Afrikaans
Akan
Albanian
Amharic
Arabic
Armenian
Azerbaijani
Basque
Belarusian
Bemba
Bengali
Bihari
Bosnian
Breton
Bulgarian
Cambodian
Catalan
Cebuano
Cherokee
Chichewa
Chinese (Simplified)
Chinese (Traditional)
Corsican
Croatian
Czech
Danish
Dutch
Esperanto
Estonian
Ewe
Faroese
Filipino
Finnish
French
Frisian
Ga
Galician
Georgian
German
Greek
Guarani
Gujarati
Haitian Creole
Hausa
Hawaiian
Hebrew
Hindi
Hmong
Hungarian
Icelandic
Igbo
Indonesian
Interlingua
Irish
Italian
Japanese
Javanese
Kannada
Kazakh
Kinyarwanda
Kirundi
Kongo
Korean
Krio (Sierra Leone)
Kurdish
Kurdish (Soranî)
Kyrgyz
Laothian
Latin
Latvian
Lingala
Lithuanian
Lozi
Luganda
Luo
Luxembourgish
Macedonian
Malagasy
Malay
Malayalam
Maltese
Maori
Marathi
Mauritian Creole
Moldavian
Mongolian
Myanmar (Burmese)
Montenegrin
Nepali
Nigerian Pidgin
Northern Sotho
Norwegian
Norwegian (Nynorsk)
Occitan
Oriya
Oromo
Pashto
Persian
Polish
Portuguese (Brazil)
Portuguese (Portugal)
Punjabi
Quechua
Romanian
Romansh
Runyakitara
Russian
Samoan
Scots Gaelic
Serbian
Serbo-Croatian
Sesotho
Setswana
Seychellois Creole
Shona
Sindhi
Sinhalese
Slovak
Slovenian
Somali
Spanish
Spanish (Latin American)
Sundanese
Swahili
Swedish
Tajik
Tamil
Tatar
Telugu
Thai
Tigrinya
Tonga
Tshiluba
Tumbuka
Turkish
Turkmen
Twi
Uighur
Ukrainian
Urdu
Uzbek
Vietnamese
Welsh
Wolof
Xhosa
Yiddish
Yoruba
Zulu
के आखिर में इसका link और thumbnail मौजूद है दोस्तों the
यहाँ मुकम्मल होता है अगर आपने ये season शुरू से नहीं देखा तो
great generals and battle series का तीसरा mini season
of Afghanistan से one की दूसरी किश्त में दिखा चुके हैं video
बिखर गया सिकंदर की कहानी तो यहाँ दोस्तों खत्म हो जाती है
लेकिन उनकी सल्तनत कैसे बिखरी ये मुकम्मल कहानी हम आपको history
नाकारा हो गया हो ये सब theories हैं क्योंकि उनकी मौत का असल सबब
मौसमों और मुल्तान में आने वाले जख्मों का फितरी नतीजा हो सकती
है। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि उन्हें कोई बीमारी हो गई हो।
जाता है कि दोनों में बहुत पैदा हो चुके थे लेकिन दोस्तों modern
गया था ये दवा वाइन में मिलाकर सिकंदर यूनानी को पिला दी गई थी
गर्मी और पानी की किल्लत का मुकाबला करते हुए ईरान जहाँ से
शहर है और ना इसके आसार सिकंदर यूनानी अपनी फौज के साथ पंजाब से
मौजूदा सुबह सिंध में दाखिल हुए उन्होंने इसके भी एक बड़े हिस्से
इर्द-गिर्द की बहुत सी आबादियों में यूनानियों के जुल्म का
और शहर को बुरी तरह तबाह और बर्बाद किया मुल्तान के
करीब से सिकंदरे आजम पर भी एक तीर चलाया जो कि उनके सीने में
मुल्तान किले पर हमला कर दिया नौजवान कमांडर सिकंदर यूनानी जोश
से पहले उन्होंने पंजाब से सिंध की तरफ अब सफर शुरू किया रास्ते
empire का headquarter था। historian के मुताबिक यूनानी
इसका दारुल हुकूमत या मौजूदा भारतीय शहर पटना था निंदा empire
मुकाबला करना पड़े तो वाकई उनके मोराल में बहुत कमी आ जाती है वो
empire निंदा सल्तनत उनसे मुकाबले की तैयारी कर रही थी ये
सिकंदरे आजम करते हुए किनारे तक पहुंचे उनकी फौज का मोराल बुरी
फौज के हौसले पस्त कर दिए थे अब वो आगे बढ़ने से कतरा रहे थे जब
राजा पूरस से जंग ने यूनानियों का एक बड़ा नुकसान बहरहाल कर
ना बनाया जाए क्योंकि इस तरह फिर उनकी आगे की में मुश्किल पेश आती
दिया आपके में रहे दोस्तों कि उस जमाने में अक्सर ये किया करते थे
बेहतरीन तबीबों से राजा पोरस का इलाज करवाया उन्हें उनकी हुकूमत
भी वापिस कर दी बल्कि इलाकों को भी उनकी सल्तनत में शामिल कर
जवाबी शख्सियत और बहादुरी ने अपना कर लिया उन्होंने अपने
