Afrikaans
Akan
Albanian
Amharic
Arabic
Armenian
Azerbaijani
Basque
Belarusian
Bemba
Bihari
Bosnian
Breton
Bulgarian
Cambodian
Catalan
Cebuano
Cherokee
Chichewa
Chinese (Simplified)
Chinese (Traditional)
Corsican
Croatian
Czech
Danish
Dutch
English
Esperanto
Estonian
Ewe
Faroese
Filipino
Finnish
French
Frisian
Ga
Galician
Georgian
German
Greek
Guarani
Gujarati
Haitian Creole
Hausa
Hawaiian
Hebrew
Hindi
Hmong
Hungarian
Icelandic
Igbo
Indonesian
Interlingua
Irish
Italian
Japanese
Javanese
Kannada
Kazakh
Kinyarwanda
Kirundi
Kongo
Korean
Krio (Sierra Leone)
Kurdish
Kurdish (Soranî)
Kyrgyz
Laothian
Latin
Latvian
Lingala
Lithuanian
Lozi
Luganda
Luo
Luxembourgish
Macedonian
Malagasy
Malay
Malayalam
Maltese
Maori
Marathi
Mauritian Creole
Moldavian
Mongolian
Myanmar (Burmese)
Montenegrin
Nepali
Nigerian Pidgin
Northern Sotho
Norwegian
Norwegian (Nynorsk)
Occitan
Oriya
Oromo
Pashto
Persian
Polish
Portuguese (Brazil)
Portuguese (Portugal)
Punjabi
Quechua
Romanian
Romansh
Runyakitara
Russian
Samoan
Scots Gaelic
Serbian
Serbo-Croatian
Sesotho
Setswana
Seychellois Creole
Shona
Sindhi
Sinhalese
Slovak
Slovenian
Somali
Spanish (Latin American)
Sundanese
Swahili
Swedish
Tajik
Tamil
Tatar
Telugu
Thai
Tigrinya
Tonga
Tshiluba
Tumbuka
Turkish
Turkmen
Twi
Uighur
Ukrainian
Urdu
Uzbek
Vietnamese
Welsh
Wolof
Xhosa
Yiddish
Yoruba
Zulu
[जीतू] और ये लास्ट वाले का क्या आया है सबका?
ए।
करंट इलेक्ट्रिसिटी
भाई, ये करंट इलेक्ट्रिसिटी सबको फील तो आ रही है ना?
हाँ, भैया!
- समझ में आ रहा है? - हाँ, भैया!
बता देना जिसको भी समझ में नहीं आ रहा हो।
वरना अगले टैस्ट में 220 वॉल्ट का झटका लगेगा।
ठीक है, भैया!
और वो जो संडे शाम वाली एक्स्ट्रा क्लास होती है, वो अब से सुबह दस बजे लगेगी।
- ठीक है, भैया। - याद रहेगा ना?
हाँ, भैया।
क्यों, भैया, शाम को डेट पे जा रहे हैं क्या?
[क्लास की घंटी बजती है]
इतने सड़े हुए क्यों हैं?
भैया, यार आजकल मज़ाक को भी सीरियस में ले लेते हैं।
काफी सीरियस थे।
तुम्हें क्या हो गया? चलना नहीं है क्या?
ये कोश्चन नहीं बन रहा है।
तो भैया से क्यों नहीं पूछा?
कौन सा नहीं बन रहा है?
ये?
अच्छा किया नहीं पूछा।
ये पूछने से पहले तो मुझे भी दो बार सोचना पड़ता।
ये तो बहुत सिंपल है, यार।
देखो।
इसमें पूछा गया है,
[अंग्रेज़ी में] बैटरी चार्ज करने के लिए करंट की ज़रूरत, ठीक है?
मतलब हमें करंट बैटरी के पॉज़िटिव टर्मिनल में देना होगा,
जिससे की उसकी दिशा उल्टी हो जाएगी। बस।
अब इक्वेशन आ जाएगा माइनस 200 माइनस आईआर प्लस 220, बराबर होगा ज़ीरो के।
और आई आ जाएगा 20 एम्पियर।
ये तो सिंपल है, यार।
हाँ, तुमने तो बहुत जल्दी सॉल्व कर लिया ये।
अरे, ऐसे सिंपल कोश्चन ना देखने से सॉल्व हो जाते हैं।
बस थोड़ा सा ध्यान देना पड़ता है।
तुम्हें पता है महेश्वरी में क्या कहते हैं?
अगर आप फिजिक्स पे ध्यान ना दो ना, तो फिजिक्स आपकी वाट नहीं किलोवाट लगा देती है!
आ जाओ, चलो।
[जीतू] नॉर्मल नहीं है ना, भाई।
तूने बोला कोई पुराना स्टूडेंट मिलना चाह रहा है मैंने सोचा मिल लेंगे।
तूने पूरा पॉडकास्ट प्लान कर दिया उसके साथ!
अरे भैया, हिट है इनका पॉडकास्ट, मैं बता रहा हूँ!
तीन महीने से पीछे पड़े हुए हैं मेरे। कब तक मना करता?
और सही है ना इसी बहाने अपने एमर्स का प्रमोशन हो जाएगा।
इसीलिए दिल पिघला ना तेरा?
बोल देना एमर्स-एमर्स नहीं करूँगा वहाँ बैठ के। बता देना उसको।
ठीक है, भैया। अच्छा सुनो।
पूजा दीदी ने तो मना कर दिया।
केमिस्ट्री टीचर चाहिए होगा ना अपने को।
अगले साल कौन पढ़ाएगा इनको?
ए, मीना!
- क्या हो गया? - [एक महिला] आ गए, बालमुकुंद जी!
नमस्ते, दीदी।
अरे, नमस्ते! नमस्ते!
और कल से कहाँ रहने का इरादा है?
मतलब?
