All language subtitles for Mirzapur - 01x04 - Virginity.AMZN.WEB-DL.DDP5.1.H.264-NG.Hindi.C.updated.Addic7ed.com

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Original subtitles

[गुर्रा रहे हैं]

[टीवी पर आदमी] ये शेरनी तीन दिनों में सौ बार तक संभोग कर सक

इसका मकसद सिर्फ़ नई पीढ़ी पाना ही नहीं होता,

बल्कि चरमसुख पाने की कुदरती ख्वाहिश भी इसमें बहुत तेज़ ह??

-[गहन धुन बजती है] -[बीना आहें भरती है]

[हाँफते हुए] इतना देर तो कभी नहीं कर पाते कालीन भैया।

[हाँफती है]

-[नाटकीय धुन बजती है] -[और ज़ोर से आहें भरती है]

[टीवी पर आदमी] शेर भले ही जंगल का राजा माना जाता हो,

पर संभोग के समय पूरा नियंत्रण शेरनी के पास होता है।

[आदमी आहें भरता है]

-[मारता है] -[सुख में चिल्लाती है]

हाँ, राजा, और ज़ोर से,

और ज़ोर से! [और ज़ोर से चिल्लाती है]

हाँ, राजा!

[आहें भरता है]

भाभी, भाभी, हो गया।

[चिल्लाते हुए] चुप!

[दोनों ज़ोर से हाँफते हैं]

[दोनों गहरी साँसें लेते हैं]

[कड़ाई से] बाऊजी के खाने का वक्त हो गया है।

[गुर्राते हैं]

[टीवी पर आदमी] अगली पीढ़ी के लिए बीज और चरमसुख के मिलने के

ये शेर शेरनी के किस काम का?

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

[दरवाज़े पर खटखट]

आ जाओ, आ जाओ। कौन है? आ जाओ।

गोलू : नमस्ते, सर। आप बुलाए हमको?

अरे, हाँ, हाँ, हाँ।

गोलू।

[गला साफ़ करता है]

[हिचकिचाते हुए] देखो, गोलू, हम सीधे मुद्दे पे आते हैं।

जी, सर।

तुम हो कॉलेज की टॉपर।

पढ़ाकू विद्यार्थी।

सभी तुमको पसंद करते हैं।

और, इन दिनों, कॉलेज का माहौल ना थोड़ा खराब हो रहा है।

सर, आप अभी तक मुद्दे पे नहीं आए।

मुद्दे पे आ रहे हैं,

रास्ते में हैं।

"मुद्दे पे नहीं आ रहे हैं।"

चुनाव में खड़ी होगी?

दीपू जी पीछे हट गए हैं।

और मुन्ना जो है, वो कैम्पस में काफ़ी लड़ाई-झगड़ा कर रहा ह??

तुम अगर खड़ी होती हो,

तो उसको चुनौती मिलेगी।

और तुम अगर जीत जाती हो,

तो कॉलेज की थोड़ी सफ़ाई हो जाएगी।

[गंभीर धुन बजती है]

अम...

एकदम से सोच नहीं पा रहे हैं, सर।

थोड़ा सरप्राइज़ कर दिया आप हमें।

सरप्राइज़ नहीं है।

तुम्हारे पास अभी बहुत वक्त है।

सोच लो। सोचके हमको बताओ।

और काम आसान नहीं है।

और अगर आसान होता, तो हम तुमको क्यों बोलते?

जी, सर।

सोचके बताते हैं, सर।

यार, हमारे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा, गुड्डू भैया।

अबे, तुम ही कुछ बताओ बे।

अरे, भैया, इतना तो दिखा चुके हैं।

अब आप ही कुछ बताइए।

अच्छा, रुको, रुको।

ऐसी दिखती हैं हमारी मम्मी।

आंटी जी का तो रंग साफ़ है।

अब दिखाते हैं आपको कंटाप माल।

ज़रा बजट बताइए।

अबे, तुम दिखाओ, यार। बजट छोड़ो।

ये देखिए बेहतरीन चीज़।

केवल दस हज़ार की है।

ढ़ाई हज़ार हैं।

सुन लिए ना।

तीन नंबर टेबल का बिल बना दीजिएगा।

ये लीजिए।

गुड्डू : लाओ।

चलो।

[इंजन चालू होता है]

दस रुपया तो दीजिए।

चूतिया हो क्या?

