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मेरे पूज्य पिताजी श्री लीलाराम राय सिंघानी को समर्पित
जन्म- 6 अगस्त 1931 मृत्यु - 11 जुलाई 2009
विशेष धन्यावाद
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ज्वालापुर
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
[धमाके की आवाज़]
[पुलिसेवालों की अस्पष्ट बातें]
[धीरे से] रिशू।
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
रिशू।
[खाँसते हुए]
रिशू!
रिशू!
[सिसकते हुए] रिशू!
[उदास संगीत]
[आदमी 1] नाम, ऋषभ सक्सेना।
उम्र, बत्तीस साल।
ब्लास्ट का समय, चार से साढ़े चार।
[आदमी 2] सब जल गया है।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[लाठी की खट-खट की आवाज़]
[आदमी 2] सर पर भारी चोट है। लगता है ब्लास्ट के पहले किसी ने मारा है।
अरे, बाप रे!
-हम्म, देखो। पता लगाओ कब हुआ था। -[आदमी] हाँ, सर।
सर, फिंगरप्रिंट्स, एक हाथ के मिल गए हैं।
बाकी शरीर पूरी तरह से जला हुआ है।
-सर पर गहरी चोट है। -हाँ, सर।
पूरा शरीर जल गया है। सिर्फ़ यह हाथ मिला है।
सर पर भारी चोट का निशान है।
ऐसा लगता है मौत ब्लास्ट के पहले हुई।
हाथ में रानी लिखा है।
उसकी पत्नी है, वो वहाँ बैठी है।
यह दुर्घटना तो नहीं है, सर।
बस एक बार हथियार मिल जाए, सब पता चल जाएगा।
किशोर रावत
[रहस्यपूर्ण संगीत]
छह महीने पहले
-[ट्रेन चलने की आवाज़] -मुँह सूजाना बंद करो।
शगुन के काम से जा रहे हैं!
दो साल पहले भी गए थे।
याद है?
-वही तो। -[टीटी] टिकट दिखाइए।
दो साल हो गए हैं!
दो मिनट की मुलाकात में तुम मीरा को आज तक नहीं भूले।
और बताइए, क्या अच्छा लगता है आपको?
महेश।
मुझे महेश बहुत पसंद है।
असल में, हम ना कॉलेज में साथ में पढ़े हुए हैं।
[मीरा] बस अभी तक पापा को बताने की हिम्मत नहीं हुई।
[हास्यपूर्ण संगीत]
[लड़के की माँ] पहली बार लड़की देखने गए, कोई प्यार में पड़ता है क्या?
तब से देवदास ही बन गए हो।
और यहाँ इतने अच्छे रिश्ते आ रहे हैं।
जन्मपत्री मिल गई, गुण मिल गए।
नाम भी कितना प्यारा है।
रानी कश्यप।
रिशू-रानी, नाम का तो तुम्हारा अच्छा जोड़ा बैठ गया है।
पता है, लड़की सुंदर है, सुशील है,
शाकाहारी है, गोरी भी है।
[लड़के की माँ] हिंदी साहित्य में एम. ए. किया है लड़की ने।
अरे, अब बस करो, मम्मी। अंदर जाके मिल लेंगे हम।
और बाथरूम जाने के बहाने पूरे घर का मुआयना मत कर आना आप, पिछली बार की तरह।
[रिशू] आइए।
[मधुर संगीत]
[रानी की माँ] खाइए ना। ये सारे पकवान रानी ने अपने हाथों से बनाए हैं।
-[रिशू की माँ] सारे? -[रानी की माँ] जी, सारे।
-ये कचौरी भी रानी ने बनाई है? -[रानी की माँ] हाँ जी।
वो आपके पीछे जो कशीदाकारी है सोफ़े पर वो भी हमारी रानी ने ही की है।
[औरत] पसंद है?
इंजीनियर है, ज्वालापुर इलेक्ट्रसिटी बोर्ड में।
देखेंगे।
अब ज्वालापुर कौन जाएगा।
[जीभ चटकाते हुए] ये सब मत सोच।
तेरा वो पाँच साल वाला बॉयफ्रेंड, क्या था वो, पंखे वाला नाम था न उसका…
वो… [जीभ चटकाते हुए]
नीरज खेतान। वो तो हवा देके निकल गया अमरीका।
और तेरा वो दो साल वाला बॉयफ्रेंड…
मासी… मेरे बॉयफ्रेंड थे न। पता है मुझे। याद है।
[रानी की मौसी] तो अब बस ये रंगीन किताबी रोमांस नहीं,
सीधा सा लड़का पकड़ ले।
तेरी उम्र भी तो हो गई है।
और ऊपर से इतनी भारी मांगलिक वाली कुंडली है न तेरी,
कि भाईसाहब दो साल में सिर्फ़ दो रिश्ते ढूंढ पाए।
और देख, देख तेरा दूसरा ऑप्शन।
-ये मुंबई वाला। -[हास्यपूर्ण संगीत]
इससे मैच हुई है तेरी कुंडली।
और ये… ज्वालापुर।
ज्वालापुर?
हाँ, तो?
भाईसाहब भी इनकी तरह कम ही बोलते हैं।
रानी ने रिशू को अंदर बुलाया है, किचन में।
[हास्यपूर्ण संगीत]
आइए।
अब ये मत पूछ लेना और क्या अच्छा लगता है।
आइए ना।
-हेलो। -हेलो।
तो, मैं सोच रही हूँ संक्षेप में मैं ही बता देती हूँ।
मैंने साहित्य पढ़ रखा है।
टाइम पास के लिए एक सैलून में मैनेजर का काम करती हूँ।
और घर का काम करना न, मुझे बिलकुल पसंद नहीं है।
-[मधुर रूमानी संगीत] -बाकी, सुशील तो मैं हूँ ही
और घरेलू भी हूँ।
वैसे न आपको बहुत अच्छा कॉम्बो मिल रहा है, तन-मन का धन।
[ठसका लगने की आवाज़]
हमारी तो बस दो माँगें हैं। एक लड़की घरेलू हो और सीधी हो।
फिर तो राम-सीता सी जोड़ी है।
अह, आपने दिनेश पंडित की कोई किताब पढ़ी है?
सबसे बेहतरीन क्राइम उपन्यासकार हैं!
क्या लिखते हैं! छोटे-छोटे शहरों में ना बड़े-बड़े कत्ल करा देते हैं,
पता ही नहीं चलता।
सुना है आपने उनके बारे में?
जी, नहीं।
अभी सुन रहा हूँ, आपसे।
-[मधुर रूमानी संगीत] -आप, आज ही मुझसे बात करेंगे
कि फिर कभी आएंगे दिल्ली बात करने?
नहीं, वो, दरअसल…
[रानी] अच्छा छोड़िए, आप बताइए, आपके क्या शौक हैं।
-शौक क्या ही हैं कि… -क्या हैं?
[हकलाते हुए] जी, मैं बता रहा हूँ।
जी…
छुट्टी के दिन बस पड़ोसी घेर लेते हैं,
कहते हैं, कभी फ्रिज ठीक करके दे दो तो कभी पंखा।
इलेक्ट्रॉनिक्स का शौक है। इंजीनियर हूँ, बताया होगा आपको।
अरे वाह। ये तो बड़ी सही टाइमिंग हो गई!
-शुक्रिया। -लगे हाथ हॉबी टेस्ट कर लेते हैं।
ये ख़राब पड़ा है कितने टाइम से।
ये ठीक कर दो।
अभी?
[हास्यपूर्ण संगीत]
इसमें से क्या चाहिए?
[बर्तन गिरने की आवाज़]
बीना जी, टॉयलेट कहाँ है?
आइए।
सीधा जाइए और बाएं।
नहीं, नहीं…
[हास्यपूर्ण संगीत]
टॉयलेट ढूंढ रही थी।
हमारे गुरूजी से पूछकर मैं आपको बताती हूँ।
हाँ?
[चिड़ियाँ चहचहाते हुए]
सुनो, कह रहे हैं।
अगर तुमने इस लड़की से शादी की ज़िद नहीं छोड़ी तो मैं यह फ़िनाइल पी लूँगी।
मम्मी, हमको रानी कश्यप पसंद है।
ठीक है।
[हास्यपूर्ण संगीत]
[हास्यपूर्ण संगीत जारी]
फिर मैं, यहाँ से लटक जाती हूँ। हमारी अस्थियाँ बहा देना।
और ले आना अपनी प्यारी रानी को।
मैं कूद जाऊँगी यहाँ से।
अरे?
हिल भी नहीं रहे!
कन्फ्यूज़ कर दिया। कभी ज़हर,
कभी बन्नी, कभी लटकना।
तय करके बोलो न, प्लीज़।
-[हास्यपूर्ण संगीत] -बोल रहे हैं। नहीं पटेगी तुम्हारी।
नहीं संभलेगी तुमसे।
मम्मी, इंजीनियर हैं हम।
[रिशू] रोज़ सौ-सौ वॉल्ट के बिजली के तारों को संभालते हैं इन हाथों से।
वो नहीं संभलेगी क्या हमसे?
-[अफ़ज़र] एक बात बताएं, अंकल। -[पापा] हाँ?
-ट्रेनिंग लगती है। -अच्छा?
शुरू के दस दिन में ट्रेन हो जाएंगी भाभी। और ये तो बबली सी है।
[रिशू की माँ] बेटा, शुरू-शुरू में सभी बबली लगती हैं।
-[पापा] मुझे भी ऐसी ही लगी थी, जब आई थी। -[हँसने की आवाज़]
-मुझे भी आप बबल लगे थे पूरा, फट गया! -[हास्यपूर्ण संगीत]
♪ आने-जाने वाले सारे तकने लगे ♪
♪ नाम तेरा नींद में हम बकने लगे ♪
♪ मन में फरेरो रोशर फूट गया जी ♪
♪ अरमानों के जुगनू भड़कने लगे ♪
♪ हाय भड़कने लगे ♪
♪ नयन मिले ♪
♪ तो फ़ायर जले ♪
♪ ऐसी फ़ायर जले ♪
♪ दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪
♪ हो नयन मिले ♪
♪ तो फ़ायर जले ♪
♪ ऐसी फ़ायर जले ♪
♪ दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪
टोटा मिल गया उस औसत इंसान को!
उसकी शामत आने वाली है ज्वालापुर में!
♪ कन्फ्यूज़न ♪
♪ थोड़ा सा ये नॉटी है थोड़ा सा भोला ♪
♪ हो, मुंडा थोड़ा सा भोला ला ला ला ♪
♪ थोड़ा सा तो मेरा भी तन-मन है डोला ♪
♪ हो, डोला तन-मन है डोला आ-आ-आ ♪
♪ वैसे दिल पे लगी है आके चोट ये कहीं ♪
♪ पर हूँ कन्फ़्यूज है ये बंदा हॉट या नहीं ♪
♪ हॉट या नहीं ♪
♪ इधर चले कभी उधर चले ♪
♪ ख़ुद से ही लड़ ले ♪
♪ छन-छन दिल बजता ♪
♪ है बंदी सीधी ♪
♪ है बंदा टेढ़ा ♪
♪ क्या रूप है तेरा ♪
♪ ओ हो हो ♪
♪ है बंदा भोला ♪
♪ और बंदी शातिर ♪
♪ इस बात की ख़ातिर ♪
♪ ना, ना, ना ♪
♪ नयन मिले तो फ़ायर जले ♪
♪ ऐसी फ़ायर जले ♪
♪ दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪
रिशू संग रानी
♪ हो दिल मेल्ट-मेल्ट करता ♪
♪ ओ, लाइट किसने बुझा दी? ♪
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[आदमी] रानी जी।
साहब… साहब आ रहे हैं, बस पाँच मिनट।
[टिफ़िन गिरने की आवाज़]
[आदमी] सर, टिफ़िन गिर गया।
रिशू भैया का केस मेरा सबसे मनपसंद केस है, भैया।
क्यों, रस्तोगी जी?
अरे, दंगे-डकैत से ऊब कर,
अब आराम से बैठकर इस केस की चर्चा में बहुत सारे समोसे-कचौरी पचाने हैं हमें।
[सब हँसते हैं]
अरे, रस्तोगी जी, जैसे किसी ने कविता पढ़ दी हो भरी अदालत में।
प्यार-तक़रार सब है भर-भर के इसमें।
अरे, किशोर सर तो इसे दिल पर लिए हुए हैं।
केस तो ओपन-शट है, भाई।
औरत है, खूनी लगती है।
केस फ़ाइल हल। तमगा हाथ में।
पर मैडम ने…
[सारे पुलिसवाले मिलकर] …लंगोट बांधनी सिखा दी हमारे साहब को!
