीकारता है या नही।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जी ने
आपका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।
धन्यवाद शिवकुमारजी।
इस खुशखबरी के लिए।
चलिए।
आपको लाहौर का शिरकुर्मा खिलाते हैं।
हम सोच रहे थे कि
पत्रकार, कवि, खिलाड़ी और अभिनेताओं का
जो प्रायवेट डेलिगेशन आपके साथ जायेगा,
हाँ
उनके लिए हम एक प्रायवेट चार्टर्ड कर देंगे।
अच्छा।
और आप अपने विमान में
आराम से सफर कर सकते हैं…
[ढोल, नगाड़े बजने की आवाज़]
[खुशनुमा संगीत…]
पड़ोसी वो होते हैं,
जो आपके बगल में रहते हैं।
अगर पड़ोसी से मिलने के लिए
आपको हवाई जहाज निकालना पड़े
तो समझो आप कहीं दूर अकेले रहते हैं।
आपके आस-पास कोई नहीं रहता।
दिल्ली और लाहौर के बीच यह बस यात्रा
ये बस केवल एक बस नहीं है
यह तमाम पाकिस्तान और हिन्दुस्तान
की जनता के लिए, अवाम के लिए,
एक उम्मीद है।
[तालियों की आवाज़]
उम्मीद शांति की, सहयोग की,
भरोसे की, प्रगति की,
भाईचारे की साथ मिलकर आगे बढ़ने की।
जनाब एक सवाल था
जी…
जनाब आप कुँवारे हैं।
हम आपसे शादी करने के लिए तैयार हैं।
लेकिन हमें मुँह दिखाई में कश्मीर चाहिए।
मैं भी आपसे शादी करने को तैयार हूँ,
लेकिन मुझे दहेज में पूरा पाकिस्तान चाहिए।
दे पाएँगी आप?
अच्छा लगा।
आप के यहाँ भी मजाकिये पत्रकार होते हैं?
[तालियों की गड़गड़ाहट]
[पार्श्वध्वनि] आप दोस्तों को बदल सकते हैं,
पर पड़ोसियों को नहीं।
अटलजी ने पड़ोसी मुल्क से
दोस्ती का हाथ मिला लिया,
पर उस समय अपने ही देश के साथी,
उनका हाथ काटने की साजिश रचने लगे।
अच्छा
सिक्किम और मणिपुर के दोनों सांसद
खरीद लिए गए हैं।
कल हाउस में दोनों ही उपस्थित नहीं रहेंगे।
इसीलिए कांग्रेस ने
[अंग्रेजी में] अविश्वास प्रस्ताव की माँग की है।
अटल जी,
राजधानी में
राजनीति का बाजार खुल गया है।
लोकतंत्र का चीर हरण करना,
कांग्रेस की पुरानी आदत है।
79 में जनता पार्टी तोड़ी थी,
अब एनडीए गठबंधन तोड़ना चाहते हैं।
पर लालजी,
ये जोड़-तोड़ के खरीद-फरोख्त की
अगर सरकार बनानी हो ना,
तो ऐसी सरकार को मैं चिमटे से भी ना छुऊ।
अटलजी।
हूँ।
जयललिता सोनिया के साथ जरूर चली गई हैं,
पर उनके आठ सांसद हमें वोट करने वाले हैं।
और यही नहीं, मायावतीजी हैं,
कांशीराम भी हैं,
हम जरूर पूर्ण बहुमत साबित कर पाएँगे।
आह… [गँहरी साँस छोड़ते हुए]
बहुमत?
13 महीनों में इतना कुछ किया
बम, बस, बजट और न जाने क्या-क्या
अब ये...
