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हमारी रक्षा
कीजिए ये रहा
पलवल तुम इन ऋषि मुनियों को बचाने आए हो
क्या बल बल को नहीं जानते मैं अधर्म यों
का नाश करना जानता हूं
[संगीत]
[संगीत]
बना
[संगीत]
क्याम बी
[संगीत]
म मार
[संगीत]
बताइए ी रक्षा कीजिए ब ओ ओ बताइए ब
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
महात्मा जी मरे हुए पर हाथ उठाना धर्म
नहीं है शिरोमण परमाता श्री बला की
[संगीत]
जय इस देश की है आज भी तूफान में
नैया भारत में फिर से आ जाओ
बलराम कन्हैया
[संगीत]
सब ओर पड़ा
सूखा आधा है देश
भूखा घनघोर है
महंगाई जनता है तंग
आई गलियों में बड़े
बड़े अजगर है छ पे
[संगीत]
पड़े दते हैं आज भी नाग हमें है नाग
नथैया भारत में फिर से आ जाओ
बलराम कन्हैया
[संगीत]
महलों में है
दीवाली कुटियां में रात
काली कुछ लोग सुख से
जीते बाकी आंसू
पीते यह देश की सूरत है अब आओ जरूरत
है लाखों सुदामा हों की है
सुनसान
कढ़ैया भारत में फिर से आ जाओ
बलराम
[संगीत]
कन्हैया ये सोच रहे हैं
सभी ऐसा था न वक्त
कभी बच्चे ना दूध
पाते मां बाप
छटपटाते हे दीन बंधु
आओ करुणा के सिंधु
[संगीत]
आओ कटती लाखों हर साल यहां गोपाल तेरी
गैया भारत में फिर से आ जाओ
बलराम
[संगीत]
कन्हैया इस देश की है आज भी तूफान में
नैया भारत में फिर से आ जाओ बलराम
[संगीत]
[संगीत]
नारायण नारायण देवर्ष पधारी धन्य है प्रभु
आपका भी बचपन गया पर बचपना नहीं गया आज भी
मथुरा में बैठ ऐसे चैन की बंसी बजा रहे
हैं जैसे संसार की कोई चिंता ही नहीं
संसार की चिंता में आप तो दुबले होही रहे
हैं देवर्ष अब क्या मुझसे भी मुरली के
बदले तंबोरा बजवाना चाहते हैं आप छोड़िए
प्रभु आप तो मेरी बात को हसी ठठे में उड़ा
देते हैं इसलिए चाहते हुए भी अब मैं यह
कहना नहीं चाहता कि राजकुमारी रुक्मिणी के
हृदय पर क्या बीत रहा है रुक्मिणी के और
मेरे हृदय में कोई अंतर नहीं हमारा
संबंध दो मूर्ति और एक जोत के समान है इस
मुरली के भी एक एक छेद में उन्हीं के हृदय
का स्वर और एक एक स्वर में उन्हीं की याद
गूंजती है नारायण नारायण तो प्रभु जल्दी
से जल्दी आप दोनों के हाथ पीले हो जाए तो
एक चिंता से मेरा पीछा
छूटे पीछा कैसे छूटेगा देवर्ष आर्य परिवार
में जब तक बड़े भाई का विवाह ना हो तो
छोटा भाई कैसे कर सकता है और यह तो सब कुछ
समय के आधीन है प्रभु कहीं ऐसा ना हो कि
इधर समय की प्रतीक्षा करते रहे और उधर समय
बीच में से ही न 11 हो जाए क्योंकि
राजकुमार रुक्मी जरास के दबाव से अपनी बहन
रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ करना
चाहता है इस विवाह के बहाने जरास शिशुपाल
को प्रसन्न रखना चाहता है और उसके सहयोग
से अपने जवाई राजा कंस की मृत्यु का बदला
लेने के लिए मथुरा पर आक्रमण करने की
विशाल योजना भी बना रहा योजनाएं तो बनती
ही रहती है
देवर्ष परंतु कोई भी योजना सफल तभी होती
है जब उसके पीछे रचनात्मक संगठन हो प्रभु
सभी असंतुष्ट राजाओं ने मिलकर एक संयुक्त
विरोधी दल का संगठन भी कर लिया है जिसमें
काशीराज बाणा रुक्मी और शिशुपाल भी है मैं
चंदरा
शिशुपाल यह चेतावनी दे रहा हूं यदि कंस की
मृत्यु का बदला उस कृष्ण से नहीं लिया गया
तो कल वह हमारे विरुद्ध भी सिर उठाने का
साहस कर सकता है हम महा पराक्रमी नवी राजा
बली के पुत्र बाणासुर है हमारे पिता श्री
को इस विष्णु ने
पर पा रखकर पाताल पहुंचा दिया
है उस विष्णु के अवतार कृष्ण के
विरुद्ध हमारे हृदय में अभी तक प्रतिशोध
की ज्वाला धक रही है मैं विदर्भ राजकुमार
रुक्मी मेरी मूर्ख बहन रुक्मिणी सपने में
भी जिस कृष्ण का नाम लेकर बड़बड़ा करती है
मैं उसी कृष्ण को पृथ्वी से मिटा देना
चाहता हूं किंतु यह मत
भूलिए हमें कृष्ण के ल कपड़ से सावधान
रहकर
महाबली बलराम से टक्कर लेनी होगी हम सब
तयार है हम सब तयार है सबका कोई काम नहीं
जिस जरास ने अपने बाहुबल से बड़े बड़े
बलवान राजाओं को बंदी बना रखा है वो बलराम
जैसे गवार गवाले की गर्दन तोड़ने के लिए
अकेला ही बहुत है नारायण नारायण मथुरा पर
मगद की ध्वजा फहरा देने का य अच्छा अवसर
है मगध राज क्योंकि जी राजा कंस के डर से
भागे हुए यादवों को मथुरा में फिर से
बसाने के लिए अनर्थ देश में ढूंढते फिर
रहे हैं नारद जी मैं अनर देश का राजा कुना
बलराम जैसे गीदड़ को सिंह की तरह गरज कर
खते दूंगा राजा कुसना तुम्हारे सिर पर तो
रैवत तक का राजा ककु में ही गर्ज रहा
है व कार तो हारकर रत की गुफा में मु
छुपाता फिर रहा है इस घमंड में फूलकर कहीं
उसकी कन्या रेवती से सामना ना कर बैठना
कुछ ना वह रूप में जैसी रमणी वैसी ही रण
में रण चंडी भी है
[प्रशंसा]
[संगीत]
[संगीत]
वो मारा हमारी राजकुमारी रेवती का निशाना
चुक नहीं सकता चलो अपना शिकार देखें मरा
हुआ शिकार क्या देखना वो भी पशु और क्या
अरे देखना है तो कोई वीर पुरुष देखे जो