मतलब मम्मी कह रही थीं ताला लगा दो बालमुकुंद के कमरे में।
क्योंकि वो बहुत होशियार हो गया है!
जब भी उससे किराया माँगो तो टाल देता है।
उसे लगता है हम पूछेंगे नहीं तो धीरे-धीरे भूल जाएँगे
और वो महीना फ्री में निकाल लेगा!
नहीं, नहीं, दीदी।
मैं बस आज ही एटीएम से पैसे निकाल--
आज रात तक किराया हाथ में नहीं आया ना, तो कल कमरे में ताला लग जाएगा।
वो क्या है ना भोली सिर्फ नाम है मेरी मम्मी का, वो हैं नहीं।
अबे भाई, यार, मीना, तू क्यों सुनता है इसकी
इतनी बातें? फेंक के मार इसके मुँह पे किराया!
हाँ, हाँ, मारूँगा।
अबे, क्या-क्या बोल रही थी, भाई!
खुद को पहचानो
[कराहने की आवाज़]
[उदय] कौन?
उदय जी, मैं।
आजा, मीना। सब सेफ है।
नहीं, नहीं।
पिछली बार भी आपने यही बोला था।
मीना, मैं प्रॉमिस कर रहा हूँ, आजा, सब सेफ है।
हैलो!
हैलो।
मसाज चल रही है?
कैसा है, भाई?
बढ़िया।
[अंग्रेज़ी में] क्या हो गया?
कुछ खाने को है क्या, उदय जी?
खाना नहीं खाया?
इसीलिए बोलता हूँ डिनर मत छोड़ा कर।
क्या यार, मीना!
[फुसफुसाती है]
मीना, तू कल रात भी मैस नहीं गया था ना?
नहीं, दिन में गया था बस।
और वो तूने वो चुड़ैल के मुँह पे पैसे मार दिए?
अभी आधे ही दिए हैं बस।
भाई मीना, कोई दिक्कत-विक्कत हो तो बता देना।
कुछ पैसे-वैसे चाहिए हो तो…
नहीं, उदय जी।
घर से बस आने ही वाले हैं।
उसके बाद मार दूँगा भोली जी के मुँह पे पैसे!
कोटा फ़ैक्ट्री
[उदय] अरे यार, वो मैस नहीं जा रहा है, अपना किराया भी नहीं भर रहा है।
यहाँ तक कि अपने फ़ोन में रिचार्ज तक तो करा नहीं रहा है वो।
मैंने उसे पैसे देने की कोशिश की, उसने वो भी मना कर दिए, यार।
भाई, मीना नाम है उसका। वो कभी पैसे नहीं लेगा।
ए!
अरे, बुबू!
ये घर के लड्डू हैं।
बहुत मुश्किल से बचा के दिल पे पत्थर रख के लेके आई हूँ।
तुम दोनों मत ठूँस जाना!
- एक-एक तो खाएँगे ना? - आधा-आधा!
चलो हटो, अभी।
बाय!
मीना!
बाटी के लड्डू।
शिवांगी की मम्मी ने दिए हैं।
आपने तो हमारा दिन बना दिया, उदय जी।
एंजॉय!
- देख रहा है ना तेरे भाई का जलवा? - ये लो।
हाँ।
- दिख रहा है तेरे भाई का जलवा। - है ना?
[एक लड़की गुजराती में] मस्त है।
हाँ।
उदय जी, बहुत स्वादिष्ट हैं!
माँ के हाथ के खाने के लिए सब तरसते हैं ना, उदय जी।
- ए! - अरे!
राधे-राधे!
- भगवान का आशीर्वाद! - हाँ, भाई।
ये तो भगवान का पैसा है।
भगवान के पास ही रहना चाहिए। है ना?
[अंग्रेज़ी में] बिलकुल, भैया! बिलकुल!
आप ताली मारते हों तो ऐसा लगता है गुदगुदी सी हो रही है।
अच्छा, भैया,
स्टूडेंट्स जब आपके पास ऐसी छोटी-छोटी, बच्चों वाली प्रॉब्लम्स लेकर के आते हैं,
तो आपको गुस्सा तो आता होगा?
जीत की तैयारी
नहीं, यार, मुझे नहीं लगता कि उनकी प्रॉब्लम्स बच्चों वाली प्रॉब्लम्स हैं।
जब तू छोटा था, तो दो प्लस दो मुश्किल लगता होगा?
हाँ।
वैसे ही, यार, अभी तुम समझदारी का चश्मा लगाके प्रॉब्लम्स देखोगे
- तो बच्चों वाली प्रॉब्लम्स लगेंगी। - हाँ।
पर उनके लिए वो काफी सीरियस मामला होता है।
अच्छा, भैया, अब थोड़ा सीरियस टॉपिक पे आना चाहूँगा।
जैसे कोटा में पढ़ाई का माहौल बहुत सीरियस है।
कुछ बच्चे इससे मोटिवेट होते हैं, कुछ डिमोटिवेट हो जाते हैं।
कुछ रैंक्स ले आते हैं,
और कुछ का तो कॉन्फ़िडेंस ही खत्म हो जाता है,
यहाँ तक कि कुछ गलत कदम भी उठा लेते हैं।
और हम बस यहाँ बैठे-बैठे रैंक सेलिब्रेट कर रहे हैं।
आपको क्या लगता है?
यार, मुझे लगता है कि…
बच्चे बहुत मेहनत करते हैं रैंक्स के लिए।
तो जब उनका सिलेक्शन होता है तो
जो सेलिब्रेशन वो लोग करते हैं वो हकदार होते हैं।
बल्कि, उन्हें इनाम भी मिलना चाहिए।
पर मुझे लगता है कि यार, जिन बच्चों का नहीं होता
वो लोग नाकामयाब नहीं हैं।
हमें ये समझना होगा कि आईआईटी में बहुत लिमिटेड सीटें हैं।
मैं उदाहरण के साथ समझाता हूँ।
मान लो कोई कटऑफ 91 है,
और किसी बच्चे के 90 मार्क्स आते हैं। अब उसका सिलेक्शन नहीं होगा।
तो मुझे बताओ कि क्या उस एक बच्चे को उस एक मार्क के लिए नाकामयाब बुलाओगे?
