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[भीड़ चिल्ला रही है]
[सब चिल्ला रहे हैं]
[भीड़ वाहवाही करती है]
[सब तालियाँ बजाते हैं]
यादव : ऐसे मज़ा नहीं है, त्रिपाठी।
पैसा लगाओ।
ये बग्गी पे, हमारे 20,000।
मंजूर है, यादव जी। हमारे भी आ गए ये...
-क्या नाम? क्या नाम है? -राका, राका।
राका पे। बीस हमारे भी आए।
दम है तुम्हारे लौंडे में, त्रिपाठी।
चलो, शुरू करो।
हाँ, हाँ। चलो, राका।
यादव : [चिल्लाते हुए] हाँ, बेटा, बग्गी।
[लोग शोर मचाते हैं]
[लोग शोर मचाते हैं]
यादव : पैसा लगा है तुमपे।
-हाँ, बेटा! -शाबाश! चल, राका!
मुन्ना : [चिल्लाते हुए] चल, चल, चल!
अरे, हारा, बहनचोद, तो गांड मार दूँगा।
मुन्ना : [चिल्लाते हुए] शाबाश! यादव : ए, बग्गी...
[चिल्लाते हुए] जे बात!
मुन्ना : शाबाश!
क्या पापा? कैसा एकदम सलमान की तरह दिया, हाँ?
[अस्पष्ट बातचीत]
[अशुभ धुन बजती है]
[चिल्लाते हुए] ए, राका। अरे वाह, मेरे शेर! राका, बेटा, इधर आ।
अरे, वाह, वाह, वाह। [हँसते हुए] बहुत बढ़िया।
[कुछ फुसफुसाता है] चल!
[चिल्लाते और हँसते हुए] अरे, बहुत बढ़िया। कमाल कर दिया रे!
[गुरगुराता है]
आदमी : ए!
[चिल्लाते हुए] शाबाश, लाज रख ले, रे!
शाबाश, शाबाश!
[सभी वाहवाही करते हैं]
क्या बात है!
ए, मार रे!
घूम जा, घूम जा, घूम जा!
राका, घूम जा!
-मुन्ना : हाथ तोड़ दे! -अबे, छोड़! हाथ तोड़! हाथ तोड़!
यादव : हाथ तोड़ दे!
अबे, भोसड़ी के, चूतिया हो क्या?
[हँसता है]
यादव : [हँसते हुए] अरे, देखा! देखा! अरे, हमारा वाला जीता।
का हो, मुन्ना? कैसी रही?
पेला ना हमारे वाले ने?
अरे, हम कभी हारते नहीं हैं। पैसा निकालो।
आप हमारे मेहमान हैं। हम आपको हारने भी नहीं देते।
अब चलिए।
जिसके लिए सब इकट्ठा हुए हैं,
वो भी कर लिया जाए, बैठक।
हाँ, हाँ, चलिए।
कालीन भैया : आइए।
आदमी : भैयाजी, भैयाजी।
आपको एक फ़ॉर्मल इनविटेसन देना है।
देखिए, आपको आना जरूर है।
आप भूलिएगा नहीं। आप हमारे चीफ गेस्ट हैं। मिस्टर पूर्वां
हाँ, हाँ।
-है ना, भैयाजी? -बढ़िया करवाओ आयोजन।
हाँ, भैयाजी।
कालीन भैया : चलो।
रतिशंकर : पढ़ाई-वढ़ाई कैसी चल रही है?
मुन्ना : पढ़ाई तो नहीं चल रही है। अब तो सिर्फ़ ठुकाई चल रही
तो, भाइयो, बैठक का मुख्य मुद्दा यही था।
यादव : चुनाव सर पे है,
तो खून-खराबा थोड़ा संभालके।
यादव : क्योंकि जनता का सुरक्षित होना जरूरी नहीं,
सुरक्षित महसूस करना जरूरी है।
फिर वो उसी पार्टी को वोट देती है, जो शासन में है।
ये, रतिशंकर शुक्ला जी समझेंगे तब ना।
यादव : अरे, क्या हो गया?
अरे, कहाँ चल ग...
यादव : अरे, देखो भाई।
मूतने जा रहे हैं। पकड़ोगे?
[सभी हँसते हैं]
यादव : क्या, शुक्ला जी! अरे...