बबलू : गुड्डू भैया, बच्चा है।

तो हम भी बच्चे हैं।

चलो, यार।

क्या है? पैसा तो दीजिए!

गुड्डू : ये पकड़ो।

नई बंदूक ला दिए हैं मकबूल?

चमक रही है।

पुरानी इतना ढूँढे,

मिली ही नहीं।

ये लीजिए।

बाऊजी : बैठो।

[धीमी धुन बजती है]

[हिचकते हुए] अखण्डा...

ध्यान रखते हैं ना तुम्हारा?

व्यस्त रहते हैं।

और हमारा ध्यान रखने में क्या है? हम तो खुदई मालकिन हैं।

अब, घर में कोई खेलने-खिलाने को भी तो नहीं है।

हम जाएँ?

हम्म? हाँ, जाओ।

स्वीटी : [हाँफते हुए] तू इन चक्करों में कहाँ पड़ेगी, गोलू?

तभी तो हाँ नहीं किए हैं, दीदी।

सोचने की वक्त माँगे हैं रंधीर सिंह सर से।

वैसे,

एक बात वो सही कहे।

कॉलेज तो अपना ही है।

शटल दो, गेम पॉइंट है हमारी।

तुम तो ऐसे भी जीत ही जाओगी।

शाम को फ़्री हो?

क्यों?

हाईवे वाले मैकडॉनल्ड पे बर्गर खिलाने ले जाएँगे।

कितने बजे?

[हकलाते हुए] कितने बजे...

तुम बताओ। अभी क्या वक्त हुआ है? ये दो...

-चार बजे चलो। -चार बजे?

हाँ।

ओहो, अभी याद आया।

चार बजे हम किसी के साथ जा रहे हैं आलू पैटीज़ खाने।

डेट है हमारी।

क्या... क्या... कौन है?

और क्या नाम क्या है ये आलू पैटीज़ का?

गोलू : काहे?

दीदी का रिश्ता लेके जाओगे उसके पास, नाम बताएँ तो?

[गहरी साँस लेता है]

ये प्यार ना, साला बहुत चूतिया चीज़ है, स्वीटी।

[गुस्से में] जो ना होता ना,

तो इतनी बेइज़्ज़ती पे तो

अभी तुम दोनों को निपटा देते हम।

देखो, मुन्ना,

शहर में और भी बहुत लड़कियाँ हैं।

हम तुमको अच्छे लगते हैं और तुम हमको अच्छे नहीं लगते।

बात खतम।

[जीभ चटकाता है]

मुन्ना की कोई भी बात इतनी आसानी से खतम नहीं होती, स्वीटी।

ठीक है।

ऑल द बेस्ट।

[फ़ोन की घंटी बजती है]

हाँ, बे कम्पाउन्डर, बोलो।

कहाँ हो तुम?

किसके साथ जा रही हैं आप डेट पे?

जा तो नहीं रहे थे,

अब जाएँगे।

हेलो।

हाँ, स्वीटी। हम आ जाएँगे।

-[हॉर्न बजता है] -कितने... कितने बजे?

-[हॉर्न बजता है] -हैं?

-[हॉर्न बजता है] -हेलो?

हेलो?

-[हॉर्न बजता है] -ह... हेलो...

-[चिल्लाते हुए] अबे! -[कराहता है]

साले, हॉर्न गांड में डाल देंगे अभी।

पौं, पौं, पौं, पौं। हेलिकॉप्टर बनके जाओगे क्या?

बात कर रहे हैं ना!

भोसड़ी के, निकल!

निकल, भोसड़ी के, नहीं तो मारेंगे। निकलो।

हेलो?

हाँ, हम आ जाएँगे।

हाँ, चार बजे आ जाएँगे।

और वैसे भी, आलू पैटीज़ खाए बहुत टाइम हो गया है।

नमस्ते, सत्यप्रकास।

आइए, मुन्ना भैयाजी, नमस्ते।

फिलम शुरू हो गई?

अभी पिछला शो चल रहा है, थोड़ा देर हुआ।

हमें भी दिखाओ।

भैयाजी।

आदमी : हाँ, एक बार सब लोग उठ जाओ, और बाहर आ जाओ।

-ठीक है? -[आदमी चिल्लाता है]

-शो... शो बंद हो गया है। -[लोग चिल्लाते हैं]

आदमी : अरे, खराबी हो गई है। ए!

