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[प्लास्टिक मरोड़ना]
[खटखट और खुरचना]
[गहरी साँस लेकर छोड़ी]
-[अशुभ धुन बजती है] -[झींगुरों की आवाज़]
[ज़ोर से साँस खींचता है]
"कालीन भैया।"
"किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर।"
तो, भोसड़ी के, हम हुए...
प्रिंस।
प्रिंस।
[गहन धुन बजती है]
कालीन भैया द किंग ऑफ़ मिर्ज़ापुर
ये लीजिए, मुन्ना भैया।
फ्री में लेकर आए हैं।
अपनी पावर सॉलिड है कालीन भैया के नाम से।
पावर अगर दूसरे के नाम से हो,
तो अपनी नहीं ना हुई, बे, कम्पाउन्डर।
बैठो, ये भी ले लो।
[गाड़ी का इंजन चालू होता है]
[बॉलीवुड धुन बजती है]
[बैंड-बाजे का संगीत]
[भीड़ खुशियाँ मना रही है]
[पटाखों के धमाके]
अरे, यार!
कैसे चूतड़ मटका रहे हैं साले चूतिये।
हम दिखाते हैं इनको।
चलो बे, कम्पाउन्डर।
[अशुभ धुन बजती है]
[पीछे जश्न का हल्का शोरगुल जारी है]
[ज़ोर से साँस लेता है]
[फिर ज़ोर से संगीत बजता है]
[आहें भरता है]
आदमी : अरे, भैया, जरा संभलकर। ओ, भैया, संभलकर!
कौन है, भैया?
-मुन्ना : ये हैं हम। -[काँपते हुए] जीजाजी!
नाचो, भोसड़ी के, नाचो।
ऋतिक रोशन देखा है, हाँ, चलो नाचे वैसे।
मुन्ना : चलो! हाँ, ये! ये!
-[चिल्लाते हुए] क्या बात! ये! ये बात! -[गोली चलती है]
हाँ , वो, वो। अगला, अगला कौन सा करेंगे?
सभी : नागिन, नागिन, नागिन, नागिन!
-[गोली चलती है] -[चिल्लाता है]
आदमी : अब, बिजली, बिजली!
-पतंग, पतंग, पतंग! -[गोलियाँ चलती हैं]
[घोड़े की हिनहिनाहट]
[गोलियाँ चलती हैं]
[गोली चलती है]
[जश्न रुक जाता है]
[अस्पष्ट बातचीत]
[घोड़े की खुरखुर]
[शोरगुल]
[औरतें चिल्ला रही हैं]
[अशुभ धुन बजती है]
[हँसता है]
बैंड बज गया।
मिर्ज़ापुर
[थीम म्यूज़िक बजता है]
[गहन धुन बजती है]
त्रिपाठी कार्पेट कंपनी
आदमी : सलाम, कालीन भैया।
[सूँघता है]
हम्म।
मकबूल।
मकबूल : जी?
लाला जबान का पक्का है।
बर्फ़ी बढ़िया है, अच्छा नसा देगी।
एक काम करो, कालीन का प्रोडक्सन बढ़वा दो।
जी, भैयाजी।
और, कट्टों का क्या हुआ?
तैयार हैं।
[काँपती आवाज़ में सिसकता है]
भैयाजी आ गए। भैयाजी आ गए।
नमस्ते, भैयाजी।
दो मिनट कालीन भैया से बात करनी है।
ये तो तुलसी चौक का कबूतर है, भैयाजी।
भैयाजी, हम आपके गन डिस्ट्रिब्यूटर हैं।
हमसे कट्टा खरीदा था ये। उस कट्टे से इसका...
भैयाजी, हम ट्रिगर दबाए और हाथ में ही फट गया।
तो, भोसड़ी के, तुम इसके लिए हमारे दरवाजे पे चले आए?
[हिचकते हुए] नहीं, भैया। इसको हम मना किए थे, पर आपसे मिलने ??
देखके नहीं लिया था?
कितना में लिया था?
वो, डेढ़ हज़ार वाला।
अब डेढ़ हज़ार में, भोसड़ी के, एके 47 चाहिए तुमको?
मकबूल।
दो रे, छर्रा डालके।
आदमी : जी।
[अशुभ धुन बजती है]
ये लो।
चलिए। कोशिश करिए।
करो।
भैयाजी, हम दाहिने हाथ से चलाते हैं।
थे। अब बायें से चलाओगे।
अब आगे का जीवन जो है ना, खाना-धोना, सब उसी से होगा, बायें से?
चलिए। चलिए। करिए कोशिश।
[अशुभ धुन बजती है]
[गोली चलती है, ज़ोर से रोता है]
[आदमी चिल्लाता है]
[कराहता है]
ओए, कबूतर।
भैयाजी?
ये लो। ले जाओ इसको हॉस्पिटल में।
[रोता है]
मकबूल, ये देसी कट्टों का कुछ करना पड़ेगा, फटने का।
व्यापार में नुकसान होता है। चलो।
[पिचकने की आवाज़]
[लाउडस्पीकर पर आदमी] दोस्तों, आपकी ज़िंदगी में नया सवेरा
गज्जूमल कॉलेज को मुन्ना त्रिपाठी के आतंक से मुक्त कराएग
मुन्ना भैया को वोट दें
शांति और अमन लाएगा कौन?