[सब हँसते हैं]
[रस्तोगी] अरे!
वो लड़के की कोई ख़बर?
डेड एंड है, सर।
टीम आज वापस आ गई।
सर?
वो… मैडम दो घंटे से बैठी हुई हैं।
अच्छा है।
हवालात की हवा खाने दो मैडम को।
डेथ सर्टिफिकेट
[किशोर] ऋषभ सक्सेना।
[उदास संगीत]
मैडम, दो महीने से घूम-घुमा के बहुत बातें हो रही हैं।
आज सच बोल कर देख ही लीजिए, हम्म?
तो बताओ, मैडम, क्यों क़त्ल किया आपने अपने पति का?
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[मेज़ पर पड़ी घंटी बजाते हुए]
कैसी नीच औरत इतने प्यार करने वाले पति को मार सकती है!
नाम तक गुदवा रखा था हाथ पर उसने आपका!
"रानी।"
और आपने चीथड़े उड़ा दिए उसके!
[किशोर] बस वही हाथ बचा उसका, गवाही देता हुआ।
रानी कश्यप, दुनिया को, रिशू को बहुत बेवकूफ़ बना लिया,
लेकिन मुझे पता है कि रिशू को आपने ही मारा है।
और कहो तो आपका नाम मैं भी अपने हाथ पर गुदवा लूँ!
"किलर रानी कश्यप!"
हाँ?
गुदवा लीजिए, सर।
पर उससे सच थोड़े ही ना बदल जाएगा कि मैंने कुछ नहीं किया है।
अच्छा?
[रहस्यपूर्ण संगीत]
चलो, फिर से शुरू करते हैं।
कैसा रिश्ता था मियां-बीवी के बीच में?
जैसा हर मियां-बीवी का होता है।
कुछ अच्छा…
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
…कुछ बुरा।
-[बैंड-बाजे की आवाज़] -[लोगों के जोश में चिल्लाने की आवाज़]
[सीटियों की आवाज़]
[बैंड-बाजे की आवाज़ जारी]
रानी, ये पकड़ो।
[रिशू] ये भी कोई टाइम है। एक घंटा हो गया। अब तक आया नहीं।
-आपने बात की कि नहीं अफ़ज़र से? -टाइम सही नहीं बताया होगा।
-ये लो, आ गया। -[माँ] आ गया, ले।
[अफ़ज़र] भाई, वो चौक पर जाम लगा है पूरा।
नहीं, नहीं, तुम भाभी को गाड़ी में लेकर जाओ।
मैं सामान उस गाड़ी में लेकर आ रहा हूँ।
-ठीक है, आओ लेके। -भाभी, नमस्ते।
तैयार कर दिया है। साफ़ है।
[बिजली कड़कने की आवाज़]
[रानी] नया शहर।
नए लोग।
नया पति।
[बिजली कड़कने की आवाज़]
[रानी] पंडित जी को ज्वालापुर अच्छा लगता…
मुझे कुछ ख़ास नहीं लगा।
पहली मुलाकात में ऐसी बारिश गिरी कि शहर ही डूब गया।
ज्वालापुर को, लगता है, मैं एक आँख नहीं भाई।
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
[बिजली कड़कने की आवाज़]
[रिशू की माँ] अरे! कोई मुझे भी तो ले जाओ। भूल गए क्या?
[मधुर रूमानी संगीत]
[डिब्बी में गोलियाँ हिलने की आवाज़]
कोई… दोस्त नहीं हैं क्या आपके?
कोई आया नहीं लेने।
[हकलाते हुए] अफ़ज़र आया था ना।
कोई बैंड-वैंड भी नहीं था।
काफ़ी लेट हो रहा था तो…
मैंने सोचा कि कल कर लेंगे पार्टी वगैरह।
और ये धुआंधार बरसात रुक ही नहीं रही है।
हमारी दिल्ली में ये सब नहीं देखते।
[बादलों की गड़गड़ाहट]
[बिजली कड़कने की आवाज़]
-[दरवाज़ा टकराने की आवाज़] -[तेज़ बारिश की आवाज़]
[तेज़ हवा चलने की आवाज़]
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
अह, माफ़ करना। पानी आ गया अंदर।
[रिशू] दो मिनट में साफ़ करता हूँ इसे।
[उदास रूमानी संगीत]
[उदास रूमानी संगीत जारी]
[हास्यपूर्ण संगीत]
कंजूस!
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
नमस्ते, अंकल जी।
नमस्ते, आंटी जी।
हेलो।
हेलो।
[ख़ुशी से] ओह, चाय!
नहीं है।
मैं… मैं लेके आता हूँ।
-शुक्रिया। -[गंभीर संगीत]
बहू, आज तुम्हारी मुँह-दिखाई है। आस-पड़ोस के लोग तुम्हें देखने आएंगे।
अपने हाथ से, अच्छे से, प्याज और आलू के पकौड़े बना दे।
अह।
माफ़ करना, आंटी जी। पकौड़े बनाने तो नहीं आते मुझे।
और मैं ना चाय भी बहुत गंदी बनाती हूँ।
नहीं, कोई बात नहीं। मैं बहुत अच्छी बनाता हूँ। मैं अभी लाया।
-[रानी] हाँ। -[रिशू की माँ] एक मिनट।
-[गंभीर संगीत] -एक मिनट।
तुम्हारी माँ ने कहा था कि वो जो सारे पकवान हमने खाए,
वो तुमने ख़ुद बनाए थे, अपने हाथ से।
और मैंने रिशू को बोला था…
रिशू, तुम्हें बोला था ना?
-कचौरी बहुत खस्ता बनी है। -[रिशू] जी।
आंटी जी,
आप मेरी मम्मी की बात मत सुना करो।
वो तो कहती हैं, जब घर के ऊपर से जहाज़ जाता है कि पापा जी ने बनाया है।
आप उनकी बात पर ध्यान मत दो। वो उनकी बुरी आदत है।
बुरी आदत की वजह से, हम ग़लत बहू घर ले आए।
हमको गारंटी दी थी कि तुम सुशील हो, सर्वगुण संपन्न हो।
-[हास्यपूर्ण संगीत] -अब दिखाओ, कहाँ हो सुशील!
आंटी जी, मैं सुशील हूँ।
सोमवार का व्रत रखती हूँ, मैं नॉन-वेज नहीं खाती।
बस पकौड़े तलना नहीं आता ना मुझे। कौन सी बड़ी बात है।
बाकी सबकुछ आता है मुझे।
हाँ! थ्रेडिंग, वैक्सिंग, बिकिनी वैक्स, क्लीन-अप, मैनीक्योर-पैडीक्योर।
आपके ब्लैकहेड्स भी हटा सकती हूँ मैं।
बहू चाहिए थी, ब्यूटी पॉर्लर उठा के ले आए हम।
बायोडेटा में लिखा था कि घरेलू हो।
आंटी जी, आप तो बायोडेटा की बात ही मत करो।
बायोडेटा में आपने भी लिखा था आपका बेटा पाँच फुट दस इंच का है।
इंची टेप पर ना पाँच फुट आठ इंच ना टापे ये लड़का।
[हास्यपूर्ण संगीत]
मैं चाय और पकौड़े लेकर आता हूँ।
हो गया समस्या का हल।
आप जारी रखो।
-मैं… मैं अभी आया। -["ऐसी फ़ायर जले" गाने की धुन बजते हुए]
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
[रूमानी संगीत]
[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]
पढ़ाई की है आपने?
नहीं, वो… बस दिलचस्पी है।
चलो फिर देखते हैं, कितनी दिलचस्पी है।
अगर मेरे बाल झड़ रहे हों तो?
झड़ रहे हैं?
टेस्ट ले रही हूँ।
ओह। अच्छा।
[रिशू गला साफ़ करते हुए]
अगर बाल झड़ रहे हैं तो, "थैलियम मैटालिकम"।
[अंग्रेज़ी में] गंजेपन के लिए "नैचुरम म्यूराटिकम"।
और हल्के गंजेपन के लिए "फैरम फॉस्फोरिकम"।
[हिंदी में] हाँ, वो चल जाएगा।
[धीरे से] हम्म।
और अगर ज़ोर से दर्द हो रहा हो तो?
अगर दिल में दर्द हो रहा है, अ… सीने में, तो "कैलियम कार्बोनिकम"।
लेकिन अगर बहुत ज़्यादा ही…
अगर पूरे बदन में खुजली सी मच रही हो तो?
एक नया साबुन।
माँ हनीमून के बारे में पूछ रही थी।
-[गला साफ़ करता है] -अगले हफ्ते से बुकिंग है, गोवा में।
आपने मुझसे पहले कोई लड़की देखी थी शादी के लिए?
शादी?
अब…
नहीं, मतलब कोई तो देखी होगी, चाहे पसंद ज़्यादा न आई हो। पर…
हाँ…
मीरा नाम की लड़की से मिला था।
बहुत सुंदर थी वो।
एम. ए. भी कर रखी थी उसने, पता है आपको?
-[हास्यपूर्ण संगीत] -नहीं।
किस विषय में?
[अंग्रेज़ी में] होम साइंस।
तो आपका होम्योपैथी आगे पढ़ने का इरादा है?
वो कहती थी अगर कभी लज़ानिया, इटालियन खाना, खाने का मन हो तो वो घर पर भी बना सकती है।
और हमें तो खाना खाने का बड़ा शौक है। घर पर, घरवालों के साथ टीवी लगाकर आराम से।
-हाँ, वो देखा। देखा मैंने। -[रिशू] बहुत मज़ा आता है।
तो फिर करी क्यों नहीं उससे शादी?
बात नहीं बनी ना वहाँ।
तो मतलब मैं सांत्वना पुरस्कार हूँ?
जी?
मतलब?
[हास्य रोमांचक संगीत]
मतलब… मैं बिंदास हूँ, आधुनिक हूँ, पर फिर भी घरेलू हूँ।
[धीरे से] जी।
आपको तो वो इटालियन बनाने वाली चाहिए थी, मिस लज़ानिया।
-नहीं। नहीं। -[रानी गुस्से में] नहीं?
सुबह आपकी माँ मेरे पर पकौड़े लेकर चढ़ गई,
आपके मुँह से चूँ नहीं निकली, हाँ?
[घबराकर] नहीं, मैंने बोला था।
बस यही दिक़्क़त है।
घर बैठे-बैठे, बिना मेहनत करे, बिना डेट किए, बिना घुमाए-फिराए,
बिना पापड़ बेले, आपको एक ख़ूबसूरत, हॉट लड़की मिल गई
-तो उसकी कीमत नहीं है। -नहीं, है।
यही तो दिक़्क़त है अरेंज्ड शादी की।
लव मैरिज में मेहनत करनी पड़ती है ना।
अरेंज्ड मैरिज में तो पकी-पकाई, परोसी हुई लड़की सामने मिल जाती है।
ऊपर से वह तुम्हारे पकौड़े तले!
नहीं, मत तलो। मत… पकौड़े तलो।
हाँ, तुम तलो न पकौड़े!
[रानी] तुम्हारी माँ तले पकौड़े!
बायोडेटा में लिखना चाहिए था न बावर्ची चाहिए।
[नल चलने की आवाज़]
सुंदर सुशील लिख दिया, तो मिल गई।
[पानी बहने की आवाज़]
[रानी] अरे, क्या नाम था उसका?
लज़ानिया!
-म… मीरा। -हाँ।
उससे क्यों नहीं करी शादी?
पकौड़े नहीं तलने आते थे उसको?
-[हास्यपूर्ण संगीत] -[फ़्लश चलने की आवाज़]
गाय चाहिए सबको अरेंज्ड शादी में!
[हास्यपूर्ण संगीत]
[चिल्लाते हुए] ख़ुद तो निकल गए बाज़ार घूमने और हमें छोड़ गए इस…
इस ब्यूटी पार्लर के साथ।
जवानी चढ़ गई तुम्हारे बाप को!
देखो! अपना नया बाप देखो।
अब लेके आएगा तुम्हारे लिए नई माँ, तुम्हारी बीवी के साथ रहने के लिए।
नहीं, नहीं। आंटी जी को भी मैंने बोला था बाल रंगवाने को।
अब, घर में कुछ था नहीं करने को, तो ये, मैंने…
अच्छा, तो तुम अपना टाइम पास करने के लिए हमारा जुलूस निकालोगी?
मैं गोभी काटूँ, आलू काटूँ,
और ये परकटी तशरीफ़ नहीं हिलाए।
-लाओ, गोभी मैं काट देता हूँ। -तू मेरी नाक काट दे!
भौहें!