सरसों को जितना मीसेंगे ना, उतना ही तेल निकलेगा।
पैसे भी भिजवाने हैं आपके यहाँ।
तो खून-खराबा तो थोड़ा-बहुत होगा।
हाँ, तो संतुलन रखो।
पैसा ज्यादा चाहिए, खून-खराबा कम।
छवि नहीं खराब होनी चाहिए भैया की।
ए, मुन्ना,
[धीमे से] इनकी गाड़ी में पैसा रखवा दीजिए।
[अशुभ धुन बजती है]
-जय हिंद, साहब। -मौर्या : जय हिंद।
[कराहता है]
आइए, सर।
सर, ये आपका कमरा, सर।
हम्म।
[धीमे से] मेरा कमरा।
[छींकता है]
[आह भरता है]
जय हिंद, साहब।
आ जाएँ? हम परशुराम गुप्ता।
हाँ, हाँ, गुप्ता जी। आइए, आइए। आप ही का तो इंतज़ार कर रहे थ??
सर, चेतन, अकरम।
बैठिए ना, सर।
हाँ, भई, बैठने का बड़ा मन है। थक भी गए हैं।
धूल बहुत है कमरे में, वर्दी खराब हो जाएगी।
[चिल्लाते हुए] रापन!
रापन : जी, सर।
[हिचकिचाते हुए] माफ़ कीजिए, सर, वो...
काहे की माफ़ी?
बस क्या है कि थोड़ा साफ़-सफ़ाई रहता है, मन लगा रहता है। अच्छ?
[ऊँची आवाज़ में] साहब के कमरे में इतनी गंदगी है। चलो साफ़ ?
मौर्या : आओ, आओ।
-तो, रिपोर्ट पढ़ा आने से पहले, -जी।
-मिर्ज़ापुर के बारे में। -जी।
यहाँ तो राम-राज्य चल रहा है। हैं?
[हँसता है]
तो ये मीडिया वाले जो हैं, वो खामखाँ ही में मतलब, खून-खच्चर
नहीं, साहब। थोड़ा हुआ था।
और हम वो अपराधियों को पकड़े भी थे।
सबूत नहीं था तो छोड़ना पड़ा, सर।
और ये मीडिया वाले बहुत चूतिया बनाते हैं, सर।
[हँसता है]
एक बात बताइए।
कहीं आप हमें भी तो अभी चूतिया नहीं बना रहे हैं?
अरे, मतलब,
कुछ कमाई-वमाई चल रही है, तो हमको भी बतलाइएगा।
[अशुभ धुन बजती है]
खैर, छोड़िए।
सुना है, मिर्ज़ापुर में बाहुबली लोग जो हैं मीटिंग करने आ
फिर घबरा रहे हैं।
हम कुछ कह रहे हैं क्या?
अब, जलसा है, मेहमान तो आएँगे ही।
ठीक है। जाइए आप लोग।
[हड़बड़ाते हुए] जी, सर। आओ।
मिर्ज़ापुर
[थीम म्यूज़िक बजता है]
[पेशाब गिरने की आवाज़]
[गाता है]
का, मकबूल मियाँ?
कैसे हैं?
मकबूल : हम अच्छे हैं।
और अभी तक सुरक्षित भी।
कुछ लाए हैं आपके लिए।
[अशुभ धुन बजती है]
मकबूल : क, ख, ग, घ...
पूछते हैं ना आप, ठोकने से पहले?
अब हम आपके लड़के, शरद बाबू से अलिफ़ में बै, पै पूछेंगे।
और ये बता नहीं पाएँगे।
अब मिर्ज़ापुर भेजिएगा मत किसी को।
शरद पे कौनो हमला नहीं होना चाहिए, मकबूल।
अब होली दुई-चार दिन बाद है, तो क्या हुआ?
मना तो हम आज ही रहे हैं ना।
तो, आओ, गले मिलो।
मिलो, मिलो, चलो...
हाथ गंदे हैं आपके।
[पानी गिरने की आवाज़]
[गहन धुन बजती है]
-आदमी : आय-हाय, जरीना बेबी। -[सीटी बजती है]
[अस्पष्ट बातचीत]
जरीना को लेके आए हैं। हैं?
कुछ नृत्य-वृत्य हो जाए।
[फ़िल्मी गाना बजता है]
[सीटी बजती है]
[भीड़ वाहवाही करती है]
[ऊँची आवाज़ में] क्या बे?
[चिल्लाते हुए] म्यूज़िक बंद कर, मादरचोद!
[बंदूक तानने की आवाज़]
कालीन भैया : ए, मुन्ना!
[मुन्ना ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेता है]
[धीमे से] क्या है?
