All language subtitles for Mirzapur - 01x09 - Yogya.AMZN.WEB-DL.DDP5.1.H.264-NG.Hindi.C.updated.Addic7ed.com

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Original subtitles

[लाउडस्पीकर पर आदमी] साथियो,

आज का दिन हमारे गज्जूमल कॉलेज के लिए

बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है।

आप सभी छात्रों से हमारा अनुरोध है

कि आप अपना कीमती वोट सही उम्मीदवार को देकर

अपने और अपने कॉलेज के भविष्य को बेहतर बनाएँ।

[धीमी धुन बजती है]

बीस वोट से।

-ठीक से चेक किया ना? -बीस ही हैं।

अंतिम गिनती में,

गोलू जीत गई है।

[अशुभ धुन बजती है]

तुम दूसरे नंबर पे हो।

दो ही तो लोग खड़े थे चुनाव में, मास्टर साहब।

-मुन्ना... -हम्म?

...फिर से गिनती करवाएँ?

अरे, मास्टर साहब,

काहे, भैया, उन लोगों का काम बढ़ा रहे हैं?

नियम के हिसाब से हुई है ना वोटिंग?

उसमें तो कोई फेर-बदल नहीं हुआ?

बस।

अरे, काका,

बाहर छात्र लोग सब इंतजार कर रहा होगा। जाके एलान कर दीजिए?

अरे, और सुनिए।

इधर आइए।

ये मिठाई भी बाँट दीजिए।

खुसी का मौका है।

-अरे, मास्टर साहब? -हम्म?

गजगामिनी जी को तो फ़ोन करिए।

गो... गोलू को फ़ोन लगाएँ?

हाँ, फ़ोन मिलाइए।

अच्छा, हम मिलाते हैं। रुकिए।

-लाइए, लाइए। -[हिचकिचाते हुए] हम लगाते हैं।

हाँ, लगाइए।

-इसमें है? -हाँ, इसमें है।

हाँ, तो "जी" में ढूँढिए।

अरे... अरे, कहाँ हो तुम?

तुमको पता था ना कि आज नतीजा आने वाला है?

बधाई हो। जीत गई हो तुम।

ठीक है। ठीक है।

[आह भरता है]

कहाँ हैं प्रेसिडेंट साहिबा?

वो... गोरखपुर गई है। अपने जीजाजी और दीदी के साथ में।

-अच्छा, हाँ, हाँ। -पूरे परिवार के साथ में गई है।

जाना था उन लोगों को।

ठीक है, मास्टर साहब। प्रणाम।

अरे, मुन्ना, तुमको का हो गया है?

तुम हार गए हो चुनाव में।

इसी लिए तो जा रहे हैं जीतने वाले को बधाई देने।

[फुसफुसाते हुए] गोरखपुर।

सभी : [नारे लगाते हुए] गोलू गुप्ता ज़िंदाबाद!

गोलू गुप्ता ज़िंदाबाद!

गोलू गुप्ता ज़िंदाबाद!

गोलू गुप्ता ज़िंदाबाद!

गोलू गुप्ता ज़िंदाबाद!

[दरवाज़ा खुलता है]

[गहन धुन बजती है]

भैयाजी, किसकी गांड लेनी है?

गांड नहीं, बे।

जान लेनी है।

गुड्डू और बबलू की।

कालीन भैया द किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

[टीवी पर आदमी] जंगल में अगर शेर के बच्चे शिकार करना नहीं स?

तो खुद शिकार बन जाएँगे।

इसी लिए ये शेरनी अपने बच्चों को...

-मकबूल, तुम मुन्ना के पीछे चले जाओ। -हाँ?

ध्यान भी रहेगा और बैकप भी।

जी, भैयाजी।

बाऊजी : किसी को जाने की जरूरत नहीं है।

अखण्डा,

तुम अपनी बंदूक मुन्ना के हाथ में दिए हो,

तो उन्हें चलाने भी दो।

त्रिपाठियों की औलाद है।

करके दिखाएँगे।

हम जानते हैं तुम बाप हो।

पर उनके दुस्मन मत बनो।

[अशुभ धुन बजती है]

थोड़ी खुशी तो मना, गोलू।

चुनाव जीती है। कोई मजाक है?