मैं नहीं बुलाऊँगा।
मुझे नहीं लगता वो नाकामयाब है।
और ऐसे बहुत सारे बच्चे हैं, यार, जो 15-15 घंटे सेम मेहनत करते हैं।
लगन के साथ पढ़ाई करते हैं।
पर नहीं होता।
वो लोग आगे भी बढ़ते हैं!
हाँ।
ये वही बच्चे हैं जिनके 40 मार्क्स आते थे और ये 90 तक पहुँच जाते हैं।
बल्कि, ये तो एज्यूकेशन सिस्टम की नाकामयाबी है, समाज की नाकामयाबी है।
कि हम उनके आगे बढ़ने, उनकी मेहनत, उनकी लगन, उनकी लगन को एहमियत ही नहीं देते।
हम तो लगे हैं रेंकर्स बनाने में।
- कोटा को एक फ़ैक्ट्री बना दिया है। - बिलकुल।
अलग कर देते हैं उन बच्चों को जिनका सिलेक्शन नहीं होता।
तो मुझे काफी बुरा लगता है कि यार…
जैसे ही रिजल्ट्स आते हैं, हम उनकी तरक्की को ध्यान ही नहीं देते।
भैया, आपने अभी कहा कि ये एज्यूकेशन सिस्टम की नाकामयाबी है।
मतलब सरकार को भी कोई एक्शन लेना चाहिए?
हाँ। एज्यूकेशन पॉलिसी में थोड़े बदलाव आने चाहिए।
खासकर कि ये जो कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम हैं, उनमें बदलाव आने चाहिए।
एज्यूकेशन है, यार!
अब ये एज्यूकेशन के नाम पे किसी बच्चे को नाकामयाब या कामयाब बोलना सही नहीं है।
मुझे लगता है कि हमें सक्सेसफुल सिलेक्शन के साथ-साथ,
सक्सेसफुल तैयारी को भी सेलिब्रेट करना चाहिए।
जीत की तैयारी नहीं।
तैयारी ही जीत है, भाई।
बिलकुल। "तैयारी ही जीत है।"
अब से मेरे शो का नाम भी यही होगा, भैया।
तो दोस्तो, ये हैं कोटा के बेस्ट टीचर जीतू भैया,
और अगर इनसे पढ़ना है तो इनके इंस्टीट्यूट आना पड़ेगा,
- एमर्स। - यस!
थैंक यू, थैंक यू, जीतू भैया।
मीना, एक बात बता।
तेरे कितने दोस्त हैं कोटा में?
शिवांगी जी…
वर्तिका जी, मीनल और…
जीतू भैया भी दोस्त ही हैं।
और हम?
आप दोनों तो भाइयों जैसे हों ना।
- हैं ना? - हाँ, हाँ।
- पक्की बात? - हाँ।
तो, साले भाइयों से अपनी प्रॉब्लम क्यों छुपा रहा है तू?
कौन सी प्रॉब्लम? कोई प्रॉब्लम नहीं है।
- अच्छा? - ए, मीना!
तेरी शक्ल देख के बता सकते हैं, तूने आज पोटी की है या नहीं की है!
और तू हमसे इतनी बड़ी प्रॉब्लम छुपा रहा है पैसों की!
अरे, यार, भाई!
ये ले पैसे।
नहीं, मैं ये पैसे नहीं ले सकता।
- क्यों नहीं ले सकता? - क्यों?
क्या दिक्कत हो गई?
पता नहीं,
मेरी समस्या कब तक चलेगी।
गाँव में सूखा पड़ा हुआ है और ये बात मुझे अपने चचेरे भाई से पता चली है।
माता-पिता अपनी समस्याएँ बच्चों को बताते ही कहाँ हैं, उदय जी।
अरे मीना, तुझे इन पैसों की टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है, भाई!
तेरे पास हो तो दे देना, नहीं हों तो कोई बात नहीं।
तेरा भाई है, यार। एडजस्ट कर लेगा।
मैं आपका भाव समझ सकता हूँ।
आप श्री कृष्ण बनकर मुझ सुदामा की मदद करना चाहते हैं,
पर मैं सुदामा नहीं हूँ।
सुदामा बनना बहुत कठिन काम है।
दोस्त से इस तरह एहसान लेने के बाद ना,
उनसे मिलने पर एक संकोच का भाव आने लगता है।
हर वक़्त पैसे ना लौटा पाने की ना, एक शर्म सी लगने लगती है।
मैं अपने ही दोस्तों के बीच छोटा महसूस करने लगूँगा।
[वैभव] अरे, भाई तो तू क्यों छोटा महसूस कर रहा है?
- हम तेरे को छोटा महसूस कराते हैं क्या? - क्या बात कर रहा है, यार?
हमारे आगे कैसा संकोच?
और, मीना, मैंने माना तेरा आत्मसम्मान बहुत इंपोर्टेंट है,
अच्छी बात है, यार।
पर अगर ये पैसे नहीं लेगा ना तो तुझे दिक्कत होगी।
नहीं।
जीवन में पहले भी इससे कम में गुजारा किया है मैंने। मैं काम चला लूँगा।
- मीना, बात काम चलाने की नहीं है-- - वैभव…
अब मैं इस विषय पर और ज़्यादा बात करूँगा तो…
सच में छोटा महसूस करूँगा मैं।
अच्छा, ठीक है चल।
[वैभव] क्या बोलूँ, भाई मैं? मान ही नहीं रहा।
[उदय] एक मिनट।
मीना!
बात आत्मसम्मान की है ना?