इंसान थे कहा जाता है कि उनका कद सात फुट के करीब था वो जख्मी और
सामने आए इस मौके पर सिकंदरे आजम और राजा पुरस में एक तारीखी
सामने पेश गया तो उनके जख्मों से खून रस रहा था राजा पुरुष एकामत
दरमियान राजा पोरस की दीवार ढह चुकी थी की लड़ाई में तकरीबन
किसी वक्त दरिया आबूर करके बाकी फोर्सेज से आन मिली। यूँ पूरी
दरमियानी इलाके में तैनात कर रखा था। ये फौज भी लड़ाई के दौरान
यूनानी फौज दरया-ए-जहलम को अबूर कर चुकी थी जबकि राजा पोरस की
जब तक इसे यकीन था कि उसका मालिक राजा पुरुष महफूज है वो मैदान
तरफ बढ़ते हाथी उल्टा उन पर हमला करके उन्हें भागने पर मजबूर कर
और के कई जख्म लग चुके इस मौके पर वो एक तीर से कुछ देर के लिए
हिंदुस्तानी फौज दुश्मन के घेरे में आती जा रही थी लेकिन राजा
होते जा रहे थे और मैदान-ए-जंग में भटक रहे थे बिखरे हुए
मैदान छोड़ने को तैयार नहीं थे। वो अपने कुछ के साथ जंग जारी रखे
हाथियों ने अपने ऊपर सवार सिपाहियों को भी गिराना शुरू कर
ही देखते दर्जनों पोरस के हाथी अंधे हो गए या जख्मी हुए और
हाथी को अलग-अलग करके घेरना शुरू कर दिया। फिर ये तीर अंदाज
strategy बना ही ली वो यूँ कि जल्द ही यूनानी तीरंदाजों हर
पैदल दस्ते भी टकरा गए अब यहाँ दोस्तों एक तारीखी घमसान की जंग
तीर चलाने की बार-बार पोरस के सिपाहियों की कमानें फिसलने लगी
अरस्तू ने उन्हें जहर क्यों दिया अगर दिया तो इस बारे में कहा
क्योंकि उनकी मौत के फौरन बाद ही सब कुछ ताश के पत्तों की तरह
सिकंदरे आजम बाबुल चले गए बाबुल में जून तीन सौ तेईस three
उन्हें तबाह करने का बेहतरीन मौका था वो इस तरह के राजा पोरस
अपने लंबे के साथ आगे बढ़ी और हाथियों और उनके दरमियान में जो
कर दिया जब यूनानी फौज आगे बढ़ रही थी तो हिंदुस्तानियों के पास
तरफ सफर शुरू कर दिया दोस्तों सिकंदर एआजम ने पंजाब में लश्कर
यहाँ और यहाँ touch कर लीजिए यहाँ देखें कि कैसे Alexander की
एक बहुत बड़ी empire एक बिलकुल फिजूल exercise साबित हुई
कशी के दौरान एक शहर भी बसाया था जिसका नाम उन्होंने अपने महबूब
गया सिकंदरे आजम को खून में लतपत देखकर यूनानी सिपाही बिफर गए और
लगा और वो बुरी तरह जख्मी हो गए। कुछ ही देर में बाकी यूनानी फौज
एक साइड से यूनानी तीरंदाज उन पर तीर बरसा रहे थे। देखते ही देखते
पर पहुंचे सिकंदर यूनानी ने अपना मास्टर स्ट्रोक खेल दिया,
हुक्म दे दिया, ये घुड़सवार दस्ते लपकते हुए आए और
सीढ़ी टूट गई और सिकंदरे आजम किले के अंदर फस गए। मलाई
उन्होंने मुल्तान की तमाम आबादी को कर दिया मौत के घाट उतार दिया
की मौत हुई किस वजह से इस पर तारीफ में बहुत से एक थ्योरी ये
जैसे कि टाइफाइड, या फिर बहुत ज्यादा शराबनोशी से उनका जिगर
उन्होंने सेंटर के दूसरी तरफ खड़े घुड़सवार दस्तों को हुक्म
अपनी पोजीशन खाली करके बाएं जानी आ गए, जहाँ सिकंदर यूनानी
नहीं आ रहे थे क्योंकि वो तो एलेक्जेंडर ने छुपा रखे थे इसलिए
नहीं किया अब ऐसा था कि यूनानी घुड़सवार जो हमला कर रहे थे वो
तादाद में बहुत ही कम लग रहे थे अपने हाथी से राजा पोरस ये मंजर
उन्होंने तौर पर हिंदुस्तान में कोई पांच हजार छोटे-बड़े शहर
किले और देहात फतह किए थे। इन फतूहात के बाद वो सिंध से
घोड़े के नाम पर रखा था यही घोड़े के नाम से आज भी
लेकर एक सीढ़ी के जरिए किले के अंदर खुद कूद गए लेकिन इस दौरान
मलाई बाशिंदों ने हथियार डालने से इंकार कर दिया सिकंदरे आजम ने
के किनारे पर हुई थी बहरहाल दोस्तों सिकंदर एआजम ने अपने
लेकिन ये है क्योंकि सिकंदर-ए-आजम कभी दरिया ए गंगा
इराकी शहर बाबुल जाने का फैसला किया जो कि उस वक्त उनके एशियाई
लालच भी बहुत दिए लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। आखिर सिपाहियों
यूनानियों में फतह था उसे कुछ ही दूरी पर बसाया था लेकिन अब ना ये
निशाना बने सिकंदरे आजम को शरीद जख्मी हालत में उनके खैमे में ले
