All language subtitles for Mirzapur - 01x02 - Gooda.AMZN.WEB-DL.DDP5.1.H.264-NG.Hindi.C.orig.Addic7ed.com

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Original subtitles

[हल्की धुन बजती है]

त्रिपाठी

[दरवाज़ा खुलता है]

रुको।

[दरवाज़ा बंद होकर कुंडी लगती है]

[गहन धुन बजती है]

इधर आओ।

तुम्हें पता था मुन्ना हमारे लड़के हैं?

जी, भैयाजी। और हमारी फटी भी थी।

फिर?

भैयाजी, अगर आप हमारी जगह होते, तो शायद आप भी वही करते जो हम

अब, कोई हमारे घर में घुसके हमारे बाप को बेइज्जत करेगा,

हमारी बहन के साथ बदतमीजी करेगा, तो मारेंगे नहीं हम?

ये दोबारा करेंगे, हम दोबारा मारेंगे।

[गुस्से में] साले, हमको मारोगे?

[गहन धुन बजती है]

-मकबूल : ए! -[हकलाते हुए] भैयाजी!

कालीन भैया : मकबूल।

[टीवी पर गुर्राने की आवाज़]

[गुस्से से फुफकारता है]

मिर्ज़ापुर की सारी बंदूकें हमारे काबू में हैं।

बंदूक सिर्फ़ उसके काबू में रहती है, मुन्ना भैया, जो उसको ??

जैसे हमारे घर में थी।

ए, छोड़ो उसे।

कालीन भैया : मुन्ना।

हर बार बचा पाओगे वकील साहब को?

मुन्ना अगली बार आपके निवास पर पहुँचे, और आप नहीं हुए?

रिस्क है।

अगली बार मुन्ना भैया घर आए, जिंदा वापिस ही नहीं लौटे तो?

रिस्क तो वहाँ भी है, कालीन भैया।

क्या करते हो?

[हकलाते हुए] जी, हम पढ़ते हैं।

मुन्ना भैया के कॉलेज में ही पढ़ते हैं।

आगे?

हम मिस्टर पूर्वांचल की तैयारी कर रहे हैं।

और आप?

गुड्डू : ये कॉलेज टॉपर हैं, अकाउन्ट्स के।

एकदम आईएएस बनने लायक हैं।

[हकलाते हुए] नहीं, नहीं, भैयाजी, वो... हम... हम आगे का अभी कुछ स?

सायद बैंक पीओ का फॉर्म भरेंगे हम।

हमारे लिए काम करोगे?

[रहस्यमय धुन बजती है]

भैयाजी...

देखो, बैंक की नौकरी करके दूसरों का पैसा गिनोगे।

हमारी नौकरी करके खुद का रुपया।

पाँच मिनट देते हैं, सोच लो।

मिर्ज़ापुर

[थीम म्यूज़िक बजता है]

[चाबियों की खनखनाहट]

[गहन धुन बजती है]

वसुधा : अरे! ये क्या?

कहाँ जा... कहाँ जा रहे हैं आप?

सुने नहीं हम क्या बोले आपसे।

करेंगे क्या आप?

आप उन दोनों की चिंता के मारे जा रहे हैं ना?

फिर हम तो यहाँ बस बैठ जाएँगे ना आप तीनों की चिंता लेके? मर

[काँपती आवाज़ में] गलत कह रहे हैं, तो आप कहिए।

दो घंटे हो गए उन दोनों को गए हुए।

एक फोन भी नहीं आया। हम जा रहे हैं।

आ जाएगा, पापा। लेकिन आप कहीं नहीं जाएँगे। आपको हमारी कसम?

[गहरी साँस छोड़ता है]

क्या सोचे, बबलू, हाँ? हम्म?

[गहरी साँस छोड़ता है]

ये साला एक ऐसा फैसला है, जिसको हाँ करने में भी रिस्क है और

[दरवाज़ा खुलता है]

भैयाजी?

आदमी : जी?

उबले अंडे ले आओ। और थाली भरके लाना।

आदमी : हम्म।

[दरवाज़ा बंद होता है]

[धीरे से] रिस्क क्या है, यार?

मुन्ना भैया को देखे हो,

कैसे माहौल बनाके रहते हैं?

