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सुमिगन कर ले मनगा
श्री राम का
सुख राम का शिव
शंकर ने जाप किया था दो वक्षर
भजन राम के नाम का सुमिरन
करने मनवा श्री राम का
सुखधा
प्राचीन भारत के दक्षिन में लंका नाम के एक द्वीप में एक दुष्ट राजा रावन रहता
था। इसका नीच उद्देश था सारे संसार को जीतना और सारे
लोगों को अपना दास बनाना। और उत्तर भारत के कौशल राज में
दयालू राजा दश्रत की प्रजा फल
भ
कि राजा दशरत का कोई उत्राधिकारी नहीं था। वशिष्ठ
मुनी के आदेश पे दशरत ने संतान की प्राप्ति के लिए एक विशेष यग्य
करवाया। उसके फल स्वरूप उनकी तीन राणियों ने चार पुत्रों को जनम दिया।
उनमें सबसे बड़े थे राम। इस क
राजा दशरत की पटरानी कौशल्या जब जब पृत्री पे कोई बड़ी आपत्ती
आती है भगवान विश्णू स्वर्ग से उतर कर धर्ती पे आते हैं उस
आपत्ती से जीव जन्तुओं को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विश्णू ने दस अवतार दिये हैं
विश्वा राम की
पंदर वर्ष की आयू में रावन अपनी शक्ती के शिकर पे था। रावन के मामा मरीश ने
और इसकी माने मुनी विश्वामित्र के नाक में दम किया हुआ था। ये मुनी अयोध्या की
सीमा के पास एक जंगल में रहते थे। ये राक्षस विश्वामित्र की प्रातना
ओम् अग्नि मीले पुरोहितं यद्न्यस्य देवं रुत्विजं हो तारं
रत्नधातमं ओम् अग्नि एस्वाह भिदंधमं अग्नि
पूर्वे भिरुजि भिरिण्ड्यों नुगने रुत्वं तत्ति वाँ एह भत्तं
ओम् अग्नि एस्वाह भिदंधमं
ए विश्णु भगवान, क्या यहाँ कोई भी नहीं जो रिशियों को बचाए इस विपत्ती से?
है, उसका नाम है राम, आयोध्या के राजा दशरत का बड़ा राजखुबार.
हे महा मुनि आपके आने से मेरी ये सवा धन्य हो गई कही मैं आपकी क्या सेवा करूँ आपकी
आज्या पालन करना मेरा धर्म है हे सूर्य वन्श के महान राजन दश्रत राक्षसोंने
पवित्र धर्ती का नाश कर दिया है हम बड़े संकट में हैं उन्हें मारने के लिए
मुझे
मैं स्वैं चल के उन पाफियों को मिटा दूंगा इस धर्ती से। ये आज्या मुझे स्वैं भगवान
ने दी है। और राजन, तुम इसे चुक्रा नहीं सकते है। दर्शमन से। यही तो इनके साथ राम
और लक्षमन है। विश्वामित्र बल्वान और बुद्यमान
है।
सार
ए रिशी विश्वा मित्र, मैं अपनी बेटों को आपको सौपता हूँ, इने शिक्षा और साहस
देजिये। सुखी रहो राजा दश्रत, तुम्हारे इस निर्णय ने बचा लिया पूरे संसार को। मुनिवर
जो भी हमको आज्या देगे वो पिता समान होगी। मुनिवर के इ
जानते हो कभी ये बहुत सुन्दर वन था पर अब इसका नाश हो गया है उस दुष्ट ताड़का नाम
की एक भयानक राक्षसी के कारण उसका दुष्ट बेटा दूसरे राक्षसों के साथ आकर
पवित्र अगनी को ब्रिष्ट करता है राम तुम्हे ताड़का को मारना होगा
छूले न पाही नो देवी पाही घटके
न चाम्बिके घंटा स्वनेन न पाही
मंत्र पढ़ो, मंत्र जपो
बहुत बरस पहले इसी स्थान पर मेरी कठिन और घोर तपस्या के बाद
देवताओं ने मुझे शस्त्र विद्या में पूरी तरह इनिपुन बनाया। अब समय आ गया है
कि मैं इन दैविय शस्त्रों को किसी उचित मुरिश को सौंप दू।
ये लो राम,
इनका सही उपियोग क
अब ये तुम्हारे हिन से सदा धर्म की रक्षा करना
है।
यह
वो, इसी मानव ने मेरी माँ को मारा है। मैं इसे मार कर मा के खून का बदला लूँगा मैं
कतम खाता हूँ
आपने दैवी शस्त्र प्रयोग किया, उसे तुरंद कैसे चला पाया आप? ये सब दैवी शस्त्र हैं.
राम को इनका प्रियोग सीखने की आवश्यकता नहीं.
गुरुदेव, मुझको प्रयोग बताईए इस चक्र का. वो भी सीख लोगे, परन्तु जो काम तुमको करना
है, ध
इसकी दोरी चढ़ा देगा राजा जनक उसे एक अनोखा उपार देंगे
विजेता का राजकुमारी सीता के साथ विवाह कर दिया जाएगा
जगधरा सवारा प्रदेश की
श्री
राम अयोध्या के राजकुमार
कुछ वर्ष बीते अयोध्या फलती फूलती गई नर
नारी अपने राजकुमार और भावी राजा से अत्यंत प्रेम करते थे। चारों भाई
मिल जुल के रहते थे। उनका भविष्य सुखद आशाओं से भरा हुआ
था। सपने में मुझे एक बहुत बहावना भविष्य दिखा। गुरु वशिष्ट
का भी मत है कि आने वाला समय कठिन है। मेरा स्वास्त
इसलिए मैंने निर्ण नहीं लिया है कि राम राज्य संभालेंगे। राम अब राजा हुँ गया
यूध्या के। राम बेटे, उठो यहाँ आओ मेरे पास।
राम, सदा लोगों की
भलाई तुम ध्यान में रखोगे। ये भरोसा है मुझे। आपके उपदेशों पर
पूर्ण
चली जाओ चली जाओ शोर कर रही नीच मंथरा तुम चुड़ियों को क्यों कोस रही हो
कहके ही सजने का ये भी कोई समय है तुमारा पूरी राज्य पर जब दुरुभाग
के बादल मंडरा रहे हो मंथरा तुम्हें मालूम नहीं क्या
हमारे प्रिय पुत्र राम कल अयोध्या क
ओ, कै कै, तुम तो बड़ी भोली हो, ताउ पेच नहीं जानते,
देखा, तुम्हें राजा दशरत ने कैसा धोखा दिया है? मुँ बन कर मंत्रा, लज्जा नहीं
आती तुझे महराज के लिए ऐसे शब बोलते हुए?
