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[संगीत]
नहीं
अपने कमरे में है।
तो कमरा घर से अलग हो गया।
हिस्सा मांगेगी तो शायद
यही कमरा इसके हिस्से में आएगा।
खैर उसकी छोड़ो। तुम अपनी सुनाओ।
आप उसकी सुनाइए खाला
घर लौट कर आएगी या कमरे में रहेगी?
तुम यही बातें करने आए हो।
मैं उसका शवर हूं काला। उसकी बातें तो
करूंगा।
उसे बता ही देते हैं कि हादी आया हुआ है।
तो उसे क्या पता नहीं है।
पता होगा खाला। लेकिन अब याद दिलाना
पड़ेगा उसे।
वैसे मैं याद दिला देता हूं उसको।
बैठे रहो हादी। अभी ताजाताज़ा भूल कर बैठी
है वो। फौरन याद नहीं आएगा उसे।
वो तो मुझे भी मालूम है लेकिन इलाज तो
शुरू करें।
एक-एक करके बताते हैं पुरानी सब बातों को।
फिल्मों में नहीं देखा। भूले को कितनी
बातें बताई जाती है। उनमें से एक बात जाकर
दिमाग पे चोट की तरह लगती है।
और धीरे-धीरे से सब याद आ जाता है।
चाय तो पी लो।
वरना चाय भूल जाएगी तुम्हें।
[संगीत]
कौन?
मैं हूं मानू आदि
आदि अली
तुम कब आए?
अभी 15 मिनट पहले डोर बेल बजी थी। मैं ही
आया था। कैसी हो?
ठीक हूं। तुम कैसे हो?
मैं भी ठीक हूं। आ जाओ। हमारे साथ आकर
बैठो।
चलो। जब तक मैं चाय पी लेता हूं, तुम फ़
सुन लो।
[संगीत]
[प्रशंसा]
हां वकार
मैंने बात कर ली। मना लिया उसको।
किसको?
तुम इतनी जल्दी भूल भी गई? अभी घंटा पहले
तो बात कर रहा था तुमसे।
हां। वो तो तुम अपने जमीर की बात कर रहे
थे। उसी की बात कर रहा हूं। मैंने तो उसे
साफ कह दिया कि मैं मानू के बगैर एक पल भी
नहीं रह सकता।
पता है क्या बोला?
क्या?
बोला कि किसने कहा उसके बगैर?
दुनिया से छीन कर ले आओ उसे।
तो छीन के ले जाओ मुझे। ले जाओ वकार।
मुझसे बार-बार हाथी की शक्ल नहीं देखी
जाती। उसकी मुस्कुराहट से डर लगता है
मुझे।
यहीं है क्या?
आया हुआ है।
मुस्कुरा रहा है।
हां वही तो मैं सोच रही हूं कि मुस्कुरा
क्यों रहा है?
अमेजिंग।
अमेजिंग नहीं। ऐसा ही है वो। मुझ पर
गुस्सा नहीं करता।
तो फिर तलाक कैसे देगा?
अरे वो कहां देगा? वो तो मैं लूंगी उससे।
तुम फ़ोन रखो। मैं फिर बात करती हूं।
सुनो।
हां।
मैं जाग रहा हूं और उसके जवाब का इंतजार
कर रहा हूं।
ओके बाय।
[संगीत]
उस्मा
[संगीत]
जी अब्बा
यही तो मैं भी सोच रहा था कि यह तो हो
नहीं सकता कि तुम सो जाओ और घर की लाइटें
जलती रह जाए।
ईशा की नमाज तो तुमने मेरे साथ पढ़ ली थी।
अब क्या पढ़ रही हो?
तस्बीह पढ़ रही थी। हादी साहब के लिए
वजीफा किया है मैंने।
अल्लाह करे आज वो कामयाब होकर वापस आए।
कहां गया है?
अपनी खाला की तरफ।
आज पहली दफा तुमने कहा है कि खाला की तरफ
गया है।
पहले तो हमेशा ससुराल कहती हो।
इंशाल्लाह कल से ससुराल ही कहूंगी। ससुराल
और खाला के घर में फासला मिटाने के लिए
वजीफा पढ़ा है।
मशवरा तो किसी काम नहीं आया। वजीफा शायद
काम आ जाए। वरना फिर ले आएंगे 2 किलो
मिठाई।
एक बात पूछूं तुमसे।
100 दफा पूछिए।
उसके लिए तुम क्यों दुआ मांगती हो?