साला, वैसा ही माहौल हमारा भी बनेगा।

कोई पैसा माँगने आगे से आ नहीं पाएगा।

और लोग, "गुड्डू भैया, बबलू भैया," बोलेंगे, वो अलग।

बबलू, क्या सोच रहे हो, यार?

अबे, कोई रिस्क नहीं है।

हम कालीन भैया के लड़के की कुटाई किए हैं

और वो हमको काम दे रहे हैं।

चूतिया नहीं हैं वो।

हाँ, तो कोई फायदा देखे होंगे हममें ना, तभी तो दे रहे हैं।

और जिस समय वो फायदा खतम हो गया, तब?

जिस दिन हम इस लाइन में घुस गए ना,

दोबारा पूरी जिंदगी इसके बाहर कभी नहीं निकल पाएँगे।

अबे तो, बाहर कौन सा बड़ा उखाड़ लिए हैं अभी हम?

दूसरा का काजू खा रहे हैं भोसड़ी वाले।

कर दो, बे। ले लो ऑफर।

[गहरी साँस लेता है]

लेकिन इस फैसले से एक बात तो होगी, गुड्डू भैया।

पापा के सर से ये तलवार हट जाएगी और अपना परिवार ना, सुरक्ष??

और ये मुन्ना दोबारा कोई चूतियापा नहीं कर पाएँगे।

बाऊजी : बहुत मजबूत नींव डाले हैं तुम्हारे लिए।

संभालके नहीं रखोगे, तो घर गिर जाएगा।

कालीन भैया : और उसकी बहन के साथ काहे बदतमीजी किए तुम?

बेटा, ये छोटे-मोटे गुंडों का काम है।

हमको देखे हो कभी किसी औरत के साथ बेअदबी से पेस आते हुए?

याद रखना, औरत की खुसी हमेसा आदमी से ऊपर होती है।

[बीना हँसती है]

सब्जी?

मंजूर है, भैयाजी।

दोनों को?

आएँगे तो दोनों साथ आएँगे, वरना कोई नहीं।

आओ, खाना खाओ।

आप लोग के साथ?

परिवार तो साथ में ही खाना खाता है ना?

[रहस्यमय धुन बजती है]

आ जाओ, बैठो।

उठाओ थाली।

तुम्हारे लिए है।

सहर तुम्हारे नीचे काम करेगा। और तुम हमारे नीचे।

अरे, राजा बाबू!

खाना लाओ इनके लिए।

[बातचीत की आवाज़ बंद]

जी, बस।

और लीजिए ना।

मेहमान हैं आप हमारे।

घर जाके अपने पिताजी से बात कर लेना।

[हिचकते हुए] भैयाजी, एक दरख्वास्त थी।

वो, साइकिल पे बैठ-बैठके हमारे चू...

हमारे चूतड़ छिल गए हैं।

एक लूना मिल जाती...

कालीन भैया : [गला साफ़ करते हुए] तुम्हारे लिए है ये।

इसपे चलोगे तो लोग कहेंगे कालीन भैया के लड़के जा रहे हैं।

[गहन धुन बजती है]

कालीन भैया द किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर

[इंजन चालू होता है]

बबलू : अंदर रखिए इनको। गुड्डू : हाँ।

बड़े लोग की बात ही अलग होती है।

माँगे लूना, दे दी बुलेट।

साथ में खाना भी खिलाए। हैं? और ये, साली बंदूकें।

अबे, कितनी गोलियाँ पड़ती होंगी? हैं?

चलाके देखें? हैं?

-[गोलियाँ चलती हैं] -[आदमी कराहता है]

बबलू : [चिल्लाकर] अरे, साला! क्या कर रहे हैं, पगला गए हैं क्य

कान का पर्दा फाड़ेंगे?

गुड्डू : [हँसते हुए] अबे, लोगों की गांड फट रही है, तुम्हें क?

गुड्डू भैया, ये क्या कर रहे हैं?

अरे, गुड्डू भैया, लोग बाहर आ जाएँगे, गुड्डू भैया।

[चिल्लाते हुए] क्या कर रहे हैं?

