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Original subtitles

महेश्वरी क्लासेस

भाई,

देखना इस बार ना, मेरा फोटो आएगा यहाँ।

अबे, पहले ये डीपीपी तो ढंग से कर ले।

आ जाएगा फोटो भी।

- कचौरी खाने चलें? - चल।

- मैं जाके पैसे देता हूँ। - हाँ।

दो कचौरी।

कचौरी तो ले लो।

कचौरी।

ये देख, मीना फ्री की कचौरी!

खा।

उदय जी, वैभव भी आ रहा है। तो, अब तो उसके आने तक रुक जाते हैं थोड़ा।

अरे मीना, कचौरी है गर्म।

मत कर शर्म, हो जाएगी नर्म! खा ले।

वाह!

हाय, हीरो!

- क्या हो गया, भाई? - क्या हो गया?

सुसू तुम्हारा पीजी छोड़ के गया, तुम्हारे चेहरे से तो खुशियाँ ही चली गईं!

क्या हुआ?

अरे यार, डीपीपी में चार सवाल एन्ट्रॉपी से आ गए।

- चारों ही नहीं बना पाया मैं। - अरे!

वैभव, ये ले तू कचौरी खा और मूड ठीक कर।

सवाल मैं बना दूँगा।

कलम है?

क्या है ये सवाल?

क्या?

भाई, हम से ग्यारहवीं के प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हो रहें, यार!

मतलब हद है, यार!

और हमको पता है ना हम जेईई दे रहे हैं इस साल?

हाँ, यार!

बहुत ज़्यादा टाइम नहीं है अपने पास। एक-एक दिन इंपोर्टेंट है।

वैभव, तूने तो मेरा भी मूड खराब कर दिया अभी।

हाँ, यार, इतना मनहूस पेपर है।

ये पकड़, भाई। खा तू।

वैभव, वैभव!

उससे पूछते हैं ना? वो तो माहेश्वरी ए1 बैच का है ना?

- अबे रहने दे यार। - सक्षम जी हैं।

- [गला साफ़ करने की आवाज़] - सक्षम जी!

जरा सी मदद कर दीजिए?

ये वाले सवाल समझ नहीं आ रहे हें, आप…

एन्ट्रॉपी का है।

- देखो टाइम बहुत कम है। - हाँ।

बर्बाद नहीं कर सकता, पर पढ़ाई के प्रति तुम लोगों की लगन देखकर अच्छा लगा।

थैंक यू।

अब 11वीं में इतनी ललक है, तो अगले साल तो कमाल ही कर दोगे।

ग्यारहवीं-- अरे!

ग्यारहवीं में थोड़े हैं हम!

उठा लो।

- क्या? - अरे, ये पड़ी।

अरे, फेंक के चला गया लौंडा तुम लोगों की इज्ज़त, भाई! उठा लो!

गंदा कर के चला गया!

मीना भाई, पानी ना अब ये सर के ऊपर से जा रहा है।

- हाँ, यार। - यार!

ऊपर से 10-15 दिन हो गए जीतू भैया कहाँ हैं?

ये अपने चाचा जी की शादी में कौन जाता है, यार, इतने दिन?

अरे, चाचा जी नहीं, मामा जी की शादी में गए हैं।

- अरे, चाचा जी की शादी में गए हैं वो। - मैं कह रहा हूँ ना मामा जी की शा--

[अवधी में] जैसे उदई वैसे भान, ना सुनते हैं ना समझते हैं!

अरे ना जीतू भैया के चाचा की शादी है न उनके मामा की शादी है।

उनके दादा जी की तबीयत ठीक नहीं है।

आज या कल में आ जाएँगे।

अब दादी जी ठीक हो गईं?

दादी बेहतर हैं, अभी दादा जी की तबीयत ठीक नहीं है।

- अच्छा। - है ना?

मंडे से तुम लोगों की फिजिक्स क्लासेस शुरू हो जाएँगी।

अरे बबलू भैया, आज मंडे ही है!

- और पिछले मंडे भी आपने यही बोला था। - [मीना] हाँ।

यार, मैं बोल रहा हूँ ना आज ही बात हुई है भरोसा रखो।

- [मीना] बात हुई? - हाँ।

फिर जीतू भैया,

- हमारा फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे हैं? - हाँ।

पहले तो कभी ऐसा नहीं करते थे।

आप अभी लगाइए ना फ़ोन।

- [वैभव] हाँ, एक बार बात करा दीजिए ना। - ऐसे कैसे लगा दूँ, यार?

- एक बार बात करा दो आप बस। - पहले कभी ऐसा नहीं करते थे।

[वैभव] एक बार बात करा दो ना, आप।

- [वैभव] फ़ोन करा के बात करा दो। - ऐसे कैसे लगा दें…

[गगन] अरे, क्यों उठाएँगे तुम्हारा फ़ोन?

वो डॉक्टर का फ़ोन उठाएँगे तुम लोगों का फ़ोन उठाएँगे?

तुम लोग भी समझो, यार!

ये कह रहा है ना मंडे से क्लास शुरू हो जाएगी, तो शुरू हो जाएगी। सब्र रखो।

जाओ, पढ़ाई करो, चलो। टाइम बर्बाद मत करो। चलो-चलो।

मंडे से।

बात हुई?