इसलिए
कि मैं रोज नाश्ता देती हूं उन्हें
और जिसको बार-बार अपने हाथ से कुछ पका कर
खिलाओ तो उसकी खुशी और गमी का पता चल जाता
है।
और फिर जिस दिन खुश होते हैं उस दिन कम
खाते हैं। और जिस दिन दुखी होते हैं उस
दिन ज्यादा।
हिसाब करके देख लीजिए उनके खुश रहने में
अपना बहुत फायदा है।
[संगीत]
[प्रशंसा]
[हंसी]
[संगीत]
शाबाश।
कवर तो अच्छे खेल रहे हो। चलो अब ये लेग
ग्लांस करो।
काउंटर पे कैसे क्लास करूं?
अरे तो पोल करो ना यार।
ठीक है। अब कराएं बॉल।
रुकिए जरा।
वैसे आज आप इतनी फास्ट बॉलिंग क्यों करा
रहे हैं? पहले तो स्पिन कराया करते थे।
नई-नई सीखी है ना? थोड़ी प्रैक्टिस कर रहा
हूं। चल, शॉट पे जाएगी। चौका मार।
ठहर जाओ बेटा। पहले कुछ खा लो वरना थक
जाओगे।
एक मिनट हां दी।
मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है। प्लीज
जरा मेरे कमरे में आ जाओ।
एक फ्रेंच टोस्ट खा लूं फिर आ रहा हूं।
तुम्हारे लिए लाऊं?
नहीं प्लीज। थैंक यू।
[संगीत]
दोबारा वही बात करे तो मुंह पर जोर से
थप्पड़ मार देना।
[संगीत]
चलो तुम क्या सुन रहे हो? उतारो उतारो ये
खलाई टोपी और जाओ जाकर मुंह हाथ धोकर सो
जाओ।
जो मैंने कहा सुन लिया ना तुमने
सुन तो लिया खाना
लेकिन अगर वो वापस मेरे मुंह पर थप्पड़
मार दे तो
शाबाश बेटा मेरे सारे अंदाजों पर पानी फेर
दिया तुमने।
मैं तो 25 सालों से यह समझ रही थी कि हादी
अली मर्द का बच्चा है।
ठीक है बेटा।
तू जो है वही बनकर दिखा।
थप्पड़ खा और मर्दों की लुटिया डुबो दे।
जा मेरा बच्चा
अल्लाह तेरा निगेबान।
और सुन
थप्पड़ खाकर वापस जाओ तो सुबह सीधे
शनाख्ती कार्ड के दफ्तर जाना।
जाकर कंप्लेन करना और उनसे कहना कि
जिं्स के खाने में मर्द लिख दिया तुमने।
मैं जरा उसका मुंह धुलवा दूं। वरना थप्पड़
की आवाज सुनकर साबुन लगे मुंह के साथ बाहर
निकल आता है।
[संगीत]
आ जाऊं
आ जाओ
[संगीत]
बैठ जाओ
बैठ जाओ
[संगीत]
कैसी है तुम्हारे मालिक मकान की बेटी?
ठीक है बिल्कुल।
कब से चल रहा है ये सब?
चल तो बहुत पहले सेता था। मैंने ही चलने
नहीं दिया।
अरे चलो चलो।
झूठ बोल रहा हूं ना।
बोल रहे हो तो बोलते रहो। तुम जानो और
तुम्हारा खुदा जानो।
मेरे खुदा का नाम तो इस तरह ले रहे हो
जैसे तुम्हारा खुदा कोई और है।
काम की बात करें?
हम
उस दिन मैंने कुछ कहा था।
तुमने समझा होगा कि शायद मैं गुस्से में
कह रही हूं।
तुम्हारी कसम नहीं। मैंने ठीक से समझ लिया
था कि तुम दिल से कह रही हो।
तो फिर क्या जवाब है तुम्हारा?
बोलो। क्या जवाब दो?