स्वर्ण चतुर्भुज बना के
देश एवम् देश के किसानों के
प्रगति के मार्ग प्रशस्त करने हैं।
कितना कुछ करना है।
देखना लालजी,
ये आंकड़ों के खेल में,
जीत लोकतंत्र की ही होगी।
[अंग्रेजी में] सदस्यों, हम घोषणा करने जा रहे हैं,
विश्वास मत के परिणाम,
सरकार के पक्ष में 269,
सरकार के विरोध में 270
[मेज थपथपाने की आवाज़]
अनुपस्थित वन,
[अंग्रेजी में] विपक्ष जीत गया।
[मेज थपथपाने की आवाज़]
सदस्यों कृपया बैठ जाइए।
कृपया बैठ जाइए।
अटलजी
अध्यक्ष महोदय,
देश आज संकटों से घिरा हुआ है,
और यह संकट हमने पैदा नहीं किए हैं।
जब-जब देश पर संकट आया है,
हम उस समय की सरकारों के साथ खड़े रहे हैं।
यही हमारी परपंरा है।
यही हमारी प्रकृति है।
और मैं चाहता हूँ,
यह परंपरा बनी रहे,
यह प्रकृति बनी रहे,
40 सालों की साधना है।
हमने संघर्ष किया है,
हम जनता के बीच गए हैं,
365 दिन चलने वाली पार्टी है।
कोई हारने वाली पार्टी नहीं है ये।
हमने इस देश को बनते हुए देखा है,
हमें आज जरा भी दुख नहीं है,
कि एक वोट से, हमारी सरकार गिर गई।
क्योंकि सत्ता का सहवास
और विपक्ष का वनवास
दोनों समान है हमारे लिए।
[मेज थपथपाने की आवाज़]
सत्ता का खेल चलता रहेगा,
सरकारें आयेंगी-जायेंगी,
पार्टियाँ बनेंगी बिगड़ेंगी,
पर यह देश रहना चाहिए।
इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।
[मेज थपथपाने की आवाज़]
भले ही हम कार्यवाही सरकार में रहेंगे,
लेकिन अंत तक
इस देश की सेवा करते रहेंगे।
और हाँ, आज कोई समझौता नहीं होगा।
यही हमारे विचार हैं, यही हमारे मूल्य हैं,
और अपने इन विचारों पर,
मैं अटल हूँ।
[मेज थपथपाने की आवाज़]
[पार्श्वध्वनि] सरकार गिर गई,
पर उसे चलाने वाला कलाकार नहीं गिरा।
नोटिस पीरियड,
जिसमें कर्मचारी आधे मन से
अपनी ज़िम्मेदारियां निभाता है।
ऐसे समय में
श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वो कार्य किया
जिसे देखकर पूरा विश्व समझ गया,
कि अब भविष्य में भारत पर कोई भी राज नहीं कर पाएगा।
[बम के धमाके की आवाज़]
[टीवी रिपोर्टर] देश की सबसे बड़ी खबर।
पाकिस्तानी सेना के सैनिकों
और स्थाय कश्मीरी आतंकवादियों ने
कारगिल क्षेत्र में भारतीय सेना के
पठारों पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया है।
पाकिस्तान हमें एलओसी पार लाकर
युद्ध में फँसाना चाहेगा,
ताकि आंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना सके।
हर बार इन लड़ाइयों में
हमारा पड़ोसी मुल्क
केवल हमारी सीमाओं में नहीं,
बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था
ध्वस्त करने की भी कोशिश करता है।
एयर फोर्स को उतारिए मैदान में...
यस सर।
ऑपरेशन विजय शुरू करिए।
सर।
इन शर्मनाक हरकत करनेवालों को
मुँह तोड़ जवाब दिया जायेगा।
[बम धमाके की आवाज़]
[टेलिफोन बजने की आवाज़]
प्रधानमंत्री जी,
अमेरिका के प्रेसीडेंट का मैसेज आया है।
उनका कहना है
कि हमें पाकिस्तान से समझौते की
बात कर लेनी चाहिए।
उन्हें सूचना दे दीजिए...
