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कई अग्रणी गजलें कहीं नहीं।
थोड़ा सा चुप कराना।
सरकार तक रजिस्टर्ड
मशीन काम करना। तरह से मरना।
इनकाउंटर तो केजरी खाऊँगी जरा।
बरबटी।
तुला लोकधुनों को जीवनचर्या।
अनुबद्ध मुन्नी पायलट, त्रिफला पर करना।
शीत रात।
या एक।
बजे के बस।
अड्डा पगारा तक आई बस की
सऽ पगार अपना कर्जा मोदी सतुआ।
हँसना ही बोला।
सो अब आजा।
अपन कर्जा काट लो। हो तो ना।
डाबर लेत का
पलटू क्योर मदर कर्जा कर लेंगे।
न ही बोला सो कोयल सब व्यवस्थित दिवस देत।
राहत नहीं।
सलाह उठा लाईटरूम उन्हें राघवाचार्य से।
सीखे। हैं।
पंजे खूब नौंटकी करते हैं।
मगर करो तो।
लाईन सुरक्षित है।
तुम तनाव।
नहीं।
खोते भजन।
मजे मजे। दिन।
आता। तो
इनको।
इस। करना करता है।
सेक्स
डिस्ट्रेस गो। माँ।
महिमा। हाँ।
हाँ। यह।
है। माँ
अर्थात।
मैं। एक एक। माँ।
यहाँ है। एक।
माँ गौर।
का। केवल अकेला।
मजा तो है।
नहीं। हाँ।
अनजान
लास्ट के समय।
की जो।
हँस। प्राणी सर्किट रहे। हैं।
उसके।
बनाए भार्या।
तिराहा होते थे।
आज उनका घर था वनमाला रोज।
भाईजी। आना।
थे। हुआ। था।
हाँ, हो।
हाँ। हाँ हाँ।
और। आज। माँ।
देर श्रष्टि। से।
मुक्ति तो।
मना है।
हाँ। यह बात।
अपनी रस से।
माँ, माँ। से।
इश्क। का।
भी। है।
हाँ, और इसी।
में। हाँ।
माँ। हमारी।
हाँ। से।
मैं। माँ।
बेटे।
माँ। का।
वह स्थान टेब।
है। जो संस्कार शील
फौजदार न केवल अरविन्द तुझे हाय।
तू। माँ।
मैं। स्वर्ग
तस्वीरों को। और।
अच्छी।
माँ। माँ।
माँ। हाँ
हाँ हाँ। मैं।
हाँ हाँ
हाँ हाँ और हाँ।
एक ही है माँ।
हाँ। हाँ हाँ।
एक हाँ हाँ हां
हाँ हाँ
हाँ हाँ
हाँ हाँ तो
कहीं एक।
हाँ हाँ हाँ हाँ।
हाँ हाँ
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
हाँ हाँ।
मैं। हाँ हाँ।
तो। माँ।
हाँ हाँ हाँ। हाँ।
कब देखना है?
मैंने हाँ हाँ।
हाँ हाँ हाँ।
हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ।
मन भर लगाता है।
पूजा माँ
पहले सर की मजार पर आना।
तुझे इतना
मैं। समझती
मजार न रसमलाई
की रानी।
मदिरा सदा।
पर्वत।
देना सेटिंग।
गुरु दिन अगम मगर जितना खुला
भाईलाल।
भाई तो सौदा करना पर।
अगर मौका न।
दूँ किलर्स तब तुझे पगार बढ़ना।
हाथ प्रत्येक वेला ही कर लिए।
सप्तमेश देव अपनी इच्छा पूर्ण करता है।
मुनीम नहीं हो रहा है।
मुनीम।
रामराम।
शिव हाँ,
आलस्य घोर वसा नग्न।
अरे बस रहे बस।
नगरों को श्रेष्ठ आर्य गढ़।
न कोई न कोई एक।
रानी मैं बिस्तर।
प्रणाली है
राणी ईराणी। आले।
आज ये शेर बोलो तद थे।
जागृत हो।
तो हीरा कहीं जल।
एवं रेत
वांकानेर से आये तेरे घर दर्शन मने मगर मंगला ज्योति।
सावन महीना भी पूरा धलाई का मेला सा है।
आई फसल का ही तरी अड़चन मोल मांगता सुनार।
है भरवा रहे हैं
माता रानी।
भले ना दिला
एक महीना तो आधा पगार खिला पिला भी
मितुल बोलो।
राणी शेड अवलोकन सटीक गीतिका करते हैं।
एक एक पल।
का अकाल नहीं
जला बाग साफ कराया गया है।
भोग ये तो ठीक।
व्यवस्था अवस्था है।