अबे, बवाल चीज है, बे। साला सिस्टम हिल जाता है।

अपनी पकड़ो।

आप अपनी वाली अंदर रखिए, पीछे बैठिए।

[हकलाते हुए] अरे, गु... गुड्डू... गुड्डू भैया, बंदूकें हैं।

खेलने की चीज नहीं। पीछे बैठिए।

अबे, हमको तो खेलने में मजा आ रहा है।

[वीडियो गेम की आवाज़]

[वीडियो गेम में गोलियाँ चलती हैं]

[वीडियो गेम में आदमी] पटरी पर। तब तक ज़मीन पर रहो जब तक रेल

अरे, इसको बंद करो, तब तो बात होगी।

कल मिर्ज़ापुर तुम्हारा होगा, मुन्ना।

चाहते हो ना,

वो जीप पे नेमप्लेट लगे,

"मुन्ना भैया, किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर।"

बेटा, जब शहर चलाओगे ना, तो ट्रिगर खुद नहीं दबाओगे।

उसके लिए आदमी चाहिए,

जो तुम्हारे लिए काम करें,

और ये दोनों करेंगे।

देखे, उन्हें पता था तुम हमारे सुपुत्र हो।

फिर भी डरे तुमसे?

गूदा है ना उनकी गांड में।

[चिल्लाते हुए] उनका गूदा दिख रहा है आपको, और हमारा जो बेइज?

हमें बदला लेना है उनसे।

अरे, मुन्ना, तो इससे बड़ा बदला क्या होगा,

जिन्होंने तुम्हारी बेइज़्ज़ती की,

अब आने वाले सालों में, तुम्हारे लिए तुम्हारे नीचे काम कर?

आज हम इन्हें वफ़ादार बनाएँगे,

तो ये कल तुम्हारे लिए वफ़ादार रहेंगे।

मकबूल की तरह।

उसकी जितनी बाऊजी के लिए थी, उससे कहीं ज़्यादा वफ़ादारी ह?

मकबूल परिवार का है, पापा।

[धीमी आवाज़ में] काहे का परिवार, बेटा।

उसको देखे हो कभी साथ में खाना खाते हुए?

लेकिन आप पूछते तो हर बार ही हैं।

वो इसलिए पूछ लेते हैं कि हमको पता है वो बराबरी में नहीं ब??

हम पूछके उसका मान बढ़ाते हैं, और वो ना करके हमारा।

[चिल्लाते हुए] तो फिर इन दोनों को काहे बिठा लिए?

[आह भरते हुए] अरे...

बिठाए नहीं हैं, थोड़ी सी इज़्ज़त दिए हैं।

जब आदमी को इज़्ज़त की उम्मीद ना हो और मिल जाए ना,

तो उसकी वफ़ादारी दस गुना बढ़ जाती है।

याद रखो, मुन्ना, ये लोग परिवार नहीं बनते,

सिर्फ़ वफ़ादार बनते हैं।

मकबूल नहीं है हमारा परिवार। तुम हो।

तुम।

खाओ। हम्म?

[हल्की धुन बजती है]

परिवार हैं इसीलिए तो विरासत मिलने का इन्तजार कर रहे हैं??

[मोटरसाइकल के इंजन की घरघराहट]

देख रहे हो?

इसी फरक की तो बात करते हैं हम।

पापा, हम कल रात फ़ोन किए तो थे कि सब ठीक है।

ऊसा जी, शाहिद भाई, दो मिनट का वक्त देंगे?

शाहिद : जी।

एक फोन कर दिया तो सब ठीक हो गया?

[ऊँची आवाज़ में] क्या हुआ अखण्डानन्द के यहाँ?

पापा, हम सब ठीक कर दिए हैं।

सब ठीक कर दिए हैं?

मतलब?

मतलब ये कि अब कालीन भैया के यहाँ से हमारे लिए कोई दिक्कत ??

हम उनको जॉइन कर लिए हैं, पापा, अभी।

खुद कालीन भैया आगे से ऑफर दिए...

[चिल्लाते हुए] पगला गए हो क्या?

रमाकांत पंडित के लड़के एक गुंडे के लिए काम करेंगे?