पर, पर ये सोचो तुम, महराज ने भरत को आयोध्या से �
लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया?
कोशल्या बड़ी चतुर है शायद महराज को उसी ने सला दी होगी। तुम तो बहुत चहती
राणी हो ना महराज की। यही कोशल्या की जलन है तुमसे। चलती है वो तुमारे
योवन और सुन्दर्ता से। पर मैं क्या करूँ? सब
कुछ छ
क्या हुआ?
तुम्हें क्या दुख है? ऐसी शुबरात्री में तुम रो क्यों रही हो? बताओ मुझे, मैं
तुम्हारे लिए क्या करूँ?
महराज, आपको याद है कुछ वश पहले जब आप युद्ध में घायल हो गए थे?
मैंने आपको बचाया था, और उस समय आपने मुझ
वो दोनों वर्दान आपको मुझे देने होंगे अभी केवल दो वर्दान?
तुम जितने वर्दान चाहो ले लो नहीं, मुझे केवल वोही दो वर्दान चाहिए और पहला वर्दान
है नहीं, वो मैं तुम्हें नहीं दे सकता कैकै, बिल्कुल नहीं
मैं अपने सारी संपत्य द दुनिया को ये मालूम हो जाए
क्या के सुर्यवंश के महान राजा ने अपना वचन नहीं निभाया यदि मुझको देने हैं तो वो
ही दो वरदान दीजी उन दो
वचनों में पहला वचन था केकई के पुत्र भरत राजा बने
और दूसरा वचन था राम को चौदा बरस का बन�
आपको सुनाई नहीं दिया लोगों का विलाप। लक्षमन, यही लिखा है मेरे भाग्य में। पर
क्या हम यही सोच कर हाथ पे हाथ रख कर चुप बैठे रहे हैं और कुछ न करें। यह तलवार,
क्या यह केवल दिखावे के लिए एक आभूशन है। भाई, तुम भाग हो मे
जैसे पती का धर्म है स्त्रीका भी वही है जो भागी आपका है वो मेरा भी है ये सच है
एक आत्मा है तो उसका भाग भी एक ही होगा तो भाईया मैं भी आप दोनों के
साथ चलोगा धन्यवाद
मा, आप चिंता न करना, चोदा वर्ष वन में जल्दी ही भीट जाएंगे, इसके बाद लोट कर मैं
आपके चरणों को छूकर आशिर्वाद लूँगा। अच्छा मेरे बेटे। राम,
राम,
दोश क्यों नहीं देते तुम मुझे, तुम द्रोही क्यों नहीं कहते मुझे, इस
नाहीं मुझे ये राज्य प्यारा है और नाहीं अधिकार। मुझे जाने से पहले आपका आशिर्वाद
मिल जाये तो बहुत है। पिताश्री। मेरे बिटे, वंश के परदादाओं का मान
बढ़ाना, कुशल मंगल लोटाना, दुनिया में ऐसा
महान बेटा और किस का होगा।
राम के साथ वन में जाने के लिए रत, हाथी, गोड़े और सेना का प्रबंध कीजिए। जो आग्या
महराज। पिता श्री, प्रकर्ती ने स्वयं प्रबंध किया हुआ है मेरा, तो मुझे जरूरत
क्या है पूरे आडंबर और खाट बाट की?
तो फिर, जो भरत को मिलेगा
इस
माता, आप आशिर्वात दीजिये अपने बेटे को।
श्रीराम, हमें छोड़
के ना जाईए। आप ही हमारे राजा हैं। मेरे प्यारे आयोध्या वास्यों,
आपको मालूम है मुझे कितना प्यार है आपसे। आप मुझे कितना चाहते हैं, ये मुझे मालूम
है। आप यदि म
वो आपके प्यार के और आपके राजा बनने के योग्य है सहयोग दीजे उन्हें मैं विनती
करता हूँ सहयोग दीजे मेरे दुखी पिताश्री को मेरे प्यारे अयुध्यवासियों यही मेरी
प्रार्थना है आपसे
बच्चे ने
छे महीने बीत जाते हैं, राजा दश्रत का महल लंधकार में डूबा रहता है।
राम, राम,
मेरे पिटे मुझे ख्षम कर देना, राम, राम।
ये सांसारिक पिणाओं और सारे
जुखों से मुक्त हो गए।
कैकई के बेटे भारत अपने नाना से मिलने के कै गए हुए थे। उन्हें
तुरंत अयोध्या बुला लिया गया।
मा, मा ये सब क्या है, ये कैसे हुआ, बेटे भरत, बहुत अच्छा हुआ आ गए तुम, बताओ मा,
जो हुआ सच है वो, पिताजी का स्वर्गवास हो गया,
हे भगवान, यानि सच है ये बात, हाँ, पर हमारे लिए
धेर सारी खुशिया छोड़ गये बेटे, कौन सी
खुशिय
तुमने पेर को काट कर पत्तों को सीचा है। मुझे बताओ, किस नीच ने भड़काया है
तुमको। हिया, यही है वो, यही है वो कुबडी, जिसने हमारी मा के हिर्दय में
विनाश और सार्थ के बीज बोय थे। मुझे, मुझे एक छमा कर दो।
मैंने तो केवल तुम्हारी के
चुप हो जानी तो मैं इस तलवार से तेरी गर्दन उड़ा दूँगा रहने दो भाईया इसके खून
से हमारे वंश की तलवार अपवित्र ना करो तुम जैसी कुल्टा मेरी मा नहीं हो सकती सारी
दुनिया को यह मालूम होना चाहिए मुझे शमा कर दो बेटे शमा कर दो
दु
तुमने तुमने क्या कहा मेरे भाई हमारे पिताश्री नहीं रहे
हाँ भाईया स्वर्ग को सुधार गए है पिताश्री
पिताश्री
पिताश्री चमा कर दीजिए अभागे राम को चमा कर दीजिए अपने बेटे को पिताश्री
भाईया मेरी विनती सुनिये मुक्त कर दीजिये मुझे मेरी मा के अपराज से अभी चलिये
योध्या और आकर संभालिये राजपाट को जो केवल आपका है भरत हमारी पूछ जिमाने क्या किया
अभी वो प्रश्न नहीं है मत फूलो महान समराट राज़ा दशरत ने ये आग्या दी है ह
अब चिंता नहीं मुझे, पर मैंने एक निश्चे किया है, ये राज्य मैं अपने लिए कभी
स्विकार नहीं करूँगा, ये आपका है।
प्रिपया आप मुझे ये आशीरवाद दीचिये, कि मैं अपना कर्तव्य धैरे और साहस से
निभासकूँ।
अब
मैं राज्य संभालू परन्तु आपके लौटने ताकि भरत मेरे भाई
भाईया शीरा
हमारे मुख्य मंत्री ने इस समय यहाँ पर आने का कष्ट किस कारण वश किया?