मैं चाहती हूं यह बात हम दोनों के बीच
यहीं तय हो जाए तो अच्छा है। बाहर निकली
तो हम दोनों की बदनामी होगी।
[संगीत]
हम दोनों की तो खैर है। लेकिन मोहब्बत
बदनाम हो जाएगी बहुत।
कौन सी मोहब्बत?
मुझे तुमसे कभी मोहब्बत नहीं हुई।
अरे कहा था तुमने दो बार
पहली बार जब तुमसे कहा था कि हां जॉब कर
लो और दूसरी बार जब ये वाले बंदे खरीद कर
लाया था तुम्हारे लिए
याद नहीं
[संगीत]
ये लो
बुंदे तुम्हें वापस कर दिए और जॉब के लिए
जब वो कहेगा तो छोड़ दूंगी।
अच्छा ये बुंदे तो रख लो। ये क्यों वापस
कर रही हो?
तलाक में एक दूसरे की चीजें वापस कर देते
हैं।
वो तो ठीक है लेकिन मोहब्बत में वापस नहीं
करते।
बिछड़ना तय हो भी जाए तो ऐसी चीजें एक
दूसरे की निशानियां समझ कर पास रख लेते
हैं। रख लो।
तलाक के बाद चाहे तो फेंक देना। चाहे तो
कभी-कभी पहन लिया करना।
[संगीत]
कह देना कि मेरा एक कजन मोहब्बत के लालच
में खरीद लाया था।
इसलिए पहन लेती हूं। रख लो इन्हें।
शई तौर पर तुम्हें बताऊं तो निकाह के बाद
अगर रुसती ना हो तो तलाक में इद्दत की
शर्त नहीं होती। तुम चाहो तो फौरन शादी कर
सकते हो।
मुझे मालूम है।
और क्या-क्या मालूम है तुम्हें?
मैं किसी भी औरत के तलाक लेने के हक को
मानता हूं।
लेकिन तुम्हारी तरह इस रिश्ते की इंसल्ट
करने को नहीं मानता।
शायद तुम्हें बुरा लगे लेकिन सच यही है कि
तुमने निकाह और मोहब्बत दोनों को बेआबरू
किया।
लेक्चर मत दो।
लेक्चर तो दूंगा। 8 साल की मोहब्बत और 28
साल की उम्र में मैंने यही सीखा है। कि
मुआशरा अच्छे मर्द की वजह से नहीं चलता।
अच्छी औरत की वजह से चलता है।
ये तो खैर तुम कहोगे। तुम्हारे लिए तो अब
मैं अच्छी औरत नहीं रही।
तुम अच्छी हो बहुत। लेकिन तुम्हारे
बिछड़ने का तरीका बुरा है।
वो इसलिए बुरा है कि पहले तुमने निकाह के
लिए हां कही और निकाह कर लिया और फिर कह
दिया कि जाओ तुम तो कबूल ही नहीं। ऐसे तो
नहीं होता ना।
ये तो बजट पेश करने की तरह है। गरीब से
वादा किया कि तुम्हारा ख्याल रखेंगे फिर
ख्याल नहीं किया।
उम्मीद दिला दी और तोड़ डाली।
सीधी तरह बताओ तलाक कब दोगे?
दिल तो चाहता है कि तलाक ना दूं तुम्हें।
[संगीत]
कुछ तो मैं भी करके दिखाऊं कि खाला मुझे
कॉम्प्लीमेंट देकर कहे शाबाश शादी। तू तो
मर्द का बच्चा है।
लेकिन मैं घर छोड़कर जाने वाली औरत को घर
में रखने वाला मर्द नहीं हूं।
मोहब्बत की है तुमसे। जाते हुए जलील नहीं
करूंगा।
[संगीत]
उस दिन मैं मुकेश की आवाज में एक गाना सुन
रहा था। कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे।
तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे।
तब तुम मेरे पास आना पिए।
मेरा दर खुला है। खुला ही रहेगा तुम्हारे
लिए।
मैं बस तुम्हें बताने आया हूं कि मेरा दर
खुला नहीं रहेगा। इसलिए तब तुम मेरे पास
मत आना।
चलो ऑफिस से छुट्टी करो।
तलाक के कागज बनाओ। मुझे फोन करके बुला
लेना।
मैं आकर दस्तखत कर दूं।
[संगीत]
क्या हुआ? क्या बात हुई?