कालीन भैया गुंडा नहीं हैं, डॉन हैं, पापा।

चुप रहो! वो जो भी है, हमें इसकी परवाह नहीं है।

हमें तो परवाह है ना, पापा।

अब, एक रात हमारे घर पे टाइम पे ना आने से आपको इतनी चिंता हो

वैसे ही हमें भी आपकी, मम्मी की और डिंपी की जिंदगी भर चिंत??

हर सुबह, हर साम, तब तक जब तक आप लोग सही-सलामत घर नहीं लौट आत?

अब जो कुछ भी हो गया, पापा, उसका कुछ कर नहीं सकते हैं।

उसको जाने दीजिए।

और वैसे भी, अब कालीन भैया हमारी साईड हैं।

कोई दिक्कत नहीं आएगी, पापा।

ये बताने के लिए यहाँ पर आए हो?

नहीं।

[हिचकते हुए] हम ये कहने के लिए आए हैं कि

वो केस जाने दीजिए, पापा।

तो मुन्ना जो रात को हमारे यहाँ कहने के लिए आए थे,

वही बात तुम दोनों यहाँ कचहरी में बताने के लिए आए हो।

सरम नहीं आती अपने बाप से इस तरह बात करते हुए?

तुम दोनों हमारे लौंडे हो ही नहीं सकते।

हमको तो शक हो गया इस बात पर।

उठो। निकलो यहाँ से।

[चिल्लाते हुए] और किसी में दम है ना,

तो हमें ये केस लेने से रोकके बताए।

सक्सेस - आईएएस कोचिंग क्लास्सेस - लखनऊ

ये तो मानने से रहे। अब आगे क्या करेंगे, हाँ?

बबलू : अब पापा नहीं माने तो क्या हुआ। हम कुछ सोचे हैं ना।

चलिए बैठिए, बताते हैं।

[इंजन चालू होता है]

-[धीमी सी धुन बजती है] -[लड़की की आहें]

कहानीकार : और फिर राज ने सरिता को पलंग पे पटक दिया।

उसकी सलवार तो पहले ही उतर चुकी थी।

राज ने सरिता को दो पल घूरा और फिर कस के बेल्ट मारी... सटाक!

[लड़की कराहती है]

दर्द की टीस उठी और लाल निशान पड़ गया।

फिर राज ने सरिता के बालों को कसके पकड़ा और अपने होंठ उसके ??

मानो होठों के चूमे जाने का आनंद और बालों के

खींचे जाने का दर्द

सरिता को एक अलग ही दुनिया में ले गया हो।

राज ने सरिता को हुक्म दिया, "सहलाओ खुद को

"और मुझे देखने दो।"

सुन, गोलू को देखा?

[आहें भरती है]

ऐसे।

-और ज़ोर से। -[आह भरती है]

सरिता की उँगलियों पर काली नेल पॉलिश राज को बहुत ही उत्ते?

राज की साँसें तेज़ हो गईं।

और अब किसी भी पल सरिता को चरमसुख मिलने वाला था।

-सरिता चीखी। -[ज़ोर से] आह!

[हाँफते हुए] आह! उफ़!

गोलू।

[धीमी आवाज़ में पढ़ रही है]

[फुसफुसाते हुए] तू भी कहाँ कोने में छुपके पढ़ाई करती है, ग?

देख, कितना पसीना आ रहा है।

पूरी दुनिया की जानकारी मिल गई तुझको?

हाँ, दीदी। स्वर्ग की तो मिल ही गई।

पता है,

कल मुन्ना डिंपी के घर में घुसके क्या बवाल कर दिए हैं?

मुन्ना को और कुछ करना आता ही कहाँ है।

अच्छा, दीदी, वो किताब दे दो ना, प्लीज़। विज्ञापन वाली।

[लंबी साँस लेती है]

इतनी किताबें पढ़ोगी ना, तो चश्मे का नंबर डबल हो जाएगा तुम्

[रहस्यमय धुन बजती है]

[गहन धुन बजती है]

भैयाजी, कल क्या किए उन लड़कों का? गांड मारे कि नहीं?

सुनो भोसड़ी के।

सुबह-सुबह ना मूड तो खराब करो मत, ठीक है?