रेवती के नैन बान लगते ही चट घायल और
पट अरे देखने की आवश्यकता ही क्या है
ब्रह्मा जी ने तो कही दिया है कि रेवती का
ब्याह श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी से
होगा सो तो ठीक है री पर कौन जाने बलराम
जी मिले कि ना मिले मिले तो कब मिले कहां
मिले अरे भाई हमारी सखी को बहुत उताव है
तो हम मथुरा चले च ठीक है ना चल हट निर्लज
क राजकुमारी जीतक पर्वत को कुछ नाव की
सेना ने घेर लिया है राजा कुछ नाव इधर ही
आ रहा है रेवती भी उसी की बाट देख रही है
पिता का बदला पुत्री
लेगी क है कायमी कहां है उसकी बेटी रेवती
आज मैं उसको अपनी दासी बनाने आया हूं कहां
है निर्लज तू जिस रेवती को दासी बनाने का
सपना देख रहा है वो तेरा काल बनकर तेरे
सिर पर खड़ी है कौन रेवती आ हाहा अरे तेरी
सुंदरता पर मैं तो वैसे ही लाख बार मरने
को तैयार हूं सुंदरी यदि तू इन हाथों से
हथियार के बदले फूलों की माला मेरे गले
में डाल दे और मेरे साथ कुश स्थली चले
मादाम मैं कुश स्थली अवश्य जाऊंगी पर वहा
की राजकुमारी बनकर तुझ जैसे नीच और विलासी
राजा को यमलोक भेज कर
[संगीत]
कायर पुरुष एक लड़की पर गदा उठाते हुए
तुझे लज्जा नहीं आई यदि तुझे अपने बल का
इतना अनुमान है तो आ मैं मिटाए देता हूं
[संगीत]
[संगीत]
h i
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
हा
कहां है कहा
है पिताजी क है मेरा राज हड़पने
वाला कहा है क है वो पापी दुराचारी है
पिताजी शत्रु मारा गया आप जाकर विश्राम
कीजिए महाराज की जय हो शत्रु की सेना
हमारी शरण में आ गई है यही तो यही तो मैं
सुनना चाहता था यही मैं चाहता था यही मैं
चाहता ना परना पिताजी को
आवाज अरे कहां गए वे कौन थे मधुमती रेणुका
देखो तो किधर चले गए ढूंढो
[संगीत]
तो वीर पुरुष
वीर पुरुष अनुमति बिना अतिथि नहीं जा सकती
मैं अचानक आ पहुंचा हूं अतिथि नहीं हूं
किंतु जहां आप आए हैं वो भूमि हमारी है
सत्कार किए बिना आपको नहीं जाने दिया
जाएगा तुम्हारी इस भावना से ही मैंने
सत्कार पा लिया
कुमारी बात केवल सत्कार की ही नहीं
है आपने मेरा जो उपकार किया है उपकार नहीं
बल्कि विजय का यश तुमसे छीनकर मैंने अपकार
किया है और क्षमा ना मांगने का अपराध भी
इसका दन देने के लिए रोकना चाहती हो तो
मुझे कोई विरोध नहीं
धन्यवाद मैं पिताजी को वीर पुरुष का परिचय
क्या दू मैं मथुरा के यदुवंशी वसुदेव का
पुत्र
[संगीत]
बलराम बलराम
युग युग से मैं जिनके बात देख रहा था वही
बरा मैं बिछ से उठने की अवस्था में नहीं
हूं बलराम जी क्षमा
करके मेरी ओर से सत्कार स्वीकार कीजिए
राजिए ब्रह्मा के वचना
अनुसार आज मैं अपनी इस कन्या ती को आपके
सबल हाथों में सपता हूं रेवती के साथ साथ
कुश स्थली भी आप ही को दहेज में देता हूं
विवाह मैं तो यादवों के संगठन का काम पूरा
करके ही आपकी सेवा में लौटूंगा तब तक आप
मेरे पिता और भाई कृष्ण को यही बुला ले
विवाह उनकी अनुमति से ही करना उचित होगा
[संगीत]
सुखी
रहो तुम्हारा दांपत्य
जीवन संसार के लिए आदर्श
[संगीत]
बने
भाभी मुझे आशीर्वाद
दीजिए वासुदेव आपको आशीर्वाद देने वाली
मैं कौन हूं
भाभी हमारी आर्य सभ्यता में भाभी माता के
समान होती
है किंतु मेरे देवज तो स्वयं जगत पिता है
भाभी ऐसी बात फिर ना कीजिएगा संसार में
कार्य सिद्धि के लिए बहुत कुछ करना पड़ता
है मैं तो वसुदेव का पुत्र ब्रज का गवाला
कृष्ण कन्हैया ही ठीक हूं भाभी मथुरा चलने
पर भी आप मुझे देग ही मानिए
देवी क्या दास को छुट्टी दे दी है नहीं तो
तो फिर क्या बात है उनका भी काम तुम ही कर
रही हो सुना है कि मधुरा के राज पुरुष
पत्नियों से अधिक दास पर दया रखते
हैं
भया भैया गुप्त समाचार लाया है कंस के बाद
कुछ ना आप की मृत्यु सुनकर जरास वि सेना
लेकर मुथरा पर आक्रमण करने आ रहा है जरास
का साहस चूर करने के लिए मेरी बुझाए भी
फड़क रही है आओ
मगद राज के आगमन का समाचार सुनते ही हम
स्वागत के लिए दौड़े आए हैं जरास भी अपने
जवाई राजा कंस की हत्या का तुमसे लेने के
लिए आया है कप
जस बड़े भाई के होते हुए छोटे भाई का कोई
भी बाका नहीं कर सकता
[संगीत]
[प्रशंसा]
आ
[संगीत]
[संगीत]
उठाओ
[संगीत]
गदा उठाओ गदा
ओपन अप
भैया रुक जाइए भैया जरास को मारिए
मत जरास मैं तो एक हाथ और दो टुकड़े मानता
हूं किंतु कन्हैया के कहने से तुम्हें
जीवन दान दे रहा हूं
जाओ राम श्री कृष्ण की पकड़ने की क्या
आवश्यकता
मैं तो वैसे ही चलने को तैयार हूं मैं
किसी का शत्रु नहीं अरे चल चल ब ब्राह्मण
बन
के वंदना कर महाराज को नारद जी तो संसार
में सबकी वंदना करते अ मर्ख हो ये किनको
पकड़ ला ये तो सबका कल्याण चाहने वाले
मुनिराज नारद जी है क्षमा कीजिए
गुरुदेव नारायण
नारायण कालियन
तुम्हारा प्रेम देखकर मेरी इच्छा तो हुई
कि तुम्हारी भलाई की एक बात बता
द किंतु कहीं तुमने ढोल पीटा यह बात नारद