[रोते हुए] भौंहे तक रंग डाली।
[हास्यपूर्ण संगीत]
अच्छा लग रहा हूँ ना?
[अफ़ज़र] अबे, तुमने भाभी जी को घर में खुले सांड की तरह छोड़ दिया।
देखो रंग दिया उन्होंने तबेला।
कब से बोल रहे हैं, जल्दी से जल्दी उनकी ट्रेनिंग शुरू करो तुम!
अब क्या पीटी करवाऊँ उससे?
अबे, पीटी नहीं, टीटी।
टाइम टेबल समझते हो तुम।
सुबह सात बजे चाय, नौ बजे मूली के परांठे।
दस बजे इस्त्री, ग्यारह बजे फलाना, बारह बजे ढिमकाना।
अबे, घर गृहस्थी के काम में व्यस्त रखो उनको।
अरेंज्ड शादी में ऐसे ही होता है, अंकल जी!
आपसे बेहतर कौन जानेगा। अपनी तो आपबीती है ना।
-नहीं बेटा, तुम भी सही जा रहे हो। -[अफ़ज़र] हाँ।
अबे, तुम पेन पेपर लाओ बे। तुम पेन पेपर लाओ।
कौन उल्लू का पट्ठा जेब में पेन पेपर लेकर घूमता है, यार अफ़ज़र?
मेरे पास है, बेटा। एक मिनट।
हाँ। देखो। कुछ सीखो।
[रिशू के पापा] ये।
लाओ। सुबह सात बजे चाय मांगना, फीकी।
और जैसे ही लाएगी, बोलना हमने तो चीनी बोली थी।
हैं।
थोड़ा रौब रखना तुम, ठीक है?
उनको उत्तेजना महसूस होगी। तुम्हारे आगे-पीछे दौड़ेगी वो।
[रानी की माँ फ़ोन पर] तू ना अपना ग़ुस्सा कंट्रोल में रख।
और रिझा उसे।
मैं तो कह रही हूँ, ग़ुस्सा आए तो पी जा।
एक महीने बाद सारा ग़ुस्सा एक साथ निकाल देना।
और सोते हुए चप्पल मार देना उसको।
ले, मैं तो चिल्ला दी उस पर।
पहले महीने ना, तू देवी है, बस।
शहद टपकना चाहिए।
लार टपकाता हुआ कुत्ता जब तक ना बने ना, दुम सीधी नहीं होगी।
[रानी की मौसी] रिझाओ उसे।
देख, पहले दो दिन जब भी रिशू आए ना, तो अपना पल्लू गिरा देना।
"ओहो, उफ्फ़!"
और ब्लाउज और टाइट वाला पहनना।
दूर से रिझा के ना ऐसे व्यस्त हो जाना।
रानी, सात बज चुके हैं, मेरी चाय कहाँ है?
सुबह सात बजे चाय
रानी, सात बज चुके हैं, मेरी…
-[हकलाने की आवाज़] -[रूमानी संगीत]
[रिशू हकलाते हुए]
[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]
[हास्यपूर्ण संगीत]
आठ बजे। आठ नहीं, नौ, नौ बजे।
रानी, आठ बजे मूली के पराठे।
रानी, आठ बजे… आ गई।
[हास्यपूर्ण संगीत]
[गला साफ़ करते हुए] रानी?
रानी?
-[गला साफ़ करने की आवाज़] -[हास्यपूर्ण संगीत]
रानी!
नौ बजे मूली के पराठे, तुम दे देना।
[हास्यपूर्ण संगीत जारी]
मूली सौ रूपए किलो है।
[रूमानी संगीत]
[इस्तिरी की भाप की आवाज़]
[हास्यपूर्ण संगीत]
[रिशू की माँ] रात में क्या तुम सांप-सीढ़ी खेलते रहते हो
जो दिन में तुम्हें पल्लू गिराने पड़ रहे हैं?
क्या हुआ?
कुछ नहीं। तुम सीरियल देखो।
अबे, बहुत पिस लिए तुम।
टाइम टेबल बनाने के बाद, ट्रेनिंग का स्टेप नंबर दो।
-हम्म। -[अफ़ज़र] क्या?
अबे, बेडरूम जीतो।
अबे, शेर बनो। [शेर की तरह गुर्राता है]
मर्दाना महसूस करो। तो उत्तेजना महसूस होगी ना।
सब कुछ कहाँ पे है, कहाँ पे है?
यहाँ पे है।
समझे?
लेकिन शेर बनने से कुछ नहीं होता, अफ़ज़र।
"सिलेनियम मेटालीकम", "फॉस्फोरिक एसिटम", "योहिबिनम",
ये सारी चीज़ें खाने से होता है सबकुछ।
इतना कम-कम-कम खाके कम न पड़ जाना वहाँ पे तुम!
बेटा, क्या नाम बताया दवाई का, यूरिनम कम-कम…
थोड़ा तो उम्र का लिहाज़ करो, पापा।
और ये हाथ-पैर, बाल है ना, ये काले रंगवाना बंद करो। अच्छा नहीं लगता आप पर।
[रिशू] अमावस की रात लगते हो सरासर।
मम्मी नज़रबट्टू बनाकर टांग देगी घर के बाहर।
[रिशू के पापा] सही कहा।
इधर कुछ ज़रूरी बात कर रहे थे ना हम लोग।
-[रिशू के पापा] एक नाम भूल… -न, बात हो रही थी।
आपको वो दवाई का नाम जानने की ज़रूरत नहीं है।
हम्म। हाँ।
[हास्यपूर्ण संगीत]
[शेर की तरह गुर्राते हुए]
[रानी] रिशू?
रिशू?
-सो गए हो क्या? -[रिशू] हम्म?
[रानी] ये…
मेरा हुक खोल दोगे?
[रिशू धीरे से] हम्म?
[हास्यपूर्ण संगीत जारी]
ये… ये हुक?
हाँ।
[अंग्रेजी में] एक…
दो…
[घबराते हुए] तीन। हो गया।
-[रूमानी संगीत] -[सर टकराने की आवाज़]
-[रानी] आह! -[रिशू] अरे।
-खून तो नहीं निकल रहा? -नहीं। खून नहीं निकल रहा।
-कटा है? -नहीं, वो…
मैं दो बूंद आर्निका दे दूँ?
[चुटकी बजाता है] दर्द चला जाएगा।
[रिशू धीरे से] दे दूँ?
बस तुम लाइट बंद कर दो।
[रिशू] माफ़ करना, एक मिनट मैं इधर आ जाऊँ अच्छे से।
[रानी] हाँ। अरे, साड़ी, माफ़ करना।
[रिशू] एक सेकंड। मेरा पैर, पैर…
उठो, एक सेकंड।
-[रानी] ठीक है। अच्छा, इधर आओ। -[रिशू] वो… मैं…
[रिशू] हाँ।
ये।
[रानी] आराम से, रिशू। ए… एक मिनट।
रिशू?
[रिशू] अरे… अरे यार।
[रिशू के आह भरने की आवाज़] उह।
[रानी] हम्म?
रिशू?
[उदास संगीत]
[मोबाईल के वाइब्रेट होने की आवाज़]
[मोबाईल के वाइब्रेट होने की आवाज़]
तो, कैसा था कल?
क्या कैसा था?
बोला था मैंने लव मैरिज करने दो।
[रानी] अरेंज्ड शादी में पति को पड़ी ही नहीं है।
उसकी घंटी बजी, बस। मंदिर बंद।
बीवी भगवान भरोसे।
पल्लू गिरा के भी कुछ नहीं हुआ?
मासी, सबकुछ गिरा दिया!
जुगनू निकला वो।
[रानी] जुगनू समझ रही हो ना आप? जुगनू।
एक सेकंड में हजार वॉल्ट की रोशनी और फुस्स!
तू उसको ऐसा न मर्दाना महसूस करा ना।
[जीभ चटकाते हुए]
मासी, अभी कभी घरेलू फील कराओ, कभी मर्दाना फील कराओ,
अभी एक छोटे से काम के लिए कितनी फीलिंग्स देनी पड़ेंगी मुझे?
[रानी] कहाँ फंसा दिया ज्वालापुर में।
कोई ज्वाला नहीं जलने वाली हमारे बीच।
फुस्की निकला ऋषभ सक्सेना।
[रिशू] माँ सही कहती थी। नहीं संभलेगी हमसे।
हमारी सारी निजी बातें अपने घरवालों को बताती है, यार।
अरे, मज़ाक में कह दिया होगा मायकेवालों को।
और तुम भी ना पता नहीं क्या-क्या गुलकी पीते रहते हो।
[अफ़ज़र] छोड़ो ये सब। इज़्ज़त पर मत लो।
और मुँह फुलाना बंद करो अपना।
[उदास संगीत जारी]
करवा दो यार उसको, अटकी है फ़ाइल…
अरे, रिशू, तू यहाँ?
तू तो छुट्टी पर चल रहा था।
यार, तुम लोगों को तो पता है, सर उत्साहित हो जाते हैं तो फट से बुला लेते हैं।
-[आदमी] रिशू? -सर।
[आदमी] तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
हनीमून का समय है।
परफोर्मेंस उधर देनी है, इधर नहीं।
लेकिन इनको तो आपके साथ हनीमून करना है ना, सर।
[आदमी] हाँ। कल रविवार है।
कल ऑफ़िस बंद रहेगा।
कल भी मत आ जाना।
[आदमी] सुन लिया, भैया?
[टीवी से आती आवाज़]
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
[उदास संगीत]
-[रिशू की माँ] खाना लगा दूँ? -नहीं, मैंने खा लिया।
[उदास संगीत जारी]
[लाइट बंद करने की आवाज़]
[दरवाज़ा बंद होने की आवाज़]
[रानी] रिशू?
खाना लगा दूँ, रिशू?
[रिशू] नहीं, मन नहीं है।
[उदास संगीत जारी]
[अफ़ज़र] लाइट बंद। सो गईं भाभीजी।
जा… जाऊँ मैं?
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]
[बत्ती चालू करने की आवाज़]
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
आप मुझसे बोर हो गए हो ना?
नहीं, ऐसा कुछ नहीं है।
-झूठ। -[अलमारी बंद करने की आवाज़]
तो फिर चलो ट्रूथ या डेयर खेलते हैं।
सच, तो फिर बताना पड़ेगा कि क्यों भाग रहे हो
और डेयर, तो फिर मैं अपना ब्लाउज निकाल सकती हूँ और तुम अपनी पैंट।
[रिशू] मैंने आपकी मम्मी और मासी के साथ सारी बातें सुन ली थीं।
[उदास संगीत]
वैसे, कैसा लड़का चाहिए था आपको, रानी जी?
जिसका…
जो मज़ाकिया हो,
-सुंदर हो, शरारती हो, -[रूमानी संगीत]
प्यार में पागल हो।
कभी-कभी तो बाल खींच ले,
कभी-कभी चूम ले,
[रूमानी संगीत जारी]
थोड़ा सरफिरा।
आपको तो पाँच-छह लड़के एक साथ चाहिए, रानी जी।
अब एक में कहाँ मिलेगा यह सब।
एक में एक-दो तो हो सकते हैं ना?
कि वो भी मुश्किल है?
कल से ऑफ़िस वालों ने एमबीए क्लासेस रखी हैं।
दफ़्तर के बाद वहीं जाऊँगा।
और हाँ…
आपको जैसा भी लड़का चाहिए था वो छह ख़ूबियों वाला,
मिला यही है।
उसके लिए माफ़ करना।
[दरवाज़ा ज़ोर से बंद करने की आवाज़]
उस दिन के बाद रिशू मुझसे बहुत दूर चला गया।
[धीमा उदास संगीत]
रिशू की नाराज़गी पलंग पर लेटी रहती थी।
[पंजाबी में] ♪ साथ-साथ रहकर भी ♪
♪ दूर-दूर रहना ♪
♪ खुल के न कुछ कह पाना ♪
♪ या तो चुप रहना ♪
♪ या तो कड़वा कहना ♪
♪ बात कोई मीठी न सुन पाऊँ ♪
♪ हो, उसे मनाऊँ या ♪
♪ ख़ुद को मनाऊँ ♪
♪ किस्मत को कैसे समझाऊँ ♪
♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे छोड़ दिया रे ♪
[रानी] मैंने काफ़ी कोशिश की थी उसके क़रीब जाने की।
उसने तो लगता है मुझे अपने दिल से ही निकाल दिया था।
♪ हो ♪
♪ दिन कट जाता है फिर ♪
♪ रातें शुरू और ♪
♪ रात में घर में घूमता फिरूँ ♪
जब धो रही हो तो,
रिशू के भी धो दो।
♪ हो ♪
♪ आँख बंद करके ♪
♪ आँसूं छुपाए हैं ♪
♪ किस्मत को कैसे समझाऊँ ♪
♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪
♪ छोड़ दिया रे ♪
♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪
♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪
चलो, मैं ले के चलता हूँ तुम्हें उसके पास।
रानी?