[लोग चिल्लाते हैं]

आदमी : अरे, बंद करो प्रोजेक्टर कह रहे हैं। समझ नहीं आ रहा ह

[गोली चलती है]

[धूम्रपान की चेतावनी] इस शहर को ये हुआ क्या है?

-[साँस लेने की आवाज़] -कहीं आग है, तो कहीं धुआँ-धुआँ।

ललित : भैया ने...

मुन्ना : बर्फ़ लगावा दीजिए यहाँ।

आदमी : जी, भैयाजी।

धूम्रपान अपराध है

[धूम्रपान चेतावनी] हो गई बरदाश्त की अब इंतहा।

आदमी : भैयाजी।

[धूम्रपान चेतावनी] बुझे सिगरेट-बीड़ी, दिखे जलती जहाँ।

बबलू : अरे, भैया, आप हमें काहे लाए यहाँ पे?

गुड्डू : फट रही है बुरी तरह, यार।

स्वीटी खुद बुलाई है।

बबलू : अरे, तो हम क्या कर लेंगे?

गुड्डू : अबे, हौसला दोगे, और क्या, बे?

चुपचाप चलो अंदर।

बबलू, जल्दी करो, यार।

बबलू : अरे, रुक जाओ भई।

गुड्डू : हाँ, साड़ी पकड़ो।

बबलू : बस, यही रह गया है अब।

हाए।

हाए।

हाए।

हाए हो गया।

हाँ।

[हिचकिचाते हुए] क्या खाओगी?

आलू पैटीज़।

स्वीटी : यही बोले थे ना हम?

तो मंगाओ।

[आवाज़ देता है]

[हिचकिचाते हुए] चार आलू पैटीज़,

और चार नींबू सोडा।

इधर दो ही आलू पैटीज़ देना, और एक नींबू सोडा।

गुड्डू : हाँ।

तू बैठ ना उधर, खाली टेबल पे।

बब...

ब... बबलू।

जा... जा रहे हैं।

ज्यादा फैन्टम नहीं बनिए।

-अभी थोड़ी देर पहले पिलपिला रहे थे। -अबे, जाओ ना, यार।

[हिचकिचाते हुए] जी, वो...

[चाबियों की खड़खड़ाहट]

आप कुछ खाएँगी? कुछ ऑर्डर करें?

आप भी ज़्यादा फैन्टम ना बनें।

शांति से बैठे रहिए।

हम आपके साथ डेट पर नहीं आए हैं।

[ज़ोर से लाकर रखता है]

और आपका क्या ऑर्डर है, जी?

हमारे लिए सिर्फ़ एक गिलास पानी,

और मैडम के लिए कुछ नहीं, क्योंकि वो जब डेट पे आएँगी, तभी खा

बबलू : चलो जाओ।

[धीमी धुन बजती है]

[फ़िल्म में आदमी] लड़का क्या होता है, पता है?

बकरा। खिला-पिलाके मोटा करते हैं, एक दिन...

किसके साथ जा रही होगी, बे, स्वीटी डेट पे?

माँ चोद दें क्या?

[जीभ चटकाते हुए] कहाँ, मुन्ना भैया?

मिर्ज़ापुर में किसकी हिम्मत है जो स्वीटी भाभी के साथ डे??

लीजिए।

मुन्ना : हाँ, वो भी है।

लेकिन स्वीटी दिल बहुत दुखाती है, यार।

भैयाजी, आप भी कहाँ प्यार-श्यार के चक्कर में पड़े हैं।

ठोको, पीटो, आगे बढ़ो। [हँसता है]

[फ़िल्म में आदमी] उस गली से जाते ही नहीं हैं, जहाँ कुछ मिले

तुम्हारा भोसड़ी के, दिमाग हिल गया है क्या?

एक कान पहले ही उड़ गया है, दूसरा हम उड़ा देंगे।

[फ़िल्म में आदमी 2] बहुत उलझाते हो, यार, तुम।

जिंदगी में किसी के बारे में दिल से हम कभी सोचेंगे कि नहीं

[धीमी धुन बजती है]

पियो।

[पीने की आवाज़]

धम से कैसे बुला लिए?

क्यों?

अच्छा नहीं लगा?

हम तो ऐसी ही तुमको आगे भी बुला लेंगे।

सोच लो।

सोच लिए।

[ज़ोर से रखता है]

हम्म।

महादेवी जी?

