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आर. एस. मौर्या
[कदमों की आहट]
वर्दी जँचती है आपको।
त्रिपाठी, अखण्डानन्द।
राम शरन मौर्या।
मुन्ना नहीं दिख रहा है कहीं?
आते ही काम शुरू कर दिए?
हमारे घर पधारे हैं पहली बार,
मेहमान हैं आप, कुछ लीजिए।
हाँ, पधारे तो पहली बार ही हैं।
पर मेहमान नहीं हैं, त्रिपाठी जी।
मकबूल।
[लंबी साँस छोड़ता है]
पुलिस का डर खत्म हो गया जनता से।
हम व्यापारी लोग कैसे जी रहे हैं, हम ही जानते हैं।
मुझे खुद बड़ी चिंता होती है मिर्ज़ापुर की।
अब ऐसा है ना, त्रिपाठी जी, कि आप
मिर्ज़ापुर के राजा तो हैं नहीं, जो प्रजा की चिंता करेंगे
आप अपनी सुरक्षा देखिए, बस।
बाकी शहर को पुलिस देख लेगी।
और हम तो आ ही गए हैं।
-[मौर्या की हल्की हँसी] -[अशुभ धुन बजती है]
रतिशंकर : और? सुने तुम्हारी बहन को भी उठा लिया मुन्ना?
हर पीढ़ी में इनके यहाँ बाप-बेटे हरामी रहे हैं।
हमको जॉइन कर लो।
मिलके मिर्ज़ापुर चलाएँगे।
[रहस्यमय धुन बजती है]
तुम एक नंबर के चूतिया हो, यार शुक्ला।
बात अंदर की है। अंदर ही अंदर सुलट जाएगा।
अब चाहे साँप घर में आके दोस्ती कर ले,
रहता तो जहरीला ही है ना?
[धीरे से हँसते हुए] अरे, साला!
हम साँप हैं?
तुमको मौका दे रहे थे, मादरचोद!
माँ की गाली काहे दे रहे हैं, रति भैया?
गुंडा : [हल्के से हँसते हुए] भैयाजी, इन्हऔ से "क, ख, ग" बुलवा??
अभी बुलवाते हैं।
ये हमारा इलाका है, भोसड़ी के।
हम चाहे माँ की गाली दें, चाहे बहन की।
[रहस्यमय धुन बजती है]
तुम्हारी माँ को...
[गोली चलती है]
[नाटकीय धुन बजती है]
[फ़ोन की घंटी बजती है]
क्या हो रहा है, यादव जी?
गांड़ मरवा रहे हैं, त्रिपाठी। आओ मार लो।
यादव : बैठक में फ़ैसला हुआ था ना?
हम चूतिया हैं जो तुम्हारी और रतिशंकर की सुलह करवाए?
और अब तुम्हारे लौंडे जाकर उन्हीं को ठोक दिए।
गुड्डू : [चिल्लाते हुए] अब दो गाली, मादरचोद!
क, ख, ग, घ, ङ,
च, छ, ज, झ, ञ,
ट, ठ, ड, ढ, ण,
त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह,
क्ष, त्र, ज्ञ।
[गोलियाँ चलती हैं]
अब या तो तुम हमारे साथ रहोगे, या इनके।
और इनके साथ रहना है तो यहीं इन्हीं की तरह लिटा देंगे, भोस??
और हमारे साथ रहोगे, तो जिंदा रहोगे।
गुंडा : मादरचो...
ये लौंडे काबू में नहीं हैं क्या वो तुम्हारे? कौन हुकुम दि
हम ही दिए थे हुकुम।
क्या है वो हमारे लड़कों को दिक्कत दे रहे थे।
तो हमने थोड़ी दिक्कत वापस कर दी।
पानी नाक से ऊपर चला गया था, यादव जी।
आप इन छोटी-मोटी बातों में क्यों परेशान होते हैं?
शुक्ला के मरने से हमको कोई परेशानी नहीं है।
पर अगर तुम हुकुम दिए हो, तो बैठक का नियम तोड़े हो।
ऐसे काबू करोगे पूर्वांचल को?