चलो जाओ।
ए, राजा।
ले जाओ।
सबके सामने हाथ उठा दिए मुन्ना पे।
चूतिया है तुम्हारा लड़का।
चूतिया है, ये ज़रूरी नहीं है।
हमारा लड़का है, ये ज़रूरी है।
[अशुभ धुन बजती है]
[धीमे से] अच्छा नहीं हुआ।
मुन्ना हमारे भी तो लड़के हैं।
गलती किए, हम मार दिए।
होली का माहौल है, अखण्डा।
आओ, गले लग लो।
ए, गाना बजाओ।
कालीन भैया : गाना।
मिर्ज़ापुर चाहिए ना तुमको, शुक्ला?
जो चीज जानते हैं, काहे पूछ रहे हैं?
क्योंकि हम वो दिला सकते हैं तुमको।
चुनाव में पैसा भेजो,
जीत के बाद, भैया से बात करके, मिर्ज़ापुर तुम्हारा कर देंग
कभी तुम मिर्ज़ापुर से धकेले गए थे,
अब उनको धकेल देंगे।
[अशुभ धुन बजती है]
और उस मुन्ना की तो...
पैसा तो हम पहुँचा देंगे,
लेकिन एक सरत पे।
अखण्डानन्द हमारे साथ कौनो खून-खराबा नहीं करेगा।
खून-खराबा करने लायक छोड़ेंगे भी नहीं।
[अखण्डानन्द खाँसता है]
गुजिया लिए आप लोग?
यादव : हम बात किए हैं शुक्ला से।
अब तुम दोनों के बीच में कभी खून-खराबा नहीं होगा।
हमारे कहने से माने हैं ये?
तुम भी हाँ कर दो, अखण्डा।
चलिए, आप ही के कहने से सही, मान तो गए।
पर एक शर्त है हमारा।
हमारे कालीन के ट्रक,
बेरोक-टोक इनके इलाके से गुज़रने चाहिए।
कालीन भैया : एकदम क्लियर पास।
[जीभ चटकाते हुए] लो, तय हो गई बात।
तो, आज से, आप दोनों की दुश्मनी खतम।
गले मिल लीजिए फिर।
हम्म!
ठीक है।
कालीन भैया : मुन्ना का ध्यान दे रही हैं कि नहीं?
दिन भर नशे में डूबे रहते हैं।
कुछ कम हुआ उनका?
अ... आप बुलाए थे, पापा?
इधर आओ।
बैठो।
[साँस लेता है]
बेटा, मुन्ना,
ये जो ताकत तुम्हारे पास है ना,
इसके लिए तुम्हें कुछ करना नहीं पड़ा है।
बैठे-बिठाए मिल गई है।
और ताकत जो होती है ना, मुन्ना, वो नेताओं की तरह होती है।
रातों-रात पार्टी बदल दे।
बीना : आप बस ज्ञान ही देते रहिए।
यादव जी हमारे लड़के को थप्पड़ मारके चल दिए, तब तो कुछ बोले ?
अभी रामायण बाँच रहे हैं।
जाइए, मुन्ना भैया, आराम कर लीजिए।
[अशुभ धुन बजती है]
और सुनो!
गुड्डू-बबलू को हम कालीन के व्यापार में शामिल कर रहे हैं।
[नशा खींचता है]
[ज़ोर से साँस लेता है]
रधिया : मुन्ना भैया...
हम आएँ?
[रधिया आहें भरती और हाँफती है]
मुन्ना : [गुस्से से] सब हमारी ले रहे हैं।
साले हम भी लेंगे।
हमारे नाम के आगे, जो ये सरनेम लगा है ना, त्रिपाठी,
श्राप है हमारे लिए!
-[रधिया और ज़ोर से आहें भरती है] -हट!
[ऊँची आवाज़ में] साला, बचपन से सुनते आए हैं, सबकुछ हमारे लि
लेकिन है नहीं!
-[रधिया कराहती है] -[चिल्लाते हुए] है नहीं!
[लाउडस्पीकर पर] एस.एस.बी. पब्लिक स्कूल, संतपुरा में ही प्र?
और अपने बच्चों को एक आदर्श और होनहार नागरिक बनाएँ।
देखो, हमको ऐसा लगता है कि...
कि तुम नॉमिनेशन फॉर्म तो भर ही दो।
लेकिन हम राजनीति के बारे में कभी सोचे ही नहीं हैं।
[हँसता है]
देखिए, अब नए लोग राजनीति में नहीं आएँगे, तो अच्छा कैसे हो??