बबलू

[मोबाइल कंपन की आवाज़]

बबलू

[मोबाइल कंपन की आवाज़]

ध्रुव

[एक महिला] हम आए दिन ऐसा खबरों में सुनते हैं

कि हर कुछ दिनों में किसी ना किसी बच्चे ने बड़ा कदम उठाया।

क्या वजह लगती है आपको? क्योंकि मैं जब आप सबको सुन रही हूँ,

तो आप सब लोग किसी ना किसी प्रेशर से जूझ रहे हैं।

[एक लड़का] क्या पढ़ रहे हैं, कैसे पढ़ रहे हैं, क्यों पढ़ रहे हैं।

ये सारी चीज़ों का बहुत प्रेशर होता है स्टूडेंट पर,

फिर भी सब नहीं समझते हैं इस बात को।

[वर्णाली की आवाज़] भैया, मुझे कोई फायदा नहीं लग रहा है जेईई एडवांस लेके।

अब मेन्स का एग्ज़ाम ठीक-ठाक हो ही गया है,

तो कोई ना कोई एनआईटी तो मिल ही जाएगा ना।

[जीतू की आवाज़] यहाँ हम, 32 में आगे बढ़ रहे हैं,

आप 17 में ही धीमे पड़ गए!

ऐसे कैसे चलेगा, दीदी?

कोटा फ़ैक्ट्री

ध्रुव

[मोबाइल कंपन की आवाज़]

ध्रुव क्या, भाई? भूल गया क्या?

[रिंग जाने की आवाज़]

[ध्रुव] साले, जीतू!

बड़ा आदमी बन गया तू! फ़ोन भी नहीं उठाता मेरा!

और, भाई बता? क्या हालचाल हैं?

अरे तुम, यार!

कोटा के टीचर इंस्टीट्यूट खोल के बड़े बिज़ी हो जाते हो, यार।

बड़ा आदमी हो गया तू!

वो तेरे पैसे याद हैं, यार। मैं करता हूँ थोड़ा टाइम दे दे ना।

मैं देता हूँ तुझे।

अबे! बहन…

पैसे माँगे मैंने?

इंस्टीट्यूट की बात ही कर रहा हूँ ना?

नहीं, नहीं अब पैसे लिए हैं तो…

देने तो हैं ही, यार।

हाँ, बस तेरी यही बातें तो दिल को छू जाती हैं।

पता है, पता है, पैसे का पक्का है तू।

उस दिन भी कॉल कर रहा था। कुछ…

ज़रूरी था क्या?

अरे नहीं, कुछ नहीं, यार। वो--

मैं थोड़ा क्लास में ऐसे ही बिज़ी हो जाता हूँ।

चाचा जी ना अपने लड़के को कोटा भेजने का सोच रहे थे।

- अच्छा। - और चाची थोड़ा परेशान हो रही थी।

कह रही थी कि, "भाई, कोटा जाएगा अकेला लड़का, कैसे रहेगा, कौन ख्याल रखेगा?"

तो मैंने सोचा तेरे से थोड़ी बात करा देता हूँ, उनकी तसल्ली हो जाएगी।

तूने फ़ोन ही नहीं उठाया।

तो फिर मैंने ही उनको समझा दिया।

मैंने कहा लड़का कोटा जाएगा तो एमर्स में ही पढ़ेगा।

मतलब वहाँ पढ़ाई तो अच्छी होगी ही और अपना जीतू भी होगा,

उसका बड़े भाई जैसा ख्याल रखेगा।

तो थोड़ा सहारा हो जाएगा ना?

अबे, मैंने तो तेरी तरफ से ये तक बोल दिया

कि जीतू के पढ़ाए फिजिक्स के कॉन्सेप्ट हों या ज़िंदगी के,

कोई बच्चा कभी भूल नहीं सकता।

प्रोड्जी क्लासेज़ प्राइवेट लिमिटेड

तो आप बिट्टू को बिना टेंशन लिए बेझिझक हो के वहाँ भेजो।

जब तक जीतू है वहाँ, कोई बच्चा कभी अकेला महसूस नहीं करेगा।

और फिर फ़ोन काटा,

तो सोच रहा हूँ, "यार, ये साले की इतनी तारीफ़ करता हूँ,

ये चूतिया मेरा फ़ोन ही नहीं उठाता!"

जीतू, मैं कॉल करता हूँ। हाँ? मेरा बॉस पता नहीं क्यों मुझे फ़ोन कर रहा है।

- हाँ, चल ठीक है। - चल। ओके, बाय।

[मोबाइल कंपन की आवाज़]

मीना

[मोबाइल की घंटी बजती है]

नहीं, मीने…

अरे मिंकू, मेरे भाई!

मेरे देसी ब्रेट ली! क्या हाल चाल हैं, भाई?

कौन है?

[वैभव] ट्रेनिंग कैसी चल रही है, भाई?

एमर्स

क्या?

आईपीएल ट्रायल्स?

अरे मिंकू भाई, आईपीएल-शाइपीएल?

अरे, क्या बात है, यार, वाह!

तो अभी कहाँ है फिर?

अरे भाई, तू तो जयपुर में है। तो कोटा कितनी दूर है आ जा, यार।

अरे भाई, शाम-शाम को आ जाना, फिर सुबह निकल जाना, यार।

अबे आजा, यार। कितने दिनों से मिले भी नहीं हैं अपन।

पक्की बात? चल ठीक है। सही है, सही है। ठीक है।

भाई, मेरा कज़न है। पढ़ाई में डब्बागोल है,

पर क्या क्रिकेट खेलता है, यार! तुम लोग पागल हो जाओगे, भाई!

आईपीएल ट्रायल्स दे के आ रहा है!

- क्या बात कर रहा है? - अच्छा?

- वाह! - तो शायद कोटा आ रहा है।

- तूने उसे कोटा आने का आमंत्रण दे दिया? - हाँ।

जयपुर आया था, तो मैंने बोला आजा।

वाह!