बढ़िया चल रही है पढ़ाई?
नहीं, वो… वो बस रास्ता समझा रहा था।
रास्ता?
अपने घर का रास्ता तो ये भूल गए हैं।
आपको रास्ता अच्छे से समझा देंगे।
एमबीए कर रहे हैं आप यहाँ पे?
एक ही महीना हुआ है हमारी शादी को।
उस एक महीने में ना बस एक ही बार कोशिश की है, पर कुछ हुआ नहीं।
ऐसे ही बस औरत के दिल की बात आपको बता रही हूँ।
एमबीए कर रहे हैं।
♪ कि सबकुछ अब लकीरों, अब लकीरों ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया ♪
♪ लकीरों पर छोड़ दिया रे ♪
थोड़े दिन के लिए घर आ जाऊँँ?
नहीं, बेटा, ऐसे इतनी जल्दी आएगी तो कैसा लगेगा।
थोड़े दिन रहके चली जाऊँगी।
हाँ, पर, हमको भी जाना है मामाजी के घर, कल,
[रानी की माँ] एक हफ्ते के लिए।
और तुम भी तो जाओगे हनीमून पर।
[रानी की माँ] ऐसी छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं।
सब ठीक हो जाएगा।
मैं फिर फ़ोन करती हूँ।
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
[उदास संगीत]
गोवा के लिए पैकिंग कब शुरू करनी है?
[गहरी सांस छोड़ते हुए]
ये रहा आपका हनीमून।
[बर्तन ज़ोर से खड़खड़ाते हैं]
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
ये कुत्ते रोज़ ऐसे ही भौंकते रहेंगे क्या?
अब गली के हर कुत्ते का जाके मुँह तो नहीं बंद कर सकता ना मैं, ताकि तुम चैन से सोओ।
पता था!
पता था तुमसे यही जवाब मिलने वाला है मुझे!
नहीं करती शादी। मना कर देती।
अकल घास चरने गई थी ना मेरी इसलिए।
किस्मत में यही लिखा था मेरे।
अब ये कुत्ते भी तुम्हारी किस्मत में ही लिखे हैं।
दोस्ती कर लो इनसे।
[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]
तो आप रिशू के घर के सामने ही रहती है ना?
-[पड़ोसन] जी हाँ। -तो आपने तो काफ़ी कुछ देखा होगा।
बात ऐसी है,
कि ये जो मियां-बीवी का रिश्ता होता है न,
ये अल्लाह मियां ने कच्चे धागे से बांधा है।
गांठ बांध-बांध के चलोगे तो रह जाता है।
और जहाँ गांठ खुली, तो बात ख़त्म।
अरे, सब यहाँ पे कवि सम्मेलन करने आते हैं क्या?
आप साफ़-साफ़ हिंदी में बताओ।
औरत का दिल समझो, दरोगा जी।
नील जो है, वो लता जी के बहनोई का भांजा था।
वहाँ रहने आया था।
[गाड़ी के हॉर्न की आवाज़]
[गाड़ी के हॉर्न की आवाज़]
[गाड़ी के इंजन की आवाज़]
[गाड़ी के दरवाज़े बंद होने की आवाजें]
[सामान उतारने की आवाज़]
[रिशू की माँ] पहुंचा क्यों नहीं शादी पे?
[आदमी] पहुँचा तो सही दिल्ली तक।
[रिशू की माँ] दिखा क्यों नहीं?
[आदमी] क्योंकि तब तक आप बारात लेकर निकल चुके थे।
-शादी हो गई थी। -[रिशू की माँ] हट, पगला!
पिछले महीने कहाँ ग़ायब हो गया था?
[आदमी] अरे बुआ जी, आज़ाद पछियों के ठिकाने नहीं पूछा करते।
[रिशू की माँ] तेरी माँ कितनी परेशान थी।
ले!
पूछ रहा था ना बहू कहाँ है।
ले आ गई, कर ले दर्शन।
ये नील है।
मेरे बहनोई का भांजा।
अभी कुछ दिन हमारे साथ रहेगा।
पता है, ये टूरिस्ट सीज़न में ना
टूरिस्टों को चप्पू वाली नाव में घुमाता है।
[नील] मासी, अह…
[अंग्रेजी में] उनका मतलब राफ्टिंग से है।
रिवर राफ्टिंग?
[हिंदी में] हाँ तो, वही बात हुई ना। चप्पू वाली नाव।
[रूमानी संगीत]
[नील] भाभी अभी उठी हैं?
अह।
सूरज तो पूरा चढ़ गया। पूरे आसमान में।
नहीं, नील जी, हमारा सूरज नहीं चढ़ा अभी तक।
मासी…
भाभी के हाथ का कुछ खिलवाइए ना।
[रिशू की माँ] खाने-पीने की बात मत करना।
चूल्हा-चौका, करछी इनको नहीं भाता है।
इनके हाथ से सिर्फ़ कैंची चलती है।
और अपनी मुंडी बचाकर रखना।
तेरे मौसा जो घूम रहे हैं ना रैंबो बने, परकटे, इनकी मेहरबानी है।
आपको कुछ कटवाना है?
[धीरे से] नहीं।
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
[रिशू की माँ] आ गए।
हाथ-मुँह धो लो, खाना गरम है। खा लो।
-रिशू भैया! -अरे!
नील? अरे, कब आए तुम?
-[नील] बस सुबह ही आया। -[रिशू] सुबह आए?
[रिशू] मुझे किसी ने बताया ही नहीं कुछ।
रिशू, ज़रा लाइट बुझा दो।
क्योंकि तुम्हारे पिताजी जो साधना कट कराके बैठे हैं, उससे मेरी आँखें चौंधिया रही हैं।
[रिशू की माँ] देखो।
और अपनी बीवी की कैंची रुकवाओ।
तेज़ी से इज़्ज़त कट रही है हमारी!
संभालो अपनी दुल्हन को।
[उदास संगीत]
[गहरी सांस छोड़ता है]
[नील] क़त्ल माँ ने किया और बीवी को फंसा दिया है।
[मधुर संगीत]
दिनेश पंडित पढ़ते हो तुम भी?
हाँ।
अह, माफ़ करना, मैं पी सकता हूँ?
एक महीने की बात है।
[रानी] सिगरेट का पता नहीं, पर ज्वालापुर तुम्हें खा नहीं गया तो फिर मिलेंगे।
तुम तो अच्छी-खासी दिख रही हो।
दिख रही हूँ।
[उदास संगीत]
[नील] अच्छी आई है फ़ोटो?
[रूमानी संगीत]
♪ आँखों को दूर से ही ♪
♪ उसने छुआ है रे ♪
आओ, आओ।
♪ महसूस हमको भी ये ♪
[दोस्त] कैसे हो, नील भैया?
♪ जबसे हुआ है रे ♪
♪ कुर्बान उस पे अपना ♪
♪ हर पल हुआ है रे ♪
♪ वो ही है वजह ♪
♪ वो ही है जगह ♪
♪ वो ही जादू ♪
♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪
♪ फिसल जा तू ♪
♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪
♪ फिसल जा तू ♪
♪ कि मेरी जान ने कहा मुझसे ♪
♪ निकल जा तू ♪
♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪
चाय मिलेगी?
♪ फिसल जा तू ♪
चाय पियोगे?
तुम बनाओगी?
हाँ।
हाँ।
[वॉटर फिल्टर का संगीत]
[बटन बंद करने की आवाज़]
पत्ती?
वो चीनी के बगल में।
[रूमानी संगीत]
दो चम्मच और।
चीनी?
तीन चम्मच।
[रूमानी संगीत जारी]
छलनी।
[मोबाईल की रिंगटोन बजने की आवाज़]
अच्छी बनी है चाय।
♪ हो, अब क्या सही न जानूँ ♪
♪ ना ग़लत जानूँ रे ♪
♪ वो तो बढ़ता ही जाए ♪
♪ हो जैसे चढ़ता बुखार ♪
चाय में इतना ज़ायका है तो
आपके खाने का स्वाद चख के तो हम जान दे देंगे।
♪ हो ओ, अपना पराया अब तो ♪
♪ मैं न पहचानूँ रे ♪
♪ ये हे ऐसी बहार ♪
[रिशू की माँ] ये मोबाइल पर देख के ना…
♪ जो कर दे बेड़ा पार ♪
♪ गहराइयों में जैसे ♪
♪ जाने लगा है वो ♪
[रिशू की माँ] बहुत तेज़ जल रही है गैस।
♪ नजदीकियों में वैसे ♪
♪ आने लगा है वो ♪
♪ छूने की देरी है जी ♪
♪ हम भी तैयार हैं ♪
♪ वो बहाना ♪
♪ वो ठिकाना ♪
♪ वो ही हरसू ♪
♪ कि मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪
♪ फिसल जा तू ♪
♪ कि मेरी जान ने कहा मुझसे ♪
♪ फिसल जा तू ♪
भैया, डरना मत!
[रानी के चीखने की आवाज़]
[रिशू] रानी।
रानी!
रानी!
[रिशू चीख़ते हुए] रानी!
[रूमानी संगीत]
♪ मेरे दिल ने कहा मुझसे ♪
♪ फिसल जा तू ♪
♪ मेरी जान ने कहा मुझसे ♪
♪ निकल जा तू ♪
कौन है?
♪ फिसल जा तू ♪
[वॉटर फिल्टर का संगीत]
[बटन बंद करने की आवाज़]
[धीमा संगीत]
[रोमांचक संगीत]
[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]
आगे से ऐसा करने की हिम्मत मत करना!
-[जग रखने की आवाज़] -[गहरी सांस लेने की आवाज़]
[घड़ी की टिक-टिक की आवाज़]
[तेज़ रूमानी संगीत]
[रिशू की माँ] रानी!
[रिशू की माँ] रानी! रानी!
कहाँ, गई कहाँ?
[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]
[मोबाईल के वाइब्रेशन की आवाज़]
नमक थोड़ा कम है।
बात तो है हाथों में।
बस मटन खाने का मन है।
मेरी रसोई में मांस-वांस नहीं बनेगा।
[रोमांचक संगीत]
[बकरी के मिमियाने की आवाज़]
-[कसाई के वार की आवाज़] -[दुकानदारों के चिल्लाने की आवाज़]
[बकरी के मिमियाने की आवाज़]
[आदमी] मैडम आइए। इधर आइए।
[आदमी] मैडम, बड़े रखूँ या काट दूँ छोटे?
-[रिशू की माँ] बकरा पकाएगी? -[रानी] मैं…
[रिशू की माँ] और तुमने कहा था तुम मांस नहीं खाती।
अब ये मांस कहाँ से आ गया?
-मैं… -हाँ, क्या हुआ, मम्मी?
[रिशू की माँ] रिशू, ये मेरी रसोई में मांस बनाना चाहती है।
-अच्छा, ठीक है। -वापस कर आओ।
नहीं जाएगा आपकी रसोई में।
तुम इधर आओ।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[किशोर] इतनी बेरहमी से अपने पति को मार डाला।
क़त्ल का हथियार ग़ायब करके प्रेमी को भगा दिया।
और ये दोनों मिल कर हमें बेवकूफ़ बना रहे हैं।
[किशोर] ऐसी औरतें बड़ी शातिर होती हैं।
एक बार कुछ सुराग हाथ आ जाए, इसको तो जेल में सड़ा डालूँगा मैं!
एक ही तो दोस्त था हमारा, सर जी।
[अफ़ज़र] पलकों पर बैठा कर रखता था भाभी जी को।
सर, ये डायन…
आशिक के साथ मिल के हज़म कर गई मेरे दोस्त को।
ज़िंदा जला दिया मेरे यार को!
अरे, क्या कमी रह गई थी रिशू के प्यार में?
[अफ़ज़र] चिथड़े उड़ा दिए उसके!
सर, इतना प्यार करता था उसको। सर, इसको जन्नत नसीब नहीं होगा!
इसको जेल में डालो, सर।
सर, खा गई उसको ये डायन।
कैसे संबंध थे आपके नील त्रिपाठी जी से?
[सिसकने की आवाज़]
कुछ अच्छे…
कुछ बुरे।
शारीरिक?
[सिसकने की आवाज़]
इंस्पेक्टर साहब…
पंडित जी कहते हैं,
"संबंध तो मानसिक होते हैं।
शारीरिक तो संभोग होता है!"