मैं, आपका दीपू सिंह।
तो, दोस्तों, मुझे अपना प्रेसिडेंट चुनकर,
अपने और अपने कॉलेज के भविष्य को बेहतर बनाएँ।
तृतीय वर्ष - कॉमर्स
[गहरी साँस छोड़ता है]
बहुत मजबूत कर लिए हैं कलाइयाँ, गुड्डू भैया। अब थोड़ा पढ़
[मारते हुए] अरे, ए, पहलवान जी।
जरा उठिए। अगली एन्ट्री बताइए तो।
टीचर : अरे, खड़े होइए।
[मज़ाक उड़ाता है]
इ जो बनमानुस जैसा अपना शरीर बना रहे हैं ना ये एकदम मैच कर??
आपकी बुद्धि से।
अरे, दोनों के दोनों मोटे।
[सब हँसते हैं]
अरे, दो साल से फेल हो रहे हैं,
पंचवर्षीय योजना बनाना है क्या?
बैठ जाइए। लंठ कहीं के।
[सब हँसते हैं]
[थूकता है]
हँस काहे रहे हो, बे?
[गुस्से में] गुरूजी हमें लंड कह रहे हैं। हम मुँह तोड़ दें??
अरे, वो लंड नहीं कह रहे हैं। वो लंठ कह रहे हैं।
इसमें "ठ" होता है "ड" नहीं होता है।
लंठ माने, दिमाग से गधा, जड़बुद्धी।
हाँ, फिर ठीक है।
वैसे भी, बुद्धि होती, लुढ़क-लुढ़कके तुम्हारी क्लास में थोड?
बबलू : हम्म, इसलिए तो कह रहे हैं कि थोड़ा पढ़ लीजिए।
पढ़के घंटा होगा, बबलू।
सारी सीट जो है ना, रिज़र्वेसन वाले ले जाएँगे।
हमारा तो तुम जानते हो, बे।
-इस साल मिस्टर पूर्वांचल हम ही बनेंगे। -अच्छा।
इक्यावन हजार इनाम है।
कालीन भैया स्पौन्सर हैं। अपने हाथों से ट्रॉफी देंगे हमक
[ताना कसते हुए] हम्म, अच्छा है, अच्छा है।
बहुत अच्छा है।
[इंजन घरघराता है]
दीपू : नमस्ते, नमस्ते!
अगर आप लोगों को इस कॉलेज से गुंडाराज हटाना है, तो कृपया म??
दीपू सिंह। नाम याद रखिएगा। दीपू सिंह को वोट दें।
[कराहता है]
अरे, दीपू बाबू!
[हड़बड़ाता है]
अबे, अबे दाबो बे, जाओ ना।
[सब चिल्लाते हैं]
कम्पाउन्डर : पकड़, ओए। अबे, रुक।
[सब चिल्लाते हैं]
ऐ!
पंकज : अरे, भोसड़ी!
अबे साले, कॉलेज घुमाएगा?
पंकज : ए, सफेद कोट! कहाँ गए नेताजी?
-बता रहे हो कि पढ़ाएँ केमिस्ट्री? -[काँच टूटता है]
[हड़बड़ाता है]
पकड़ो मादरचोद को, साले को पकड़ो।
पंकज : मादरचोद, बोतल फेंकेगा, बे!
ललित : कहाँ भाग रहा है?
[हाँफता है]
पंकज : गांड फटी, नेताजी?
[कराहता है]
पंकज : जाओ, जाओ। आते हैं।
[हाँफता है]
मुन्ना : अच्छा नाश्ता करके आए हैं, भगा रहा है गांडू!
नमस्कार, मास्टर।
का भैया?
ये आप लोग पीछे क्या देख रहे हैं? सिनेमा हो रहा है क्या? पढ़ि
[फुसफुसाते हुए] बबलू, मुन्ना भैया को देख।
कैसे दौड़ाए हैं इसको।
छोड़ो। तुम्हें
पचास... पचास बार बोले हैं
पढ़ने-लिखने वाले छात्रों को राजनीति से दूर रहना चाहिए। ??
अबे, पढ़ाई-लिखाई में ध्यान लगाओ। आई-ए वाई-एस बनो
और देश को संभालो।
लेकिन नहीं। तुम्हारे गांड में चनूने... चनूने काट रहे हैं।
-मादरचोद। -[वीडियो गेम की आवाज़]
चुनाव में खड़े होंगे। कनवेसिंग करेंगे।
अबे भोस...
[अशुभ धुन बजती है]
[कराहता है]
कम्पाउन्डर : चलो, चलो, चलो, बेटा, चलो।
क्या नाम है हमारा? मुन्ना त्रिपाठी।
गज्जूमल कॉलेज का राजा।
तो बेटा, अगर हम चुनाव में खड़े हो रहे हैं,
तो इसका मतलब चुनाव का नतीजा पहले ही आ चुका है।
है ना?
छोटी सी बात है।
इनकी कैंची बनाओ।
[काँपती आवाज़ में] नहीं, भैया।
-कर दें गोल? हाँ? -ललित : जी, भैयाजी।
मुन्ना : कर दें? हाँ?
[चिल्लाता है]
मुन्ना : हाँ, बेटा, गोल, हाँ?