गए जख्म भरने के बाद सिकंदरे आजम ने अपनी फौज के साथ अब बाबुल की
जीत भी रहे हैं क्योंकि ये जीत आसान जीत नहीं होती तो यूनानी
सिपाहियों ने आगे बढ़ने से अब इंकार कर दिया और घर वापसी की
बाजू पर जिसके रथ बेकार हो चुके थे उसके पीछे खड़े घुड़सवारों पर
दस्ते खड़े थे। घुड़सवार दस्तों के आगे रथ खड़े थे दरमियान में
यूनानी के कमांड में कुछ घुड़सवार दस्ते सामने खड़े रहे
हिंदुस्तानी ताकत का मुकाबला करना है। तो उन्होंने बगावत कर
यूनानियों को पता लगा कि अब उन्हें एक और बहुत बड़ी
बासिंदो ने उन पर पूरी ताकत से हमला कर दिया सख्त मुकाबला हुआ।
सिकंदरे आजम के कई साथी मारे गए। इस दौरान एक मलाई तीरंदाज ने
में एक बड़ी गलती कर बैठे। वो अपने साथ मुट्ठी भर सिपाहियों को
भी कुछ आसान किस्म के फतूहात करना चाहते थे हिंदुस्तान छोड़ने
फोर्सेज के लिए खुल गए थे मगर हिस्टोरियन प्रोटोकॉक के मुताबिक
रहे। राजा पुरुष की शिकस्त के बाद हिंदुस्तान के दरवाजे यूनानी
की हुकूमत और बाद की कई की हैसियत से उनके साथ शामिल भी
में मुल्तान पड़ता था जब वो मुल्तान पहुंचे तो मुल्तान के
सिपाहियों ने गंगा पार करने से इनकार करते हुए बगावत की थी
दूर खड़े हिंदुस्तानियों को यही अंदाजा हो रहा था कि
पास पहुंचे तो तब उन्हें समझ लग गई कि धोखा हो गया है। यूनानी
गिरफ्तार करके उसके सामने पेश करें ये फौजी राजा पुरुष को
सलूक किया जाए राजा पूर्णस ने जवाब दिया वही जो एक बादशाह
सिकंदरे आजम ने अपने सिपाहियों को भेजा कि वो राजा पुरुष को
जिद करने लगे सिकंदर यूनानी ने उन्हें कायल करने की बहुत कोशिश
की जिद के सामने सिकंदर यूनानी ने हथियार डाल दिए। उन्होंने
तरजीह देती हैं उन्हें बड़ी फौजों ताकतवर अम्पायर्स का
अपनी है इसमें exaggeration है तो साथियों जंग जितने के बाद
पर बहुत ज्यादा भरोसा नहीं किया जा सकता इसलिए ये तादाद यकीनन
आप जानते हैं कि इस जंग की तारीख तो ने लिखवाई थी और लिखी तारीख
कर सकती थी यूनानियों ने अपनी पहली झड़प जीत ली थी जिससे उनके
दिया ये राजा की बहुत बड़ी गलती साबित हुई। ये फौज यूनानी
तवज्जो बटाने के लिए कोई छोटा-मोटा दस्ता दरिया के पार
सोचकर उन्होंने अपने एक बेटे को महज दो हजार सिपाहियों और एक सौ
के पास राजा पोरस से भी कहीं बड़ी तादाद में फौज थी जब
थी तो यही उन्होंने राजा पोरस के साथ किया राजा पूर्णसमीज-ए-आजम
तरह गिर चुका था दरिया के पार हिंदुस्तान की एक और ताकतवर
ताकि बड़ी-बड़ी सल्तनतों को या बड़े-बड़े राजाओं को अपना दुश्मन
फौज शिकस्त खाकर भाग रही थी हिंदुस्तान और सिकंदर-ए-आजम के
सिपाही जो यूनानी कैंप के सामने तैनात थे उन तक भी जब शिकस्त की
पीछे हटते ही सारी हिंदुस्तानी फौज भी पसपा हो गई राजा के वो
उतर जाए शायद यही भी उसकी training का हिस्सा हो दोस्तों
जख्मी हो चुका और किसी भी वक्त नीचे गिर सकता है तो वो घुटने
में डटा रहा उलटे कदमों नहीं भागा जो यूनानी सिपाही राजा की
दूसरे बादशाह से करता है सिकंदर एआजम को राजा पोरस की हाजिर
कैद की हालत में भी एक राजा की तरह अंदाज में सिकंदर यूनानी के
का कत्लेआम शुरू कर दिया सिकंदर ए आजम ने एक तीसरी फौज को भी
दिया करता लेकिन जब हाथी को एहसास होने लगा कि उसका मालिक
से पहले अब मैदान-ए-जंग से निकल जाए राजा पुरुष ने उनका मशवरा
राज खुल गया उस वक्त तक सुबह हो चुकी थी हिंदुस्तानी फौज तो जरूर
रहते थे। ऐसे ही एक घुड़सवार दस्ते ने यूनानी फौज को देख लिया
मुताबिक राजा पुरुष का हाथी बहुत जानवर था इसकी खास तरबियत हुई थी
यूनानी फौज दरियाबूर कर गई सिकंदर ए आजम को फायदा ये हुआ कि
लगा लेकिन एक हाथी अभी तक मैदान-ए-जंग में डटकर खड़ा था।
ये झेलम के राजा पोरस का हाथी था जिस पर वो खुद सवार थे अगर
हिंदुस्तानी फौज को बेपनाह नुकसान पहुंचाया आज भी हाथी
बेहोश भी हुए लेकिन मैदान से नहीं हटे historian protocol के