आपने और आपके प्रेमी ने मिल के कोई प्लानिंग नहीं की थी?
[घोंपने की आवाज़]
[पूर्वाभासी संगीत]
ये लाइटर कहाँ रख दिया, यार?
अरे, वाह।
अफ़ज़र-वाला मटन बना रही हूँ।
फ़ातिमा भाभी से रेसिपी ले ली है।
इधर आ।
[फ़ोटो क्लिक करने की आवाज़]
[रानी] कितनी फ़ोटो खींचते रहते हो?
अगले हफ्ते की वापसी है मेरी।
ठीक है, तो अगले हफ्ते मैं भी दिल्ली निकल लूँगी।
फिर तुम्हारे पास।
अच्छा, ये बताओ
मटन हो पाएगा तुमसे?
गोश्त बनाने में पकाने वाला का खून पसीना दोनों लग जाता है।
चख के मेरा ब्लड ग्रुप बता देना!
[रानी] पूरी जान निचोड़ कर डाल दूँगी मटन में।
[खांसते हुए]
रिशू भैया के बारे में क्या सोचा है?
रि… रिशू को बता दूँगी।
सब सच।
अरे, अरे!
यहाँ पर ये सब लेके मत आना।
रिशू लेट से आएगा ऑफ़िस से आज।
उसको खिला देना तुम बाद में। यहाँ नहीं रखो फिर।
अरे, नील तो है। वो खा लेगा हमारे साथ।
गया! नील गया।
जल्दी-जल्दी सामान रखा गाड़ी में और चला गया।
[रिशू के पापा] बिना मिले चला गया?
[रिशू की माँ] हाँ, देखो। बिना मिले ही चला गया यहाँ से।
पता नहीं कौन सा भूत सवार था सर पे!
-[रिशू की माँ] थोड़ा लो। -[पापा] अजीब आदमी है।
बिना मिले ही चला गया।
चला नहीं गया है।
भाग गया है।
भाग गया है।
तू क्या बुत बनी खड़ी है यहाँ पे?
[रिशू की माँ] जा, रख दे।
[गंभीर संगीत]
[रहस्य्पूर्ण संगीत]
[रिशू की माँ] रानी!
खाना लगा दे। रिशू आ गया है।
पता नहीं, कहाँ ध्यान रहता है इस लड़की का।
वाह!
आप बहुत कोशिश कर रही हैं।
दरअसल बात यह है कि आप इतने ख़ूबसूरत हो कि आपके सामने थोड़ा सा नर्वस हो जाता हूँ।
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
[सांस छोड़ने की आवाज़]
अब तक जो कुछ भी हुआ, उसके लिए माफ़ करना।
एक नए सिरे से शुरू करें?
मम्म।
वाह।
ये मटन नील के लिए बनाया था।
मैं… प्यार करने लगी थी उससे।
उसी के साथ रहना चाहती थी।
[उदास संगीत]
पर वो धोखा देकर भाग गया।
और मैं तुम्हारे पास रह गई।
अच्छा बना है मटन।
[रानी] बस। वो उसके बाद चुप हो गया।
मैं बस उसे देखती रही और वो खाता रहा।
कहानी अच्छी है।
पर हमें शक है मैडम कि आपने अपने प्रेमी के साथ मिलकर रिशू को मारा।
उसके सिर पर घाव का निशान है, भारी चीज़ से।
सर, कहानी तो आपकी भी बहुत अच्छी है।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
दी एंड भी अच्छा होगा।
जब मैं क़त्ल का हथियार और आपके प्रेमी, दोनों को ढूंढ के ले आऊँगा।
[रोमांचक संगीत]
तो कोई पछतावा नहीं है तुम्हें?
शादी के बाद चक्कर चलाने का?
[दीर्घश्वास की आवाज़]
नहीं।
क्योंकि अगर नील से नहीं मिलती
तो असली रिशू से कैसे मिलती।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[उदास संगीत]
[बहते पानी की आवाज़]
[कंडक्टर के चिल्लाने की आवाज़]
[ऑटोरिक्शा की आवाज़]
[पूर्वाभासी संगीत]
[बच्चों के हंसने की आवाज़]
[चेन खोलने-बंद करने की आवाज़]
[रोमांचक संगीत]
[रिशू के चिल्लाने की आवाज़]
[नील] भैया!
-[रिशू] ये हिम्मत! -[नील] पगला गए क्या?
-[रोमांचक संगीत] -[चिल्लाने की आवाज़]
[हाथापाई की आवाज़]
[कराहने की आवाज़]
[रोमांचक संगीत]
[नील] रिशू! रिशू भैया!
[कराहने की आवाज़]
[हाँफने की आवाज़]
[लोगों की बातें करने की आवाज़ें]
[नील] पता नहीं क्या चाहते हैं।
[नील] चल, चल।
माफ़ करना, माफ़ करना… कुछ नहीं हुआ, भैया हैं।
[नील] ग़लती मानते हैं हम।
अब खिंचा चला गया।
मतलब होश खो बैठा था।
अगर आप संबंध बना लेते, वो अकेली नहीं पड़ती।
और मैं बीच में कैसे आता।
पर, रिशू भैया…
आपके संबंध कैसे नहीं बने उनके साथ?
हम गधे हैं!
[रूमानी संगीत]
उनका रेशमी जिस्म जीतने की बजाय उनका दिल जीतने में लग गए।
और तुमने भी सोचा…
सीधे-सादे, शरीफ़ रिशू भैया हैं, इनकी मारो!
इनकी लुगाई की भी मारो।
ये थोड़ी ना बोलेंगे कुछ।
उसे लेके क्यों नहीं आए अपने साथ?
हम तीनों में से कम से कम तुम दोनों तो खुश रह पाते।
[कुत्तों के भौंकने की आवाज़]
[दरवाज़ा खोलने की आवाज़]
[चीज़ें टटोलने की आवाज़]
कहाँ गए थे?
मैंने फ़ोन लगाया था, रिशू तुम्हें।
कुछ नहीं कहोगे क्या?
[आह भरने की आवाज़]
ट्रूथ या डेयरिंग अब खेलो।
कहाँ से आ रहे हो?
नील से पिट के आ रहा हूँ।
क्यों?
तुम्हें छोड़ के जो भाग गया।
तुमने इतना प्यार किया उसे, लेकिन उसने नहीं किया।
कैसे?
[उदास संगीत]
-मुझे माफ़ कर दो। -दूर… प्लीज़ दूर से बात करो।
[हकलाते हुए] मैं क्या… मैं क्या करूँ, रिशू?
माफ़ करना, ग़लती हो गई मुझसे।
चली जाऊँ यहाँ से?
हाँ, तुम प्लीज़ चली जाओ।
सच में, चली जाओ।
यही बेहतर होगा सबके लिए।
[सांस छोड़ने की आवाज़]
तुमसे मैंने इतना प्यार किया न, रानी…
…कि तुम्हारे बिना रह नहीं सकता मैं।
लेकिन अब शायद तुम्हारे साथ भी नहीं रह सकता।
भलाई इसी में है कि तुम चली जाओ।
क्योंकि मेरा मन करता है कि तुम्हारा गला घोंट दूँ।
चली जाओ, रानी, वरना मार दूँगा तुम्हें।
[रिशू] चली जाओ।
[उदास संगीत]
[चिड़ियाँ चहचहा रही हैं]
[रिशू की माँ] रिशू?
आय-हाय! क्या कर लिया ये?
जब देखो गिरता-पड़ता रहता है। ध्यान से नहीं चल सकता?
हम मौसा जी के यहाँ जा रहे हैं, शाम तक आते हैं।
[रिशू के पापा] क्या हुआ?
[रिशू की माँ बड़बड़ाते हुए]
[उदास संगीत]
स्टेशन तक छोड़ सकते हो?
ख़ुद चली जाओ।
[लड़का 1] रुक, रुक, रुक।
[लड़का 2] ए, भाई?
हेलो, भाभी।
भाभी, आप जा रहे हो?
नील भी चला गया।
आइए, हम छोड़ देते हैं। हटो, हट।
आइए, भाभी। बैठिए।
[लड़का 1] तीन बैठेंगे तो क्या परेशानी है?
[लड़का 2] रिक्शा नहीं मिलेगा, भाभी, इस समय पर।
हम एक किक मारेंगे, छोड़ आएंगे आपको।
भाभी, हम भी नील जैसे ही आपका मन लगा कर रखेंगे।
[लड़का 1] अरे, आइए ना भाभी, मज़ा आएगा।
ख़ास ख़याल रखेंगे आपका।
[लड़का 2] फ़र्ज है हमारा।
[लड़कों के हंसने की आवाज़]
-तुम जाओ, मैं देखता हूँ। -[लड़का 1] अरे, भैया आ गए।
भैया, भाभी को ले जा रहे हो आप?
[लड़का 1] देखिए, आपके आते ही भाभी अंदर चली गईं।
अब हमारा दिल कैसे लगेगा, भैया।
रिक्शा!
नील का फ़ोन भी आया था ना।
[लड़का 1] उसने कहा है भैया-भाभी का ख़ास ख़याल रखना।
[लड़का 2] चलो, भैया, हम सब चलते हैं। चप्पू वाली नाव में चपचपाते हुए।
भैया, चिंता मत करो, नील हमारे भाई जैसा है।
रिक्शा!
[लड़का 1] आपसे तो रिक्शा भी नहीं रुक पा रहा।
ये भी हमें ही करना पड़ेगा!
[लड़कों के हंसने की आवाज़]
भाभी को फ़ोन पे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दें?
दोस्ती कर लेंगी?
[लड़का 1] एक नंबर।
पक्का, कर लेंगी।
मैं तो कहता हूँ इनका हैंडल लेते हैं, लाइव स्टोरीज़ देखेंगे।
"#लवभाभी"।
[लड़का 2] भैया ने तो हमें शादी में भी नहीं बुलाया था।
हमें भी मौका दीजिए, साथ में मज़े करने का।
आ गया ना।
[लड़का 2] अरे भैया, बताओ, हैंडल भी टूट गया!
[रानी] ग़लती मैंने की और भुगत रिशू रहा था।
एक नील था जो भाग गया।
और एक रिशू था…
जो मेरे लिए दुनिया से लड़ रहा था।
[रूमानी संगीत]
[लड़कों के ज़ोर से हंसने की आवाज़]
सूटकेस निकाल दो मेरा, प्लीज़। मैं नहीं जा रही कहीं।
जो सजा देनी है ना, दे देना, तुम्हारे साथ ही रहूँगी मैं।
मैं नहीं जा रही कहीं।
[रानी] और उस दिन मैंने ठान ली, कि अब चाहे जो भी हो जाए,
मैं रिशू को छोड़कर कभी नहीं जाऊँगी।
पता नहीं ये मेरी ज़िद थी,
मेरा प्यार,
या मेरा पश्चाताप।
-[डरावना संगीत] -[हंसने की आवाज़]
[उदास संगीत]
[हंसने की आवाज़]
[रानी के हंसने की आवाज़]
[रूमानी संगीत]
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[चीखने की आवाज़]
[दर्द से कराहने की आवाज़]
आह।
[कराहने की आवाज़]
[दर्द से कराहने की आवाज़]
आह।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
बटुआ?
धोबी को पैसे देने हैं।
अंदर रखा है।
[रहस्यपूर्ण संगीत जारी]
पेपर सोप
[रानी] सामने एक ऐसा आदमी खड़ा था जिसकी आँखों में खून सवार था।
मरते-मरते बची कई बार।
[उदास संगीत]
पर कहते हैं ना नफ़रत भी उसी से होती है जिससे बहुत प्यार होता है।
[डरावना संगीत]
बटुआ।
[रानी] जब पहली बार रिशू से मिली थी ना
तो एक इंजीनियर से मिली।
दूसरी बार, अपने पति से।
और तीसरी बार, अपने आशिक से।
ऐसा आशिक जिससे मैं भी बहुत प्यार करने लगी थी।
इतना प्यार कि अब अपनी अक्ल, बुद्धि,
यहाँ तक कि जान तक गंवाने को तैयार थी मैं।
[रानी] पंडित जी लिखते हैं,
"अभी उनकी आँख में खटक रही हूँ तो क्या?
कभी तो दिल में धड़कूँगी।"
[चीखने की आवाज़]
[कराहने की आवाज़]
[रानी दर्द से कराहते और रोते हुए]
[रोने और कराहने की आवाज़]
[डरावना संगीत]
तो ये मान लें कि आपको पता था कि आपके पति आपको मारना चाहते हैं।
आपने पुलिस से कुछ नहीं कहा।
अपने घरवालों को नहीं बताया।
मरने के लिए वहाँ पर रुक गईं, हाँ?