राजन, सुना है कि दंडक वन में जनस्थल के अंदर मुनी लोग अपने आश्रम में वापस आ रहे
हैं। इस बार वो लोग बहुत खुश दिखाई पढ़ रहे हैं। उनकी इस खुशी का
कारण
लेकिन हमने तो सुना है कि राम डरपोक है उसे तो देश के बाहर कर दिया वो भी उसी के
लोगों ने ये सही है राजन पर इसके बारे में हमें जल्दी ही कुछ न कुछ करना होगा
चोटी बहन एक सुन्दर सी स्त्री के भेश में शेराम को अपने वश में करने पंचवटी
आती है मेरा नाम शूर्पन का है
राम तुम कितने
सुन्दर हो शक्तिशाली हो विवाद तुम से ही करूँगी मैं तो
तुम्हारा प्रस्ताव मैं मान लेता पर मेरी एक सुशील और पत
तुम व्याह की बात मेरे भाई लक्ष्मन से करो। वो भी बड़ा बलवान है। बड़ा सुन्दर
है। है तो वो भी सुन्दर। मैं तो केवल तुम्हारा हित सोचता हूँ। मेरी क्या बिसात
है भाईया के सामने। मुझे तुम ऐसी नहीं लगती जो आकाश से गिरकर
धर्ती
ये बद्दी औरत तुमारी पत्नी है मैं इसे मार डालूँगी
क्या हुआ बहन?
अरे हमारी छोटी बहन को क्या हुआ?
राम, तुम्हारा कहना है वो एयोध्या का दुर्बल कुमार था जिसने ये काम किया बोलो
अबराना नहीं बेहन, अभी उन केचूओं के टुकडे करवा के मैं गिद्धों के सामने फिकवा
दूँगा। मेरे भाई कुमकरन को जगाओ और उससे कहो कि मैंने उसे राम पर हमला करने को कहा
है।
जिसका मुझे डर था वो ही हुआ राजन आपके भाई कुम्ब करन अगले छे महीने तक नहीं जागेंगे
मेरा वश चलता तो मैं सीता की सुन्दरता उजार देती क्या इतनी खूबसूरत
है वो संसार में ऐसी कोई भी स्त्री नहीं जो सीता से ज्यादा सुन्दर हो
उसकी सुन
ताके योगी पुरुष
अपने मामा मारीज के साथ सीता हारन के लिए निकल पड़ा। तो मारीज,
अब हम रूप धारन करें। हाँ, यही हमारी चाल थी।
ओ, यह रूप तो
अति उत्तम है। इस छल को नहीं समझ पाएगा राम।
अती सुन्दर
ये
तो अती सुन्दर है ये सच्चा है ना कोई सपना तो नहीं है स्वामी मेरे लिए इस हीरन
को नहीं पकड़ेंगे इतना सुन्दर हीरन तो मैंने आज तक नहीं देखा तुम्हारे लिए
पकड़ूंगा लक्ष्मन सीता का ध्यान रखना
वो वेशधारी शूपन नखा आपको याद है ना ध्यान रहे छलियों के भुलावे में मत जाएगे अच्छी
बात है सीता की रक्षा करना
ओ
तो ये राक्षस है चुम्ब्रेक बन कर छलने आया है
तुम मुझे मार कर बड़े संतुष्ट हो गए होगे पर तुम अपनी सुन्दर सी पत्नी के बारे में
भी सोचो पत्नी?
लक्ष्मन, सीता, मेरी सहायता करो लक्ष्मन,
तुम्हें सुनाई दीना दर्दभरी चीख स्वामी संकट में है, सहायता चाहिए उन्हें
तुम्हारी
कु
तो फिर मैं वहाँ जाता
हूँ।
सीता मैया, इस रेखा के बाहर न जाईए। मुझे विश्वास है इस रेखा के अंदर आप सुरक्षित
रहेंगी।
सब वैसे ही हो रहा है जिस तरह मैंने सोचा था
महाशिवाय, हे पुन्यवती देवी, हम तुमसे भिक्षा मांगने आए
हैं।
लीजिये
भिक्षा।
समझ गया इसे किसी ने तुम्हारी रक्षा के लिए खींचा है मैं इसे नहीं लांग सकता तुम
इसे लांग सकती हूँ आओ बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं यदि तुमने अपने हातों से इस
भूके सादू को भोजन ना कराया तो सर्वनाश हो जाएगा तुम्हारे पिता �
बिना संकूच हमें भिक्षा दो और हमारा आशिर्वाद प्राप्त करो।
लक्ष्मन।
महिया, तुमने अकेला क्यों छोड़ा सीता को? तुम यहां क्यों आये? महिया ने मुझे आग्या
दी आपकी चीख सुनकर ओह,
वो चीख तो उस बहरूपी राक्षस की थी मेरी आवाज में आग फ़ड़क रही है मेरी, चलो, हमको
तुरंत वहाँ पहुँचना होगा सामी, साम
सीता!
तुम मेरी हो अब! छोड़! छोड़! मेरी हो! जो ना ही हो! जो मुझे!
ये कौन है?
जाने दो इन्हें! इन से तुम्हारा कोई सम्मन नहीं!
मुझे रोकने चला था। सुन्दरी, मुझसे कोई बचा नहीं पाएगा
तुम्हें।
छल
गया मुझे। छल करके मुझसे वो हर ले गया मेरी पत्नी को जब मैं कुटिया में नहीं था।
शपत लेता हूँ लक्षमन। शपत लेता हूँ, इसका बदला लेकर रहूँगा। तीनों लोकों तक पीछा
करूँगा मैं इस पहरूपिये का। और ढूंढ कर उस कप्टी को नाश कर दूँगा उसका। नाश कर दूँगा
उसका। अब शान्त हो जाये मेरे भाईया। आपने ही तो हमेशा कहा है कि
मनोश
तुमने ठीक कहा है लक्षमन, अब से जैसा तुम कहोगे, मेरे प्यारे भाई, अब
वैसा ही मैं करूँगा। लक्षमन, कहीं ये हिरन हमें सीता की सूचना देने की कोशिश तो नहीं
कर रहा? ये शायद हमें वो दिशा दिखा रहा है, जिस ओर सीता को ले जाया गया है। आये
मुझे शमा करें श्रीराम, मैंने बहुत प्रयत्न किया, लेकिन सीता मिया को वो ले
गया, वेरे बूड़े पंको को वो दुष्ट खायल कर गया. ओ, जटायू, तुम
दोशी नहीं हो, मेरी प्रिय पत्नी को बचाने में तुमने तो अपने प्राणों का मोह भी छोड़
दिया.
