All language subtitles for ประหาร 2_Subtitles02.HIN

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Original subtitles

अस्वीकरण इस फ़िल्म के सभी पात्र काल्पनिक हैं

और इनकी किसी भी समुदाय या जीवित या मृत व्यक्ति से कोई समानता नहीं है।

कोई भी समानता निरुद्देश्य और संयोग मात्र है।

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

[बीप के साथ संदेहजनक आवाज़]

शिवपुरी, मध्य प्रदेश वर्ष 1994

-[पुलिस की गाड़ी का सायरन] -[लोगों का कोलाहल]

[पुलिस की गाड़ी का सायरन जारी]

[आदमी] जज साहब, ये है मंजू सिंह।

इस औरत ने पैसों के लालच में आ के दो मासूम प्रेमियों का

बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया।

इसने ये एक मिनट के लिए भी नहीं सोचा

कि उनकी ज़िंदगी बस अभी-अभी शुरू हुई थी।

और उनकी किस्मत देखिए।

अपने घरवालों से भाग कर

श्री रमेश कुमार ट्रस्ट धर्मशाला, शिवपुरी में कुछ दिनों के लिए रहने के लिए आए थे,

जहाँ की देखरेख का ज़िम्मा इसका था।

लेकिन उनके पास पड़े पैसे और सोने को देखकर इसकी नीयत बदल गई।

इसने उन्हें भरोसा दिलाया कि वो वहाँ महफ़ूज़ हैं।

और एक रात चोरी की नीयत से उनके कमरे में गई।

उन्होंने ऐसा करने से इसे बहुत रोका

लेकिन इसने अपना आपा खो दिया।

और इससे दोनों के सिर पर वार कर दिया

-जिसकी वजह से दोनों की जान चली गई। -[टाइपराइटर की टक-टक और टन्न सी आवाज़]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

[मारने की तेज़ आवाज़]

[गंभीर संगीत बजते हुए]

[टाइपराइटर की हल्की टक-टक]

[वकील] जज साहब, ये ओपन एंड शट केस है।

सारे सबूत, गवाह और सर्कमस्टैंशियल एविडेंसेस इसके ख़िलाफ़ हैं।

ऐसा घिनौना अपराध करने वाले को सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए,

-ये कोर्ट से मेरी गुज़ारिश है। -[टाइपराइटर की हल्की टक-टक जारी]

सारे गवाहों और सबूतों को मद्देनज़र रखते हुए

ये अदालत आरोपी मंजू सिंह को 28 साल के लिए क़ैद-ए-बा-मशक़्क़त

और 25 हज़ार जुर्माने की सज़ा सुनाती है।

अदालत की कार्यवाही स्थगित की जाती है।

[रहस्यमय संगीत बजते हुए]

[मुख्य संगीत बजते हुए]

[मुख्य संगीत बजते हुए]

-[पक्षियों की चहचहाहट] -[खट-पट की आवाज़]

[खट-पट की आवाज़]

[अस्पष्ट बातचीत]

[खट-पट की आवाज़]

[अस्पष्ट बातचीत]

[गहरी साँस लेते हुए]

-[पक्षियों की चहचहाहट] -[अस्पष्ट बातचीत]

ये, इस हफ़्ते की लिस्ट।

अरे, कभी एक दिन तो अच्छी चाय बना दिया करो।

[महिला प्यार से] अरे, मंजू दीदी, चार बीड़ी मँगवा दो, कल से अच्छी चाय बना दूँगी।

[महिला हँसते हुए]

हाँ। ठीक है ये सब।

पर पहले का हिसाब-किताब क्लियर करो।

उधारी नहीं चलेगी अब।

हाँ।

तेरे आशिक की अच्छाई का कितना ही फ़ायदा उठा लेंगे हम।

तेरे जाने के बाद तो हमें उधार भी नहीं देगा वो।

[कपड़े धोने की आवाज़]

[पानी की आवाज़]

-[कपड़े धोने की आवाज़] -[डायल करते हुए]

[फोन की घंटी बजते हुए]

[फोन की घंटी बजते हुए]

[फोन बजना जारी है]

लॉटरी

[फोन बजना जारी है]

[गहरी साँस लेते हुए]

[फोन बजना जारी है]

हाँ, बताइए।

लिस्ट तैयार है सामान की। कब ले सकते हैं?

-आज रात को ही आ जाऊँ? -हम्म।

पहले सपने में न मतलब... हैलो।

[फोन की बीप]

हैलो।

-[तनावभरा संगीत बजते हुए] -[चिड़ियों की चहचहाहट]

-नाम क्या है? -जी, समर सिंह।

-पूरा नाम? -समर सिंह चौहान।

-कौन से वाले चौहान हो? -सर जी, ऊँचे वाले।

-तो गाड़ी थोड़ा तेज़ चलाएँ, चौहान साहब। -जी, साहब।

[तनावभरा संगीत जारी है]

[गाड़ी का हॉर्न बजते हुए]

एक इनिशियल यहाँ।

जी, सर।

और, सर, आप से पहले वाले मिहिर मानिक साहब ने न

एक ऑर्डरली क्वार्टर के लिए अप्रूवल डाला था।

आप आदेश दें, हम काम शुरू करा देते हैं, सर।

हमें शांति में अकेले रहना पसंद है, पंडित जी।

पता नहीं, कौन-कौन जात का मज़दूर आएगा,

कौन जात का अर्दली आएगा घर में,

घर गंदा करेगा।

हम साइन कर देते हैं।

अगले जेलर साहब के लिए बनवा लीजिएगा

लेकिन हमारे रिटायरमेंट के बाद।

[शम्भूनाथ हँसते हुए]

हम यहाँ से चले जाएँ उसके बाद। ठीक है?

एकदम संत हैं आप, सर।

[जेलर हँसते हुए]

और, सर, आपने कहा था कि महिला वॉर्ड एक दिन निरीक्षण करेंगे। कब?

हाँ, तो जेलर साहिबा को इंटिमेशन भेज दीजिए।

-चलते हैं हम। -हम्म।

-जाएँ, सर? -चलो।

[तनावभरा संगीत बजते हुए]

[झींगुरों की झाएँ-झाएँ]

[डंडा पीटते हुए]

-[कदमों की आहट] -[डंडा पीटते हुए]

[धीमे से] मंजू!

[महिला गार्ड] ए, मंजू!

[डंडा पीटते हुए]

ए। श्श... श्श...

चारु!

खोल न।

पागल है?

मेरी ड्यूटी खत्म होने को है।

ठहर।

ये ले।

अब खोल।

[चाबी की खन-खन]

[दरवाज़ा खुलते हुए]

-जल्दी आ जाना। -हाँ।

[शम्भूनाथ] 17 रुपए। राजेश यादव!

सत्ताईस...

[शम्भूनाथ] श्श...

[शम्भूनाथ हिसाब करते हुए]

[शम्भूनाथ हिसाब करते हुए]

[दरवाज़े पर दस्तक]

आ गईं आप?

कुछ समय बाद ऐसे खुले में साँस लेने के लिए

आपको ऐसे छुप-छुप के नहीं आना पड़ेगा।

अच्छा है।

क्या पता।

अब तो इनके बीच रहना अच्छा लगता है।

कम से कम अपने हिसाब से तो जी रही हूँ।

नया जेलर आया है। सुना कि नहीं आपने?

ऊँच-नीच में फँसा रहता है।

वैसे आप तो सिंह हैं न?

सिंह साहब! अरे, हाँ।

वो लिस्ट भी दे दीजिए अभी।

कैमरा-वैमरा लगा रहे हैं पूरे जेल में इधर-उधर।

तो दिक्कत हो जाएगी।

-पहले पिछला हिसाब कर लेती हूँ। -छोटा महसूस करा देती हैं आप।

बाकी चुड़ैलों से तो हिसाब करना पड़ेगा न।

हाँ।

-करना तो पड़ेगा ही। -[दरवाज़े पर दस्तक]

तिजोरी खोलिए।

[मंजू खाँसते हुए]

[मंजू आह भरते हुए]

ये किस लिए?

आज बर्थडे है मेरा, बर्थडे।

आज न मैं 59 का हो...

[मंजू] ओह।

तो फिर तो तोहफ़ा हमें देना चाहिए।

-एक बात बताइए। -क्या?

आप इतने सालों से हमें मिल रहे हैं,

आपने कभी अपने परिवार के बारे में हमें नहीं बताया।

एक बीवी थीं।

अच्छी थीं।

भगवान ने उनको अपने पास बुला लिया।

एक बेटा था। मतलब, है।

पढ़ाया-लिखाया...

लोन ले के विदेश भेज दिया।

बाद में खबर मिली, शादी कर चुके हैं साहबजादे।

फोन-वोन भी नहीं उठाते।

अब कर्ज़ तो चुकाना है।

तो टूथपेस्ट, कंघी अंदर,

गोभी, मूली बाहर।

लेकिन एक बात बताएँ?

हमको न इस बात का कभी कोई मलाल ही नहीं रहा।

-पूछिए क्यों। -क्यों?

आप से मुलाक़ात हो जाती है न।

बहुत सुकून मिलता है।

-और बच्चे? -किसके?

बेटे के।

हाँ, लड़की है।

एरिका नाम रखा है।

बताइए।

एरिका कोई नाम होता है भला?

एरिका मिश्रा!

एरिका!

वैसे इतना बुरा नाम भी नहीं है।

हाँ, आपको अच्छा लग रहा है, तो अच्छा ही होगा।

आज तारे बड़े ख़ूबसूरत से नज़र आ रहे हैं।

[शम्भूनाथ] आपको भी वैसे ही नज़र आ रहे हैं जैसे मुझे नज़र आ रहे हैं?

हम्म?

[चारुलता] बैरक नंबर पाँच के कैदी ठीक हैं।

अच्छा, हम चलते हैं।

नहीं तो हमारी... मेरी वजह से चारुलता की नौकरी चली जाएगी।

हम चलते हैं।

[आह भरते हुए]

[चारुलता] बैरक नंबर चार के कैदी ठीक हैं।

[दरवाज़े पर दस्तक]

हाँ, हाँ, मैं यहीं हूँ। मैं यहीं हूँ।

हैप्पी बर्थडे, मिश्रा जी।

[धीमा मधुर संगीत बजते हुए]

[धीमा मधुर संगीत जारी]

-[कदमों की आहट] -[धीमा मधुर संगीत जारी]

[शम्भूनाथ] हाँ, भैया, खोलो-खोलो द्वार।

बहुत काम है। बहुत ठंडी है आज।

क्या, मिश्रा जी, आजकल खूब चाँदी कट रही है। हैं?

आजकल हर दो-चार दिन में ले जा रहे हो सब्जियाँ।

हाँ, तो?

खाद, पानी भी तो दिलवाते हैं।

दो बार दिन में ओवर टाइम करते हैं।

-ठीक है, ठीक है। -तब जा के उगती हैं सब्जियाँ।

-[शम्भूनाथ] चलो, खोल दो, भैया। -अरे, चेक कर लें एक बार?