क्या कहा उसने? और और तुमने क्या जवाब
दिया?
क्या हुआ? क्या बात हुई?
क्या कहा उसने? और तुमने क्या जवाब दिया?
बात उसने सोची हुई थी।
जवाब मैं सोच कर आया था।
[संगीत]
बेटे।
[संगीत]
आपका डर सही निकला।
मैं भी मर्द होने के मयार पर पूरा नहीं
उतरा हूं।
मैं करता भी क्या खा
उसने
उसने जिस कॉन्फिडेंस के साथ तलाक मांगी थी
उस कॉन्फिडेंस के साथ तो उसने कभी कुछ
मांगा ही नहीं।
तलाक दे आई हूं।
अरे अभी कहां खा
अभी तो मर्द का बच्चा बनकर जा रहा हूं
वापस।
कल पर टाल दिया उसको।
कल कल पर
कल
[संगीत]
दफ्तर से छुट्टी करनी पड़ेगी उसको।
स्टैंप पेपर लेकर आएगी। वकील के साथ
बैठेगी उस पर लिखवाएगी।
और फिर मुझे फोन करके बुलाएगी।
देखिए ना जरा
अभी कितना वक्त पड़ा है।
अरे हट
आप भी तो हटिए ना खाना।
इसके इरादों से टकराएगी तो ये तहस-नहस कर
डालेगी आपको।
आप भी दुआ कीजिए
कि बात कल पर डाली है तो
कल कभी ना आए
पर ऐसा होगा नहीं
[संगीत]
अपना ख्याल रखिएगा
और
[संगीत]
ज्यादा ना रोइएगा प्लीज।
[संगीत]
[संगीत]
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
ओ
[संगीत]
[संगीत]
ओम
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
क्या बना?
मिठाई लाना भूल गया।
1 किलो या 2 किलो?
बोलिए ना 1 किलो या 2 किलो?
4 किलो। तो वो अभी तक डटी हुई है।
नई मोहब्बत में पुरानी मोहब्बत से ज्यादा
दम होता है।
जाकर सो जाइए। क्यों जाग रही हैं अभी तक
मेरे लिए?
अरे आपके लिए नहीं जाग रही हूं। अपने लिए
जाग रही हूं।
बदबख्त अपने साथ हम जैसियों को भी जलील
करवाएगी। थप्पड़ भी नहीं मारा। ये कैसे हो
सकता है? आपके मशवरे पर पूरा अमल करता
हूं। थप्पड़ मार कर आया हूं उसे।
लेकिन हाथ से नहीं मारा।
तो कैसे मारा?
टेक्निकली।
वो मुझे जख्म दे रही थी। मैं जख्म खा रहा
था। वो तलाक मांग रही थी। मैं मुस्कुरा
रहा था।
कसम से उस वक्त मेरा फूट-फूट कर रोने को
दिल कर रहा था।
लेकिन मैं रोया नहीं।
वो तलाक के अलावा कोई बात सुनने को तैयार
नहीं थी। और मैं उसे बैठकर आबरू और वकार
पर लेक्चर
हर वकार का नाम नहीं लिया मैंने। उसे तो
ना कभी मैं मिला हूं ना जानता हूं। तलाक
पर मान गए आप?
उसके हिसाब से मान गया।
लेकिन दरअसल नहीं माना मैं। कल पर टालने
का क्या मतलब होता है?
क्या मतलब होता है? बताइए जरा।
वो कल के होने तक मेरी बीवी रहेगी और मैं
सोचता रहूंगा पता नहीं कल को ना हो।
शुदर मुर्ख हैं आप।
क्या?