इस डील में तो खन्ना की दोनों एफ़डी टूट गईं।
-हाँ, भैया, तुम। -[दीपू कराहता है]
शाम को तुम्हारे लिए कैंटीन में चाय और समोसा।
नाम ले देना।
मुन्ना भैया, अंडे करा दीजिए, पचास।
खली बनना है ना इनको।
मुन्ना : चाय आप पी लीजिएगा, मास्टर साहब।
चलो बे।
दीपू सिंह को टंगड़ी काहे मारे, भैया?
देखे नहीं कितनी साबासी दिए हमें?
[घंटी बजती है]
[अस्पष्ट बातचीत]
[फुसफुसाते हुए] क्या कर रही है?
इतना टाईट चुड़ीदार पहनती है ना तू? दोलन-आन्दोलन होता है।
इसलिए लड़के तेरे पीछे चलते-चलते पूरा बजार घूम आते हैं।
थोड़ी तो शर्म किया कर, स्वीटी।
अब तुझसे भी शर्माएँ?
अच्छा, सच बता, जब लड़के साइकिल उठाके पीछे चलने लगते हैं,
तो अपनी भी चाल में स्टाईल आ जाता है ना?
अच्छा?
अगर ऐसी बात है तो कब ले जा रही है हमारे भैया को डेट पे?
हम क्यों ले जाएँ डेट पे? हम लड़का हैं कि वो?
और सारी डेट्स निकल जाएँगी,
डेट पे नहीं ले जाएँगे वो।
तुम्हारे भैया की ना, फटती है हमसे।
[ज़ोर से हँसता है]
दिखाएँ?
गुड्डू : हो गया।
[खाँसता है]
अच्छा शरीर बनाए हो।
अब कोई हमको छेड़ेगा, तो बचा लोगे ना?
बस यही काम रह गया है ना अब गुड्डू भैया को?
बबलू : लड़कियों को बचाएँ।
एक बॉडीगार्ड काहे नहीं रख लेती हैं?
बनोगे हमारे बॉडीगार्ड?
दिखाओ,
मछलियाँ दिखाओ जरा।
[मज़ेदार धुन बजती है]
ऐसे नहीं, फुलाके दिखाओ, गुब्बारे की तरह।
[संगीत तेज़ी पकड़ता है]
छूना नहीं हमको कभी,
...बिना इजाज़त।
पापा को बता दिए, तो बहुत कूटे जाओगे तुम।
पता है ना पुलिस में हैं।
ठुल्ले बहुत जोर से मारते हैं।
सुजा देंगे। बैठ नहीं पाओगे बहुत दिन।
[हँसती है]
[चिल्लाती है]
[चिल्लाते हुए] छोड़ो!
घर आओ, बताते हैं हम।
अच्छे लगते हैं गुड्डू भैया तो कह दीजिए।
नहीं लगते हैं तो आगे बढ़िए। खेल काहे खेलती हैं?
लड़की खूबसूरत हो ना, तो खेल खेल सकती है।
क्यों?
हैं ना हम खूबसूरत?
[फुसफुसाते हुए] बाए।
[नकल करता है] बाए।
सक्सेस - आईएएस कोचिंग क्लास्सेस - लखनऊ
आदमी : माचिस है, पंडित जी?
हम सिगरेट नहीं पीते हैं।
कान खुजाना था। सिगरेट तो हम भी नहीं पीते।
कितना वक्त है सुनवाई में?
दस मिनट लगेंगे।
यादव जी के आदमी का मामला है।
अदालत में ज़्यादा उछलिएगा नहीं।
"निर्दोष" चाहिए, पंडित जी।
-[अशुभ धुन बजती है] -निर्दोष।
[ज़ोर से चिल्लाता है]
[गुस्से से] उठ, बहनचोद।
[ऊँची आवाज़ में] अरे, कचहरी है ये।
मज़ाक बना रखा है, मादरचोद।
[कराहता है, टकराता है]
[ऊँची आवाज़ में] निकलो! निकलो यहाँ से, निकलो!
साले!
अरे, रमाकांत!
अरे, पंडित जी, जाने दीजिए उसको!
-अरे, उसकी फट गई है। -[चीखता है]
जज : पंडित जी!
रमाकांत : दोबारा दिखाई मत देना यहाँ पे।
पंडित जी, पंडित जी, जाने दीजिए, जाने दीजिए!
जज : अरे, पंडित जी, मेरी बात सुनिए।
अरे, फट गई है उसकी। जाने दीजिए।
दीमक हैं ये, जज साहब। चाट गए हैं साले शहर को।
क्या करिएगा, पंडित जी?
जाओ, भई, जाओ। जाओ।
देख लेंगे।
[गुस्से से] भक, भोसड़ी के।
[ऊँचा आवाज़ में] अंदर करवाके डंडा तुड़वाएँ? भाग यहाँ से।
[कराहता है]
[धीरे से] शांत। चलिए अंदर।
बाकी, हम दूल्हा के मामा हैं,
और ये हमारे जीजाजी। दूल्हा इन्हीं का लड़का था।
वकील साब, आप केस तो लेंगे ना?
दो-तीन वकील लोग मना कर दिए तो...
फ़ाइल दिखाइए जरा।
दूल्हे का पिता : जी, ये लीजिए।
ये बारात का फोटो है। और ये...
ये लड़का गोली चलाया है। हमारी आँख के सामने।
रमाकांत : ये लड़का?