चलो, मान लो, तुम ये नॉमिनेशन फॉर्म भर देती हो, चुनाव के लिए
जीत जाती हो,
तो गज्जूमल कॉलेज को मुन्ना भैया से तो
बेहतर ही प्रेसिडेंट मिलेगा ना?
है कि नहीं?
और सच कहें तो ये कॉलेज वाले बहुत परेशान हैं मुन्ना भैया स
कोई कुछ कहता नहीं है, वो बात अलग है।
लेकिन तुम तो काम कर रहे हो उनके लिए।
हम उनके लिए नहीं, उनके पापा के लिए काम कर रहे हैं।
कालीन भैया।
और कुछ?
जी नहीं।
आप चाय पीना पसंद नहीं करती हैं?
नहीं, पसंद है।
तो, चलिए ठीक है, फिर किसी दिन आपको हमारे हाथ की चाय पिलाएँ?
हमारे पापा कहते हैं कि हम बहुत बढ़िया चाय बनाते हैं।
[खुशनुमा धुन बजती है]
हमारे हाथ के अलावा किसी और की चाय नहीं पीते हैं वो।
[बातचीत की आवाज़ बंद]
गुड्डू : अरे, भैया, मिठाई?
ये छोटूमल हलवाई से मंगवाए हैं क्या?
कालीन भैया : बर्फ़ी है।
अरे, बर्फ़ी तो हमें बचपन से पसंद है, लेकिन ये...
थोड़ी काली है।
अफ़ीम है।
हमारे व्यापार में इसे बर्फ़ी कहते हैं।
[जोशीली धुन बजती है]
[हँसते हुए] इसकी माँ की चूत...
[हिचकिचाते हुए] तो, उस दिन जब हम लोग कालीन में लाश ले गए थे,
तो, उसके साथ-साथ हम ये अफ़ीम भी ले गए थे?
हम कहे थे ना,
कट्टों का व्यापार बढ़ाओगे, तो इसमें भी शामिल करेंगे।
अब इसको भी बढ़ाओ।
बनाते हैं कोई नेटवर्क।
सुनो।
ओए, पहलवान।
एक बात कायदे से, ध्यान देके सुनो।
जो भी करना, हमसे पूछे बगैर नहीं।
हम्म?
जी।
चड्ढा : भैयाजी, विदेशी ब्रैंडों से लड़-लड़के वैसे ही फटी पड़??
और लोग जूस भी ज्यादा पीने लगे हैं आजकल।
कंपनी घाटे में चला रहे हैं।
चड्ढा : फ़िर, पिछले हफ्ते भिजवाए थे पैसे आपको।
पिछले हफ़्ते फ़िल्म भी तो दूसरी लगी थी ना, चड्ढा।
बदल गई ना।
हमको और पैसा चाहिए।
अभी साथ दोगे, तो व्यापार बढ़ा देंगे तुम्हारा।
वो कैसे, भैयाजी?
मिर्ज़ापुर का रेंज दिलवा देंगे तुमको।
मिर्ज़ापुर में तो कालीन भैया का राज है।
राज बदल भी तो जाते हैं, चड्ढा।
[अशुभ धुन बजती है]
[रहस्यमय धुन बजती है]
रतिशंकर : नमस्कार, यादव जी।
मिर्ज़ापुर का वादा याद है ना आपको?
रतिशंकर : हम पैसा जमा कर रहे हैं।
तुम ये पैसा भेजो, रतिशंकर। और भरोसा रखो हमपे।
रतिशंकर : [हँसते हुए] अरे, यादव जी, भरोसा है, तभी तो कर रहे ह??
अच्छा, रखते हैं।
तुम शाहपुरा निकलो।
वहाँ सक्सेना के दो नए होटेल बन रहे हैं।
और तुम जे.सी. चौराहा जाओ।
वहाँ लछमी ट्रैवेल्स के आठ नई बसें डली हैं।
चुम्मी देके, नहीं तो ठोकके पैसा वसूलो, जाओ।
ठीक है।
[इंजन चालू होता है]
गुड्डू : हाँ, स्वीटी, बोलो।
ठीक है। हम पहुँच जाएँगे।
हाँ, वही जगह में पहुँच जाएँगे। ठीक है।
स्वीटी अपने पापा से मिलाना चाहती है, बे।
जे बात! हैं!
-वो कुर्सी ले लो। -ये तो और सॉलिड बना लिए हो।
अरे, ये मछलियाँ तो कुछ भी नहीं हैं। हम तो पूरी बॉडी बना लि?