ही पैदल फौज को रौंदते हुए सरपट पीछे को भागे इन हाथियों ने
आपका अपना ही आपको नुकसान पहुंचाने लग जाए बहरहाल हाथियों
उन्हें कंट्रोल करने वाले महावत भी मारे जाने लगे अब ये हाथी
तलवारों से उनके और पैरों को निशाना बनाना शुरू किया। देखते
थे ऐसे में सिकंदर यूनानी ने भी हाथियों से निपटने की एक
के सिपाहियों के जिस्मों में कर उन्हें हलाक कर दिया हाथियों पर
पास पहुंच गई। यूनानियों ने अपनी कश्तियां पहले ही जजीरे के पास
तो मालूम हुआ कि जिसे वो मेन land यानी दरिया के पार वाली
फौरी तौर पर अपनी घुड़सवार फौज को राजा पोरस की फोर्सेज की तरफ
हाथियों को चलाने वाले महावतों को ही निशाना बनाने लगे और
हाथियों की आंखों में चुभोने लगे। कुछ सिपाहियों ने अपनी
उन्हें हाथियों से गिराने लगे। दूसरी तरफ के दस्ते अपने लंबे
लिए खास तौर पर ट्रेनिंग दी गई थी दुश्मन का जो सिपाही उनकी जद
और उनका निशाना खता होने लगा so ये बेहतरीन कमानें बदकिस्मती से
हुई जिसमें राजा पोरस के सिपाही जी जान से लड़े इस दौरान पोरस के
यूनानियों को सख्त नुकसान पहुँचाया जा सकता था। लेकिन इन
कमानों में एक टेक्निकी मसला था। वो ये कि कमानों का निचला हिस्सा
लेकिन जमीन तो आप जानते हैं कि दलदली हो चुकी थी वहां पर कमान
किसी को मालूम नहीं हाँ ये मालूम है कि सिकंदर ए आज़म की और उनकी
सिकंदर-ए-आजम की मौत थका देने वाली जंगों पर आए देशों के बदलते
बचते हुए कामयाबी से आगे बढ़ती रही और इसके बाद दोनों तरफ से
जमीन पर पटकते थे कई हाथियों ने तो अपने लंबे दांतों को दुश्मन
राजा पोरस की कोई मदद ना कर सकी यूनानी फौज उनके तीरंदाजों से
सिपाहियों को साथ लिया और उस जजीरे की तरफ सत्ताईस किलोमीटर
इधर चल पड़े जहाँ से दरिया उन्होंने करने की प्लानिंग की थी
फौज कैंप में ही मौजूद है कहीं नहीं गई ये सारे इंतजामात करने
historians जहर की थ्योरी को सच नहीं मानते। उनके ख्याल में
थे उन्होंने एक जहरीली दवा तैयार की थी जिसे यूनान से बाबुल भेजा
है कि उनके उस्ताद अरस्तू जो कि उस वक्त जिन्दा थे और यूनान में
गया उनके आखिरी बेहोशी की हालत में गुजरे असल में सिकंदरे आजम
जमीन पर रखकर ही तीर चलाए जा सकते थे। इन कमानों की तकनीक ऐसी
बहुत बेहतर थी इन कमानों तीरों की बारिश करके आगे बढ़ते हुए
की फौज के पास बड़ी-बड़ी कमानें थी जो यूनानियों की कमानों से
सौ-सौ फीट का गैप था उससे गुजरकर हिंदुस्तानी infantry पर भी हमला
हिंदुस्तानी घुड़सवार और उनके रथ दो से घेरे में आ चुके थे। जबकि
चुके थे। सिर्फ सेंटर वाली पैदल फौज और उसके सामने खड़े हाथी यही
twenty three BCE में बत्तीस वर्ष की उम्र में उनका इंतकाल हो
बलूचिस्तान के रास्ते ईरान की तरफ बढ़े उनकी फौज बलूचिस्तान की
पर कब्जा किया फिर वो सिंध में सफर करते हुए अरब तक भी पहुंचे।
पाकिस्तानी पंजाब का हिस्सा है दूसरा शहर जिसका नाम यानी
जाया गया यहाँ तबीबों ने उनके जिस्म से तीर निकाल लिया लेकिन
भी किसी तरह किले के अंदर दाखिल हो गई जंग के बाद किला फतह हो
खून बहुत बह चुका था जख्म भरने और सेहत बहाल होने बहुत दिन लग
के पास पहुंचे ही नहीं थे। यूनानी फौज की बगावत यहाँ पंजाब
दाएं तरफ वाले हिन्दुस्तानी घुड़सवार और उनके पीछे मौजूद रथ
सिपाहियों से वापसी का वादा तो कर लिया था लेकिन वो लौटते हुए
पैदल दस्तों से निपटने में उन्हें कोई मसला नहीं होगा, यूँ
ये। और इससे आगे खड़े रथों पर तीरों की बारिश कर दी कुछ ही देर
हिंदुस्तानियों का राजा पुरुष की फौज का दायां और बायां बाजू टूट
बाकी थे यूनानी घुड़सवार दस्तों ने दाएं और बाएं side से
हिंदुस्तानी फौज के अकब से चक्कर लगा बाएं जाने पहुँच गए उन्होंने
हिंदुस्तानी घुड़सवारों पर पीछे से हमला कर दिया। अब ये
यूनानियों वाली साइड पर एक घना जंगल था ये जंगल यूनानी फौज को
alert अब नहीं रही थी तो एक रात सिकंदर-ए-आजम ने अपने मंसूबे पर