प्राणी।
हाँ एक केला बाग साफकर साहिब ले
तो लाना है एक दो कदम लस तलक।
तब तो।
हरा दो।
था तो घर था हर।
ठेके।
था डर मन हो
सीखी थी।
कई रंजिश का।
उधर बस लिए तू।
आज्ञा दे तो बोलना न शेड, पगार
पगार, पनवाड़ी, हुनर, बुल्ला तुला तो खुश वाला हो।
काय पंचायत में
खुश हो
न शिवलग दोष देव।
से कम न रहने से एक दर्द सदा रोड़ा न रहा।
घर कमाई का साधन नहीं।
अब जिम्मेदार तो समझ में आना चाहिए।
मनो लक्ष्य मुनीम की लोक सेवा की तर्ज
मंजे।
तुलाने मित्र को मुनीम हाँ।
प्राणी।
प्राणी।
बना धरा शेड होते नाडोल।
नेत्र रोग स्फुट। लस्त।
तिस पर तक तबादले है।
मंजे व जिले।
तेज नशे लाइटर।
गाय और खर्चा।
हींग तो चर्चा रेंगा।
मंजय अरे बलाय समझना चाहता की ज़रुरत पहले थी।
डॉक्टर वाला तलाशना उगा, खर्च डाला,
अस्थाना गए रेंज अस्त बोला चोदना।
तुला फसल समझाना लगन
चलऽ नी।
सर। मात चार महीना बात घाटे वाले होते।
अटकते ना घोषित
होते हैं।
कसर रखो
आजाद हो गया मगर राजस्व आढ़त गिले ना
पैसे काफले दर दुबई बस बोलत मुनीम जनाब ने गए
यहाँ।
कसर है
गर्दा से डोंगर भारत गिला ना
प्वाइट अस्त दो।
एक काम कर गए।
रात्रि पहले जावद बस
अब होश।
यही लगा।
रहा। है।
काग़ज़ लो चेहरा का उतरना
कहीं नहीं।
राघव लात।
पल्ले पीसकर।
पानी ढोकर लगाई लागल।
पत्थर
का जलस्तर। हम।
हो पन का ही हालत ना।
हिना।
तब ऐसा लय कामचोर सांप ले लेना है।
लगा माला है।
मसलन गोलू बोलत। है।
साथ। राणी।
पाटिल सावन में नजर।
लोको गेल को नहीं तरी।
बाइको तो माजी
अब मक्का जल कोणी बगीचे लतर।
ग़ज़ब बाइको तुम।
अजी तोरी।
भरा ठीक है राणी मला एक संग
अबले दो घात।
तीसरा करी डर गई।
तो बदल करी बोलत नहीं जब बगावत कर
घर तीज बोलते का बोलत उसने इसको।
कि लाइफ तुम टेंशन नहीं है माजी पर ही।
पूरो न टिका अपना तो आयेगा।
काहे पर बोलने कुछ राणी।
मसान, चिलम, वोल्गा, हवा की मुलगी,
धोनी पन।
खाेला लाजमी।
मिलावट थोड़ी मेहनत कर लागेला।
पिया। है।
अरे जरा कड़क करके
अशिक्षित कच्ची पूर्ति पाई।
जे अजीब जवानी पाई।
जय हो जवानी दर्शन आये बरखा असी हरी
भरी जवानी रगड़
गंगा से।
हुआ। एक तालाब बनकर।
बढियां।
वहां पत्ता।
बरवाअड्डा।
बैरगनिया मला एक साथ घरघर गंगा।
कोन बेस्ट है
रानी धीरज रोजाना
मल्हार राग नैना रंग आलाप लग जा मोड है ना।
अरे चार काहे करते हैं रानी रंगी
रानी हां।
अब आया है।
रानी पक तैयार राजा चाहिए का लगा
राज। कच्ची हल्दी
की में।
अग्रणी।
भोला बट्टा बट्टा लग।
नाला एक वर्ष गिला।
किया था अब अपना पल्ला।
सोलन जिले अपना आयुष्य ना विग्रह।
मार्ग अलग ले नाथुला में करीब एक हज़ार फुट का मणि दिला नायक हरी साडी
कहीं नहीं।
हिलाई फकत तुम जितना ही माजी बना है
मने मेहनत कर है न होये
का नहीं टांग लो।
तो। मुंह। से।
तो। वो।
तो। है।
तो। वो। है।
घिस फिर।
उस। को।
तो। तो।
रूठ। से।
तो है।
नहीं।
तो तो। वो।
तो। कुछ।
रगो। भैरब।
आय करे। घरात।
रामराम। शिट।
हां, तुम्हीं अचानक गरीब घर अगड़े कैसे कहे?