अरे, हम तो बहुत बड़े फैन हैं इनके।

नहीं।

देखिए, आप कोई गलतफ़हमी नहीं रखिएगा,

हम सच में बहुत बड़े फैन हैं इनके। हम कोई लाइन नहीं मार रहे ?

कम्पाउन्डर : मुन्ना भैया, हम सोचे थे उनको मारेंगे।

आप पे हाथ छोड़े थे साले।

अबे, मन तो हमारा भी था, बे कम्पाउन्डर।

लेकिन कल को फिर व्यापार भी हमें ही देखना है।

जब चाहेंगे दोनों को...

ललित : वो तो है, मुन्ना भैया।

पूरा एंपायर साला आप ही का ही तो है। [हँसता है]

[आह भरते हुए] हाँ, है तो सही।

हम भी उसी का इंतजार कर रहे हैं।

आज नहीं तो कल।

आप कहें तो जल्दी करा दें, मुन्ना भैया।

हम्म?

आपके लिए तो हम कालीन भैया को भी... [जीभ चटकाता है]

-क्या बोले, बे, तुम? -गलती हो गई, मुन्ना भैया।

[चीखकर] क्या बोले तुम?

गलती से मुँह से निकल गया, मुन्ना भैया।

मादरचोद, हमारे बाप को हाथ लगाओगे तुम?

काटके फिंकवा देंगे।

हम लौंडे हैं उनके, कुछ भी बोल सकते हैं,

[चिल्लाते हुए] तुम नहीं!

पंकज : भैयाजी।

[हिचकिचाते हुए] भैयाजी, जाने दीजिए।

दारू पीके जोश में बोल गया।

भैयाजी, दोनों उन लौंडों को यहीं बुला लें।

थोड़ा मजा लिया जाए।

बबलू : [कविता कहते हुए] ठंडा चंदन इन्हें लगातीं,

इनका भोग हमें दे जातीं,

फिर भी कुछ नहीं बोले हैं, माँ के ठाकुर जी भोले हैं।

आप जानती हैं, ये महादेवी जी की पहली कविता थी।

और ये उन्होंने तब लिखी थीं जब वो सिर्फ़ छह बरस की थीं।

लड़का : [पटककर रखता है] ये लीजिए।

ये क्या है?

फालतू पैटीज़ काहे लगाए हो?

दिन में लिए थे ना।

फिर भाग गए थे बिना पैसा दिए।

लड़का : जोड़ दिए।

[झेंपता हुआ हँसता है]

[हिचकिचाते हुए] गलत... गलतफ़हमी हो गया है।

हम निपटाके आते हैं।

क्या, बे छोटू? हाँ?

पैसा लोगे हमसे?

जानते हो हम कौन हैं?

जानने में क्या रखा है?

आप जानते हैं हम कौन हैं?

फिर?

और वैसे भी, 50 रूपये देने में आपकी इतनी फट रही है,

तो पक्का आप कोई झंडू ही होंगे।

-[गुस्से में] साले, देंगे... -[धीमे से] क्या कर रहे हैं? क्या ह??

गुड्डू : बिल दिया है साला।

ये लो।

और टिप?

-साला! -लड़का : अरे, 10 प्रतिशत रेट है।

और ऊपर से, आप तो कुछ ऑर्डर भी नहीं किए।

टेबल और घेर लिए।

बबलू : [आह भरते हुए] जी।

क्या हो गया था?

गुड्डू : कुछ नहीं। निपटा दिए।

टिप भी दे दिए।

अगली बार पिक्चर देखने चलें, स्वीटी?

ढाई घंटे की होती है।

ज्यादा वक्त मिल जाएगा।

सलमान की लगेगी, तो चलेंगे।

शिल्पी में दिखाएँगे, बहुत बढ़िया हॉल है।

गुड्डू : हेलो?

मुन्ना भैया?

हाँ।

हाँ।

मुन्ना भैया बुलाए हैं।

पंकज : भक साला।

पिक्चर में मजा नहीं आ रहा है।

मुन्ना : हम्म।

[दरवाज़ा खुलता है]

मुन्ना : आओ, महारथी।

आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ।

[गला साफ़ करता है]

आओ।

-वो क्या गिफ्ट है हमारे लिए? -[बगल से कोई हँसता है]

अरे, इतना घबरा काहे रहे हो, भाई?