आज अगर किसी ने भी कुछ भी पूछा ना,

तो खाल उधड़वाके ना ढोलक बना देंगे,

और बजाएँगे बहुत जोर से।

[हाँफता है]

डॉ. रंधीर सिंह एच.ओ.डी. गणित

अरे, मुन्ना, आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ।

कहिए।

[आह भरता है]

वो, दीपू सिंह आए थे।

हाँ, अभी मिले बाहर।

नाम वापिस ले लिए हैं।

-अच्छा? -हम्म।

चलिए, अच्छा ही है। हमारा प्रतियोगी कम हुआ।

आप काहे इतना टेंसन ले रहे हैं?

नहीं, वो अपनी इज़्ज़त भी तो कोई चीज़ होती है ना, भाई।

हमको अगले साल भी तो चुनाव-संयोजक बनना है।

चुनाव सही हो या ना हो, लेकिन दिखना चाहिए कि सही है।

प्रजातंत्र इसी का नाम है, बेटा।

तो, सोचिए जो सोचना है।

हम तो वो सोचेंगे, लेकिन एक सलाह है, भाई।

कि अगर नेता बनना है ना, तो गुंडे पालो, गुंडे बनो नहीं।

और, कल से, कॉलेज कैंपस में मार-पीट बंद।

काहे के लिए?

[गहन धुन बजती है]

ठीक है, मास्टर साहब।

पक्का ना?

अरे, माँ कसम, मास्टर साहब।

चलिए, अभी चलते हैं।

माँ तो तुमरी कब की मर चुकी है।

देखो, चस्मा अच्छा लग रहा है तुम्हारे ऊपर में। हम सच बता र??

कुमार गौरव जैसे लगते हो।

अच्छा लग रहा है।

धन्यवाद। बचपन से पहन रहे हैं।

क्या बोले, मास्टर साहब?

कल से मार-पीट बंद।

अच्छा।

मतलब, आज तो मार सकते हैं ना?

[कराहता है]

अबे, स्वीटी!

मुन्ना : स्वीटी!

बोलो, मुन्ना।

कल तुम्हारे पापा के हाथ मटन भिजवाए थे।

कैसा लगा?

हम शाकाहारी हैं।

अच्छा? कब से?

जब से तुम मटन भिजवाए ना, तब से हो गए।

अच्छा, सुनो ना। नई पिक्चर लगी है "ख्वाबों के परिंदे," चलो??

नहीं!

पिक्चर जाओगे, तभी इतना मेकअप करके आए हो?

स्वीटी, अरे, सुनो तो।

स्वीटी, वो शिल्पी टाकीज़ में नई मशीन लगी है पॉपकॉर्न्स क?

वो चाकलेट वाले हैं। बहुत मजा आएगा, चलो ना।

दीदी यहीं सेक्स कर लें तुम्हारे साथ?

फ़ाइनल अजेंडा तो यही है ना तुम्हारा?

गोलू देवी, ऐसा है, छोटी हो, छोटी ही रहो।

बीच में ना बोलो। ठीक है?

वरना कल को जब हमारी साली बनोगी ना, सीधा कर देंगे तुमको।

स्वीटी, प्यार है हमारा।

और वैसे भी, तुम दोनों के बाप रोज आते हैं हमारे घर पे, हाजिर

[हँसता है]

तो उन्हीं को ले जाओ ना पिक्चर दिखाने।

कोने की सीट पकड़ लेना और उनकी गोदी में बैठ जाना।

मुन्ना भैया प्यार से कह रहे हैं, तो बहुत उड़ रही हो?

उठा लेंगे किसी दिन बीच बाज़ार में।

अभी सैंडल से मारेंगे तुमको, हील वाली साइड से।

समझे? और बंदर की तरह मुँह लाल कर देंगे तुम्हारा।

हम तो...

अबे, ओ, तुम्हें बोले हैं ना कम बोला करो।

देंगे वरना एक रपट। भाभी हैं तुम्हारी।

तुमको समझ में नहीं आता है, मुन्ना?

-नहीं, स्वीटी, हम सॉरी... -हमारी तरफ़ से ना है।

[साइकिल की घंटी बजती है]

स्वीटी : रिक्शा।

अरे, स्वीटी...

वो क्या है ना कि लड़की की ना में ही उसकी हाँ होती है। समझे?