दाशियों सामधान तुम में से किसी ने भी अगर इस पवित्र देवी को हानी पहुंचाई तो मैं
उसे मार दूँगा त्रिजुजा मेरे लिए क्या आग्या है राजन तुम इनकी मुख्य रक्षक
हो अशोक वन में ये जो कुछ भी मांगे इन्हें तुरंत दे देना मैं
अव
मनिश्य कमान
धन्यवाद भगवन पर इसके बदले में मैं आपको कुछ नहीं दे सकता केवल ये
सलाह दे सकता हूँ तुरंद सुगरीव को ढूंढी सुगरीव कौन है?
ये तो एक झील है। लक्ष्मन, अब बोलो क्या करें। उधर कुछ लोग मुझको दिखाई दे रहे
हैं। उनसे पता पूछते हैं सुक्रीफ का। ये अच्छा विचार है।
रुकिये।
सन्यासी का वेश धारन किया है, तो भी तेज आप दोनों का राजकुमारूं जैसा है�
हम सब लोगों की छोटी छोटी भूमिकाएं भी होती हैं। ऐसे गुणवान व्यक्ति से मैं इस
घने जंगल में मिलूंगा, इसकी तो मुझे कलपना भी नहीं थी। मेरा नाम है राम, ये है मेरा
भाई लक्ष्मन। अयुध्या के महराज दशरत के हम दोनों पुत्र हैं। हम �
मेरा नाम हनुमान है और मैं मंत्री हूँ राजा सुग्रीव का।
लक्ष्मन, दूविधा में पड़े थे हम कि कहां ढूंढे सुग्रीव को, लेकिन अचानक सुग्रीव का
ही मंत्री स्वागत कर रहा है। निश्चय ही ये अच्छा लक्षन है हमारे लिए।
हे भगवन ये मेरा सवभाग्य है कि मैं उस महान राजा दशरत के पुत्रों से मिल रहा हूँ
जिनका नाम संसार की चारों दिशाओं में फैला हुआ है एक दिन इसी जगा मैंने दर्द भरी
पुकार सुनी थी स्वामी तोड़े दिन पहले हवा की गती से तेज एक उड़ता ह�
और फिर रत के अंदर से एक छोटी सी पोटली जमीन पर गिर पड़ी, उसे हमने समाल के रखा
हुआ है। वो कहा है, वो कहा है। हाँ, वो
भाई तुमने देखा, अबश्य ही ये सीता का वस्तर है, और आभूशन भी सीता के ही है।
ओ सीते, मेरी सीते, सीते। पेरच रखे भा�
सीता को बचाने के मैंने प्रतिग्या की है वो चाहे कहीं भी हो मुझे मालूम है कि
पती को पत्नी के विना कितना दुख होता है मेरे भाई वाली ने मेरे राज्य को भी हडप
लिया और मेरी पत्नी को भी ले भागा अगर मेरे पास मेरा राज्या और मेरी सारी सेना
इस समय होती
सुनिये दश्रत बुत्र श्रीराम मेरी छोटी सी विनिती है क्यों ना आज हम दोनों अपनी
शक्ती और दोस्ती के बल से अपने सारे दुखों को मिटा दें हाँ ऐसा ही करेंगे एक मित्र
को अपने दूसरे मित्र के लिए अपना सारा धन अपने सारे सुख यहां तक की
अपने
श्रीराम ने सुगरीव को दिया हुआ अपना वचन पूरा किया, बलवान बाली से युद्ध किया,
बाली की हार हुई, सुगरीव को अपनी पत्नी मिल गई और राज भी, हाथियों के जुंड की
तरह, वर्षा के बादल घिराए, और इशा मुख परवत पर कई दिनों तक घन
दोरिश्या मुक बाड के पानी से गिरा हुआ एक दूईब दिखाई पड़ा और तब सुगरीव ने
अपनी महान वानर सेना को बुला भेजा तुम्हें मेरी सीता मिले तो ये आभूशनों से दे देना
उसे विश्वास हो जाएगा तुम मेरे दूथ हो
ये अंगुठी हमारे रघुकुल की है कृपया, ये तुम उन्हें दे दिला।
श्रीराम
को दियेवे वचन को पूरा करने के लिए, राजा सुगरीव ने सीता जी की खोज में वानरों को
चारों दिशाओं में भेज दिया।
उदर वो पक्षी वहाँ से उड़ा तो फिर उस गुफा में पानी भी हो सकता है हाँ शायद हमें
वहाँ पानी मिल जाए
वो देखो, प्रकाश दिखाई दे रहा है। वहाँ से बाहर जाने का रास्ता होगा। चलो।
हनुमान
वानरों के साथ दक्षिन की ओर जा रहे थे। उन्हें जटायू के भाई संपाती मिले।
जटायू रावन के हाथों मारा गया था। हम कहा हैं?
क्या तुम जटायू के बड़े भाई संपाती हो?
हाँ, मैं संपाती हूँ. तुम जानते हो मेरे भाई को.
कैसा है मेरा जटायू?
ठीक तो है ना वो?
जटायू तो स्वर्ग को सिधार गया.
ये बहुत दुख की बात है। मेरा भाई मर
गया और मैं जिन्दा हूँ। जिन्दा हूँ।
बुड़ा होने के बाद भी उसने बड़ा ही भीशड युद्ध किया दुष्ट राक्षस
रावन से। और सीता मैया की रक्षा करते हुए उस बिचारे ले अपने प्राण
गवा दी
रावन था रावन है उसका नम अगर ये मालूम होता कि मेरे भाई की
मुर्त्यू का कारण वो राक्षस है तो मैं उसे नहीं जाने देता यहां से उड़के इस
ओर से उड़कर गया था हाँ देखो वहाँ देखो
समुद्र के उस पार तुम्हें लंका दिखाई देगी
उस टाप
और सीता मैया अवश मिलेंगे हमको फोज के साथ उस पार जाना हो
तो बहुत सारी नावों की ज़रूरत पड़ेगी और अब मैं बुड़ा हो गया हूँ वैसे जवानी
में मैंने 21 बार धर्सी की परिक्रमा की है अब तो
यहां केवल एक ही वीर है जो ये काम कर सकता है तुम जब बहुत छोटे थे तो
तुमने उक्ते हुए सूरज को सोने का फल समझा और पागलों की तरह उसको निगलने के लिए
वहाँ उड़के गए। तुम बड़े बलवान थे पर उस बल का सही प्रयोग नहीं जानते
थे। तारी दुनिया तुमसे जर्सी थी तो तुमारी
यही समय है जब मैं मंत्रों से बदी हुई शक्ति को स्वतंस्र कर दूँ फिर से। तुम ही
समुद्र को लांग सकते हो अपने बल द्वारा। तुम ही खोश सकते हो लंका के भीतर
सीता मैया को। ओ। ओ।
वामासन्न सहो। प्राणश्च जक्षु
रक्षण हो। श्रुत्रम कर
अपविता केशा शोडा तंता बहु बाहो रबलम।
हनुमान तेवर गती से लंका की ओर बड़े परन्तो ने समुद्री राक्षसी सिंग्गा
ने ललकारा वो क्या है
मुझे यहाँ से बाग निकलना चाहिए
अब
मैं तेरे टुकड़े टुकड़े कर दूँगा घमासान युद्ध के बाद हनुमान ने राक्षसी
के टुकड़े टुकड़े कर दिये और लंका की ओर चल
पड़े
सिता मैया को कहां डोनू?