अरे, खुद चुने हैं तुम लोगों को।

सोचा थोड़ा कंफर्टेबल फील करा दें।

ललित,

दोनों भैया के लिए एक बढ़िया सा घूंट बनाओ।

बबलू : जी, हम दारू नहीं पीते हैं।

गुड्डू : हम भी नहीं।

गुरु, दारू साथ पीने वाले वफ़ादार होते हैं।

तुम वफ़ादार तो हो ना, बे?

हम्म?

हो कि नहीं? अरे, हो कि नहीं?

[हँसता है]

ठंड रखो, यार।

हम्म।

भई, सुने हैं, तुम बॉडीबिल्डर बनना चाहते हो?

जी, भैयाजी। कोशिश कर रहे हैं।

एक बात बताएँ, गुरु, बुरा मत मानना।

बॉडी कमजोर है तुम्हारी।

मुन्ना : कैसे करोगे?

हम खाना बढ़ाएँगे।

वो... इसलिए आपसे वो अंडे बोले थे उस दिन।

अबे, तो सिर्फ़ अंडों से थोड़ी ना होगा।

तुम क्या बता रहे थे, बे कम्पाउन्डर, बताओ वो।

हाँ, वो, बॉडी बनाने के लिए,

दवाई आती है।

ये जो तुम्हारा मसल है, एकदम सॉलिड हो जाएगा, पत्थर की तरह।

हाँ, वो इंटरनेट पे तो पढ़े हैं हम।

है हमारे पास।

दें तुमको? मुफ़्त में।

गुड्डू भैया।

अरे, रुको, यार।

तो, भैया, हम कह रहे हैं, सुभ काम में देर किस बात की?

वो जो गोली-वोली देनी है, दे दो आज ही।

कम्पाउन्डर : हाँ। है हमारे पास। चलिए।

ये लो।

कम्पाउन्डर : दो लेनी है रोज।

पर ध्यान रहे, भैया।

बहुत भूख लगेगी।

हाँ। और ऐसे दिल करेगा ना कि लपक के ले लें किसी की।

मुन्ना : ठीक है, तो ध्यान रखना।

[मुन्ना हँसता है]

कम्पाउन्डर : बाद में और भी देंगे।

कड़क वाली।

सुरू कीजिए आप इससे।

गुड्डू : ये सब तो ठीक है, कम्पाउन्डर भैया।

हम इंटरनेट पे पढ़े हैं, बॉडीबिल्डिंग के लिए कमाल की चीज ह

माँ का दूध।

[दोनों हँसते हैं]

मतलब, अगर उसका कुछ इंतज़ाम...

गुड्डू : नहीं?

[दोनों हँसते हैं]

नहीं, पढ़े हैं।

पगला गए हो क्या, भैया? हैं?

चलिए, जाइए अभी।

रमाकांत : डिंपी!

डिंपी : जी, पापा।

वो लोग आ गए क्या?

हाँ, आ गए, पापा।

चाय बना दो, बेटा।

जी।

माफ़ कीजिए, कचहरी में थोड़ी देर हो गई।

हम अभी हाथ-मुँह धोके वापस आते हैं।

आप आराम से बताइएगा फिर क्या कहना था।

हमें भी आपसे केस के बारे में और जानकारी लेनी है।

पानी लीजिए।

हम वकील साब से नज़रें नहीं मिला पाए।

[गंभीर धुन बजती है]

[कदमों की आहट]

आप लोग?

हम लोग।

रमाकांत जी के लड़के हैं।

[हिचकिचाते हुए] हम तो केस वापस ही लेने आए हैं।

अच्छा। तो चिट्ठी रखिए और निकलिए।

वकील साब, हम चलते हैं।

दूल्हे का पिता : ये चिट्ठी छोड़े जा रहे हैं।

पढ़ लीजिएगा।

अरे, चिट्ठी तो हम पढ़ लेंगे, लेकिन आप बैठिए तो सही।

नहीं, चलते हैं।

अरे।

तुम लोग कुछ बोले उनको?

हम काहे बोलेंगे?

मम्मी! ज़रा हटो।

गुड्डू : मम्मी!

बबलू : बताइए तो सही, अच्छी लगी कि नहीं।

बहुत अच्छी है।

कितने में लाए?

मम्मी, गिफ्ट दिए हैं। अभी गिफ्ट के लिए कोई पूछता है क्या ??