यादव जी,
पूर्वांचल हमारे काबू में है, और रहेगा।
और किसी माई के लाल में हिम्मत नहीं है जो आँख दिखा दे।
[गहन धुन बजती है]
आप चुनाव पे ध्यान दीजिए, ये सब हमपे छोड़ दीजिए।
मादरचोद।
[हँसते हुए] चलते हैं, त्रिपाठी जी।
"कालीन भैया।"
हमारे लड़के हमको बुलाते हैं।
अच्छा। और हमारे लड़के हमको "सर" बुलाते हैं, त्रिपाठी जी।
निकलते हैं।
मिर्ज़ापुर
[थीम म्यूज़िक बजता है]
[गाड़ी के इंजन की आवाज़]
भैयाजी, पानी।
पानी छोड़ दिए हैं प्रतियोगिता तक।
तुम काहे नहीं बोल रहे हो, बे। मौन व्रत रखे हो क्या?
आपको नहीं पता, हम काहे नहीं बोल रहे हैं?
नहीं।
कंट्रोल खो गया ना हमारा, तो बेइज्जती कर देंगे आपकी,
इसी लिए नहीं बोल रहे हैं हम।
कालीन भैया के दुश्मन थे ना रतिशंकर?
तो हम ठोक दिए तो क्या हो गया?
कालीन भैया की इजाज़त से आप पूरे मिर्ज़ापुर में आग लगा दी?
हमको घंटा फरक नहीं पड़ता।
कितनी बार बोले हैं कालीन भैया उनकी इजाज़त के बिना कुछ नह?
हाँ।
कितनी बार बोले हैं वो?
और पूरी जिंदगी आपका फैलाया हुआ रायता ही साफ करते रहेंगे ?
अबे, हमारे खून-खराबे पे इतना टेंसनिया क्यों रहे हो, बे?
खून-खराबे से हमको टेंसन नहीं है।
आपको खून-खराबे में मजा आ रहा है, उस बात का टेंसन है हमको।
[फ़ोन की घंटी बजती है]
लो, आ गया फ़ोन।
नमस्ते, कालीन भैया।
[मशीनें चलने की आवाज़]
मकबूल भाई, पैसा लाए हैं। आप देख लीजिए।
[ज़ोर से हथोड़ा मारता है]
मकबूल : [चिल्लाते हुए] निकलो सब!
-बाबर : भैयाजी, हम निकलें? -हम्म।
-गुड्डू : रखो। -जी, भैयाजी।
मकबूल,
कुर्सी दीजिए, बिठाइए इनको।
[खिटपिट की आवाज़]
[बबलू गला साफ़ करता है]
[खिटपिट की आवाज़]
भैयाजी, जो कुछ भी हुआ, जौनपुर में...
[चिल्लाते हुए] चूतिये हो तुम दोनों।
हमारे लड़के हमसे बिना पूछे कोई काम नहीं करते हैं।
पर, भैयाजी, हम सच बता रहै हैं आपसे, वहाँ पे हालात हाथ से नि??
और वैसे भी, रतिशंकर शुक्ला...
हम भैयाजी से बात कर रहे हैं ना? आप काहे बोल रहे हैं बीच में
देखिए, भैयाजी,
रतिशंकर शुक्ला आपके तो दुश्मन ही थे ना।
पूरा मिर्ज़ापुर आप दोनों के इतिहास के बारे में जानता है??
हम दोनों भी बचपन से सुने हैं।
अब आज अगर उनको हम ठोक दिए, तो कम से कम आपका कोई नुकसान तो न??
बाऊजी : मुद्दा ये नहीं
कि रतिशंकर शुक्ला हमारे दुश्मन थे।
मुद्दा ये है कि बिना पूछे तुमने फ़ैसला किया।
हम लोग सॉरी हैं, बाऊजी।
अरे, सॉरी काहे की, यार?
तुम वही लीपा-पोती कर रहे हो।
हम आपके यहाँ नौकरी करते हैं, कालीन भैया। नौकर तो नहीं हैं
हम्म?
ए-के 47 लाए थे।
पीछे से अपने साथ जॉइन करा रहे थे शुक्ला।
और ऊपर से माँ की गाली भी दिए।
अब आप बताइए, उस समय उनको देखते या आप लोग के प्रोटोकाल मान??
ठोक दिए।
हर छोटी चीज के पहले इजाज़त लेंगे, तो काम कैसे करेंगे,
आप बताइए?
व्यापार में, आपको इतना मुनाफा दे रहे हैं,
हम्म?