हर मसल एक्स-रे की तरह दिखता है।
तुम जब दिखाओगे, तो देख लेंगे तुम्हारी बॉडी।
हाँ, तो बुलाएँगे ना।
मिस्टर पूर्वांचल प्रतियोगिता में।
होने वाला है। तब देखना हमारी बॉडी।
गुड्डू : हैं, बबलू?
हम तुमको पहले से ही बता दे रहे हैं।
पापा को पसंद नहीं है कि हम लड़कों से ज़्यादा मिलें।
अरे, प्लीज। अब आप इनपे और दबाव मत डालिए।
वैसे ही इतने घबराए हुए हैं, आते-आते हर मंदिर के सामने मन्??
कि अगर आपके पापा के साथ मुलाकात सही रही,
तो आपको वैष्णो देवी लेके जाएँगे।
पापा... पापा आ गए।
-गुड्डू भैया, आप? बबलू भैया? -नमस्ते।
-गुड्डू : अंकल... अंकल जी। -अरे, क्या कर रहे हैं, भैयाजी?
गुप्ता : आप बैठिए ना। बबलू : आप आइए ना, आप यहाँ बैठिए।
गुप्ता : अच्छा, हम बैठते हैं।
आप बैठिए।
गुड्डू : और, बबलू इधर आ जाओ।
गुप्ता : बैठिए ना। हाँ, हाँ, बैठते हैं। गुड्डू : बैठिए, बैठ??
यही हैं?
[हँसता है]
लड़का : ये लीजिए, पाँच कप चाय।
गुप्ता : हाँ, बेटा।
-समोसा भी ला रहे हैं। -गुप्ता : हाँ।
गुड्डू : लाओ, लाओ।
स्वीटी बेटा, तुम हमको कभी बताई नहीं कि गुड्डू भैया तुम्ह?
पापा, अब इनको तो आप भैया ना कहें।
[हँसता है]
अच्छी पसंद हैं ये। हमको पसंद है।
[धीमी धुन बजती है]
अरे, तुम दोनों का भी तो कहीं...
पापा...
[खुश होते हुए] बहुत बढ़िया है, बहुत बढ़िया।
अरे, दोनों बेटियाँ एक ही घर में चली जाएँगी,
इससे अच्छा और क्या हो सकता है?
पापा, ऐसा कुछ भी नहीं है। हम सिर्फ़ दोस्त हैं।
हैं। सिर्फ़ दोस्त?
जी।
जी।
[दरवाज़े पर खटखट]
आइए, आइए, पंडित जी। बैठिए, बैठिए।
हम्म।
लीजिए।
पी.आई.एल. का फाइल तो बहुत बढ़िया तैयार किए हैं आप।
लेकिन बेकार है।
मिर्ज़ापुर के किसी भी बच्चे से पूछेंगे, तो सारी जानकारी ?
सबूत कहाँ है?
[आह भरता है]
सर,
ये दोनों जेल में रहेंगे ना,
तो ना मारेंगे,
न मरेंगे।
हम तो बस कोसिस कर रहे हैं कि किसी तरह से... उन्हें रोक पाएँ??
हम समझते हैं, पंडित जी।
इसी लिए कह रहे हैं,
कि एक वकील की तरह काम कीजिए।
बाप की तरह नहीं।
जज : हम्म?
चीनी दो किलो है।
चावल... चावल तो दो किलो बोले थे।
ये तो तीन किलो लग रहे हैं।
और ये सब?
और से अरहर की दाल भी एक किलो बोले थे। ये भी दो किलो लाए हो।
हाँ, वो जीजाजी ज्यादा भिजाए।
डिंपी : ज्यादा भेजे हैं? मतलब? पैसा नहीं लेंगे क्या?
जीजा जी बोले इसके पैसे नहीं लेंगे। वो... ये सारा माल मुफ़्?
काहे मुफ़्त का है? हैं?
कोई अपनी मर्जी से मुफ़्त दे रहा है, उसमें भी दिक्कत है आप??
नहीं खाना है, मत खाइएगा।
गुड्डू : परिवार में और लोग हैं।
अगर मुफ़्त का है, तो कोई नहीं खाएगा।
ये लो पकड़ो पैसे और निकलो।
[बड़बड़ाता है]
[ऊँची आवाज़ में] पकड़ रहे हो कि मारें दो?
अरे, भाई, तुम पैसे लो और जाओ ना।
रमाकांत : चल अभी।
लो, सौदा भी आ गया। इतनी जल्दी काहे बुलाए हमें।
इतना बढ़िया कीर्तन चल रहा था हमारा मंदिर में।
दो।
वसुधा : क्या है? हैं?