तब तो पक्का लेंगे ये केस हम।
आप लोग फ़ाइल छोड़ दीजिए, हम देख लेंगे।
वकील साब, बाद में पीछे तो नहीं हटेंगे ना आप?
हमारी चिंता मत कीजिए।
मुद्दा ये है कि आप तो पीछे नहीं हटेंगे बाद में?
-कम्पाउन्डर : लाल फूल, नीला फूल! -[लोगों के नारे] मुन्ना भैय?
-लाल फूल, नीला फूल! -मुन्ना भैया ब्यूटीफ़ुल!
हमारा परिचय तो जानते ही हैं आप लोग।
फूलचंद त्रिपाठी, उर्फ़ मुन्ना।
[चिल्लाते हुए] भैया, भैया!
[सब नारे लगाते हैं] मुन्ना भैया!
-भैयाजी, एक बात कहें? -हाँ, बोलो?
बुरा मत मानिएगा। ये फूलचंद त्रिपाठी बहुत चूतियों टाईप न
मादरचोद, मारेंगे, तुम्हारी नकसीर फोड़ देंगे। ठीक है? नारे
[लोग नारे लगाते हैं]
-[चिल्लाते हुए] भैया में भैया! -[लोग नारे लगाते हैं] मुन्ना ?
-भैया में भैया! -मुन्ना भैया!
-[साइकिल की घंटी बजती है] -ललित: मुन्ना भैया!
[दूर से नारों की आवाज़] ज़िंदाबाद!
ये, ये हैं मिस्टर पूर्वांचल।
कौन?
यही जो फुलाए हुए खड़ा है, ये।
कम्पाउन्डर : लाल फूल, नीला फूल...
इस साल बनेंगे हम।
और फिर बनेंगे मिस्टर यूपी।
और फिर मिस्टर इंडिया।
फिर फ़ोटो होर्डिंग पे डालके खोलेंगे गुड्डू जिम।
मुन्ना : कॉलेज में गुंडागर्दी बढ़ गई है।
क्लासों में जा-जाके छात्रों को पीटा जा रहा है।
ये सब नहीं चलेगा इस कॉलेज में।
-कम्पाउन्डर : नहीं चलेगी, नहीं चलेगी! -सभी : गुंडागर्दी नही
ये तो जलवे हैं मुन्ना भैया के।
जिसको चाहो ठोक दो। पाँच-सात की मार लो। हैं?
उधर हाथ बढ़ाए, इधर लौंडिया।
ये सेक्सी खुली जीप।
जब सौ पे चलती है ना, तो बाल हवा में उड़ते हैं, शाहिद कपूर स??
[संगीत बजता है]
जिंदगी हो तो ऐसी हो।
जिंदा तो झांट के बाल भी हैं।
[गुस्से में] बहनचोद! इसकी माँ का!
अपने पास लूना ही होती ना, तो ये चूतियापा नहीं होता।
बबलू : अरे! अरे, गुड्डू भैया, इतना लोड काहे ले रहे हैं?
सिर्फ़ चेन ही तो निकली है!
[चिल्लाते हुए] अबे, इज्जत की मय्यत निकल जाती है, यार। उसका
-मादर... -गुड्डू भैया। अरे, बस।
हटा रहे हैं। ठीक है।
बस, बस, बस, बस, बस, बस...
अरे, साइकिल को तोड़ दिए, भई, बस।
पापा से दोबारा बात किए लखनऊ जाने की?
[साइकिल की घंटी बजती है]
मुंडी काहे हिला रहे हो?
काहे नहीं किए, बे?
अबे, चुपचाप लखनऊ जाके सिविल की कोचिंग कर लो।
बुद्धिमान आदमी हो।
निकाल लोगे परीक्षा एक बार कायदे से तैयारी किए तो।
हम बात करते हैं पापा से।
रहने दीजिए ना। आप क्या बात करेंगे पापा से?
पापा तो कहते हैं ये सब बेफालतू का खर्चा है।
और वैसे भी लखनऊ जाके हमारी सिलेक्सन की कौन सी गारंटी हो ज
वही तैयारी हम यहाँ पे भी तो रहके कर सकते हैं, मिर्ज़ापुर ??
अगर कुछ नहीं भी हुआ तो यहाँ पे बैंक पी.ओ. का फॉर्म है, भर दे?
[गुस्से में] ये, ये... यही कह रहे हैं हम।
अबे, मिडल-क्लास आदमी, आदमी नहीं, चूतिया होता है, चूतिया।
अब चाहे, बहनचोद, तुममें कितना भी टैलेंट हो,
यहीं पैदा हुए, यहीं निपट जाओगे।
एकदम सही बात बोले हैं भैया।
अब हमई को देख लीजिए,
हम "इंडियन आइडल" में गाना गाना चाह रहे थे,
और यहाँ पंचर बना रहे हैं।
[चिल्लाते हुए] अबे, गांड ना फुलाओ, माँ चोद देंगे तुम्हारी,
पैसा बताओ कितना हुआ।
[मज़ेदार धुन बजती है]
चूतिया।
त्रिपाठी कार्पेट कंपनी
कालीन भैया का चौंक, कालीन भैया का शहर।
मिर्ज़ापुर में भोकाल हो तो, ऐसा हो। हैं?