तुम जागी हुई हो। मेरा दिन तुम्हारे मुख की जोती देखकर ही आरंभ होता है। पर
तुम तो मेरी ओर से विमुख हो। तुम क्यों तरपा रही हो मेरे प्यार को। मैं राम का
शीश तुम्हें उपहार में दू। ओ, तो तुम मिलने आ गए इससे।
छोड़
दो इसका
राजन कैसे इतने लटू हो गए हैं तुम्हारे उपर ऐसे कौन से मोती जड़े हैं तुम्हें
मुझे देखना होगा तुम्हारे पती को लेकिन संसार में इतना सुन्दर कोई नहीं होगा
जितने हमारे लंकेश हैं मुख काला करो यासे तुखी न करो सीता को राजन को जवाब
तो मुझे जल्दी से बचा लीजिए मेरे सामी
जननी मैं राम दूत हनुमान
जननी मैं राम दूत हनुमान
चरण कमल में शत शत वंदन
कर दो मा कल्यान मिला है अब सर
आज महाल जननी में राम तूत हनुमाल
चमके
कोट सूर्य सम रघुबर शीत चंद्र सी
वानी मधुकर करके रावण हरण
तुम्हारा किया मृत्यु आहमाल जननी मैं
राम दूत हनुमाल
अश्रु नयन से जहरत निरंतर व्याकुल है
श्रीराम जननी मैं राम तूत हनुमान
जननी मैं
माता मैं आपको ले जाने आया हूँ श्रीराम के पास मैं कैसे जाओं तुम्हारे साथ लंका में
बहुत से नर नारियों को बलपूर्व कारगार में बंदी बना के रखा हुआ है केवल मेरा ही उठार
बहुत अनुजीत होगा समझ गया अभी मैं जा रहा हूँ पर बहुत
जल्�
जाके प्रभू से कहो कि वो जल्दी से मुझे बचा ले तब तक मैं प्रभू की राह देखूंगी
अवश्य कहूंगा माता परन्तु जानी से पहले आज मैं इस रामर तथा इसके सारे
मित्रों को पाठ पढ़ाऊंगा और मुझे कसत्य भी आवश्यकता है
ये मुझको थोड़ा दंदार लगता है।
इसका
बंदी बन जाओं, तो शायद मैं रावन को आनने सानने देख सको।
बचाओ, मुझाओ मुझे इस आग से बचाओ। अरे
एव बंदर।
तुम्हारा क्या नाम है?
किस ने तुम्हें लंका में भेजा है?
और धर्म के विरुद्ध कर्म था। इससे तुम्हारा नाश निष्चित हो गया है। सारी
राक्षस जाती का भी नाश हो जाएगा। सीता भाईया श्रीराम को लोटा दो। और ख्षमा
मांग लो उनसे। इसे मार दो। भाईया, ये तो राजा के
धर्म के विरुद्ध है।
द
तो फिर हम अपने शत्रू को यहां तक कैसे ला पाएंगे तो ठीक है पहले इसकी
पूछ को आग लगा दो और जाने दो इसको
साथियों बढ़े चलो राम जी का नाम लेके साथियों बढ़े चलो
सूर्य
की किर्न हमें दिका रही है रास्ता राश्यों का नाश हो देवता की
मान्यता धर्म युद्य हो राज
शाचरों की सफनता विनाश के नजार पर मुझ्जिता प्रहार से दुष्ट
मारते चलो दुष्ट मारते
ये मेरी आप से विनती है श्रीराम को सिता जी लोटा दीजिये नहीं तो मुझे डर है कि
अगली बार केवल ये नगर ही नहीं ये महल भी भस्म हो जाएगा आग में ए निरलच तुम्हारी
जगा और किसी ने मुझसे ऐसा कहने का साहस किया होता तो मैं उसे यही पर मार डालता
ये लंकेश रावन जो सब लोगों की दिलों में बसा हुआ है और सारे देवताओं में पुझ्य है
वो क्या भैभीत होगा उस तुछ्य कुमार के पराकरम से तुरंत चला जा दुष्ट चला जा
द्रोही मेरी आखों के सामने से तू
उस पार हम कैसे जा सकते हैं? इस विशाल सेनक लिया हमें हजारों नावों की ज़रूरत
पड़ेगी एक फुल बना लेंगे हम लोग फुल? तुम्हें बालूम है इतना लंबा फुल बनाने में
हमें कितने बरस लग जाएंगे?
वहाँ से केवल सीता मैया को छुड़ाने का
प्र
सब बंदूओ सुनो विवीशन नाम का कोई राख्षस जो की रावन का भाई है श्री राम की शरण में
आया है। इन्होंने रावन
को बहुत समझाया और मेरी रक्षा भी की उसके महल में। मुझे तो पूरा विश्वास है इन पर
मैं तो यही कहूंगा कि इनको निस संदेह सम
मैं धन्य हुआ महाप्रभू.
आप लोगों की लंका पहुँचने की दुविधा में सुन चुका हूँ. अगर पुजा करके प्रभू समुद्र
देवता से साहिता मांगे तो मार्क दिखा देंगे. ठीक ही कहा तुमने विभिशन.