बबलू : फ्लैट बुक किए हैं। आपके और पापा के नाम पे।
[ताना कसते हुए] सही है।
हम घर ही बैठ जाते हैं।
पेंशन भी दे ही दोगे।
तुम ही लोग तो करोगे सब कुछ।
अरे, देख तो लो।
डिंपी : अरे, मम्मी, पापा को हम समझाते हैं।
अच्छा, सुनो ना।
भैया को किसी को मिलवाना है आपसे।
किससे?
[फ़िल्म की अस्पष्ट आवाज़ें]
तुम भी लो।
वसुधा : इसे बहुत पसंद है।
बैरा : भैयाजी।
लीजिए।
[हँसती है]
[फुसफुसाते हुए] बहुत अच्छा लगा तुमसे मिलके। सच।
तुम जानती हो ना गुड्डू क्या काम करते हैं?
हाँ, जानते हैं। और हमको इससे कोई दिक्कत नहीं है।
हमें भी नहीं है।
[दोनों हँसती हैं]
अच्छी जमेगी तुम्हारी-हमारी।
[सोडा पीने की आवाज़]
[फ़िल्म में अभिनेता] कहीं से भी बचके नहीं जा सकते तुम।
ठंडी नहीं है।
भैयाजी, बोतल ठंडी तो लग रही है।
[फ़िल्म में आदमी] गोली मार दो इसे!
बैरा : भैयाजी, और कुछ लाऊँ?
[फुसफुसाते हुए] हमको तो लगा था कि अब तुम उठोगे।
[फुसफुसाते हुए] परिवार के साथ बाहर आए हैं।
हर जगह थोड़े ही लड़ेंगे।
लव स्टोरी नहीं लगी थी क्या?
मार-धाड़ वाली पिक्चर हमें बिलकुल नहीं जमती।
नॉमिनेशन फाइल करने का सोच लिए हैं हम।
साथ में चलोगे?
थोड़ा घबराए हुए हैं, तो हौसला मिल जाएगा।
[ताना कसते हुए] हाँ, बबलू भैया तो ज़िंदगी भर हौसला ही देते
कभी गुड्डू भैया को, जब वो स्वीटी से मिलने जाएँ,
और कभी तुमको जब तुमको कोई नॉमिनेशन फाइल करो। हम्म, दे दीज
देख रहे हैं।
डिंपी : मम्मी, फ़िल्म से ज़्यादा अच्छा वो डोसा नहीं था?
वसुधा : अरे, हम तो आधा ही खाए।
बबलू : एक तो मुफ़्त में इतना बढ़िया ट्रीटमेंट दिलवाए, और इ??
डिंपी : अरे, नहीं अच्छी थी।
तुम लोग बड़े लोग हो गए हो।
हमारे लिए फ्लैट खरीदे हो।
तो अपने रहने का जुगाड़ भी कर ही लोगे।
लड़ाई आर-पार की है।
क्या हद कर रहे हैं आप?
ऐसा कैसे लड़कों को आप घर के बाहर निकाल देंगे?
तुम्हें भी जाना है?
जाओ। कोई दिक्कत नहीं है।
वरना अंदर चलो। हमारा फ़ैसला पक्का है।
डिंपी।
[शांत धुन बजती है]
वसुधा : ये आप ठीक नहीं कर रहे। अरे, जवान लड़के...
रमाकांत : [चिल्लाते हुए] चुप रहो!
वसुधा : हद हो गई आपकी। आप तो हर चीज़ में अपनी ज़बरदस्ती कर?
ठीक है।
यही हमारा घर है।
[घंटी की आवाज़]
कॉन्स्टेबल : जी, सर?
एस.आई. से ऊपर के रैंक की सभी अफ़सरों की फाइल निकालो जल्दी??
-हमारे घर चले जाइए। -कॉन्स्टेबल : जी, सर।
डायबिटीज़ की दवाई और रात का खाना ले आइए। जाइए।
हम्म।
गजगामिनी गुप्ता।
देखो, जैसे तुम्हारे नाम में वजन है ना, काम भी वजनदार करना ?
कायदे से प्रचार करना, बेटा।
पर्चा भरे हैं, तो लड़ेंगे भी खुलके ही।
शुभकामनाएँ हैं तुमको।
-शुक्रिया, सर। -ठीक है?
तो, आगे का क्या सोची हो?