चलो, घसीटो।
-[खटिया चरमराती है] -[जोड़े की आहें]
बीना : थोड़ा इस तरफ़ होइए ना। कालीन भैया : बहनचोद।
[कराहता है]
[बीना हाँफती है]
औरत हो, नीचे ही रहो।
तो ठीक से करिए ना।
[हाँफता है]
[आहें भरती है]
कालीन भैया : [काँपती आवाज़ में] हमारा होने वाला है।
[मदहोशी में] नहीं, थोड़ा और। थोड़ा और।
[और ज़ोर से आहें भरते हैं]
[सिहरन]
कालीन भैया : हरी बोल।
क्या
हुआ?
शिलाजीत दिए थे न आपको?
काहे नहीं लेते हैं?
आज फिर जल्दी ढह गए?
एक तो मुश्किल से महीने में एक-दो बार कर पाते हैं आप।
ऊपर से हर बार गरम करके, ठंडा ही छोड़ देते हैं हमको।
बहुत गर्मी है?
चकला पे बिठा दें?
हम्म?
अरे, त्रिपाठी खानदान की बहु हो।
ये बैस्याओं जैसे बर्ताव नहीं किया करो, बीना।
मुन्ना की माँ का जगह दिए हैं तुमको।
पोजीशन का लिहाज रखो।
मुन्ना भैया की माँ चाहिए थी,
तो अपनी उमर की ले आते।
जवान काहे ले आए?
[माउस क्लिक होने की आवाज़]
अबे, स्टेरोइड से देख रहे हो क्या शरीर बनता है? हैं?
हम भी कोशिश करें?
अरे, भयंकर साइड-इफ़ेक्ट होते हैं इससे।
इन सब चक्करों में ना पड़िए।
तुम रहने दो, यार।
तकलीफ़ नहीं, तो नफ़ा नहीं।
डिंपी : भैया, चलिए केक लाने। पापा आते ही होंगे।
आ रहे हैं, डिंपी, दो मिनट। आ रहे हैं।
[टीवी पर आदमी] शेर और शेरनियों के अलावा, यहाँ कई और जानवर भ
शेर ने हिप्पो का माँस इतना खा लिया है कि अब इसका पेट फटने ?
[शेर गुर्राता है]
इस शेरनी ने भी ठूंस-ठूंसकर खाया है।
बाऊजी : जरा सख्त हाथों से।
-जी, बाऊजी। -[टीवी पर आदमी] ...अजीब दुश्मनी
चलती आ रही है।
और ये है चितकबरा लकड़बग्घा,
जो ज़्यादातर छुप-छुपके वार करते हैं।
वो कौन सी खूबी है
जो इन्हें शेरों का सबसे खूंखार दुश्मन बनाती है?
अरे, वसुधा!
वसुधा : आए।
मटर-पनीर खाए? कैसा लगा?
-तुम्हारा मटर-पनीर तो जज साहब खा गए। -हम्म?
हम तो उनका गोभी-मंचूरियन खाए।
हद है।
वसुधा : हम मेहनत किए आपके लिए और मजा ले गए आपके जज साहब।
बाकी दिन कैसा रहा आपका?
[आह भरते हुए]
अब, मिर्ज़ापुर को तो तुम जानती हो, वसुधा।
अभी कुछ दिन पहले, बारात में एक दूल्हे को ही ठोक दिए गुंडा ?
तो उनके पापा-मामा चाह रहे हैं कि हम केस लड़ें उनका।
हम हाँ कर दिए हैं।
वसुधा : चाहे आपके परिवार पे खतरा क्यों ना आ जाए।
इतना ही लोगों को न्याय-व्याय दिलाना था,
तो नहीं ना करनी थी सादी।
रहते हनुमान जी की तरह कंवारे।
करते सुरक्षा।
रमाकांत : अरे, परिवार का चिंता नहीं होता, तो ये बंदूक लेते
कभी देखे हो किसी वकील के पास बंदूक?
वसुधा : अब ये बंदूक का गाना तो गाइए मत।
दो साल भागे हो, तब तो कहीं जाके मिला ये लाइसेंस।
शहर में डेढ़-हजार में मिलता है कट्टा।
वकील हैं हम, गुंडे नहीं।
आप तो बन गए वकील, आपसे शादी करके हम बन गए झंडू।
अब आपका ये सादी का कमेंट्री खतम हो गया हो,
तो हाथ-मुँह धो लें, वसुधा जी?
[आवाज़ करके खाता है]
आइए, मुन्ना भैया, आज मटन बनाए हैं। बैठिए।
मुन्ना : नहीं, नहीं। हम मटन-वटन नहीं खाएँगे।
आप पापा की वजह से बहुत मिर्ची डाल देती हैं। हम ये ले लेते ?
[गहन धुन बजती है]
मकबूल?
मकबूल : जी, भैयाजी?
खा लो।
बस, भैयाजी, आप खाइए।
क्या हुआ? परसों कट्टे की डिलिवरी थी।
हो गई?
अभी नहीं कराएँ हैं, पापा। कल करा देंगे। थोड़ा काम में थे।
अच्छा? कहाँ लगे थे? क्या किया दिन भर?
वो कॉलेज में, लड़की लोग का वोट तैयार किए।
फिर विरोधी उम्मीदवार बहुत दिलेरी दिखा रहा था,
उसको तोड़े। अब ठीक है।
[दरवाज़ा खुलता है]
[दरवाज़ा बंद होता है]
प्रणाम, बाऊजी।
भैयाजी, नमस्ते।
[गला साफ़ करता है] नया माल आ गया।
एकाध चाहिए तो ले लो, गुप्ता।
[घबराहट में हँसते हुए] अरे, नहीं, भैयाजी। हमारे पास ये यूप?