हाँ।

[लंबी साँस लेता है] यार कम्पाउन्डर, दवाई की बहुत जरूरत लग ?

तुम्हारी डिस्पेंसरी खुली होगी अभी?

आपके लिए हमेसा खुली है, मुन्ना भैया। चलिए।

जे बात। तुम हो हमारे दोस्त।

अच्छा, भोसड़ी के, तुम्हें कितनी बार बोला है...

-भैया। -...कम बोला करो।

[टीवी पर आदमी] ये साँप अभी तीन फ़ीट लंबा है और इसकी उम्र सि

फिर भी ये सबसे घातक शिकारी माना जाता है।

एक वार और मौत तुरंत।

घने जंगल और उसकी नदियों में...

-बाऊजी, प्रणाम। -साँप के लिए...

बाऊजी : जीते रहो।

इसको देखके रतिशंकर शुक्ला की याद आ गई।

साँप को चाहे जितना भी दूध पिला दो, एक बार दुस्मनी हो गई तो

साँप जितना भी दुस्मन बन जाए,

पर काबू सपेरे के हाथ में ही होता है।

बस, सावधान रहो।

[टीवी पर आदमी] ...और अब हमले के लिए सही मौके की फ़िराक में है।

[पिचकने की आवाज़]

हाँ, भई, हो गया?

हाँ, जी। लाओ।

आ...

अरे, भैया, ये रहने दीजिए आप।

उस्मान मियाँ, तुम तो जानते हो,

हम हक की खाते हैं, हराम की नहीं।

लो। अरे, रखो।

नया माल आ गया?

हम्म।

कोई दिक्कत हो तो बताना।

कालीन भैया पूरा नियंत्रण दिए हैं हमको।

उस्मान : ये लीजिए।

[गला साफ़ करता है]

[मुर्गियों की पक-पक]

शाबाश, मेरे कबूतर। ये हुआ ना हक का।

कुमार डिस्पेंसरी

[नाक से नशा खींचता है]

पुराना दर्द दिमाग पर असर करता है

[गहन धुन बजती है]

कह रहे हैं कबूतरों से पैसा वसूल कर रहे हैं।

बेटा, कहाँ का कबूतर बुलाए हो?

[हिचकिचाते हुए] ये मुकेरी बज़ार का है, पापा।

[फ़ोन पर] पैसा वसूल हो गया?

हाँ, बस, हो ही गया है।

कितना हुआ?

मुन्ना : अह, गिने नहीं हैं, पापा, अभी।

गिनो।

अरे, ब्रिजेश जी!

मुकेरी बज़ार का कौन है कबूतर?

राजन मिश्रा!

राजन : जी... जी, भैयाजी।

हाँ, आप...

हमको चूतिया समझ रखे हो?

-[फ़ोन पर] हम्म? -[गहन धुन बजती है]

सारे कबूतर यहाँ आंगन में खड़े हैं, लाइन लगाके

और तुम कौन सा वसूली कर रहे हो, बेटा?

हाँ?

अरे, झूठ बोलना तो ठीक से सीख जाओ।

[ऊँची आवाज़ में] अब रखो!

हमारा हो गया, गुरु।

हम चलते हैं।

भैयाजी...

पंकज : भैयाजी?

कितना हुआ, ब्रिजेश जी?

भैयाजी, पिछले हफ़्ते से पंद्रह टका कम हुआ है व्यापार।

और झंडू बंदूकें भी ज्यादा हैं इस बार।

ठीक है।

मुन्ना का चुतियापे का क्या करें, मकबूल?

कैसे संभालेंगे व्यापार?

तो दूसरा पैदा कर लीजिए।

हमारा और आपका।

उपजाऊ चल रहे हैं हम अभी।

हाँ, हाँ, ठीक है। हो गया चाय? आप... आप जाइए।

ए, मकबूल।

मुन्ना की सुरक्षा का ध्यान रखो।

वो पुलिसवाले की खबर आई थी रतिशंकर के बारे में।

जी।

-ब्रिजेश जी? -जी, भैयाजी।

वो झंडू बंदूक ठिकाना लगवा दीजिए।

[मशीनें चलने की आवाज़]

बबलू : अरे, गुड्डू भैया।

अंदर रखिए इसे।

[गुड्डू भुनभुनाता है]

बबलू : यहाँ पे भी सुरू हो गए आप?