फिर टमाटर का सत्यानाश करेगा।

-ठीक है। कर लेने दो। -अरे अरे, गोभी।

गोभी, गोभी में छेद हो जाता है।

ना कर, भाई। ए, भाई। ए, भाई।

काट के बेचना पड़ता है।

सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।

-क्या कर रहे हो, यार? -ड्यूटी नहीं करें अपनी?

घंटा आपकी मेहनत है।

क्या बोले तुम? ए, ए, ए, ए!

चोरी करने में भी मेहनत लगता है। समझ गए?

और तुम तो मत बोलो।

अनुकम्पा पर हो, साहबजादे, तुम।

-अपने पिताजी की बदौलत। -चलो, छोड़ो। हम खोल रहे हैं ताला।

हाँ, खोलो। खराब हो जाता है न।

-जाइए। निकलिए। -जा रहे हैं।

सब्जी से दुश्मनी।

आओ, महाराज।

[शम्भूनाथ गाते हुए] हो के रिक्शा पर सवार

♪ शम्भू चला है हरिद्वार ♪

♪ हो के रिक्शा पर सवार शम्भू चला हरिद्वार ♪

♪ हो के साइकिल पर सवार ♪

♪ शम्भू चला है हरिद्वार ♪

♪ हो के साइकिल पर सवार ♪

♪ शम्भू चला है हरिद्वार ♪

♪ हो के साइकिल पर सवार ♪

[फ्रीज़र की तेज़ आवाज़]

♪ शम्भू... ♪

[फ्रीज़र की तेज़ आवाज़]

सर, हम जितेश नारंग, हम हेड वॉर्डर हैं, सर।

सलाम सर, हम नदीम खान, जूनियर वॉर्डर।

ये आपके लिए भूरी भैया ने प्यार का गुच्छा

और ये अंग्रेज़ी शरबत भेजा है।

भूरी भैया, वो केशव है न अंदर,

उनके बड़े भाई साहब, मेरा मतलब, एमएलए साहब।

केशव को भूरे-भूरे बुलाते हैं।

तो हम सब भी उन्हें भूरी भैया ही बुलाते हैं।

रुतबा है उनका। क्यों, शम्भूनाथ जी?

हम्म।

[तनावभरा संगीत बजते हुए]

[ज़मीन पर गिरने की आवाज़]

[जेलर] तुम्हारे क्या लगते हैं ये केशव?

मतलब, भूरी भैया?

नहीं, वो...

पुराने जेलर साहब भी आए थे तो ये सब...

ये जगह हमसे पहले

जैसे भी चलती हो,

अब हमारे हिसाब से चलेगी।

कैदियों की बीड़ी, गांजा, शराब,

और ये सब, बंद।

हम्म।

ये जेल है, कोई होटल नहीं।

क्या नाम है तुम्हारा?

जी, नदीम खान।

कैदियों को बाप मानना छोड़ दो।

आपकी अम्मा नाराज़ हो जाएँगी।

समझ गए आप लोग?

-यस, सर। -यस, सर।

हम्म।

चलो।

जी, सर।

[गाड़ी की गर्र-गर्र]

[गाड़ी आ रही है]

[महिला] चलिए चलिए, उतरिए जल्दी।

जल्दी आओ।

जल्दी-जल्दी आइए।

[पक्षियों की चहचहाहट]

[महिला गार्ड झल्लाते हुए] अरे, उतर न।

[महिला पुलिस] चलिए, चलिए।

चलिए, चलिए, जाइए।

[महिला गार्ड 2 गुस्से में] सीधे खड़े रहो।

सीधे।

अरे, लाइन बनाना नहीं आता क्या

-तुम लोगों को, हैं? -ये देखो।

[महिला गार्ड 2 गुस्से में] और तू कहाँ अंदर घुस रही है?

[हेड गार्ड] हम्म।

-नाम? -मीना।

-उम्र? -49।

आगे बढ़।

अगली।

-नाम? -कांता।

पूरा बता।

कांता मनोज यादव, जैसे आपको पता ही नहीं।

हम्म। नाम?

नैना कुमारी।

सही से पैदा तो हो लेती कांड करने के पहले।

उम्र बता।

[गुस्से में] क्या उम्र है?

22!

अंदर जा।

ए, जल्दी आ।

-जा। -चल।

आ न।

अरे, लेने आना पड़ेगा क्या, महारानी, तुझे?

क्या सुनाई नहीं दे रहा तेरो को?

-ए। हाँ, चल। -प्लीज़।

-नाम? -मीरा दास।

-उम्र? -50।

[महिला पुलिस 2] चल, उतार।

-अरे, उतार न। -[नैना] प्लीज़ नहीं।

निकाल। मैडम, मान नहीं रही है ये।

[हेड गार्ड] क्या हो गया?

तू जा।

-क्या दिक्कत है? -मैम, वो...

जीभ दिखा। जीभ दिखा।

बाल खोल।

खोल रही है कि...

[नैना सुबकते हुए]

स्वेटर खोल।

-मैम! -उतार।

नहीं।

पहले सोचना था न।

चल।

[सुबकते हुए]

[तनावभर संगीत बजते हुए]

हाथ ऊपर।

[सिसकते हुए]

[पक्षियों की चहचहाहट]

[महिला कैदी] ये लो, अब दिखाओ कर के। दिया तुमको पत्ता।

-बैठो। -हम भी कम नहीं हैं।

बन गई दिहाड़ी?

[मंजू] लो।

अरे, वाह, मंजू!

चैम्प है तू तो।

ये नई वाली कौन है?

पैसों की अफरातफरी हुई थी। सुना है किसी बैंक में काम करती थी

और वहाँ का बैंक मैनेजर अपनी नौकरी बचाने के लिए इसको फँसा दिया।

[झींगुरों की झाएँ-झाएँ और कैदियों के खर्राटे]

[चारुलता] सुन, तू अपनी दुकानदारी बैरक में से आज या कल में हटा लेना।

वो रजनी मैडम आएँगी चेकिंग के लिए।

नए सुपरिटेंडेंट सर का ऑर्डर है।

यहीं कहीं छुपा दूँगी डिस्पेंसरी में।

अच्छा, ये बता।

आगे का क्या सोचा है?

क्या करेगी?

कहाँ जाएगी?

क्या फ़ायदा सोचने का?

कभी सोचा था कि पूरी ज़िंदगी यहीं निकल जाएगी।

जो है, यहीं है सब कुछ।

बाहर का तो कुछ याद ही नहीं।

एक बात पूछूँ?

मना करूँगी तो नहीं पूछेगी क्या?

कई सालों से जानती हूँ तुझे।

क्या तूने सच में उन बच्चों को मारा था?

[दरवाज़ा खुलते हुए]

[मारने की तेज़ आवाज़]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

तुझे क्या लगता है?

क्या फ़र्क पड़ता है, मारा था, नहीं मारा था?

तेरे साथ तो जो होना था वो हो ही गया।

कई सालों तक लगता था एक बुरा सपना देख रही हूँ।

अब नींद टूटेगी, तब नींद टूटेगी।

[मंजू आह भरते हुए]

छोड़ इन सारी बातों को।

तू मेरे साथ यहीं रह लेना।

तेरा वाला भी पड़ोस में ही रहता है।

चल, चियर्स।

चियर्स।

[महिला] सभी कैदी ध्यान देंगे!

आज महिला जेल के चार कैदियों की कोर्ट में सुनवाई है।

जिनके नाम हैं, कृष्णा देवी,

नर्मदा तिवारी,

सोनिका सिंह और नैना कुमारी।

ये चारों ठीक बारह बजे

-अपनी-अपनी बैरक में तैयार रहें। -चल, बेटा, आज हो जाएगी तेरी बेल।

और बाकी सब अपने काम पर लग जाएँ।

[पक्षियों की चहचहाहट]

[कुत्ते के पिल्लों की कूँ-कूँ]

[पक्षियों की चहचहाहट]

[कुत्ते के पिल्लों की कूँ-कूँ]

अरे!

[आदमी खुश होते हुए]

[आदमी पुचकारते हुए]

[आदमी] आ जा।

[पिल्ला कूँ-कूँ करते हुए]

अरे, शाबाश।

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

ए, शाबाश।

[पिल्ला कूँ-कूँ करते हुए]

चलाओ, बे।

[दहशत भरा संगीत बजते हुए]

चला ले, बेटा।

[इंजन स्टार्ट होते हुए]

[पिल्ला कूँ-कूँ करते हुए]

[कुत्ता रोते हुए]

[कुत्ता भौंकते हुए]

[दहशत भरा संगीत बजते हुए]

[गाड़ी रुकते हुए]

आओ।

जल्दी, जल्दी।

चलो, चलो।

[दरवाज़ा खुलते हुए]

नई वाली कौन थी?

कौन? दो-तीन नई हैं।

एक ही तो थी, जो औरत जैसी दिख रही थी।

हम्म?

तेरे अलावा।

नाम?

घर-परिवार, सब ठीक?

बेटी कॉलेज जाने लगी होगी।

[रजनी घबराते हुए] नैना।

आप पेपर्स लाए हैं न सारे?

सारे सबूत हैं, जमानत के पैसे भी हो चुके हैं।

[नैना] क्योंकि आपको पता है मैंने कुछ नहीं किया।

सुनो।

-[वकील कुछ कहते हुए] -उस वकील को लेकर आओ इधर।

भूरी भैया, हमसे कोई गलती हो गई क्या?

हम लगे हैं, पूरी कोशिश कर रहे हैं।

बड़े भाई साहब ने भी तो बोला है कि आपका अंदर रहना ठीक है।

वरना हम तो आपकी कब की जमानत करा देते।

लगे हुए हैं, भैया।

थोड़ा और लगो

और उस वकील को लेकर आओ।

जी, भैया।

बुला रहे हैं।

अरे, वकील साहब, आपको भूरी भैया बुला रहे हैं।

-हमें? आते हैं। -हाँ। आइए।

भैया, आ गए।

हाँ, जी, भैया, प्रणाम।

लड़की के वकील हो?

जी, भैया।

-जमानत कराने आए हो? -हाँ, जी, भैया।

सारे सबूत भी लेकर आए हैं और जमानत के पैसे भी हो गए हैं।

-आज ही बेल... -जमानत होगी कैसे?

अरे, भैया, हो जाएगी।

बहुत ही छोटा सा केस है और वो भी झूठा।

भैया, हम पूरी कोशिश करेंगे कि है न...

उनको जमानत आज ना मिले।

-जी, भैया? -जी, भैया।

[दहशत भरा संगीत बजते हुए]

मंजू, बाथरूम बास मारता है।

-बोल दें क्या पूछे तो? -तुझे क्या पड़ी है?