हम तो बस वो... आपके दर्शन के लिए आ गए थे।
हम शिवलिंग हैं, जो दर्शन के लिए आ गए?
क्या चूतियापा हुआ है, जो रात को रुका नहीं गया?
[अशुभ संगीत बजता है]
[अफ़सर गला साफ़ करता है]
[बातचीत की आवाज़ बंद]
भोसड़ी के...
बारात में दूल्हे को उड़ा दिए मुन्ना और तुम हमें बताए नही?
और तुम इतनी छोटी सी बात पे हग दिए, बे?
तुम्हारा दामाद था वो?
विसुद्ध चूतिए लड़के हो तुम! चुप रहो!
ये कुत्ता डाकिया है।
और डाकिए की ना गांड नहीं मारी जाती, बेटे।
वरना अगली चिट्ठी फाड़के वहीं डाल देगा।
मकबूल, कितनी दफ़े बोले हैं
बुलेट गिनके दिया करो इनको।
हम सुल्टा लेंगे, भैयाजी।
घंटा सुल्टा लोगे तुम। ए!
[धीरे से] साला, चूतिया।
कालीन भैया : लाओ।
कौन वकील किए हैं?
[धीरे से] रमाकांत पंडित।
[ताना कसते हुए] ये अलग है, बहन...
[फुसफुसाता है]
बेटा, तुम्हारे ये चूतियापे कब खत्म होंगे?
ऐसे संभालोगे शहर?
पापा, आप हमें एक बार मिर्ज़ापुर चलाने का मौका देके देखिए?
गर्व होगा आपको।
और कट्टों का व्यापार है हमारा।
अगर हम तीन-चार बुलेट फालतू चला भी लिए, तो आप इतना काहे परे?
बेटा, कल को हम कोठा खोल दें,
[चिल्लाते हुए] तो तुम लहंगा पहनके धंधा करने बैठ जाओगे उसप
[आवाज़ करके खाता है]
व्यापार हमारे हिसाब से चलता है, हम व्यापार के हिसाब से नह
ये फालतू में गोलियाँ चलाते रहोगे ना, तो दुश्मन बढ़ेंगे
और तुम्हें पता भी नहीं चलेगा।
मकबूल : आप काहे चिंता कर रहे हैं, भैयाजी।
हम देख लेंगे ना।
तुम काहे देखोगे, मकबूल?
मुन्ना मूते हैं, मुन्ना ही पानी डालेंगे।
वो तो हम ऐसे भी संभाल ही लेते।
छोटी सी चीज है।
अभी जाके बताते हैं उस वकील साले को।
और आपकी बुलेट भी रख रहे हैं।
[गोलियों की ठनठनाहट]
अपने परिवार के लिए मटन ले जाइएगा, गुप्ता जी।
[जाते हुए कदमों की आहट]
-भैयाजी? -आओ।
क्या है?
भैयाजी, सुने हैं रतिशंकर शुक्ला के लड़के फिर से मिर्ज़ा??
रतिशंकर को दे दिया है ना जौनपुर।
फिर काहे पजामा खोलके आ रहे हैं यहाँ?
[धीरे से] भोसड़ी के... सुनो?
जी?
ये बिलायती है। अच्छा समय चल रहा है, बताते रहेगी।
बाँधो। बाँधिए!
शुक्रिया, भैयाजी।
-राजा : साहेब? -हाँ?
-मटन। -[हँसते हुए] हाँ, हाँ।
अच्छा, भैयाजी।
अच्छा।
बाऊजी।
कभी-कभी सोचते हैं, मुन्ना का करें क्या? हम्म?
बाऊजी : तो कर लो एक और लड़का पैदा। कौन रोका है?
वसुधा : बात बताइए, आने में इतना लेट काहे हो गए आप?
स्कूटर खराब हो गया था।
स्कूटर बेचके पुरानी कार काहे नहीं ले लेते, पापा?
रमाकांत : काहे? ठीक तो चल रहा है हमारा स्कूटर।
घर पहुँचा दिया ना।
बाकी जब गुंजाइश होगी तो देख...
हाँ, हाँ। जानते हैं आपका डायलॉग।
गुड्डू : जब गुंजाइश होगी, तब देखेंगे।
जिंदगी निकल गई आपकी, गुंजाइश ही नहीं हुई, पापा।
[गहन धुन बजती है]
अरे, प्लीज़। अब आप लोग अपनी बहस मत शुरू करिएगा।
गुड्डू : अरे, तुम तो रहने दो, यार।
पापा से कुछ बोलते ही नहीं हो कभी।
[उदास धुन बजती है]
काहे नहीं जा सकता ये लखनऊ?
हर समय हम लोग बजट ही देखते रहते हैं यहाँ पे।
गुड्डू बेटा, मिडल क्लास लोगों को बहुत चीज़ें देखके चलना ?
मिडल क्लास लोग सपने भी तो देख सकते हैं ना, पापा?
देख सकते हैं। बिलकुल देख सकते हैं, गुड्डू मियां।
अगर एक ही क्लास में दो साल तक लगातार फेल ना हों तो।
हम्म?