दीदी, हमें ना इस समय कॉलेज में होना चाहिए था।

आप तो फिर भी परिवार हैं।

डिंपी की सहेली की शादी में हमें काहे को खींच लिया गया है?

तो तुम परिवार नहीं हो?

और तुम्हें खींचके लाए हैं कि तुम बबलू भैया को कंपनी देने

देखो, डिंपी, तुम ना अब चालू मत हो जाओ।

डिंपी : अरे!

सुन।

[हिचकिचाते हुए] हम तुझे अपनी मदद के लिए भी लाए हैं।

मदद?

[उल्टी करता है]

इतना जहर डालें हैं जो अपने अंदर, बॉडी बिल्डिंग के दवाइयो?

ये सारा उसी का नतीजा है।

[ज़ोर-ज़ोर से साँस लेता है]

थोड़े दिन रहेगा ऐसे, लेकिन ठीक हो जाएँगे उसके बाद आप।

चलिए। अब ठीक है? हम्म?

चलो, हो गया बस।

चलिए, चलिए।

[सब हँस रही हैं]

-गोलू : सच्ची, ये तो... -थोड़ा घबरा रहे हैं हम।

डिंपी : अरे, क्यों?

गोलू : अपना खयाल रखना बस। स्वीटी : हाँ।

गोलू : हम तो हैं ही।

इधर आओ तुम। गाल चूम लें तुम्हारा।

स्वीटी : तुम्हारी लिपस्टिक लग रही है।

बबलू : क्या बात है? बड़ा भरत मिलाप चल रहा है!

[हिचकिचाते हुए] वो गोलू चुनाव जीत गई है ना।

हम तो जानते ही थे।

पहले भाषण में दिल जीत लीं थी सबका, गजगामिनी गुप्ता जी।

सबका?

हाँ, नहीं, सबका दिल जीता था।

बधाई है तुमको, गोलू।

थैंक्यू।

बाकी हर जगह अच्छा काम करके जीते हैं।

चुनाव ही ऐसी जगह है जहाँ जीतते हैं, जिससे कि अच्छा काम कर ?

तो असली बधाई हम तब लेंगे जब कुछ अच्छा करेंगे।

अच्छा, बोर मत कर, यार।

हमें एक और आइसक्रीम ऑर्डर करनी है।

अभी मंगाते हैं, भाभीजी।

लेकिन मंत्री जी की पार्टी रहेगी। चुनाव जीती हैं, भाई।

स्वीटी और गोली : हाँ! गोलू : जश्न का वक्त है।

डबल मंगवाइए। और हमारे लिए चॉकलेट वाली।

स्वीटी : अच्छी लग रही है?

जी, भाभी?

हम पूछ रहे हैं, अच्छी लग रही है गोलू?

शीशा टेढ़ा करके इतनी फ़ाईट उसको देखने के लिए ही मार रहे है

[अचकचाकर हँसते हुए] क्या, भाभी?

हम तो ऐसे ही बस देख रहे थे।

आप एकदम चुप बैठे हैं।

ठीक हैं?

-अफ़सर : साला! -[कराहती है]

[चिल्लाता है]

[हसीना रोती है]

अफ़सर : मादरचोद!

नहीं बोलेगा?

[ज़ोर से कराहती है]

[दोनों सिसकते हैं]

-जैसमीन। बेटा। -दीदी।

ए साहब,

[चिल्लाते हुए] काहे इतना बेरहमी से कूट रहे हैं?

अरे, अफ़ीम ही पकड़े हैं न हमसे! तो ले चलिए कोर्ट!

[हँसता है]

बड़े वकील बन रहे हो?

हमें ही कानून समझा रहे हो?

हैं?

[रोती है]

अफ़सर : साला!

मौर्या : उधर हो, उधर। उधर।

उधर हो।

-[मौर्या गला साफ़ करता है] -[दोनों कराहते हैं]

हो गया?

निकल गई बहादुरी?

इधर देखो, ऊपर आओ।

[चिल्लाते हुए] ऊपर आओ!

हमको अफ़ीम से कोई लेना-देना नहीं है।

हमको मतलब है अफ़ीम आई कहाँ से।

तुम्हारा लेन-देन बाबर खान से है। है ना?