नहीं कहा, सर।
नहीं भागी।
जब ग़लती मैंने की है,
तो सजा भी तो मुझे ही मिलनी चाहिए।
मैडम, आप ख़ुद पागल हैं कि हमें पागल बना रही हैं?
सर, पागलपन की हद से ना गुज़रे, वो प्यार ही क्या, सर।
[कराहने की आवाज़]
[रोमांचक संगीत]
[डरावना संगीत]
[रानी] पंडित जी अपनी किताब में लिखते हैं,
"अमर प्रेम वही है जिस पर खून के हल्के-हल्के से छींटे हों
ताकि उसे बुरी नज़र ना लगे।"
[भीड़] ज़ोरदार, ज़ोरदार।
-क्या बात है। -गज़ब।
पहले तो इस कमबख़्त दिनेश पंडित को घसीट कर लाओ थाने में।
जी, सर।
सीधे-सीधे मुद्दे की बात कीजिए।
आप ये आधिकारिक बयान दे रही हैं कि आपके मृत पति आपको मारना चाहते थे।
जी।
तो फिर, आपने क्या किया?
इंतज़ार।
किस चीज़ का?
क़त्ल करने के मौके का?
माफ़ी का।
[अफ़ज़र] भाभी जी आ रही हैं, बे।
[बोतल रखने की आवाज़]
क्या हाल हैं, भाभी?
रिशू, खाना बन गया है। लगा दूँ?
हाँ।
थोड़ा ज़हर भी छिड़क देना उसमें।
[उदास संगीत]
आओ यार, अफ़ज़र, तुम्हें एक मज़ेदार कहानी सुनाता हूँ।
वैसे भी पूरे मोहल्ले ने हमारी पिक्चर देख रखी है।
तुम क्यों पीछे रहो? तुम तो हमारे दोस्त हो, यार।
तुम्हारा तो हक़ बनता है।
[रिशू] सुनो।
रिशू।
वो कहानी सुनी है तुमने, वो राजा वाली? जो बाज़ार में जाता है।
रिशू, प्लीज़।
[अफ़ज़र] कौन से राजा वाली?
होता ये है, एक राजा होता है और वो भरे बाज़ार में ना
ऐसे इतरा के, अपनी छाती एकदम चौड़ी करके, ऐसे घूम रहा होता है
एक बढ़िया सी मखमल की शाल ओढ़े।
जब अचानक से एक बच्चा ज़ोर से चिल्लाता है और बोलता है,
"अबे, देखो, राजा तो नंगा घूम रहा है।"
[हंसने की आवाज़]
तब जाके उसे पता चलता है कि वो पूरा बाज़ार नंगा घूम आया।
उसका भ्रम था वो।
बेचारा मुस्कुराता रहा,
पूरा बाज़ार हंसता रहा उसपे।
समझे नहीं हम।
[रिशू] समझोगे।
-हमारी भी जो स्थिति है ना… -[अफ़ज़र] हम्म।
…वो बिलकुल उस राजा जैसी है।
नंगा हूँ मैं! नंगा हूँ।
ये पूरा ज्वालापुर जानता है कि मेरी बीवी ने मुझसे नहीं, मेरे मौसेरे भाई से प्यार किया।
[अफ़ज़र] रिशू…
क्या प्यार किया है! वाह!
क्या बक रहे हो बे!
हम बकवास नहीं कर रहे, हम सच बोल रहे हैं।
-हम साले शराफ़त दिखाते रहे… -[अफ़ज़र] हम्म।
…लेकिन लुटेरे आकर हमारी मोहब्बत को लूटकर चले गए हमारे सामने।
[अफ़ज़र] तूने साले ज़्यादा पी ली है। तुम जाकर सो जाओ। खाना खा लो जाके।
अरे, खा लेंगे। कहाँ जा रहे हो, भाई?
सुबह मिलते हैं।
अरे, बैठो।
हाँ?
अरे, अफ़ज़र। अभी तो बात शुरू हुई है।
[रिशू] कमाल है यार!
किसी को बात ही नहीं करनी है।
[रानी] मुझसे बात करो।
सजा तो दे ही रहे हो तुम मुझे।
अब लड़ लो, चीख लो, चिल्ला लो ना मुझ पे।
क्यों? किसलिए?
तो फिर ऐसे मुस्कुराते रहोगे?
और किस लायक़ छोड़ा है, रानी जी?
[पूर्वाभासी संगीत]
मौका दे रही हूँ।
दे दो धक्का।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[सिसकने की आवाज़]
[कराहने की आवाज़]
[डरावना संगीत]
कहा था ना, चली जाओ। नहीं रोकूँगा तुम्हें!
वरना मार दूँगा तुम्हें मैं!
रिशू, जिसको मारना होता है ना, वो मार देता है।
मारना है ना? मारो धक्का। मारो धक्का!
अभी दो धक्का!
नहीं तो जाओ ले आओ चाकू! मारो चाकू।
और अगर नहीं हो रहा है ना,
तो प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो।
प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो। माफ़ करना।
मुझसे ग़लती हो गई। माफ़ कर दो मुझे। मुझसे ग़लती हो गई।
मुझे माफ़ कर दो।
[सुबकने की आवाज़]
तुम बहुत अच्छे हो।
-तुम बहुत… तुम बहुत अच्छे हो। -[सिसकने की आवाज़]
[सुबकने की आवाज़]
अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए इतना सा भी प्यार बचा है ना, मेरे लिए वो भी ठीक है।
मैं उससे काम चला लूँगी।
तुम लायक़ नहीं हो प्यार करने के।
नहीं हूँ, बिलकुल नहीं हूँ।
पर तुमने किया ना, बहुत सारा किया।
[रानी के सुबकने की आवाज़]
तुमने इतना प्यार किया, मुझे अपने आप से घिन आ रही है कि तुम्हें छोड़ के नील के पास गई।
मुझे माफ़ कर दो। मेरी ग़लती है। मुझे माफ़ कर दो।
[रानी] मैंने कहा ना मुझे माफ़ कर दो।
[अंग्रेज़ी में] मुझे माफ़ कर दो।
[रोने की आवाज़]
[सुबकने की आवाज़]
[हिंदी में] हमारे जैसे शरीफ़ लोग ना…
न दिखाई देते हैं, न सुनाई देते हैं।
[रोने की आवाज़]
हाँ, बस घर का पंखा कूलर ठीक कराना हो तो बुला लेते हैं।
-हीरो नहीं बनता है ना कभी। -[रानी] नहीं।
नहीं चाहिए हीरो।
मुझे रिशू चाहिए।
मुझे सिर्फ़ तुम चाहिए।
[सिसकने की आवाज़]
दोबारा से शुरू कर सकते हैं, प्लीज़?
एक बार, प्लीज़।
प्लीज़।
[रानी अंग्रेज़ी में] मुझे माफ़ कर दो।
[सुबकने की आवाज़]
[अंग्रेज़ी में] माफ़ करना।
[उदास संगीत]
[सुबकने की आवाज़]
[रूमानी संगीत]
♪ जो बीता है वो कल है ♪
♪ ये जो नया पल है ♪
♪ आ थाम ले इसे ज़रा ♪
♪ धीरे-धीरे ♪
♪ संग तेरे ♪
♪ दिन ये संभलने लगा ♪
♪ जो सपने संभाले अब ♪
♪ तेरे हवाले हैं ♪
♪ आ देख ले इन्हें ज़रा ♪
♪ बंधी सांसें ♪
♪ इस तरह से ♪
♪ कि मौसम बदलने लगा ♪
♪ मिला यूँ ♪
♪ जैसे बिछड़ा न तू ♪
♪ मिला यूँ ♪
♪ खिला यूँ ♪
♪ जैसे बिगड़ा न तू ♪
♪ खिला यूँ ♪
♪ मेरा, तू मेरा ♪
मार दिया क्या?
फिर पड़ोसी ने आकर घंटी बजाई, देखा…
आज क्या बन रहा है खाने में?
-हवस। -[रिशू के पापा] हवस?
हवस का मटर।
-[रिशू के पापा] हवस का मटर? -गाजर-मटर।
♪ हो, तेरी खुश्बू लिए ♪
♪ अब महका करूँ ♪
♪ तेरी आँखों से बातें करूँ ♪
♪ तेरी सांसों में धड़कनें ♪
♪ अपनी सुनूँ ♪
♪ जी उठूँ ♪
♪ मेरी लकीरें अब ♪
♪ है तेरे हाथों में ♪
♪ बन जाऊँ साया तेरा ♪
♪ मुस्कुराने ♪
♪ का बहाना ♪
♪ दे दूँ तुझे नया-नया ♪
♪ मिला यूँ ♪
♪ जैसे बिछड़ा न तू ♪
♪ मिला यूँ ♪
♪ खिला यूँ ♪
♪ जैसे बिगड़ा न तू ♪
♪ खिला यूँ ♪
♪ मेरा है, तू मेरा ♪
रिशू भैया?
[पूर्वाभासी संगीत]
माफ़ करना।
[लड़की अंग्रेजी में] …बहुत बड़ा वाला, ठीक है?
[रिशू] रानी?
[ज़ोर लगाने की आवाज़]
[लड़की अंग्रेजी में] ये क्या कर रही है? पागल है क्या?
[रोमांचक संगीत]
[सीटबेल्ट खींचने की आवाज़]
[नील हिंदी में] रिशू भैया, जो बैठी हुई थी उसको उतार दिया मैंने।
पीछे जगह खाली हो गई है। पूछ लीजिए। बैठेंगी क्या?
[रोमांचक संगीत]
-इसकी तो मैं… -[रानी] रिशू।
[पूर्वाभासी संगीत]
प्लीज़ उसे जाने दो, रिशू।
नहीं छोडूँगा।
[चौंकने की आवाज़]
[रिशू बड़बड़ाते हुए]
[जोशीला संगीत]
[रिशू के गुर्राने की आवाज़]
-[रानी] क्या हुआ? -अटक गई है गाड़ी।
[आदमी] टाइमिंग बेल्ट टूट गई है। समय लगेगा।
[रानी] हाथ धोने हैं। वॉश बेसिन कहाँ है?
[आदमी] आगे है। वहाँ धो लीजिए।
ठीक है, जल्दी करो।
[सांस छोड़ने की आवाज़]
दर्द हो रहा है?
थोड़ा।
पर जब गैस वाली आग से चोट लगी थी ना
तब ज़्यादा दर्द हुआ था।
गुस्से में था।
[आह भरने की आवाज़]
माफ़ करना।
ऐसा क्रिमिनल ना मैंने पंडित जी की किताब में भी नहीं पढ़ा।
चलो शुक्र है।
किसी बात पे तो पंडित को पीछे छोड़ा।
"तुम अपने दिमाग़ की नहीं सुनती,
मैं अपने दिल की नहीं सुनता।"
[दोनों साथ में] "सुनता कहाँ है यह शहर कभी किसी की।"
[दोनों साथ में] "कसौली का कहर।"
[रूमानी संगीत]
पंडित जी कबसे पढ़ना शुरू किया तुमने?
जबसे प्यार में पड़े हैं।
-[रानी] आउच। -[रिशू] माफ़ करना। लगी तो नहीं?
[दरवाज़ा ज़ोर से खोलने की आवाज़]
[रूमानी संगीत]
[रानी] और फिर, फिर ऐसा लगा कि अब सब ठीक हो जाएगा।
[तनावपूर्ण संगीत]
[ब्रेक लगने की आवाज़]
तो धमाके वाले दिन पड़ोसी ने बताया था ना
कि नील ढाई बजे अंदर गया था घर के।
[बच्चों के खेलने की आवाज़]
[किशोर] उसके पंद्रह मिनट के बाद, रिशू गया अंदर।
और कुछ समय बाद, ये बाहर आई।
सर।
रिशू अगर मैडम के बाहर जाने से पहले मर गया था,
तो मैडम बाहर आईं और फिर घर पे बच्ची को भेजा
कि रिशू भैया को बोलो कि दरवाज़ा अंदर से बंद कर लें।
मुन्नी, रिशू भैया को बोल दरवाज़ा बंद कर लें।
-रिशू भैया! -[रस्तोगी] पर, सर,
मुन्नी ने तो ये बयान दिया है
कि नील ने दरवाज़ा बंद किया था।
बुलाओ, रिक्शे वाले को बुलाओ।
ओ, तीन पहिया, इधर आ! अबे, जल्दी आ!
-बोल सर को। -[किशोर] बता।
साहब, दोपहर सवा तीन से सवा चार, तो मैडम हमारे साथ थीं।
कहाँ पर?