जी बता कर गए तो कृष्ण से मेरा मन मु हो
जाएगा इसलिए रहने दो नहीं नहीं मुनिराज
कृष्ण के बारे में वि बाद हो तो जल्दी
बताइए इतने आसर हो तो बता ही देता
चक्रवर्ती बनने की इच्छा पूरी करना चाहते
हो तो यह सुंदर अवसर है इस बार तो बलराम
कृष्ण से रासन पराजित हो गया किंतु वह
दोबारा चढ़ाई करने की तैयारी कर रहा उससे
पहले ही मथुरा को यमना दिप काल यवन जीत ले
तो बस बस नारद जी क्या दूर की सोची है समझ
लीजिए कि मैंने मथुरा जीत ली
महाराज हमें हर बार कृष्ण की कपट नीति से
नीचा देखना पड़ा
इसलिए इस बार केवल बल से नहीं कल से काम
लेना होगा नारायण नारायण बल आपके पास और
कल मेरे पास मगद पति किंतु नारद जी आप तो
हमारी भलाई चाहने वाले हैं बताइए तो सुनिए
इस समय मथुरा पर कालयवन भी आक्रमण करने जा
रहा यादवों के नेता बलराम श्री कृष्ण
मोर्चा संभालने में उधर जुटे रहेंगे और
इधर आप बिना परिश्रम मथुरा पर मगद की
ध्वजा फहरा दीजिए उपकार मुनिराज श्री बलाम
जी श्री कृष्ण जी रक्षा कीजिए काल जवन के
सैनिक हमारे गांव गांव में घुसकर उत्पात
मचा रहे हैं निर्दोष जनता को लूट पीट रहे
हैं खेतों और घरों को जलाकर नष्ट कर रहे
हैं पशुओं का हरण करने के साथ-साथ बहू
बेटियों की लाज भी कन्हैया बहू बेटियों की
लाय लूटने वालों का लहू पीने के लिए मेरा
हल उतावला हो रहा है उठो नारायण नारायण
आक्रमण एक ही और से नहीं दो दो ओर से होने
जा रहा है बलराम जी कौन है दूसरा
आक्रमणकारी अंतर्यामी वासुदेव से क्या
छिपा है यह स्वयं बता देंगे नारद जी जल्दी
बताइए वरना मेरा हाल शत्रु पर उठने से
पहले कहीं बम हत्या नारायण नारायण भगवन
मेरी हड्डी पतली तुवाना क्यों चाहते हैं
बता दीजिए ना जरास की बात जरास हां भैया
एक ओर से कालयवन और दूसरी ओर से जरास
आक्रमण करने आ रहा है ताकि यादव की सेना
दो भागों में बढ़ जाए और हमारा सैन्य बल
कम हो जाए किंतु वे नहीं जानते कि हम
दोनों का बल अखंड है हमारी सेना का मनोबल
बहुत ऊंचा है हम अभी कुछ बोलते हैं नहीं
भैया पहले हम मथुरा को खाली करा के उद्धव
जी के साथ भाभी और सारे यादव को द्वारका
भेज द्वारका हां भैया कुश स्थली यादव के
नए सुखी जीवन का प्रवेश होगी इसलिए उसे हम
द्वारका के नाम से पुकारेंगे उधर द्वारका
में यादव सेना का संगठन होता रहे और इधर
शत्रु यह समझ बैठे कि उनके डर से यादव भाग
गए फिर मैं जरा सं को यमलोक पहुंचा दूं और
तुम काल यमन को हां भैया परंतु मैं काल
यमन को शक्ति से नहीं युक्ति से मारूंगा
फिर रह जागा जरास उसे अपने दाव में लेने
के लिए मथुरा से भाग जाने का दिखावा
करेंगे क्या
कहा अपने देश की रक्षा के लिए बलराम अपना
बलिदान दे सकता है किंतु युद्ध से मुंह
नहीं मोड़ सकता पराय नहीं कर सकता शत्रु
को पीठ नहीं दिखा सकता कभी नहीं कभी
नहीं श्री
कृष्ण सांसारिक माया के प्रभाव से शेष
अवतार कभी-कभी नारायण के सामर्थ्य को भूल
जाते हैं शेष नाथ फूप का नहीं करेंगे तो
और कौन करेगा भाभी किंतु भैया का क्रोध
शांत कैसे किया जाए भाभी मैं शांत करूंगी
वासुदेव ऐसे करते रहिएगा भाभी कि भैया का
मान भी रहे और मेरा काम भी होता रहे
क्योंकि ये तो बार-बार होता रहेगा भाभी
अच्छा मेरे नटखट देवत
जी
स्वामी आपकी सामर्थ्य को कौन नहीं जानता
आप बड़े हैं बड़ों को क्रोध नहीं क्षमा
शोभा देती है
श्री कृष्ण जो कहते हैं वह तो शत्रु को
पराजय देने के लिए युद्ध नीति का एक मार्ग
है और फिर श्री कृष्ण कौन है आपसे यह कहने
वाले मैं कौन हूं
[संगीत]
[प्रशंसा]
[प्रशंसा]
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
देवी यह सब कन्हैया की ही माया है जो मुझे
बरमा देती है कन्हैया
[संगीत]
नहीं नहीं मराज कान है पकड़ना हमारा काम
है छोड़ना महाराज की इच्छा पर है क्या
तुमने काल दिवस के काल कृष्ण कन्हैया का
नाम नहीं सुना है उसका नाम हम नहीं
[संगीत]
सुनते आ ग मुरली
[संगीत]
बंद
करो बंद
करो
ब यह सब क्या हो रहा है तुम लोग दे रहे हो
या नाज कर रहे हो वो भी दुष्ट पापी कृष्ण
की मुरली धन पर
बोलो बोलते क्यों
नहीं उत्तर
दो उत्तर नहीं
देते ये तुम सबको क्या हो गया है किसने
जादू किया तुम पर
[संगीत]
[संगीत]
आली
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
कहां गया
[संगीत]
[संगीत]
कायल कृष् कालयवन से मुह छुपाने के लिए
पीतांबर ड़कर सोने का बहाना कर रहा है उठ
ठ खड़ा हो
[संगीत]
जा रा
भगवान मैं तो बृज का गवाला कृष्ण
हूं नहीं प्रभु मैं मान धाता का पुत्र
मुकुंद मुझे इंद्र का वरदान है कि जब मेरी
निद्रा टूटेगी मेरी आंखों के सामने स्वयं
नारायण भगवान होंगे कृपा करके मुझे उसी
रूप का दर्शन दीजिए भगवान मुझे मुक्ति
दीजिए सो हम
[संगीत]
राजर्षि मुचकुंद
जो पुरुष मेरी शरण में आ जाता
है उसके लिए फिर कोई ऐसी वस्तु नहीं रह
जाती जो शोक का कारण बन
सके तुमने पहले मेरी बहुत आराधना की है