जाने से पहले साफ़ करवाती है न इन लोगों से।

चुप रहो।

कुछ बोलने की ज़रूरत नहीं है।

जितना पूछें, उतना ही जवाब देना। ठीक है? समझ गए आप लोग?

आइए आइए। आइए, सब लोग आइए। लाइन में आइए।

हाँ, इधर आइए। आइए।

इधर, इधर।

[महिला पुलिस] ए। श्श..

[गंभीर संगीत बजते हुए]

प्रकाश सिंह नाम है हमारा।

क्या नाम बताया जेलर साहब ने?

प्रकाश सिंह।

प्रकाश सिंह।

कई सालों से आप जैसे कैदियों की ज़िंदगी सुधारने में लगे हैं।

आगे भी लगे रहेंगे।

आप लोगों की कुछ कम्प्लेंट हो

और आप अगर अभी नहीं बताना चाहें, तो कोई बात नहीं।

बिना नाम लिखे कम्प्लेंट बॉक्स में डाल सकती हैं।

हम तक पहुँच जाएगी।

प्रकाश सिंह।

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

[लड़की सिसकते हुए]

[सिसकना जारी है]

[लड़की का रोना और सिसकना जारी है]

[लड़की का रोना और सिसकना जारी है]

[मंजू] तेरी तो आज बेल होने वाली थी, क्या हुआ?

मैंने कुछ नहीं किया है।

मैंने कोई चोरी नहीं की है।

यहाँ सब यही कहते हैं।

किस्मत के मारे हैं।

बहुत डर लग रहा है।

[नैना का सिसकना जारी है]

आदत डाल ले।

[नैना सुबकते हुए]

ज़िंदगी आसान हो जाएगी।

[रोना जारी है]

[रोना जारी है]

[रोना जारी है]

-[साथी कैदी] भैया जी! -[भूरी] हाँ।

इस बार थोड़े ज़्यादा दिन नहीं हो गए आपको यहाँ?

हो तो गए हैं।

साला हम भी उकता रहे हैं अब।

भैया जी, बड़े भाई साहब को अब निकलवा लेना चाहिए आपको बाहर।

भोसड़ी के!

तुम्हें क्या लगता है, हम खुद नहीं निकल सकते?

एक तो भाई साहब थोड़ा ऑफ़ चल रहे हैं चुनाव के चक्कर में।

"साला ये मत करो, वो मत करो।"

[साथी कैदी] मतलब, भैया?

अबे, इस बुढ़ऊ को कितनी बार कहा है

कि हमारे एरिया में कपड़े ना धोए।

बुलाओ जरा इसको।

[कैदी प्यार से] बुढ़ऊ, भैया बुला रहे हैं, यहाँ आओ।

अबे, प्रेमिका को बुला रहे हो, हाँ?

[भूरी गुस्से में] ए, बुढ़ऊ!

[भूरी गुस्से में] अबे!

[साथी कैदी] कान ख़राब हो गए हैं बुढ़ऊ के।

[कौवे की काँव-काँव]

अब देखना, भैया जी डॉक्टर बनेंगे।

[दहशत भरा संगीत]

अरे, चाय पियो, यार।

ठंडी हो जाएगी नहीं तो।

[कौवे की काँव-काँव]

यहाँ आइए।

नाक, कान, सब एक्सपायर हो रहा है।

लेकिन जान अभी भी कहीं अटकी हुई है।

क्यों?

हम आवाज़ लगाए, सुनाई नहीं दिया, बुढ़ऊ, हैं? हाँ?

क्या हुआ? कान का इलाज करना है, हाँ?

हम करते हैं न तुम्हारे कान का इलाज।

फिक्र मत करो।

अब सुनाई दे रहा है? हाँ?

अभी सुनाते हैं तुमको। हाँ!

[बुज़ुर्ग कराहते हुए]

बुढ़ऊ साला!

ये देखो, कान का इलाज।

साले बुड्ढे, अब सुनाई दे रहा है?

दे रहा है सुनाई, हाँ? दे रहा है सुनाई?

लो सुनो।

सुनाई दे रहा है? लो सुनो।

अगली बार जब आवाज़ लगाएँ, तो क्या बोलोगे?

"जी, भूरी भैया। हाँ, भूरी भैया।

आ रहे हैं, भूरी भैया, हम।"

सुना?

[रोचक संगीत बजते हुए]

[फोन की घंटी बजते हुए]

यस।

-[फोन पर ऑफिसर] प्रकाश! -जी, सर।

क्या तुमने केशव को सॉलिटरी कन्फ़ाइनमेंट में डाल दिया?

सर, वो जेल में मार-पीट चल रही थी, तो मैंने, सर...

अरे, उसे बाहर निकालो, यार।

ऊपर से बहुत प्रेशर आ रहा है।

सर रॉन्ग एग्ज़ाम्पल सेट हो जाएगा, सर, अगर उसे जाने दिया तो।

अरे, उसका भाई तुम्हारा रॉन्ग एग्ज़ाम्पल सेट कर देगा। समझे?

-नहीं, सर, मैं... -बाहर निकालो उसे।

ये मेरा ऑर्डर है।

आ जाइए, भूरी भैया।

ए, भूरी भैया!

आ जाइए।

[दहशत भरा संगीत बजते हुए]

[नदीम मज़े लेते हुए] भूरी भैया, जेलर साहब का मुँह तो कद्दू जैसा हो गया था

बड़े साहब का फोन आया तो।

हमने ही फोन किया था बड़े भाई साहब को, पता है?

एक बात कहें, भैया?

किसी को कुछ समझते ही नहीं हैं।

पता है?

जब हम आपकी भेंट ले के गए न उसके पास,

ऐसा बेइज्ज़त किया,

ज़ुबान से पोंछा लगवा दिया साले ने।

अम्मा-बाप तक पहुँच गया।

[फोन की घंटी बजते हुए]

-हैलो। -केशव बोल रहे हैं।

अंडा सेल से।

कौन साला?

ये केशव हेल्पलाइन है।

बाप से बात करनी हो, तो एक दबाएँ।

बहनोई से बात करनी हो, तो दो दबाएँ।

अगर बीवी को बात करनी हो,

-तो तीन दबाएँ। -मादरचोद...

चूतिया!

भैया, आराम कर लो थोड़ा आप। हैं?

हम भी जा के ड्यूटी बजा लेते हैं। हाँ।

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

[तेज़ हॉर्न बजते हुए]

[गार्ड] ए, दरवाज़ा खोल! दरवाज़ा खोल जल्दी!

दरवाज़ा खोल!

ए, दरवाज़ा खोल! बेनचोद, दरवाज़ा!

[प्रकाश] खोल!

खोल, बेनचोद!

[प्रकाश] खोल, भोसड़ी के! ड्यूटी पर सो रहा है!

-[नशे में] सर, इतनी रात को? -खोल दरवाज़ा!

सर, छेद नहीं दिख रहा।

-अरे, दिख गया। -खोल!

-हट! -अरे...

-साहब, क्या हो गया, साहब? -चल!

साहब, इस वक़्त?

-साहब, आप... -दे। हट।

या अल्लाह! सर...

साहब! साहब, सुबह आ जाना, साहब।

साहब! साहब!

-साहब! साहब! -[प्रकाश गुस्से में कुछ कहते हुए]

[दरवाज़ा बंद होते हुए]

[भूरी] क्या है?

भोसड़ी के!

उठ!

[भूरी कराहते हुए]

उठ!

मादरचोद!

साले! हट!

ए, तेरी तो!

निकली मर्दानगी?

या बची है अभी भी?

हैं?

[भूरी कराहते हुए]

-लॉक कर दे इसे। -जी, सर।

[भूरी कराहते हुए]

मर्दानगी तो अभी काफ़ी बची हुई है।

-[भूरी तेज़ साँस छोड़ते हुए] -[साँस की गूँज]

जनवरी 2020

[डंडा पीटने की आवाज़]

[डंडा पीटने की आवाज़]

-[डंडा पीटने की आवाज़] -[कदमों की आहट]

चारु। खोल न।

थोड़ा बाहर जाना है।

मन घबरा रहा है थोड़ा।

थोड़ी देर के लिए। खोल।

[रहस्यमयी संगीत बजते हुए]

[रहस्यमयी संगीत जारी है]

[पक्षियों की चहचहाहट]

[आईजी फोन पर] यार, प्रकाश, ये केशव भाग कैसे गया?

वो, सर, पता कर रहे हैं।

[आईजी फोन पर] मैंने तुमको पहले ही वॉर्न किया था। उसका भाई बहुत टेढ़ा आदमी है।

नहीं, सर, हमारे वॉच में आज तक ऐसा नहीं हुआ है।

अब वो इंक्वायरी की माँग कर रहा है।

[प्रकाश] सर, थोड़ा टाइम दीजिए, मैं पता लगाता हूँ।

मुझे भेजना पड़ेगा किसी को इंक्वायरी के लिए।

ठीक है, सर।

कल रात ड्यूटी पर कौन था?

जी! जी, सर, हम।

सात बजे से 11 बजे तक, फिर नदीम, फिर मनोज।

रोल कॉल किसने किया था?

जी, मैंने, सर, सुबह के पाँच बजे।

जब भी हम रोल कॉल करते थे, सर, और भूरी भैया का नाम बोलते थे

तो रोज़ अंदर से आवाज़ आती थी, सर।

"यहीं हूँ मैं, मादरचोद। कल भागूँगा।"

पर आज सुबह आवाज़ ही नहीं आई, सर।

तो हमने पास जाकर देखा

तो सेल का दरवाज़ा तो लॉक था, सर, और अंदर कोई भी नहीं था।

रोशनी हो गई थी, सर।

फिर भी हमने सर्च लाइट लगा दी।

जेल का चप्पा-चप्पा छान मारा, सर, कहीं मिला नहीं वो।

सर, हमने आपको भी फोन किया, आपने उठाया नहीं।

नदीम खान और शम्भूनाथ को छोड़कर बाकी सब निकलो।

तुम मेरे साथ आए,

तुमने केशव के सेल का ताला खोला,

उसके बाद क्या हुआ?

फिर, सर, आपने उनको...

उसको इस कदर मारा है, इस कदर मारा है न

शायद उसका पेशाब निकल गया होगा।

फोन आया था।

इंक्वायरी बैठेगी।

जितना पूछा जाए उतना ही बताना, अगर पूछें तो।

जी, सर।

अपनी तरफ़ से एक्स्ट्रा जोड़ने की कोशिश मत करना।

-समझे? -जी, सर।

चलो जाओ।

गुड ईवनिंग, सर। मैं इंस्पेक्टर अतीत सिंह हूँ।

वो लोकल थाने में केशव के मिसिंग की कम्प्लेंट आई है

तो, सर, मुझे भेजा गया है यहाँ पर।

बतौर आईओ, पूछताछ करने के लिए।

[प्रकाश] पूरा नाम क्या है?

सर, इंस्पेक्टर अतीत सिंह।

पूरा नाम, सिंह साहब?