बस अब प्रचार की तैयारी करनी है।
क्या करेंगे, कैसे करेंगे,
यही सब सोच रहे हैं।
छात्र : नमस्ते, भैयाजी। भैयाजी, देखे मुन्ना भैया का पोस्ट
भैयाजी, हम लल्लन राय। बी.ए. सेकेंड इयर।
बता जरूर दीजिएगा उनको।
बबलू : हम्म। बता देंगे।
ये तो तुम शक में डाल दिए।
मुन्ना भैया की तरफ़ होगे कि हमारी?
तुमको क्या लगता है?
हम पीछे रहेंगे, पर कैनवसिंग करेंगे तुम्हारा।
सबसे पहले तुम्हारा चुनाव चिह्न और पोस्टर के बारे में सो??
वो सब हम सोच लिए हैं।
-अच्छा? -हम्म।
-यादव : नमस्ते, भैया। -[फ़ोन पर सी.एम.] हाँ, बोलो।
हाँ, नकद की कमाल की सेटिंग किए हैं हम।
बस पहुँचने वाला है।
सी.एम. : हम्म।
आप बस सी.एम. की कुर्सी पर ध्यान दीजिए।
फंडिंग हम देख रहे हैं।
सी.एम. : हाँ, हाँ। पार्टी तो तुम्हारे ही कंधों पर टिकी है, ज?
अरे, छोटे भाई हैं हम आपके।
और पार्टी के कार्यकर्ता भी।
-रखते हैं, भैया। -सी.एम. : हम्म।
आप कब बनेंगे सी.एम.?
हम्म?
हम जिंदगी भर ऐसे नाचते ही रहेंगे क्या?
धैर्य का फल मीठा होता है, जरीना बेगम।
और हम सी.एम. बन जाएँगे तो क्या नाचना छोड़ दोगी?
नाचेंगे।
अकेले में नाचेंगे।
[फुसफुसाते हुए] सिर्फ़ आपके लिए नाचेंगे।
[हँसती है]
बुलाए हैं, सर?
मौर्या : आइए।
जी।
गुप्ता : सर।
आइसक्रीम खाएँगे, गुप्ता जी?
नहीं, सर। शुक्रिया। [हँसता है]
अरे, खाने के शौकीन लग रहे हैं, इसलिए पूछा।
तोंद तो एकदम गिरने को आ रही है।
[हँसते हुए] पुलिसवाले हैं कि हलवाई हैं?
[हँसता है]
बैठिए।
शु... शुक्रिया, सर। [हँसता है]
हाथ दीजिए।
मौर्या : लाइए।
अरे, बड़ी महंगी घड़ी लग रही है। हैं? समय ठीक बतलाती है क्या?
अच्छा, हम सीधे मुद्दे पे आ जाते हैं।
कितना कमा लेते हैं आप हर महीने?
सर?
तनखा की बात नहीं कर रहे हैं। ऊपर की कमाई की बात कर रहे हैं?
[रहस्यमय धुन बजती है]
[हिचकिचाते हुए] देखिए, सर...
हम तो... अपना काम पूरी ईमानदारी से ही करते हैं।
और अपनी इस नौकरी में हम एक ही चीज कमाए हैं, सर,
इज्जत।
इज्जत ही कमाए हैं? और कुछ नहीं कमाए आप?
हम समझ रहे हैं कि आपके दिमाग में शक चल रहा है।
नया अफ़सर आया है। क्या सोचता है? किसकी तरफ़ है? क्या करेग??
मौर्या : हाँ?
नहीं, सर, ऐसा तो कुछ नहीं सोचे हैं हम।
चलिए, ठीक है।
-शुक्रिया, सर। -एक बात और समझ लीजिए।
हम बड़े खुले विचारों वाले आदमी हैं।
तो अगर आपको लगे कि कुछ जानकारी देना चाहिए, तो दे दीजिएगा।
जी। [गला साफ़ करता है]
जाइए।
गुप्ता : ये मौर्या जी ने दिमाग की माँ-बहन एक कर दी है।
बस आइसक्रीम खाके मुस्कुराते रहते हैं।
हम बहुत कोशिश किए।
लेकिन पता नहीं क्या चलता है उनके मन में।
धीरज रखो, गुप्ता। समझ में आ जाएगा।
हाँ, लेकिन प्रोटोकाल के हिसाब से तो अब तक उनको यहाँ आकर आ??
वैसे भी वो छोटी जात के हैं।
तो ये समाज में ऊँच-नीच का...