शिरिराम ने साथ दिन और साथ रातें
समुद
समुद्र देवता प्रकट हुए
आपका नाम लिखा होना चाहिए पत्थर सागर में नहीं दूबेंगे और
आपका भार समहलेंगे केवल बंदर ही नहीं परंतु सागर और परवत के सारे
जी इस पुल को बनाने में आपकी सहायता करेंगे देवता आपको आशीरवाद
देंगे और आपको सफल करें
चलो शुरू करते हैं
कर जुड़ गए सांगर फट गया
तुनका में भाई गंपन भर गया सीता
मा को हर्षित कर गया
झाल झाल झाल
मां तो चरण की छुए
मंत्रियों और सभासद्गरों मुझे मालूं हुआ है जल्दी ही युद्ध शुरू होगा तुमको कुछ
कहना है मुख्य मंत्री महाराज आप इस महान रजेश्वर ने
किन छोड़ी सी बात अधन के लिए ये तब आप नहीं है कि कुछ बंदर और बुलिश्य
हमारा खंडार दे रहे हैं मेरे थोड़ी से उन लोगों को भेज दीजे जो इस सभा में आय तक
नहीं गए वोही लोग चुट्टियों में राम की सेना को खत्म कर देंगे राम अनु
ये बात मैं तुमसे पहले भी कह
चुक
सामने वाली सेना एक बहुती बलवान सेना है रावन इसी में भलाई है
तुमारी ध्यान से सुनो सीता को लोटा दो सीता भरम प्रिय पत्नी है प्रभुराम की
लादा महराज बड़ी बेवकूफी होगी लोटाना सीता को हमने उन्हें अभी छोड़ा तो
दुश्मन यही सोचे�
हजारों लोगों को घैल देखूँगा तो मुझे बहुत ही दुख होगा जो जान गमाएंगे तो अलग
सिर्फ उस पराई औरत के लिए दादा महराज यानि बुड़े हो गया है आप तभी युद्ध से
डरते हैं आपसे लोगों का मरना नहीं देखा जाएगा तो आप
युद
हाँ, बानरों के वीर कुमार, क्रपया, जो मैं तुमसे कह रहा हूँ, ध्यान से सुनो।
पिछले कई महीनों से, यही सोच रहा था कि दुश्ट रावन को
हराऊंगा। अब, मेरा सापना अवश्य पूर्ण होगा। तिस पर भी, इस
विशेपर मैंने पूना कई बार सोचा। �
यदि मेरी पत्नी सीता और अन्य बंदियों को स्वतंत्र करके रावन शरन में आ जाये मेरी।
चुप रहो, चुप रहो। तुम्हें अचंभा तो हुआ होगा,
पर जान हानी को हमको वश्य रोकना चाहिए। इसी तरह तीनों लोकों में सुक्षान्ती हो
सकेगी। उसकी
प्रा
समझ किया, अवश्य पहुंचा दूँगा आपका ये संदेशा रावन तक धन्यवाद अंगत
तो
तुम राम का संदेश लेकर आये हो अंगत, यही नाम है न तुम्हारा
तो हमारा उत्तर यह है बहुत
किनोनी बात है क्या शांति दूतों के साथ तुम्हारा यही वर्ताब होता है?
रावन!
रावन, यही जवाब है न?
तो यही जाके मैं कह दूँगा श्री राम से अगली बार तुमसे मिलूँगा तो केवल युद के
मैधान में तो रावन जुद्ध करने पर उतारू है।
मैं समझ गया। अंगद, तुमने सराहनीय काम किया है। मुझे बड़ा दुख है, श्रीराम। रावन
ने आपके शांती संजवते को नहीं माना। मैंने पूरी कोशिश की।
तो
कल सवेरे, सूरी की पहली किरन परवत के शिखर पर पढ़ते ही
क्या आप लोग जुद करेंगे न्याय और राम के लिए?
जर्थर नग में महा वले रावण राजा की जैंग जावड से ना महा
वैंतर कौन सामने आएगा जावड से जो तंग राएगा विक्की में मिल
जाएगा शत्रों को जो जीरे पाड़े गर्व भिसारा पी जाएगा तडब रह
जाए दुश्मन पड़े नहीं ना जी पाए जै जै जै जै जै बीर दशानन हाखाल जै
जै जै लंकेश्वर जै राक्षस पति महाकाल जै जै
मारे काटे पट पट पट पट स्वाहा कर दे छट
पट छट पट तावण राजा की जै जै राक्षस राजा की जै जै जै
जर्थल लब में महावली रावण राजा की जैद।
मैं प्रात्मा करती हूँ, प्रात्मा करती हूँ,
रिप्या, रिप्या बचाना स्वामी को, बचाना मेरे स्वामी को।
राक्षस दुखी कर रहे हैं मुझे
हमारा दिन अच्छा शुरू हुआ राजन। अब लगता है दोनों सेनाएं पराबरी बर हैं। पर हमारे
सैनिक थोड़े ठकना शुरू हो गए हैं। तो एक दम बुला लो उनको और उन्हें विश्राम दो। हे
महापुरुष, इससे तो हमारी सेना की हार भी हो सकती है। अच्
हाँ, सांच के समय राम युद्ध को अवश्य रोग देंगे। गायलों की सेवा के लिए और मरे
हुओं के अंतिम संसकार के लिए। ठीक है, मैं कुम्ब और निकुम को वहाँ भेज देता हूँ।
आराज कुम्ब और निकुम्ब युद्ध के मैदान में बड़ी वीर्दा से युद्ध कर रहे हैं। तुम ये
मत भूलो कि वो कुम्ब करन के बेटे हैं।
बहुत से मर गए, कितने ही घायल हो गए।
और भी आएंगे, बिछोना तयार है। दवाई तयार है। हाँ, सब
तयार ह
जल्दी करो
तुम बड़ी बीरता से लड़े। मुझे तुम पर गर्व है। विश्राम करो। ये
तो बहुत ही मामूली घाव है। मैं कल तक बिल्कुल ठीक हो जाओंगा। आप देखें।
तुम ज्यादा हेलो डोलो नहीं। आराम करो। जी
अच्छा।
भाईया, आपने शत्रुओं की लाशों की और हमारे सैनिकों की लाशों की साथ में ही अंतिम
क्रिया क्यों की?
लक्षमान, जब तक वो जेवित थे, तब तक वो हमारे और शत्रु के लोग थे.
पर मृत्यू के बाद कोई किसी का शत्रु नहीं होता.
उन सब को विधी
पूर्व
पर मैं जब लंका पहुचा तभी मैं समझा कि हम सबको जीवन का जो अन्मोल उपहार
मिला है वो भगवान के कृपा से मिला है और यती आवश्रक है कि हम अच्छे मानव हों केवल
अच्छे क्षत्रिय ही नहीं पृत्वी पर सभी जीवों को जन परमेश्वर ने दिया
है
राक्
लेकिन हम में से ही कुछ अज्ञानी लोग अपने तीर और तलवार का प्रयोग करते हैं अपने ही
साथी जीवों पर। बहुत से युद्धरन भुमी में अपने प्राण गवा चुके हैं और युद्ध खत्म
होने तक और बहुत से मारे जाएंगे। एक शत्रिय होने के नाते म
और एक भी मनुष्य क्रोध में आकर शेस्त्र ना उठाए, अपने ही भाई बंधों पर,
भाईया, बहुत सुन्दर विचार है,
मैं बानरों का सेनापती नील हूँ मैं तुम्हें हराऊंगा तुम्हें जो करना है कर लो
देखते हैं आजा
तूने युद्ध अच्छा किया पर ये तेरा अंत है
मेरे भाई, क्या तुम सचमुष हमें छोड़ गए?