सर, तलाकशुदा हैं हम।

-हम्म? -आओ, आओ।

-हम, सर? -सही समय पर आ गए हो।

ज़रा इन्हें हमारी जेल दिखा दो

और केशव का बैरक भी।

जाइए, सिंह साहब।

दिखा देंगे ये आपको सब।

जी, थैंक यू, सर।

अरे?

-शम्भूनाथ जी! -जी।

आज सब दिन में भी अंदर हैं?

अरे, प्रकाश सर ने खामखा का हाई एलर्ट कर दिया है।

ड्यूटी कब की होती है आपकी?

शाम-रात की।

लेकिन देश के लिए हम कभी-कभी दिन में भी काम कर लेते हैं।

तो जब ये सब कांड हुआ, तब कहाँ थे आप?

कौन सा कांड, सर?

बता दीजिए, शम्भूनाथ जी।

मेन गेट वाले गार्ड से मिलकर आए हैं हम।

हम कहाँ होंगे? घर पर ही थे हम।

हाँ।

ड्यूटी किसकी थी फिर?

क्या ड्यूटी? रजिस्टर देखना पड़ेगा, सर।

ठीक है, फिर ले आइए रजिस्टर हमारे लिए।

और डिपार्टमेंट के किसी ऐसे आदमी को लाइए

जिसको जेल के बारे में सारी ख़बर हो।

जी, जी, सर।

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

सर!

"नदीम खान!"

इससे मिलना होगा।

जी, सर।

और वो आदमी, जिसके लिए हमने कहा था?

स्वयं, सर।

तो, शम्भूनाथ जी, एक-एक लाइन के आंसर से अब काम नहीं चलेगा।

पूरी कहानी बतानी पड़ेगी।

मतलब, सर, जितना आपको पता है, उतना ही हमको पता है।

पूरी जेल के सारे स्टाफ़ को उतना ही पता है बस।

लेकिन, सर...

हम आपके लिए खतरा से खेल जाएँगे।

हम आपको एक-एक बात बताएँगे।

मेरा फ़र्ज़ है, सर। ऑफ़ रिकॉर्ड हम हर बात बताएँगे।

बस, सर, आप बाहर मत बता दीजिएगा कि हम बताए थे।

-मालूम चला कि आप... -यहाँ रुकने की व्यवस्था हो सकती है हमारी?

जी?

यहाँ रुकने की व्यवस्था हो सकती है हमारी?

रिकॉर्ड रूम है, लेकिन आपके लायक नहीं है।

हम कौन सा यहाँ सेटल होने आए हैं।

[इंडक्शन की बीप]

[शम्भूनाथ कराहते हुए]

-आओ। -हाँ।

बोलो, "बिस्मिल्लाह।"

बिस्मिल्लाह!

जय श्री राम।

-आओ। -चलो।

[इंडक्शन की बीप]

-अरे, लाइए, सर। क्या कर रहे हैं आप? -शम्भूनाथ जी, ऑन नहीं हो रहा ये।

लाइए, मैं कर देता हूँ न। मैं चाय ही बना देता हूँ आपके लिए, सर।

-ये, ये नदीम। -सलाम, सर।

[बैग खोलकर सामान निकालते हुए]

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

[नदीम कुछ कहते हुए]

जी, सर।

हाँ, नदीम जी, बताइए।

कल क्या हुआ था? शुरू से।

जी, कुछ नहीं, बस हम तो बैठ के बीड़ी पी रहे थे

हमने देखा गेट के बाहर प्रकाश सर गाली...

मतलब, बुला रहे थे।

हम दौड़ कर गए, हमने गेट खोला,

वो अंदर आए, हमारे हाथ से डंडा लिया, हमारे पिछवाड़े पर लात मारी

और तेज़ी से भूरी भैया के बैरक की तरफ़ गए,

गाली दी, बोला, "दरवाज़ा खोलो!" हमने खोला।

अंदर गए।

जो ऐसा सूता है भूरी भैया को...

मारा और फिर निकल गए।

और हमने फिर बैरक लॉक कर दिया।

सर अपनी जीप से आए थे?

जेलर भगवान होता है, सर।

अब हवाई जहाज़ से आवें।

सर, चाय।

बड़े ज़ोर-ज़ोर से मार रहे थे, सर।

और भूरी भैया की तो आवाज़ ही... मतलब

भैया की तो आवाज़ ही नहीं सुनी, सर, हमने।

बस जेलर साहब ही चिल्ला रहे थे।

सर, भैया की तो आदत थी

बिना मतलब के बात के बवाल करने की।

-ड्यूटी टाइम क्या है आपका? -वैसे तो बदलता रहता है

पर उस दिन सुबह पाँच बजे था, सर।

और आपने केशव का सेल कब देखा?

वही, सर, काउंटिंग के टाइम पर।

सुबह 05:15 बजे, सर।

सर, वो जैसे ही मनोज ने हमें बताया,

हमने तत्काल प्रोटोकॉल के हिसाब से जाँच शुरू कर दी।

सर, हमने पूरी जेल का कोना-कोना छान मारा।

हर एक सेल, हर एक बाथरूम,

बैरक के बाहर वाला बाग भी चेक करा।

तो पता चला, फ़रार है, सर।

वो हम डिसाइड करेंगे।

क्या बताएँ, सर, आपको हम?

एक तो भगवान हमको ऐसा बनाया, ऊपर से जेल में डाल दिया।

[शम्भूनाथ] ए, रामकथा मत बताओ।

पॉइंट बताओ, जो पूछ रहे हैं वो बताओ।

बेवकूफ़ आदमी!

-शम्भूनाथ जी! -हाँ?

चाय बनाइए न हमारे लिए थोड़ी सी।

प्लीज़।

कॉफ़ी, कॉफ़ी।

[कैदी नज़ाकत से हँसते हुए]

धत! माँ...

[कैदी नज़ाकत से हँसते हुए] बढ़िया आदमी हैं।

[कैदी की नकल करते हुए] तो आप बताएँगे कुछ या फिर हम...

बताएँगे न, सर।

कमीना बहुत परेशान करता था हमको।

लेकिन फिर और कोई नज़र उठाकर देखता भी नहीं था।

तो हम भी सह लेते थे।

हर बार पेशी के लिए जाता

और वहाँ देखी किसी लड़की का नाम ले-लेकर पागल हो जाता था।

अभी इस बार भी कोई नैना थी शायद।

[कैदी हँसते हुए] कह रहा था, उसको छुप-छुप कर देखती है।

लट्टू है उस पर।

[महिला] हमें क्या पता। पेशी पर जाते हैं, चले आते हैं।

फिर किसी दिन पेशी पर चले जाते हैं।

कौन-कौन साथ में जाता है, उससे हमें क्या करना है, सर।

ठीक है, जाइए आप लोग।

[घंटी बजाते हुए]

[रजनी] नैना कुमारी!

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

कहाँ बैठेंगी आप?

[शम्भूनाथ] यहाँ बैठो।

केशव को जानती हैं आप?

जी, नहीं।

बस अभी थोड़े दिन पहले हम लोग साथ में कोर्ट गए थे।

वहाँ मेरी बेल ही नहीं हुई, सर।

तो आते वक़्त साथ में ही आए थे।

बस।

पढ़ा-लिखा के भेजा है किसी ने आपको।

[नैना] नहीं, नहीं, सर, ऐसा कुछ भी नहीं है।

एक बार फिर से बताइए आप, डिटेल में।

सर, डिटेल में बताने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है।

यही है जो आपको बताया, वही है, सर।

मतलब, फिर कभी उसने आप से संपर्क करने की कोशिश नहीं की।

अरे, सर, छोड़िए।

बच्ची है, घुमा-फिरा के वही बात कह रही है।

हमको लगता है, सही बोल रही है।

नहीं...

[शम्भूनाथ] ऐसा लगा तो...

सॉरी, सर।

[जेल गार्ड 1] थोड़ा ठंड बढ़ गया है।

[अस्पष्ट बातचीत]

[जेल गार्ड 2] क्या, तिवारी?

क्या हुआ?

[अस्पष्ट बातचीत]

[अतीत] बैठिए न।

तो...

ये अपने जेलर साहब...

[उबासी लेते हुए]

रोज़ ही रात में आते हैं क्या?

वैसे तो नहीं आते

वो पहली बार ही था।

और कोई हलचल उस रात की?

ऐसा कुछ ख़ास तो नहीं था।

वही सारा स्टाफ़ था, जो हमेशा रात को रहता है।

अ...

शम्भूनाथ जी आए थे, सर।

उनका बताइए जिनकी ड्यूटी नहीं थी।

वही, सर।

वही ड्यूटी के बाद आए थे।

अरे, सर, ऐसी कोई बात नहीं है।

वैसे भी उनका सप्ताह में दो-चार बार चक्कर लगता रहता है।

कोई बड़ी बात है क्या?

क्यों लगता है चक्कर?

सर, वो जेल की सब्जियाँ ले जाकर के बाहर बेचते हैं।

अरे, सर, उनका एक बेटा है।

उसकी पढ़ाई के लिए कुछ कर्जा-वर्जा लिया हुआ है।

वही कर्जा चुकाने के लिए थोड़ा इधर, थोड़ा उधर कर के कर्जा चुका रहे हैं।

हाँ, दिलीप बाबू।

दरवाजा खोलिए।

-अरे, मिश्रा जी! -अरे, खोलो, यार।

[दिलीप] खुलवा रहे, खुलवा रहे।

चलिए।

-[दिलीप] बहुत रात हो गई। -[शम्भूनाथ] हाँ।

[आदमी खाँसते हुए]

अरे, रुकिए।

[ज़िप बंद करते हुए]

यहाँ लाइए रिक्शा, लाइट के पास।

चेक करना है हमें।

अरे, अपने मिश्रा जी हैं, हो गई चेकिंग।

ओ, दरवाज़ा खोलो अंदर।

-हाँ, हाँ, जाने देंगे। आइए। -नहीं, नहीं, नहीं, नहीं।

कर लो चेक। कर लो चेक।

ले आए लाइट में, कर लो।

[शम्भूनाथ] चेक, चेक, चेक।

कह रहे हैं, गाजर है, लौकी है, धनिया है।

कर लो चेक, कर लो क्या करना है।

वो बाबूजी के स्थान पर आए हैं न हम

तो ड्यूटी तो करनी ही पड़ेगी।

वरना बाबूजी की आत्मा को ठेस पहुँचेगी।

-नहीं, तिवारी जी... -[शम्भूनाथ] कर लो।

रोजाना का बना लिया है, रोजाना।

-[घोंपने की तेज़ आवाज़] -[शम्भूनाथ] ए!