दी याद दोस्तों कि फौजें जो लंबी-लंबी के लिए बरसों मुल्क से
बाहर रहती हैं उनमें एक मसला ये होता है कि वो आसान करने को
सल्तनत मशरिक में बंगाल से लेकर मगरिब में पंजाब तक फैली हुई थी
ढूंढ निकाला। जहाँ के अंदर एक जजीरा था। इस जजीरे के दोनों
रोज थकाने का कोई फायदा नहीं। उनका प्लान अब कामयाब हो रहा था
राजा पोरस ने अपनी फौज को रोजाना अलर्ट होने से बंदी करने से रोक
दिया था इस लड़ाई और हिन्दुस्तानियों की ने यूनानी
जख्मी हालत में गिरफ्तार करके ले आए जब उन्हें सिकंदर ए आज़म के
मुकालमा हुआ थे Alexander ने पूछा बताओ तुम्हारे साथ क्या
पर पहुँच गई मगर यहाँ भी Alexander ने एक जबरदस्त चाल चली
पैदल फौज थी और पैदल फौज के आगे हाथी थे, हाथियों के दरमियान में
ये एक बड़ी फ़ौज राजा पोरस की आर्मी सिकंदर-ए-आज़म के मुकाबले
सौ-सौ फीट की खाली जगह थी जहाँ से पैदल दस्ते आगे बढ़कर हमला कर
देख रहे थे उन्हें दुश्मन के बाएं बाजू के घुड़सवार भी नजर
हो रहे थे रथों की ये फ़ोर्स बेकार गई थी इसके बाद इसके अंदर
खड़ा कर दिया सिर्फ center में पैदल फौज और दाएं तरफ सिकंदर
बारह हजार हिंदुस्तानी सिपाही हलाक और नौ हजार गिरफ्तार हो गए।
जबकि यूनानी फौज का नुकसान एक हजार बताया जाता है मगर दोस्तों
अपने कैंप और जिस जगह से उन्होंने दरिया किया उसके
यूनानी फौज ने भी अबूर किया और भागते हुए हिंदुस्तानी सिपाहियों
खबर पहुंची तो वो भी भाग निकले यूँ दरिया पार कैंप में मौजूद
दरिया एहलम के किनारे छोड़ दिया ताकि वो camp वाले यूनानियों को
और तनो मन और ऊँचे हाथी पर सवार थे इस बुलंद position से वो
यूनानियों के मुकाबले के लिए निकल पड़े वो खुद भी एक ताकतवर
मान लिया वो अपने हाथी पर ही मैदाने जंग से रवाना हुए थे उनके
कोई फायदा नहीं खैरियत इसी में है कि दुश्मन का घेरा तंग होने
भी टूटने लगे राजा के कुछ ने उन्हें समझाया कि अब लड़ाई का
हाथी के बैठने के बाद राजा पोरस के बचे कूचे सिपाहियों के हौसले
छुपा दिया यानी कुछ पीछे दरख्तों वगैरह में उसकी ओट में जाकर उसे
हजार घुड़सवार दस्तों को लेकर और तमाम हाथियों को साथ लेकर
रोज-रोज की बंदी हो रही है ये हमें सिर्फ तंग करने के लिए है।
बारिशों का मौसम गुजरने से पहले हमला नहीं करेगा यानी ये जो
टिकाकर जमीन पर बैठ गया ताकि पोरस उसके राजा गिरे नहीं बल्कि
हुए थे इस दौरान उनका दूसरा बेटा भी मारा गया राजा पोरस को तीरों
हौसले बुलंद हो चुके थे मगर दोस्तों सिकंदर ए आजम को एक
वजह से दरिया के करीब जमीन दलदल हो चुकी थी इस जमीन पर chariots
हो गई, charits की तबाही की एक वजह ये भी थी कि रात भर बारिश की
पड़े। उन्होंने दुश्मन को घेर कर उसका सफाया कर दिया चार सौ
दोस्तों एक है जिसे उस वक्त इस्तेमाल किया जाता है जब कोई
के मैदान-ए-जंग से हटने के बाद यूनानियों का पलड़ा भारी होने
दिया सामने से आते बेशुमार तीरों से बचने के लिए हाथी मुड़कर अपनी
बैठे हुए सिपाही भी यूनानियों पर तीरों और की बरसात करते जा रहे
में आता वो उसे कदमों तले रौंद डालते जो अपनी सूंड में लपेट कर
हाथियों ने यूनानी फौज को बेहद पहुंचाया। इन हाथियों को जंग के
फौज का बड़ा हिस्सा तो किसी और जगह से दरिया पार कर भी राजा
यूनानी कैंप वाली सारी फौज दरिया पार करके हम पर चढ़ाई करते ये
नुकसान बहरहाल हुआ कहा जाता है कि उनका मेहबूब घोड़ा भी इस झड़प
थी लेकिन उसके घुड़सवार दरिया के साथ मामूल की patrolling करते
मुताबिक फौज को से की किनारे तक ले आए। लेकिन यहाँ आते ही उनका
इस सफर के दौरान धन गरज के साथ तूफानी बारिश का आगाज हो गया इस
पोरस के सभी जर्नल्स ये समझने लगे कि दुश्मन मोनसून के लिए
हुए चकड़ों के चकड़े यूनानी कैंप में पहुंच रहे हैं इन रिपोर्ट से
किनारे पर पेट्रोलिंग किया करते थे वो रोज देखते कि खुराक से लदे
भेज दिया है ताकि जैसे ही हम उस दस्ते की तरफ जो हों सामने