बाज़ार लेना।
[रिक्शावाला] मैडम हमारे रिक्शे से बाज़ार गईं।
हम बाज़ार लेकर गए थे उनको।
हम गौर से देखें, मैडम तो मज़े में टहल रही थीं।
हमने इंतज़ार किया।
फिर हम वापस रिक्शे में बिठाकर गली में लाए।
हम देखे, मैडम कुत्तों को बोटियाँ डाली।
-और फिर, धड़ाम! -[विस्फ़ोट की आवाज़]
साहब, मैडम तो बाहर थीं।
क़त्ल कैसे…
नहीं कर सकती ना?
अरे, मुझे तो तू ही कातिल लग रहा है!
टाँग अड़ाने का ज़्यादा शौक है तुझे,
बाकी की ज़िंदगी एक टाँग से रिक्शा चलाएगा, समझा!
-चल निकल इधर से! -[आदमी] अरे, भाग ले जल्दी!
जिसको देखो कहानी सुनाए जा रहा है।
गड़बड़ यहाँ है कि, इतने तनाव में अपने पति
और प्रेमी को अकेला छोड़ के,
-मैडम बाज़ार घूमने क्यों निकलीं? -[रहस्यपूर्ण संगीत]
सर, क़त्ल के हथियार को छुपाने?
कहाँ है?
कब छुपाया, किधर है?
[किशोर] मेरा दिल, दिमाग़ कह रहा है कि ये सब मैडम का ही खेल है।
किताबी कविता सुना के घुमा रही है।
[फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़]
हेलो?
हाँ?
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[आदमी] राम-राम, साहब।
हाँ, सिंह साहब, दिखाओ। क्या मिला?
[सिंह] ये देखिए, सर।
सर, स्वच्छ अभियान के वक़्त ही ब्लास्ट हुआ था।
तब ये रिकॉर्डिंग किया था।
और ये रहा आपका नील।
[लोगों की बातचीत की आवाज़]
[वीडियो में लोगों की आवाज़]
अच्छा।
तो ये रहा।
[सिंह] सर, रिप्ले देखिए।
[इंस्पेक्टर] कब से प्रेमी को ढूंढ रहे हैं,
और प्रेमी तो सामने ही डुबकी मार रहा था!
जब तुम लोग वीडियो-वीडियो खेल रहे थे,
मैडम का प्रेमी भाग रहा था।
[किशोर] पुलिस पूछताछ करने की बजाय चश्मदीद गवाह बन गई है इस केस में।
कहो, पुलिस को क्या पता लगा पुलिस के वीडियो से?
-यही सर… -[कमिश्नर] ये चल क्या रहा है यहाँ?
क्या चल रहा है भई यहाँ?
सारी पुलिस इस कमरे में भाभी जी के केस पर लगी हुई है।
बहुत तगड़ी लीड मिल गई है। अब बचेगा नहीं, सर, पकड़ लेंगे।
दो महीने तुमने पहले उस नील के चक्कर में लगवा दिए।
-सर, अब केस सुलझाने में… -सुलझाया क्या?
-सर, वो… -ऑनर किलिंग का केस आया है।
मीडिया सारा तैयार खड़ा है।
छोड़िए भाभी जी का केस। लगिए सब उस पे।
सर, प्लीज़ आप दो दिन दे दो बस।
कोर्ट ऑर्डर आ गया है, सर वो…
दो दिन में लाई डिटेक्टर करेंगे, सब साफ़ हो जाएगा।
और दो दिन में नहीं किया ना तो तुम भी भाभी जी के साथ निकल लेना।
[आदमी] बेवकूफ़।
ये भाभी कहाँ है?
मैडम कहाँ है? बुलाओ उसको!
ये देखो, मैडम।
नील जी की झलक।
ढाई बजे नील जी गली में आए।
फिर रिशू घर के अंदर गया।
फिर आप बाहर आईं।
फिर धमाका हुआ।
और फिर नील जी तैरने के लिए निकल पड़े, धमाके के ठीक बाद।
[तनावपूर्ण संगीत]
नील कहाँ है, मैडम?
पता नहीं, सर।
[हरयाणवी में] साली, रांड!
कहानी सुना-सुना के हमारे कान पका दिए।
चल, सीधी तरह बता क़त्ल का हथियार कहाँ है,
-नहीं तो एक पड़ेगा। -[किशोर] बिंदिया।
[हिंदी में] ठीक से याद नहीं आएगा यहाँ पे।
इसको अंदर ले जा और अच्छे से याद दिला।
[बिंदिया हरियाणवी में] क्या कह रही थी, हाँ?
प्यार पागलपन है।
चल, तुझे मैं दिखाती हूँ। ला दे।
-क्या होता है पागलपन। हाँ? -[पीटने की आवाज़]
-[रानी के चिल्लाने की आवाज़] -[बिंदिया] हैं?
[रानी] आह!
[बिंदिया हरियाणवी में] और क्या कहता है तेरा पंडित, हाँ?
-बता! -[पीटने की आवाज़]
[बिंदिया हरियाणवी में] बता पंडित क्या कहता है?
[रानी के कराहने की आवाज़]
[हरियाणवी में] सर जी। बहुत ही ढीठ है।
बहुत मारा, पर कुछ ना बोला साली ने।
[हिंदी में] वो तकनीशियन से पूछो लाई डिटेक्टर टेस्ट कल कर सकता है क्या।
-जी, सर जी। -और सुनो।
[बिंदिया] हाँ जी?
मैडम को छोड़ दो।
[बिंदिया हरियाणवी में] ठीक है।
[बिंदिया] ए! रानी, चल। उठ।
[उदास संगीत]
[कराहने की आवाज़]
[दर्द में आह भरते हुए]
मैडम?
इतनी देर नहीं होनी चाहिए।
बेटा, कल एक बार डॉक्टर के यहाँ हो आएंगे।
कल दोबारा थाने बुलाया है मुझे।
[किशोर] मिश्रा, सब बराबर है ना?
[मिश्रा] बिलकुल सही रिकॉर्डिंग आ रही है।
-कहीं ग़लती की कोई संभावना नहीं है। -[मशीन की बीप की आवाज़]
[किशोर] आइए।
हर हरकत पकड़ लेती है ये।
-पसीना छूटना, होंठ का हिलना, आंख में पानी। -[मशीन की बीप की आवाज़]
[किशोर] सब नोट होता है।
और दिल की धड़कन तो मशीन पकड़ ही रही है।
-शुरू करें, मिश्रा? -[मिश्रा] बिलकुल।
सर, बाथरूम?
[रोमांचक संगीत]
[बिंदिया हरयाणवी में] जल्दी कर।
कितनी देर लगाएगी?
जल्दी निकल बाहर!
रानी!
क्या कर रही है?
जल्दी कर!
[बिंदिया हरयाणवी में] अंदर ही बैठकर मरेगी?
ज़्यादा होशियारी ना दिखा…
रानी, मैं दरवाज़ा खोल के अंदर आ जाऊँगी!
[हिंदी में] आपका नाम रानी कश्यप है।
[बिंदिया] रानी! जल्दी निकल बाहर। निकल ना!
हाँ, मेरा नाम रानी कश्यप है।
[मिश्रा] आपका नाम रानी कश्यप है?
-हाँ, मेरा नाम रानी कश्यप है। -[तनावपूर्ण संगीत]
आपकी उम्र अट्ठाईस साल है?
जी।
[मशीन की बीप की आवाज़]
आप नर्वस हैं, मैडम?
आपके दिल की धड़कन पहले से ही तेज़ है।
जी, नर्वस हूँ।
[मिश्रा] गहरी सांसें लीजिए, मैडम।
[मशीन की बीप की आवाज़ जारी]
उस दिन 30 नबंवर को क्या हुआ था?
सर, उस दिन रिशू के मम्मी-पापा बरेली गए थे एक रिश्तेदार की शादी के लिए।
तुम गैस का ध्यान रखना, बंद करना भूलना मत, पता चला जब तक हम आए पूरा घर उड़ा दिया।
-बाय। -ध्यान से, हाँ।
बाय। ख़याल रखना सबका।
[रानी] और हमने घर पर रिशू के दोस्तों के लिए दावत रखी थी।
तुम्हारे तो दोस्त आ रहे हैं ना घर पर आज?
मैंने रिशू को बोला था कि ऑफ़िस से आते वक़्त, कुछ सामान ले आए।
रान तो मैं ले आई हूँ, इलायची, हल्दी, ये सब लेते…
हाँ, जो कुछ भी है, मुझे लिस्ट भेज दो।
-[रानी] पर उस दिन रिशू जल्दी लौट आया। -लो भई, आ गया…
[रानी] और उसने मुझे और नील को बात करते हुए देखा।
रिशू, ये…
[नील] आइए, आइए, रिशू भैया, आइए।
तुम इनको बताती क्यों नहीं हो कि इनको छोड़कर मेरे साथ जाने वाली हो?
झूठ बोलना बंद करो!
रिशू, इसने कहा कुछ बात करनी है इसलिए आया यहाँ।
रानी, तुम बाहर जाओ। हम दोनों आपस में निपटा लेंगे।
[रानी] रिशू को मैंने काफ़ी समझाने की कोशिश की।
रानी, जाओ। हम सिर्फ़ बात कर रहे हैं। और कुछ नहीं।
[रानी] लेकिन वो नहीं माना।
ज़िद करने लगा।
फिर मैं उन दोनों को छोड़ के बाज़ार से सामान लेने निकल गई।
रिक्शा!
घर से निकलते हुए दरवाज़ा खुला रह गया था।
रिशू भैया को बोल दरवाज़ा बंद कर देंगे।
[मुन्नी] रिशू भैया! दरवाज़ा बंद कर दो।
[रानी] फिर मुझे रुहिना दिखी।
खीर बनाऊँगी शाम को। आपके घर भिजवाती हूँ।
-[रुहिना] अरे वाह। -[रानी] बस उसके बाद मैं रिक्शे में बैठ गई।
जिस कसाई से रान लिया था, उससे मेरी बहस हो गई थी।
आपके चाकू में ज़ंग लगा है।
आँख में कंकर हो सकती है पर हमारी छुरी में ज़ंग नहीं।
आप ये मुझे दे दीजिए, मैं कहीं और से कटवा लूँगी।
तो फिर मैं दूसरे कसाई के पास गई,
रान लेके, उससे कटवाया, घर की तरफ़ निकल गई।
गली में कुत्ते थे, मैंने उन्हें बोटियाँ खिलाई।
-[धमाके की आवाज़] -[कुत्ते भौंकते हुए]
[खांसने की आवाज़]
[रानी] रिशू!
रिशू!
रिशू!
[मशीन की बीप की आवाज़]
[मिश्रा] दरअसल, सामान्य सवालों में भी दिल की धड़कन बढ़ी हुई है।
जो कि सही है।
और बाकी के जवाब में भी वही लय है।
इसलिए कुछ पता नहीं चल रहा है।
अब? क्या, करना क्या है?
एक तरीका हो सकता है।
मैं उससे अब वो सवाल पूछूँगा जिसके जवाब सिर्फ़ हाँ या ना होंगे।
हाँ।
मैडम हमेशा यही जूते पहनती है क्या?
क्यों?
-मिला। चलो चलें। -[इंस्पेक्टर] हाँ?
[बिंदिया हरयाणवी में] ज़रा जूता निकालिए, मैडम।
[रानी के कराहने की आवाज़]
[बिंदिया हरयाणवी में] यह देखिए, सर जी।
कील गाड़ रखी है मैडम ने।
[हिंदी में] कील से दर्द होता है।
और दर्द से धड़कन तेज़।
और अब मैडम बोलेंगी कि इनको पता नहीं था कि जूते में कील गड़ी हुई है।
मिश्रा, दबोच ले अभी।
[मशीन की बीप की आवाज़]
[मिश्रा] क्या आपका नाम रानी कश्यप है?
जी।
क्या आपकी उम्र 28 साल है?
जी।
क्या आपने अपने पति का क़त्ल किया है?
नहीं।
क्या आपके नील त्रिपाठी के साथ संबंध थे?
जी।
क्या आपके प्रेमी ने आपके पति का क़त्ल किया?
[तनावपूर्ण संगीत]
पता नहीं।
[प्रिंटिंग की आवाज़]
क्या आपने अपने पति का क़त्ल किया है?