किंतु क्षत्रिय धर्म का आचरण करते समय
तुमने अनेक निर्दोष पशुओं का वध किया है
इसलिए अगले जन्म में ब्राह्मण
बनकर समस्त जीवों के हित
बनकर जन्म के पाप धो डालोगे फिर दूसरे
जन्म में मुक्ति पाओगे यह मेरा आशीर्वाद
है मैं धन हो गया प्रभु मैं ंड हो
गया उद्धव जी महादेवी सारी रात यात्रा की
है अब कहीं थोड़ा विश्राम कर ली सामने
कुंडलपुर का गौरी मंदिर है वही विश्राम
करेंगे कुंडलपुर
हां विदर्भ की यह राजधानी है जहां के राजा
भीष्म है जिनका बेटा रुक्मी मथुरा पर
चढ़ाई करने में जरास का साथ दे रहा है हां
रुक्म की एक कुवारी बहन भी है जिसका नाम
रुक्मिणी
[संगीत]
[संगीत]
है कोई बता
दो बता
पिया
का
कहां मेरा चित
ो मैं वो प्रेम
[संगीत]
दीवानी
जिसका
प्रीतम
नंद
[संगीत]
किशोर जिसकी सोहनी
है सूरत मनमोहनी है मूरत ऐसे सांवरिया से
जाने कब होगा मिलन ऐसे सांवरिया से जाने
कब होगा मिलन जिसके सोहनी है सूरत
मनमोहिनी है मूरत ऐसे चरिया से जाने कब
होगा मिलन ऐसे समरिया से जाने का सब होगा
[संगीत]
मिलन दूर दिशा में मुरलिया
बोले तान पर जिया मेरा
[संगीत]
डोली दूर दिशा में मुरलिया
बोले तान तान पर दिया मेरा डोले मुरलिया
बोले रा डोले जिसका नाम बरसे वाला उसने
छुप छुप जादू डाला ऐसे नटखट मेरे कब
लड़ेंगे नयन ऐसे नटखट मेरे कब न देंगे नयन
जिसके सोहनी है सूरज मनमोहिनी है मूर्त
ऐसे समरिया से जाने कब होगा मिलन कैसे
समरिया से जाने कब होगा
[संगीत]
[संगीत]
जा k दि आए
सया प मोरी
पकड़ेंगे
[संगीत]
भैया जाने किस दिन आएंगे
सैया प्यार से
मोरी पकड़ेंगे
भैया आएंगे
सैया पकड़ेंगे भैया जिनका सुंदर है भजन
जिनका रूप मनमो न ऐसे प्रभु मुझे
देंगे कब दर्शन ऐसे प्रभु मुझे
देंगे कब दर्शन जिसके सोहनी है सूरत मन
मोहिनी है मूर्त ऐसे सबया से जाने कब होगा
मिलन ऐसे कमरिया से जाने कब होगा मिलन
[संगीत]
जब जब लभ में बोधन
छती मुझे घन श्याम मेरे बड़ी याद आती
जब जब लभ में बादल
छती मुझे घनश्याम मेरे बड़े याद आते बादल
छते या जब आते जिसको माना मन ही मन मैंने
अपना जीवन धन ऐसे ही किया जी की मैं कब
बनूंगी दुलहन से पियाज की मैं कब बनूंगी
दु हम जिसके सोहनी है सूरत मन मोहिनी है
मूरत ऐसे सावरिया से जाने कब होगा मिलन
ऐसे सावरिया से जाने कब होगा मिलन
[संगीत]
[प्रशंसा]
कुमारी तुम कौन हो मैं वितर पर आज कनया
रुक्मिणी हूं आप कौन है कहां से आई है
कहां जा रही है मैं प्रवासी हूं मथुरा से
आई हूं मथुरा
से तब तो श्री कृष्ण को जानती
होंगी अच्छी तरह देवर को भाभी नहीं जानेगी
तो कौन जानेगा ओ
[संगीत]
तो आप ही बलराम जी की अर्धांगिनी
रेती अरे लजा करर भागने कहां लगी तुम तो
हाका करती थी मथुरा का कोई पंछी भी मिल
जाए तो यह कहूंगी वो कहूंगी ऐसा करूंगी
वैसा करूंगी अब मु में ताला लग गया अरे
संदेशा नहीं तो लाना ही दे दो चुप र निल क
क्या बात है राजकुमारी श्री कृष्ण ने कोई
अपराध क्या है अजी ऐसा अपराध कि श्री
कृष्ण के नाम से मेरे सखी को लज्जा आती
है ना क्षमा कर सकती ना दंड दे
सकती मेरे देवर है ही दंड पाने के योग्य
मुझे ये पता होता राजकुमारी तो उन्हें भी
अपने साथ अवश्य ले आती देवी जी उन्हें साथ
ना लाकर अच्छा ही किया वरना श्री कृष्ण
अभी तो रुक्मण जी के मन में बसे हैं कहीं
आंखों में भी समा जाते तो बंदी होने के
सिवा छुटकारा नहीं था
पल्लवी देवी जी आज आप मेरे अतिथि बनिए
चलिए राज भवन
में मैं तुम्हारे इस प्रेम का आदर करती
हूं राजकुमारी किंतु पति आज्ञा का अनादर
नहीं कर
सकती मुझे जल्दी यात्रा पूरी करनी है मेरे
साथ अन्य यादव भी है वे आगे मेरी बाठ
देखते होंगे जैसी आपकी
इच्छा जय श्री कृष्ण
वो देखो फर है दोनों चलो
चलो सुनो पर्वत के चारों ओर आग लगा दो और
कड़ा ध्यान रखो ताकि चुहा भी बाहर ना
निकले आज दोनों भाई जलकर रा हो जाएंगे चलो
[संगीत]
[संगीत]
बलराम कृष्ण की राख तो उड़ भी चुकी
होगी शिपाल अब तुमको दिया वचन हमें पूरा
करना है रु तुम कुंदनपुर जाओ और अपनी फहन
रुक्मिणी के स्वयं की तैयारी करो ध्यान
रहे स्वयंवर नाम का हो और वरमाला शिशुपाल
के गले में पड़नी चाहिए रुम तुझे स् में
शिशुपाल को रमाला पहना
होगी वरमाला पति को ही पहनाई जाती है
भैया और मैं अपना
पति श्री नंद किशोर को मान चुकी हूं इसके
लिए तुझे स् में नहीं सुमन में जाना होगा
स्मशान तो नहीं है जीवन का प्रवेश द्वार
है
भैया मैं अपनी मनोकामना पूरी करने के
लिए वहां भी जाऊंगी तो सुन ले बलराम और
कृष्ण कब के प्रवचन पर्वत पर जलकर राख हो
गए यह सुनाकर मेरी आत्मा को तुम भले ही
जलाओ भैया पर मेरे सुहाग को आज नहीं आ
सकती यह मेरा विश्वास है य विश्वास नहीं
हट रुक्मण और तेरा य हट मैं पूरा नहीं
होने
दूंगा तुझे शिशुपाल से ही विवाह करना
होगा चलिए पिताजी
[संगीत]
द्वारिका के इस राज भवन में मन कैसे लगता
होगा नारद जी द्वारका के इस राज भवन में