क्या तुमने, क्या तुमने मारा मेरे भाई कुम्ब को?
हाँ, मेरा, मेरा नाम सुगरीव है, मैं वानरों का राजा हूँ.
तुम्हारा, तुम्हारा भाई कुम्ब बड़ा भाधूर और साहसी था.
मेरा ऐसे भाधूर से पह
पूरे सम्मान से अगनी दो इसे क्या कह रहे हो इंद्रजीत प्रहस्त और कुम्ब दोनों मारे
गए हाँ पिता जी है तो बुरा समाचार पर सच है मैंने कभी सोचा नहीं था कि राम
की सैना में ऐसा योद्धा है हमें अब अपनी चालों को बदलना पड़ेगा इन हालात में अ
वो चमतकार कर सकता है उसे तुरंत जाकर जगाओ ये हमारी आग्या है जो आग्या
पेता जी अभी उठाता हूँ
क्योंकि सेना का सबसे बलवान युद्धा है कुम्बकर्न एक बार अगर वो सो गया तो फिर
छे महिने के बाद ही जागता है मुझे ऐसा लगता है रावन घबरा गया और विवश होकर उसे
पहले जगा दिया क्योंकि उसके बहुत से युद्धा संग्राम में एक के बाद
एक
म प्रभुराम यही सही घड़ी है जब आपको युद्ध में जाना पड़ेगा।
अब हम युद्ध में भाग लेंगे।
मैं वाली का बेटा और राजा सुगरीव का बतीजा हूँ। तुम मन्शच हो। उस वाली वालर थे।
वो सभी तुम इतने वीड योड़ता हो। पर मैं तुमें अब और नहीं उचलने दूँगा।
रुको। ये लड़ाई मेरे भाग्य में लिखी है।
अच्छा तुम हो
कु
पर युद्ध से पहले इन्हें...
मेरे
बच्चों... मेरे बच्चों...
मालुमान...
धन्यवाद... तुम्हारी नेकी के लिए... ये नीती है...
शस्तों से लड़ने में छतुर हूँ, तुमसे शस्तों से यूद करना उजित है।
ये तो तुम्हारे हित में था कि मेरा शक्त भूट गया। अब उठो और जिन्द करो। ठहरो, जहां
हो वहीं खड़े रहो। राम हूं मैं, अयुध्या का युवराज हूं, दक्षरत का बेटा हूं।
मैंने सुना है कि तुम तलवार के दल है। तुम दुखी कर रहे हो मुझे। बाग
जाओ। जाके खेलो पंधरों से।
अंधेरा
हो गया है और वहाँ कुम्भकरण के होते हुए भी युद्ध घंगोर से घंगोर हो रहा है।
पिताजी, अभी जाता हूँ मैं युद्ध के मैद
ठीक है इंदरजीत बेटे, जाओ।
छमा करना कुमकरण मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ
ये बहुत अच्छा काम किया ठीक तो है ना आप हाँ जरा सी चोट
आई है पर वैसे मैं संतुष्ट हूँ अच्छा होता अगर वो मेरा मित्र होता विभीशन मुझे दुख
है कि कुमकरण का वद मेरे हाथों हुआ
करण भी मारा गया ये तो बहुत बुरा समय है हमारी लंका के लिए वो बड़ा बलवान योद्धा
था ये अच्छा नहीं हुआ बुरा हुआ पेता जी बिल्कुल न
घबराईए विश्वास रखिये एक योजना है मेरे पास राम की सेना को खत्म कर दूँगा मैं
आपको ये व
उनको उठा कर ले आओ भीतर अभी अंधेरा है जल्दी जल्दी
अभी तो तुमें बहुत
सी लाशे उठानी पड़ेगी मेरे मेस इम्मत किसे हूँ इसकी ये बोलने की अभी मज़ा चकाता हूँ
रुको वो कौन है
अरे सीता महिया
नुमान जी, आपको शल तो है न?
अंगत!
कहां जुपाए राम? वो इतना डरपोग क्यों है?
स्वामी!
स्वामी!
सीता, मेरी पत्नी!
लक्ष्मान, सब लोग आओ, इधर आके छुप जाओ।
तुम्हारा नाश वश्च
करूँगा मैं राम, लेकिन मैं तुमको समय दूँगा, तुम्हारी पत्नी और तुम्हारे भाई की
अंतिम क्रिया के लिए।
मैं आपसे कुछ बात कर सकता हूँ इस जगा की सारी जड़ी बुटियां प्रयोग में ला चुके हैं
हम पर उनसे इंद्रिजीत के बाणों के घावों पर कोई प्रभाव नहीं पढ़ रहा है पर क्यों
हो रहा है ऐसा हे इश्वर हे इश्वर मैं तो पहले ही खो चुका
हूँ
�
संभलिये शिरीराम आप ही दुखी होकर घबराएंगे इस तरह तो हमारी सेना अपना मनोबल खो देगी
वुझ्यूई सेना कैसे जीतेगी कृपया दुखी नहों शिरीराम सीता मया को कुछ नहीं हुआ है
कुछ नहीं हुआ पर मैंने स्वयं सीता की मृत्यू अभी अभी तो
अ
आपके दुख से उसको और बल मिलेगा इनरजीत को सारी शक्ती अपने माया जाल ही से मिलती है
उसके माया जाल की शक्ती को खत्म करने का एक ही उपाय है हम उस पर आक्रमन करें जब वो
अपनी तांतरिक क्रियाओं में लगा हो निकुम्भिला की गुफा में इनरजीत हमेशा
उ
इसी पुजा से उसे माया जाल की अद्भूत शक्ति मिलती है। अच्छा?