गलत।

देखो, बेटा, हम बताते हैं। लाओ, इधर लाओ।

गोभी।

देखो, छू के देखो।

मासूम।

इसको न ऐसे धीरे से ऐसे, ऐसे, ऐसे करो।

इधर धनिया, खाली ऐसे कुरेद के देख लो।

तुम लोग... [घोंपने के साथ मुँह से तेज़ आवाज़ निकालते हुए]

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

रखिए, तिवारी जी।

[संदेहजनक संगीत जारी है]

[कुत्ता भौंकते हुए]

[कुत्ते का भौंकना जारी]

थोड़ा-थोड़ा लगाना है?

हाँ, फिर क्या हुआ?

[दिलीप] अब क्या बताएँ!

ऐसा ख़तरनाक जेलर आज तक नहीं देखा।

अगर हम दरवाज़ा नहीं खोलते न, तो आज गेट ही टूटने वाला था।

हमने जैसे ही दरवाज़ा खोला,

गाड़ी को रॉकेट बना के सीधे अंदर ले गए।

उसके बाद दे धुम, दे धड़ाम, यहाँ तक आवाज़ आ रही थी।

जो गाली दे रहा था माँ-बहन की,

आज तक उनके मुँह से ऐसी आवाज़ नहीं सुनी।

-बहुत मारा? -अरे बहुत मारा, बहुत।

[अस्पष्ट बातचीत]

[शम्भूनाथ] अबे, मर तो नहीं गया होगा?

[कुत्ते भौंकते हुए]

[तीव्र संगीत बजते हुए]

[तीव्र संगीत जारी है]

-[झींगुरों की झाएँ-झाएँ] -[दूर कुत्ते भौंकते हुए]

अरे, क्या, संतोष? परेशान मत करो, यार।

अरे, यार!

शम्भूनाथ की दुकान है ये?

फ़ोटो लगी तो है।

लास्ट टाइम सब्जियाँ लेकर कब आए थे?

हमको मालूम था, कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।

हम बोले थे उनसे कि जेल से सब्जियाँ मत चुराओ, मत चुराओ।

एक दिन ज़रूर पकड़े जाओगे। कैदियों की हाय लगेगी।

ये दो-पाँच सौ का लालच ही डुबाता है इंसान को।

सर, हम इस क्राइम का हिस्सा नहीं हैं।

जितना पूछ रहे हैं, उतना बताओ।

लास्ट टाइम आए कब थे?

चार-पाँच दिन पहले।

आगे।

सर, उस रात आए, हमसे बोले, "जाओ, दारू लेकर आओ।"

दारू ले के आ जा जा के।

इतनी रात में कहाँ मिलेगा?

अरे, कलारी के यहाँ मिलेगा, तू जा पीछे वाली गली में जा के बोलना।

-ले आ। -अरे, यार!

अबे, जा!

भूतनी के!

ठेका खुलवा के दारू लेकर आए।

वो थे ही नहीं।

चाचा!

सर, अभी घर पर ही होंगे, पकड़ लो।

-क्वार्टर नंबर क्या है उनका? -तीन नंबर, सर।

आप पुलिस में हो?

[दरवाज़े पर दस्तक]

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

[कुत्ता भौंकते हुए]

अंदर आ जाएँ, पंडित जी?

अरे, हमने कब मना किया? आप ही का घर है, आइए, आइए।

[कुत्ता भौंकते हुए]

आइए, सर, आइए आइए आइए।

अरे, ये टोकरी-ओकरी...

आइए आप। आप आइए।

वाह, सर! आप आए... आइए न।

ठंड हो रही है। इसको...

आप बैठिए न यहाँ, यहाँ, यहाँ। यहाँ।

यहाँ बैठिए।

बैठिए, बैठिए आप।

हाँ।

अरे, थक-वक के... सॉरी, सर।

रात में न थोड़ा स्ट्रॉन्ग लगा लेते हैं, सर।

-वही चल रहा था। -आज हम भी लेंगे आपके साथ थोड़ा...

-स्ट्रॉन्ग। -अरे, वाह!

क्या बात कर रहे हैं, सर, आप!

बहुत बढ़िया!

ग्लास, ग्लास, ग्लास... हाँ!

अरे, बाप रे! इतना बड़ा फ़्रीजर?

-हैं? फ्रीजर? -जी।

छोड़िए उसको।

एक हलवाई था हमारे... हमारी ही जेल में बंद था।

बड़ी सेवा की हमने उसकी।

एकदम खिदमत।

-बस। -बस।

जब निकला, तो ख़ुश होकर के

दुकान पर ये फ्रीजर रख गया।

बाप रे बाप! बहुत बिजली खाती है ये।

तो फिर हमने इसको यहीं रख लिया, सरकारी घर में।

अपना चल रहा है फ्री में, सरकारी।

मतलब आप अपने फ़्रीजर का बिल भी सरकार से भरवाते हैं?

नहीं, सर, एसी का भी।

उधर नहीं, सर, यही एसी है।

आप गर्मी में, सर, यक़ीन नहीं जानिएगा,

इसका गेट खोल लीजिए।

थोड़ी देर में पूरे कमरे को कुल्लू मनाली एकदम... [मुँह से आवाज़ निकालते हुए]

आप आइए कभी गर्मी में हमारे यहाँ एक बार।

-बर्फ? -एक।

[शम्भूनाथ जी नाक से आवाज़ निकालते हुए]

पुरानी दारू पुरानी ही होती है।

शम्भूनाथ जी, कल जा रहे हैं हम।

जी, सर?

कल जा रहे हैं हम वापस।

अरे, इतनी जल्दी?

हो गया आपका काम? मतलब, हो गई पूछताछ?

हाँ, हो गई सब से।

आपको छोड़ के बस।

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

बैठिए।

पूछिए, क्या पूछना है।

तो...

जिस रात केशव भागा, आप भी गए थे न जेल?

हाँ, वो तो सब्जी के लिए तो...

ह्म्म्म... पता चला हमें।

आप जेल से सब्ज़ी लेकर के आए

और फिर दुकान पर गए।

छोटू से सब्जियाँ रखवाई,

फिर उसको भेजकर के शराब मँगवाई।

पीछे से बिना शराब लिए आप वापस चले आए।

महान हैं आप।

मतलब, छोटू से भी बात कर चुके हैं।

शम्भूनाथ जी, आपने ये बात हमें पहले क्यों नहीं बताई?

क्या-क्या बताते, किस मुँह से बताते...

कि हम जेल से चोरी करते हैं?

फँस के रह गए, सर।

लोन ले के बेटे को पढ़ाया,

विदेश भेजा।

आज हरामजादा फोन नहीं उठाता।

[आह भरते हुए]

भला ये सब बातें किसको बताएँ? मतलब किस मुँह से बताएँ।

मैंने आज तक किसी को नहीं बताया।

अब ये राम कहानी पूरे शहर को पता है, शम्भूनाथ जी।

सही कह रहे हैं आप।

आपके लिए कहानी...

और किसी के लिए हकीकत।

अच्छा ये बताइए कि आप

उस रात बिना शराब लिए क्यों वापस चले आए?

उम्र हो गई है।

खड़ा नहीं हो पाता हूँ शाम में ठीक से।

थकान होती है, इसलिए यहाँ आ जाता हूँ।

लेट जाता हूँ और दो पेग लगा लेता हूँ।

लेकिन उस दिन छोटू भी लेट कर रहा था, तो,

तो मुझे लगा, चलो घर, आज शराब-वराब छोड़ देंगे बस।

एक बात बताइए।

आपको क्या लगता है?

कि केशव को मैंने बोरे में बंद कर के,

रिक्शा पर चढ़ा के बाहर छोड़ दिया होगा कहीं?

हो भी सकता है, शम्भूनाथ जी।

सबको पता ही है कि आपको पैसों की कितनी ज़रूरत है।

नहीं, इतनी भी जरूरत नहीं है।

और आपने जेल के गार्ड के हथियार देखे हैं?

ब्रह्मास्त्र।

देखा है? खच-खच, खच, खच, खच...

ऊपर से, नीचे से, ऐसे-ऐसे कर के मारते हैं।

हम्म।

आदमी छोड़िए, छोटा सा चूहा भी नहीं निकल सकता वहाँ से ज़िंदा।

बर्फ।

[शम्भूनाथ तेज़ साँस छोड़ते हुए]

[दहशत भरा संगीत बजते हुए]

[अतीत] जेलर साहब नशे में धुत होकर के आए,

केशव को पीटा।

नदीम ने केशव के बैरक को ताला लगाया।

सुबह सुबोध आया और देखा कि केशव गायब है।

एक बात बताइए, शम्भूनाथ जी।

क्या लगता है आपको?

चलिए एक बार को मान लेते हैं कि केशव भाग गया।

पर कैसे?

और क्या, ज़रूरत क्या थी उसको भागने की?

इस दुनिया में न, बिना बाप के बच्चा पैदा नहीं हो सकता।

केशव को भी उसका बाप मिल गया।

[अतीत] लोगों का कहना है कि केशव भागने वालों में से था नहीं।

[शम्भूनाथ] जितना मैं उसको जानता हूँ, उसको जो चीज़ मना की जाए, वही करता है।

अंदर प्रकाश सर से भिड़ गया, पिटाई हुई उसकी।

-[शम्भूनाथ का बोलना जारी है, अस्पष्ट] -[फ्रीज़र की तेज़ आवाज़]

चलिए, शम्भूनाथ जी।

-निकलते हैं अब हम। -जी, सर, जी।

रात बहुत हो गई है और

-सुबह जाना भी है। -हाँ, सर।

[शम्भूनाथ] चलिए, सर।

[गेट बंद होते हुए]

[रोचक संगीत बजते हुए]

[गहरी साँस छोड़ते हुए]

[पक्षियों की चहचहाहट]

अतीत...

आपने अपना पूरा नाम बताया नहीं अभी तक।

हो गई आपकी इन्वेस्टिगेशन?

वही करने आया हूँ, सर।

[गंभीर संगीत बजते हुए]

तो करो फिर।

सर, जेल में एक-एक कैदी से लेकर के जितने भी गार्ड्स हैं सबसे पूछताछ की मैंने।

गायब होने के एक दिन पहले केशव ने किसी बूढ़े कैदी को बुरी तरीके से पीटा था।

आपको जानकारी थी, सर?

पागल था वो।

वो तो हम बीच में आ गए, वरना मार ही डाला था उसने बूढ़े को।

सर, मार तो आपने भी दिया ही था, केशव को।

हम सुपरिंटेंडेंट हैं इस जेल के।

हमारी एक ज़िम्मेदारी है।

और केशव जैसे न जाने कितने कैदियों को हमने यहाँ सीधा किया है।

सर, कानून नाम की कोई चीज़ है कि नहीं है?

तुम्हारे कानून की बत्ती बनाके घूमता था वो यहाँ।

हमने इलाज किया है।

गैरकानूनी तरीके से।

तुम्हें अपनी रिपोर्ट में जो भी लिखना है, वो जो भी दो-चार पन्ने की रिपोर्ट बनाते हो,

लिख दो।

नहीं, तुम क्या लिखोगे।

हम ही दे देते हैं अपना स्टेटमेंट।

मैंने आपसे स्टेटमेंट के लिए कहा नहीं।

पर आप ज़िद कर ही रहे हैं तो...