पूरी जंगी चाल अब भी नहीं समझे वजह ये थी कि सारी यूनानी फौज तो
उनके सामने अपने कैंपस में मौजूद थी उन्हें लगा कि दुश्मन ने उनकी
कश्तियों के बजाय अपने घोड़ों पर ही पानी में सफर शुरू कर दिया
जमीन समझ रहे थे। वो असल में एक और जजीरा था। जो दरिया-ए-जह्लम
में ही था। मतलब थे तो वो दुरुस्त रास्ते पर बस दूसरा
जारी रखा। बल्कि उन्होंने गहराई का अंदाजा के बाद उस जगह
फिसल जाती थी so कीचड़ ही कीचड़ था चारों तरफ और इस कीचड़ में
थी इनकी बनावट ऐसी थी लेकिन इसके लिए जरूरी था कि जमीन खुश्क हो
हिंदुस्तानी infantry पर हमला कर दिया। सामने खड़ी सेंटर वाली फौज
हिंदुस्तानी और उनके बचे-कुचे रथों का भी सफाया हो गया
उन्होंने अपने पीछे छुपे हुए घुड़सवार दस्तों को हमले का
हिन्दुस्तानी घुड़सवारों से लड़ रहे थे, जैसे ही ये सवार उस साइड
करके वो सिकंदर की थोड़ी सी घुस फौज को तो हरा लेंगे, जिसके बाद
वहां लड़ने वाले घुड़सवारों की मदद करें उनका ख्याल था कि ऐसा
दिया कि वो अपनी positions छोड़कर फौरी बाएं जानी पहुंचे और
हमला कर दिया लेकिन सेंटर वाली पैदल यूनानी फौज ने कोई हमला
यूनानी ने अपने घुड़सवार दस्ते आगे बढ़ाए और हिंदुस्तानी बाएं
वो आनन-फानन पलटे और राजा पोरस के पास पहुंचकर दुश्मन की आमद की
बारिश और बादलों के शोर के दौरान यूनानी फोर्सेज की पेशकदमी का दब
जजीरा उनके नजरों से अब तक ओझल रहा था लेकिन जाहिर है ये कोई
में रथों के घोड़े और उनपर मौजूद सिपाही मारे जा चुके थे या फरार
हरकत ये घोड़ों पर सवार थे और दुश्मन के बाएं बाजू की तरफ बढ़े
सिकंदर-ए-आजम ने सबसे पहले लड़ाई करने के बजाय तीर अंदाजों को
की तरतीब अब सुने कि वो यूँ थी कि दाएं और बाएं तरफ घुड़सवार
सकते थे। इसी तरतीब के साथ राजा पोरस ने हमला कर दिया
सिकंदर-ए-आज़म के पास बहुत ही कम है अंदाज़े से हिंदुस्तानी फौज
बाद से दोस्तों यूनानी घुड़सवार दस्ते और पैदल सिपाही रोजाना
हिंदुस्तानी फौज भी वहां साथ-साथ पहुंच सकती थी सो दरियाबूर करने
इन parts को दोबारा जोड़ा गया और कश्तियों को मुकम्मल कर लिया गया
भी इसीलिए सख्त परेशान थे उन्होंने थोड़ी सी भाग दौड़ की
बढ़ने का हुकुम दिया था घुड़सवार आगे बढ़े लेकिन उन्हें हैरत का
अंदाजे की कैलकुलेशन की मामूली सी गलती भी पलट करती है। यूनानी
क्या वो रास्ता भटक गए हैं जंग में दोस्तों आप जानते हैं कि
झटका लगा उनके सामने एक और बिखरा हुआ दरिया खड़ा था यूनानी
उन्होंने अपनी फौज के बाएं बाजू left wing को दुश्मन की नजरों से
मैदान-ए-जंग की सूरत-ए-हाल पर नजर रखकर जारी कर रहे इस तरह अब
दरिया पार करने से रोकते रहे इसके बाद वो बीस हजार पैदल और दो
पुरुष ने अपनी फौज का एक बड़ा हिस्सा यूनानी camp के सामने
में एक तीर लगने से मारा गया हिंदुस्तानी सिपाही राजा पोरस के
दरिया करने लगी। कुछ ही घंटों साथियों ज्यादातर यूनानी फौज और
कश्तियां दरिया में डाल दी गई और यूनानी फौज इन कश्तियों के जरिए
जल्द ही यूनानी फौज अपनी मंजिल पर पहुँच गई यानी उस जजीरे के
यूनानियों के नजदीक पहुंची सिकंदर के घुड़सवार उनपर टूट
के पहिए धंस जाते थे, फस जाते और वो तेज रफ़्तारी से हमला ही नहीं
हिंदुस्तानी सिपाही और का बेटा मारे गए तमाम chariots भी तबाह
फोर्सेज से बहुत ही कम थी जैसे ही ये हिंदुस्तानी फोर्सेज
मौजूद जंगल में छुपा दी थी अब सिकंदर ए आज़म के हुकुम पर ये
के बाद उन्होंने पाँच हजार घुड़सवार दस्तों और दस हजार पैदल
अमल शुरू कर दिया उन्होंने अपना शाही दरिया के करीब ऐसी जगह नस्ब
दूर तक छोटी-छोटी चौकियां कायम कर दी इन चौकियों में तैनात
अपनी कश्तियां अटक के करीब ही कुछ सिपाहियों के साथ में छोड़
मौजूद था so राजा पोरस ने अपनी position के इर्द-गिर्द मिलों
बीस रथों यानी चेरियर्स के साथ यूनानी फौज से लड़ने के लिए भेज