फिर भी।

गुड्डू : अरे, मिडल क्लास वालों जैसा दाम काहे पूछ रही हो?

कालीन भैया पैसे दिए थे तो...

[ऊँची आवाज़ में] अरे, डिंपी!

वो तो मोटरसाइकल भी इतनी जबरदस्त दिए,

तभी तो पूजा किए हम उसकी। [हँसती है]

आप बुलाए, भैया?

हाँ, हम बुलाए।

तेरे लिए लाए हैं।

हम पापा के साइड पर हैं। ये सब नहीं लेंगे।

-गुड्डू : हैं? -[गंभीर धुन बजती है]

साइड मतलब?

साइड तो हो ही गई है इस घर में, भैया।

और जानते हैं, वो जो परिवार नीचे आया था, केस वापस ले लिए।

और अब पापा का फ़ोन ही नहीं उठा रहे।

[धीरे से हँसता है]

पापा के लिए कुर्ता-पजामा लाए हैं।

बरसों से कुछ लिए नहीं अपने लिए।

तो, हम ले आए।

अरे, वाह।

गुड्डू : सही है?

हमको तो शक है कि वो ये लेंगे भी।

तुम्हीं दे देना पापा को।

ठीक है।

चलते हैं। रसोई में दाल जल रही है हमारी।

थैंक्यू।

वसुधा : बहुत बढ़िया।

गुड्डू भैया, ये सब काहे ले रहे हैं आप?

कोशिश कर रहे हैं, बे।

देखते हैं।

[हिचकिचाते हुए] स...

साइड... साइड मतलब क्या है?

क्या हो क्या... हो क्या रहा है यहाँ पे? हैं?

तुम जो बोले आज पापा के बारे में...

गलती से निकल गया, मुन्ना भैया।

सॉरी।

वक्त आने पे, सही में कर जाओगे?

कर जाएँगे, मुन्ना भैया।

चाणक्य नीति विद चाणक्य सूत्र

स्वीटी : डिंपी बता रही थी, गुड्डू-बबलू कालीन भैया के यहाँ ?

कॉलेज भी छोड़ दिए हैं।

अच्छा?

दोनों भाई?

हम्म।

हमको लगता है ठीक ही किए।

जो आदमी शहर में ताकतवर है, उनके लिए काम करने में कोई हर्ज ?

क्यों?

पहले से राय बनाके सोचने से क्या फ़ायदा, दीदी?

एक का सही, दूसरे का गलत। और एक का गलत, दूसरे का सही भी तो हो

[मशीनें चलने की आवाज़]

-कालीन भैया? -हैं?

ये सफेद व्यापार में कितना... मतलब, मुनाफ़ा होता होगा?

दाल-रोटी चल जाती है, गुड्डू।

बहुत जल्दी है तुमको मुनाफ़ा जानने की।

ऐसा नहीं है।

पहले योग्य बनो।

ठीक है?

चलो।

गुड्डू : कहे थे मज़ा आएगा। मज़ा आ रहा है।

[चिड़ियों की चहचहाहट]

सप्लायर माल देने के लिए बड़ी

गुज़ारिश करने को तैयार हुआ है।

रेशम ज़्यादा दे देगा,

लेकिन...

...दाम बढ़ा देगा।

माल ज़्यादा ले रहे हैं तो,

दाम तो कम होना चाहिए ना?

मियाँ, अपने पापा से बात करो।

कितना बढ़ाए हैं?

लाला : पंद्रह टका।

जी।

पापा, रेशम तो मिल जाएगा,

लेकिन 25 टका से दाम बढ़ा दिए हैं लाला।

पापा, हम बहुत मुश्किल से समझाए हैं लाला को।

मान नहीं रहे थे बिल्कुल।

आप बस... आप दाम में ना पड़िए। आप बस ओके करिए।

ठीक है।

तो फिर हम सौदा पक्का कर रहे हैं।

ठीक है।

[सेल फ़ोन बजता है]

बोलिए, त्रिपाठी जी।

नहीं, नहीं, नहीं। पच्चीस टका से कम नहीं होगा।

अब हम जेब से डालके व्यापार थोड़े ही करेंगे।

गुंजाइश होती तो कर देते हम। हम्म।

बड़े हरामी हो, बेटा।

[हँसता है]

कालीन भैया : देख रहे हो ये?