उस दिन तो बोल रहा था, "पानी सर के ऊपर निकल गया है।

एक-एक दिन इंपोर्टेंट है।"

अब?

वो अभी भी इंपोर्टेंट है।

पर, मीना यार, मेरा भाई है वो।

फॉर्मेलिटी नाम की कोई चीज़ होती है कि नहीं। कौन सा आके रूकने ही वाला है, यार।

आज आएगा, कल चला जाएगा।

हाँ, ठीक है, मुझे क्या। देखो, मैं तो पढ़ाई करूँगा।

- करना। - अच्छा…

क्या लगता है आज जीतू भैया की क्लास होगी?

जीतू भैया, आप आ गए!

कितनी बार फ़ोन किया आपको मैंने!

आप कोई मैसेज का रिप्लाई नहीं करते हों! सब कितना परेशान हैं!

गगन सर, मैं, बच्चे। आपको रिप्लाई करना चाहिए ना!

- कुछ तो बोलो, यार! कुछ तो बोलो, आप! - अरे थम जा, भाई!

क्लास के बाद बात करें?

ठीक है।

- जीतू भैया आ गए! - जीतू भैया आ गए!

[उदय] अरे मीना, मैंने बोला था ना?

- [उदय] जीतू भैया आ गए! - [मीना] तूने कब बोला था?

जीतू भैया आ गए!

- क्या हाल हैं सबके? - बढ़िया!

अरे, क्या बढ़िया! आपके बिना क्या ही हाल होंगे?

पानी सर के ऊपर निकल गया था।

तो कहाँ रुके थे हम लोग?

[मीनल] भैया, आप थर्मोडायनामिक्स स्टार्ट करने वाले थे।

क्या हुआ डरावना लग रहा है?

- हाँ, भैया! - हाँ, भैया!

पर हमने क्या सीखा है?

- डरना बिलकुल नहीं है! - नहीं है!

कुछ ज़रूरी शब्द ध्यान रखने हैं।

"लगातार दबाव के ख़िलाफ़"

दिख जाए तो प्रोसेस क्या हो जाएगी?

स्थिर!

भाई, मिंकू भैया कितने बजे आएँगे?

आएँगे, अरे आ जाएगा चार बजे तक।

[मीना] उदय जी, जल्दी वापस जाएँगे। पढ़ाई भी करनी है।

- हाँ, तू पढ़ लेना। - [जीतू] क्या भाई, वैभव?

सब कुछ मीना से ही समझेगा क्या?

मुझ से भी कुछ समझ ले, भाई?

अरे भैया, पूछ नहीं रहा था, मैं तो बता रहा था।

भैया, मैं बता रहा था कि वो कज़न आ रहा है कोटा मिलने।

तो थोड़ा उत्साह है कि कहाँ घूमाने ले जाऊँगा, यही सब।

पढ़ाई के अलावा उत्साहित होने के सारे कारण हैं तुम्हारे पास है ना!

पढ़ने के टाइम पे अभी भाई को कोटा दर्शन कराएँगे!

नंबर कम आएँ, तो बोल देना जीतू भैया ने संभाला नहीं।

क्या-क्या संभालूँ मैं?

भैया, वो बस एक दिन के लिए आ रहा है।

कल वापस चला जाएगा।

ठीक है, यार, करो जो करना है तुम्हें।

[वैभव] तुझे ये पानी की टंकी दिख रही है ना? हाँ, बस वहाँ से बाएँ लेना है।

मैं बाहर ही खड़ा हूँ, दिख जाऊँगा तेरे को।

कहीं गलत रास्ते पर तो नहीं निकल गए मिंकू जी?

अरे भाई, वो उदय थोड़ी है जो गलत रास्ते पर निकल जाएगा।

ओ! ओ, भाई!

मेरा भाई आ रहा होता ना आईपीएल ट्रायल्स दे के,

कोटा स्टेशन के बाहर ढोल और माला लेके खड़ा होता।

तुम लोग को मेहमाननवाज़ी करनी आती भी नहीं है।

- अच्छा? - आए बड़े!

डांट भूल गया भैया की?

देखो एक ऑटो आ रहा है।

ओए! इधर!

ये रहे!

- अरे, आ गए। - ये ही है क्या मिंकू?

लो आ गए।

यहीं रोक दो।

कैसा है, भाई?

भाई, अब तू और लंबा हो गया है क्या?

भाई, तू छोटा रह गया।

कोटा आने में इतने नखरे क्यों कर रहा था तू?

भाई, मुझे लगा तुम लोग बिज़ी होंगे पढ़ाई में।

- अब कितना प्रेशर होता है तुम लोगों पे। - सही है।

आप भी अवगत हैं हमारी परिस्थितियों से!

भाई, जेईई की तैयारी

और पर्थ की बाउंसर दोनों ही बहुत मुश्किल होती है।

वाह, यार!

- मैं उदय। - हाय। मिंकू।

ये मीना।

- हाय। मिंकू। - हाय।

- चलिए, ऊपर चलें? - हाँ।

- हाँ, चलो। - अरे, रहने दीजिए।

- ये बैग लूँ-- - अरे!

- मिंकू भैया, आप हमारे मेहमान हैं, यार। - हाँ, यार!

- आओ। मीना ले चल। - चलो, चलो।

चलो। वैभव, वो बैग ले लेना।

- रोज़ खेलते हैं? - जी।

अरे, वाह!

- शाबाश। - शाबाश!

भैया, ये हमारे यहाँ की बहुत मशहूर कचौरियाँ हैं।

- नहीं, भाई। - अरे।

अरे नहीं, भाई। तला हुआ अलाउड नहीं है।

मशहूर है!