[गंभीर संगीत बजते हुए]

मैं प्रकाश सिंह,

अपने पूरे होश-ओ-हवास में ये बयान देता हूँ

कि मैं आधी रात में अपनी जीप में बैठकर जेल में आया

और मैंने केशव के ही बैरक में घुसकर

अधमरी हालत तक उसे पीटा।

उस रात के बाद वो फ़रार हो गया।

और भी अगर लिखना हो, तो ये भी जोड़ देना।

वो मुझे मिला तो उसे गाड़ देंगे।

भैरव सिंह!

चाय मत लाना।

आईओ साहब जा रहे हैं।

[गंभीर संगीत बजते हुए]

विषय: निलंबन आदेश - प्रकाश सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है

[गंभीर संगीत बजते हुए]

[झींगुरों की झाएँ-झाएँ]

[ज़मीन खोदते हुए]

[मिट्टी की सरसराहट]

[इंजन की गर्र-गर्र]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

[फोन वाइब्रेट होते हुए]

बिश्नोई आईजी ऑफ़िस

[फोन वाइब्रेट होना जारी है]

बिश्नोई आईजी ऑफ़िस

[फोन फिर वाइब्रेट होते हुए]

बिश्नोई आईजी ऑफ़िस

[फोन वाइब्रेट होना जारी है]

हाँ, बिश्नोई, बोल।

अरे, सर, वो आईजी साहब आपको याद कर रहे हैं, सर।

सुना काफ़ी ख़राब मूड में हैं, सर, वो। मतलब, मैं...

उन्होंने बोला है आपको कॉल लगाने के लिए।

तू है वहाँ पर?

सर, वहीं पर हूँ, सर, मैं। थोड़ा बाहर आ के बात कर रहा हूँ बस।

तू थोड़ी देर के लिए सिचुएशन संभाल, मैं निकलता हूँ यहाँ से।

हाँ, जी, सर।

[गंभीर संगीत बजते हुए]

[आदमी फोन पर] हमको कुछ उड़ती-उड़ती ख़बर आई है कि जेल कंपाउंड में कोई बॉडी मिली है?

हम्म।

[फोन पर] अभी दिल्ली में हैं हम।

मध्य प्रदेश भवन में रुके हुए हैं मंत्री जी के साथ।

तीन-चार दिन में वापस आएँगे।

-फिर भोपाल आ के मिलते हैं आपसे पर्सनली। -[दरवाज़ा खुलते हए]

[आईजी] हम्म-हम्म।

[फोन पर आदमी] ये "हम्म-हम्म" से काम नहीं चलेगा।

आपके भरोसे छोड़ा था हमने उसको जेल में।

[स्पीकर पर] जैसा भी था, भूरी भाई था हमारा।

आते हैं आप से पर्सनली मिलने के लिए।

और उस चूतिए तीन स्टार को भी बुला लीजिएगा जब हम भोपाल आएँ तो।

ख़्याल रखिए अपना।

[फोन काटते हुए]

क्या?

ये क्या रायता फैलाया है तुमने? हैं?

देखो, मैं तुम्हारी बहुत सी चीज़ें इसलिए नज़रअंदाज़ करता हूँ

कि तुम एक एफ़िशिएंट ऑफ़िसर हो।

रिज़ल्ट्स देते हो।

बट ये केशव के केस को तुमने बहुत लाइटली लिया है।

आई एम सॉरी, सर। बट हुआ क्या है?

प्रकाश के बंगले के पीछे से एक डेड बॉडी मिली है।

और इनिशियल फ़ॉरेंसिक के हिसाब से, 10-12 महीने पुरानी बॉडी है।

केशव भी तभी से गायब है न?

तुम दुआ करो कि वो केशव की बॉडी ना हो

वरना सारी उम्र के लिए तुम्हें ट्रेनिंग अकैडमी भिजवा दूँगा।

सर, मुझे बस थोड़ा सा वक़्त दीजिए।

मैं सॉर्ट करता हूँ।

प्रकाश इतना रैकलेस नहीं है।

और कोई पहली बार थोड़ी उसने ये मार-पिटाई की है।

एमएलए के प्रेशर की वजह से उसके सस्पेंशन तक तो ठीक था

बट ये ठीक नहीं है।

और तुम जानते हो न, हम रिलेटेड हैं?

तुम एक काम करो।

अभी शिवपुरी के लिए निकलो, अभी।

सर!

[गंभीर संगीत बजते हुए]

[कैमरे की क्लिक-क्लिक]

[कैमरे की क्लिक-क्लिक जारी है]

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

[कैमरे की क्लिक-क्लिक जारी है]

[कैमरे की क्लिक-क्लिक जारी है]

[गेट खुलते हुए

[गंभीर संगीत बजते हुए]

माँ, तू ठीक तो है न?

तू अंदर जा।

सर!

ये।

केशव का ही स्केलेटन है, सर।

शर्ट के ब्लड से डीएनए मैच हो गया है।

[धीमा संगीत बजते हुए]

[धीमा संगीत जारी है]

हम्म।

तो ये कन्फ़र्मेशन आ गई कि वो बॉडी केशव की ही है।

[आईजी] वो क्या है कि उसका भाई पावरफुल तो है ही

साथ में बहुत घटिया भी है।

और मैं सच में तुम्हें उसके सामने फेंकने के बारे में सोच रहा हूँ।

तीन दिन दे रहा हूँ।

पता लगाओ कि इसके पीछे कौन ज़िम्मेदार है।

मेरी प्रकाश से बात हुई है,

उसने नहीं मारा है।

तीन दिन।

वरना अपना इस्तीफ़ा भिजवा देना,

ख़ुद आने की भी ज़रूरत नहीं है।

-[संदेहजनक संगीत बजते हुए] -[उठा-पटक होते हुए]

[उठा-पटक होते हुए]

अरे, सर, सर, सर, छोड़िए, छोड़िए।

हम कर देते हैं। हम कर देते हैं, हम कर देते हैं।

छोड़िए।

हो गया, सर।

ये...

-खान साहब! -जी, सर।

आपने बुलाया और हम दौड़े-दौड़े चले आए।

बताइए।

केशव की फाइल री-ओपन हुई है।

तो बस वैसे ही आपकी याद आ गई।

फिर से बताइए,

एक साल पहले उस रात क्या हुआ था?

अब, सर, वो पुरानी बात हो गई है न, अब याद...

सर, आपको बताया तो था मैंने कि वो

जेलर साहब बाहर से चिल्लाने लगे,

दरवाज़ा खोलने को बोला, हमने दरवाज़ा खोला।

फिर केशव का सेल खोलने को बोला, हमने सेल खोला।

फिर जो सूता है न, सूत के वो चले गए

और फिर हमने सेल लॉक कर दिया।

अरे, हाँ, सर,

एक बात हम बताना भूल गए थे न वो...

वो...

शायद उसका न पेशाब निकल गया था।

अगर वो जेलर साहब ने घड़ा ना फोड़ा होता तो कन्फ़र्म हो जाता।

[नदीम कराहते हुए]

खान साहब, कुछ भूल रहे हैं शायद आप।

कुछ नहीं भूल रहे हैं, साहब। [रोते हुए] हम बैठ के बीड़ी पी रहे थे।

जेलर साहब चिल्लाने लगे। हमने...

[कराहते हुए]

[कराहते, सिसकते हुए]

आपने ये नहीं बताया कि वो मरा कैसे।

मर गया?

उसकी लाश प्रकाश सिंह के सरकारी बंगले के पीछे मिली है।

जब तक केशव ज़िंदा था उसे बाप बनाया

और जब प्रकाश सिंह ने उसे मार कर के

अपने बंगले के पीछे गाड़ दिया

तो तूने प्रकाश सिंह को अपना बाप बना लिया।

कितने बाप हैं तेरे?

कोई बाप नहीं है, साहब, हमारा...

हम किसी को नहीं बचा रहे,

हम सच बोल रहे हैं।

हमें नहीं पता केशव को किसने मारा।

जेलर साहब के जाने के बाद केशव ज़िंदा था।

जेलर साहब जब पीट-पाट के गए, हमने उनको संभाला।

फिर बोले वो केशव भैया, "ए, दारू बना मेरे लिए।"

दारू बना।

-हाँ। -दारू।

[नदीम] हमने उनके लिए दारू बनाई

और फिर उन्होंने किसी को फोन किया।

[संदेहजनक संगीत बजते हुए]

-बाहर जा के बैठ। -हाँ।

किसे फोन किया?

अब इतना तो नहीं, जितना देख पाए हम,

शायद रजनी मैडम को किया था।

रजनी मैडम!

हम आ रहे हैं।

हम किसी और भाषा में बात किए?

हमने कहा, हम आ रहे हैं।

वो बोले रजनी मैडम से कि "हम आ रहे हैं।"

अरे, हमने कहा, "इतना बड़ा कांड हो गया है, मत जाइए, केशव भैया।"

बोले "नहीं।"

अरे, भूरी भैया, कहाँ जा रहे हो?

एक-डेढ़ घंटे में आएँगे।

भूरी भैया, कांड हो गया, अब मत जाओ देखो।

कांड तो अब होगा।

भूरी भैया, हमारी बात मान लो।

[नदीम] उसके बाद उन्होंने हमें बैरक का पीछे वाला दरवाज़ा खोलने को बोला।

हमने खोल दिया।

फिर तीन घंटे...

तीन घंटे हमने कैसे बिताए आप सोच भी नहीं सकते।

फिर हमें... हमें लगा, वो भाग गया।

हम अंदर गए, बेड-वेड ठीक किया

हमने सेल लॉक किया,

गेट पर ड्यूटी ऑफ़ की एन्ट्री की

और हम चले गए बस।

ये सब पहले क्यों नहीं बताया?

हम सच बोल देते, तो हमारी तो नौकरी चली जाती।

कर पाते हम दोबारा ड्यूटी जॉइन?

आपने अपनी रिपोर्ट बना के जेलर साहब तक को सस्पेंड करवा दिया था।

तो हम क्या चीज़ थे।

तो मतलब केशव ने रजनी को फोन किया और निकल गया वहाँ से?

हाँ, हमें लगता है, वो रजनी मैडम से ही मिलने गए होंगे।

[डोर बेल बजते हुए]

[डोर बेल बजते हुए]

आइए।

आइए।

अम्मा, अंदर जाओ।

बात करने आए हैं। बड़े अफसर हैं।

बैठिए।

चाय?

चाय...

-पी लेंगे। -जी।

पर बाद में।

बैठिए।

वैसे भी आप सबने मिलकर हमारा काफ़ी समय बर्बाद किया है।

और देखिए।

अभी हम जो बात कहेंगे आप उससे मुकरिएगा मत।

हम पूरी छानबीन करके आए हैं,

तो जो शुरुआती बंदर नाच है, वो हम नहीं करेंगे।

ठीक है।

जिस रात केशव गायब हुआ

उसने आपको फोन किया था।

अब आप कह रहे हैं कि आपको सब कुछ पता ही है, तो फिर पूछ क्यों रहे हैं?