ये डिंपी कहाँ रह गई? डिंपी?
बबलू : आओ।
चलिए, पापा। बंद कीजिए ये सब।
-अरे। क्या कर रहे हो, बेटा? -चलिए। ए, चलिए।
-केक काटिए, केक। -बबलू : लाओ, हमको दो, इधर।
रमाकांत : [हँसते हुए] क्या बच्चों की तरह हमसे मोमबत्ती लग??
-फूँक मारके केक... -बबलू : काटिए ना।
-पहले फूँक मारिए, मोमबत्ती बुझाइए पहले। -फूँक मारिए।
जी।
[सब गाते और तालियाँ बजाते हैं]
♪ हैप्पी बर्थडे टू यू
-♪ हैप्पी बर्थडे टू यू ♪ -ये तो फिर जल गया।
दोबारा से बुझाइए।
♪ हैप्पी बर्थडे, डियर पापा
♪ हैप्पी बर्थडे टू यू ♪
[अशुभ संगीत बजता है]
[दूर तालियाँ बज रही हैं]
[सूंघता है]
-बस करो, भई! -गुड्डू : पोंछो, पोंछो!
छोड़ दिए, पापा। छोड़ दिए।
जन्मदिन पापा का है और आप लोग हमारे मुँह पे केक पोत दिए।
[फुसफुसाती है] पापा का तोहफ़ा?
हाँ, ले लिया है।
[फुसफुसाती है] तो, कहाँ है?
अरे, हाँ। पैकिंग करनी है।
-बबलू : चलो। -अबे, यार!
[दरवाज़ा खटखटाता है]
अरे, नमस्ते, आंटी। रमाकांत अंकल हैं?
-वसुधा : हैं। आप कौन? -हम कौन?
हाँ। हम कौन?
मुन्ना : बड़ा अच्छा घर है।
-पाय लागूँ, आंटी जी। -मुन्ना : कहाँ, बाएँ, दाएँ?
पहले बाएँ चलते हैं।
हम्म-हम्म।
मुन्ना : कहाँ हैं? कहाँ... यहाँ हैं।
बैठिए, बैठिए, वकील साब। सर्मिन्दा कर रहे हैं आप।
बैठिए, बैठिए, बैठिए। बैठिए, बैठिए।
[आह भरता है]
प्रणाम, वकील साब।
ओ, माफ़ कीजिए! हम मुन्ना, मुन्ना त्रिपाठी।
आपकी बेटी है?
डिंपी, अंदर जाओ।
अरे, ये क्या बात हुई? डिंपी, रुको।
डिंपी अंदर क्यों जाएगी, पंडित जी?
गलत बात है। डिंपी, तुम एक काम करो, तुम आके बैठो।
इधर आओ। आओ, डिंपी। यहाँ पे।
चलिए कोई बात नहीं। [गला साफ़ करता है]
तो, देखिए, पंडित जी।
गुड्डू : पापा, आपके लिए तोहफ़ा लाए हैं।
[हँसते हुए] स्कूटर नहीं बेचेंगे, कम से कम सुरक्षा का तो जु.
आंटी, कितने हैं?
और भी लोग हैं ऊपर?
जाओ, भैया, देखके आओ जरा।
जी, भैयाजी।
अबे, हट बे।
अबे, पहलवान।
तुम तो वो अकाउंट्स की क्लास वाले हो ना, बे?
मुन्ना : तुम्हारे लिए अंडे करवाए थे हम कैंटीन में, याद है?
जी, मुन्ना भैया। आप?
आओ, आओ, आओ, आओ। तुम भी आओ, भई।
आ जाओ, आ जाओ, आ जाओ। पूरा परिवार साथ में है।
सारा परिवार इकट्ठे होके बैठेगा।
माताजी यहाँ हैं। बहन यहाँ है।
माँ-बहन एक करने में आसानी होगी।
[अशुभ संगीत बजता है]
[गला साफ़ करते हुए] तो, ठीक है। पंडित जी...
अब सीधी बात पे आते हैं।
वो जो दूल्हा मरा था ना, घोड़ी पे, उसे हम ही ठोके थे।
वैसे कोई दुश्मनी नहीं थी उससे। हम तो जानते भी नहीं थे साल
बस नाचने में इतना होश खो बैठते हैं हम कि नाचते-नाचते पता ??
कब ट्रिगर दब गया... झूल गया।
गलती हुई है, पंडित जी।
अपराध नहीं।
और गलती के लिए कोर्ट-कचहरी नहीं जाया जाता ना?
कम्पाउन्डर : अरे, मुन्ना भैया, इत्तेफ़ाक हो गया।
क्या हुआ, भाई?
ये तो वही केस का फाइल है।
-हमारे? -हाँ।
तो फाड़ दो, भई।
फाड़ो, फाड़ो, फाड़ो।
[कागज़ फटता है]
-मुन्ना भैया? -मुन्ना : हाँ, भई?
हम बात करते हैं पापा...
हाँ, करिए, बिलकुल करिए, बिलकुल करिए।
[गला साफ़ करता है]
पापा, जो भी केस है जाने दीजिए...
देखा तुम? हैं?
कैसे अंकल जी ने एकदम झंडे की तरह हाथ खड़ा किया।
और तुम साले इनको हल्के में ले रहे थे?
