All language subtitles for Haseen Dillruba 2021 1080p NF WEB-DL.x264.6CH Pahe.in

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Original subtitles

‎मेरे पूज्य पिताजी ‎श्री लीलाराम राय सिंघानी को समर्पित

‎जन्म- 6 अगस्त 1931 ‎मृत्यु - 11 जुलाई 2009

‎विशेष धन्यावाद

‎NETFLIX प्रस्तुत करता है

‎ज्वालापुर

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎[धमाके की आवाज़]

‎[पुलिसेवालों की अस्पष्ट बातें]

‎[धीरे से] रिशू।

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎रिशू।

‎[खाँसते हुए]

‎रिशू!

‎रिशू!

‎[सिसकते हुए] रिशू!

‎[उदास संगीत]

‎[आदमी 1] नाम, ऋषभ सक्सेना।

‎उम्र, बत्तीस साल।

‎ब्लास्ट का समय, चार से साढ़े चार।

‎[आदमी 2] सब जल गया है।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[लाठी की खट-खट की आवाज़]

‎[आदमी 2] सर पर भारी चोट है। ‎लगता है ब्लास्ट के पहले किसी ने मारा है।

‎अरे, बाप रे!

‎-हम्म, देखो। पता लगाओ कब हुआ था। ‎-[आदमी] हाँ, सर।

‎सर, फिंगरप्रिंट्स, एक हाथ के मिल गए हैं।

‎बाकी शरीर पूरी तरह से जला हुआ है।

‎-सर पर गहरी चोट है। ‎-हाँ, सर।

‎पूरा शरीर जल गया है। ‎सिर्फ़ यह हाथ मिला है।

‎सर पर भारी चोट का निशान है।

‎ऐसा लगता है मौत ब्लास्ट के पहले हुई।

‎हाथ में रानी लिखा है।

‎उसकी पत्नी है, वो वहाँ बैठी है।

‎यह दुर्घटना तो नहीं है, सर।

‎बस एक बार हथियार मिल जाए, सब पता चल जाएगा।

‎किशोर रावत

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎छह महीने पहले

‎-[ट्रेन चलने की आवाज़] ‎-मुँह सूजाना बंद करो।

‎शगुन के काम से जा रहे हैं!

‎दो साल पहले भी गए थे।

‎याद है?

‎-वही तो। ‎-[टीटी] टिकट दिखाइए।

‎दो साल हो गए हैं!

‎दो मिनट की मुलाकात में ‎तुम मीरा को आज तक नहीं भूले।

‎और बताइए, क्या अच्छा लगता है आपको?

‎महेश।

‎मुझे महेश बहुत पसंद है।

‎असल में, हम ना कॉलेज में ‎साथ में पढ़े हुए हैं।

‎[मीरा] बस अभी तक पापा को बताने की ‎हिम्मत नहीं हुई।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎[लड़के की माँ] पहली बार लड़की देखने गए, ‎कोई प्यार में पड़ता है क्या?

‎तब से देवदास ही बन गए हो।

‎और यहाँ इतने अच्छे रिश्ते आ रहे हैं।

‎जन्मपत्री मिल गई, गुण मिल गए।

‎नाम भी कितना प्यारा है।

‎रानी कश्यप।

‎रिशू-रानी, नाम का तो तुम्हारा ‎अच्छा जोड़ा बैठ गया है।

‎पता है, लड़की सुंदर है, सुशील है,

‎शाकाहारी है, गोरी भी है।

‎[लड़के की माँ] हिंदी साहित्य में ‎एम. ए. किया है लड़की ने।

‎अरे, अब बस करो, मम्मी। ‎अंदर जाके मिल लेंगे हम।

‎और बाथरूम जाने के बहाने पूरे घर का ‎मुआयना मत कर आना आप, पिछली बार की तरह।

‎[रिशू] आइए।

‎[मधुर संगीत]

‎[रानी की माँ] खाइए ना। ये सारे पकवान ‎रानी ने अपने हाथों से बनाए हैं।

‎-[रिशू की माँ] सारे? ‎-[रानी की माँ] जी, सारे।

‎-ये कचौरी भी रानी ने बनाई है? ‎-[रानी की माँ] हाँ जी।

‎वो आपके पीछे जो कशीदाकारी है सोफ़े पर ‎वो भी हमारी रानी ने ही की है।

‎[औरत] पसंद है?

‎इंजीनियर है, ‎ज्वालापुर इलेक्ट्रसिटी बोर्ड में।

‎देखेंगे।

‎अब ज्वालापुर कौन जाएगा।

‎[जीभ चटकाते हुए] ये सब मत सोच।

‎तेरा वो पाँच साल वाला बॉयफ्रेंड, ‎क्या था वो, पंखे वाला नाम था न उसका…

‎वो… [जीभ चटकाते हुए]

‎नीरज खेतान। ‎वो तो हवा देके निकल गया अमरीका।

‎और तेरा वो दो साल वाला बॉयफ्रेंड…

‎मासी… मेरे बॉयफ्रेंड थे न। ‎पता है मुझे। याद है।

‎[रानी की मौसी] तो अब बस ये ‎रंगीन किताबी रोमांस नहीं,

‎सीधा सा लड़का पकड़ ले।

‎तेरी उम्र भी तो हो गई है।

‎और ऊपर से इतनी भारी ‎मांगलिक वाली कुंडली है न तेरी,

‎कि भाईसाहब दो साल में ‎सिर्फ़ दो रिश्ते ढूंढ पाए।

‎और देख, देख तेरा दूसरा ऑप्शन।

‎-ये मुंबई वाला। ‎-[हास्यपूर्ण संगीत]

‎इससे मैच हुई है तेरी कुंडली।

‎और ये… ज्वालापुर।

‎ज्वालापुर?

‎हाँ, तो?

‎भाईसाहब भी इनकी तरह कम ही बोलते हैं।

‎रानी ने रिशू को अंदर बुलाया है, किचन में।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎आइए।

‎अब ये मत पूछ लेना और क्या अच्छा लगता है।

‎आइए ना।

‎-हेलो। ‎-हेलो।

‎तो, मैं सोच रही हूँ ‎संक्षेप में मैं ही बता देती हूँ।

‎मैंने साहित्य पढ़ रखा है।

‎टाइम पास के लिए एक सैलून में ‎मैनेजर का काम करती हूँ।

‎और घर का काम करना न, ‎मुझे बिलकुल पसंद नहीं है।

‎-[मधुर रूमानी संगीत] ‎-बाकी, सुशील तो मैं हूँ ही

‎और घरेलू भी हूँ।

‎वैसे न आपको बहुत अच्छा कॉम्बो मिल रहा है, ‎तन-मन का धन।

‎[ठसका लगने की आवाज़]

‎हमारी तो बस दो माँगें हैं। ‎एक लड़की घरेलू हो और सीधी हो।

‎फिर तो राम-सीता सी जोड़ी है।

‎अह, आपने दिनेश पंडित की कोई किताब पढ़ी है?

‎सबसे बेहतरीन क्राइम उपन्यासकार हैं!

‎क्या लिखते हैं! छोटे-छोटे शहरों में ना ‎बड़े-बड़े कत्ल करा देते हैं,

‎पता ही नहीं चलता।

‎सुना है आपने उनके बारे में?

‎जी, नहीं।

‎अभी सुन रहा हूँ, आपसे।

‎-[मधुर रूमानी संगीत] ‎-आप, आज ही मुझसे बात करेंगे

‎कि फिर कभी आएंगे दिल्ली बात करने?

‎नहीं, वो, दरअसल…

‎[रानी] अच्छा छोड़िए, ‎आप बताइए, आपके क्या शौक हैं।

‎-शौक क्या ही हैं कि… ‎-क्या हैं?

‎[हकलाते हुए] जी, मैं बता रहा हूँ।

‎जी…

‎छुट्टी के दिन बस पड़ोसी घेर लेते हैं,

‎कहते हैं, कभी फ्रिज ठीक करके दे दो ‎तो कभी पंखा।

‎इलेक्ट्रॉनिक्स का शौक है। ‎इंजीनियर हूँ, बताया होगा आपको।

‎अरे वाह। ये तो बड़ी सही टाइमिंग हो गई!

‎-शुक्रिया। ‎-लगे हाथ हॉबी टेस्ट कर लेते हैं।

‎ये ख़राब पड़ा है कितने टाइम से।

‎ये ठीक कर दो।

‎अभी?

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎इसमें से क्या चाहिए?

‎[बर्तन गिरने की आवाज़]

‎बीना जी, टॉयलेट कहाँ है?

‎आइए।

‎सीधा जाइए और बाएं।

‎नहीं, नहीं…

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎टॉयलेट ढूंढ रही थी।

‎हमारे गुरूजी से पूछकर मैं आपको बताती हूँ।

‎हाँ?

‎[चिड़ियाँ चहचहाते हुए]

‎सुनो, कह रहे हैं।

‎अगर तुमने इस लड़की से शादी की ज़िद ‎नहीं छोड़ी तो मैं यह फ़िनाइल पी लूँगी।

‎मम्मी, हमको रानी कश्यप पसंद है।

‎ठीक है।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎[हास्यपूर्ण संगीत जारी]

‎फिर मैं, यहाँ से लटक जाती हूँ। ‎हमारी अस्थियाँ बहा देना।

‎और ले आना अपनी प्यारी रानी को।

‎मैं कूद जाऊँगी यहाँ से।

‎अरे?

‎हिल भी नहीं रहे!

‎कन्फ्यूज़ कर दिया। कभी ज़हर,

‎कभी बन्नी, कभी लटकना।

‎तय करके बोलो न, प्लीज़।

‎-[हास्यपूर्ण संगीत] ‎-बोल रहे हैं। नहीं पटेगी तुम्हारी।

‎नहीं संभलेगी तुमसे।

‎मम्मी, इंजीनियर हैं हम।

‎[रिशू] रोज़ सौ-सौ वॉल्ट के बिजली के ‎तारों को संभालते हैं इन हाथों से।

‎वो नहीं संभलेगी क्या हमसे?

‎-[अफ़ज़र] एक बात बताएं, अंकल। ‎-[पापा] हाँ?

‎-ट्रेनिंग लगती है। ‎-अच्छा?

‎शुरू के दस दिन में ट्रेन हो जाएंगी भाभी। ‎और ये तो बबली सी है।

‎[रिशू की माँ] ‎बेटा, शुरू-शुरू में सभी बबली लगती हैं।

‎-[पापा] मुझे भी ऐसी ही लगी थी, जब आई थी। ‎-[हँसने की आवाज़]

‎-मुझे भी आप बबल लगे थे पूरा, फट गया! ‎-[हास्यपूर्ण संगीत]

‎♪ आने-जाने वाले सारे तकने लगे ♪

‎♪ नाम तेरा नींद में हम बकने लगे ♪

‎♪ मन में फरेरो रोशर फूट गया जी ♪

‎♪ अरमानों के जुगनू भड़कने लगे ♪

‎♪ हाय भड़कने लगे ♪

‎♪ नयन मिले ♪

‎♪ तो फ़ायर जले ♪

‎♪ ऐसी फ़ायर जले ♪

‎♪ दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪

‎♪ हो नयन मिले ♪

‎♪ तो फ़ायर जले ♪

‎♪ ऐसी फ़ायर जले ♪

‎♪ दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪

‎टोटा मिल गया उस औसत इंसान को!

‎उसकी शामत आने वाली है ज्वालापुर में!

‎♪ कन्फ्यूज़न ♪

‎♪ थोड़ा सा ये नॉटी है ‎ थोड़ा सा भोला ♪

‎♪ हो, मुंडा थोड़ा सा भोला ‎ला ला ला ♪

‎♪ थोड़ा सा तो मेरा भी तन-मन है डोला ♪

‎♪ हो, डोला तन-मन है डोला ‎आ-आ-आ ♪

‎♪ वैसे दिल पे लगी है आके चोट ये कहीं ♪

‎♪ पर हूँ कन्फ़्यूज ‎ है ये बंदा हॉट या नहीं ♪

‎♪ हॉट या नहीं ♪

‎♪ इधर चले कभी उधर चले ♪

‎♪ ख़ुद से ही लड़ ले ♪

‎♪ छन-छन दिल बजता ♪

‎♪ है बंदी सीधी ♪

‎♪ है बंदा टेढ़ा ♪

‎♪ क्या रूप है तेरा ♪

‎♪ ओ हो हो ♪

‎♪ है बंदा भोला ♪

‎♪ और बंदी शातिर ♪

‎♪ इस बात की ख़ातिर ♪

‎♪ ना, ना, ना ♪

‎♪ नयन मिले तो फ़ायर जले ♪

‎♪ ऐसी फ़ायर जले ♪

‎♪ दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪

‎रिशू संग रानी

‎♪ हो दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪

‎♪ ओ, लाइट किसने बुझा दी? ♪

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[आदमी] रानी जी।

‎साहब… साहब आ रहे हैं, बस पाँच मिनट।

‎[टिफ़िन गिरने की आवाज़]

‎[आदमी] सर, टिफ़िन गिर गया।

‎रिशू भैया का केस ‎ मेरा सबसे मनपसंद केस है, भैया।

‎क्यों, रस्तोगी जी?

‎अरे, दंगे-डकैत से ऊब कर,

‎अब आराम से बैठकर इस केस की चर्चा में ‎बहुत सारे समोसे-कचौरी पचाने हैं हमें।

‎[सब हँसते हैं]

‎अरे, रस्तोगी जी, जैसे किसी ने ‎कविता पढ़ दी हो भरी अदालत में।

‎प्यार-तक़रार सब है भर-भर के इसमें।

‎अरे, किशोर सर तो इसे दिल पर लिए हुए हैं।

‎केस तो ओपन-शट है, भाई।

‎औरत है, खूनी लगती है।

‎केस फ़ाइल हल। तमगा हाथ में।

‎पर मैडम ने…

‎[सारे पुलिसवाले मिलकर] ‎…लंगोट बांधनी सिखा दी हमारे साहब को!