बबलू : अब जात चाहे छोटी हो या बड़ी हो,
ये नहीं भूलिएगा, गुप्ता जी, कि मौर्या जी आई.पी.एस. हैं।
स्पेशल ऑफिसर ऑन ड्यूटी भेजे गए हैं मिर्ज़ापुर।
और कोई मजाक नहीं है सिविल की परीक्षा पास करके
वहाँ बैठना, जहाँ वो बैठे हैं।
अब कोई भी जात हो,
हमारी तरफ़ हैं, तो दोस्त हैं। नहीं है तो दुश्मन।
अब इसमें और दिमाग क्या लगाना?
है ना, भैयाजी?
अब आप हमें अपने साथ रखे हैं, तो इसलिए थोड़े ही रखे हैं कि हम
कोई गुण देखे होंगे, तभी रखे हैं।
बड़ा अतरंगी नज़रिया होता है इनका हमेशा।
आपकी इस बात से हम बिलकुल सहमत हैं।
ये दोनों भैयाजी लोग हैं तेज़।
[रहस्यमय धुन बजती है]
गुड्डू : अबे, ये बताओ,
बर्फ़ी का कुछ सोचे? हाँ?
कोई आदमी है नजर में, जो नेटवर्क बनाएगा।
आदमी नहीं है।
अच्छा। आदमी नहीं है तो क्या, औ... औरत से करवाओगे?
औरत भी नहीं है।
भैयाजी, राम-राम।
भैयाजी, ये तो अफ़ीम है।
बैठो।
नशा नहीं करना है।
बेचना है।
और पुलिस भी तुम लोग की तलाशी नहीं लेती है। हम्म?
तुम ही बोले थे कि तुम्हारा नेटवर्क बड़ा ज़बरदस्त है।
मिर्ज़ापुर के हर मोहल्ले की नब्ज़ पे उंगली रहती है तुम लो?
तो, हमारे लिए तो एकदम सही इंसान हुए ना तुम?
हम्म?
आप लोगों को काहे लगता है कि हम हाँ कह देंगे, हाँ?
क्योंकि फिर ना धूप, ना जाड़ा, ना बारिश,
कभी भीख नहीं मांगनी पड़ेगी तुम लोग को।
चार पैसा कमाओगी, इज्जत से जी पाओगी। बस।
देखो कोई जबरदस्ती नहीं है।
मन हो तो ही करना। ठीक है?
वो क्या है ना, हमारा मानना है कि व्यापार में पार्टनरशिप ज
पार्टनर बोल दिए आप?
बहुत इज्जत दी आप लोगों ने, भैयाजी।
हमरी तरफ से हाँ है।
मुनाफ़ा बाँटा जाएगा।
जितना बेचोगे, उतना मिलेगा।
ठीक है?
तो, भैयाजी, थोड़ा और मंगा दीजिए। पूरी टीम काम करेगी।
बाबर।
[फ़िल्मी धुन बजती है]
एंट्री करा दो इसकी।
पाण्डे मोटरकार बाजार।
भैयाजी, आपको गाड़ी खरीदना है या बेचना है?
बबलू : ये वाली कौन सी है?
इस कार को तो बहुत बार एक्सीडेंट हो चुका है।
ये मौत के कुएँ वाली कार है।
अच्छा, मौत से तो हम भी खेलते हैं।
बबलूआ।
-दो पहिए से चार पहिए पे आ गए हैं। -[जीभ चटकाता है]
अब रौंद देंगे मिर्ज़ापुर को।
गुड्डू एन्ड बबलू लायन्स ऑफ़ मिर्ज़ापुर
[लाइटर की आवाज़]
मौर्या : सबकी सालाना कैरैक्टर रिपोर्ट पढ़े हम।
ये लीजिए, खाइए।
आप सब लोगों का ए.सी.आर. खराब है।
इसका मतलब है आदमी ठीक-ठाक ही होंगे।
[हँसता है]
क्या है ना, कि शहर मादरचोदों से भर गया है।
तो, थोड़े मादरचोद हम भी बन जाते हैं।
तो, करना क्या है, सर?
[अशुभ धुन बजती है]
खत्म करना है, सिन्हा?
मौर्या : इसीलिए स्पेशल टीम बनाए हैं।
आपको पूरी छूट दे रहे हैं, सिन्हा साहब।
मिर्ज़ापुर साफ़ कीजिए।
जी, सर।
इनसे शुरुआत कीजिए।
[अशुभ धुन बजती है]
मिर्ज़ापुर
[फ़िल्मी गाना बजता है]
[अशुभ धुन बजती है]
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