तेरे भाई के पास एक आइडिया है जिससे सब ठीक हो जाएगा।
कल सुबह क्लास के पहले जल्दी तैयार रहना।
नहीं, नहीं, मेरे पास कोई चेन, अँगूठी, कुछ गिरवी रखने के लिए नहीं है, प्लीज़।
[थप्पड़ की आवाज़ निकालता है] सटाक!
सुबह तैयार रहना।
हाँ।
- [एक लकड़ा] चल-चल! - [दूसरा लड़का] आने दे, आने दे!
- नहीं, नहीं! पीछे, पीछे! - आने दे!
पीछे! पीछे!
- मार! - मार दे! मार दे!
यस!
- चल! - पीछे!
- मीना। - अच्छा, अच्छा।
आजा, आजा।
- आ जाओ, भाई। - आजा, मीना।
आजा, भाई। चिंटू!
तो ये है राजेश भैया का गेमिंग पार्लर।
और ये राजेश भैया का बेटा चिंटू। कैसे हो, बेटा?
सब बढ़िया। आप बताओ?
बस, बस सब बढ़िया।
अपने एकदम खास हैं ये।
इधर आ।
पैसों की बात हो गई है।
पूरे तीन हज़ार रुपए देंगे वो भी एडवांस।
क्यों?
भाई को एक घंटा पढ़ा देना रोज़।
और फिर मेरी पढ़ाई का समय?
अरे, यार, मीना!
इससे ज़्यादा समय तो तेरा ये सोचने में जाता है कि मैं पैसे कैसे बचाऊँ।
अगर अब से शाम को चाय के लिए जाना बंद कर दूँ,
तो आधा घंटा वहाँ बच जाएगा।
- और… - मीना!
कोटा में ना बच्चे साइकिल चोरी हो गई है जैसा झूठ बोलकर
घर से पैसे मँगवाने से पहले भी इतना नहीं सोचते हैं
जितना तू ये नेक काम करने से पहले सोच रहा है, भाई।
[अंग्रेज़ी में] कर ले, यार!
फायदे की ही बात है।
मान जाइए ना।
मेरा भी ड्रीम है आपकी तरह टॉपर स्टूडेंट बनने का।
वाह!
नहीं।
ये नहीं हो पाएगा।
मेरी क्लास का पहला नियम है "ड्रीम" नहीं "एम" बोलो।
ड्रीम बस देखे जाते हैं,
एम हासिल किया जाता है।
क्या बात है, यार, मीने!
अब, ये वाला देख।
इस कोइल में अगर करंट इस दिशा में बहेगा,
तो चुंबकीय क्षेत्र यहाँ बनेगा।
क्या हुआ?
[एक लड़का] श्शश!
[वर्तिका की दोस्त] अगले वाला कर के देख।
भाई, वर्तिका वैशाली के साथ बैठ के मैग्नेटिज़्म का चैप्टर पढ़ रही है, यार।
- तो? - अबे, तो क्या?
उसने मना किया था कि इस हफ्ते वो मैग्नेटिज़्म का चैप्टर नहीं पढ़ेगी।
ओह, वर्तिका ने तुझसे झूठ बोला! भाई, ये तो बड़ी अजीब बात है।
श्शश!
स्टूडेंट को डिस्टर्ब करने पर एफ़आईआर कर दी जाएगी
इससे भी अजीब बात ये होगी अगर लाइब्रेरी में शोर मचाने के लिए जेल जाना पड़ा।
- अबे घंटा, हलवा है क्या एफ़आईआर! - ठीक है।
अबे फ़ोन मिला रहा है।
हाँ, हैलो, पापा।
अब, यार, आप आके बैठ जाओ, यार।
नमस्ते, सर।
आज तो टाइम पे आया हूँ, सर।
शाबाश।
बच्चे नहीं हैं यहाँ, नहीं तो… तालियाँ बजवाता तेरे लिए।
कहो, कैसे आना हुआ?
सर, तबीयत का पता चला आपकी।
काफी समय से आना चाह रहा था।
कैसी तबीयत है, सर?
तेरे सामने हूँ।
एकदम फिट।
एमर्स तो ठीक चल रहा है ना?
गगन कैसा है?
गगन सर तो बहुत सही हैं।
एमर्स भी सही चल रहा है।
वही, सर, हम लोग सेम प्रॉब्लम में फँसे हैं।
एमर्स के लिए केमिस्ट्री टीचर ढूँढ रहे हैं।
फिर से पिछली बार वाली गलती नहीं दोहराना चाहता।
इसलिए, आप से सलाह लेने आया हूँ।
तू फिर गलती कर रहा है, जीतू।
मैंने पहले भी कहा था।
तू सिर्फ टीचर नहीं ढूँढ रहा,
तू एक फाउंडर टीचर ढूँढ रहा है।
हाँ, सर, आपने समझाया था, मैं ही नहीं समझा।
पता नहीं आप कैसे परख लेते हैं ये सब?
सबको नहीं।
पर जब कोई टीचर मेरे सामने मुखौटा पहन के आता है तो…
मुझे दिख जाता है।
मैं बात करता हूँ पूजा से।
पूजा मैम से तो मैं बात कर चुका हूँ, सर।
तो?
[वर्तिका] कोटा आने के बाद काफी कुछ मिस भी हो जाता है ना?
मैं तो बहुत खुश हूँ कोटा आके।
मुझे तो काफी कुछ मिल गया।
- अच्छा, सुनो। - बोलो?
कल से मैग्नेटिज़्म वाला चैप्टर करें क्या साथ में?
अभी नहीं।
मैं केमिस्ट्री रट रही हूँ ना, तो…
इनमें से एक नहीं हो पाएगा।
केमिस्ट्री भी इंपोर्टेंट है।
अच्छा, वो तेरी दोस्त है, क्या नाम है उसका? वैशाली।
उसका कैसा गया फिजिक्स वाला पेपर?
वो तो कह रही थी कि ठीक था।
38 तक शायद आ जाएँगे उसके।
ओह!