तो हर फैसले के पहले पूछना जरूरी है?
क्या है ना, भैयाजी, ठीक लगा, फैसला लिया।
[रहस्यमय धुन बजती है]
अच्छा है।
प्रजातंत्र है।
हर आदमी फैसला लेने के लिए आज़ाद है।
हम भी।
देखो। कालीन भैया मान रहे हैं।
काम करने से पहले पूछना जरूरी नहीं है।
समझो!
तो, भैयाजी, हम निकलें।
जाओ।
केंचुए दूध पीकर साँप ना बन जाएँ, अखण्डा।
ध्यान रहे।
गुड्डू : हम कायदे से समझाए, सब समझ लिए उधर।
कदर है हम लोग की, बबलू।
कालीन भैया, बाऊजी बेफालतू में हम लोगों को टंगा रहे थे।
अरे, मुन्ना थोड़े ही हैं हम।
भोसड़ी के कर रहे थे प्रोटोकाल-प्रोटोकाल।
[आवाज़ धीमी पड़ रही है] अबे, लंड पे रखते हैं हम प्रोटोकाल।
बीस साल से रतिशंकर के साथ कबड्डी खेल रहे थे,
हम बीस मिनट में निपटा दिए।
भैया, हमको घर छोड़ दीजिए।
अबे, वापस फैक्ट्री जाओगे क्या?
घर बोले हैं हम आपको, घर।
भूल गए क्या?
[धीमी धुन बजती है]
गुड्डू : हम अंदर नहीं जाएँगे, यार।
कब आएँ तुमको लेने?
[फ़ोन की घंटी बजती है]
हाँ, स्वीटी, कैसी हो?
उस दिन जो हुआ, उसके बाद गायब ही हो गए तुम।
इस्तेमाल कर लिए हमको?
बात खतम समझें फिर?
कहाँ हो अभी?
[गुनगुनाती है]
चल आज स्टेशन पे बेचेंगे।
हाँ, वहीं ग्राहक ढूंढते हैं।
अच्छा, थोड़ा ज़्यादा बचा है तो मुझे भी...
ए साहब, क्या है? क्या है ये? उठाऊँ? उठाऊँ? उठाऊँ?
अफ़सर : आज तुम नहीं, आज हम उठाएँगे तुम दोनों को। चलो!
चल।
जैसमीन : अब बड़े अफ़सर भी सड़क पे आके पैसा वसूलेंगे?
हाँ, साहब। हम लोग को काहे उठाए हैं? हाँ?
चक्कर ये है कि हिजड़ों को पैसे लेते हुए तो सुना है,
देते हुए पहली बार सुना है। हाँ?
किस बात के पैसे दिए बाबर खान को तुम लोगों ने?
[घबराते हुए] अच्छा, वो...
अरे, कुछ नहीं। वो अपना गुरूजी...
-श्रीदेवी? -जैसमीन : हाँ, हाँ।
-श्रीदेवी? अच्छा, अच्छा। आगे? -जी।
बड़ी बीमार थी बेचारी, साहब।
तो, ऑपरेसन के लिए पैसा चाहिए था। तो हम लोग के पास पैसा था न
तो बाबर भैया से लिए थे।
तो वही लौटा रहे होंगे, जैसमीन, तो इन लोगों ने देख लिया।
[हँसता है]
अच्छा, अच्छा। ठीक है।
तो क्या हाल हैं अब?
किसका?
श्रीदेवी का।
[घबराहट में हँसते हुए] अभी ठीक है। अच्छी है, लेकिन चल नहीं
साहब, हम ही लोग काम कर-करके पैसा थोड़ा कमाते हैं, तो उनको भ
नहीं, नहीं, बढ़िया बात है। मदद तो करनी चाहिए।
ध्यान रखो श्रीदेवी का।
-जी। -समझे?
वरना मार-मारके दोनों को मिस्टर इंडिया बना दूँगा,
गायब हो जाओगे। समझ नहीं आएगा, कहाँ गए।
साड़ी उठाने का बड़ा शौक है तुम दोनों को, हाँ?
उठा इसको, दिखा क्या है।
[अशुभ धुन बजती है]
[चिल्लाते हुए] उठा!
धत्। नीचे कर।
ऊपर।
उठाओ!
ये लो देखो। देख लो सब!