कट्टों का व्यापार बढ़ा दिए,

तो इसमें भी शामिल कर लेंगे।

समझ लो इन्सेंटिव दे रहे हैं।

आप हमें अभी शामिल नहीं कर रहे हैं लेकिन फिर भी यहाँ लाए ह??

कोई तो कारण होगा, कालीन भैया?

बुद्धि बहुत तेज है तुम्हारी।

धीरज रखो, बताएँगे।

मकबूल।

कभी मारे हो किसी को?

हाँ, हाँ, हम उस दिन मारे थे घर पे। खींच-खींचके मुक्के दिए थ

जान से।

जान से मारे हो किसी को?

[रहस्यमय धुन बजती है]

अब आ गया है तुम्हारा वक्त।

बंदूक रखे हो ना?

[काँपती आवाज़ में] भैयाजी।

चुप।

तुमसे कुछ पूछे?

ट्रेनिंग चल रहा है।

सुरू करो।

मकबूल : मारो।

मारो।

मारो, मियाँ।

[आदमी चिल्लाता है]

-[गोली चलती है] -[चिल्लाता है]

[कराहता है]

आदमी : [कराहते हुए] भैयाजी।

जाने दीजिए ना।

हम आपका क्या बिगाड़े हैं?

[रोते हुए] जाने... जाने दीजिए ना।

गोली या तो सीने पे मारो, या सर पे।

[काँपती आवाज़ में] जाने... जाने दीजिए ना, भई...

[रोते हुए] पैर पड़ते हैं आपके।

-[गोली चलती है] -[कराहता है]

[रोते हुए] मादरचोद!

[ज़ोर से कराहता है]

[उबकाई आती है]

दिल दाईं तरफ नहीं, बाईं तरफ होता है।

[कराहता है]

आदमी : [कराहते हुए] भैंण के लौड़ों!

-[गोलियाँ चलती हैं] -[कराहता है]

[उबकाई आती है]

[उबकाई आती है]

[कराहता है]

[गहरी साँसें लेता है]

[गोली चलती है]

[उल्टी करता है]

[खाली बंदूक की आवाज़]

[उल्टी करता है]

[खाँसता है]

मकबूल : आज तुम दोनों लौंडे से मर्द बन गए हो।

नथ उतर गई तुम दोनों की।

[उल्टी करता है]

मकबूल : ठोकने के नियम होते हैं।

उसके बारे में जितना कम जानोगे,

ठोकना उतना ही आसान होगा।

वरना...

...उंगलियाँ ट्रिगर से हिल जाती हैं।

चलो, देखते हैं। अब तुम ये कालीन शहर से पार करा पाते हो या न

मकबूल : और हाँ,

हमारा या कालीन भैया का नाम नहीं लेना।

अबे, सुरू में तो दिमाग काम नहीं किया था हमारा।

फिर जब ठोक दिए ना,

तो आसान लगा।

[गहन धुन बजती है]

गुड्डू : ए, बबलुआ।

इतना सांत काहे बैठे हो?

[खटखट]

हमारी तो फट गई थी, भैया, मारने में।

अब जाने किसी की जान लेना आसान बात नहीं है।

ठीक है।

अब से हम बंदूक चलाएँगे, और तुम दिमाग। बस खतम बात।

[गहन धुन बजती है]

[हॉर्न बजता है]

[हॉर्न बजता है]

[हॉर्न बजता है]

[गुस्से में] अबे, मादरचोद!

[ट्रक रुकता है]

बबलू।

गुड्डू : छुपा, छुपा।

[खटखटाते हुए] क्या ले जा रहे हो ट्रक में?

कालीन है, भैया।

नीचे उतरो और दिखाओ।

सर, कालीन है बस।

नीचे उतरो और दिखाओ।

आ रहे हैं।

अफ़सर : जल्दी करो।

[खटखटाता है]

[नाटकीय धुन बजती है]

[धीरे से] बहनचोद!

[खटखटाता है]

अफ़सर : अरे, खोलिए!

[फुसफुसाते हुए] अरे, यार!

[खटखटाता है]

अफ़सर : [खटखटाते हुए] अरे, खोलो भी!

[खटखटाता है]

[ज़ोर से] खोल काहे नहीं रहे हैं?

इतना देर काहे लगा रहे हो, भाई?

खोलिए!

[हाँफता है]

अफ़सर : अरे, खोलो भी!

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

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