मन लगने के लिए तो मुझे देवरानी और
सुभद्रा को एक और भाभी चाहिए आप ही मेरे
देवर जी को समझाइए द्वारका नगरी तो
इन्होंने बसा ली अब अपनी गृहस्ती भी बसा
ले नारायण नारायण मैं ब्रह्मचारी घर
गृहस्ती की बात क्या जानू महादेवी देवर्ष
अब मुझे भी आप ही का शिष्य बनना है
कन्हैया तुम्हारे विवाह के बारे में
तुम्हारी भाभी से मेरा विवाद होता ही रहता
है अब तुम्ह निर्णय कर लेना चाहिए निर्णय
ये क्या करेंगे मैंने कर लिया है हां
कन्या भी देख रखी है नारायण नारायण
देवर्ष कन्या की बात मैं मैं नहीं लाया
हूं प्रभु मैंने तो रेवती जी से इतना ही
कहा है कि कुंडलपुर में विदर्भ राजकुमारी
रुक्मिणी का स्वयंवर होने जा रहा और मैंने
द्वारका आते समय रुक्मिणी को देखा है तभी
से ठान लिया है कि देवर जीी का विवाह
कराना है उसी के
साथ ये कैसे हो सकता है भाभी स्वयं व का
निमंत्रण तो आया
देवर जी प्रेम में नेम और शिष्टाचार नहीं
देखा जाता द्वारकाधीश की जय हो विदर्भ राज
पुरोहित स्वागत भन में श्री कृष्ण जी की
प्रतीक्षा कर रहे
हैं नारायण नारायण अब मैं भी चलता
हूं नाथ मेरा मन कहता है कि रुक्मिणी ने
विवाह के लिए श्री कृष्ण को संदेश भेजा है
[हंसी]
देवी तुम भी वह बात करती हो कि बनिया दे
ना दे और ग्राह कहे पूरा तलना कन्हैया
विवाह के लिए तैयार नहीं और तुम हो कि
अपने मन के लड्डू खाए जा रही हो आप नहीं
समझते नाथ ऐसी बातों में अपने बड़ों के
आगे मुंह खोलकर कोई हां करता
है मैं विदर्भ राज पुरोहित सुदेव विराजी
यदुनंदन की सेवा में दर्भ राज कुमारी
रुक्मिणी का ये
[संगीत]
[प्रशंसा]
पत्र ब्राह्मण
देवता जिसको मुझसे प्रेम है मैं भी उसी का
राजकुमारी की मनोकामना अवश्य पूरी
होगी राजकुमारी जी मगध पति जरास अपनी सेना
लेकर आ गया अपने दल बल के साथ शिशुपाल भी
आ
पहुंचा
अभी नंद किशोर नहीं आए पधारे यदुनंदन श्री
कृष्ण चंद्र जी पधारे पधारे
प्राण वल्लभ आगे हा हा वे गौरी पूजन के
समय मंदिर पर उपस्थित रहेंगे आपकी
मनोकामना पूरी करेंगे मेरा आशीर्वाद
[संगीत]
है सीता के रा ल काशा मैं गाव ना च के
आकाश में उ आज मेरा मन आनंद से पागल हो
रहा
है बहुत प्रसन्न दिख रही है रुक्मण
प्रसन्न होने का इससे अच्छा अवसर फि कौन
सा होगा भैया गौरी पूजन करने जाना है ना
अच्छा तो गौरी मां ने तेरी मती फेर दी
बहुत अच्छा हुआ तू गौरी पूजन की तैयारी कर
और मैं स्म
की
सुभद्रा
[संगीत]
सुभद्रा ओहो आज तो भाभी के पांव धरती पर
टिकते ही नहीं किस आनंद में उछल रही हो
भाभी ननद रानी सुभद्रा का मन एक भाभी से
भरता नहीं था ना अब दूसरी आ रही है अच्छा
तो ये दूसरा मोर्चा कहां खुला है कुंडलपुर
में मेरे देवर जीी रुक्मिणी का हरण करने
गए हैं ओ तो ये क्यों नहीं कहती भाभी कि
भैया के ऊपर बस नहीं चलता तो मेरे ऊपर
शासन चलाने के लिए तुम अपनी संख्या बढ़ा
रही हो क्यों ना बढ़ाऊ हम तुम्हारे भैया
भी अच्छी तरह समझते हैं कि कुंवारी बहन पर
कड़ा पहरा होना चाहिए हटो भाभी भैया का
नाम लगाओगी तो मैं भी तुम्हे गाली दूंगी
हा दे लेना अभी तो मंगल कलश लेकर भैया और
भाभी के स्वागत के लिए तैयार हो
जाओ गौरी माता अपनी दया की भीख
से मेरी प्रीत की झोली भर दो मां मेरी
मनोकामना पूरी करो
h
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
मैं वसुदेव का पुत्र कृष्ण रुक्मिणी का
हरण करके द्वार कापुरी ले जा रहा हूं जिसम
शक्ति हो वो मुझे रोकने आए
[संगीत]
हो
[संगीत]
गया महाराज सं को समाचार
दो सम्राट आप सेना लेकर आइए मैं का पचय
करता
हूं री बा उठी सावधान साथ की
[संगीत]
[संगीत]
गुलाम के साथ यु करने से तुम्ह रुक्मण तो
मिलेगी नहीं किंतु शिशुपाल तुम्हारे इस
अपमान का ऐसा बदला लेंगे कि देख के संसार
की आंखें फट जाएंगी इस समय कड़वा खुट कर
लट चलना ही ठीक है अच्छा लट चलो
[संगीत]
दारू रक्त
रोको नहीं प्रभु रक्त मत रोगी मेरे भाई
रुक में आते हो बज देने साला आया और बहनों
उसे ना मिले ऐसा कभी हो सकता है क रे
कृष्ण सावधान रुक्मी
[संगीत]
[संगीत]
रस्सी जल गई पर ठ नहीं
गई
कन्हैया रु को मारो
मत अपनी कुलवधू के सामने उसके भाई की
हत्या मैं नहीं होने दूंगा इह छोड़
दो आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए छोड़
देता हूं
भैया परंतु खल को दंड दिए बिना नहीं जाने
दूंगा
रुक्मी अब तुम जा सकते
[संगीत]
हो तुम्हारे भाई के साथ कन्हैया के इस
बर्ताव के लिए मैं तुमसे क्षमा मांगता हूं
क्षमा तो मुझे अपने भाई के कहे हुए
अपशब्दों के लिए मांगनी चाहिए किंतु भाई
से अधिक मुझ उस कुल का सम्मान प्यारा है
जिसकी मैं कुल वधु बनने जा रही हूं किंतु
कुल वधु के रूप में तुम मेरा आशीर्वाद तब
पाओगी जब धूमधाम से द्वारका में विवाह की
विधि पूरी करवाऊंगी
[संगीत]
भीतर जाना मना है मुझे श्री कृष्ण से
मिलना है इस समय नहीं मिल