बाबर खान गुड्डू-बबलू के लिए काम करता है।

गुड्डू-बबलू किसके लिए काम करते हैं?

[अशुभ धुन बजती है]

अखण्डानन्द त्रिपाठी।

वही है ना?

वही है ना जंगल का सबसे टॉप जानवर यहाँ का?

उसका नाम ले दो, छोड़ देंगे।

[फ़ोन की घंटी बजती है]

कालीन भैया : हाँ, गुप्ता, बोलो।

डिंपी : अच्छा लग रहा है ना? स्वीटी : हम्म।

डिंपी : अच्छा, उसने ना, सबके लिए कमरों का इंतजाम किया है।

ये दुल्हन का कमरा कौन सा है?

-उधर, आखिर वाला। -खाना तो लग गया होगा।

अच्छा। आप लोग सब तैयार हो जाइए। हम शबनम से मिलकर आते हैं।

-ठीक है। कुछ मंगवाऊँ? -अच्छा।

शबनम!

[खुशी से] आ गई तू?

मुझे तो लगा तूने गोली दे दी।

अरे, आते कैसे नहीं?

तुमसे वादा जो किए थे। हमें तो आना ही था।

कैसी लग रही हूँ?

बहुत सुंदर लग रही हो।

-सच? -सच।

अच्छा, चलो दो।

मैं करती हूँ, लाओ।

[हँसते हुए] ये उल्टा है।

कैसे दिख रहे हैं हम?

बात बताएँ?

आप पापा बनने वाले हैं।

[धीमी धुन बजती है]

आप सुने नहीं हम क्या बोले?

[हँसते हुए] आप पापा बनने वाले हैं।

कपड़े निकालके रख दिए हैं।

बदलके आ जाइए।

[टीवी पर आदमी] ग्रेट व्हाइट शार्क्स की आयु बड़ी लम्बी होती

इनमें से कुछ तो सत्तर...

-बाऊजी, हो गया? -हम्म?

हाँ।

ग्रेट व्हाइट शार्क्स को समुद्री दुनिया का सबसे खतरनाक व

राजा।

जी?

आज रात खाने में

गाजर का हलवा बनाना।

बना देंगे, बाऊजी।

-गाजर का हलवा तो भाभी को भी बहुत पसंद है। -हम्म।

[फ़िल्मी गाना बजता है]

सब खैरियत?

मौलवी साहब, कैसे हैं आप?

नहीं, अभी नहीं।

बबलू : जी।

[फ़ोन की घंटी बजती है]

भैयाजी, आ गया गोरखपुर वाले कबूतर का फ़ोन।

उठाओ, उठाओ।

-हाँ, बोलो बे। -गुंडा : भैयाजी,

हम गुड्डू-बबलू को देखे हैं।

शाबाश, कहाँ देखा उन दोनों को?

मुन्ना बोल रहे हैं।

-गुंडा : प्रणाम, भैयाजी। -अबे, प्रणाम को डालो गांड़ में।

पता बताओ।

सेलिब्रेशन हॉल, मेडिकल रोड।

गोरखपुर।

मुन्ना : आ रहे हैं।

[फ़िल्मी गाना बज रहा है]

[गाना अचानक बंद होता है]

दूल्हा-दुल्हन का दीदार आप सबको मुबारक हो। एक बार ताली बज?

डीजे : अब आप सबके सामने

-हमारा स्पेशल आइटम पेशे खिदमत है। -डिंपी : चलिए, सब स्टेज च

डिंपी : भैया। बबलू : गुड्डू भैया। गुड्डू भैया! चलिए।

इनको क्या हुआ है?

-स्वीटी : चलो। -उठिए, उठिए, चलिए।

गुड्डू भैया।

अरे, चलिए ना। चलिए, हमारी सहेली की शादी है।

[फ़िल्मी गाना बजता है]

[सीटियाँ बजती हैं]

[संगीत की धुन हल्की होती जाती है]

[रहस्यमय धुन बजती है]

लाला : शबनम? शबनम : जी, अब्बू?

[धीमे से] इन्हें तुमने बुलावा दिया है?

जी, अब्बू। ये हमारी सहेली, डिंपी। मिर्ज़ापुर वाली।

डिंपी : अभी खाना खाने...