‎[सब हँसते हैं]

‎[रस्तोगी] अरे!

‎वो लड़के की कोई ख़बर?

‎डेड एंड है, सर।

‎टीम आज वापस आ गई।

‎सर?

‎वो… मैडम दो घंटे से बैठी हुई हैं।

‎अच्छा है।

‎हवालात की हवा खाने दो मैडम को।

‎डेथ सर्टिफिकेट

‎[किशोर] ऋषभ सक्सेना।

‎[उदास संगीत]

‎मैडम, दो महीने से घूम-घुमा के ‎बहुत बातें हो रही हैं।

‎आज सच बोल कर देख ही लीजिए, हम्म?

‎तो बताओ, मैडम, ‎क्यों क़त्ल किया आपने अपने पति का?

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[मेज़ पर पड़ी घंटी बजाते हुए]

‎कैसी नीच औरत इतने ‎प्यार करने वाले पति को मार सकती है!

‎नाम तक गुदवा रखा था हाथ पर उसने आपका!

‎"रानी।"

‎और आपने चीथड़े उड़ा दिए उसके!

‎[किशोर] बस वही हाथ बचा उसका, ‎गवाही देता हुआ।

‎रानी कश्यप, दुनिया को, रिशू को ‎बहुत बेवकूफ़ बना लिया,

‎लेकिन मुझे पता है ‎कि रिशू को आपने ही मारा है।

‎और कहो तो आपका नाम ‎मैं भी अपने हाथ पर गुदवा लूँ!

‎"किलर रानी कश्यप!"

‎हाँ?

‎गुदवा लीजिए, सर।

‎पर उससे सच थोड़े ही ना बदल जाएगा ‎कि मैंने कुछ नहीं किया है।

‎अच्छा?

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎चलो, फिर से शुरू करते हैं।

‎कैसा रिश्ता था मियां-बीवी के बीच में?

‎जैसा हर मियां-बीवी का होता है।

‎कुछ अच्छा…

‎[गहरी सांस लेने की आवाज़]

‎…कुछ बुरा।

‎-[बैंड-बाजे की आवाज़] ‎-[लोगों के जोश में चिल्लाने की आवाज़]

‎[सीटियों की आवाज़]

‎[बैंड-बाजे की आवाज़ जारी]

‎रानी, ये पकड़ो।

‎[रिशू] ये भी कोई टाइम है। ‎एक घंटा हो गया। अब तक आया नहीं।

‎-आपने बात की कि नहीं अफ़ज़र से? ‎-टाइम सही नहीं बताया होगा।

‎-ये लो, आ गया। ‎-[माँ] आ गया, ले।

‎[अफ़ज़र] भाई, वो चौक पर जाम लगा है पूरा।

‎नहीं, नहीं, तुम भाभी को ‎गाड़ी में लेकर जाओ।

‎मैं सामान उस गाड़ी में लेकर आ रहा हूँ।

‎-ठीक है, आओ लेके। ‎-भाभी, नमस्ते।

‎तैयार कर दिया है। साफ़ है।

‎[बिजली कड़कने की आवाज़]

‎[रानी] नया शहर।

‎नए लोग।

‎नया पति।

‎[बिजली कड़कने की आवाज़]

‎[रानी] पंडित जी को ज्वालापुर अच्छा लगता…

‎मुझे कुछ ख़ास नहीं लगा।

‎पहली मुलाकात में ऐसी बारिश गिरी ‎कि शहर ही डूब गया।

‎ज्वालापुर को, लगता है, ‎मैं एक आँख नहीं भाई।

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎[बिजली कड़कने की आवाज़]

‎[रिशू की माँ] अरे! कोई मुझे भी तो ‎ले जाओ। भूल गए क्या?

‎[मधुर रूमानी संगीत]

‎[डिब्बी में गोलियाँ हिलने की आवाज़]

‎कोई… दोस्त नहीं हैं क्या आपके?

‎कोई आया नहीं लेने।

‎[हकलाते हुए] अफ़ज़र आया था ना।

‎कोई बैंड-वैंड भी नहीं था।

‎काफ़ी लेट हो रहा था तो…

‎मैंने सोचा कि कल कर लेंगे पार्टी वगैरह।

‎और ये धुआंधार बरसात रुक ही नहीं रही है।

‎हमारी दिल्ली में ये सब नहीं देखते।

‎[बादलों की गड़गड़ाहट]

‎[बिजली कड़कने की आवाज़]

‎-[दरवाज़ा टकराने की आवाज़] ‎-[तेज़ बारिश की आवाज़]

‎[तेज़ हवा चलने की आवाज़]

‎[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]

‎अह, माफ़ करना। पानी आ गया अंदर।

‎[रिशू] दो मिनट में साफ़ करता हूँ इसे।

‎[उदास रूमानी संगीत]

‎[उदास रूमानी संगीत जारी]

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎कंजूस!

‎[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]

‎नमस्ते, अंकल जी।

‎नमस्ते, आंटी जी।

‎हेलो।

‎हेलो।

‎[ख़ुशी से] ओह, चाय!

‎नहीं है।

‎मैं… मैं लेके आता हूँ।

‎-शुक्रिया। ‎-[गंभीर संगीत]

‎बहू, आज तुम्हारी मुँह-दिखाई है। ‎आस-पड़ोस के लोग तुम्हें देखने आएंगे।

‎अपने हाथ से, अच्छे से, ‎प्याज और आलू के पकौड़े बना दे।

‎अह।

‎माफ़ करना, आंटी जी। ‎पकौड़े बनाने तो नहीं आते मुझे।

‎और मैं ना चाय भी बहुत गंदी बनाती हूँ।

‎नहीं, कोई बात नहीं। मैं बहुत ‎अच्छी बनाता हूँ। मैं अभी लाया।

‎-[रानी] हाँ। ‎-[रिशू की माँ] एक मिनट।

‎-[गंभीर संगीत] ‎-एक मिनट।

‎तुम्हारी माँ ने कहा था ‎कि वो जो सारे पकवान हमने खाए,

‎वो तुमने ख़ुद बनाए थे, अपने हाथ से।

‎और मैंने रिशू को बोला था…

‎रिशू, तुम्हें बोला था ना?

‎-कचौरी बहुत खस्ता बनी है। ‎-[रिशू] जी।

‎आंटी जी,

‎आप मेरी मम्मी की बात मत सुना करो।

‎वो तो कहती हैं, जब घर के ऊपर से ‎जहाज़ जाता है कि पापा जी ने बनाया है।

‎आप उनकी बात पर ध्यान मत दो। ‎वो उनकी बुरी आदत है।

‎बुरी आदत की वजह से, हम ग़लत बहू घर ले आए।

‎हमको गारंटी दी थी ‎कि तुम सुशील हो, सर्वगुण संपन्न हो।

‎-[हास्यपूर्ण संगीत] ‎-अब दिखाओ, कहाँ हो सुशील!

‎आंटी जी, मैं सुशील हूँ।

‎सोमवार का व्रत रखती हूँ, ‎मैं नॉन-वेज नहीं खाती।

‎बस पकौड़े तलना नहीं आता ना मुझे। ‎कौन सी बड़ी बात है।

‎बाकी सबकुछ आता है मुझे।

‎हाँ! थ्रेडिंग, वैक्सिंग, बिकिनी वैक्स, ‎क्लीन-अप, मैनीक्योर-पैडीक्योर।

‎आपके ब्लैकहेड्स भी हटा सकती हूँ मैं।

‎बहू चाहिए थी, ‎ब्यूटी पॉर्लर उठा के ले आए हम।

‎बायोडेटा में लिखा था कि घरेलू हो।

‎आंटी जी, आप तो बायोडेटा की बात ही मत करो।

‎बायोडेटा में आपने भी लिखा था ‎आपका बेटा पाँच फुट दस इंच का है।

‎इंची टेप पर ना पाँच फुट ‎आठ इंच ना टापे ये लड़का।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎मैं चाय और पकौड़े लेकर आता हूँ।

‎हो गया समस्या का हल।

‎आप जारी रखो।

‎-मैं… मैं अभी आया। ‎-["ऐसी फ़ायर जले" गाने की धुन बजते हुए]

‎[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]

‎[रूमानी संगीत]

‎[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]

‎पढ़ाई की है आपने?

‎नहीं, वो… बस दिलचस्पी है।

‎चलो फिर देखते हैं, कितनी दिलचस्पी है।

‎अगर मेरे बाल झड़ रहे हों तो?

‎झड़ रहे हैं?

‎टेस्ट ले रही हूँ।

‎ओह। अच्छा।

‎[रिशू गला साफ़ करते हुए]

‎अगर बाल झड़ रहे हैं तो, "थैलियम मैटालिकम"।

‎[अंग्रेज़ी में] ‎गंजेपन के लिए "नैचुरम म्यूराटिकम"।

‎और हल्के गंजेपन के लिए "फैरम फॉस्फोरिकम"।

‎[हिंदी में] हाँ, वो चल जाएगा।

‎[धीरे से] हम्म।

‎और अगर ज़ोर से दर्द हो रहा हो तो?

‎अगर दिल में दर्द हो रहा है, अ… ‎सीने में, तो "कैलियम कार्बोनिकम"।

‎लेकिन अगर बहुत ज़्यादा ही…

‎अगर पूरे बदन में खुजली सी मच रही हो तो?

‎एक नया साबुन।

‎माँ हनीमून के बारे में पूछ रही थी।

‎-[गला साफ़ करता है] ‎-अगले हफ्ते से बुकिंग है, गोवा में।

‎आपने मुझसे पहले कोई ‎लड़की देखी थी शादी के लिए?

‎शादी?

‎अब…

‎नहीं, मतलब कोई तो देखी होगी, ‎चाहे पसंद ज़्यादा न आई हो। पर…

‎हाँ…

‎मीरा नाम की लड़की से मिला था।

‎बहुत सुंदर थी वो।

‎एम. ए. भी कर रखी थी उसने, पता है आपको?

‎-[हास्यपूर्ण संगीत] ‎-नहीं।

‎किस विषय में?

‎[अंग्रेज़ी में] होम साइंस।

‎तो आपका होम्योपैथी आगे पढ़ने का इरादा है?

‎वो कहती थी अगर कभी लज़ानिया, इटालियन खाना, ‎खाने का मन हो तो वो घर पर भी बना सकती है।

‎और हमें तो खाना खाने का बड़ा शौक है। ‎घर पर, घरवालों के साथ टीवी लगाकर आराम से।

‎-हाँ, वो देखा। देखा मैंने। ‎-[रिशू] बहुत मज़ा आता है।

‎तो फिर करी क्यों नहीं उससे शादी?

‎बात नहीं बनी ना वहाँ।

‎तो मतलब मैं सांत्वना पुरस्कार हूँ?

‎जी?

‎मतलब?

‎[हास्य रोमांचक संगीत]

‎मतलब… मैं बिंदास हूँ, आधुनिक हूँ, ‎पर फिर भी घरेलू हूँ।

‎[धीरे से] जी।

‎आपको तो वो इटालियन बनाने वाली ‎चाहिए थी, मिस लज़ानिया।

‎-नहीं। नहीं। ‎-[रानी गुस्से में] नहीं?

‎सुबह आपकी माँ मेरे पर पकौड़े लेकर चढ़ गई,

‎आपके मुँह से चूँ नहीं निकली, हाँ?

‎[घबराकर] नहीं, मैंने बोला था।

‎बस यही दिक़्क़त है।

‎घर बैठे-बैठे, बिना मेहनत करे, ‎बिना डेट किए, बिना घुमाए-फिराए,

‎बिना पापड़ बेले, आपको ‎एक ख़ूबसूरत, हॉट लड़की मिल गई

‎-तो उसकी कीमत नहीं है। ‎-नहीं, है।

‎यही तो दिक़्क़त है अरेंज्ड शादी की।

‎लव मैरिज में मेहनत करनी पड़ती है ना।

‎अरेंज्ड मैरिज में तो पकी-पकाई, ‎परोसी हुई लड़की सामने मिल जाती है।

‎ऊपर से वह तुम्हारे पकौड़े तले!

‎नहीं, मत तलो। मत… पकौड़े तलो।

‎हाँ, तुम तलो न पकौड़े!

‎[रानी] तुम्हारी माँ तले पकौड़े!

‎बायोडेटा में ‎लिखना चाहिए था न बावर्ची चाहिए।

‎[नल चलने की आवाज़]

‎सुंदर सुशील लिख दिया, तो मिल गई।

‎[पानी बहने की आवाज़]

‎[रानी] अरे, क्या नाम था उसका?

‎लज़ानिया!

‎-म… मीरा। ‎-हाँ।

‎उससे क्यों नहीं करी शादी?

‎पकौड़े नहीं तलने आते थे उसको?

‎-[हास्यपूर्ण संगीत] ‎-[फ़्लश चलने की आवाज़]

‎गाय चाहिए सबको अरेंज्ड शादी में!

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎[चिल्लाते हुए] ख़ुद तो निकल गए ‎बाज़ार घूमने और हमें छोड़ गए इस…

‎इस ब्यूटी पार्लर के साथ।

‎जवानी चढ़ गई तुम्हारे बाप को!

‎देखो! अपना नया बाप देखो।

‎अब लेके आएगा तुम्हारे लिए नई माँ, ‎तुम्हारी बीवी के साथ रहने के लिए।

‎नहीं, नहीं। आंटी जी को भी मैंने ‎बोला था बाल रंगवाने को।

‎अब, घर में कुछ था नहीं करने को, ‎तो ये, मैंने…

‎अच्छा, तो तुम अपना टाइम पास करने ‎के लिए हमारा जुलूस निकालोगी?

‎मैं गोभी काटूँ, आलू काटूँ,

‎और ये परकटी तशरीफ़ नहीं हिलाए।

‎-लाओ, गोभी मैं काट देता हूँ। ‎-तू मेरी नाक काट दे!

‎भौहें!

‎[रोते हुए] भौंहे तक रंग डाली।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎अच्छा लग रहा हूँ ना?