सकते आज्ञा का पालन करना तुम्हारा काम है
दासी जाकर सूचना दो उससे पहले मैं तुम्ह
आज्ञा देती हूं जिस रास्ते से आए हो उसी
रास्ते से ध लेकर लौट जाओ असभ्य जंगली
तुम्हारा यह साहस मेरे साहस का परिचय
तुम्हे अभी मिल जाता है
[संगीत]
ठहरो आगे बढ़ने का साहस मत करो वही खड़े
रहो लो काजल तो लगाया ही नहीं कहीं नटखट
दुल्हा जी को किसी की नजर ना लग जाए अपनी
नजर संभालना बहुरानी दे को भाभी की नजर
पहले लग जाती है पड़ा आया धली वाला
सुभद्रा मैं अी साहस दिखाती
हूं अरे ननद रानी की तो तेवरी चड़ी हुई है
क्या बात है आज ये निशाना किस पर साधने
चली द्वार पर कोई धनुही वाला मेरा साहस
दिखना चाहता है धनुही वाला हां कौन है वो
कोई गवार पागल चक्रम आपी से मिलने आया है
मैं अभी उसे रास्ता दिखाती हूं खैर
सुभद्रा मैं चलता हूं तुम्हारे साथ
[संगीत]
चलो
य अजुन
[संगीत]
भग बाहर क्यों खड़े रहे मित्र भीतर चले
आते भगवन द्वारपालो की जगह ऐसी उजड दसियों
से भवन भरा हो तो भीतर कोई कैसे आ सकता है
किसीने मुझे आने नहीं दिया अच्छा
यह तो मेरी बहन सुभद्रा है अर्जुन सुभद्रा
क्षमा कीजिए भन
[संगीत]
भीतर जाना मना
है मुझे भाभी से मिलना है इस समय भाभी से
भैया ही मिल सकते हैं ये किसकी आज्ञा है
द्वारपाल की
ओ अच्छा हुआ मुझे दासी पद से छुट्टी तो
मिली अब मैं चलती हूं
आज्ञा बिना
ही
[संगीत]
पड़ सच पूछो तो मैं तुम्हारे योग्य नहीं
कैसे होंगे कहां चौध भवन के स्वामी और
कहां इन चरणों की दासी पर ये मत समझिए कि
आपकी आड़ी टेडीी बातों से मैं लाल पीड़ी
हो जाऊंगी कि आंसू बहांगी
मैं
आपको आज नाथ नारायण
नारायण अपरिचित को तो चकमा देना सहज हो
सकता है प्रभु किंतु परिचित को ना ड़ी खीर
है लो नारद जी को समय को समय का तो ध्यान
ही नहीं रहता राज देव ध्यान तो आपका रहता
है प्रभु दर्शन का संयोग झुट गया तो समय
नहीं तो कु समय
जाते जाते इच्छा हुई जगदीश्वर के साथ साथ
जगदंबा का भी दर्शन करता
चल केवल दर्शन कीजिएगा जीप में चलाएगा हा
नारायण नारायण जीप पर तो आप ही का नाम है
प्रभु देवर्ष आप तो त्रिकाल ज्ञानी
है मेरी हसने का देखिए ना क्षमा कीजिए
महादेवी एक बार एक राजकुमारी की हस्तर
रेखा देखी थी तो आप स्वामी ने मुझे बंदर
बना दिया था आज आपकी देखू तो क्या जाने
मुझे लंगूर बना दे मैं तो स्वामी के सामने
ही पूछ रही हूं देवर्ष
बताइए मुझ पर इनका प्रेम ऐसा
ही अटल रहेगा ना आप तो मुझे संकट में डाल
रही है
देवी रेखा कहती है रेखा क्या कहती है
देवऋषि छोड़िए प्रभु इसलिए तुम्हे देखना
नहीं चाहता नहीं नहीं देव अधूरी बात कहकर
मुझे शंका में मत
डालिए भगवंत अब जो कहने आए हैं वो कह
डालिए देवशी नारायण
नारायण देवी
जी आपके पति के भज
में आठ पटरा निया और
16100 रानिया
है
बस भगवन
यह कहने में इतना घड़ा क ग
देव विराट की शक्तिया विराट के पास नहीं
आएंगी तो किसके पास आएंगे सभी अपने अपने
स्थान पर शोभा पाएंगे नारायण नारायण प्रभु
अब मैं छुट्टी लेता हूं हे
[संगीत]
नारायण श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे हे
नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे
मुरारी हे नाथ नारायण
वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे
नाथ नारायण द्वारपाल भया श्री कृष्ण का
निवास स्थान कौन सा है मैं उनसे मिलने आया
हूं द्वारका देश से मिलने तुम हो कौन उनका
मित्र
मित्र आज एक साथ ये आक्रमण कैसा देवियों
यह तो केवल पटरा का आक्रमण है 16 रानिया
तो अभी बाकी है परंतु कुछ कारण का भी तो
पता चले आज वट सावित्री का व्रत है ना वट
पूजन से पहले आपके चरण धोकर चरणामृत लेने
आई किंतु देवियों
16108 कलश की जलधारा जब लगातार इन पाव पर
पड़ती रहेगी तब तो यह पाव यही जम
जाएंगे आज आपकी चतुराई नहीं चलेगी हा लाइए
च
ये क्या
नाथ जिस डी ने कभी धूल छुई तक
नहीं उस ड़ में आज भवाई कैसे पट
गई
स्वामी आपके तलवे में काटा आपने तो आज भवन
के बाहर पैर भी नहीं रखे श्री द्वारकानाथ
की जय हो प्रभु एक अत्यंत दीन दुर्बल
ब्राह्मण जो एक मैला दुपट्टा डाले हुए
जिसकी धोती फटी हुई और जिनके पांव में
जूते तक नहीं द्वार पर खड़ा दर्शन की
आज्ञा चाहता है वो अपने को प्रभु का मित्र
कहता है गांव का पता नहीं नाम बताता है
सुदामा
सुदामा मेरे सहपाठी
सुदामा मेरे गुरु बंधु सुदामा
मेरे परम मित्र सुदामा मेरे गुरु भाई
सुदामा मेरे मित्र
सुदामा
सुदामा
सुदामा
सुदामा सुदामा प्रभु
सुदामा बहुत दिनों
के बिछड़े
[संगीत]
मितवा मिले हैं
वर्षों
[संगीत]
बाद आंखों में है उमड
पड़ी
बीते बचपन की
याद
बीते बचपन किया
[संगीत]
प्रभु नहीं मित्र
नहीं मुझे प्रभु कहने वाला सारा संसार
है परंतु मुझे मित्र कहने वाला तुम्हारे
सिवा और कोई नहीं सुदामा
सुदामा तुम मुझे मित्र ही
कहो मैं तो मैं तो यही समझता था कि आप
द्वारकाधीश होकर दरिद्र सुदामा को भल गए
होंगे