नहीं। फिटनेस बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। तुम लोग खाओ। मैं नहीं खाऊँगा।

ये ले, मीना, तू ही खा ले।

मेरी तो सेहत इसी से बनेगी, उदय जी।

बिलकुल सही बात है!

एक मिनट। लो भाई गिफ्ट।

- मेरी भी आप ही खा लो। - सही में?

हाँ।

खिलाड़ियों को कितनी मेहनत करनी पड़ती है।

क्या-क्या त्यागना पड़ता है, देखो!

- हाँ। - [मीना] सही है।

भैया, ये आपकी आईडी है?

हाँ।

क्या है?

- कोहली के साथ फोटो है आपकी! - क्या?

हाँ, ये देख!

अरे!

इंडिया का मैच था इंदौर में, तो हमें नैट बॉलर के तौर पर बुलाया था।

भाई को बॉलिंग डाली,

- फोटो ले ली, यार। - आप तो उनसे भी लंबे हैं!

आपने कोहली को बॉलिंग की है?

- हाँ, भाई। - अरे, यार!

भाई, एक बार छू लो, छू लो एक बार।

अरे, भाई!

[मीना] क्या बात है!

क्या बात है! मीना, फोटो ले, यार।

- मेरी भैया के साथ। - [मीना] यार!

फोटो ले, यार! क्या यार!

अरे, घुमा लो।

वैभव, भैया को लेके चलते हैं, सात अजूबे घुमाते हैं, जग मंदिर घुमाते हैं।

टाइम बचा तो गरड़िया महादेव भी लेकर चलेंगे। चलो।

अरे, भाई! अभी तो ट्रेवल कर के आया है, यार। है ना?

थोड़ा आराम करने दो। तुम ना दो-तीन घंटे बाद आना फिर देखते हैं, क्या करेंगे।

ठीक है। फिर तीन घंटे बाद ही महफिल जमानी है,

- तो पढ़ लेता हूँ, फिर तब तक। - भाई, यहाँ नहीं। घर पे।

घर जा के, घर जा के पढ़ो। फिर आराम से आओ। है ना?

- थक गया होगा, यार। - अरे, ये थक भी जाते हैं?

और नहीं तो क्या! आदमी हैं ना, यार!

- ये तो फिट हैं ना लेकिन! - हाँ, तो क्या हुआ?

- जाओ, जाओ। - ओके, भाई!

- बाय बोलो। - बाय!

- बाय। - अरे, आराम से!

कैसा है ये!

अबे, सुन।

शिवांगी और वर्तिका को भी मिलवाते हैं मिंकू भैया से।

क्या बोलता है?

अरे…

अबे, हाँ, मीनल को भी!

आजा!

- [एक महिला] समझ आया? - यस, मैम!

- पक्का? - यस, मैम!

[अंग्रेज़ी में] ठीक है। अब, कोश्चन 20।

[अंग्रेज़ी में] तो, आखिरी सवाल…

[अंग्रेज़ी में] इनमें से कौन एसिटाईलीन के साथ रिएक्ट नहीं करेगा?

ए, एनए।

बी, एनएओएच।

सी, दोनों।

[अंग्रेज़ी में] डी, इनमें से कोई नहीं।

नींद आ रही है?

जवाब क्या है बताओ।

- एनए। - सोडियम!

सोडियम?

सोडियम क्यों नहीं रिएक्ट करेगा, भाई?

एसिटाईलीन सबसे सरल एल्काइन है।

- है कि नहीं? - यस, मैम!

और सोडियम तो हमेशा जोश में रहता है।

बताओ क्यों।

एक इलेक्ट्रॉन एक्स्ट्रा जो है इसके पास।

अब, ये इलेक्ट्रॉन छोड़ के, सोडियम एनए प्लस बन जाता है,

और इलेक्ट्रॉन माइनस।

अब इलेक्ट्रॉन को स्थिर होने के लिए क्या चाहिए?

- प्लस! - बहुत बढ़िया!

सीएच बॉन्ड में, प्लस कौन है?

हाइड्रोजन!

क्या बात है!

अब, हाइड्रोजन,

सोडियम के प्रॉमिस में कि एलेक्ट्रोन मिलेंगे,

कार्बन को छोड़ देता है।

हँसने की बात नहीं है। बहुत बड़ा धोखा हो रहा है यहाँ।

यहाँ हाइड्रोजन का दिल टूट जाता है।

रेडिकल हो के घूम रहा है ये अब।

अब, मरता क्या नहीं करता?

अपने जैसे एक और रेडिकल हाइड्रोजन के साथ मिलकर

बॉन्ड बना लेता है।

और निकलती है?

- हाइड्रोजन गैस। - हाइड्रोजन गैस।

बिलकुल सही!

तो, हाइड्रोजन के साथ इतना बड़ा धोखा हो जाता है,

और तुम लोग कह रहे हो कोई रिएक्शन नहीं होगा!

कैसे? अब बताओ, सही जवाब क्या है?

एनएओएच।

बिलकुल सही। अब प्रॉमिस करो याद रखोगे।

यस, मैम!

धोखा मत देना।

नहीं, मैम!

- लव स्टोरी याद रहेगी ये? - यस, मैम।

भैया, आपने पूजा दीदी से बात की?