पूछ नहीं रहे हैं हम बता रहे हैं।

उसने आपको फोन किया था।

अब आप बताइए,

फोन पर क्या बात हुई थी?

नैना को पूछ रहा था।

वो लड़की जिसे आप हमारे ऑफ़िस के केबिन में मिले थे।

पीछे पड़ा था उसके।

दिन में फोन किया।

परेशान कर के छोड़ दिया था।

रात को जब हमारी ड्यूटी ख़त्म हुई,

घर जा रहे थे, दोबारा फोन किया।

नशे में धुत।

[फोन बजते हुए]

रजनी मैडम, हम आ रहे हैं।

भैया जी, आज रहने ही देते तो...

ड्यूटी का टाइम हो गया।

हम किसी और भाषा में बात किए?

हमने कहा, हम आ रहे हैं।

आप अपनी व्यवस्था जमाइए।

क्या करते?

तैयार किया लड़की को।

ले गए डिस्पेंसरी तक।

[नैना कराहते हुए]

[फोन बजते हुए]

गुड़िया, सब ठीक?

अम्मा, तू अभी तक आई नहीं?

हाँ, बस थोड़ी देर में आ रहे हैं।

[दूर से जानवरों की आवाज़ आते हुए]

देख।

वो बहुत नशे में है।

पिया हुआ है।

ज़्यादा देर टिकेगा नहीं।

हम्म?

इसके बाद तुझे जेल में कोई परेशानी नहीं होने दूँगी।

चल।

चल।

[गंभीर संगीत बजते हुए]

आ जा।

आ। आ जा।

नैना को छोड़ने के बाद हम अपने केबिन में वापस आ गए थे।

हमने इंतज़ार किया, पर...

बहुत अधिक देर रुक नहीं पाए।

हम वहाँ पहुँचे।

-नैना बाहर ही बैठी थी। -[हाँफते हुए]

बिल्कुल चोट नहीं थी।

-ठीक थी वो। -[नैना सिसकते हुए]

गया?

मुझे जाना है।

आ जा।

-हाथ-मुँह धो ले, फिर सो जाना। हाँ। -[नैना सुबकते हुए]

[नैना सुबकते हुए]

[रजनी] उसको वापस बैरक में छोड़ा

और घर आ गए वापस। बस।

आपको ज़रा सी भी शर्म नहीं आई?

ये पति थे हमारे।

बहुत बीमार रहते थे।

इनके इलाज का पैसा देता था वो...

केशव।

बदले में कभी-कभी वो हमारे...

[रजनी आह भरते हुए]

बेटी बड़ी हो रही थी हमारी।

पता नहीं आप समझेंगे कि नहीं पर...

पर जिस दिन से उसने नैना को देखा,

एक नहीं, दो बार धमकी दी हमें।

नैना, नहीं तो हमारी बेटी।

माँ हैं।

बेटी को तो चुनेंगे।

सो किया।

इसका मतलब, नैना ने ही केशव को आख़िरी बार देखा है।

क्या पता।

[गाड़ी आते हुए]

डीपी ज्वेलर्स

जी, नमस्ते।

जी...

मुझे एक चेन देखनी थी।

आपके यहाँ कोई नैना काम करती है न?

[धीमा संगीत बजते हुए]

हम्म।

नमस्ते, सर।

नैना जी!

आप तो पहचान में ही नहीं आ रही हैं।

आइडिया तो हो गया होगा कि मैं यहाँ क्यों आया हूँ।

शाम सात बजे चौराहे के पास वाले पार्क में मिलिए।

आपके लिए ठीक रहेगा।

सात बजे।

[धीमा संगीत जारी है]

[लोगों की अस्पष्ट बातचीत]

मैं...

रजनी जी से मिला था।

उन्होंने बताया कि आपने ही आख़िरी बार उसे देखा था।

-वो आपके साथ... -कुछ नहीं हुआ।

-नैना जी... -कुछ नहीं हुआ मेरे साथ।

आप जिसको भी ढूँढ रहे हैं, जिसके लिए भी ढूँढ रहे हैं,

वो मैं ही हूँ।

आप कहना चाहती हैं कि आपने मारा है केशव को?

हाँ, मैंने मारा है।

खुराक क्या है आपकी?

आपको मेरा घर पता है।

मैं कहाँ काम करती हूँ, आप आ चुके हैं।

जब चाहें, ले के जा सकते हैं।

नैना जी!

देखिए, कन्क्लूज़न तक तो मैं पहुँच ही जाऊँगा।

आप जिसे भी बचाने की कोशिश कर रही हैं

उसे बचाने में मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।

और मैं वादा करता हूँ,

मैं किसी भी सही इंसान के साथ गलत नहीं होने दूँगा।

बट अगर ये इन्वेस्टिगेशन मेरे हाथ से निकल गई...

तो मैं कुछ नहीं कर पाऊँगा।

बैठिए।

देखिए, आप निश्चिंत रहिए।

मैंने जो भी कहा, उस बात से मैं नहीं मुकरूँगा।

जी।

शुरू से बताइए आप।

मेरे जेल में आने के बाद मेरी पहली पेशी केशव के साथ थी।

हम दोनों एक ही गाड़ी में गए थे।

उस दिन पहली बार देखा था उसने मुझे।

कुछ दिनों बाद रजनी मैडम आई थी मेरे पास।

अकेले में उन्होंने मुझे बोला

कि उस रात उन्हें मुझसे कुछ काम है।

आज रात को तू अपने बैरक में नहीं सोएगी। हम्म।

छोटे वाले बैरक में सोना।

तैयार रहना, मैं लेने आऊँगी।

और किसी को कुछ कहा, तो होश ख़राब कर दूँगी तेरे।

[नैना सिसकते हुए]

उस रात वो मुझे लेने आई।

अपने बैरक से जेल की डिस्पेंसरी में ले के गई।

और वहाँ केशव पहले से बैठा हुआ था।

[नैना घबराते हुए]

[नैना का घबराना जारी है]

प्लीज़।

श्श...

आराम से, आराम से।

चलो।

आराम से बात कर रहे हैं न!

आज दिन बहुत खराब गया है।

थोड़ा प्यार करते हैं।

चलो।

देखो...

चलो, वहाँ चल के बात करते हैं। आ जाओ।

[भूरी गुस्से में] चलो!

नहीं।

बोल रहे हैं कि आराम से बात कर लो,

सुन नहीं रही हो।

हटो। हटो।

नहीं।

[नैना रोते, चीखते हुए]

-चुप। -[नैना रोते, चीखते हुए]

-बिल्कुल चुप। -[नैना] हटो! नहीं!

हटो!

[नैना संघर्ष करते हुए, रोते हुए]

[नैना रोते हुए] नहीं।

[भूरी कराहते हुए]

जा जा, तू जा। निकल यहाँ से, जा।

[चीखते हुए]

[भूरी] छोड़ो।

वो रजनी मैडम आ जाएँगी।

तू जा यहाँ से, मैं संभाल लूँगी।

जा। जा, जा, जा।

मंजू जी, लेकिन आप...

[दोनों पूरा ज़ोर लगाते हुए]

[भूरी तड़पते हुए]

[मंजू रोते हुए]

[मंजू का रोना जारी]

[नैना] रजनी मैडम को मैंने बोला कि

केशव जिस गेट से आया था, वो वहाँ से चला गया वापस।

बस किसी तरह उन्हें मजबूर किया कि वो वहाँ से चली जाएँ मेरे साथ।

और मंजू जी को ना देखे।

मुझे जाना है।

-[खट-पट की आवाज़ें] -[दरवाज़ा खुलते-बंद होते हुए]

[हाँफते हुए]

ये मंजू जी कौन हैं?

सीनियर इनमेट थीं।

उम्र कैद की सज़ा मिली थी उन्हें।

कुछ दिनों में उनकी सज़ा ख़त्म होने वाली ही थी।

ये मंजू जी का कुछ पता-ठिकाना?

एक-दो बार नफ़ीसा जी से और चारुलता जी से बात हुई थी उनके बारे में

तब ख़बर मिली।

क्या ख़बर?

पहाड़ों में दुकान चलाती हैं चाय और मैगी की।

और ये चारुलता और नफ़ीसा,

ये?

चारुलता सीनियर गार्ड थीं,

नफ़ीसा कैदी।

मंजू जी की ख़ास सहेली थीं।

देखिए, मंजू जी को कुछ नहीं होगा न?

[गंभीर संगीत बजते हुए]

मध्य प्रदेश शासन फिंगर प्रिंट कार्ड

[मुख्य संगीत बजते हुए]

[रहस्मय संगीत जारी है]

शम्भूनाथ जेल गार्ड शिवपुरी

आपके द्वारा डायल किया गया नंबर अमान्य है।

कृपया डायल किए गए नंबर की जाँच कर लें।

आपके द्वारा डायल किया गया नंबर अमान्य है।

[अतीत] और कोई हलचल उस रात की?

अ... शम्भूनाथ जी आए थे, सर।

उनका बताइए, जिनकी ड्यूटी नहीं थी।

वही, सर।

वही ड्यूटी के बाद आए थे।

[शम्भूनाथ] और आपने जेल के गार्ड के हथियार देखे हैं?

ब्रह्मास्त्र।

खच-खच खच-खच खच-खच!

ऊपर से, नीचे से ऐसे-ऐसे कर के मारते हैं।

आदमी छोड़िए, छोटा सा चूहा भी नहीं निकल सकता वहाँ से ज़िंदा।

मरा हुआ तो निकल सकता है।

[तीव्र संगीत बजते हुए]

[तीव्र संगीत जारी है]

क्या नाम है आपका?

जी, नफ़ीसा।

अच्छा।

आप नफ़ीसा जी हैं।

मंजू जी आपको बहुत याद करती हैं।

आप कैसे जानते हैं मंजू को?

पहाड़ों में दुकान चलाती हैं चाय और मैगी की।

वो हम भी पहाड़ों से हैं न

तो जब भी घर जाना होता है, उनसे मुलाक़ात होती है।

मैगी बहुत अच्छा बनाती हैं वो।

मतलब, आप भी धर्मशाला से ही हैं?

जी।

-[आदमी फोन पर] जय हिंद, सर। -जय हिंद।

-एड्रेस का पता चला क्या? -हाँ, सर, एग्ज़ैक्ट एड्रेस तो नहीं

पर, सर, इतना ज़रूर पता चला है कि, सर, एक सिद्धपुर कर के जगह है, सर, वहाँ पर

एक ओल्ड कपल है, सर, वहाँ एक छोटी शॉप चलाते हैं।

चाय, मैगी वगैरह की।

ठीक है।

सुनिए।

सिद्धपुर के लिए किधर जाना है?