किंतु मुझ जैसे निर्धन के साथ आपका यह
बर्ताव धनवानो के सामने एक महान आदर्श
खड़ा कर रहा है देखो बंधु इधर उधर की
बातों में ना बहला आज मित्र मिलन का
दुर्लभ अवसर मिला है उसका मुझे पूरा पूरा
लाभ उठाने दो आओ चलो भवन
[संगीत]
में देखो
प्रभु का प्यार ये अद्भुत
[संगीत]
स्वागत ये
अभिराम आज बना है एक निर्धन
का
सारा महल
गुलाम विराज बंधु
मैं मैं नहीं नहीं प्रभु मैं इस सिंहासन
के योग्य नहीं हूं
सुदामा तुम्हारे प्रेम और भक्ति का आसन तो
इतना ऊंचा है कि उसके आगे यह आसन तुच्छ है
बिराजो बिराजो
[संगीत]
बंधु नहीं नहीं सुदामा ये क्या कर रहे हो
उठो उठो सिंहासन पर बैठो नहीं प्रभु बैठो
ये क्या कर
रहे सुदामा इनसे संकोच कैसा भैया अरे ये
तो तुम्हारी भाभिया
है देवियों जाकर थाल ले आओ और जल की झारी
भी मैं अपने प्रिय मित्र सुदामा के चरण धो
उा जाओ देवियों विलंब न करो शी घर ले
आओ ये क्या कर रहे हैं प्रभु मुझे पाप में
मत डालिए
मा पापियों को मारकर यह हाथ अपवित्र हो गए
हैं अब ये चरण धोकर पवित्र हो जाएंगे नहीं
प्रभ नहीं अरे हां भैया अब परिवार का कुछ
समाचार
सुनाओ तुम्हारे बाल बच्चे कैसे
हैं मां मुझे भूख लग ना दे ना मा
[संगीत]
जैसे प्रभु रखते हैं वैसे
रहते मेरी भाभी कैसी
है एक मां
को संतान के सुख दुख की जितनी चिंता होनी
चाहिए उतनी चिंता सुशीला को रहती है प्रभु
भैया भाभी ने मेरे लिए क्या भेजा
है जो स्वयं संसार के
दाता उनको कोई क्या दे सकता है
प्रभु तुम कुछ भी कहो भैया परंतु व्यवहार
में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रिया अधिक
कुशल होती है और मेरी भाभी कभी कंजूस नहीं
हो सकती भाभी ने मेरे लिए अवश्य कु भेजा
होगा कहो भैया क्या भेजा है कुछ नहीं
प्रभु कुछ नहीं कुछ नहीं तो फिर ये क्या
छुपा रहे हो भैया कुछ नहीं प्रभु ये क्या
छुपा रहे हो
[संगीत]
भैया जान पड़ता
है कि यतन से बांधकर भाभी ने मेरे लिए कोई
अनमोल वस्तु दी
है अंतर्यामी से क्या
छिपाए
किंतु मेरी गरीबी की पोटली भाभियों के पास
मत खोलिए प्रभु
[प्रशंसा]
सुदामा मेरी फ रहने दीजिए प्रभ प्रभु भया
दया
[संगीत]
कीजिए देखो लोगों ये लीला
ललाम देखो लोगों ये लीला
ललाम कहां सुदामा कहां
घनश्याम कहां सुदामा कहां
घनश्याम देखो लोगों ये लीला
[संगीत]
[प्रशंसा]
ललाम भक्त के पांव प्रभु धोते
दीन दशा पर हरी
रोते जर जर तन पे पड़े
चिथड़े तलव में हाय कांटे
गड़े प्रभु की आंखों में
[संगीत]
सावन आंसू ये कितने पावन
[संगीत]
देख रही हर
पटरानी सबकी पलको में
पानी डूबी अचरज में दुनिया
तमाम देखो लोगों यह लीला
ललाम देखो लोगों ये लीला ललाम
[संगीत]
[प्रशंसा]
फिर भोजन कीड़ी
आई बैठे दोनों गुरु
भाई एक है कुटिया का
बाती एक जगतपति
अविनाशी रुक्मण जी पकवान धरे
सत भामा जी पंखा
[संगीत]
करें ऐसी प्रीत मिले
सबको प्रभु सा मत मिले
सबको कितनी है यह छवि
अभिराम देखो लोगों य लीला
ललाम देखो लोगों ये लीला
ललाम रात हुई तो भगत
सोए सपनों के लोक में
खोए करते देखो सेवक बन नर की सेवा
[संगीत]
नारायण सोच रहे
हैं य
दुरा घर
बैठे
गंगाई फिर लगे वो मुस्काने
प्रभु की
माया प्रभु
[प्रशंसा]
जाने लेली काक से झट झोली चावल की पोटली
खोली मित्र के भाग्य को चमकाने लगे प्रभु
तंदुल खाने
[संगीत]
फिर तो सब कुछ ही
बदला भक्त सुदामा का पुण्य
फला एक वामन को विराट किया राजा जैसा थाट
[संगीत]
किया है भगवान बड़े
दानी इनका कोई नहीं
नी छप्पर फाड़ के देते
हैं बदले में कुछ ना लेते
हैं आते संकट में बस वही
खाम देखो लोगों ये लीला
ललाम देखो लोगों ये लीला
ललाम कहां सुदामा कहां
घनश्याम देखो लोगों ये लीला
ललाम कन्हैया तीन दिन से तुम दिखाई नहीं
पड़े कहां थे सुदामा जी के सत्कार में लग
गया था भैया सुदामा जी जो गुरुकुल में
हमारे साथ पड़ते थे जी कहां है वे तो चले
भी गए चढ़ भी गए देखो कन्हैया तुम्हारी ये
ऊट पटांग टे नहीं जाती कोई भी बात बीत
जाने पर बताते हो ये ठीक नहीं अच्छा
[प्रशंसा]
मैंने तुम्ह इसलिए बुलाया है कि अब
सुभद्रा विवाह के योग हो गई है उसके घरवा
के बारे में मैं अपना विचार बताने से पहले
तुम्हारा विचार जान लेना चाहता हूं मेरे
विचार से तो सुभद्रा के लिए योग्य अर्जुन
ही है भैया कन्हैया नीति वही सुंदर और सफल
होती है जिससे मित्रता बढ़े पांडव तो
हमारे संबंधी और मित्र है ही यदि हम कौम
को भी अपना संबंधी और मित्र बना ले तो सदा
के लिए दोनों को बैर की आग बुझा सकते हैं
इसी उद्देश्य से मैंने सुभद्रा का विवाह
दुर्योधन से करना ठीक
समझा आप जो भी ठीक समझे उसम मुझे कोई
आपत्ति नहीं भैया परंतु सुभद्र की भी तो
इच्छा संसार का हर एक भाई अपनी बहन को
सुखी देखना चाहता है जी और हर एक बहन बेटी
सुखी रहने की इच्छा रखती है सच है भैया
सुभद्रा हमारी इकलौती और लाली बहन है जी
हां वो भारत की राजरानी ब रहे इसलिए मेरा
ये निश्चय समझो कि उसका विवाह दुर्योधन से