‎[अफ़ज़र] अबे, तुमने भाभी जी को घर में ‎खुले सांड की तरह छोड़ दिया।

‎देखो रंग दिया उन्होंने तबेला।

‎कब से बोल रहे हैं, जल्दी से जल्दी ‎उनकी ट्रेनिंग शुरू करो तुम!

‎अब क्या पीटी करवाऊँ उससे?

‎अबे, पीटी नहीं, टीटी।

‎टाइम टेबल समझते हो तुम।

‎सुबह सात बजे चाय, नौ बजे मूली के परांठे।

‎दस बजे इस्त्री, ग्यारह बजे फलाना, ‎बारह बजे ढिमकाना।

‎अबे, घर गृहस्थी के काम में ‎व्यस्त रखो उनको।

‎अरेंज्ड शादी में ऐसे ही होता है, अंकल जी!

‎आपसे बेहतर कौन जानेगा। ‎अपनी तो आपबीती है ना।

‎-नहीं बेटा, तुम भी सही जा रहे हो। ‎-[अफ़ज़र] हाँ।

‎अबे, तुम पेन पेपर लाओ बे। ‎तुम पेन पेपर लाओ।

‎कौन उल्लू का पट्ठा जेब में ‎पेन पेपर लेकर घूमता है, यार अफ़ज़र?

‎मेरे पास है, बेटा। एक मिनट।

‎हाँ। देखो। कुछ सीखो।

‎[रिशू के पापा] ये।

‎लाओ। सुबह सात बजे चाय मांगना, फीकी।

‎और जैसे ही लाएगी, ‎बोलना हमने तो चीनी बोली थी।

‎हैं।

‎थोड़ा रौब रखना तुम, ठीक है?

‎उनको उत्तेजना महसूस होगी। ‎तुम्हारे आगे-पीछे दौड़ेगी वो।

‎[रानी की माँ फ़ोन पर] ‎तू ना अपना ग़ुस्सा कंट्रोल में रख।

‎और रिझा उसे।

‎मैं तो कह रही हूँ, ग़ुस्सा आए तो पी जा।

‎एक महीने बाद सारा ग़ुस्सा ‎एक साथ निकाल देना।

‎और सोते हुए चप्पल मार देना उसको।

‎ले, मैं तो चिल्ला दी उस पर।

‎पहले महीने ना, तू देवी है, बस।

‎शहद टपकना चाहिए।

‎लार टपकाता हुआ कुत्ता जब तक ‎ना बने ना, दुम सीधी नहीं होगी।

‎[रानी की मौसी] रिझाओ उसे।

‎देख, पहले दो दिन जब भी रिशू आए ना, ‎तो अपना पल्लू गिरा देना।

‎"ओहो, उफ्फ़!"

‎और ब्लाउज और टाइट वाला पहनना।

‎दूर से रिझा के ना ऐसे व्यस्त हो जाना।

‎रानी, सात बज चुके हैं, मेरी चाय कहाँ है?

‎सुबह सात बजे चाय

‎रानी, सात बज चुके हैं, मेरी…

‎-[हकलाने की आवाज़] ‎-[रूमानी संगीत]

‎[रिशू हकलाते हुए]

‎[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎आठ बजे। आठ नहीं, नौ, नौ बजे।

‎रानी, आठ बजे मूली के पराठे।

‎रानी, आठ बजे… आ गई।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎[गला साफ़ करते हुए] रानी?

‎रानी?

‎-[गला साफ़ करने की आवाज़] ‎-[हास्यपूर्ण संगीत]

‎रानी!

‎नौ बजे मूली के पराठे, तुम दे देना।

‎[हास्यपूर्ण संगीत जारी]

‎मूली सौ रूपए किलो है।

‎[रूमानी संगीत]

‎[इस्तिरी की भाप की आवाज़]

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎[रिशू की माँ] रात में क्या तुम ‎सांप-सीढ़ी खेलते रहते हो

‎जो दिन में तुम्हें पल्लू ‎गिराने पड़ रहे हैं?

‎क्या हुआ?

‎कुछ नहीं। तुम सीरियल देखो।

‎अबे, बहुत पिस लिए तुम।

‎टाइम टेबल बनाने के बाद, ‎ट्रेनिंग का स्टेप नंबर दो।

‎-हम्म। ‎-[अफ़ज़र] क्या?

‎अबे, बेडरूम जीतो।

‎अबे, शेर बनो। [शेर की तरह गुर्राता है]

‎मर्दाना महसूस करो। ‎तो उत्तेजना महसूस होगी ना।

‎सब कुछ कहाँ पे है, कहाँ पे है?

‎यहाँ पे है।

‎समझे?

‎लेकिन शेर बनने से कुछ नहीं होता, अफ़ज़र।

‎"सिलेनियम मेटालीकम", "फॉस्फोरिक एसिटम", ‎"योहिबिनम",

‎ये सारी चीज़ें खाने से होता है सबकुछ।

‎इतना कम-कम-कम खाके ‎कम न पड़ जाना वहाँ पे तुम!

‎बेटा, क्या नाम बताया दवाई का, ‎यूरिनम कम-कम…

‎थोड़ा तो उम्र का लिहाज़ करो, पापा।

‎और ये हाथ-पैर, बाल है ना, ये काले रंगवाना ‎बंद करो। अच्छा नहीं लगता आप पर।

‎[रिशू] अमावस की रात लगते हो सरासर।

‎मम्मी नज़रबट्टू बनाकर ‎टांग देगी घर के बाहर।

‎[रिशू के पापा] सही कहा।

‎इधर कुछ ज़रूरी बात कर रहे थे ना हम लोग।

‎-[रिशू के पापा] एक नाम भूल… ‎-न, बात हो रही थी।

‎आपको वो दवाई का नाम जानने की ‎ज़रूरत नहीं है।

‎हम्म। हाँ।

‎[हास्यपूर्ण संगीत]

‎[शेर की तरह गुर्राते हुए]

‎[रानी] रिशू?

‎रिशू?

‎-सो गए हो क्या? ‎-[रिशू] हम्म?

‎[रानी] ये…

‎मेरा हुक खोल दोगे?

‎[रिशू धीरे से] हम्म?

‎[हास्यपूर्ण संगीत जारी]

‎ये… ये हुक?

‎हाँ।

‎[अंग्रेजी में] एक…

‎दो…

‎[घबराते हुए] तीन। हो गया।

‎-[रूमानी संगीत] ‎-[सर टकराने की आवाज़]

‎-[रानी] आह! ‎-[रिशू] अरे।

‎-खून तो नहीं निकल रहा? ‎-नहीं। खून नहीं निकल रहा।

‎-कटा है? ‎-नहीं, वो…

‎मैं दो बूंद आर्निका दे दूँ?

‎[चुटकी बजाता है] दर्द चला जाएगा।

‎[रिशू धीरे से] दे दूँ?

‎बस तुम लाइट बंद कर दो।

‎[रिशू] माफ़ करना, एक मिनट मैं इधर ‎आ जाऊँ अच्छे से।

‎[रानी] हाँ। अरे, साड़ी, माफ़ करना।

‎[रिशू] एक सेकंड। मेरा पैर, पैर…

‎उठो, एक सेकंड।

‎-[रानी] ठीक है। अच्छा, इधर आओ। ‎-[रिशू] वो… मैं…

‎[रिशू] हाँ।

‎ये।

‎[रानी] आराम से, रिशू। ए… एक मिनट।

‎रिशू?

‎[रिशू] अरे… अरे यार।

‎[रिशू के आह भरने की आवाज़] उह।

‎[रानी] हम्म?

‎रिशू?

‎[उदास संगीत]

‎[मोबाईल के वाइब्रेट होने की आवाज़]

‎[मोबाईल के वाइब्रेट होने की आवाज़]

‎तो, कैसा था कल?

‎क्या कैसा था?

‎बोला था मैंने लव मैरिज करने दो।

‎[रानी] अरेंज्ड शादी में ‎पति को पड़ी ही नहीं है।

‎उसकी घंटी बजी, बस। मंदिर बंद।

‎बीवी भगवान भरोसे।

‎पल्लू गिरा के भी कुछ नहीं हुआ?

‎मासी, सबकुछ गिरा दिया!

‎जुगनू निकला वो।

‎[रानी] जुगनू समझ रही हो ना आप? जुगनू।

‎एक सेकंड में हजार वॉल्ट की रोशनी और फुस्स!

‎तू उसको ऐसा न मर्दाना महसूस करा ना।

‎[जीभ चटकाते हुए]

‎मासी, अभी कभी घरेलू फील कराओ, ‎कभी मर्दाना फील कराओ,

‎अभी एक छोटे से काम के लिए ‎कितनी फीलिंग्स देनी पड़ेंगी मुझे?

‎[रानी] कहाँ फंसा दिया ज्वालापुर में।

‎कोई ज्वाला नहीं जलने वाली हमारे बीच।

‎फुस्की निकला ऋषभ सक्सेना।

‎[रिशू] माँ सही कहती थी। नहीं संभलेगी हमसे।

‎हमारी सारी निजी बातें ‎अपने घरवालों को बताती है, यार।

‎अरे, मज़ाक में कह दिया होगा मायकेवालों को।

‎और तुम भी ना पता नहीं ‎क्या-क्या गुलकी पीते रहते हो।

‎[अफ़ज़र] छोड़ो ये सब। इज़्ज़त पर मत लो।

‎और मुँह फुलाना बंद करो अपना।

‎[उदास संगीत जारी]

‎करवा दो यार उसको, अटकी है फ़ाइल…

‎अरे, रिशू, तू यहाँ?

‎तू तो छुट्टी पर चल रहा था।

‎यार, तुम लोगों को तो पता है, सर उत्साहित ‎हो जाते हैं तो फट से बुला लेते हैं।

‎-[आदमी] रिशू? ‎-सर।

‎[आदमी] तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

‎हनीमून का समय है।

‎परफोर्मेंस उधर देनी है, इधर नहीं।

‎लेकिन इनको तो आपके साथ ‎हनीमून करना है ना, सर।

‎[आदमी] हाँ। कल रविवार है।

‎कल ऑफ़िस बंद रहेगा।

‎कल भी मत आ जाना।

‎[आदमी] सुन लिया, भैया?

‎[टीवी से आती आवाज़]

‎[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]

‎[उदास संगीत]

‎-[रिशू की माँ] खाना लगा दूँ? ‎-नहीं, मैंने खा लिया।

‎[उदास संगीत जारी]

‎[लाइट बंद करने की आवाज़]

‎[दरवाज़ा बंद होने की आवाज़]

‎[रानी] रिशू?

‎खाना लगा दूँ, रिशू?

‎[रिशू] नहीं, मन नहीं है।

‎[उदास संगीत जारी]

‎[अफ़ज़र] लाइट बंद। सो गईं भाभीजी।

‎जा… जाऊँ मैं?

‎[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]

‎[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]

‎[बत्ती चालू करने की आवाज़]

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎आप मुझसे बोर हो गए हो ना?

‎नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।

‎-झूठ। ‎-[अलमारी बंद करने की आवाज़]

‎तो फिर चलो ट्रूथ या डेयर खेलते हैं।

‎सच, तो फिर बताना पड़ेगा ‎कि क्यों भाग रहे हो

‎और डेयर, तो फिर मैं अपना ब्लाउज ‎निकाल सकती हूँ और तुम अपनी पैंट।

‎[रिशू] मैंने आपकी मम्मी और मासी के साथ ‎सारी बातें सुन ली थीं।

‎[उदास संगीत]

‎वैसे, कैसा लड़का चाहिए था आपको, रानी जी?

‎जिसका…

‎जो मज़ाकिया हो,

‎-सुंदर हो, शरारती हो, ‎-[रूमानी संगीत]

‎प्यार में पागल हो।

‎कभी-कभी तो बाल खींच ले,

‎कभी-कभी चूम ले,

‎[रूमानी संगीत जारी]

‎थोड़ा सरफिरा।

‎आपको तो पाँच-छह लड़के ‎एक साथ चाहिए, रानी जी।

‎अब एक में कहाँ मिलेगा यह सब।

‎एक में एक-दो तो हो सकते हैं ना?

‎कि वो भी मुश्किल है?

‎कल से ऑफ़िस वालों ने एमबीए ‎क्लासेस रखी हैं।

‎दफ़्तर के बाद वहीं जाऊँगा।

‎और हाँ…

‎आपको जैसा भी लड़का चाहिए था ‎वो छह ख़ूबियों वाला,

‎मिला यही है।

‎उसके लिए माफ़ करना।

‎[दरवाज़ा ज़ोर से बंद करने की आवाज़]

‎उस दिन के बाद रिशू मुझसे बहुत दूर चला गया।

‎[धीमा उदास संगीत]

‎रिशू की नाराज़गी पलंग पर लेटी रहती थी।

‎[पंजाबी में] ‎♪ साथ-साथ रहकर भी ♪

‎♪ दूर-दूर रहना ♪

‎♪ खुल के न कुछ कह पाना ♪

‎♪ या तो चुप रहना ♪

‎♪ या तो कड़वा कहना ♪

‎♪ बात कोई मीठी न सुन पाऊँ ♪

‎♪ हो, उसे मनाऊँ या ♪

‎♪ ख़ुद को मनाऊँ ♪

‎♪ किस्मत को कैसे समझाऊँ ♪

‎♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ‎छोड़ दिया रे ♪

‎[रानी] मैंने काफ़ी कोशिश की थी ‎उसके क़रीब जाने की।

‎उसने तो लगता है ‎मुझे अपने दिल से ही निकाल दिया था।

‎♪ हो ♪

‎♪ दिन कट जाता है फिर ♪

‎♪ रातें शुरू और ♪

‎♪ रात में घर में घूमता फिरूँ ♪

‎जब धो रही हो तो,

‎रिशू के भी धो दो।

‎♪ हो ♪

‎♪ आँख बंद करके ♪

‎♪ आँसूं छुपाए हैं ♪

‎♪ किस्मत को कैसे समझाऊँ ♪

‎♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪

‎♪ छोड़ दिया रे ♪

‎♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪

‎♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪

‎चलो, मैं ले के चलता हूँ तुम्हें उसके पास।

‎रानी?