सुसाइड सिटी

नहीं।

भैया, बहुत अच्छा केमिस्ट्री पढ़ाती हैं वो। बच्चे भी उनका क्लास एंजॉय करते हैं।

एक बार बात कर के देखो। एमर्स जॉइन कर लिया ना उन्होंने, मज़ा आ जाएगा।

अरे यार, वो जयपुर में सैटल हैं।

कोटा आई हुई हैं क्योंकि अग्रवाल सर की तबीयत खराब है।

लगे हाथ हमारी भी मदद कर रही हैं।

ऐसा ना लगे कि इन लोगों की मदद क्या की, ये तो गले ही पड़ गए।

मुझे तो ये समझ में नहीं आ रहा कि अग्रवाल सर की बेटी…

कोटा छोड़ के जयपुर क्यों पढ़ा रही है।

भैया, बात नहीं तो कम से कम ये ही पूछ लो कि कब तक हैं यहाँ।

उस हिसाब से हम भी आगे का प्लान करेंगे ना।

- हाँ, पूछेंगे नहीं तो पता कैसे चलेगा-- - हाँ।

क्या है वो…

मेरे बारे में बात कर रहे हो?

अरे, कर लो ना गॉसिप। मेरे सामने करो।

मैं बुरा नहीं मानूँगी।

नहीं, वो जीतू भैया से कह रहा था कि…

मेरी क्लास ना पूजा दीदी के बाद रखा कीजिए।

बच्चे जोश में रहते हैं। अरे, ये ले लिया था। बाहर जाना है।

जीतू भैया, तारीफ़ कर रहे हैं तो पीठ पीछे कर लें,

बुराई कर रहे हैं तो सामने-सामने कर लेना।

[दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़]

[लगातार खटखटाने की आवाज़]

क्या? क्या?

- क्या कर रहे-- अरे! - मिंकू भैया!

- हाय! - हैलो।

- हाय। - हाय।

- हाय। - हाय।

हाय, मिंकू भैया। मैं शिवांगी, उदय की गर्लफ्रेंड।

- ओके। - [उदय] ये मेरी है।

- आपके भाई वाली ये है, वर्तिका। - अरे!

- ये मीनल। - हमारे साथ पढ़ती है।

- ओके। - कॉन्ग्रेच्युलेशन, मिंकू भैया!

अभी बस ट्रायल्स हुए हैं।

- तो, ऐसा कुछ… - भैया!

- फ्री आईपीएल पास बनते हैं हमारे लिए। - [मीना] बनते हैं!

- दोस्तो, अभी सिलेक्शन नहीं हुआ है। - [वैभव] हाँ।

अरे सिलेक्शन नहीं हुआ है, पर पता है,

- भैया ने कोहली को बॉलिंग डाली है, भाई! - हाँ!

इन्हें हल्के में मत लो। ये स्टार हैं।

[वर्तिका] भैया, फिर तो एक छोटी सी रिक्वेस्ट है।

आपके सिलेक्शन के बाद ना, मुझे आपका एक पोस्टर दे देना ऑटोग्राफ के साथ, प्लीज़!

यार, तुम लोग ना अभी बहुत प्रेशर डाल रहे हो इस पे।

ऐसे नहीं होगा उसका।

अभी कह रहा है वो सिलेक्शन नहीं हुआ है उसका।

[उदय] भाई, एक बात तो तय है।

अब अगर वैभव की एआईआर वन भी आ जाए ना,

तो भी वर्तिका के कमरे में पोस्टर अपने मिंकू भैया का ही लगेगा।

क्या सीन है, फिर? चलें घूमने फिरने?

- हाँ! - गेड़ी-वेड़ी मारते हैं!

अरे!

क्रिकेट खेलते हैं ना।

- हाँ! - हाँ, क्रिकेट खेलते हैं, भाई!

- हाँ। - तुम सब की रेल बना दूँगा आज!

- [मिंकू] चलो। - भैया, आप मुझे आउट तो नहीं करोगे ना।

उदय, तुम को मैं आउट करूँगी।

ओह, मुझे ये कॉन्फ़िडेंस पसंद आया!

दोस्तो, यार, क्रिकेट नहीं खेलते हैं ना, कुछ और खेलते हैं।

अभी हम लोग क्रिकेट खेलेंगे फिर थक जाएँगे। कल का दिन ऐसे ही बर्बाद हो जाएगा।

वो खेलते हैं ना ट्रुथ और डेयर?

- बैठ के हो जाएगा। - क्या…

- बच्चा है क्या? - अच्छा, सुन ना।

भाई…

- एक फ़ोन लगाना। - किसको?

तेरे फन करने वाले वर्जन को, भाई और उसको लोकेशन भेज,

और बोल इधर आने के लिए।

[उदय] क्या हो गया?

बहुत बढ़िया! चलो फिर छत पर।

- चलो, चलो। - अरे, पॉसिबल नहीं है।

- क्या? - अरे, चाभी ले ली हमसे, यार।

- [मिंकू] क्यों? - हमें देते ही नहीं हैं।

अरे, वो एक लड़की ने कुछ दिन पहले ही, तनाव में आकर ना कुछ गलत कदम उठा लिया।

तो, सारे छत बंद उसके बाद।

हाँ।

- हाँ। - यहीं बैठते हैं चुपचाप।

- बाहर गली में खेल लेते हैं। - हाँ!

- ये बहुत बढ़िया आइडिया है! - चलो, चलो।

- आओ, मिंकू भैया। आ जाओ। - आ जाओ।

- चलो, चलो। - चलो, गाँव वालों!

♪ क्रिकेट खेलेंगे! ♪

आ जाओ।

तुम नहीं आ रहे हो?

नहीं।

मैं बैठ के मोल कॉन्सेप्ट रिवाइज़ करूँगा।

- तुम जाओ। - पक्का नहीं आ रहे?