चलिए।

[तीव्र संगीत बजते हुए]

[तीव्र संगीत जारी है]

[हवा की सरसराहट और घंटियाँ बजते हुए]

ज़िंदगी का आनंद लें

[घंटियाँ बजते हुए]

लॉटरी चाय और मैगी पॉइंट

[हवा की सरसराहट और घंटियाँ बजते हुए]

सुनिए।

-ये मंजू जी का कैफ़े है? -हाँ, जी, हाँ जी, ये उन्हीं का कैफ़े है।

हाँ।

हैं नहीं वो यहाँ पर?

यहाँ पर नहीं, घर पर ही होंगे वो।

कहाँ है उनका घर?

यहाँ से ऊपर उनका घर है।

[हवा की सरसराहट और घंटियाँ बजते हुए]

[रहस्यमयी संगीत बजते हुए]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

[पानी की कल-कल]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

-इत्तिला किया होता, तो, सर... -क्यों?

लोगों को बेवकूफ़ बना-बनाकर के मन नहीं भरा आपका?

चलिए, मंजू जी, शुरू कीजिए।

क्या-क्या... क्या शुरू कीजिए? क्या?

आईजी साहब ने हमें तीन दिन का समय दिया था।

एक दिन में हमने नदीम, रजनी, नैना सबसे बुलवा लिया।

एक दिन आपको ढूँढने में निकल गया।

अब हमारे पास सिर्फ़ आज रात का वक़्त है।

तो समय बर्बाद मत कीजिए।

मंजू जी, बोलिए।

नहीं, नहीं, नहीं, आप कुछ नहीं बोलेंगी।

कमाल है!

एक घिनौने आदमी के चक्कर में पूरा फोर्स जुट गया। हम्म।

आईजी आ गए।

आदमी कैसा भी हो, शम्भूनाथ जी,

इन्होंने हत्या की है।

और किसी के घिनौने, घटिया होने से इन्हें कोई हक़ नहीं मिलता उसकी हत्या करने का।

[मना करते हुए]

इन्होंने हत्या नहीं की है।

वध किया।

[शम्भूनाथ] वध।

[रोते हुए, घबराते हुए]

[चीखते हुए]

[मंजू कराहते हुए]

[मंजू चीखते हुए]

[आग की चिट-चिट]

इसलिए तब भी मैं इनके साथ था...

[ज़ोर से साँस छोड़ते हुए]

अब भी मैं इनके साथ हूँ।

[शम्भूनाथ फोन पर] मंजू जी, हाँफ क्यों रही हैं आप? क्या हुआ? सब ठीक है?

शम्भूनाथ जी...

मैंने उसे मार दिया।

[मंजू का रोना जारी]

पता नहीं वो कौन है...

उसने नैना के साथ ज़बरदस्ती... तो...

रो मत, मंजू, रो मत, रो मत।

कहाँ है वो?

जहाँ दवाई होती है, उधर ही पड़ा है, वहीं रखा है।

मुझे बाहर जाना है, शम्भूनाथ जी।

मुझे यहाँ से निकालो।

मुझे बाहर जाना है।

मंजू, ढीला छोड़ो अपने को।

रजनी मैडम के रूम में जाओ, पीछे के दरवाज़े का न चाबी...

रो मत।

-चाबी ले के आओ पीछे के दरवाज़े का। -[मंजू का रोना जारी]

[खन-खन की आवाज़]

[मुख्य संगीत बजते हुए]

[मुख्य संगीत जारी है]

[ज़ोर लगाते हुए]

[मुख्य संगीत जारी है]

[शम्भूनाथ] दरवाज़ा बंद कर दीजिएगा।

ताला लगाकर चाबी वहीं रख दीजिएगा जहाँ से उठाए थे।

आज से मोबाइल, मैसेज, सब बंद।

किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि हम एक दूसरे को जानते हैं।

भगवान ने चाहा,

तो मिलेंगे कभी।

बंद कर लीजिए।

क्या है न, शम्भूनाथ जी...

कानून हत्या और वध में फ़र्क नहीं समझता।

लाश मिली है।

सज़ा तो भुगतनी पड़ेगी।

अब आप लोग ख़ुद चलेंगे या मैं लोकल पुलिस बुलाऊँ?

"लाश मिली है।"

लाश मिली नहीं है,

थाली में परोस के दी गई है आपको।

"लाश मिली है।"

जंगलों से घिरा है अपना शिवपुरी।

[शम्भूनाथ] एक छोड़िए,

दस केशव भी मार के गाड़ देते न

तो ढूँढ नहीं पाते आप।

ऑर्डरली क्वार्टर बनने वाले थे उस जगह पर,

जेलर के बंगले के पीछे।

और, सर, आप से पहले वाले मिहिर मानिक साहब ने न

एक ऑर्डरली क्वार्टर के लिए अप्रूवल डाला था।

[प्रकाश] हम साइन कर देते हैं,

अगले जेलर साहब के लिए बनवा लीजिएगा।

लेकिन हमारे रिटायरमेंट के बाद।

हम यहाँ से चले जाएँ उसके बाद। ठीक है?

तभी से मुझे पता था

कि इस जगह पर खुदाई कभी न कभी तो होगी ही।

[मिट्टी की सरसराहट]

और सज़ा की बात करते हैं न...

लाश तो प्रकाश सिंह के बंगले के पीछे मिली है।

अह... अँगूठी मिली कि नहीं आपको?

[तीव्र संगीत बजते हुए]

[ज़ोर लगाते हुए]

वाह, बेटा केशव!

मरते-मरते अच्छा काम कर गया तू।

शम्भूनाथ जी, हम मानते हैं कि प्रकाश सिंह दूध का धुला हुआ नहीं है

पर क्या घटिया बात कर रहे हैं आप।

एक निर्दोष को फँसाने की बात कर रहे हैं आप?

निर्दोष प्रकाश सिंह नहीं, निर्दोष ये थीं।

फिर भी दो खून की सज़ा काटी।

प्रकाश सिंह नाम है हमारा।

कई सालों से आप जैसे कैदियों की ज़िंदगी सुधारने में लगे हैं।

क्या नाम बताया जेलर साहब ने?

प्रकाश सिंह।

प्रकाश सिंह।

-चाचा जी, हम... -चुप कर।

-पति हैं हमारे। हम प्यार करते हैं इनसे। -चुप।

हट जा।

चाचा जी, क्या कर रहे हैं आप?

चाचा जी!

जात और औकात भूल गया अपनी?

हमारी भतीजी पर नज़र डालने की हिम्मत कैसे हुई?

[दरवाज़ा खुलते हुए]

[लड़की कराहते हुए]

[बर्तन पटकाते हुए]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

जब इन्होंने उसके किए की सज़ा भुगती...

तो इंसाफ़ तो यही होगा न, सर...

कि अब वो अपनी सज़ा भुगते।

[शम्भूनाथ] हम्म?

यहाँ ताकतवर ही न्याय कर सकता है, सर।

वो जज ताकतवर था

जिसने ये फ़ैसला सुनाया।

एक दिन हम ताकतवर थे।

जा के हमने अपना न्याय खुद किया।

और आज...

परिस्थिति ने आपको ताकतवर बना दिया।

बाकी जो आपको ठीक लगे।

हमने तो कुछ महीनों में अपनी ज़िंदगी जी ली।

है न, जी?

[मुख्य संगीत बजते हुए]

[मुख्य संगीत जारी है]

कोटे में भर्ती हुआ है क्या?

हम अपनी जीप में जाएँगे, केशव को मारेंगे

और उसकी लाश अपनी जीप में रखकर

अपने क्वार्टर के पीछे गाड़ देंगे।

माथे पर चूतिया लिखा है हमारे?

हमने नहीं मारा है।

अगर हमने मारा होता, तो हम

छाती ठोक के, ठोक के कहते कि हमने मारा है उसे।

तब क्यों नहीं छाती ठोक कर कहा, जब पंकज और प्राची को मारा था?

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

क्या सबूत है तुम्हारे पास कि हमने वो...

पंकज और प्राची के लिए कोई सबूत नहीं है, सर।

पर केशव के लिए है।

काफ़ी है।

[सनसनीखेज़ संगीत बजते हुए]

-ये तो... -आप ही का है, सर।

देखिए।

दो को मारा है आपने,

कम से कम एक की सज़ा तो भुगत लीजिए।

[रोचक संगीत बजते हुए]

[मुख्य संगीत बजते हुए]

[खुशनुमा संगीत बजते हुए]

गुड वाइब्स परिवार और दोस्त

लॉटरी चाय और मैगी पॉइंट

♪ लो आई इश्क़ की उमर ♪

♪ डरने लगी है ये नज़र ♪

♪ ना जाए दिल फिसल कहीं ♪

♪ गलती से तुमको देख कर ♪

♪ चेहरे पर ये जो शर्म है ♪

♪ है मेरे इश्क़ का सबर ♪

♪ ना जाए दिल फिसल कहीं ♪

♪ गलती से तुमको देख कर ♪

♪ ये मेरे हक़ की शाम है ♪

♪ इस पर तेरा ही नाम है ♪

♪ पहुँचे जहाँ हैं आज वो ♪

♪ ख़ूबसूरत मकाम है ♪

♪ यहीं पर वक़्त को मैं रोक लूँ ♪

♪ कह दो तुम जो अगर ♪

♪ लो आई इश्क़ की उमर ♪

♪ तेरी हवा में बहने लगा हूँ ♪

♪ आँखों से लफ़्ज़ों को कहने लगा हूँ ♪

♪ अब कुछ दिनों से ♪

♪ घर छोड़ के मैं ♪

♪ तेरे ख़यालों में रहने लगा हूँ ♪

♪ बांहों की अपनी हो चारदीवारी ♪

♪ बस इतनी सी ही थी ख़्वाहिश हमारी ♪

♪ दिल बेसुकून थे ♪

♪ बेचैन थे हम ♪

♪ आ के यहाँ हो ख़त्म बेकरारी ♪

♪ ये मेरे हक़ की शाम है ♪

♪ इस पर तेरा ही नाम है ♪

♪ पहुँचे जहाँ हैं आज हम ♪

♪ ख़ूबसूरत मकाम है ♪

♪ यहीं पर वक़्त को मैं रोक लूँ ♪

♪ कह दो तुम जो अगर ♪

[गाने का खुशनुमा संगीत जारी है]

ज़िंदगी का मज़ा लें संगीत आत्मा को सुकून देता है

♪ लो आई इश्क़ की उमर ♪

♪ डरने लगी है ये नज़र ♪

♪ ना जाए दिल फिसल कहीं ♪

♪ गलती से तुमको देख कर ♪

♪ लो आई इश्क़ की उमर ♪

लॉटरी चाय और मैगी पॉइंट

[गाने का खुशनुमा संगीत जारी है]

संवाद अनुवादक: छाया चौरे

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