38? बस?
नहीं इस बार वाला काफी आसान था, यार।
मेरे तो 44 तक आ जाएँगे।
फिजिक्स थोड़ी कमजोर है क्या उसकी?
नहीं, मैं सच में ऐसे ही जानने के लिए पूछ रहा हूँ कि फिजिक्स कमजोर है।
बाय, वैभव।
वर्तिका!
नहीं, मुझे लगा वैशाली की फिजिक्स मुझसे ज़्यादा अच्छी होगी।
तभी तो तुम मेरी जगह उसके साथ पढ़ रही हो।
किराए के लिए सिर्फ लड़कियाँ
तुम नहीं समझ पाओगे, वैभव।
गुड नाइट।
[चिंटू] आ गए, आ गए! सर आ गए!
[मीना] इक्कीस दिन।
इक्कीस दिन में तुम्हें आदत पड़ जाएगी, ठीक है।
फिर उसके बाद आराम से देर तक बैठना आसान लगेगा।
मेरे साथ भी होता था।
हाँ, या ना, बोल, भाई!
हाँ, हाँ।
आप बहुत अच्छा समझाते हों, मीना सर।
नहीं, मीना सर नहीं। मीना भैया बोलो।
ओके, मीना भैया।
पूरे नंबर आए हैं कल इसके स्कूल टेस्ट में, मीना जी।
अच्छा?
वाह!
इसकी तरक्की देख के, इसकी बुआ भी बोल रही थी कि उनका बेटा आपसे पढ़े।
आठवीं क्लास में है। यहीं आ जाएगा।
छह से सात इसे और सात से आठ उसे पढ़ा देना।
क्यों?
वो…
खुद की पढ़ाई में से एक और घंटा निकालना
बहुत मुश्किल होगा मेरे लिए।
चलो कोई बात नहीं।
फीस।
वैसे वो चार हज़ार तक देने को तैयार हैं अगर आप…
8-9 डीपीपी
अरे!
- हैप्पी एनिवर्सरी, यार, बेबी! - हमारी एनिवर्सरी नहीं है।
नहीं है?
भाई, केक क्यों लाया है फिर?
केक खाने के लिए एनिवर्सरी का होना ज़रूरी थोड़ी है?
हाँ।
अमीर लोग तो कभी भी केक खा लेते हैं ना, मीना!
आप काटिए ना।
भैया,
परसों मैथ्स का टेस्ट है और कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।
अच्छा?
ठीक है। इसकी क्लास के बाद समझाता हूँ।
- हाय, मीना भैया। - बैठ।
9 से 10 भोजन और डीपीपी
[मोबाइल की घंटी बजती है]
- हैलो? - हाँ, वैभव?
हाँ, मीना। हाँ, सुन ना भाई।
आज भैया की क्लास में आते हुए रोटेशनल मोशन के नोट्स ले आना, भाई।
मैं आज ही कॉपी कर के दे दूँगा।
आज?
अरे, ठीक किया याद दिला दिया, वैभव।
मैं तो भूल ही गया था कि भैया की क्लास आज शाम में है।
तू? और क्लास भूल जाए?
प्रैंक करने के लिए मैं ही मिला क्या?
अच्छा, सुन ना याद से रख लेना, यार, प्लीज़। है ना?
हाँ। नहीं, नहीं! पक्का-पक्का! बस निकल ही रहा हूँ।
[मोबाइल की घंटी बजती है]
[मोबाइल की घंटी बजती है]
[वैभव] साला ये क्या चोमू है क्या, यार?
एक तो मेरे लिए नोट्स नहीं लाया, अभी फ़ोन नहीं उठा रहा मेरे।
तू इतना चिड़चिड़ा क्यों हो रहा है, भाई?
क्या हुआ?
वर्तिका?
हाँ, यार।
- भाई, डेट पे ले गया था उसको। - ठीक है।
सब कुछ सही चल रहा था। बहुत मज़ा आ रहा था।
बहुत रोमांटिक बातें भी हुईं हमारी।
फिर मैंने उसको पढ़ाई के लिए पूछ लिया,
उसने मना कर दिया, यार।
हाँ।
और फिर मैंने कारण पूछा तो बोली, "तू नहीं समझ सकता।"
- ये कैसा दोहरा व्यक्तित्व है, भाई? - पता नहीं, यार!
ये वर्तिका लहर है या कण?
- सुन, एक जुगाड़ बताता हूँ-- - नहीं, नहीं, भाई! तू रहने दे।
तेरे सारे जुगाड़ देख लिए मैंने। तुझ से नहीं हो पाएगा, भाई।
अबे नशे कर के कुछ भी बातें करता है तू!
अरे, क्या नशे कर के?
सिगरेट पीता हूँ और तुम जैसे चूतिये दोस्तों की एक्स्ट्रा केयर करता हूँ!
इसके अलावा और कोई बुरी आदत नहीं है, उदय गुप्ता के अंदर।
तू रहने दे, भाई, प्लीज़। सॉरी।
शिवांगी वो मैं उदय से कह रहा था कि…
हेल्प जो है ना वो सही लोगों की लेनी चाहिए। है ना?
बात तो सही कही तूने, वैभव।
लेकिन सही टाइम पे भी लेनी चाहिए ना।
नहीं, लेकिन सही है।
इतनी छोटी सी प्रॉब्लम पूछने में मैं भी दो बार सोचती।
क्या है ना, अगर रिलेशनशिप पे ध्यान ना दो,
तो लैंबड़े नहीं महा लैंबड़े लगते हैं।
और तू तो रिलेशनशिप पे बिलकुल ध्यान नहीं दे रहा!