हाँ, बस, बस, बस।
चलो, निकलो यहाँ से।
चल, जैसमीन।
एक मिनट, एक मिनट, एक मिनट।
साड़ी में तो कुछ नहीं है।
ये चोली के पीछे क्या है?
क्या है?
साब, गलती से आ गया था, साब।
मारो सालों को।
-अबे तेरी, साले! -[दोनों चीखते-चिल्लाते हैं] साहब! साहब!
रमाकांत : जी। बस देखिए, अगली तारीख लगने दीजिए। हो जाएगा क??
शुक्रिया, पंडित जी।
एक आप ही हैं जो हम जैसे लोगों का केस...
अरे, हम तो हैं और रहेंगे ही। हम कहाँ मिर्ज़ापुर छोड़ के ज??
[उदासीन धुन बजती है]
वर्मा जी, हम आपसे आराम से बात करेंगे, अभी आप चलिए।
-वर्मा : जी। -प्रणाम।
[पन्ने पलटने की आवाज़]
चाय पिएँगे, पापा?
बढ़िया बना के लाएँगे।
दो बात करनी है।
पापा, ये जो काम हम कर रहे हैं ना,
ये हमारे लिए एक नौकरी के जैसा है।
मेहनत और बुद्धि से काम किए,
बॉस को खुश किए,
थोड़ी तरक्की कमाए,
फिर घर आके लंबी तानके सो गए।
बिलकुल वैसा ही किए, पापा, जैसा हम किसी और नौकरी में भी करत?
लेकिन अब,
लेकिन अब हम डर गए हैं, पापा।
[धीमी धुन बजती है]
क्या हुआ है, बबलू?
कोई चारा था क्या, पापा, कि हम ये जॉइन ही ना करते?
जिस रास्ते पे हम निकल पड़े हैं, हम तो सोचते हैं कि...
कि अंत में वहाँ पे कुछ हासिल होगा भी या नहीं?
इसमें कोई शक नहीं है, बबलू बेटा।
उस रास्ते पे सिर्फ अंत है।
हमें तो ये भी पता नहीं है कि जब जॉइन किए थे तब कठिन था या...
या अगर आगे चलके छोड़ने की सोचेंगे तब ज्यादा कठिन होगा।
एक बार सोच लोगे,
तो ज़्यादा कठिन नहीं होगा, बेटा।
[मंदिर की घंटी बज रही है]
हमारा तुमसे एक ही मतलब है, स्वीटी,
प्यार का, बस।
और हम तो बबलू से बतियाए भी हैं, तुमसे अपनी सादी की बात लेक?
हम तुमसे सादी के लिए मरे नहीं जा रहे।
अरे, हम तो मर रहे हैं।
कितना मर रहे हो?
इतना कि कल ही कर लें सादी।
हाँ कहेंगे, तो फँस जाओगे।
समझो फँस गए।
[खुशनुमा धुन बजती है]
[दोनों हँसते हैं]
गुड्डू : [हँसते हुए] तो कल होगी हमारी सादी।
हाँ।
गुड्डू।
बे, परेसान काहे हो रही हो? क्या हो जाएगा?
अपने यहाँ वाले रिश्तेदारों को बुला लो। हमारा ज्यादा टें
पिताजी आएँगे, साला उसका भी शक है।
एक चीज है। दहेज लेंगे।
अब दहेज भी चाहिए तुमको।
गुड्डू, मजाक कर रहे हो क्या?
अरे, बाबा,
गुड लक ले आना।
फिर प्रतियोगिता में सबको धांप देंगे।
[रूमानी लोक गीत बजता है]
जज : आप यहाँ दस्तखत कीजिए, और आप यहाँ।
जी। पेन?
आज से आप दोनों पति-पत्नी हुए।
[रूमानी गीत जारी रहता है]
[गोलियाँ चलती हैं]
कालीन भैया द किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर
[दरवाज़ा खुलता है]
बीना : मुन्ना भैया।
दाढ़ी बनाइए, इंसान बनिए।
ये कितने दिन से कमरा में ही घुसे हुए हैं।
हमारा मन नहीं है कुछ करने का।
हम कहाँ कह रहे हैं कि आपको कुछ करना है?