अरे नहीं हुजूर। मर्द का बच्चा
अपने ख्वाबों तले पिसी एक लड़की को उसका
हक देकर आ रहा हूं।
उसे तैयार करके आया हूं कि आज से अगर तुम
मेरी नहीं हो तो जाओ कल से मैं भी
तुम्हारा नहीं हूं।
मेरे तो सब वजीफे जाया कर दिए ना आपने।
आप वजीफे पढ़ रही थी। दिमाग खराब है आपका।
मोहब्बत की वफात पर फातिहा पढ़िए प्लीज।
और दुआ कीजिए कि खुदा उसे माफ कर दे।
कमबख्त ने बड़े-बड़ों के घर बर्बाद किए।
सुनिए
अपना ख्याल रखिएगा
और ज्यादा मत रोइएगा प्लीज।
आ
[संगीत]
अच्छा
तो उसे गुस्सा भी नहीं आया।
आया होगा लेकिन उसको पता चल गया था कि
गुस्सा दिखाने का कोई फायदा नहीं है।
मुझे तो ऐसे लगा जैसे वो आके मारेगा मुझे।
डरपोक है एक नंबर का। कोई गाली भी दे दे
तो सुनकर चुप हो जाता है।
तो वो आज तलाक दे देगा। हां।
कह कर गया तो बात पूरी करेगा। झूठ नहीं
बोलता।
बेचारा
बेचारे को गोली मारो और जल्दी से तैयार हो
जाओ।
हां तैयार होने ही जा रहा हूं।
अरे तुम कहीं जा रहे हो क्या?
ड्यूटी पे जाना है यार।
आज कहीं नहीं जाओगे तुम? ड्यूटी से छुट्टी
करो और मेरे साथ चल रहे हो तुम।
कहां? कहां जाना है?
वकील के पास तलाक के कागज बनवाएंगे। हाथी
से साइन करवाएंगे और शाम होने से पहले हम
दोनों निकाह करेंगे।
पक्का
एकदम पक्का।
और वो तुम्हारी अम्मी तलाक होगी तो वो चुप
रहेंगी क्या?
वो तो मुझे देखती भी ऐसे हैं जैसे खा ही
जाएंगी।
डरो मत। निकाह के बाद अपने हाथों से खाना
खिलाएंगी तुम्हें।
लगता तो नहीं है कि खाना खिलाएंगी।
आज तक वही हुआ ना जो मैंने कहा।
हम वो तो हुआ है।
तो फिर निकाह होते ही अम्मी से कह देना यह
वाली डिश खाऊंगा। बनवाना मेरा काम।
मुझे यकीन नहीं आ रहा। मैं सोच भी नहीं
सकता था कि महीने भर की मोहब्बत में तुम
तलाक भी ले लोगी और हम निकाह भी कर लेंगे।
हादी कहा करता था। मोहब्बत में बड़ा दम
होता है। नामुमकिन को मुमकिन बना देती है।
मुझसे ज्यादा तुमसे कोई भी मोहब्बत नहीं
कर सकता। पढ़ ली होगी उससे किसी किताब ने
ये बात।
चलो मैं भी 10 मिनट में तैयार होकर निकल
रही हूं। आज यहीं से गाड़ी में बैठ कर
जाऊंगी।
सबके सामने?
हां। सबके सामने।
ठीक है। चलो फिर मैं भी तैयार होता हूं।
ओके।
ओके।
[संगीत]
आप अभी तक तैयार क्यों नहीं हुए?
आज मैं छुट्टी करूंगा।
क्यों भाई? पहले तो सब बुखार में भी
छुट्टी नहीं करते थे। आज क्या हुआ?
आज वो अपनी बीवी को तलाक दे रहा है।
काम से तड़प रहा होगा बेचारा।
वैसे तो तुम्हें भी छुट्टी करनी चाहिए थी
आज। तुमसे भी उसका तड़पना कहां देखा जाए?
[संगीत]
आप घबराइए मत।
ज्यादा गम नहीं है उसको। उन्होंने मान
लिया है कि अब तो महानूर गई। और अब तो
मैंने भी मान लिया है। तलाक हो जानी
चाहिए।
अच्छा। इसलिए कल रात को वजीफे पड़ रही थी
कि तलाक हो जाए।
जी नहीं
सब वजीफों में एक ही दुआ पढ़ी है कि महनूर
को अपने आप पर रहम आ जाए तलाक हो ना तलाक
की बात हो लेकिन दुआएं दिल तोड़ने वालों
के काम नहीं आती
और खुदा बेवफाओं पे मेहरबान नहीं होता
इसलिए आज वो तलाक देकर आए तो तो 4 किलो
मिठाई लाकर दीजिएगा उनको और कहिएगा
अगर वो इस तलाक को गम समझते हैं
तो फिर वो खुशी को कम समझते हैं।
बाजार से रोटी मत लाइएगा। आकर पका दूंगी।
तलाक को गम समझते हैं तो खुशी को कम समझते
हैं।
[संगीत]
तो क्या मर्जी है बेटा?