हाँ, पक्का नहीं आ रहा।

ओके। बाय।

♪ मैं बोला, हे! वो मानी तो ♪

♪ आँखों से लोरी वो सुना दे तो ♪

♪ सपनों में मैं बह जाऊँगा, मुझको रोको ♪

♪ मैं बोला, हे! वो आए तो ♪

♪ दो पल साथ बिताए तो ♪

♪ दिल के राज़ सुनाऊँगा, मुझको रोको ♪

♪ हाँ, तुम रोको ♪

♪ पर हमको तुम रोको ना ♪

♪ जब हम ऐसे खोए हों ♪

♪ अपनी छोटी दुनिया में ♪

♪ क्यों हमको तुम रोकोगे? ♪

♪ तुम भी ऐसा सोचो ना ♪

♪ जब हम ऐसे खोए हों ♪

♪ तारों की उन गलियों में ♪

♪ कैसे हमको ढूँढोगे? ♪

♪ मैं बोला, हे! वो मानी तो ♪

♪ आँखों से लोरी वो सुना दे तो ♪

♪ सपनों में मैं बह जाऊँगा, मुझको रोको ♪

♪ मैं सोचूँ ये, तू माने तो ♪

♪ चाँद पे घर बनाके हम ♪

♪ दुनिया ढलते देखेंगे, हाँ, सोचो ♪

♪ हाँ, तुम सोचो ♪

इसका आन्सर 2.05 एम होगा। देखना एक बार।

सत्रह…

- हाँ, सही है। - हाँ, 2.05।

अरे, कितना आसान सवाल है, यार, वर्तिका।

इतने आसान सवाल नहीं बन रहे तुमसे?

मुझे ही समझ में नहीं आया।

तुम नहीं होते तो मैं क्या करती, वैभव?

क्रिकेट खेल रही होती और क्या।

मिंकू भैया गए?

चला गया सुबह-सुबह।

उनका तो सही है ना, यार अब।

आईपीएल खेलेंगे वो।

अभी ना सिर्फ ट्रायल्स दिए हैं उसने।

आईपीएल खेला नहीं है।

तुम लोग तो ऐसे रिएक्ट कर रहे हो जैसे आईपीएल की ट्रॉफी जीत के बैठा हुआ है वो!

ऐसा नहीं है।

आईपीएल ट्रायल्स देने में और आईपीएल खेलने में

- ज़मीन आसमान का फर्क होता है। - बिलकुल।

है ना?

[अंग्रेज़ी में, चिढ़ाते हुए] "वैभव को हो रही है जलन!"

सॉरी। एक मिनट। तुम…

कल के पोस्टर वाली बात पर अभी भी नाराज़ हो क्या?

नहीं, नहीं, मैं क्यों नाराज़ होऊँगा, भाई?

तुम्हारा कमरा है, तुम्हारा घर है, तुम्हारी दीवार है।

जिसका चाहे पोस्टर लगाओ।

अरे, तुम ना चिढ़ते हो तो और भी क्यूट लगते हो। मैं क्या करूँ?

पढ़ लें थोड़ा? नहीं तो आज का दिन भी ऐसे ही बर्बाद हो जाएगा।

क्या हुआ?

मैं रूम में पोस्टर चाहे किसी का भी लगाऊँ…

पर फ़ोन का वॉलपेपर तो तुम्हारे साथ ही होगा।

- क्यूट तो तुम हो वैसे! - अरे!

थैंक यू, मैम।

थैंक यू से कुछ नहीं होगा। रिविज़न करते रहना।

- यस, मैम। - चलो।

अरे, जीतू भैया!

कहीं बच्चे हमारी कंप्लेंट तो नहीं कर रहे हैं?

अरे मैम, आप तो भैया मत बुलाया करो। अजीब हो जाता है।

तू भी मुझे दीदी बुला ले। इसमें क्या है?

मुझे तो पुरानी आदत है आपको मैम बुलाने की।

हाँ, तो?

मुझे भैया बुलाने की।

अब आपसे बहस में अग्रवाल सर नहीं जीत पाते तो मैं तो क्या ही चीज़ हूँ?

आपको जो सही लगे।

तू सिर्फ मुझे यही कहने आया था?

नहीं, मैम।

मैम, मैं आप पर ज़्यादा दबाव नहीं देना चाहता,

पर जानना था कब तक हैं आप हमारे साथ।

सब लोग थोड़ा…

क्या?

सब लोग थोड़ा चिंतित हैं।

जीतू, मैं भी टीचर हूँ।

बीच में छोड़ के नहीं जाऊँगी।

साल के आखिर तक हूँ और फिर जयपुर।

मैम, ये कोटा छोड़कर आप जयपुर क्यों पढ़ाना चाहती हैं?

कोटा तुम सब को मुबारक हो।

मुझे ये शहर रास नहीं आता।

मतलब…

कोई गुंजाइश नहीं है?

अच्छा, सुन…

पापा ने तुझे इनऑर्गेनिक ऑप्शन में रखने को कहा था

क्योंकि तेरी वीक थी।

और तू सबको यहाँ यही सिखा रहा है?

अरे, नहीं-नहीं। जिनकी वीक है सिर्फ उन्हीं को बताता हूँ।

- सबको नहीं बता रहा। - अच्छा?

[मोबाइल कंपन की आवाज़]

हाँ, मम्मी?

तूने मिंकू की न्यूज़ सुनी?

ओहो, मम्मी!

मम्मी, आईपीएल ट्रायल्स दिए हैं उसने।

आप लोग तो मतलब ऐसे कर रहे हों, ट्रॉफी लेके बैठा हुआ है वो!