गुड्डू : अरे, सरीर ना, मेहनत से बनता है, बे।

कल रात कालीन भैया के चक्कर में हमारी वर्जिश रह गई।

ओ। आ रहा है, आ रहा है।

जी, नमस्ते।

नमस्ते।

जो दूल्हा बाबू मरे हैं, उनके परिवार से मिलना था।

आइए।

दूल्हा के मामा : हम लिखाया था एफ़.आइ.आर। दूल्हा हमारा ही भ?

हाँ, तो, मामा जी, लिखाए थे,

तो अब वापस भी आप ही लेंगे।

काहे वापस लेंगे?

इस लौंडे ने गोली चलाई है।

हमारी आँख के सामने।

हम करेंगे पहचान।

अरे, तो हम आप के लिए कर देते हैं ना पहचान इनकी।

इनका नाम मुन्ना त्रिपाठी है।

और ये अखण्डानन्द त्रिपाठी के इकलौते लड़के हैं।

आप बारात बाहर से लेके आए हैं इसलिए आप जानते नहीं हैं कि य??

डॉन है।

कोई भी हो, डरते नहीं हैं हम।

अरे, मामा जी, आप नहीं डर रहे हैं, लेकिन हमको आपके लिए बहुत ??

आप बात नहीं समझ रहे हैं ना हमारी।

[गहन धुन बजती है]

सुनो, मामा जी,

हम अभी जॉइन किए हैं इनको।

और चुल मच रही है हमको बहुत ज्यादा।

अभी तुम्हीं से उद्घाटन करेंगे करियर का, समझे?

एक मिनट, रुक जाइए ना, भैया।

बबलू : ये दे रहे हैं आपको मुआवज़ा।

जो कुछ भी हुआ है, उसको भूल जाइए और बात को यहीं पे खतम करिए ??

नकद काहे रख दिए, बे?

हम बोले थे ना बंदूक से सुल्टाएँगे।

काहे ऑप्सन देना है?

ये सामने वाली पार्टी अब उलझन में है।

तो, अंकल जी, सब कुछ आपके सामने है।

मामला दोनों तरीके से सुल्टाया जा सकता है।

अब मर्ज़ी आपकी है।

[रहस्यमय धुन बजती है]

ये पैसा उठाइए और जाइए यहाँ से।

फिर...

[लोग चीखते हैं]

-[चीखते हुए] जीजाजी! -चुप!

[रोते हुए] हमारी जान आपके हाथ में है, जीजाजी।

दूल्हे का मामा : मुझे बचा लीजिए, जीजाजी!

साला भी बेटा होता है, जीजाजी।

फालतू का रिस्क काहे ले रहे हैं? बात को खतम करिए ना यहीं पे?

[रोते हुए] जीजाजी!

अरे, दिल के मरीज हैं, भैया। कुछ हो जाएगा हमको!

जिसका मरता है, वही जानता है।

-[रोता है] -अरे, भैया, हमें क्यों लटका रखा है?

अरे, भैया, अरे, हम हाथ जोड़ते हैं, यार, तुम्हारे। अरे...

बेटा था हमारा वो।

[रोते हुए] जीजाजी!

[रोते हुए] ठीक है।

हम एफ.आइ.आर. वापस ले लेंगे। इन्हें छोड़ दीजिए।

दूल्हे का मामा : [रोते हुए] सुनो, भैया, अरे, ऊपर खींच लो, भैय??

[दम लगाता है]

बीना : हाँ, मम्मी।

राजा के हाथ पैसा भिजवाए थे, मिला ना?

गिनी हो?

पापा कैसे हैं?

हाँ।

हाँ, हम तो ठीक ही हैं।

[आह भरती है]

अब, मजबूरी में सादी किए हैं,

तो जितना ठीक हो सकते हैं, उतना हैं हम।

अरे, मम्मी, जब खुसखबरी होगी तो बताएँगे ना।

कोशिश तो कर ही रहे हैं। तुम रोज-रोज

-काहे पूछती हो... -ओए! मुन्ना कहाँ है?