सो आश्रित धुन।
साल तो तुझे घेरा कड़े पाय ले मंडला वाले आये
गायत्री गोरधन घायल में याद अफेक्शन आलो।
अर्जुन गाये या।
बसेरा बसन है।
राणी जागे उन्हीं जरा।
सबसे।
शेर तुम्हें आम जन हरियाला गीत सेठी दिवाली है।
देखते।
नगर राणी शिव
भगत कहीं भी जब चाहे उन्हें।
एक बुजुर्ग।
बुलाना
तुझे।
बाइक खूब घोड़े
नसीब हुआ नाले का तो नसीब हुआ।
शिट करते।
बन कइसे ना घर को
हाथ सा गरीब
भटका।
संग राणी गर्द
कुशा पूर्णकर शिव को।
तुम्हें बरोबर बोलता शिव ने मेहनत कर दो इन्हें।
दोस्त महीने दिन का होते।
अरे ना शिव साध्य योजना जैसे
महिना दिन सऽ हो दस्ता ना दरगाह आवत समय गरीब गरीब रैली रस्ते।
वो देवी खरे मनवा।
या चहक। शान।
शायद खंडवा न।
चढ़ा का कैसे रखो मूसलधार सगला गोष्ठी
गरमगरम सावन का।
तो पूरा हुआ।
कार्ड टेस्ट राणी वाह का चाव बनौला फक्कड़।
एकदम गीत घराट।
शहर। महाकुंभ अच्छी आई।
तो लगता है।
कि। धरा है।
ये तो में
हलवा रात्रा पाये अलग श्रद्धा ना हो
खुश तो।
शीतला का हलवा
श्रोताओं सिटी दिल्ली दर्पण रागा तुझ।
मदाम त्यागमय का अच्छी सोटी घायल होता है।
उनकी।
न सिर्फ ये।
एक। पानी या दही भरवा टेल।
कल जब रंजित आई तबियत ठीक नहीं है का।
काई नहीं थोड़ी चखकर रहते।
गुलाब का।
अगर कृष्ण रसगुल्ला तराजू का।
मुनीम ने दूसरे का अंगीकृत।
पूजा पसंद नाम।
पद मेला
तो बस मुनीम लग गया न पगार का धमकी देता कि।
पगार का परचा।
ताई तुमि चुकता है।
अपनेपन बोलता नित राज बोलता।
नाई को।
तो शांत हो
दिवारी दौडा बना ली है।
पगार पाने के नाम नहीं।
तो शांत हो या उड़ा अधिक होने को न सटीक।
औरतो का। शीश।
तुला पगार वार्ड दे तो है। फीस।
पगार वेवर
दे तो अमचुर सरका थोड़ी ना है।
आमची का असली दीवाली आने कस लगाये
सुगा पगार कर्जा जातो।
तुला न ही करणा।
न ही करणा।
तुला संवत्सर आय लो।
कल मुनीम गरियाना होता है।
बोलत होता है न तुझे बाई को गोरगुंडा है। तो।
हद तलक हुआ है।
आयकर बोलोगे तो मुनीम मजा बदल।
जाउ दे दे तो एक काम कर
थोड़ा आराम कर निजात जाते।
काम संभव थे मगर अपन अलवर एकत्र जो चल।
जा रहा फुरंत पोस।
लट्ठ खींची एक व्हाइट नजर सूडसर उदरस्थ करें।
नहीं छह महीने निर्णय।
न। रंजय।
मस न देवा।
एक न।
पुराना घाव वगैरह।
काई धरे के।
अगर तुझे पूर्ति माजी बन गुदरी आइन्दा
नहीं है।
तुला घाव तो गधे का ही
माप माफ कर जरा प्यासा टिपण्णी है तक
नहीं बने एक लक्षण ठेलो
पंजे कसे यहाँ जगह मत दे।
कोना कोना
ही अर्थ तक या
पइसा मुड़ा कर लगाए ये।
अगर वहां दो जगह दूदू स्वयं गुरूजी थान
बन माजरे के
काम कैन्सिल
कराने। हां, सत्ता।
मुग्ध मदमस्त मनचला हरकतें जो।
तब तक तब तक।
मैं अपना अपना शेप एकदम क्लियर
इसा दे
को साथ ले।
सबक हां, मुनीम सा शब्द है
चोट आई पर परत न संग्रह
बन प्लीज
मजे सैटिंग।
काय विद्या रेगुलर ना
माल कच्चा कामा। सटीक शोहरत बटोरे।
ठीक है,
थोड़ा सा
बहाना पाई।
लफ्फाजी
जो माला तक काय जाला।
सांगेला आसरे
तब जान गए।
मंजे।