नहीं, नहीं, नहीं, नहीं। परन्तु यहाँ भी बहुत से योद्धा घायल पड़े हैं, मेरा भाई
लक्ष्मन भी घायल है। नहीं, ऐसी दशा में बहुत कठिन होगा निकुंबला की गुफा पर �
और बोलो। वहाँ संशीवनी पूर्षी मिलेगी।
उससे हमारे घाव भर जाएगी। हिमाले में। हिमाले में मिलेगी।
परन्तु हिमाले तो यहाँ से बहुत दूर है।
ये मेरे श्रीराम की आयोध्या
है।
हिमालय
हिमालय
का पवित्र परवत आही गया।
अध्रोना गिरी आ गया।
यहां
मुझे संजीवनी बूटी ढोननी पड़ेगी, जिसकी हमारी सेना को इस समय बड़ी आवशक्ता है।
वो रही, संजीवनी बूटी।
बहुत दर्द है बाह में।
वाह,
बिल्कुल नहीं दुख रहा, ठीक हो गया घाव। ये जादूई बूटियां बहुत बढ़िया है, ऐसा तो
मैंने कभी सोचा भी नहीं था।
परन्तु इतनी सी मुठी भर बूटियां तो पूरी परने वाली नहीं सब घायलों के लिए
तो फिर जरा सोचना पड़ेगा मुझे
इसको
लेता हूँ मेरे लिए ये पेर ठीक रहेगा
ये अब मेरा निशान होगा।
अब
इस पहाड को ही उठाकर मैं ली जाता हूँ वहाँ।
प्राण बचाना लक्ष्वन जी के मैं आ रहा हूँ संजीव ने लेकर
लक्ष्मन जी घबराना नहीं थोड़ी दिर और मृत्यू से लड़ते रहना
पीड़ा
को थोड़ा और सहन कर लो लक्ष्मन धीरज रखो हनुमान आने वाले ही होंगे बूट्या लेकर
तुम्हारे लिए
भाईया
भाईया लक्ष्मन लक्ष्मन वो देखो हनुमार जी आ गए
जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार
जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार जै हनुमार
जै हनुमार जै हनुमार जै
हनुमार
हनुमान जी, क्या इसी पहाड़ पर बूटियां हैं? हाँ, पहाड़ पर एक निशान देखो, वहाँ
मैंने मिट्टी में एक पेड़ गाड़ा हुआ है, जल्दी से संजीवनी बूटी लगा दो लक्ष्मन के
घाउं पर अच्छा, ये तो चमतकार हो गया
लक्ष्मन तुम्हारा घाव भर गया तुम ठीक हो गई
हनुमान तुम भी बड़े प्यारे भाई हो
मेरे
अच्छा तुम तुम अभी जिन्दा हो हाँ समय आ गया है अब तुम भी मरोगे और
साथ में ये तुम्हारी रक्षक देवी भी
ये देख के हरान हूँ कि तुम्हारी रक्षा के लिए
कुछ ऐसे उड़ने वाले राक्षस भी यहाँ है तुम लोग मार दो उसे
मुझे ऊपर ले जाए
जो मैं बोलूं तू वही करना तभी मैं तुझे छोड़ूंगा आकाश में मुझे ले चल ये मत भूलना
तु दाए जाना जब मैं दाए जाने को कहूँ और बाए जब मैं बाए कहूँ अगर तुने भूल की तो
इस तलवार से तेरा गड़ा काट दूँगा
लक्ष्मन बिल्कुल ठीक बस तू उड़ता जा और तेज और तेज
मैं
तुझे मार दूँगा अब नहीं जाओगा तुझे
तो पीछे ही पड़ गया और जल्दी मरने वाला है तू
ये तेरा अंत है मेरा नहीं
मुझे इसी दिन की प्रतीक्षा थी इंदरजीत
आया तुझे लक्ष्मन
इंद्रजीत
यही अंत
है तुझ जैसे मायावी नीच का ओ लक्ष्मन
मुझको तू नहीं मार सकता
केवल छाया को ही मारा था सीता की। असली सीता को अब मैं मारूँगा। राम के सारे
योधाओं का विनाश कर दूँगा। और बढ़ाओगे अपने पाप सीता की हत्या
करके। निर्दोश हिस्तुरी है वो। हमारे प्रहस्तु, हमारे कुम्भ निकुम्भ।
और कुम्भकरण �
तुम जो भाई हो, पिता हो, राजा हो उन सब के, तुम उनकी वीरता पर कालिक पोट देना
चाहते हो। अब समय आ गया है कि हम दोनों भी युद्ध भूल में जाकर बदला ले उन सब
का। वो मैं देख लूँगा, आप यहां रहकर हमारे बच्चों और औरतों की रक्षा की�
ये तो जैसे गरूर पर भगवान विश्णू बैठे हैं। हाँ, ऐसे ही लगते हैं।
हम दोनों के बीच आज जो युद्ध होगा उससे अंत हो जाएगा बुराईयों का लंका के
निवासियों देखना तुम्हारा राजा रावन जो तुम्हारे लिए एक प्रतीक है ईश्वरिय
शक्तियों का वो कैसे मरता है एक साधरन मनुष्य के बानों और शस्त्रों से
राम
इ
तुम्हें अच्छी तरह से मालूम है कि यहां सबसे बड़ा बलवान कौन है। चलो आजाओ
राम युद्ध करें। तो फिर रावन युद्ध करो।
अब इसकी मृत्यु हो गई।
वो
देखो।
मुझे
अपने आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा।
यह मुझसे भी बड़ी शब्दी कौन सी है
रावन भाईया, आपकी आत्मा को शान्ती मिले। सब समाप्त हो
गया।
लंका के
युद्धों, राजा रावन धर्ती मा की गोद में चले गए। युद्ध वन करो, शस्त्रों को त्याग
दो, और अपने देश की कीर्ती को पुना उजागर करने में तुम सब लोग पूरा सहयो
श्रीराम सीते स्वामी
मैं सब की आभारी हूँ पर जिनों ने मेरे लिए अपने प्राण दी उनके बारे में सोचकर दुख
होता है अब मैं मनन करके इश्वर से प्रातना करूँगी उनके लिए शमा मांगूंगे सब की
आत्माओं से आप वो ना भी करें तो ठीक है आप शिरीराम के साथ सुखी
जी�
राम और सीता को अयुध्या लोटने के लिए पुष्पक विमान भेट किया
लोटते समय सीता जी ने शेराम की ओर देखा उनकी आखों में शेराम से मिलने की
प्रसन्नता भी थी और उन लोगों के लिए दुख भी था जिनोंने अपने प्राण मुआए उस युद्ध
में जिसको टाला जा सकता था
अपने प्रिये राजा राम के लोट आने पर अयोध्या वासियों ने अनेको उत्सो मनाए।
उसके बाद उनका जीवन सुख में रहा। कुछ वर्षों के बाद शेराम बैकुंठ लोट
गए। और सीता मय्या धर्ती मा की गोध में समा गई। जै शेराम!
जै शेराम!
ओरामाव
बोलो राम बोलो रामा बोलो रामा
रामा बोलो रे
बस एक
राम बोलो रामा बोलो रामा रामा
बोलो रे
मिले जो तेरे चरणों की मैं गद गद हो जाऊं रे
तेरी
शरण में आकर रामा सुख जीवन के पाऊं
शुक जीवन के पाऊं रे
मिलकर राम बोलो
रामा बोलो रामा रामा बोलो रे
दुख हो या सुख मुख में मेरे सदा रहे तेरा नाम
रे
चार
चुपेरे गूंजे बस एक जैसी आराम सी आराम रे
रामा बोलो रामा बोलो रामा
बोलो रे
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