‎बढ़िया चल रही है पढ़ाई?

‎नहीं, वो… वो बस रास्ता समझा रहा था।

‎रास्ता?

‎अपने घर का रास्ता तो ये भूल गए हैं।

‎आपको रास्ता अच्छे से समझा देंगे।

‎एमबीए कर रहे हैं आप यहाँ पे?

‎एक ही महीना हुआ है हमारी शादी को।

‎उस एक महीने में ना बस एक ही बार ‎कोशिश की है, पर कुछ हुआ नहीं।

‎ऐसे ही बस औरत के दिल की बात ‎आपको बता रही हूँ।

‎एमबीए कर रहे हैं।

‎♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪

‎♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪

‎थोड़े दिन के लिए घर आ जाऊँँ?

‎नहीं, बेटा, ऐसे इतनी जल्दी आएगी ‎तो कैसा लगेगा।

‎थोड़े दिन रहके चली जाऊँगी।

‎हाँ, पर, हमको भी जाना है मामाजी के घर, कल,

‎[रानी की माँ] एक हफ्ते के लिए।

‎और तुम भी तो जाओगे हनीमून पर।

‎[रानी की माँ] ऐसी छोटी-मोटी बातें ‎होती रहती हैं।

‎सब ठीक हो जाएगा।

‎मैं फिर फ़ोन करती हूँ।

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎[उदास संगीत]

‎गोवा के लिए पैकिंग कब शुरू करनी है?

‎[गहरी सांस छोड़ते हुए]

‎ये रहा आपका हनीमून।

‎[बर्तन ज़ोर से खड़खड़ाते हैं]

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎ये कुत्ते रोज़ ऐसे ही भौंकते रहेंगे क्या?

‎अब गली के हर कुत्ते का जाके मुँह तो नहीं ‎बंद कर सकता ना मैं, ताकि तुम चैन से सोओ।

‎पता था!

‎पता था तुमसे यही जवाब मिलने वाला है मुझे!

‎नहीं करती शादी। मना कर देती।

‎अकल घास चरने गई थी ना मेरी इसलिए।

‎किस्मत में यही लिखा था मेरे।

‎अब ये कुत्ते भी ‎तुम्हारी किस्मत में ही लिखे हैं।

‎दोस्ती कर लो इनसे।

‎[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]

‎तो आप रिशू के घर के सामने ही रहती है ना?

‎-[पड़ोसन] जी हाँ। ‎-तो आपने तो काफ़ी कुछ देखा होगा।

‎बात ऐसी है,

‎कि ये जो मियां-बीवी का रिश्ता होता है न,

‎ये अल्लाह मियां ने कच्चे धागे से बांधा है।

‎गांठ बांध-बांध के चलोगे तो रह जाता है।

‎और जहाँ गांठ खुली, तो बात ख़त्म।

‎अरे, सब यहाँ पे कवि सम्मेलन ‎करने आते हैं क्या?

‎आप साफ़-साफ़ हिंदी में बताओ।

‎औरत का दिल समझो, दरोगा जी।

‎नील जो है, वो लता जी के बहनोई का भांजा था।

‎वहाँ रहने आया था।

‎[गाड़ी के हॉर्न की आवाज़]

‎[गाड़ी के हॉर्न की आवाज़]

‎[गाड़ी के इंजन की आवाज़]

‎[गाड़ी के दरवाज़े बंद होने की आवाजें]

‎[सामान उतारने की आवाज़]

‎[रिशू की माँ] पहुंचा क्यों नहीं शादी पे?

‎[आदमी] पहुँचा तो सही दिल्ली तक।

‎[रिशू की माँ] दिखा क्यों नहीं?

‎[आदमी] क्योंकि तब तक आप ‎बारात लेकर निकल चुके थे।

‎-शादी हो गई थी। ‎-[रिशू की माँ] हट, पगला!

‎पिछले महीने कहाँ ग़ायब हो गया था?

‎[आदमी] अरे बुआ जी, आज़ाद पछियों के ‎ठिकाने नहीं पूछा करते।

‎[रिशू की माँ] तेरी माँ कितनी परेशान थी।

‎ले!

‎पूछ रहा था ना बहू कहाँ है।

‎ले आ गई, कर ले दर्शन।

‎ये नील है।

‎मेरे बहनोई का भांजा।

‎अभी कुछ दिन हमारे साथ रहेगा।

‎पता है, ये टूरिस्ट सीज़न में ना

‎टूरिस्टों को चप्पू वाली नाव में घुमाता है।

‎[नील] मासी, अह…

‎[अंग्रेजी में] उनका मतलब राफ्टिंग से है।

‎रिवर राफ्टिंग?

‎[हिंदी में] हाँ तो, वही बात हुई ना। ‎चप्पू वाली नाव।

‎[रूमानी संगीत]

‎[नील] भाभी अभी उठी हैं?

‎अह।

‎सूरज तो पूरा चढ़ गया। पूरे आसमान में।

‎नहीं, नील जी, हमारा सूरज नहीं चढ़ा अभी तक।

‎मासी…

‎भाभी के हाथ का कुछ खिलवाइए ना।

‎[रिशू की माँ] खाने-पीने की बात मत करना।

‎चूल्हा-चौका, करछी इनको नहीं भाता है।

‎इनके हाथ से सिर्फ़ कैंची चलती है।

‎और अपनी मुंडी बचाकर रखना।

‎तेरे मौसा जो घूम रहे हैं ना रैंबो बने, ‎परकटे, इनकी मेहरबानी है।

‎आपको कुछ कटवाना है?

‎[धीरे से] नहीं।

‎[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]

‎[रिशू की माँ] आ गए।

‎हाथ-मुँह धो लो, खाना गरम है। खा लो।

‎-रिशू भैया! ‎-अरे!

‎नील? अरे, कब आए तुम?

‎-[नील] बस सुबह ही आया। ‎-[रिशू] सुबह आए?

‎[रिशू] मुझे किसी ने बताया ही नहीं कुछ।

‎रिशू, ज़रा लाइट बुझा दो।

‎क्योंकि तुम्हारे पिताजी जो साधना कट कराके ‎बैठे हैं, उससे मेरी आँखें चौंधिया रही हैं।

‎[रिशू की माँ] देखो।

‎और अपनी बीवी की कैंची रुकवाओ।

‎तेज़ी से इज़्ज़त कट रही है हमारी!

‎संभालो अपनी दुल्हन को।

‎[उदास संगीत]

‎[गहरी सांस छोड़ता है]

‎[नील] क़त्ल माँ ने किया ‎और बीवी को फंसा दिया है।

‎[मधुर संगीत]

‎दिनेश पंडित पढ़ते हो तुम भी?

‎हाँ।

‎अह, माफ़ करना, मैं पी सकता हूँ?

‎एक महीने की बात है।

‎[रानी] सिगरेट का पता नहीं, पर ज्वालापुर ‎तुम्हें खा नहीं गया तो फिर मिलेंगे।

‎तुम तो अच्छी-खासी दिख रही हो।

‎दिख रही हूँ।

‎[उदास संगीत]

‎[नील] अच्छी आई है फ़ोटो?

‎[रूमानी संगीत]

‎♪ आँखों को दूर से ही ♪

‎♪ उसने छुआ है रे ♪

‎आओ, आओ।

‎♪ महसूस हमको भी ये ♪

‎[दोस्त] कैसे हो, नील भैया?

‎♪ जबसे हुआ है रे ♪

‎♪ कुर्बान उस पे अपना ♪

‎♪ हर पल हुआ है रे ♪

‎♪ वो ही है वजह ♪

‎♪ वो ही है जगह ♪

‎♪ वो ही जादू ♪

‎♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎♪ कि मेरी जान ने कहा मुझसे ♪

‎♪ निकल जा तू ♪

‎♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪

‎चाय मिलेगी?

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎चाय पियोगे?

‎तुम बनाओगी?

‎हाँ।

‎हाँ।

‎[वॉटर फिल्टर का संगीत]

‎[बटन बंद करने की आवाज़]

‎पत्ती?

‎वो चीनी के बगल में।

‎[रूमानी संगीत]

‎दो चम्मच और।

‎चीनी?

‎तीन चम्मच।

‎[रूमानी संगीत जारी]

‎छलनी।

‎[मोबाईल की रिंगटोन बजने की आवाज़]

‎अच्छी बनी है चाय।

‎♪ हो, अब क्या सही न जानूँ ♪

‎♪ ना ग़लत जानूँ रे ♪

‎♪ वो तो बढ़ता ही जाए ♪

‎♪ हो जैसे चढ़ता बुखार ♪

‎चाय में इतना ज़ायका है तो

‎आपके खाने का स्वाद चख के तो ‎हम जान दे देंगे।

‎♪ हो ओ, अपना पराया अब तो ♪

‎♪ मैं न पहचानूँ रे ♪

‎♪ ये हे ऐसी बहार ♪

‎[रिशू की माँ] ये मोबाइल पर देख के ना…

‎♪ जो कर दे बेड़ा पार ♪

‎♪ गहराइयों में जैसे ♪

‎♪ जाने लगा है वो ♪

‎[रिशू की माँ] बहुत तेज़ जल रही है गैस।

‎♪ नजदीकियों में वैसे ♪

‎♪ आने लगा है वो ♪

‎♪ छूने की देरी है जी ♪

‎♪ हम भी तैयार हैं ♪

‎♪ वो बहाना ♪

‎♪ वो ठिकाना ♪

‎♪ वो ही हरसू ♪

‎♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎♪ कि मेरी जान ने कहा मुझसे ♪

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎भैया, डरना मत!

‎[रानी के चीखने की आवाज़]

‎[रिशू] रानी।

‎रानी!

‎रानी!

‎[रिशू चीख़ते हुए] रानी!

‎[रूमानी संगीत]

‎♪ मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎♪ मेरी जान ने कहा मुझसे ♪

‎♪ निकल जा तू ♪

‎कौन है?

‎♪ फिसल जा तू ♪

‎[वॉटर फिल्टर का संगीत]

‎[बटन बंद करने की आवाज़]

‎[धीमा संगीत]

‎[रोमांचक संगीत]

‎[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]

‎आगे से ऐसा करने की हिम्मत मत करना!

‎-[जग रखने की आवाज़] ‎-[गहरी सांस लेने की आवाज़]

‎[घड़ी की टिक-टिक की आवाज़]

‎[तेज़ रूमानी संगीत]

‎[रिशू की माँ] रानी!

‎[रिशू की माँ] रानी! रानी!

‎कहाँ, गई कहाँ?

‎[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]

‎[मोबाईल के वाइब्रेशन की आवाज़]

‎नमक थोड़ा कम है।

‎बात तो है हाथों में।

‎बस मटन खाने का मन है।

‎मेरी रसोई में मांस-वांस नहीं बनेगा।

‎[रोमांचक संगीत]

‎[बकरी के मिमियाने की आवाज़]

‎-[कसाई के वार की आवाज़] ‎-[दुकानदारों के चिल्लाने की आवाज़]

‎[बकरी के मिमियाने की आवाज़]

‎[आदमी] मैडम आइए। इधर आइए।

‎[आदमी] मैडम, बड़े रखूँ या काट दूँ छोटे?

‎-[रिशू की माँ] बकरा पकाएगी? ‎-[रानी] मैं…

‎[रिशू की माँ] और तुमने कहा था ‎तुम मांस नहीं खाती।

‎अब ये मांस कहाँ से आ गया?

‎-मैं… ‎-हाँ, क्या हुआ, मम्मी?

‎[रिशू की माँ] रिशू, ये मेरी रसोई में ‎मांस बनाना चाहती है।

‎-अच्छा, ठीक है। ‎-वापस कर आओ।

‎नहीं जाएगा आपकी रसोई में।

‎तुम इधर आओ।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[किशोर] इतनी बेरहमी से ‎अपने पति को मार डाला।

‎क़त्ल का हथियार ग़ायब करके ‎प्रेमी को भगा दिया।

‎और ये दोनों मिल कर ‎हमें बेवकूफ़ बना रहे हैं।

‎[किशोर] ऐसी औरतें बड़ी शातिर होती हैं।

‎एक बार कुछ सुराग हाथ आ जाए, ‎इसको तो जेल में सड़ा डालूँगा मैं!

‎एक ही तो दोस्त था हमारा, सर जी।

‎[अफ़ज़र] पलकों पर बैठा कर ‎रखता था भाभी जी को।

‎सर, ये डायन…

‎आशिक के साथ मिल के ‎हज़म कर गई मेरे दोस्त को।

‎ज़िंदा जला दिया मेरे यार को!

‎अरे, क्या कमी रह गई थी रिशू के प्यार में?

‎[अफ़ज़र] चिथड़े उड़ा दिए उसके!

‎सर, इतना प्यार करता था उसको। ‎सर, इसको जन्नत नसीब नहीं होगा!

‎इसको जेल में डालो, सर।

‎सर, खा गई उसको ये डायन।

‎कैसे संबंध थे आपके नील त्रिपाठी जी से?

‎[सिसकने की आवाज़]

‎कुछ अच्छे…

‎कुछ बुरे।

‎शारीरिक?

‎[सिसकने की आवाज़]

‎इंस्पेक्टर साहब…

‎पंडित जी कहते हैं,

‎"संबंध तो मानसिक होते हैं।

‎शारीरिक तो संभोग होता है!"

‎आपने और आपके प्रेमी ने ‎मिल के कोई प्लानिंग नहीं की थी?

‎[घोंपने की आवाज़]

‎[पूर्वाभासी संगीत]

‎ये लाइटर कहाँ रख दिया, यार?

‎अरे, वाह।

‎अफ़ज़र-वाला मटन बना रही हूँ।

‎फ़ातिमा भाभी से रेसिपी ले ली है।

‎इधर आ।

‎[फ़ोटो क्लिक करने की आवाज़]

‎[रानी] कितनी फ़ोटो खींचते रहते हो?