हम बना देंगे।
हम माफ़ी चाहते हैं कि शादी में नहीं आ सके।
गुड्डू के पापा नहीं आ रहे थे, तो हम भी नहीं आ सकते ना।
पर इस घर में तुम्हारा बहुत स्वागत है, बहू।
ये घर अबसे तुम्हारा भी है। बस याद रखना ये, हाँ?
अच्छा।
आओ, तुम भी हमारा पैर छुओ।
दूर है।
आ जाओ।
[टीवी पर आदमी] तो इसलिए आपके जीवन में अगर दुख आ रहा है,
वह आपकी अपनी...
आइए ना।
तुम जाओ। तुमको नहीं रोकेंगे।
हमसे जबरदस्ती मत करो, यार। हमारा इनका निजी मामला है। जाओ,
खुश रहिए।
और हमारे घर की पहली सादी थी। आना चाहिए था हमको।
लेकिन ये तुमसे सादी करके, तुमको भी खतरे में डाल रहे हैं।
बाकी स्वागत है तुम्हारा।
वसुधा!
जी?
रमाकांत : बहू से रीती-रिवाज करवाओ।
आ जाओ।
जी।
आओ।
आ जाओ।
अब सादी कर लिए हो,
आगे का कुछ सोचे हो?
पापा, क्या है ना, जिस रास्ते पर हम चल रहे हैं, वो है वन-वे।
ना रिवर्स गियर है, ना यू-टर्न।
आप ज़्यादा मत सोचिए।
क्योंकि हम भी नहीं सोच रहे हैं।
काहे चिंता कर रहे हैं?
जब बाप बनोगे, तब समझोगे।
-डिंपी, बबलू कहाँ है? -डिंपी : हाँ।
अरे, भैया, आपको आज बबलू भैया क्यों चाहिए? उनके साथ सोएँगे ?
आप भाभी पे ध्यान दीजिए। आपका पलंग सजा दिए
खूब बढ़िया सा आपके कमरे में।
[फुसफुसाते हुए] भगो!
[फुसफुसाते हुए] चलो!
[टीवी पर आदमी] ...कि हमें कुछ सुनाई ही नहीं देता।
हम इतने ज़्यादा और लोगों को आंकने में लगे हुए हैं कि हमार
एक बात बोलें, मुन्ना भैया?
मुन्ना : हम्म?
दूसरों से उस्तरा अच्छा चलवा लेते हैं आप।
[रहस्यमय धुन बजती है]
आप इस बात से ज्यादा परेसान हैं कि कम्पाउन्डर आपके पापा क?
या इस बात से कि मार नहीं पाए?
नहीं बनवाना है हमको दाढ़ी।
[हाथ पकड़ने की आवाज़]
तो नहला देते हैं आपको।
हम खुद से नहा सकते हैं। बच्चा नहीं हैं हम।
वो तो हम भी जानते हैं कि आप बच्चा नहीं हैं।
पूरा जवान हैं।
मुन्ना।
अब दिमाग भी बड़ों जैसा चलाइए।
आपका दोस्त जो भी कारण से मरा है, उम्मीद है बेकार नहीं जाए??
स्वागत है भैया और भाभी
अब बैठे ही रहेंगे कि कुछ करेंगे भी?
[हिचकिचाते हुए] स्वीटी, हम ना...
अगर तुम्हें एतराज़ ना हो तो...
आज कुछ नहीं करेंगे।
वो कल प्रतियोगिता है हमारी, मिस्टर पूर्वांचल।
क्या है ना, वो ताकत बचाके रख रहे हैं।
अगर तुम्हें एतराज़ नहीं है तो...
दूध तो पी लीजिए।
अरे, नहीं, हमारा दूध... खाना अलग है।
गुड्डू : एक मिनट। हम्म।
ये।
वो क्या है ना बॉडी-बिल्डर लोग, प्रतियोगिता के पहले गोलिय?
मसल उभरके निकलता है।
मस्त है बवाल।
अच्छी लग रही हो।
इसके बिना और अच्छे लगते हैं।
[जोड़ा आहें भरता है]
-भाभी? -हाँ?
[हाँफती है]
आपके कमरे में, कालीन भैया के पलंग पे ज़्यादा मज़ा आता है।
ध्यान लगाने दे।
[गहरी साँसें भरती है]
[हिचकिचाते हुए] बाऊजी, बस... आपका खाना लगवाते हैं। राजा को ??