आप मिले तो थे। और वो दोनों इनके भाई।

और वो भाभी।

गोलू : खाना खा लें? स्वीटी : चलो।

हम आते हैं। आ रहे हैं।

कहाँ जा रहे हैं ये?

बाथरूम जा रहे हैं। आप आइए ना। आ जाएँगे। आइए।

[सेल फ़ोन की घंटी बजती है]

जी, भैयाजी?

कालीन भैया : इन लोगों में डर खतम हो रहा है।

थोड़ा बढ़ाना पड़ेगा।

हमारी बात ध्यान से सुनो।

[अशुभ धुन बजती है]

[बंदूक रखने की आवाज़]

[पानी गिरने की आवाज़]

[गहरी साँसें लेता है]

[धीमी धुन बजती है]

नमस्ते, मुन्ना भैया। आप ही का इंतज़ार कर रहे थे।

अपने कबूतर को फ़ोन लगाओ।

-जी, भैयाजी। -गुंडा : चलिए।

पकड़ो बे।

[दूर से गाना बजने की आवाज़]

दारा वेड्स शबनम

ये है मिर्ची का सालन, लखनवी बिरयानी।

हम जरा मम्मी को फ़ोन करके आते हैं। दो मिनट में आ रहे हैं। ?

-ठीक है। -ठीक है।

[चौंकता है]

[धीमे से] बहुत देर से देख रहे हैं चुंबक की तरह चिपके हुए हो

क्या चाहिए?

[घबराते हुए] कुछ नहीं, भैयाजी।

आगे देखो, चुपचाप चलो। ठीक है?

भैयाजी, फ़ोन नहीं उठा रहा, मादरचोद।

मुन्ना : तुम यहाँ दरवाजे पे ही रुकना।

तुम इसके साथ रुकना यहीं पर।

तुम हमारे साथ आगे स्टेज पे चलो।

कोई गलती नहीं चाहिए।

बबलू : अब बता।

[घबराते हुए] भैयाजी, हम स... हम सच कह रहे हैं। हम मेहमान हैं।

जँच रही हो।

बधाई हो!

ये मेरे साथ है।

[चिल्लाती है]

[सभी ज़ोर से चिल्लाते हैं]

[चिल्लाते हुए] कोई कहीं नहीं जाएगा!

पंकज : बैठ जाओ!

चाचा?

ओ भोसड़ी वाले चाचा।

अरे, गाना बंद करो जरा।

मुन्ना : चाचा, चाचा।

हो गया बस।

थोड़ा रेस्ट कर लीजिए।

वरना रेस्ट इन पीस हो जाएँगे।

मुन्ना।

लाला : ये सब क्या है?

अरे, लाला!

आप भी आए हैं। क्या बात है!

ये हमारी बेटी का रिसेप्शन है।

आपकी बे...

[हँसते हुए] अरे, ये लो। हमको तो पता ही नहीं था ये आपकी बेटी ?

हमें न्योता नहीं दिए आप?

कोई बात नहीं।

हम यहाँ इनको नुकसान पहुँचाने नहीं आए हैं।

ये बस हमारे बीमे की तरह हैं।

बबलू : [फुसफुसाते हुए] भाभी, भाभी।

स्वीटी : गोलू, इधर।

[औरतें रोती हैं]

मुन्ना : हाँ, तो, भैया।

हम यहाँ गुड्डू और बबलू के लिए आए हैं।

दोनों चुपचाप बाहर आ जाओ।

काहे खून-खच्चर करना है, भैया?

देखिए, अब हमसे और संयम नहीं हो रहा है।

भैया।

[चिल्लाता है]

[चिल्लाते हुए] ए! ए!

[कराहता है]

[चिल्लाता है]

भैया!

[घुरघुराते हुए] ए!

मुन्ना : ए, मादरचोद!

[चिल्लाते हुए] नहीं!

-नहीं, नहीं, उसे... -दूल्हे का पिता : दारा!

लाला : गोली मत चलाना।

-मुन्ना : पकड़ इसे। बैठ! -[रोते हुए] दारा!

लाला : संभालो अपने-आप को, यूसुफ़।

-यूसुफ़, संभालो। संभालो अपने आप को। -[शबनम रोती है]

[गुड्डू कराहता है]

बबलू!