‎अगले हफ्ते की वापसी है मेरी।

‎ठीक है, तो अगले हफ्ते मैं भी ‎दिल्ली निकल लूँगी।

‎फिर तुम्हारे पास।

‎अच्छा, ये बताओ

‎मटन हो पाएगा तुमसे?

‎गोश्त बनाने में पकाने वाला का ‎खून पसीना दोनों लग जाता है।

‎चख के मेरा ब्लड ग्रुप बता देना!

‎[रानी] पूरी जान निचोड़ कर डाल दूँगी ‎मटन में।

‎[खांसते हुए]

‎रिशू भैया के बारे में क्या सोचा है?

‎रि… रिशू को बता दूँगी।

‎सब सच।

‎अरे, अरे!

‎यहाँ पर ये सब लेके मत आना।

‎रिशू लेट से आएगा ऑफ़िस से आज।

‎उसको खिला देना तुम बाद में। ‎यहाँ नहीं रखो फिर।

‎अरे, नील तो है। वो खा लेगा हमारे साथ।

‎गया! नील गया।

‎जल्दी-जल्दी सामान रखा गाड़ी में ‎और चला गया।

‎[रिशू के पापा] बिना मिले चला गया?

‎[रिशू की माँ] हाँ, देखो। ‎बिना मिले ही चला गया यहाँ से।

‎पता नहीं कौन सा भूत सवार था सर पे!

‎-[रिशू की माँ] थोड़ा लो। ‎-[पापा] अजीब आदमी है।

‎बिना मिले ही चला गया।

‎चला नहीं गया है।

‎भाग गया है।

‎भाग गया है।

‎तू क्या बुत बनी खड़ी है यहाँ पे?

‎[रिशू की माँ] जा, रख दे।

‎[गंभीर संगीत]

‎[रहस्य्पूर्ण संगीत]

‎[रिशू की माँ] रानी!

‎खाना लगा दे। रिशू आ गया है।

‎पता नहीं, कहाँ ध्यान रहता है इस लड़की का।

‎वाह!

‎आप बहुत कोशिश कर रही हैं।

‎दरअसल बात यह है कि आप इतने ख़ूबसूरत हो ‎ कि आपके सामने थोड़ा सा नर्वस हो जाता हूँ।

‎[गहरी सांस लेने की आवाज़]

‎[सांस छोड़ने की आवाज़]

‎अब तक जो कुछ भी हुआ, उसके लिए माफ़ करना।

‎एक नए सिरे से शुरू करें?

‎मम्म।

‎वाह।

‎ये मटन नील के लिए बनाया था।

‎मैं… प्यार करने लगी थी उससे।

‎उसी के साथ रहना चाहती थी।

‎[उदास संगीत]

‎पर वो धोखा देकर भाग गया।

‎और मैं तुम्हारे पास रह गई।

‎अच्छा बना है मटन।

‎[रानी] बस। वो उसके बाद चुप हो गया।

‎मैं बस उसे देखती रही और वो खाता रहा।

‎कहानी अच्छी है।

‎पर हमें शक है मैडम कि आपने अपने ‎प्रेमी के साथ मिलकर रिशू को मारा।

‎उसके सिर पर घाव का निशान है, भारी चीज़ से।

‎सर, कहानी तो आपकी भी बहुत अच्छी है।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎दी एंड भी अच्छा होगा।

‎जब मैं क़त्ल का हथियार और आपके प्रेमी, ‎दोनों को ढूंढ के ले आऊँगा।

‎[रोमांचक संगीत]

‎तो कोई पछतावा नहीं है तुम्हें?

‎शादी के बाद चक्कर चलाने का?

‎[दीर्घश्वास की आवाज़]

‎नहीं।

‎क्योंकि अगर नील से नहीं मिलती

‎तो असली रिशू से कैसे मिलती।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[उदास संगीत]

‎[बहते पानी की आवाज़]

‎[कंडक्टर के चिल्लाने की आवाज़]

‎[ऑटोरिक्शा की आवाज़]

‎[पूर्वाभासी संगीत]

‎[बच्चों के हंसने की आवाज़]

‎[चेन खोलने-बंद करने की आवाज़]

‎[रोमांचक संगीत]

‎[रिशू के चिल्लाने की आवाज़]

‎[नील] भैया!

‎-[रिशू] ये हिम्मत! ‎-[नील] पगला गए क्या?

‎-[रोमांचक संगीत] ‎-[चिल्लाने की आवाज़]

‎[हाथापाई की आवाज़]

‎[कराहने की आवाज़]

‎[रोमांचक संगीत]

‎[नील] रिशू! रिशू भैया!

‎[कराहने की आवाज़]

‎[हाँफने की आवाज़]

‎[लोगों की बातें करने की आवाज़ें]

‎[नील] पता नहीं क्या चाहते हैं।

‎[नील] चल, चल।

‎माफ़ करना, माफ़ करना… ‎कुछ नहीं हुआ, भैया हैं।

‎[नील] ग़लती मानते हैं हम।

‎अब खिंचा चला गया।

‎मतलब होश खो बैठा था।

‎अगर आप संबंध बना लेते, ‎वो अकेली नहीं पड़ती।

‎और मैं बीच में कैसे आता।

‎पर, रिशू भैया…

‎आपके संबंध कैसे नहीं बने उनके साथ?

‎हम गधे हैं!

‎[रूमानी संगीत]

‎उनका रेशमी जिस्म जीतने की बजाय ‎उनका दिल जीतने में लग गए।

‎और तुमने भी सोचा…

‎सीधे-सादे, शरीफ़ रिशू भैया हैं, इनकी मारो!

‎इनकी लुगाई की भी मारो।

‎ये थोड़ी ना बोलेंगे कुछ।

‎उसे लेके क्यों नहीं आए अपने साथ?

‎हम तीनों में से कम से कम ‎तुम दोनों तो खुश रह पाते।

‎[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]

‎[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]

‎[चीज़ें टटोलने की आवाज़]

‎कहाँ गए थे?

‎मैंने फ़ोन लगाया था, रिशू तुम्हें।

‎कुछ नहीं कहोगे क्या?

‎[आह भरने की आवाज़]

‎ट्रूथ या डेयरिंग अब खेलो।

‎कहाँ से आ रहे हो?

‎नील से पिट के आ रहा हूँ।

‎क्यों?

‎तुम्हें छोड़ के जो भाग गया।

‎तुमने इतना प्यार किया उसे, ‎लेकिन उसने नहीं किया।

‎कैसे?

‎[उदास संगीत]

‎-मुझे माफ़ कर दो। ‎-दूर… प्लीज़ दूर से बात करो।

‎[हकलाते हुए] मैं क्या… ‎मैं क्या करूँ, रिशू?

‎माफ़ करना, ग़लती हो गई मुझसे।

‎चली जाऊँ यहाँ से?

‎हाँ, तुम प्लीज़ चली जाओ।

‎सच में, चली जाओ।

‎यही बेहतर होगा सबके लिए।

‎[सांस छोड़ने की आवाज़]

‎तुमसे मैंने इतना प्यार किया न, रानी…

‎…कि तुम्हारे बिना रह नहीं सकता मैं।

‎लेकिन अब शायद ‎तुम्हारे साथ भी नहीं रह सकता।

‎भलाई इसी में है कि तुम चली जाओ।

‎क्योंकि मेरा मन करता है ‎कि तुम्हारा गला घोंट दूँ।

‎चली जाओ, रानी, वरना मार दूँगा तुम्हें।

‎[रिशू] चली जाओ।

‎[उदास संगीत]

‎[चिड़ियाँ चहचहा रही हैं]

‎[रिशू की माँ] रिशू?

‎आय-हाय! क्या कर लिया ये?

‎जब देखो गिरता-पड़ता रहता है। ‎ध्यान से नहीं चल सकता?

‎हम मौसा जी के यहाँ जा रहे हैं, ‎शाम तक आते हैं।

‎[रिशू के पापा] क्या हुआ?

‎[रिशू की माँ बड़बड़ाते हुए]

‎[उदास संगीत]

‎स्टेशन तक छोड़ सकते हो?

‎ख़ुद चली जाओ।

‎[लड़का 1] रुक, रुक, रुक।

‎[लड़का 2] ए, भाई?

‎हेलो, भाभी।

‎भाभी, आप जा रहे हो?

‎नील भी चला गया।

‎आइए, हम छोड़ देते हैं। हटो, हट।

‎आइए, भाभी। बैठिए।

‎[लड़का 1] तीन बैठेंगे तो क्या परेशानी है?

‎[लड़का 2] रिक्शा नहीं मिलेगा, भाभी, ‎इस समय पर।

‎हम एक किक मारेंगे, छोड़ आएंगे आपको।

‎भाभी, हम भी नील जैसे ही ‎आपका मन लगा कर रखेंगे।

‎[लड़का 1] अरे, आइए ना भाभी, मज़ा आएगा।

‎ख़ास ख़याल रखेंगे आपका।

‎[लड़का 2] फ़र्ज है हमारा।

‎[लड़कों के हंसने की आवाज़]

‎-तुम जाओ, मैं देखता हूँ। ‎-[लड़का 1] अरे, भैया आ गए।

‎भैया, भाभी को ले जा रहे हो आप?

‎[लड़का 1] देखिए, आपके आते ही ‎भाभी अंदर चली गईं।

‎अब हमारा दिल कैसे लगेगा, भैया।

‎रिक्शा!

‎नील का फ़ोन भी आया था ना।

‎[लड़का 1] उसने कहा है भैया-भाभी का ‎ख़ास ख़याल रखना।

‎[लड़का 2] चलो, भैया, हम सब चलते हैं। ‎चप्पू वाली नाव में चपचपाते हुए।

‎भैया, चिंता मत करो, नील हमारे भाई जैसा है।

‎रिक्शा!

‎[लड़का 1] ‎आपसे तो रिक्शा भी नहीं रुक पा रहा।

‎ये भी हमें ही करना पड़ेगा!

‎[लड़कों के हंसने की आवाज़]

‎भाभी को फ़ोन पे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दें?

‎दोस्ती कर लेंगी?

‎[लड़का 1] एक नंबर।

‎पक्का, कर लेंगी।

‎मैं तो कहता हूँ इनका हैंडल लेते हैं, ‎लाइव स्टोरीज़ देखेंगे।

‎"#लवभाभी"।

‎[लड़का 2] भैया ने तो हमें शादी में भी ‎नहीं बुलाया था।

‎हमें भी मौका दीजिए, साथ में मज़े करने का।

‎आ गया ना।

‎[लड़का 2] अरे भैया, बताओ, ‎हैंडल भी टूट गया!

‎[रानी] ग़लती मैंने की और भुगत रिशू रहा था।

‎एक नील था जो भाग गया।

‎और एक रिशू था…

‎जो मेरे लिए दुनिया से लड़ रहा था।

‎[रूमानी संगीत]

‎[लड़कों के ज़ोर से हंसने की आवाज़]

‎सूटकेस निकाल दो मेरा, प्लीज़। ‎मैं नहीं जा रही कहीं।

‎जो सजा देनी है ना, दे देना, ‎तुम्हारे साथ ही रहूँगी मैं।

‎मैं नहीं जा रही कहीं।

‎[रानी] और उस दिन मैंने ठान ली, ‎कि अब चाहे जो भी हो जाए,

‎मैं रिशू को छोड़कर कभी नहीं जाऊँगी।

‎पता नहीं ये मेरी ज़िद थी,

‎मेरा प्यार,

‎या मेरा पश्चाताप।

‎-[डरावना संगीत] ‎-[हंसने की आवाज़]

‎[उदास संगीत]

‎[हंसने की आवाज़]

‎[रानी के हंसने की आवाज़]

‎[रूमानी संगीत]

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[चीखने की आवाज़]

‎[दर्द से कराहने की आवाज़]

‎आह।

‎[कराहने की आवाज़]

‎[दर्द से कराहने की आवाज़]

‎आह।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎बटुआ?

‎धोबी को पैसे देने हैं।

‎अंदर रखा है।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत जारी]

‎पेपर सोप

‎[रानी] सामने एक ऐसा आदमी खड़ा था ‎जिसकी आँखों में खून सवार था।

‎मरते-मरते बची कई बार।

‎[उदास संगीत]

‎पर कहते हैं ना नफ़रत भी उसी से ‎होती है जिससे बहुत प्यार होता है।

‎[डरावना संगीत]

‎बटुआ।

‎[रानी] जब पहली बार रिशू से मिली थी ना

‎तो एक इंजीनियर से मिली।

‎दूसरी बार, अपने पति से।

‎और तीसरी बार, अपने आशिक से।

‎ऐसा आशिक जिससे मैं भी ‎बहुत प्यार करने लगी थी।

‎इतना प्यार कि अब अपनी अक्ल, बुद्धि,

‎यहाँ तक कि जान तक गंवाने को तैयार थी मैं।

‎[रानी] पंडित जी लिखते हैं,

‎"अभी उनकी आँख में खटक रही हूँ तो क्या?

‎कभी तो दिल में धड़कूँगी।"

‎[चीखने की आवाज़]

‎[कराहने की आवाज़]

‎[रानी दर्द से कराहते और रोते हुए]

‎[रोने और कराहने की आवाज़]

‎[डरावना संगीत]

‎तो ये मान लें कि आपको पता था ‎कि आपके पति आपको मारना चाहते हैं।

‎आपने पुलिस से कुछ नहीं कहा।

‎अपने घरवालों को नहीं बताया।

‎मरने के लिए वहाँ पर रुक गईं, हाँ?

‎नहीं कहा, सर।

‎नहीं भागी।

‎जब ग़लती मैंने की है,

‎तो सजा भी तो मुझे ही मिलनी चाहिए।

‎मैडम, आप ख़ुद पागल हैं ‎कि हमें पागल बना रही हैं?