यार, तू तो उल्टा मेरी ही मार रही है, यार।
[अंग्रेज़ी में] कोई बात नहीं, वैभव।
मुझे लगता है ये तेरा पहला रिलेशनशिप है ना,
इसलिए तेरे बेसिक्स कुछ ज़्यादा ही बेकार हैं।
तो मैं ही तुझे समझा देती हूँ।
और वैसे भी कमजोर स्टूडेंट की ना हमेशा मदद करनी चाहिए।
तो कमजोर स्टूडेंट, सुन।
कान खोल के।
वर्तिका, जो तेरी गर्लफ्रेंड है, जो मुँह फुलाए बैठी है…
क्या हुआ?
बुरा लगा?
नहीं, ठीक है। कोई नहीं। [अंग्रेज़ी में] कोई बात नहीं, रहने दे।
वर्तिका को भी हमेशा ऐसे ही फील होता है जब तू उसे पढ़ाता है, वैभव।
"अरे ये तो कोश्चन इतना सिंपल है!"
"ये सोचने से पहले मैं तो दो बार सोचता।"
"अरे, ये कोश्चन तो इतना सिंपल है, ये बिना पेन उठाए हो जाना चाहिए!"
"अगर हमने फिजिक्स पे कभी ध्यान नहीं दिया ना, तो वाट नहीं किलोवाट लग जाती है!"
चूतिया!
तुम्हारा मतलब, मैंने उसको बुरा फील करवाया क्या?
हाँ!
[बुदबुदाता है] अरे यार!
इंसान प्यार में पहले ही कमजोर सा होता है।
इतनी मुश्किल से तुझसे आके उसने अपनी प्रॉब्लम शेयर की
और तू उसी में गलतियाँ निकाल रहा है।
गलतियाँ निकालने में और बेवकूफ समझने में दुनिया पहले से ही एक्सपर्ट है।
तू तो उसे सपोर्ट कर बिना उसे बिना उसे नीचा महसूस कराए।
शीट यार!
क्या गधा हूँ ना, यार, मैं भी!
गधा तो तू है।
बुरा फील करवा दिया, यार, उसको।
हाँ, अब यहाँ बैठे-बैठे अफसोस करता रह।
अरे, लाइब्रेरी में है वो! जाके बात कर उससे!
ये तुम्हारे लिए।
मैंने खाना खा लिया।
ले लो ना, यार।
आई एम सॉरी, यार, वर्तिका।
मतलब मैं समझ गया, मैं कितना बड़ा गधा हूँ, यार।
मतलब मुझे पता ही नहीं चला कि मैंने कब पढ़ाते-पढ़ाते तुम्हें बुरा फील करवा दिया।
मेरा कोई ऐसा मकसद नहीं था तुम्हें बुरा फील करवाने का।
और ये जो तुम्हारा रिएक्शन है ना, बिलकुल सही है, एकदम।
मतलब मेरा जो छोटा भाई है ना, वो भी बिलकुल ऐसा ही करता है।
पूरी दुनिया से पढ़ लेगा वो, मुझ से नहीं पढ़ेगा वो।
शायद मैं पढ़ाते-पढ़ाते, थोड़ा ज़्यादा रुड हो जाता हूँ।
या तो मैं हूँ ही रूड।
आई एम सॉरी।
[अंग्रेज़ी में] कोई बात नहीं।
पर मैं अगली बार से पूरा ध्यान रखूँगा कि मैं तुम्हें प्यार से पढ़ाऊँ।
तुम्हें प्यार से समझाऊँ।
और अगर मुझे किसी भी सवाल का जवाब आ भी रहा होगा ना,
तब भी तुम्हें नीचा नहीं दिखाऊँगा मैं।
- [अंग्रेज़ी में] मैं प्रॉमिस करता हूँ। - वैभव…
तुम्हें ये सब मेरे लिए करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
क्यों?
क्योंकि तुम चाहे कितने भी ध्यान रखने वाले हो जाओ,
मुझे शायद तुम से पढ़ने में बुरा ही फील होगा।
मतलब?
दरअसल, हमारा रिलेशनशिप ही ऐसा है
जिसमें हम दोनों का बराबर होना बहुत ज़रूरी है।
और जब तुम मुझे पढ़ाते हो, तो तुम टीचर बन जाते हो और मैं तुम्हारी स्टूडेंट।
यहाँ तो हम बराबर नहीं हो सकते ना?
और रही बात रूड होने की,
वो तो वैशाली भी हो जाती है कभी-कभार कोश्चन समझाते वक़्त,
पर मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता।
तुम से पड़ता है।
तुम्हारी हर छोटी बात से पड़ता है।
इसलिए…
वैभव, मुझे लगता है कि…
ये बेहतर होगा कि हम दोनों अलग-अलग ही पढ़ाई करें।
पढ़ने की वजह से ही थोड़ा बहुत जो टाइम हम बिता पाते हैं साथ में।
तुम कह रही हो उसको भी बंद कर दो, तो…
लेकिन…
ऐसे टाइम बिताने का मतलब ही क्या जिससे हम दोनों दूर हो जाएँ?
वैभव, पढ़ाई का मकसद पढ़ाई होना चाहिए,
साथ में वक़्त बिताना नहीं।
मैं…
- बाय। - बाय।
आई एम सॉरी।
खा लेना।
[मोबाइल की घंटी बजती है]
हाँ, पापा? राधे-राधे!
हाँ, आराम से।
नहीं-नहीं, कोई दिक्कत नहीं है। पैसे अभी बचे हैं मेरे पास।
हाँ, आप ही कहते थे ना
पैसे ज़रूरत की चीज़ होती है, बचा-बचा के खर्च करो।
तो, थोड़ा-थोड़ा करके बचा रखा है मैंने।
नहीं, नहीं, आप परेशान मत हों।
ठीक है। आप लोग भी अपना ध्यान रखिए।
बड़ी माई को भी राधे-राधे कहिएगा।
हाँ, ठीक है।
[मोबाइल की घंटी बजती है]
हाँ, चिंटू, क्या हुआ? कुछ छूट गया क्या वहाँ?