बाहर आ जाओ, बंधु।

क्योंकि तुम्हारे गुड्डू भैया गिर चुके हैं।

[चिल्लाते हुए] बबलू!

गुड्डू : बाहर मत आना।

जैसी तुम्हारी मर्ज़ी।

स्वीटी : [चिल्लाते हुए] गुड्डू, गु...

बबलू : भाभी।

[चिल्लाती है]

[चिल्लाते हुए] ए!

[चिल्लाते हुए] ए!

-[चिल्लाते हुए] बबलू! -[रोती है]

[चिल्लाता है]

[चिल्लाता है]

[रोता है]

[काँपती आवाज़ में] गुड्डू भैया।

[अशुभ धुन बजती है]

हो गया, बाऊजी।

हम राजा और तुम्हारे बारे में जानते हैं।

[रहस्यमय धुन बजती है]

और तुम्हें ये सिखाना बहुत जरूरी है

कि शरीफ़ घरों की बहुएँ

बाहर मुँह नहीं मारा करतीं।

दरवाजा बंद करके यहाँ आओ।

हमें पता है कि तुम भागोगी नहीं।

भागके जाओगी भी कहाँ?

सिर्फ़ त्रिपाठियों का बीज गिरेगा तुम्हारे अंदर।

[कराहता है]

[गहन धुन बजती है]

[स्वीटी रोती है]

[काँपती आवाज़ में] जब कालीन भैया जानेंगे,

तब क्या करोगे, मुन्ना?

इनाम लेंगे, बे।

तुम्हारे कालीन भैया ही हमको इजाज़त दिए हैं तुमको मारने ??

[खाली बंदूक की आवाज़]

[हाँफती है]

[धीरे से] गोलू...

[रोते हुए] गोलू...

बंदूक नहीं चलानी आती प्रेसिडेंट साहिबा को?

कॉलेज कैसे चलाएँगी आप? हम्म?

लाइए, दीजिए हमको।

-अरे, दो इधर! -[गोलू कराहती है]

[रोते हुए] मुन्ना। मुन्ना... मुन्ना, जाने दे।

गुड्डू : जाने दे, मुन्ना।

नहीं, मुन्ना।

-गुड्डू : मुन्ना! -[धीमे से] नहीं, मुन्ना।

अरे, तुम काहे नहीं, नहीं बोल रही हो?

-तुमको थोड़े ही ना हम... -स्वीटी : हम पेट से हैं।

हम पेट से हैं।

[गहन धुन बजती है]

[गहरी साँसें लेता है]

[सिसकती है]

[उदास धुन बजती है]

[सिसकती है]

स्वीटी, तुम्हें हम अपनी जान से ज्यादा प्यार किए थे।

स्वीटी : नहीं।

और तुम्हारे पेट में आज किसी और का...

[गिड़गिड़ाता है] मुन्ना। मुन्ना, मुन्ना, मुन्ना, मुन्ना।

गुड्डू : मुन्ना, मुन्ना। स्वीटी : गुड्डू...

गु...

[हैरत में लड़खड़ाती ज़ुबान]

[उदास धुन बजती है]

[आवाज़ बंद]

बाऊजी : गलती तुमने अकेले तो नहीं ना की थी।

दो लोग किए थे।

इसलिए सजा भी दोनों को ही मिलेगी।

[कराहता है]

बाऊजी : पजामा खोलके जगाइए इनको।

[दबी हुई आवाज़ में रोता है]

[रोती है]

[दबी आवाज़ में विरोध करता है]

[चिल्लाता है]

मुन्ना : साले, हम हमेशा इज्जत ही लुटवाते आए हैं पापा की नज?

बहुत तकलीफ़ होती है

जब आप योग्य हों

और लोग आपकी योग्यता ना पहचानें।

बहुत तकलीफ़ होती है।

गुड्डू : ब...

बबलू।

[चिल्लाते हुए] मुन्ना! मुन्ना! मुन्ना!

लेकिन तुमसे सीखे हैं, गुरु,

कि बंदूक के साथ दिमाग चलाना भी जरूरी होता है।

[कराहता है]

अब चलाएँगे।

अब चलाएँगे।

[गिड़गिड़ाता है] मुन्ना! मुन्ना! मुन्ना! मुन्ना!

मुन्ना! मुन्ना, मत मार। मुन्ना!