आप ही लोग हों जो ऐसी छोटी-छोटी बातों की न्यूज़ बना देते हों! कोई न्यूज़ है ये?

अरे बेटा, उसका सिलेक्शन हो गया है।

क्या? आईपीएल में?

हाँ! उसकी तो लाइफ ही सेट हो गई।

तो सही है।

कल से मैं भी इटारसी क्रिकेट अकेडमी जॉइन कर लेता हूँ।

मेरी भी लाइफ सेट हो जाएगी।

अरे बेटा, कैसी बात कर रहा है तू, हाँ?

मैंने तो तुझे सिर्फ बताने के लिए कॉल किया था।

अच्छा एक काम कर।

उसे कॉल कर लेना। उसे अच्छा लगेगा।

यार, मैं नहीं कर रहा अभी फ़ोन-वोन कोई।

मुझे लगेगा तो मैं कर लूँगा।

पढ़ाई करूँ या फ़ोन करूँ उसको अभी।

ठीक है। बाय।

[मोबाइल कंपन की आवाज़]

कॉन्ग्रेच्युलेशन मींकू भैया

[जीतू] आया ये समझ में?

जी, भैया!

- हो जाएगा ऐसा कुछ आया तो? - जी, भैया!

चलो फिर।

कल मिलते हैं।

- भाई, पार्टी दे दे! - पार्टी!

- पार्टी! पार्टी-- - क्या? किस बात की पार्टी?

अरे तुम्हें क्या लगा? तू नहीं बताएगा तो क्या उदय जी को पता नहीं चलेगा?

- पार्टी दे दे, भाई, पार्टी दे दे। - भाई, स्टोरी देखी मिंकू भैया की।

उनका सिलेक्शन हो गया!

पार्टी दे दे, यार!

अबे क्या पार्टी-पार्टी बे? क्या पार्टी-पार्टी?

क्या फालतू का ड्रामा लगा रखा है, "पार्टी, पार्टी, पार्टी?"

मिंकू का सिलेक्शन हुआ है, मेरा नहीं!

उससे जाके माँगो ना पार्टी!

किसी और की सक्सेस पे किसी और से पार्टी माँगते हो क्या?

दिमाग पे ज़रा ज़ोर डालो, सबसे बड़ा गधा कौन है फिर!

जीतू भैया…

अरे अभी निमंत्रण देने पर आओगे क्या?

आओ।

भैया, हम तो बस पार्टी माँग रहे थे।

पता नहीं ये इतना क्यों भड़क गया।

हाँ, भैया। इसके भाई का आईपीएल में सिलेक्शन हुआ है।

अरे पता है, भैया, उसकी विराट कोहली के साथ फोटो है!

[नोटिफ़िकेशन की आवाज़]

वही जिसको तुम कोटा घुमा रहे थे?

अरे कहाँ, भैया।

आपने डांट दिया तो फिर हिम्मत ही नहीं हुई।

और भैया, उसको भी मैंने ऐसे ही नाम का इनवाइट किया था।

वो भी भाईसाहब ऐसे हैं ना कि बिलकुल आ ही गए एकदम।

और फिर सारा रूटीन ही बिगड़ गया।

और ये लोग भी कम नहीं हैं, भैया।

सर पे उठा के रखा था उसको!

पढ़ाई-लिखाई छोड़ के सब उसके आगे-पीछे नाच रहे थे ये लोग।

उसके जाने के बाद से भी बंद नहीं हुआ है, भैया।

जब भी बुक खोलता हूँ ना,

तो फैमिली व्हाट्सएप ग्रुप बजने लग जाता है।

"मिंकू का सिलेक्शन हो गया।" "मिंकू की तो लाइफ सेट हो गई।"

[अंग्रेज़ी में] "हमें तुम पर बहुत गर्व है, मिंकू!"

पापा मुझे न्यूज़ भेज रहे हैं!

"इटारसी के लौंडे ने किया कमाल!"

सब मिंकू के ही गाने गा रहे हैं।

एकदम लूजर जैसा फील हो रहा है मेरे को तो।

अच्छा।

तो भाई की सक्सेस से जलन हो रही है?

नहीं-नहीं, ऐसा नहीं है, भैया।

दरअसल, ऐसा ही है।

देखिए ना, भैया, मेरा आईआईटी में हो भी गया तो भी क्या फायदा?

उसके आगे तो लूजर ही रहूँगा ना।

अरे थम जा, भाई!

इंसान को प्रॉब्लम तब होनी चाहिए

जब उसने अपनी जर्नी खुद ना चुनी हो।

यहाँ तो रस्ता तुमने खुद चुना है।

आईआईटी तेरा पैशन भी है और लक्ष्य भी।

हाँ, वो है।

पर, भैया, पता भी नहीं ना कि आईआईटी में होगा भी या नहीं होगा।

और इतनी मेहनत के बाद अगर हो भी गया तो भी…

चार साल की पढ़ाई और।

कब मेरी जॉब लगेगी, कब मैं लाइफ में सैटल होऊँगा?

मम्मी तो सही कह रही हैं।

मिंकू की तो लाइफ अभी से सेट हो गई है।

यार भैया, मेरी जर्नी इतनी लंबी क्यों है?

तुझे ऐसा तो नहीं लग रहा ना कि उसकी जर्नी आसान थी?