‎सर, पागलपन की हद से ना गुज़रे, ‎वो प्यार ही क्या, सर।

‎[कराहने की आवाज़]

‎[रोमांचक संगीत]

‎[डरावना संगीत]

‎[रानी] पंडित जी अपनी किताब में लिखते हैं,

‎"अमर प्रेम वही है जिस पर खून के ‎हल्के-हल्के से छींटे हों

‎ताकि उसे बुरी नज़र ना लगे।"

‎[भीड़] ज़ोरदार, ज़ोरदार।

‎-क्या बात है। ‎-गज़ब।

‎पहले तो इस कमबख़्त दिनेश पंडित को ‎घसीट कर लाओ थाने में।

‎जी, सर।

‎सीधे-सीधे मुद्दे की बात कीजिए।

‎आप ये आधिकारिक बयान दे रही हैं कि ‎आपके मृत पति आपको मारना चाहते थे।

‎जी।

‎तो फिर, आपने क्या किया?

‎इंतज़ार।

‎किस चीज़ का?

‎क़त्ल करने के मौके का?

‎माफ़ी का।

‎[अफ़ज़र] भाभी जी आ रही हैं, बे।

‎[बोतल रखने की आवाज़]

‎क्या हाल हैं, भाभी?

‎रिशू, खाना बन गया है। लगा दूँ?

‎हाँ।

‎थोड़ा ज़हर भी छिड़क देना उसमें।

‎[उदास संगीत]

‎आओ यार, अफ़ज़र, ‎तुम्हें एक मज़ेदार कहानी सुनाता हूँ।

‎वैसे भी पूरे मोहल्ले ने ‎हमारी पिक्चर देख रखी है।

‎तुम क्यों पीछे रहो? ‎ तुम तो हमारे दोस्त हो, यार।

‎तुम्हारा तो हक़ बनता है।

‎[रिशू] सुनो।

‎रिशू।

‎वो कहानी सुनी है तुमने, ‎वो राजा वाली? जो बाज़ार में जाता है।

‎रिशू, प्लीज़।

‎[अफ़ज़र] कौन से राजा वाली?

‎होता ये है, एक राजा होता है ‎और वो भरे बाज़ार में ना

‎ऐसे इतरा के, अपनी छाती ‎एकदम चौड़ी करके, ऐसे घूम रहा होता है

‎एक बढ़िया सी मखमल की शाल ओढ़े।

‎जब अचानक से एक बच्चा ज़ोर से चिल्लाता है ‎और बोलता है,

‎"अबे, देखो, राजा तो नंगा घूम रहा है।"

‎[हंसने की आवाज़]

‎तब जाके उसे पता चलता है ‎कि वो पूरा बाज़ार नंगा घूम आया।

‎उसका भ्रम था वो।

‎बेचारा मुस्कुराता रहा,

‎पूरा बाज़ार हंसता रहा उसपे।

‎समझे नहीं हम।

‎[रिशू] समझोगे।

‎-हमारी भी जो स्थिति है ना… ‎-[अफ़ज़र] हम्म।

‎…वो बिलकुल उस राजा जैसी है।

‎नंगा हूँ मैं! नंगा हूँ।

‎ये पूरा ज्वालापुर जानता है कि मेरी बीवी ने ‎मुझसे नहीं, मेरे मौसेरे भाई से प्यार किया।

‎[अफ़ज़र] रिशू…

‎क्या प्यार किया है! वाह!

‎क्या बक रहे हो बे!

‎हम बकवास नहीं कर रहे, हम सच बोल रहे हैं।

‎-हम साले शराफ़त दिखाते रहे… ‎-[अफ़ज़र] हम्म।

‎…लेकिन लुटेरे आकर हमारी मोहब्बत को ‎लूटकर चले गए हमारे सामने।

‎[अफ़ज़र] तूने साले ज़्यादा पी ली है। ‎तुम जाकर सो जाओ। खाना खा लो जाके।

‎अरे, खा लेंगे। कहाँ जा रहे हो, भाई?

‎सुबह मिलते हैं।

‎अरे, बैठो।

‎हाँ?

‎अरे, अफ़ज़र। अभी तो बात शुरू हुई है।

‎[रिशू] कमाल है यार!

‎किसी को बात ही नहीं करनी है।

‎[रानी] मुझसे बात करो।

‎सजा तो दे ही रहे हो तुम मुझे।

‎अब लड़ लो, चीख लो, चिल्ला लो ना मुझ पे।

‎क्यों? किसलिए?

‎तो फिर ऐसे मुस्कुराते रहोगे?

‎और किस लायक़ छोड़ा है, रानी जी?

‎[पूर्वाभासी संगीत]

‎मौका दे रही हूँ।

‎दे दो धक्का।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[सिसकने की आवाज़]

‎[कराहने की आवाज़]

‎[डरावना संगीत]

‎कहा था ना, चली जाओ। नहीं रोकूँगा तुम्हें!

‎वरना मार दूँगा तुम्हें मैं!

‎रिशू, जिसको मारना होता है ना, ‎वो मार देता है।

‎मारना है ना? मारो धक्का। मारो धक्का!

‎अभी दो धक्का!

‎नहीं तो जाओ ले आओ चाकू! मारो चाकू।

‎और अगर नहीं हो रहा है ना,

‎तो प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो।

‎प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो। माफ़ करना।

‎मुझसे ग़लती हो गई। माफ़ कर दो मुझे। ‎मुझसे ग़लती हो गई।

‎मुझे माफ़ कर दो।

‎[सुबकने की आवाज़]

‎तुम बहुत अच्छे हो।

‎-तुम बहुत… तुम बहुत अच्छे हो। ‎-[सिसकने की आवाज़]

‎[सुबकने की आवाज़]

‎अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए इतना सा भी ‎प्यार बचा है ना, मेरे लिए वो भी ठीक है।

‎मैं उससे काम चला लूँगी।

‎तुम लायक़ नहीं हो प्यार करने के।

‎नहीं हूँ, बिलकुल नहीं हूँ।

‎पर तुमने किया ना, बहुत सारा किया।

‎[रानी के सुबकने की आवाज़]

‎तुमने इतना प्यार किया, मुझे अपने आप से घिन ‎आ रही है कि तुम्हें छोड़ के नील के पास गई।

‎मुझे माफ़ कर दो। मेरी ग़लती है। ‎मुझे माफ़ कर दो।

‎[रानी] मैंने कहा ना मुझे माफ़ कर दो।

‎[अंग्रेज़ी में] मुझे माफ़ कर दो।

‎[रोने की आवाज़]

‎[सुबकने की आवाज़]

‎[हिंदी में] हमारे जैसे शरीफ़ लोग ना…

‎न दिखाई देते हैं, न सुनाई देते हैं।

‎[रोने की आवाज़]

‎हाँ, बस घर का पंखा कूलर ठीक ‎कराना हो तो बुला लेते हैं।

‎-हीरो नहीं बनता है ना कभी। ‎-[रानी] नहीं।

‎नहीं चाहिए हीरो।

‎मुझे रिशू चाहिए।

‎मुझे सिर्फ़ तुम चाहिए।

‎[सिसकने की आवाज़]

‎दोबारा से शुरू कर सकते हैं, प्लीज़?

‎एक बार, प्लीज़।

‎प्लीज़।

‎[रानी अंग्रेज़ी में] मुझे माफ़ कर दो।

‎[सुबकने की आवाज़]

‎[अंग्रेज़ी में] माफ़ करना।

‎[उदास संगीत]

‎[सुबकने की आवाज़]

‎[रूमानी संगीत]

‎♪ जो बीता है वो कल है ♪

‎♪ ये जो नया पल है ♪

‎♪ आ थाम ले इसे ज़रा ♪

‎♪ धीरे-धीरे ♪

‎♪ संग तेरे ♪

‎♪ दिन ये संभलने लगा ♪

‎♪ जो सपने संभाले अब ♪

‎♪ तेरे हवाले हैं ♪

‎♪ आ देख ले इन्हें ज़रा ♪

‎♪ बंधी सांसें ♪

‎♪ इस तरह से ♪

‎♪ कि मौसम बदलने लगा ♪

‎♪ मिला यूँ ♪

‎♪ जैसे बिछड़ा न तू ♪

‎♪ मिला यूँ ♪

‎♪ खिला यूँ ♪

‎♪ जैसे बिगड़ा न तू ♪

‎♪ खिला यूँ ♪

‎♪ मेरा, तू मेरा ♪

‎मार दिया क्या?

‎फिर पड़ोसी ने आकर घंटी बजाई, देखा…

‎आज क्या बन रहा है खाने में?

‎-हवस। ‎-[रिशू के पापा] हवस?

‎हवस का मटर।

‎-[रिशू के पापा] हवस का मटर? ‎-गाजर-मटर।

‎♪ हो, तेरी खुश्बू लिए ♪

‎♪ अब महका करूँ ♪

‎♪ तेरी आँखों से बातें करूँ ♪

‎♪ तेरी सांसों में धड़कनें ♪

‎♪ अपनी सुनूँ ♪

‎♪ जी उठूँ ♪

‎♪ मेरी लकीरें अब ♪

‎♪ है तेरे हाथों में ♪

‎♪ बन जाऊँ साया तेरा ♪

‎♪ मुस्कुराने ♪

‎♪ का बहाना ♪

‎♪ दे दूँ तुझे नया-नया ♪

‎♪ मिला यूँ ♪

‎♪ जैसे बिछड़ा न तू ♪

‎♪ मिला यूँ ♪

‎♪ खिला यूँ ♪

‎♪ जैसे बिगड़ा न तू ♪

‎♪ खिला यूँ ♪

‎♪ मेरा है, तू मेरा ♪

‎रिशू भैया?

‎[पूर्वाभासी संगीत]

‎माफ़ करना।

‎[लड़की अंग्रेजी में] ‎…बहुत बड़ा वाला, ठीक है?

‎[रिशू] रानी?

‎[ज़ोर लगाने की आवाज़]

‎[लड़की अंग्रेजी में] ‎ये क्या कर रही है? पागल है क्या?

‎[रोमांचक संगीत]

‎[सीटबेल्ट खींचने की आवाज़]

‎[नील हिंदी में] रिशू भैया, जो बैठी हुई थी ‎उसको उतार दिया मैंने।

‎पीछे जगह खाली हो गई है। ‎पूछ लीजिए। बैठेंगी क्या?

‎[रोमांचक संगीत]

‎-इसकी तो मैं… ‎-[रानी] रिशू।

‎[पूर्वाभासी संगीत]

‎प्लीज़ उसे जाने दो, रिशू।

‎नहीं छोडूँगा।

‎[चौंकने की आवाज़]

‎[रिशू बड़बड़ाते हुए]

‎[जोशीला संगीत]

‎[रिशू के गुर्राने की आवाज़]

‎-[रानी] क्या हुआ? ‎-अटक गई है गाड़ी।

‎[आदमी] टाइमिंग बेल्ट टूट गई है। ‎समय लगेगा।

‎[रानी] हाथ धोने हैं। वॉश बेसिन कहाँ है?

‎[आदमी] आगे है। वहाँ धो लीजिए।

‎ठीक है, जल्दी करो।

‎[सांस छोड़ने की आवाज़]

‎दर्द हो रहा है?

‎थोड़ा।

‎पर जब गैस वाली आग से चोट लगी थी ना

‎तब ज़्यादा दर्द हुआ था।

‎गुस्से में था।

‎[आह भरने की आवाज़]

‎माफ़ करना।

‎ऐसा क्रिमिनल ना मैंने पंडित जी की ‎किताब में भी नहीं पढ़ा।

‎चलो शुक्र है।

‎किसी बात पे तो पंडित को पीछे छोड़ा।

‎"तुम अपने दिमाग़ की नहीं सुनती,

‎मैं अपने दिल की नहीं सुनता।"

‎[दोनों साथ में] "सुनता कहाँ है ‎यह शहर कभी किसी की।"

‎[दोनों साथ में] "कसौली का कहर।"

‎[रूमानी संगीत]

‎पंडित जी कबसे पढ़ना शुरू किया तुमने?

‎जबसे प्यार में पड़े हैं।

‎-[रानी] आउच। ‎-[रिशू] माफ़ करना। लगी तो नहीं?

‎[दरवाज़ा ज़ोर से खोलने की आवाज़]

‎[रूमानी संगीत]

‎[रानी] और फिर, फिर ऐसा लगा ‎कि अब सब ठीक हो जाएगा।

‎[तनावपूर्ण संगीत]

‎[ब्रेक लगने की आवाज़]

‎तो धमाके वाले दिन पड़ोसी ने बताया था ना

‎कि नील ढाई बजे अंदर गया था घर के।

‎[बच्चों के खेलने की आवाज़]

‎[किशोर] उसके पंद्रह मिनट के बाद, ‎रिशू गया अंदर।

‎और कुछ समय बाद, ये बाहर आई।

‎सर।

‎रिशू अगर मैडम के बाहर जाने से ‎पहले मर गया था,

‎तो मैडम बाहर आईं ‎और फिर घर पे बच्ची को भेजा

‎कि रिशू भैया को बोलो ‎कि दरवाज़ा अंदर से बंद कर लें।

‎मुन्नी, रिशू भैया को बोल ‎दरवाज़ा बंद कर लें।

‎-रिशू भैया! ‎-[रस्तोगी] पर, सर,

‎मुन्नी ने तो ये बयान दिया है

‎कि नील ने दरवाज़ा बंद किया था।

‎बुलाओ, रिक्शे वाले को बुलाओ।

‎ओ, तीन पहिया, इधर आ! अबे, जल्दी आ!

‎-बोल सर को। ‎-[किशोर] बता।

‎साहब, दोपहर सवा तीन से सवा चार, ‎तो मैडम हमारे साथ थीं।

‎कहाँ पर?