मुन्ना, बबलू को नहीं मार, मुन्ना।

हमको मार डालो। मुन्ना! मुन्ना! मुन्ना! मुन्ना! मुन्ना, मत ?

[धीमे से] भैया...

गुड्डू : [रोते हुए] मुन्ना, मुन्ना, मु...

[रोती है]

मुन्ना, मुन्ना...

बबलू : गुड्डू भैया, गुड्डू भैया...

[धीमे से] गुड्डू भैया।

गुड्डू भैया।

गुड्डू भैया।

नहीं, हम इंतज़ार ही कर रहे थे कि कब लोग आप आँखें खोलें और क

[गोली चलती है]

[आवाज़ें बंद]

[कराहता है]

इन्हें वही राजा बना दो

जैसा ये दिखते हैं।

ढीले।

[रोता है]

काटो!

[अशुभ धुन बजती है]

[ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता है]

[ज़ोर से चीखता है]

[हाँफती है]

कालीन भैया : लेके आओ।

[दम लगाते हैं]

मेहमान नवाजी की वजह?

हमारा नाम अखण्डानन्द त्रिपाठी है।

परिचय हो चुका है हमारा पहले।

जिस अखण्डा से आप परिचित हैं, वो व्यापारी थे।

और हम बाहुबली हैं।

मौर्या साहब, जितना करना था आप कर लिए।

अब हम करेंगे।

क्या कर लेंगे आप?

मकबूल।

[चिल्लाता है] ए!

कालीन भैया : आपके बाकी साथियों को भी मुक्ति दे दी है।

मौर्या जी, आप जिस शहर में नौकर बनके आए हैं, हम मालिक हैं उस

मुन्ना : माहौल काफ़ी भारी हो गया है, गुरु।

[डिंपी रो रही है]

-देखो, दीदी भी रो रही हैं। -[ललित हँसता है]

गाना चलाओ। गाना चलाओ, बे।

बसंती, नाचो। नाचो।

[फ़िल्मी गाना बजता है]

माफ़ करना।

गलती से लग गया।

ओ भोसड़ी वाले चचा।

मुन्ना : कहाँ हो? बाहर निकलो।

जल्दी, जल्दी।

अबे, आओ ना जल्दी।

नाचने के लिए ही बुला रहे हैं।

नाचिए इसके साथ।

मुन्ना : ऋतिक रोशन वाला आता है? नागिन। नागिन वाला करो।

मज़े लेके करो।

थोड़ा दिल से नाचो।

अबे, नाचो भोसड़ी के। मर नहीं जाओगे।

ये! क्या बात है!

हाँ। बहुत खूब।

-देखो, देखो, दीदी कैसे कर रही है? -गोलू।

मुन्ना : उनके साथ केमिस्ट्री बनाओ।

गोलू।

मुन्ना : आ रहा है मजा?

पास जाकर नाचो। पास जाओ।

[धीरे से] बंदूक उठाओ।

बंदूक उठाओ।

मुन्ना : ये!

हाँ।

थोड़ा जवान है बुड्ढा।

गुड्डू : उठाओ। मुन्ना : साबास!

अरे, लाला ये...

माफ़ करना...

लेकिन दूसरा दूल्हा मिल जाएगा तुम्हारी लड़की को।

[हड़बड़ाती है]

अब ध्यान से बात सुनो हमारी। हम्म?

बंदूक का ऊपर का हिस्सा अपनी तरफ़ खींचो, जोर से!

और छोड़ दो।

ट्रिगर पे उंगली लगाओ।

पहली वाली।

गोलू निसाना लगाओ और दाग दो।

[गहन धुन बजती है]

गोलू!

मुन्ना : मिस्टर पूर्वांचल।

हाँ, गुड्डू भैया।

-किधर... -[गोली चलती है]

[नाटकीय धुन बजती है]

[औरत चीखती है]

[गोलियाँ चलने की आवाज़]

[हाँफती है]

[गोलियाँ चल रही हैं]

[मेहमान चीखते-चिल्लाते हैं]

[बंदूक की आवाज़]

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

रतिशंकर : हमको मिर्ज़ापुर चाहिए, शरद,

किसी भी कीमत पे।

[खुशनुमा धुन बजती है]

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