बेसिक से समझाना पड़ेगा भाई।

देख भाई।

कोई भी ब्लॉक तब हिलता है जब उसपे लगाया गया फोर्स घर्षण से ज़्यादा हो।

और ये फ़िज़िक्स तो मिंकू के लिए भी सेम है।

जब उसने अपनी क्रिकेट जर्नी शुरू की होगी, तो उसे भी लगता होगा

कि यार सुबह से शाम तक मेहनत करता हूँ, प्रैक्टिस करता हूँ,

पता नहीं क्या होगा करियर का। करियर डाउट तो उसको भी आते होंगे।

पर उसने हार नहीं मानी। लगा रहा। पहुँच गया।

और तू भी अपनी जर्नी एंजॉय कर रहा है।

रोज़ अपने आप को इंप्रूव कर रहा है, बेहतर कर रहा है।

और जब अपनी मुश्किल जर्नी अच्छी लगने लगे ना,

तो उससे बढ़िया बात कुछ नहीं होती ज़िंदगी में।

फिर नहीं फर्क पड़ता मंजिल कितनी दूर है।

सोच के देख।

आईपीएल में दस टीमें खेलती हैं।

मिला-जुला के 250 प्लेयर बनते हैं।

किस्मत अच्छी रही तो 10-15 प्लेयर नए आते हैं।

आईआईटी के लिए तो फिर भी 10-11 लाख बच्चे बैठते हैं,

उसका कॉम्पटिशन तो पूरा इंडिया का हर बच्चा है।

हर गली में क्रिकेट हो रहा है।

उस कॉम्पटिशन में सक्सेस रेट का तो तू हिसाब लगा ले,

क्या बैठता है। इतना स्मार्ट तो तू है।

अरे भाई, तुलना करना छोड़।

उससे प्रेरणा ले।

कि इस कॉम्पटिशन के बाद भी वो लगा रहा, पहुँच गया।

समझा?

अरे हाँ-ना कुछ बोल, भाई।

हाँ, भैया, सही कह रहे हों।

जब आपने अपनी मंजिल और रास्ता खुद चुना हो,

और रास्ते में मज़ा भी आ रहा हो तो फिर…

दूसरों की सक्सेस से फर्क नहीं पड़ना चाहिए।

हाँ! और मेहनत करेंगे और आईआईटी निकालेंगे, भैया।

मीना जल्दी समझ जाता है।

चल, इन भुक्कड़ों का मुँह मीठा करा दे। और श्रद्धा करे तो मेरा भी।

- ठीक है, भैया। - चल।

रसमलाई खिला दे।

- [मीना] जीतू भैया… - [वैभव] चन्द्रकला खिला दूँ?

[उदय] चमचम खा लेते हैं, भाई, चल।

हाँ, अभी तो काफी अच्छा फील हो रहा है, मैम।

डॉक्टर सुधा व्यास

[अंग्रेज़ी में] मैं वो देख सकती हूँ और मैं बहुत खुश हूँ।

हाँ, पहली बार आया था तो बहुत बुरी हालत थी।

[अंग्रेज़ी में] गिल्ट, उदासी, कोई उद्देश्य नहीं।

यही अपना सत्य लगने लगा था।

ना सो पा रहा था, ना उठ पा रहा था।

ना घर से बाहर निकल पा रहा था।

सबसे बड़ी तकलीफ थी कि मेरा क्लास लेने का मन नहीं हो रहा था।

अभी बेहतर फील कर रहा हूँ।

पहले जैसा लग रहा है।

ठीक से सो पा रहा हूँ।

क्लासेस शुरू हो गई हैं।

और आज तो अपने बच्चों की पर्सनल प्रॉब्लम भी सुलझा के आ रहा हूँ।

अच्छा फील हो रहा है।

मैम, इस पूरी जर्नी में,

आपका बहुत साथ रहा।

ये सब सुनने के बाद, तुझसे ज़्यादा खुशी मुझे हो रही है, जीतू।

बस इस प्रोसेस को जारी रखना है।

मैम…

अभी अच्छा फील कर रहा हूँ तो मैं सोच रहा हूँ कि…

कि सारी एनर्जी, सारा फोकस काम पे ही लगाता हूँ।

इंस्टीट्यूट संभालना है, बच्चों के एग्ज़ाम भी सर पे हैं।

और दरअसल उधार काफी है मुझपे। तो काम पे लगा जाए।

अभी काम बाकी है, जीतू।

फ्रीक्वेंसी कम कर देते हैं।

मैम, ठीक हूँ मैं।

अच्छा-अच्छा, ठीक है।

सेशन्स के लिए मैं ज़बरदस्ती तो कर नहीं सकती।

लेकिन जब भी बात करने को मन हो

या सेशन्स की ज़रूरत महसूस हो…

- तो प्लीज़… - हाँ-हाँ, बिलकुल।

मतलब मुझे लगता नहीं है वैसे कोई ज़रूरत पड़ेगी।

पर ऐसा कुछ भी हुआ तो इमरजेंसी में आपको ही कॉल करूँगा मैं।

ठीक है।

ठीक है।

डबल कोट मार दिया है, भैया।

सही लग रहा है।

आप भी थोड़ा ध्यान रखना सीलन वगैरह का।

अरे, मिंकू, मेरे भाई! कॉन्ग्रेच्युलेशन!

अरे कमाल कर दिया, मेरे सस्ते ब्रेट ली, यार!

अरे मेरा भाई आईपीएल खेलेगा!

कॉन्ग्रेच्युलेशन, मिंकू जी!

- कॉन्ग्रेच्युलेशन! - अरे भाई, मीना और उदय तो इतने खुश हैं

कि मुझसे पार्टी माँग रहे हैं! पागल हो गए हैं, यार!

मिंकू भैया, यार, झण्डा गाड़ दिया तुमने! आ जाओ कोटा। मज़े करेंगे।

संवाद अनुवादक: प्रशांत राय

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