खबर दे दी लेकिन दोस्तों राजा पोरस इस खबर से alexander की
सकते थे के बाहर फौजी भी तैनात कर दिए गए ताकि देखने वाले को
भी गाफिल होने लगी। सबको यकीन था कि जंग में अभी देर है। खुद को
अलावा रोशन करें जिनसे दुश्मन को यही तासुर मिले कि पूरी यूनानी
गया और किसी को सुनाई नहीं दिया यूँ सिकंदर यूनानी अपने प्लान के
पैदल सिपाही भी गर्दन तक बहते पानी में उतर गए यूँ ये पूरी
इतना बड़ा मसला तो नहीं था। सो यूनानी फौज ने दरिया क्रॉस करना
सिपाहियों को समझ नहीं आ रही थी कि ये दूसरा दरिया कहां से आ गया
सबसे बड़ी बात ये कि जजीरे पर और दरिया के मगर भी किनारे पर यानी
यूनानी का प्लान धीरे-धीरे कामयाब हो रहा था राजा पोरस अपनी
जगह हो रहे थे कि हमला मूनसून के बाद ही होगा की फौज भी ज्यादा
खासतौर पर घुड़सवार दस्ते दरिया आबूर कर चुके थे सिकंदर ए आजम ने
अपनी फौज को हुक्म दिया कि वो कैंप में मामूल के मुताबिक आग के
लगे कि यूनानी बादशाह अंदर ही मौजूद हैं इसके बाद उन्होंने
में दोस्तों हिंदुस्तानी फौज राजा पोरस की फौज अब जरा भी
किनारे पेट्रोलिंग करने वाले पोरस के सिपाही और उनकी चौकियां
खुराक जमा कर रहा है इसका मतलब उन्होंने ये निकाला कि वो
जानिब का पार्ट बहुत कम चौड़ा था। गहराई भी ज्यादा नहीं थी
कर दिया जहाँ से किनारे पर मौजूद हिंदुस्तानी फौजी उसे आसानी देख
हिंदुस्तानियों की नजरों से छुपाने के लिए काफी था सिकंदर
यानी infantry थी चार हजार four thousand votes यानि थी इसके
हजार fifty two thousand हो चुकी थी इस फौज के मुकाबले में राजा
seven thousand गैलरी शामिल थी इसके अलावा उनके इतिहादी एक्सला
Azam की यही तारीखी लड़ाई दिखाएँगे
शाम से पहले वापिस जाने की acting करते रहे। इसके मुकाबले
दरअसल यूनानी फौज तो अपना खुराक और पानी का सामान जमा कर रही है।
बकायदा शुरू कर दी। दस्तों ने दरिया के साथ-साथ सफर करना और
अपने camp से सत्ताईस twenty seven किलोमीटर दूर एक ऐसा मुकाम
किसी बेहतर मुकाम की तलाश करने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने
कमांडर्स ने जह्लम को अब एक और तरफ से cross करने की planning
लगाते ऐसा देते कि बस भी दरिया में कूद पड़ेंगे और हमला शुरू हो
जाएगा। ऐसा मंजर देखकर हिंदुस्तानी फौज के सिपाही भी
दिए थे। जो हिंदुस्तानी सवार यानी राजा पोरस के साथी दरिया के
दिया। मगर यूनानी उसी तरह रोज निकलते रहे नकारे बजाते रहे और
alert नहीं होती थी फिर एक और तब्दीली ये आई कि दरिया के
ने किनारे पर मुख्तलिफ देहात वगैरह से खुराक के भी जमा करने
बेफायदा मश्क से हिंदुस्तानी सिपाही आहिस्ता-आहिस्ता तंग आने
लगे। दूसरी तरफ सिकंदर-ए-आजम के हुकुम पर यूनानी घुड़सवार दस्तों
सिपाहियों को भी फिर थक हार कर पीछे हटना पड़ता। रोजाना के इस
दरिया के किनारे खड़े हो जाते जंग के नकारे बजाते बुलंद नारे
यूनानी फोर्सेज तो अपने कैंप में लौट जाती। और हिंदुस्तानी
जवाब में अपनी बंदी शुरू कर लेते लेकिन होता ये कि काफी देर बाद
ना सके मौजूद ना हो वहाँ से पार कर लिया जाए। सिकंदर यूनानी ने
हुक्म दिया कि इन कश्तियों को अलग-अलग हिस्सों में तोड़कर
की मौजूदगी में दरियाबूर नहीं हो सकता था। और अगर यूनानी फौज अपना
आए थे। so इसका हल ये निकाला गया कि उन्होंने अपने सिपाहियों को
लिए को अबूर करना एक challenge बन चुका था तो क्या उन्होंने ये
था और तूफानी बारिशों की वजह से बिखरा हुआ था। सिकंदर यूनानी के
राजा पोरस अपनी फौज के साथ मौजूद हुए। ये दोस्तों monsoon का मौसम
हर रोज ऐसा दे जैसे वो दरियाबूर करने ही वाले हैं। इस हुक्म के
हुक्म जारी किया कि यूनानी फौजी दस्ते दरिया के किनारे खड़े होकर
ग्रीक आर्मी मूनसून खत्म होने तक दरियाबूर नहीं करेगी, यहीं रहेगी
का सिर्फ एक तरीका था कि राजा पुरुष को ये धोखा दे दिया जाए कि
लेकिन मसला यही था कि राजा पूरस की फ़ौज की मौजूदगी में, हाथियों