मीना भैया, वो…
दरअसल, एक प्रॉब्लम है जिसमें मुझे समझ में नहीं आ रहा है मैं क्या करूँ।
मम्मी सामने थीं इसलिए पूछ नहीं पाया।
क्या हुआ?
नमस्ते, भैया।
अरे, मीना!
क्लास नहीं आ रहा है तो क्या, दर्शन तो दिए तूने!
सॉरी, भैया।
अब नहीं मिस करूँगा क्लास, आऊँगा।
बताइए, कैसे आना हुआ?
भैया…
एक प्रश्न पूछना था।
किसी लड़के को किसी कन्या पर आकर्षण हो जाए तो?
आकर्षण?
भैया, दरअसल, समस्या ये है ना
यहाँ एक नहीं दो-दो कन्याएँ हैं।
तो, ऐसी परिस्थिति में करना क्या चाहिए?
दो-दो कन्याएँ?
हाँ, भैया?
क्या उन्हें भी तुझ पे आकर्षण है?
नहीं।
नहीं, भैया ये मेरी नहीं, मेरे छात्र की समस्या है।
- तेरे छात्र? - हाँ, भैया।
वो उदय जी के मित्र चिंटू को ना अध्यापक की ज़रूरत थी और मुझे पैसों की।
घर पे थोड़ी दिक्कत थी, भैया, तो…
तो, तूने पढ़ाना शुरू कर दिया।
हाँ, भैया।
कितने छात्र हैं बालमुकुंद कोचिंग सेंटर में?
दो हैं, पर ऐसा कुछ नाम नहीं रखा है अभी तक।
अच्छा, अच्छा।
आपसे विचार-विमर्श किए बिना थोड़ी रखूँगा नाम, भैया।
ये लोग कहाँ हैं उदय और वैभव?
मीना, इधर आ।
इधर आ। इधर आजा।
आजा।
शाबाश।
बैठ।
- क्या… - बैठ।
- नहीं, भैया। - बैठ!
बैठ।
शाबाश। बैठ जा, आराम से।
आराम से बैठ जा।
क्या, भाई…
क्या चल रहा है?
मीना अपनी पढ़ाई का इतना नुकसान कर रहा है।
तुमने मदद नहीं की अपने भोले दोस्त की?
हैं, समझाया नहीं इसे?
अरे, भैया, आपको लगता है हमने समझाया नहीं?
हमने तो बोला हमसे ले ले पैसे। ये माना ही नहीं।
भैया, वो…
दोस्तों से पैसे लेने में मेरे आत्मसम्मान को चोट लगती।
- तो-- - बैठ।
आत्मसम्मान!
तो, शादी-वादी का क्या प्लान है? कब शादी कर रहा है?
क्या, भैया?
नहीं, अब तू पैसे-वैसे कमा रहा है, भाई, शादी भी कर ले।
- क्या बात कर रहे हों, भैया, आप? - बैठ के बात करना, आराम से।
मैं क्या बात कर रहा हूँ?
तू ही बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है।
तुझे ही बड़ी जल्दी है बड़ा होने की!
बड़े-बड़े शब्द इस्तेमाल कर रहा है "आत्मसम्मान"
और उनका बोझ भी झेल रहा है।
भाई, मैं खुद एमर्स चला रहा हूँ, यार, उधार ले लेके।
मेरा आत्मसम्मान नहीं है क्या?
माना तेरा आत्मसम्मान बहुत बड़ा है, माँग मत।
पर सामने से दोस्त मदद कर रहे हैं, तब तो ले ले, मीना।
भैया, मैं तो इसे कब से समझा रहा हूँ,
कि सही समय पर, सही इंसान की मदद ले लेनी चाहिए।
भैया…
भैया, मुझे लगा, मैं खुद कर लूँगा।
ये भी सही है! फिर ये प्रॉब्लम भी खुद ही सॉल्व कर लेता!
अब कैसे याद आ गई जीतू भैया की?
भाई, अर्जुन ने भी रणभूमी में कृष्ण से मदद ली थी।
वो भी मना कर देता, मदद नहीं चाहिए, हार के बैठ जाता कौरवों से।
वाहवाही होती क्या?
कि, "वाह, भाई, युद्ध हार गए, पर मदद नहीं ली!"
- ऐसा होता है क्या?? - नहीं, भैया?
फिर?
कहाँ फँस गया, मीना तू, यार?
कहाँ भटक गया तू?
इस टाइम पे सबसे इंपोर्टेंट आईआईटी है।
ये दस-पाँच हज़ार कुछ मैटर नहीं करेगा!
यूँ उड़ा दोगे एक घंटे में, पाँच साल बाद।
सिर्फ आईआईटी मैटर करता है अभी।
आईआईटी में नहीं हुआ सिलेक्शन तो?
क्या करेगा?
क्या करेगा!
28 नंबर आए हैं। जाके देख ले।
क्लास का एवरेज 38 है।
तुम लोग खुद अपना नुकसान करते हो, बाद में टीचर पर इल्ज़ाम लगाते हो।
मार्क्स तुम्हारे नहीं आते हैं, टेंशन हमें होती है।
भैया,
मुझे लगा कि बस दो घंटे निकालने हैं।
सॉरी, भैया।
- गलती हो गई, भैया। - अच्छा, ठीक है।
अब ना ये बालमुकुंद कोचिंग सेंटर बंद करो
- और पढ़ाई पे ध्यान दो। - हाँ, भैया।
- आ गया समझ में? - हाँ, भैया। समझ गया, भैया।
तो, कुर्सी से खड़ा हो जा।
- समझ गया तो? इधर आजा। - सॉरी, भैया।
मेरी कुर्सी पे बैठा है!
चलो।
पैसे ट्रांसफर करूँगा। ले लेना।
और जब कमाओ तो देना।
ठीक है?
चलो।
ध्यान रखो।
और, हाँ, अपने छात्रों को बोलना ज़रा कन्याओं पे कम ध्यान दें,
पढ़ाई करें।
[मीना] हाँ, भैया।
छात्र हैं इनके!