पहले दिन जो हथौड़ी लेकर गए थे आज हमारे
सर पर मारोगे।
आप मुझे गलत समझ रही हैं आंटी। ये सब
कुदरत की तरफ से हुआ है।
[संगीत]
उससे जब मोहब्बत हुई तो मुझे मालूम ही
नहीं था कि उसका निकाह हुआ हुआ है। मुझे
तो बाद में पता चला और बाद में यह भी पता
चला कि वो उस निकाह से खुश नहीं है।
जब उसका निकाह हुआ था
खुश थी बहुत।
और चार-छ हफ्तों बाद यह भी मान गई थी कि
वो हादी से मोहब्बत करने लगी।
[संगीत]
कहां है वो मोहब्बत?
[संगीत]
वो उसके दिल में नहीं है। अब
खुदा का खौफ करो बेटा। दिल कोई किराए का
फ्लैट नहीं है। कि हादी किराया बढ़ने पर
छोड़ जाए और तुम तुम किराया देकर रहने
लगो।
और अगर इस तरह होने लगा तो किराया और
किराएदार दोनों बदलते रहेंगे।
और फिर तुम भी एक दिन कहीं और चावस होगे
और वो
किराएदारों के हाथों टूटे हुए दिल की
मरम्मत कराती रह जाएगी।
[संगीत]
आप शायद मोहब्बत को समझती नहीं है आंटी।
वो हम जैसों के इख्तियार में नहीं होती।
समझती हूं बेटा।
औरत से और मां से बढ़कर मोहब्बत को और कौन
समझ सकता है?
और यह भी जानती हूं कि यह मुई बेख्तियारी
क्या होती है।
लड़की के पास जब इंकार करने की काबिलियत
ना रहे तो वो तुम जैसों के सामने
बेख्तियार हो जाती है।
[संगीत]
लेकिन तुम अपने इख्तियार के बारे में तो
सोचो। तुम तो बहुत पढ़े लिखे हो।
समाज को बनाने की जिम्मेदारी है तुम पर।
जिम्मेदारी निभाने की बजाय
समाज को बर्बाद कर डालोगे।
ये औरत के हक का मामला है आंटी। औरतों को
हकूक मिलेंगे तो समाज बनेगा।
और फिर हम दोनों के पास शरई हक है आंटी।
वो हाथी से तलाक ले सकती है और मैं उससे
शादी कर सकता हूं।
जब मजहब हमें इस बात से नहीं रोकता तो
आप क्यों रोकती हैं?
मैं रोक कहां रही हूं? मैं तो समझा रही
हूं बेटा।
और अब तुम मजहब की बात कर रहे हो। तो चलो
बताओ। खाना तीन वक्त खाओ या चार वक्त खाओ?
मजहब रोकता है क्या?
छह वक्त भी खाओ तो मजहब नहीं रोकता।
लेकिन छह वक्त खाने से सवाब नहीं मिलता।
सवाब तो रोजा रखने से मिलता है।
खा पीकर मौज करने वालों से समाज नहीं
बनता। समाज बनता है रोजा रखने वालों से।
भूख में ज्त करने वालों से।
और जो भूख में ज्त नहीं करते तुम जैसे
पढ़े लिखे लोग जानते हो उन्हें क्या कहते
हैं? जानवर और जानवरों के बारे में सभी को
पता है कि उनका कोई समाज नहीं होता।
अब तुम गवाह रहना।
मैं तुम्हें रोकने नहीं आई थी। मेरे अंदर
इतनी काबिलियत होती तो मैं अपनी बेटी को
ना रोक लेती।
[संगीत]
हां हां 12:00 बजे पहुंच जाऊंगा मैं
डेफिनेटली।
एक्चुअली अपने लॉयर से मिलना था इसलिए
थोड़ी देर हो जाएगी। नहीं नहीं ऐसा कुछ
नहीं है।
ओके अब मैं इंतजार करूंगी।
एंड रिमेंबर वी हैव टू बी समवेयर ओके
बाय
बाय
[संगीत]
नाराज हो ना मुझसे
किस बात पर?