और फिर इस दौरान किसी ऐसी जगह से चुपके से जहाँ हिंदुस्तानी फौज
कैंप छोड़कर किसी और जगह से दरियाबूर करने की कोशिश करती तो
लेकिन किसी भी सूरत आगे बढ़ने के लिए alexander को दरया-ए-जह्लम
इस तरीके पर अमल करने का प्रोग्राम बना लिया। उन्होंने
करने की कोशिश की तो उनके घुड़सवार दस्ते तबाह हो जाएंगे
हिंदुस्तानी सिपाही चौबीस घंटे यूनानी फौज पर नजर रखे हुए थे
ये दो हैकल जानवर जब इधर-उधर चलते-फिरते और तो दरिया के दूसरी
तो करना ही करना था। और इसके लिए उन्हें बहुत बड़ी तादाद में
तरफ यूनानी फौज के घोड़े खौफजदा होकर लगते सिकंदर-ए-आजम को यकीन
बैलगाड़ियों पर लादकर के किनारे ले आया जाए। so ले आई गई। यहाँ
मजबूत किस्म की कश्तियां भी चाहिए थी मगर मसला ये था कि वो
हो चला था कि अगर उन्होंने इन हाथियों की मौजूदगी में दरिया
हाथी दरिया के साथ यूनानी फौज के बिल्कुल सामने तैनात कर दिए थे
करना चाहे तो उसे रोका जा सके ने एक और इंतजाम ये किया था कि अपने
patrolling भी करते रहते थे ताकि कहीं से भी दुश्मन दरिया पार
ये हासिल था कि monsoon की बारिशों ने दरया-ए-जहलम को आरजी
फौज राजा पुरुष से ज्यादा थी यहाँ राजा पुरुष को एक advantage
तौर पर यूनानी फौज के लिए नाकाबिले बना दिया था। जिसकी वजह
मुमकिन ही नहीं three twenty six BCE में के मगरबी किनारे पर
की तरह हो गए उन्हें शिकस्त दिए बगैर Alexander की फौज
इससे आगे उनकी रफ़्तार को और के दरमियानी इलाके के हुक्मरान राजा
सामने और झेलम के दरमियानी इलाके में टेक्सला या तक्षशिला की
इसके अलावा हिंदुस्तानी घुड़सवार दस्ते दरिया के साथ-साथ
thousand के करीब बनती थी यानी मामूली फर्क से सिकंदर-ए-आजम की
अलावा उनके पास कम से कम एक सौ तीस हाथी और तीन सौ रथ यानी
से राजा पोरस के पास अपनी फौजी अमली तरतीब देने का काफी वक्त
लेक्जेंडर झेलम की जंग के लिए जो लश्कर लाए थे उसमें तकरीबन चालीस
हिंदुस्तान फतह करने का ख्वाब राजा Purus को शिकस्त दिए बगैर
challenge कबूल किया। राजा पुरुष ने सिकंदर यूनानी की को रोका तो
हरणपुर के इलाके में यूनानी फौजन हो गई। जबकि दरिया के किनारे पर
chariots भी मौजूद थे ये तमाम फौज मिलाकर पचास हजार fifty
हजार पैदल सिपाही forty thousand infantry सात हजार घुड़सवार यानि
मदद के लिए साथ भेजे थे इन सब को मिलाकर यूनानी फौज की तादाद बावन
season three की तीसरी किश्त में हम आपको Raja Porus और Sikandare
पोरस के पास झेलम के राजा के पास हजार thirty five thousand पैदल
के राजा ने भी पांच हजार हिंदुस्तानी सिपाही सिकंदर की
या उन्हें रास्ता देने से इंकार कर दिया सो अब सूरते हाल ये हुई
लेकिन अपनी फौज और हथियारों के साथ सिकंदर ए आज़म समझ गए कि
पैगाम भेजा कि के किनारे आकर मुझसे मिलो और सर झुका दो राजा
पोरस ने ब्रेक लगा दी राजा पोरस ने सिकंदर-ए-आजम के सामने झुकने
सल्तनत थी इस सल्तनत के राजा अंबी ने सिकंदर यूनानी की कबूल
फतह ही उनका मिशन था वो आगे बढ़े और मौजूदा खैबर पख्तूनख्वा का
Porus ने जवाब भेजा कि हाँ मैं दरिया के किनारे आ तो रहा हूँ
हिंदुस्तान में आगे नहीं बढ़ सकती थी commander ने उन्हें
रोका कैसे? मैं हूँ और के generals and battle series
हिंदुस्तान तक आ चुके थे और यहाँ से आगे हिंदुस्तान की मुकम्मल
सल्तनत ताश के पत्तों की तरह बिखर गयी थी
के empire यूरोप से एशिया तक फैल चुकी थी वो शुमाल मगर भी
कि राजा पोरस हिंदुस्तान और सिकंदर यूनानी के दरमियान दीवार
रीजन फतह करने के बाद अटक की तरफ से करके पंजाब में दाखिल हो गए
कर ली थी यहाँ तक alexander के लिए सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन
तीन सौ छब्बीस three twenty सिक्स बीसीई में सिकंदर यूनानी
Can't find what you're looking for?
Get subtitles in any language from opensubtitles.com, and translate them here.