‎बाज़ार लेना।

‎[रिक्शावाला] मैडम हमारे रिक्शे से ‎बाज़ार गईं।

‎हम बाज़ार लेकर गए थे उनको।

‎हम गौर से देखें, ‎मैडम तो मज़े में टहल रही थीं।

‎हमने इंतज़ार किया।

‎फिर हम वापस रिक्शे में बिठाकर गली में लाए।

‎हम देखे, मैडम कुत्तों को बोटियाँ डाली।

‎-और फिर, धड़ाम! ‎-[विस्फ़ोट की आवाज़]

‎साहब, मैडम तो बाहर थीं।

‎क़त्ल कैसे…

‎नहीं कर सकती ना?

‎अरे, मुझे तो तू ही कातिल लग रहा है!

‎टाँग अड़ाने का ज़्यादा शौक है तुझे,

‎बाकी की ज़िंदगी एक टाँग से ‎रिक्शा चलाएगा, समझा!

‎-चल निकल इधर से! ‎-[आदमी] अरे, भाग ले जल्दी!

‎जिसको देखो कहानी सुनाए जा रहा है।

‎गड़बड़ यहाँ है कि, इतने तनाव में अपने पति

‎और प्रेमी को अकेला छोड़ के,

‎-मैडम बाज़ार घूमने क्यों निकलीं? ‎-[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎सर, क़त्ल के हथियार को छुपाने?

‎कहाँ है?

‎कब छुपाया, किधर है?

‎[किशोर] मेरा दिल, दिमाग़ कह रहा है ‎कि ये सब मैडम का ही खेल है।

‎किताबी कविता सुना के घुमा रही है।

‎[फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़]

‎हेलो?

‎हाँ?

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[आदमी] राम-राम, साहब।

‎हाँ, सिंह साहब, दिखाओ। क्या मिला?

‎[सिंह] ये देखिए, सर।

‎सर, स्वच्छ अभियान के वक़्त ही ‎ब्लास्ट हुआ था।

‎तब ये रिकॉर्डिंग किया था।

‎और ये रहा आपका नील।

‎[लोगों की बातचीत की आवाज़]

‎[वीडियो में लोगों की आवाज़]

‎अच्छा।

‎तो ये रहा।

‎[सिंह] सर, रिप्ले देखिए।

‎[इंस्पेक्टर] कब से प्रेमी को ढूंढ रहे हैं,

‎और प्रेमी तो सामने ही डुबकी मार रहा था!

‎जब तुम लोग वीडियो-वीडियो खेल रहे थे,

‎मैडम का प्रेमी भाग रहा था।

‎[किशोर] पुलिस पूछताछ करने की बजाय ‎चश्मदीद गवाह बन गई है इस केस में।

‎कहो, पुलिस को क्या पता लगा ‎पुलिस के वीडियो से?

‎-यही सर… ‎-[कमिश्नर] ये चल क्या रहा है यहाँ?

‎क्या चल रहा है भई यहाँ?

‎सारी पुलिस इस कमरे में ‎भाभी जी के केस पर लगी हुई है।

‎बहुत तगड़ी लीड मिल गई है। ‎अब बचेगा नहीं, सर, पकड़ लेंगे।

‎दो महीने तुमने पहले उस ‎नील के चक्कर में लगवा दिए।

‎-सर, अब केस सुलझाने में… ‎-सुलझाया क्या?

‎-सर, वो… ‎-ऑनर किलिंग का केस आया है।

‎मीडिया सारा तैयार खड़ा है।

‎छोड़िए भाभी जी का केस। लगिए सब उस पे।

‎सर, प्लीज़ आप दो दिन दे दो बस।

‎कोर्ट ऑर्डर आ गया है, सर वो…

‎दो दिन में लाई डिटेक्टर करेंगे, ‎सब साफ़ हो जाएगा।

‎और दो दिन में नहीं किया ना ‎तो तुम भी भाभी जी के साथ निकल लेना।

‎[आदमी] बेवकूफ़।

‎ये भाभी कहाँ है?

‎मैडम कहाँ है? बुलाओ उसको!

‎ये देखो, मैडम।

‎नील जी की झलक।

‎ढाई बजे नील जी गली में आए।

‎फिर रिशू घर के अंदर गया।

‎फिर आप बाहर आईं।

‎फिर धमाका हुआ।

‎और फिर नील जी तैरने के लिए ‎निकल पड़े, धमाके के ठीक बाद।

‎[तनावपूर्ण संगीत]

‎नील कहाँ है, मैडम?

‎पता नहीं, सर।

‎[हरयाणवी में] साली, रांड!

‎कहानी सुना-सुना के हमारे कान पका दिए।

‎चल, सीधी तरह बता क़त्ल का हथियार कहाँ है,

‎-नहीं तो एक पड़ेगा। ‎-[किशोर] बिंदिया।

‎[हिंदी में] ठीक से याद नहीं आएगा यहाँ पे।

‎इसको अंदर ले जा और अच्छे से याद दिला।

‎[बिंदिया हरियाणवी में] ‎क्या कह रही थी, हाँ?

‎प्यार पागलपन है।

‎चल, तुझे मैं दिखाती हूँ। ला दे।

‎-क्या होता है पागलपन। हाँ? ‎-[पीटने की आवाज़]

‎-[रानी के चिल्लाने की आवाज़] ‎-[बिंदिया] हैं?

‎[रानी] आह!

‎[बिंदिया हरियाणवी में] ‎और क्या कहता है तेरा पंडित, हाँ?

‎-बता! ‎-[पीटने की आवाज़]

‎[बिंदिया हरियाणवी में] ‎बता पंडित क्या कहता है?

‎[रानी के कराहने की आवाज़]

‎[हरियाणवी में] सर जी। बहुत ही ढीठ है।

‎बहुत मारा, पर कुछ ना बोला साली ने।

‎[हिंदी में] वो तकनीशियन से पूछो ‎लाई डिटेक्टर टेस्ट कल कर सकता है क्या।

‎-जी, सर जी। ‎-और सुनो।

‎[बिंदिया] हाँ जी?

‎मैडम को छोड़ दो।

‎[बिंदिया हरियाणवी में] ठीक है।

‎[बिंदिया] ए! रानी, चल। उठ।

‎[उदास संगीत]

‎[कराहने की आवाज़]

‎[दर्द में आह भरते हुए]

‎मैडम?

‎इतनी देर नहीं होनी चाहिए।

‎बेटा, कल एक बार डॉक्टर के यहाँ हो आएंगे।

‎कल दोबारा थाने बुलाया है मुझे।

‎[किशोर] मिश्रा, सब बराबर है ना?

‎[मिश्रा] बिलकुल सही रिकॉर्डिंग आ रही है।

‎-कहीं ग़लती की कोई संभावना नहीं है। ‎-[मशीन की बीप की आवाज़]

‎[किशोर] आइए।

‎हर हरकत पकड़ लेती है ये।

‎-पसीना छूटना, होंठ का हिलना, आंख में पानी। ‎-[मशीन की बीप की आवाज़]

‎[किशोर] सब नोट होता है।

‎और दिल की धड़कन तो मशीन पकड़ ही रही है।

‎-शुरू करें, मिश्रा? ‎-[मिश्रा] बिलकुल।

‎सर, बाथरूम?

‎[रोमांचक संगीत]

‎[बिंदिया हरयाणवी में] जल्दी कर।

‎कितनी देर लगाएगी?

‎जल्दी निकल बाहर!

‎रानी!

‎क्या कर रही है?

‎जल्दी कर!

‎[बिंदिया हरयाणवी में] अंदर ही बैठकर मरेगी?

‎ज़्यादा होशियारी ना दिखा…

‎रानी, मैं दरवाज़ा खोल के अंदर आ जाऊँगी!

‎[हिंदी में] आपका नाम रानी कश्यप है।

‎[बिंदिया] रानी! जल्दी निकल बाहर। निकल ना!

‎हाँ, मेरा नाम रानी कश्यप है।

‎[मिश्रा] आपका नाम रानी कश्यप है?

‎-हाँ, मेरा नाम रानी कश्यप है। ‎-[तनावपूर्ण संगीत]

‎आपकी उम्र अट्ठाईस साल है?

‎जी।

‎[मशीन की बीप की आवाज़]

‎आप नर्वस हैं, मैडम?

‎आपके दिल की धड़कन पहले से ही तेज़ है।

‎जी, नर्वस हूँ।

‎[मिश्रा] गहरी सांसें लीजिए, मैडम।

‎[मशीन की बीप की आवाज़ जारी]

‎उस दिन 30 नबंवर को क्या हुआ था?

‎सर, उस दिन रिशू के मम्मी-पापा ‎बरेली गए थे एक रिश्तेदार की शादी के लिए।

‎तुम गैस का ध्यान रखना, बंद करना भूलना मत, ‎पता चला जब तक हम आए पूरा घर उड़ा दिया।

‎-बाय। ‎-ध्यान से, हाँ।

‎बाय। ख़याल रखना सबका।

‎[रानी] और हमने घर पर ‎रिशू के दोस्तों के लिए दावत रखी थी।

‎तुम्हारे तो दोस्त आ रहे हैं ना घर पर आज?

‎मैंने रिशू को बोला था कि ऑफ़िस से ‎आते वक़्त, कुछ सामान ले आए।

‎रान तो मैं ले आई हूँ, इलायची, ‎हल्दी, ये सब लेते…

‎हाँ, जो कुछ भी है, मुझे लिस्ट भेज दो।

‎-[रानी] पर उस दिन रिशू जल्दी लौट आया। ‎-लो भई, आ गया…

‎[रानी] और उसने मुझे ‎और नील को बात करते हुए देखा।

‎रिशू, ये…

‎[नील] आइए, आइए, रिशू भैया, आइए।

‎तुम इनको बताती क्यों नहीं हो ‎कि इनको छोड़कर मेरे साथ जाने वाली हो?

‎झूठ बोलना बंद करो!

‎रिशू, इसने कहा कुछ ‎बात करनी है इसलिए आया यहाँ।

‎रानी, तुम बाहर जाओ। ‎हम दोनों आपस में निपटा लेंगे।

‎[रानी] रिशू को मैंने ‎काफ़ी समझाने की कोशिश की।

‎रानी, जाओ। हम सिर्फ़ बात ‎कर रहे हैं। और कुछ नहीं।

‎[रानी] लेकिन वो नहीं माना।

‎ज़िद करने लगा।

‎फिर मैं उन दोनों को छोड़ के बाज़ार से ‎सामान लेने निकल गई।

‎रिक्शा!

‎घर से निकलते हुए दरवाज़ा खुला रह गया था।

‎रिशू भैया को बोल दरवाज़ा बंद कर देंगे।

‎[मुन्नी] रिशू भैया! दरवाज़ा बंद कर दो।

‎[रानी] फिर मुझे रुहिना दिखी।

‎खीर बनाऊँगी शाम को। आपके घर भिजवाती हूँ।

‎-[रुहिना] अरे वाह। ‎-[रानी] बस उसके बाद मैं रिक्शे में बैठ गई।

‎जिस कसाई से रान लिया था, ‎उससे मेरी बहस हो गई थी।

‎आपके चाकू में ज़ंग लगा है।

‎आँख में कंकर हो सकती है ‎पर हमारी छुरी में ज़ंग नहीं।

‎आप ये मुझे दे दीजिए, ‎मैं कहीं और से कटवा लूँगी।

‎तो फिर मैं दूसरे कसाई के पास गई,

‎रान लेके, उससे कटवाया, घर की तरफ़ निकल गई।

‎गली में कुत्ते थे, ‎मैंने उन्हें बोटियाँ खिलाई।

‎-[धमाके की आवाज़] ‎-[कुत्ते भौंकते हुए]

‎[खांसने की आवाज़]

‎[रानी] रिशू!

‎रिशू!

‎रिशू!

‎[मशीन की बीप की आवाज़]

‎[मिश्रा] दरअसल, सामान्य सवालों में भी ‎दिल की धड़कन बढ़ी हुई है।

‎जो कि सही है।

‎और बाकी के जवाब में भी वही लय है।

‎इसलिए कुछ पता नहीं चल रहा है।

‎अब? क्या, करना क्या है?

‎एक तरीका हो सकता है।

‎मैं उससे अब वो सवाल पूछूँगा ‎जिसके जवाब सिर्फ़ हाँ या ना होंगे।

‎हाँ।

‎मैडम हमेशा यही जूते पहनती है क्या?

‎क्यों?

‎-मिला। चलो चलें। ‎-[इंस्पेक्टर] हाँ?

‎[बिंदिया हरयाणवी में] ‎ज़रा जूता निकालिए, मैडम।

‎[रानी के कराहने की आवाज़]

‎[बिंदिया हरयाणवी में] यह देखिए, सर जी।

‎कील गाड़ रखी है मैडम ने।

‎[हिंदी में] कील से दर्द होता है।

‎और दर्द से धड़कन तेज़।

‎और अब मैडम बोलेंगी कि इनको पता ‎नहीं था कि जूते में कील गड़ी हुई है।

‎मिश्रा, दबोच ले अभी।

‎[मशीन की बीप की आवाज़]

‎[मिश्रा] क्या आपका नाम रानी कश्यप है?

‎जी।

‎क्या आपकी उम्र 28 साल है?

‎जी।

‎क्या आपने अपने पति का क़त्ल किया है?

‎नहीं।

‎क्या आपके नील त्रिपाठी के साथ संबंध थे?

‎जी।

‎क्या आपके प्रेमी ने ‎आपके पति का क़त्ल किया?

‎[तनावपूर्ण संगीत]

‎पता नहीं।

‎[प्रिंटिंग की आवाज़]

‎क्या आपने अपने पति का क़त्ल किया है?