तो, बात ऐसी है कि अब आप उस लड़के के घर वालों से नहीं मिलेंगे
समझे?
और जो नहीं समझे हों तो? क्या करोगे?
हम्म?
[धीरे से] क्या बात है, अंकल जी।
हम तो ए.के. हंगल सोचके आए थे,
आप तो बहनचोद बच्चन निकले।
क्या बात है। एक बात बताएँ...
डिंपी : मुन्ना!
[रोती है]
बड़ी गर्मी है आपकी लौंडिया में।
सादी की उमर हो गई है।
कोई लड़का देखे हैं कि नहीं?
और अगर नहीं, तो हमारे पास भिजवा दीजिएगा। जितनी गर्मी है, ??
-[चिल्लाते हुए] मुन्ना भैया! -क्या मादरचोद, मुन्ना भैया?
[अशुभ धुन बजती है]
इनके बाप कौन हैं, जानते हैं ना? अखण्डानन्द त्रिपाठी।
-[चौंकती है] -[चिल्लाते हुए] तेरी माँ का चूत, बुड्ढे!
-मादरचोद! -[चिल्लाते हुए] ए!
-नहीं, नहीं, नहीं! -मम्मी!
[हड़बड़ाती है]
[सब चिल्लाते हैं]
मुन्ना : अरे, छोड़ो!
[कराहता है]
-[बंदूक चलती है] -[बबलू चिल्लाता है]
[हाँफती है]
[सिसकियाँ]
[आदमी रोता है]
[रोते हुए] भैया, छेद दिया... कान फाड़ दिए।
[गुर्राता है]
[खींचा-तानी की आवाज़ें]
[कराहता है]
[ललित रोता है]
[चिल्लाता है]
-[कटने की आवाज़] -[चीखता है]
[चिल्लाता है]
[हाँफता है]
[चीखता है]
-[फूँकता है] -[रोते हुए] कम्पाउन्डर भैया, मेरा कान...
बहुत जल रहा है!
[कराहता है]
[चीखता है]
[गोली चलती है]
[गुर्राते हुए] मादर...
[गोली चलती है]
-[मुन्ना चीखता है] -[खाली बंदूक की आवाज़]
[गुर्राता है]
गुड्डू : [चिल्लाते हुए] मादरचोद!
[मुक्कों और चिल्लाने की आवाज़]
रमाकांत : [चिल्लाते हुए] रुको! गुड्डू, बस करो। गुड्डू, जाने
गुड्डू!
[हाँफता है]
मुन्ना, अब तुम कुछ नहीं करोगे।
[फ़ोन की घंटी]
कालीन भैया एक्सेप्ट रिजेक्ट
[अशुभ धुन बजती है]
[टायर घिसते हैं]
मिर्ज़ापुर में किसी को भी दुश्मन बनाइए, लेकिन कालीन भैय??
पूरी दुनिया में, आपको यही एक केस मिला था क्या, पापा?
तो क्या करें?
बोल दें उस परिवार को कि हम केस नहीं लड़ेंगे, फट गई है हमार?
पापा।
या आप सब लोग बोलें, तो हम वकालत ही छोड़ देते हैं।
[ताना कसते हुए] वकालत छोड़ेंगे?
ऐसा केस पकड़िए जिसमें
चार पैसा भी आए
और परिवार को रिस्क ना हो।
पर ऐसे केस किसी को तो लेने पड़ेंगे ना, भैया।
दुश्मनी ना, औकात देखके की जाती है, डिंपी।
बबलू : सही बात बता रहे हैं हम।
आप बताइए हम दोनों मिलके कितनों को मार लेंगे?
और तुम क्या कॉलेज जाना छोड़ दोगी?
आज मम्मी से बंदूक चलवा दिए आप, पापा।
हम बता रहे हैं,
ये बात यहीं खतम नहीं होगी, देख लीजिएगा आप, पापा।
[गाड़ियाँ आ रही हैं]
[टायर घिसटते हैं]
[अशुभ संगीत बजता है]
[दरवाज़े पर खटखट]
डिंपी, मम्मी, अंदर जाओ।
वसुधा : कौन है?
-जाओ, जाओ। -सही कह रहे हैं भैया। अंदर चलिए आप।
-वसुधा : कौन है? -डिंपी, अंदर ले जाओ मम्मी को।
अंदर जाइए तो सही, मम्मी।
[दरवाज़े पर खटखट]
[दरवाज़े पर खटखट]
[दरवाज़े पर खटखट]
कालीन भैया बुलाए हैं।
चलिए। हम चलते हैं जहाँ भी बुलाए हैं।
आपको नहीं,
इन दोनों को।
[नाटकीय धुन बजती है]
दो मिनट दे रहे हैं।
बाहर गाड़ी में बैठे हैं।
चलें?
बेटा, मामला तो हमारा है।
परिवार को काहे खींच रहे हैं?
ये सब आपको केस लेने के पहले सोचना चाहिए था ना, पापा।
आप हमेशा आग में हाथ डालते हैं, कभी तो जलेगा।
और कालीन भैया खुद बुलाए हैं।
बताइए, कोई चारा है हमारे पास?
अगर हम नहीं गए, तो वो यहाँ आ जाएँगे।
और अगर वो यहाँ आ गए ना, पापा...
[गहन धुन बजती है]
[इंजन चालू होता है]
मिर्ज़ापुर
[अशुभ धुन बजती है]
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