[रहस्यमय धुन बजती है]
[गहरी साँसें लेता है]
स्वीटी : बॉडी बहुत सेक्सी लग रही है आपकी।
ऐसे जीत जाएँगे आप।
[हामी भरता है]
कम्पाउन्डर की दादी : कौन? कौन?
कौन है? सुबोध? सुबोध?
[हकलाते हुए] नहीं। हम... हम... हम हैं।
हम हैं, दादी। मुन्ना।
मुन्ना, तुम ठीक हो, बेटा?
हाँ, जी।
सुबोध नहीं आया। कितने दिनों से नहीं आया, बेटा।
हाँ, उसे ज़रा बाहर भेजे हैं... काम से शहर। आ जाएगा।
तो, कब आएगा, बेटा?
ये वो भेजा है आपके लिए। हम देने आ गए।
आपको कोई भी चीज का जरूरत पड़े, तो फ़ोन कर दीजिएगा। हम आ जा?
बेटा, वो अपना फ़ोन भी यहीं छोड़ के गया है।
ये देखो।
ये बस...
मुन्ना : हाँ बे, पंकज।
सुनो हम क्या कह रहे हैं...
हमें नहीं लगता कम्पाउन्डर अकेला पापा पे हमला किया होगा।
ये प्लैन में जरूर उसके साथ कोई ना कोई तो सामिल रहा ही होग??
याद है, आखिर के दो-तीन दिन कितना बतियाता था फ़ोन पे?
हाँ।
कहाँ हो तुम?
[सिगरेट का धुआँ खींचते हुए] ठीक है हम आ रहे हैं।
अरे, करेंगे क्या, भाई?
दो-दो घूँट लगा लेंगे, और क्या?
[माइक पर आदमी] भाइयो और बहनो,
आपका दिल से स्वागत है, इस साल के मिस्टर पूर्वांचल प्रतिय?
मिस्टर पूर्वांचल 2018
[जोशीला संगीत बज रहा है]
टी - त्रिपाठी कार्पेट कंपनी खिताब प्रायोजक
देखिए, सांति बनाए रखिए, हाँ। बस, कार्यक्रम सुरू होने को ह??
हमारे प्रायोजकों के लिए जोरदार तालियाँ बजाइए।
[भीड़ वाहवाही करती है]
सभी : [चिल्लाते हुए] क्या बात!
आदमी : जोरदार तालियाँ हमारे सहयोगी साथियों के लिए भी।
[धीमे से] भोसड़ी के, फिर से छुए, यहीं गाड़ देंगे, समझे?
माफ़ कीजिए, भैयाजी।
अब कालीन भैया आ चुके हैं। उनके स्वागत के लिए, जोरदार तालि
[सभी शोर करते हैं]
भैयाजी।
[लोग तालियाँ बजाते हैं]
[फुसफुसाते हुए] एक बार नमस्ते कर दो उनको।
नमस्ते, भैयाजी।
और अब हम प्रस्तुत करते हैं अपने पाँच फाइनलिस्टों को।
[जोशीला संगीत बजता है]
[सभी वाहवाही करते हैं]
[लोग नारे लगाते हैं] भैया में भैया, गुड्डू भैया!
भैया में भैया, गुड्डू भैया!
भैया में भैया, गुड्डू भैया!
भैया में भैया, गुड्डू भैया!
भैया में भैया, गुड्डू भैया!
भैया में भैया, गुड्डू भैया!
हाँ, ये बढ़िया किया इसने।
आदमी : जोरदार तालियों से स्वागत कीजिए। हमारे पहले प्रति??
पुत्तन पठान, मऊ से!
और अब आ रहे हैं आपके सामने, जोंगा मिश्रा, बलिया से।
[दर्शक वाहवाही करते हैं]
अब मंच पे आ रहे हैं...
अरे, मम्मी, क्या कर रही हो?
...रोहित शर्मा, गोरखपुर से।
कुमार डिस्पेंसरी
भैयाजी, हम घर पहुँच रहे हैं। कुछ ज़रूरी बात है।
[भीड़ वाहवाहबी करती है]
[लाउडस्पीकर पर आदमी] बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया।
देखिए, अब हमारे अंतिम प्रतियोगी आ रहे हैं,
[चिल्लाते हुए] गुड्डू पंडित, यहीं मिर्ज़ापुर से।
बबलू : [चिल्लाते हुए] गुड्डू भैया!