जी नहीं।
[प्रिंटिंग की आवाज़]
[किशोर] सर, मुझको पता है क़त्ल इसी ने किया है।
इसको पता है प्रेमी कहाँ है, बस मशीन में…
बकवास मत करो।
भाभी जी का किस्सा ख़त्म। ऑनर किलिंग वाला केस फौरन शुरू करो।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[खुशनुमा संगीत]
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[खुशनुमा संगीत]
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[किशोर] मैडम चली गई, केस फ़ाइल भी बंद हो गई।
पर मेरे लिए ये केस हमेशा ओपन रहेगा।
थाने में सब कहते रहे कि इस केस को मैंने अपने दिल पे ले लिया है।
पाँच साल बाद
[किशोर] और इस बहस में पाँच साल निकल गए और मेरा ट्रांसफ़र हो गया।
पुलिस
-सब ले लिया ना? -हाँ।
[रेलवे उद्घोषक की आवाज़]
सामान रखवा दिए हैं, सर।
नई पोस्टिंग के लिए शुभकामनाएं।
बहुत याद आएगी, सर आपकी।
-अच्छा। -शुक्रिया, सर।
-कितना हुआ? -अरे, हमें भी खिलाओ।
देखो, अंकल क्या कह रहे हैं।
[आदमी] अरे, हमको भी खिलाओ।
[किशोर की बीवी] और मेरा क्या?
सर, आपने दिनेश पंडित की कोई किताब पढ़ी है?
[रानी] पंडित जी अपनी किताब में लिखते हैं,
"अमर प्रेम वही है जिस पर खून के हल्के-हल्के से छींटें हों!"
[रहस्यमय संगीत]
[किशोर] एक बार फिर सावित्री ने भैरव का दिल जीत लिया था।
पर भैरव को मालूम नहीं था कि अपना प्यार पाने से पहले
उसका आख़िरी इम्तिहान अभी बाकी था।
[नोटिफिकेशन आने की आवाज़]
[रानी] इलायची, लौंग, किशमिश, बादाम, और… रिशू।
[रिशू] लोगों की नज़र से देखो तो रानी एक लंबी बहस है।
जिसमें मेरे लिए इल्ज़ाम है, अपमान है।
पर मुझे ये बहस करनी है, ज़िंदगी भर।
और सच कहूँ, तो ज़िंदगी की हर वो बहस अब उसी के साथ करनी है।
मुन्नी, हटो, हटो।
क्योंकि मैंने उसके साथ जो किया बहुत ग़लत किया, लेकिन फिर भी वो मेरे साथ रही।
और आज…
[रिशू] लो भई, आ गए काजू-किशमिश।
[रिशू] आज मैं रानी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।
[नील] आइए, आइए, रिशू भैया, आइए।
आप ही की बात चल रही थी। ले आए। बादाम-किशमिश ले आए।
नील, यहाँ से निकल जाओ।
बता दो ना इनको।
कि इनको छोड़कर मेरे साथ आने वाली हो। बता दो ना।
झूठ बोल रहे हो तुम!
[नील] मैं झूठ बोल रहा हूँ?
रिशू, ये हमें परेशान करने यहाँ पर आया है। और कुछ काम नहीं है इसका यहाँ।
मैं परेशान करने आया हूँ?
परेशान ये भाईसाहब जो खड़े हैं इन्होंने मुझे कर रखा है।
[नील] बताते क्यों नहीं हो आप इनको अपनी हरकतें, रिशू भैया?
दिल्ली आए थे ये। नोयडा मेरे पीछे पेचकस लेकर भागे हैं।
और अब इन्होंने मेरी सोसायटी में चिट्ठी लिख दी कि मैं सेक्स अपराधी हूँ।
मैं सेक्स अपराधी हूँ?
बीवी अगर आपसे बिस्तर में खुश नहीं रखी जाती
तो शादी क्यों करते हो, यार आप लोग?
हम जैसे लोग फंस जाते हैं और फिर बुलाया जाता है हमको सेक्स अपराधी।
सुनिए, मैं इसीलिए यहाँ पे आया हूँ।
हम में से कोई अपराधी नहीं है।
[नील] सबकुछ मर्ज़ी से हुआ था। कोई ज़ोर-जबरदस्ती नहीं थी।
सामने खड़ी हैं, पूछ लो।
बहुत अच्छे से हुआ।
याद भी आती होगी इनको हमारी।
हाँ, करती हूँ याद। बहुत बड़ी ग़लती थी तुम मेरी।
ऐसे याद करती हूँ तुम्हें मैं!
मैं ग़लती हूँ?
तो फिर इनको छोड़कर मेरे पास क्यों आई?
क्योंकि सच्चा प्यार पाने के लिए ना बहुत सारे मेढकों को मुँह लगाना पड़ता है।
और तुम ना उसी कैटेगरी के हो।
मेंढक?
ये मेंढक तो आपका बहुत बड़ा फ़ैन है, रानी जी।
और आपका फ़ैन बेस अब मैं बढ़ाता हूँ।
तो मैंने ना प्यार में ना आपके कुछ वीडियोज़ लिए थे, आपको तो याद है?
अब उनको मैं अपने ग्रुप में डालूँगा। शेयर करूँगा।
[नील] आपके फ़ैन बढ़ जाएंगे।
और रिशू भैया, बहुत सारे पेचकस ऑर्डर कर दो।
क्योंकि भागना पड़ेगा कई लोगों के पीछे, जो-जो ये देखेगा।
ठीक दिख रहा है? अच्छी लग रही हैं आप।
याद आया? तब तो बड़े मज़े आ रहे थे?
-[रिशू गुर्राते हुए] -[रोमांचक संगीत]
[रानी] आह!
[बर्तन दीवार से टकराने की आवाज़]
[लकड़ी और कांच टूटने की आवाज़]
-रिशू! -हटो!
-[ज़ोर लगाने की आवाज़] -[कराहने की आवाज़]
पागल हो तुम, पता है तुम्हें?
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[चिल्लाने की आवाज़]
[नील] उठ!
हाँ?
दिमाग़ ख़राब हो गया है तुम्हारा!
[ज़ोर लगाने की आवाज़]
[कराहने की आवाज़]
[हाँफने की आवाज़]
रिशू…
-[रानी] उठो। -[रिशू के खांसने की आवाज़]
खून।
[गंभीर संगीत]
[रिशू] नील?
नील…
नील?
नील!
नील!
[रानी के रोने की आवाज़]
[रानी के सुबकने की आवाज़]
मैं पुलिस को बुलाती हूँ।
-मैं पुलिस को बुलाती हूँ। -क्या?
मर गया है।
-मर गया है। -नहीं, पुलिस को नहीं बुलाओगी।
-[रानी] मैंने मार दिया। -नहीं, तुमने इसे नहीं मारा, रानी।
मैंने मार दिया, रिशू।
ये दुर्घटना थी। ये ग़लती से मरा है।
हमने नहीं मारा इसको जानबूझकर।
और इसके लिए जेल नहीं जाओगी तुम।
इसके लिए नहीं जाओगी तुम जेल। इसके लिए जेल नहीं जाओगी। सुनो, मेरी बात सुनो।
इतना सबकुछ होने के बाद अब चीज़ें ठीक हुई है हम दोनों के बीच।
मैं तुमसे दूर नहीं रहूँगा एक मिनट।
[रहस्यपूर्ण संगीत]
[हाँफने की आवाज़]
अब?
अब क्या करें?
क्या करना है?
"हर अचानक किए अपराध में एक मौका मिलता है अपराध छिपाने का।"
[रिशू] मैंने पंडित की सिर्फ़ एक ही किताब पढ़ी है।
"कसौली का कहर"।
-[रानी] नहीं। -हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है।
नहीं, रिशू, ये पागलपन है।
हमारे पास और कोई चारा नहीं, रानी।
कुछ नहीं होगा। कोई नहीं पकड़ा जाएगा।
मेरी बात सुनो।
[रिशू] कुछ नहीं होगा। नहीं।
अब अलग नहीं रहना है।
मैं जो कह रहा हूँ वो करती जाओ।
प्लीज़।
[सनसनीख़ेज़ संगीत]
हम पकड़े जाएंगे।
बर्फ, बर्फ़!
बर्फ़!
थोड़ी बर्फ़ लेकर आओ, जाओ!
[रानी] बर्फ़… बर्फ़ कहाँ है?
रानी!
[रिशू] रानी!
[सनसनीख़ेज़ संगीत जारी]
जाओ जाकर केरोसीन लाओ। जाओ!
[रिशू] अख़बार। अख़बार लाओ!
लाओ मुझे दो।
[काग़ज़ की सरसराहट]
-[चिल्लाने की आवाज़] -[कटने की आवाज़]
[उदास संगीत]
[रानी] नहीं।
[अस्पष्ट बात]
रानी, उठाओ इसे।
क्या कर रही हो, रानी?
-प्लीज़। -नहीं, नहीं।
अलग रहना है मुझसे? नहीं ना?
[सिसकने की आवाज़]
तो तुम्हें यह करना पड़ेगा। हमारे लिए।
प्लीज़, रानी। ठीक है?
आओ।
[रिशू] पकड़ो इसे!
रानी! बस कर डालो!
[अस्पष्ट बात]
नहीं!
[भावुक संगीत]
नहीं!
[कटने की आवाज़]
[रिशू के कराहने की आवाज़]
रिशू! रिशू!
आँखें खोलो! आँखें खोलो!
आँखें खोलो, रिशू!
रिशू।
[उदास संगीत]
♪ ओ, तेरे आँसू से छलका है दर्द मेरा ♪
♪ तेरी खुशियाँ हैं कर्ज़ मेरा ♪
♪ मेरे खून का हर कतरा-कतरा ♪
♪ कह रहा ♪
♪ हम ही कहानी हैं ♪
♪ हम ही निशानी हैं ♪
♪ हम ही हमारे हैं यहाँ ♪
♪ छूटा ग़म है ♪
♪ ख़ुशी नम है ♪
♪ हम ही किनारे हैं यहाँ ♪
♪ मिला यूँ ♪
♪ जैसे बिछड़ा न तू ♪
♪ मिला यूँ ♪
♪ खिला यूँ ♪
♪ जैसे बिगड़ा न तू ♪
♪ खिला यूँ ♪
♪ मेरा है, तू मेरा ♪
-[दरवाज़ा खोलने की आवाज़] -[बच्चों के खेलने की आवाज़]
[तनावपूर्ण संगीत]
रिक्शा! रिक्शा!
[बच्चों के खेलने की आवाज़]
[रानी] मुन्नी, रिशू भैया को बोल दरवाज़ा बंद कर दें।
[मुन्नी] रिशू भैया! रिशू भैया! दरवाज़ा बंद कर दो!
[दरवाज़ा बंद करने की आवाज़]
[बच्चों की आवाज़]
खीर बनाऊँगी शाम को। आपके घर भिजवाती हूँ।
[बच्चों के खेलने की आवाज़]
अच्छा, यहाँ मत खेलो।
चलो, यहाँ से हटो।
[सनसनीख़ेज़ संगीत]
[छुरा तेज़ करने की आवाज़]
[रानी] एक मिनट।
आप ये रहने दीजिए, मैं कहीं और से कटवा लूँगी।
एक और है।
ये भी काट देंगे, प्लीज़?
[स्विच चालू करने की आवाज़]
[रिक्शे की घंटी की आवाज़]
[सनसनीख़ेज़ संगीत]
[रिशू के चीखने की आवाज़]
[सनसनीख़ेज़ संगीत जारी]
-[धमाके की आवाज़] -[कुत्तों भौंकते हुए]
-[कराहने की आवाज़] -[पानी में गिरने की आवाज़]
रिशू।
[कुत्तों के भौकने की आवाज़]
[उदास संगीत]
[रिशू के हाँफने की आवाज़]
[रिशू के आह भरने की आवाज़]
[रानी के खांसने की आवाज़]
[रिशू के हाँफने की आवाज़]
[किशोर] "और भैरव हमेशा के लिए अपने प्यार और बलिदान की कहानी लेकर
नदी में समा गया।"
[ट्रेन के चलने की आवाज़]
[हँसने की आवाज़]
[किशोर की बीवी] क्या हुआ? क्यों हंस रहे हो?
प्रेमी की लाश को अपनी लाश बनाकर केस घुमा दिया।
[किशोर] प्रेमी तो फरार ही रहेगा।
उसकी लाश मिलेगी नहीं।
अपना हाथ काट के लाश पर रख दिया,
अपनी बीवी को बचाने के लिए।
आजकल कौन पागल प्यार में ऐसा करता है?
आप तो हमारे लिए एक नाखून भी ना कटवाओ।
[रूमानी संगीत]
[जोशीला संगीत]
[किशोर] "पागलपन की हद से ना गुज़रे तो वो प्यार कैसा,
होश में तो रिश्ते निभाए जाते हैं।"
संवाद अनुवादक: अनुराधा पिल्लई
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