बन एक रात्रि की आने वाली।
की। सौदा करता है।
तो समझ ही
अपना फंडा क्लियर है।
तुला संगीत ल साथ दे,
साथ ले।
कर ठीक है।
तुम चाहे रात्रि से जा पुनरावर्ती।
है, रंज नहीं।
एक बोलो।
आईलवयू न पता।
मेयर बोलो।
आगे बोलना एका दोन बोल।
आना। फिर माला
मनाती
चेहरे जमता तो है सफेद पत्थर।
लैम्पार्ड
कैसे नाराज जे
जीते जी कर मेला सिवाय रात तक सुनाई।
आप सब था पत्थर पत्थर एक।
संदल चक्कर।
असल सह।
वाला।
खाका तक तब तक पत्थर।
अपना रंग
करता तब तक।
तब तक। जा।
सर, यह तो नहीं
बिरादरी जी घबराना तो मैं इसी कीमत।
मुनीम बोला कि रानी चटर्जी करो कुछ वर्णन।
बंगले सुखरो राहुल महान
व ऋतुपर्ण का कालजयी करून कुछ।
ये तो उद्यमी।
का जिगर दामादजी।
काम डेढ साल लगना थोड़ी ना फिर लेट।
बस कागजी वार्डन। रिलीव।
मंडलस्तर बोल दो।
का दरवाजा सिटी।
तुला का हवाई टेबुल।
तुम्हारा। जियाउद्दीन से आना।
दिनचर्या में सती। अच्छा।
कुछ। यह तुम सब।
ठहरे रघु।
कुटेशन 10।
एक जवाबदारी से काम है।
खपत न
करना।
जलप्रपात न नजर बट्टा स्थिर भऽ देबू बस।
काय पंडित नहीं उबर तो।
उठ बदरी घोंसला से अणी निकाला से।
कहीं नहीं है।
सरकार ने निभाई ठीक ऐसा सम्मान है।
रंजी ज़रा राणी बड़े लक्ष्य दे।
मुनीम शेड हित पण दर्पण
नित्य में था।
आशय सौदे हुए।
पुनासा में।
फायदा चलते रहो।
कलम माफ कर।
राणी एक मार्ग है
या तुम बाहर, पर ऐसा?
मानस तो तुझे साथ है
आसमान लाजवंती।
मीरा बाई सुन पाई तो सौदा करना नहीं है।
बन कसकर जनगणना करना था।
नहीं करना।
विश्वास।
मझावन।
कोणों का सम्मिलित नहीं था।
वचन लेना था।
सुख देकर अतिशय खुश थे।
विचार कर
ईश्वर आए।
सऽ मना कर होना।
तुम चाह सऽ मना सरक। मार्ग
माझे रानी न रहे।
रानी।
काहे गोष्ठी नश्वर छोड़ा गया?
न तुम चाहते थे, न माझा।
नसीबन असिम सर्वे दिन। एक।
नसीबा पूरी न तो मिजाज़ सकता।
नमी रांझे
यह ये
बहुत शुभ प्रतीत नैना ना
कैसे मालूम जाते ना।
रीना रानी दें।
युवक इत रानी
एक तो रानी आने त हर।
हाल। हां हम।
रानी।
एक रांझे हेमला चिमटा गाड़कर।
मैं स्वप्र
धन्नाभगत। ने।
एक। नई।
रानी। ली।
जो उस।
वार्ड।
को तो तेज चोरी हो जाती।
मुंह।
नीले।
को। तो।
मैं। तो। वो।
हो। जा। जो।
तो। मैं।
रानी।
बीते दिवस वार्ड होते हैं, जो सच्ची।
आज गांव ले।
रांझे
वहां काम की रोशनी ने।
सांस।
आने गुनाह।
गुनाह।
है जो। नैन।
है फिर हालत।
अब सारे जाणा मलक।
दावेदार तवे पर।
व। माफ करावाई मलाई।
आला शेर जला है
तुम्हें मलाई गंडोला नश्तर तर।
कदाचित सजाना था आसपास तो खड़े दिखाई सुनाई
लाईटरूम में दूजा जियोंग हैन।
मालक मालक मेरे कोटा तक घुटनों तक मला, थोड़ा सा
ढाया मलक दुनिया चारों चौड़ा है।
अब जाएगी है।
एक है।
मालक पगार।
वरना तक तो
सिख टिकते।
तो। तुम जब शक के उजाला।
नजर में गुम सजे तुझमें शक की झलक।
मला तब तुरंत ही समझ लो।
नहीं कि चिट्ठी मालकिन पर पहुंच किसी
लिखे। को।
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