क्यों? क्या हुआ?

मुन्ना भैया को निकले थोड़ा टाइम हो गया, मकबूल भाई।

कहाँ गए होंगे पता नहीं।

हम साथ चलें?

ना। हम देखते हैं।

जी।

मुन्ना : [हाँफते हुए] ...240, 241, 242, 43, 44,

45, 46, 47, 48, 49, 50,

51, 52, 53, 54, 55,

56, 57, 58, 59, 60,

61, 62, 63, 64, 65,

दोनों : 66, 67, 68, 69, 70...

[ज़ोर से आहें भरती है]

जौनपुर, यूपी

आदमी : नमस्ते, रतिशंकर भैया।

हम आते हैं। हैं?

जी।

गाड़ी सौ मीटर आगे लगा लो।

वरना शरद परेसान हो जाएँगे।

आइए, भैयाजी।

रतिशंकर : ई देखो, ई देखो।

एक ठो कुर्सी खोलने में तुम्हारी गांड फट जा रही है।

-हैं? -[दोनों हँसते हैं]

[गहन धुन बजती है]

रतिशंकर : का बे? हैं?

[काँपती आवाज़ में] रति भैया, हम सारा हिसाब सही दिए थे।

इन लोग को गलतफहमी हो गया।

यहाँ हम साला मिर्ज़ापुर का प्लानिंग कर रहे हैं,

और पीछे से तुम हमारा जौनपुर भी पेल दो, साले।

[काँपती आवाज़ में] गल... कोई गलती नहीं किए, भैया।

नहीं, गलती नहीं किए हो, तो सजा भी नहीं मिलेगी।

हाँ?

चलो, वर्णमाला सुना दो।

गुंडा : अबे, सुनाता काहे नहीं?

रतिशंकर : सही बता रहे हैं।

ठीक से सुना दो, एकदम ठीक-ठीक, बिना मिश्टेक किए। बात खतम।

-मुन्ना : ...283, 84, 85, 86, 87, 88, -[वेश्या ज़ोर से आहें भर रही है]

89, 90, 91, 92,

93, 94, 95, 96, 97...

मुन्ना : उठ। उठ।

तीन सौ दीवार पे करेंगे, बहनचोद।

मकबूल इनकमिंग कॉल

चल, पैर ऊपर ले। ऊपर ले।

-[आहें भरती है] -[हाँफते हुए] ...98, 99, 300!

♪ ए, बी, सी, डी, ई, एफ़, जी ♪

ए, पिरिंस चार्ल्स।

हिंदी का सुनाओ, बे।

गुंडा : अबे, सुनाओ।

सुनाओ, सुनाओ।

[घबराता है]

गुंडा : अबे, सुनाओ!

[हकलाते हुए] क, ख, ग, घ, ङ,

च, छ, ज, झ,

[हकलाते हुए] ट...

गलती कर दिए ना?

ञ।

च, छ, ज, झ,

ञ।

ठीक से पढ़े होते, तो बच जाते आज तुम।

[रोते हुए] रति भैया, रति...

रतिशंकर : [चिल्लाते हुए] ए, कपड़ा खराब हो जाएगा हमारा। हट, ह??

[चिल्लाते हुए] रति भैया। ए, रति भैया। ए, रति भैया! ए, रति भैय

[गोलियाँ चलती हैं]

[दबी हुई चीख]

[सेल फ़ोन की घंटी बजती है]

कैसे हो, अखंडा? हैं?

कैसे फोन किए?

[चीखता है]

अरे, कैसी बात कर रहे हो? हम काहे किसी को भेजेंगे मिर्ज़ाप??

[गोलियाँ चलती हैं]

[नाटकीय धुन बजती है]

-[वेश्या चीखती है] -[गुंडा झल्लाता है]

[गुस्से से] हट!

[कराहता है]

रतिशंकर : मुन्ना तो हमारे खुद लड़के जैसे हैं।

ठीक तो है ना वो?

मादरचोद।

मादरचोद।

[फुसफुसाते हुए] मादरचोद।

चोदने भी नहीं देते।

[आदमी चीख रहा है]

[थीम म्यूज़िक बजता है]

मिर्ज़ापुर

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