सुबह जो मैंने कहा था कि वजीफे इसलिए पढ़
रही हो कि हादी को तलाक हो जाए।
अरे नहीं उस बात पर तो खुश हुई थी बहुत।
एक बाप को हमेशा बाप की तरह ही होना
चाहिए। नजर रखनी चाहिए बेटी पर।
तो फिर किस बात पर नाराज हो?
नाराज तो अपने आप से हूं।
मैं समझती थी कि आप मेरे बाप से ज्यादा
मेरे दोस्त हो। और दोस्त एक दूसरे पर नजर
नहीं रखते।
सॉरी कह दूं तो खुश हो जाओगी?
अच्छा नहीं लगता। बाप बेटी के सामने सॉरी
कहे।
दोस्त तो कह सकता है ना।
[संगीत]
हां
ठीक है बस
[संगीत]
इतना ही खाएंगे बस
हां काफी है याद आ गया 4 किलो मिठाई लेकर
आनी है जाओ अलमारी से मेरा पर्स तो लेकर
आओ
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
[हंसी]
[संगीत]
याद है जब हम सुबह फोन पर बात कर रहे थे
तो मेरे दरवाजे पर कोई आया था?
हां।
पूछो कौन आया था?
हादी।
अरे नहीं। तुम्हारी अम्मी
तलाक को रोकने की आखिरी कोशिश करने आई थी।
फिर तुमने क्या कहा? मैंने तो हम से सब
कुछ सुना मगर साफ कह दिया। ये तो कुदरत के
फैसले हैं आंटी।
[संगीत]
हादी का फोन है।
तो सुनो देखो क्या कहता है।
क्या बात है हादी?
अरे कोई बात नहीं है। वैसे ही मुझे बाद
में ख्याल आया कि जब मैं बारिश में
गोलगप्पे ला सकता हूं। रोज तो मैं दफ्तर
ले जा सकता हूं। ला सकता हूं। तो आज मैं
तलाक के कागज़ बनवाने के लिए तुम्हें
भेजूं।
क्या मतलब?
मतलब यह है कि तुम्हें कहीं जाने की जरूरत
नहीं है। मैं कागज़ बनवा रहा हूं। आज
छुट्टी कर ली है मैंने। थैंक यू बोलो।
कितने बजे तक आओगे?
अ बस मैं वकील साहब के पास ही बैठा हूं।
ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे में आ जाऊंगा।
कहो तो आखिरी बार वो गोलगप्पे लेकर आऊं।
कोई जरूरत नहीं है। तुम बस कागज लेकर आ
जाओ।
शादी कब कर रही हो उससे?
तुम बस अपने काम से काम रखो।
अरे मैं कजिन हूं तुम्हारा। सगी खाला का
बेटा हूं। मुझे बुलाओगी नहीं क्या?
बुलाऊंगी। वकार ने कहा तो बुलाऊंगी।
वापस चलो। वो कागज खुद ही बनवा रहा है।
अपनी बीवी से बात कर रहा था।
साइन करने से पहले आखिरी बार उससे मुंह भर
कर बीवी कह रहा हूं।
तलाक की वजह क्या लिखूं?
लिखिए कि
रुखसती से पहले उसे कोई और लड़का पसंद आ
गया
तो उसने कहा मुझे तलाक दे दो और मैं मान
गया।
जब आप मान गए तो ये सब क्यों लिखवा रहे
हैं?
अरे सच लिखवा रहा हूं ना।
लोग पढ़ेंगे तो हसेंगे।
लोग देखेंगे तब भी तो हसेंगे ना। आप लिखिए
प्लीज।
आप अपनी बीवी से बहुत प्यार करते हैं ना?
मैं समझता हूं आपके दुख को।
कैसे?
आपकी बीवी ने भी यही किया था आपके साथ।
मतलब रुखसती से पहले आपको कहा था कि मुझे
कोई दूसरा वकील पसंद आ गया है। इसलिए तुम
छुट्टी करो।
नहीं जनाब बिल्कुल नहीं।
तो फिर आप मेरे दुख को कैसे समझ सकते हैं?
आप जो कर सकते हैं वो करिए प्लीज।
[संगीत]
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