कि वो पाकिस्तान को सूचित कर दें,
भारत का प्रधानमंत्री
जंग जीतने के बाद ही बात करेगा।
जय हिंद।
[बम धमाके की आवाज़]
[समाचार] अंततः भारतीय सेना ने
पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों को
पूरी तरह से हरा दिया है
और कारगिल क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
यह जीत का दिन
भारत के लिए बहुत ही गर्व का दिन है।
भारतीय सेना की इस जीत को
बुलंदी पर ले जाने के लिए
और उनका हौसला बढ़ाने के लिए,
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी,
खुद कारगिल पहुँचने वाले हैं।
[हेलीकॉप्टर की आवाज़]
कारगिल की चोटियों पर
हमारे वीर जवानों ने
अपने लहू से जो इतिहास लिखा है
आने वाली पीढ़ियाँ उससे प्रेरणा लेती रहेंगी।
आने वाली पीढ़ियाँ उसका नमन करेंगी।
उसका वंदन करेंगी।
जिस देश के लिए
हमारे वीर जवान शहीद हुए,
वो केवल धरती का टुकड़ा नहीं है
वो एक जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।
ये चंदन की भूमि है,
अभिनंदन की भूमि है,
ये तर्पण की भूमि,
ये अर्पण की भूमि।
इसका कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है,
इसकी बूंद-बूंद गंगाजल है।
हम जिएंगे तो इस देश के लिए,
हम मरेंगे तो इस देश के लिए।
और मरने के बाद भी
हमारी अस्थियों को गंगाजल में
विसर्जित कर दिया जायेगा,
यदि कोई कान लगाकर सुनेगा,
तो उन अस्थियों से यही शब्द गूँजेंगे…
भारत माता की… जय।
[भारत माता की जय के नारे]
♪ है तिरंगा शान अपनी ♪
♪ देंगे इसपे जान अपनी ♪
♪ जन गण मन अधिनायक जय हे ♪
♪ तेरा संदेश पहले ♪
♪ दुनिया के सारे सुख पीछे हैं, मेरा देश है पहले ♪
समान भाषा के अनुशीर्षक का समर्थन, ' द बिलियन रीडर्स इनिशिएटिव @ प्लैनेटरीड ' द्वारा है।
एक नहीं दो नहीं करो बीसों समझौते
पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा
अगिणत बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता
अगिणत बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता
अश्रु स्वेद शोणित से सिंचित यह स्वतंत्रता
त्याग तेज तपबल से रक्षित यह स्वतंत्रता
दुखी मनुजता के हित अर्पित यह स्वंतत्रता
इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो
चिंगारी का खेल बुरा होता है
इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो
चिंगारी का खेल बुरा होता है
औरों के घर आग लगाने का जो सपना
वो अपने ही घर में सदा खरा होता है
मैं तेज पुंज, तमलीन जगत में
फैलाया मैंने प्रकाश।
जगती का रच करके विनाश,
कब चाहा है निज का विकास?
शरणागत की रक्षा की है,
मैंने अपना जीवन देकर।
विश्वास नहीं यदि आता तो,
तो साक्षी है इतिहास अमर।
यदि आज देहली के खण्डहर,
सदियों की निद्रा से जगकर।
गुंजार उठे ऊँचे स्वर से,
हिन्दू की जय तो क्या विस्मय?
हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन
रग-रग हिन्दू मेरा परिचय।
[तालियाँ]
टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात
कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ
गीत नया गाता हूँ
गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी?
टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी?
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूँगा
रार नहीं ठानूँगा
काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ।
गीत नया गाता हूँ।
जूझने का मेरा कोई इरादा न था
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई
यों लगा ज़िंदगी से बड़ी हो गई
मौत की उम्र क्या?
दो पल भी नहीं
ज़िंदगी-सिलसिला,
आज-कल की नहीं
मैं जी भर जिया,
मैं मन से मरुँ
देखिये कवि का मन
मैं जी भर जिया,
मैं मन से मरुँ
लौटकर आऊँगा,
कूच से क्यों डरूँ?
तू दबे पाँव चोरी-छिपे से न आ
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा
मौत से बेख़बर, ज़िंदगी का सफर
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर
बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराएँ कुछ कम भी नहीं
प्यार इतना परायों से मुझको मिला
न अपनों से बाकी है कोई गिला
हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,
आँधियों में जलाए हैं बुझते दिए...
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