[सभी वाहवाही करते हैं]
[सीटी बजाता है]
अरे!
[सीटी बजती है]
[धुन हल्की पड़ती जाती है]
[रहस्यमय धुन बजती है]
[लाउडस्पीकर पर आदमी] दिल थामके बैठिए।
अब कुछ ही पल में आपके सामने होंगे इस साल के मिस्टर पूर्वा
लीजिए।
अखण्डानन्द : लाखा।
[धीमे से] कुछ जरूरी काम आ गया है।
हम निकल रहे हैं।
[धीमे से] गुड्डू दो दबा देना। जी, भैयाजी।
ठीक है?
चलते हैं।
अखण्डानन्द : आप बैठिए। चलो।
ये जा क्यों रहे हैं?
[रहस्यमय धुन बजती है]
[लाउडस्पीकर पर आदमी] देखिए, सांति बनाए रखिएगा। सांति बना?
अब परिणामों की बारी है।
जिसका वितरण करेंगे हमारे मिर्ज़ापुर के पूर्व एमएलए, रंजन
[सभी वाहवाही करते हैं]
तीसरा इनाम जाता है
भदोई के लल्लन पाठक को।
[सभी वाहवाही करते हैं]
मकबूल : भैयाजी, बहुत बातें हो रही थी इन दोनों में।
और ये देखिए, तारीख और वक्त। इसी दिन इन कॉल से एक घंटा पहले,
कम्पाउन्डर हमला किए थे आप पे।
[लाउडस्पीकर पर आदमी] दूसरा इनाम जाता है
मऊ के पुत्तन पठान को।
[सभी वाहवाही करते हैं]
अब तो पक्की-पक्की बात है।
अखण्डानन्द : बारह मिस्ड कॉल है कम्पाउन्डर के फ़ोन में।
नतीजा जानने के लिए बड़े बेचैन रहे होंगे गुड्डू पंडित।
और अब है पहले इनाम की बारी।
मुबारक हो, भाभी। [हँसता है]
और पहला इनाम जाता है
[चिल्लाते हुए] बलिया के जोगा मिश्रा को।
[वाहवाही बंद हो जाती है]
[हल्की तालियाँ बजती हैं]
क्या मतलब हुआ ये?
[निराशाजनक धुन बजती है] कोई गलती हो गई है क्या?
[अशुभ धुन बजती है]
[तालियों की आवाज़]
[गहरी साँसें लेता है]
पैसा खिलाया है तू, भोसड़ी के? हाँ?
-गुड्डू भैया! -गुड्डू : [चीखकर] हम हैं मिस्टर पूर्वांचल।
[पटकने की आवाज़]
बहनचोद!
[चिल्लाते हुए] ट्रोफी चाहिए, मादरचोद? ले!
आदमी : [चिल्लाते हुए] छोड़, मादरचोद!
[चिल्लाते हुए] ए! आगे आने की कोशिश मत करना! यहीं ठोक देंगे ??
[गोली चलने की आवाज़]
गुड्डू भैया। गुड्डू भैया, उठिए।
[चिल्लाते हुए] मार देंगे, मादरचोद!
[हाँफता है]
-स्वीटी : गुड्डू। -[गुड्डू कराहता है]
[चौंक जाती है]
[गुस्से में दम फूल रहा है]
-स्वीटी : गुड्डू। -[गुड्डू रोता है]
[गुड्डू रोता है] रोइए मत।
[गहन धुन बजती है]
हम बोले थे, सही वक्त आएगा तो कंट्रोल देंगे तुम्हारे हाथ म
अब सही वक्त आ गया है।
ये गुड्डू-बबलू जब जॉइन किए थे
तो बोले थे कि दो जिस्म एक जान हैं।
आएँगे तो दोनों साथ में, वरना कोई नहीं।
तो अब जाएँगे भी दोनों साथ में।
कर पाओगे?
काहे नहीं कर पाएँगे?
पहली बार आप हम पे विस्वास दिखाए हैं।
करेंगे।
ये लो, बेटा।
मुन्ना।
[अशुभ धुन बजती है]
अब होगा तांडव।
और मिर्ज़ापुर पे हम राज करेंगे।
मिर्ज़ापुर
[अशुभ धुन बजती है]
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