क्या, जीतू भैया, आप भी?
आपको नहीं लग रहा है कुछ ज़्यादा ही शामिल हो जाते हों बच्चों के साथ?
अपने ही बच्चे हैं, सर।
क्या करें? होना पड़ता है शामिल।
- हाँ। - [एक लड़का] जीतू भैया।
क्या हुआ?
तुमने भी कोचिंग खोल ली क्या?
मज़ाक कर रहा हूँ। बोलो क्या हुआ?
भैया, वो हमें आपसे कुछ बात करनी थी?
हाँ, बोलो।
भैया, हमें मैथ्स समझ में नहीं आ रही।
क्या सुनने में आ रहा है, गगन सर?
आइए, शामिल होइए अब।
क्या समझ में नहीं आ रहा मैथ्स में?
सर, वो विभेदक समीकरण और वेक्टर एल्गोरिदम।
और मैट्रिक्स भी।
मैट्रिक्स भी नहीं आ रहा?
कोई बात नहीं, सर, हो जाता है।
देखते हैं।
ओपटिक्स समझ में आ रहा है?
- नहीं, सर। - नहीं, सर।
मैग्नेटिज़्म?
- नहीं, सर। - नहीं।
अबे तो क्लास में पूछता हूँ, हाँ या ना, बोलो तो हाँ बोल के बैठ जाते हो क्या?
कोई बात नहीं, जीतू भैया, हो जाता है।
चलो कल एक डिस्कशन क्लास रखते हैं।
हो सकता है बाकी बच्चों को भी कुछ इश्यू हों।
वहीं सोल्यूशन सोचते हैं।
- जाओ अब। - ठीक है, भैया।
मुझे यकीन है कि इन्हें केमिस्ट्री भी समझ नहीं आती होगी।
ये ड्रॉपर्स वाला बैच ना, ये काफी कमजोर है ये।
नहीं, नहीं, सर। हो सकता है कुछ ही बच्चों का इश्यू हो।
जीतू भैया, आपको पता है, जब एडमिशन खुलते हैं,
तो टॉपर, क्रीम स्टूडेंट सबसे पहले महेश्वरी चले जाते हैं।
उसके बाद वाला लेयर प्रोडिजी चला जाता है।
जो बचे-खुचे होते हैं वो ही हमारे जैसे इंस्टीट्यूट में आते हैं।
और मैं तो काफी टाइम से देख रहा हूँ, ये इन कुछ बच्चों की दिक्कत नहीं है।
60 परसेंट बच्चे ऐसे ही हैं।
कईयों के तो ग्यारहवीं के बेसिक भी क्लियर नहीं हैं।
एक सोल्यूशन दूँ आपको?
हाँ, बताइए।
मेरा सुझाव है ना कि इनमें से जो बच्चे पढ़ने में अच्छे हैं,
उनका एक फोकस्ड ग्रुप बनाते हैं।
क्योंकि बाकी बच्चों को कॉन्सेप्ट बार-बार दोहराएँगे
उनका टाइम बर्बाद नहीं होगा।
और इस फोकस्ड ग्रुप के साथ ना हम रैंक भी ला सकते हैं,
क्योंकि बाकी बच्चों के साथ मुझे कोई उम्मीद भी नहीं है।
मैं समझ रहा हूँ कि…
आपके नज़रिए से एक अच्छी तैयारी बहुत ज़्यादा इंपोर्टेंट है।
पॉडकास्ट में सुना था।
लेकिन साल के अंत में, हमें भी तो रैंक्स ही दिखाने पड़ेंगे ना?
मैटर तो हमारे लिए भी रिजल्ट ही करेगा।
वरना वही होगा। अगले साल सिर्फ 100-150 बच्चे एडमिशन लेंगे बस।
- सर, क्या बोल रहे हों आप? - हाँ!
नहीं तो अच्छा सॉल्यूशन है। फिर तो रैंक्स पे ही ध्यान देते हैं।
ये जो 10-12 टॉपर हैं, इनको पढ़ाते हैं, बाकी बच्चों को छोड़ देते हैं।
क्योंकि वो तो, सर, रैंक्स लाके देंगे नहीं आपको कभी भी।
- मैं ये नहीं कह रहा हूँ। - सर, आप बिलकुल यही कह रहे हों।
कि टॉपर्स पर ध्यान देते हैं और बाकी लोगों को छोड़ देते हैं।
इस बात का कोई दूसरा मतलब है ही नहीं, सर।
सर, मेरे लिए हर स्टूडेंट मैटर करता है।
वो रैंक लाके दे या ना दे। मुझे फर्क ही नहीं पड़ता, सर।
मैंने एमर्स खोला ही इसी फिलोसफ़ी पे है। और इसी फिलोसफ़ी पे चलाऊँगा।
आपको जमता है ठीक है। नहीं तो आप, अपना देख लीजिए, सर।
ठीक है, जीतू भैया।
हम इस पे बाद में बात करते हैं।
हाँ, सर, मतलब आप आज बात करिए, कल बात करिए। मैं ऐसे ही सोचता हूँ, सर।
आप देख लीजिए अपना।
ठीक है।
गगन सर!
क्या हुआ अंदर?
पता नहीं।
कभी ऐसे रिएक्ट करते हुए देखा नहीं है जीतू को।
सुनो, सुनो।
तुम पढ़ाई पर ध्यान दो।
कन्याओं पे नहीं।
ठीक है?
- हाँ, भैया। - हाँ।
एमर्स
वर्तिका रतावल
[पार्श्व में संगीत बज रहा है]
[पार्श्व में संगीत बज रहा है]
6-9 डीपीपी
क्या मुझे अपॉइंटमेंट मिल सकता है?
अनुवादक: प्रशांत राय
Can't find what you're looking for?
Get subtitles in any language from opensubtitles.com, and translate them here.