‎जी नहीं।

‎[प्रिंटिंग की आवाज़]

‎[किशोर] सर, मुझको पता है ‎क़त्ल इसी ने किया है।

‎इसको पता है प्रेमी कहाँ है, बस मशीन में…

‎बकवास मत करो।

‎भाभी जी का किस्सा ख़त्म। ‎ऑनर किलिंग वाला केस फौरन शुरू करो।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[खुशनुमा संगीत]

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[खुशनुमा संगीत]

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[किशोर] मैडम चली गई, ‎केस फ़ाइल भी बंद हो गई।

‎पर मेरे लिए ये केस हमेशा ओपन रहेगा।

‎थाने में सब कहते रहे कि इस केस को ‎मैंने अपने दिल पे ले लिया है।

‎पाँच साल बाद

‎[किशोर] और इस बहस में पाँच साल निकल गए ‎और मेरा ट्रांसफ़र हो गया।

‎पुलिस

‎-सब ले लिया ना? ‎-हाँ।

‎[रेलवे उद्घोषक की आवाज़]

‎सामान रखवा दिए हैं, सर।

‎नई पोस्टिंग के लिए शुभकामनाएं।

‎बहुत याद आएगी, सर आपकी।

‎-अच्छा। ‎-शुक्रिया, सर।

‎-कितना हुआ? ‎-अरे, हमें भी खिलाओ।

‎देखो, अंकल क्या कह रहे हैं।

‎[आदमी] अरे, हमको भी खिलाओ।

‎[किशोर की बीवी] और मेरा क्या?

‎सर, आपने दिनेश पंडित की कोई किताब पढ़ी है?

‎[रानी] पंडित जी अपनी किताब में लिखते हैं,

‎"अमर प्रेम वही है जिस पर ‎खून के हल्के-हल्के से छींटें हों!"

‎[रहस्यमय संगीत]

‎[किशोर] एक बार फिर ‎सावित्री ने भैरव का दिल जीत लिया था।

‎पर भैरव को मालूम नहीं था ‎कि अपना प्यार पाने से पहले

‎उसका आख़िरी इम्तिहान अभी बाकी था।

‎[नोटिफिकेशन आने की आवाज़]

‎[रानी] इलायची, लौंग, किशमिश, ‎बादाम, और… रिशू।

‎[रिशू] लोगों की नज़र से देखो ‎तो रानी एक लंबी बहस है।

‎जिसमें मेरे लिए इल्ज़ाम है, अपमान है।

‎पर मुझे ये बहस करनी है, ज़िंदगी भर।

‎और सच कहूँ, तो ज़िंदगी की हर वो बहस ‎अब उसी के साथ करनी है।

‎मुन्नी, हटो, हटो।

‎क्योंकि मैंने उसके साथ जो किया बहुत ‎ग़लत किया, लेकिन फिर भी वो मेरे साथ रही।

‎और आज…

‎[रिशू] लो भई, आ गए काजू-किशमिश।

‎[रिशू] आज मैं रानी के लिए ‎कुछ भी कर सकता हूँ।

‎[नील] आइए, आइए, रिशू भैया, आइए।

‎आप ही की बात चल रही थी। ले आए। ‎बादाम-किशमिश ले आए।

‎नील, यहाँ से निकल जाओ।

‎बता दो ना इनको।

‎कि इनको छोड़कर मेरे साथ ‎आने वाली हो। बता दो ना।

‎झूठ बोल रहे हो तुम!

‎[नील] मैं झूठ बोल रहा हूँ?

‎रिशू, ये हमें परेशान करने यहाँ पर आया है। ‎और कुछ काम नहीं है इसका यहाँ।

‎मैं परेशान करने आया हूँ?

‎परेशान ये भाईसाहब जो खड़े हैं ‎इन्होंने मुझे कर रखा है।

‎[नील] बताते क्यों नहीं हो आप ‎इनको अपनी हरकतें, रिशू भैया?

‎दिल्ली आए थे ये। नोयडा मेरे पीछे ‎पेचकस लेकर भागे हैं।

‎और अब इन्होंने मेरी सोसायटी में ‎चिट्ठी लिख दी कि मैं सेक्स अपराधी हूँ।

‎मैं सेक्स अपराधी हूँ?

‎बीवी अगर आपसे ‎बिस्तर में खुश नहीं रखी जाती

‎तो शादी क्यों करते हो, यार आप लोग?

‎हम जैसे लोग फंस जाते हैं ‎और फिर बुलाया जाता है हमको सेक्स अपराधी।

‎सुनिए, मैं इसीलिए यहाँ पे आया हूँ।

‎हम में से कोई अपराधी नहीं है।

‎[नील] सबकुछ मर्ज़ी से हुआ था। ‎कोई ज़ोर-जबरदस्ती नहीं थी।

‎सामने खड़ी हैं, पूछ लो।

‎बहुत अच्छे से हुआ।

‎याद भी आती होगी इनको हमारी।

‎हाँ, करती हूँ याद। ‎बहुत बड़ी ग़लती थी तुम मेरी।

‎ऐसे याद करती हूँ तुम्हें मैं!

‎मैं ग़लती हूँ?

‎तो फिर इनको छोड़कर मेरे पास क्यों आई?

‎क्योंकि सच्चा प्यार पाने के लिए ना ‎बहुत सारे मेढकों को मुँह लगाना पड़ता है।

‎और तुम ना उसी कैटेगरी के हो।

‎मेंढक?

‎ये मेंढक तो आपका ‎बहुत बड़ा फ़ैन है, रानी जी।

‎और आपका फ़ैन बेस अब मैं बढ़ाता हूँ।

‎तो मैंने ना प्यार में ना ‎आपके कुछ वीडियोज़ लिए थे, आपको तो याद है?

‎अब उनको मैं अपने ग्रुप में डालूँगा। ‎शेयर करूँगा।

‎[नील] आपके फ़ैन बढ़ जाएंगे।

‎और रिशू भैया, बहुत सारे पेचकस ऑर्डर कर दो।

‎क्योंकि भागना पड़ेगा कई लोगों के पीछे, ‎जो-जो ये देखेगा।

‎ठीक दिख रहा है? अच्छी लग रही हैं आप।

‎याद आया? तब तो बड़े मज़े आ रहे थे?

‎-[रिशू गुर्राते हुए] ‎-[रोमांचक संगीत]

‎[रानी] आह!

‎[बर्तन दीवार से टकराने की आवाज़]

‎[लकड़ी और कांच टूटने की आवाज़]

‎-रिशू! ‎-हटो!

‎-[ज़ोर लगाने की आवाज़] ‎-[कराहने की आवाज़]

‎पागल हो तुम, पता है तुम्हें?

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[चिल्लाने की आवाज़]

‎[नील] उठ!

‎हाँ?

‎दिमाग़ ख़राब हो गया है तुम्हारा!

‎[ज़ोर लगाने की आवाज़]

‎[कराहने की आवाज़]

‎[हाँफने की आवाज़]

‎रिशू…

‎-[रानी] उठो। ‎-[रिशू के खांसने की आवाज़]

‎खून।

‎[गंभीर संगीत]

‎[रिशू] नील?

‎नील…

‎नील?

‎नील!

‎नील!

‎[रानी के रोने की आवाज़]

‎[रानी के सुबकने की आवाज़]

‎मैं पुलिस को बुलाती हूँ।

‎-मैं पुलिस को बुलाती हूँ। ‎-क्या?

‎मर गया है।

‎-मर गया है। ‎-नहीं, पुलिस को नहीं बुलाओगी।

‎-[रानी] मैंने मार दिया। ‎-नहीं, तुमने इसे नहीं मारा, रानी।

‎मैंने मार दिया, रिशू।

‎ये दुर्घटना थी। ये ग़लती से मरा है।

‎हमने नहीं मारा इसको जानबूझकर।

‎और इसके लिए जेल नहीं जाओगी तुम।

‎इसके लिए नहीं जाओगी तुम जेल। इसके लिए ‎जेल नहीं जाओगी। सुनो, मेरी बात सुनो।

‎इतना सबकुछ होने के बाद अब ‎चीज़ें ठीक हुई है हम दोनों के बीच।

‎मैं तुमसे दूर नहीं रहूँगा एक मिनट।

‎[रहस्यपूर्ण संगीत]

‎[हाँफने की आवाज़]

‎अब?

‎अब क्या करें?

‎क्या करना है?

‎"हर अचानक किए अपराध में एक मौका ‎मिलता है अपराध छिपाने का।"

‎[रिशू] मैंने पंडित की सिर्फ़ ‎एक ही किताब पढ़ी है।

‎"कसौली का कहर"।

‎-[रानी] नहीं। ‎-हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है।

‎नहीं, रिशू, ये पागलपन है।

‎हमारे पास और कोई चारा नहीं, रानी।

‎कुछ नहीं होगा। कोई नहीं पकड़ा जाएगा।

‎मेरी बात सुनो।

‎[रिशू] कुछ नहीं होगा। नहीं।

‎अब अलग नहीं रहना है।

‎मैं जो कह रहा हूँ वो करती जाओ।

‎प्लीज़।

‎[सनसनीख़ेज़ संगीत]

‎हम पकड़े जाएंगे।

‎बर्फ, बर्फ़!

‎बर्फ़!

‎थोड़ी बर्फ़ लेकर आओ, जाओ!

‎[रानी] बर्फ़… बर्फ़ कहाँ है?

‎रानी!

‎[रिशू] रानी!

‎[सनसनीख़ेज़ संगीत जारी]

‎जाओ जाकर केरोसीन लाओ। जाओ!

‎[रिशू] अख़बार। अख़बार लाओ!

‎लाओ मुझे दो।

‎[काग़ज़ की सरसराहट]

‎-[चिल्लाने की आवाज़] ‎-[कटने की आवाज़]

‎[उदास संगीत]

‎[रानी] नहीं।

‎[अस्पष्ट बात]

‎रानी, उठाओ इसे।

‎क्या कर रही हो, रानी?

‎-प्लीज़। ‎-नहीं, नहीं।

‎अलग रहना है मुझसे? नहीं ना?

‎[सिसकने की आवाज़]

‎तो तुम्हें यह करना पड़ेगा। हमारे लिए।

‎प्लीज़, रानी। ठीक है?

‎आओ।

‎[रिशू] पकड़ो इसे!

‎रानी! बस कर डालो!

‎[अस्पष्ट बात]

‎नहीं!

‎[भावुक संगीत]

‎नहीं!

‎[कटने की आवाज़]

‎[रिशू के कराहने की आवाज़]

‎रिशू! रिशू!

‎आँखें खोलो! आँखें खोलो!

‎आँखें खोलो, रिशू!

‎रिशू।

‎[उदास संगीत]

‎♪ ओ, तेरे आँसू से छलका है दर्द मेरा ♪

‎♪ तेरी खुशियाँ हैं कर्ज़ मेरा ♪

‎♪ मेरे खून का हर कतरा-कतरा ♪

‎♪ कह रहा ♪

‎♪ हम ही कहानी हैं ♪

‎♪ हम ही निशानी हैं ♪

‎♪ हम ही हमारे हैं यहाँ ♪

‎♪ छूटा ग़म है ♪

‎♪ ख़ुशी नम है ♪

‎♪ हम ही किनारे हैं यहाँ ♪

‎♪ मिला यूँ ♪

‎♪ जैसे बिछड़ा न तू ♪

‎♪ मिला यूँ ♪

‎♪ खिला यूँ ♪

‎♪ जैसे बिगड़ा न तू ♪

‎♪ खिला यूँ ♪

‎♪ मेरा है, तू मेरा ♪

‎-[दरवाज़ा खोलने की आवाज़] ‎-[बच्चों के खेलने की आवाज़]

‎[तनावपूर्ण संगीत]

‎रिक्शा! रिक्शा!

‎[बच्चों के खेलने की आवाज़]

‎[रानी] मुन्नी, रिशू भैया को बोल ‎दरवाज़ा बंद कर दें।

‎[मुन्नी] रिशू भैया! रिशू भैया! ‎दरवाज़ा बंद कर दो!

‎[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]

‎[बच्चों की आवाज़]

‎खीर बनाऊँगी शाम को। आपके घर भिजवाती हूँ।

‎[बच्चों के खेलने की आवाज़]

‎अच्छा, यहाँ मत खेलो।

‎चलो, यहाँ से हटो।

‎[सनसनीख़ेज़ संगीत]

‎[छुरा तेज़ करने की आवाज़]

‎[रानी] एक मिनट।

‎आप ये रहने दीजिए, ‎मैं कहीं और से कटवा लूँगी।

‎एक और है।

‎ये भी काट देंगे, प्लीज़?

‎[स्विच चालू करने की आवाज़]

‎[रिक्शे की घंटी की आवाज़]

‎[सनसनीख़ेज़ संगीत]

‎[रिशू के चीखने की आवाज़]

‎[सनसनीख़ेज़ संगीत जारी]

‎-[धमाके की आवाज़] ‎-[कुत्तों भौंकते हुए]

‎-[कराहने की आवाज़] ‎-[पानी में गिरने की आवाज़]

‎रिशू।

‎[कुत्तों के भौकने की आवाज़]

‎[उदास संगीत]

‎[रिशू के हाँफने की आवाज़]

‎[रिशू के आह भरने की आवाज़]

‎[रानी के खांसने की आवाज़]

‎[रिशू के हाँफने की आवाज़]

‎[किशोर] "और भैरव हमेशा के लिए ‎अपने प्यार और बलिदान की कहानी लेकर

‎नदी में समा गया।"

‎[ट्रेन के चलने की आवाज़]

‎[हँसने की आवाज़]

‎[किशोर की बीवी] क्या हुआ? ‎क्यों हंस रहे हो?

‎प्रेमी की लाश को अपनी लाश बनाकर ‎केस घुमा दिया।

‎[किशोर] प्रेमी तो फरार ही रहेगा।

‎उसकी लाश मिलेगी नहीं।

‎अपना हाथ काट के लाश पर रख दिया,

‎अपनी बीवी को बचाने के लिए।

‎आजकल कौन पागल प्यार में ऐसा करता है?

‎आप तो हमारे लिए एक नाखून भी ना कटवाओ।

‎[रूमानी संगीत]

‎[जोशीला संगीत]

‎[किशोर] "पागलपन की हद से ‎ना गुज़रे तो वो प्यार कैसा,

‎होश में तो रिश्ते निभाए जाते हैं।"

‎संवाद अनुवादक: अनुराधा पिल्लई

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