ही
होगा
भाभी भा सुभद्रा सुभद्रा
[संगीत]
सुभद्रा पगले क
लड़कियां तो पराया धन होती हैं सब
लड़कियों को जीवन में एक बार अपने माता
पिता बहन भाई भ जैसे बिछड़ने का दुख उठाना
ही पड़ता है परंतु त अभी से इतनी अध हो
रही है
भैया बड़े भैया मुझे कुए में ढकेल दे मेरा
गला घोड़ दे मुझे कसाई के हाथ भच दे मैं
सब सहन कर लूंगी सुखी हो जाऊंगी पर पर
दुर्योधन से मेरा प्या नहीं भैया नहीं अरे
लड़किया तो मनाती है कि उन्हे ऊंचा से
ऊंचा घर मिले धनी से धनी व मिले और तू ये
क्या सोच रही है भैया तो तुझे हस्तिनापुर
की महारानी बनाना चाहते हैं नहीं भैया
मुझे वहा की राजरानी बनने की भूख नहीं है
जहा साम्राज्य की छूटी प्रतिष्ठा से आत्मा
को ला जाता मैं हस्तिनापुर के राह सिंहासन
पर पाव रखने से पहले द्वारका के सागर में
स
जाऊंगी दे
दूंगी परंतु भैया तो अपने निश्चय पर
चट्टान की तरह अटल है अब उपाय भी क्या
किया जा सकता है
सुभद्रा भैया का कोप त अच्छी तरह जानती है
भैया इंद्र की कोप से ्र को बचाने के लिए
जब आपने अंगुरी पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया
तब क्या मुझसे उपाय पूछा था शिशुपाल के
जाल से रुक्म भाभी को निकाला तब क्या
मैंने आपको उपाय बताया था तब तो भैया का
हाथ मेरी पीठ पर जा पगली परंतु अब
अब तो उनका सामना है सुभद्रा यदि कोई मैं
ऐसा प्रस्ताव लेकर उनके पास जाऊ तो मुझ पर
भी उनका हल मुसल उठे बिना नहीं रहेगा नहीं
सुभद्रा यह मुझसे नहीं होगा भैया हो बेबस
के केवल पुकार सुन नंगे पाव दौड़ने वाले
भाई आज अपनी बहन के आंसू की धारा देखकर
अपना मुह भी नहीं खोल सकते अनाथ के नाथ
अलाओ के बन बेसहारों के सहारा कहलाने वाले
भगवान श्री कृष्ण आपकी शक्ति आपकी
सामर्थ्य सबके लिए है मेरे ही लिए नहीं
बोलिए भैया
बोलिए मैं कैसे बोलू
सुभद्रा यदि आज मैं अपना मुंह खोलू तो कली
हमारे परिवार में कलह की आंधी उठ सकती है
हमारे हरे भरे संसार में ू शार पात हो
सकता है हम दोनों भाइयों में जीवन भर के
लिए बर की आग सुलक सकती है नहीं भैया
बहन के सुख सुहाग के लिए भाई भाई का बैरी
हो जाए ये मुझसे सहन नहीं
हो इससे कहीं अच्छा कि मैं अपना अंस कर लू
ज
सुभद्रा भैया कुछ कर बैठे इससे पहले मैं
कुछ
सोचता मुझे सोच दे सुभद्रा
[संगीत]
भम भम
शंकर भक्तों की मनोकामना पूरी
[संगीत]
कर हमम भम शंकर भक्तो की मनोकामना पूरी कर
कन्हैया मेरी इच्छा है कहिए इस बार
तुम्हारी जन्माष्टमी पर तक यात्रा धूमधाम
से मनाई जाए इसलिए सारे याम को परिवार में
चलने के लिए कहला दिया जाए कहला दूंगा
भैया और तुम्हारी भाभी तथा सभी पटरा नियों
के साथ साथ सुथरा भी चले वो कुछ दिनों की
अतिथि है उसका मन बहल जाएगा जैसी आपकी
इच्छा मैं भी रुक्मिणी सत्यभामा सत्या
जामवंती आर की ओर से
एक इच्छा लेकर आई कहो कहो क्या इच्छा लेकर
आई हो नगर के बाहर कोई सिद्ध महात्मा जी
आई है बड़े चमत्कारी है आज्ञा हो तो हम
उनका दर्शन कराए बड़ी सुंदर इच्छा है
किंतु योगीराज को हम यही क्यों ना ले
आए भैया यह सब लोग वहीं जाकर उस सिद्ध
महात्मा के दर्शन करें तो कोई हानि
है मेरे विचार से तो किसी भी योगी को अपने
राज फोन में ले आना उचित नहीं होगा
भैया आजकल योगी के वेश में ढोंगी बहु से
भटकते रहते हैं हां तो क्या सारी नगरी
अंधी है मूर्ख है मैं योगीराज को ले आने
जा रहा हूं तुम्हे आना हो तो आओ मैं कहा
रोक रहा हूं भैया
चलिए हममम
शंकर भक्तो की मनोकामना पूरी कर हमारे आग
के तारे को इसी डाय ने तोड़ लिया है बाबा
हमारे बुढ़ापे का सहारा टूट गया है महाराज
दुखियों पर दया कीजिए दया माया सब भोलेनाथ
की है मैया लेने वाले से देने वाला महान
है उस पर भरोसा
रखो
हममम
शंकर माता की को फरी फरी
कर बालक को अपने घर ले जा मैया आनंद
कर पुत्रवती
भवा योगीराज को
सा शंकर भक्तो की मनोकामना पूरी
कर
बच्चों तुम दोनों में भाई का नाता होना
चाहिए पिता एक माताए
दो भाग्य में राज सिंहासन का सर्व
सुख
किंतु बड़े भाई को संतान का सुख नहीं आपकी
वाणी सच है महात्मा मैं द्वारकापुरी का
सेवक बलराम और यह है मेरा छोटा भाई
कन्हैया हमारी इच्छा है कि आप राज भवन में
पधारे योगी को राज भवन से क्या प्रयोजन
बच्चा हमें सेवा का अवसर दीजिए महाराज
परंतु सेवा कर कौन रा योगराज
ब विवाहित स्त्रियों को केवल अपने पति की
सेवा करने का अधिकार
है भैया जान पड़ता है योगीराज कुंवारी
कन्या की सेवा चाहते हैं तो ठीक है इनकी
सेवा के लिए को ख हा हा भैया कभी भूल से
भी ऐसा कीजिएगा मुझे तोय योगीराज प्रपंच
दिखाई पड़ते
हैं
बचा योगी की अत दृष्टि बता रही है
छोटा भाई मन का काला है तुम जो भी उत्तर
देना अपने विश्वास पर देना बच्चा देखिए
भैया आपको विश्वास हो तो भले ही इनकी सेवा
में सुभद्रा को रख दीजिए परंतु फिर मुझे
कुछ मत कहिए तुम चुप रहो
कन्हैया
महात्मा आपकी सेवा हमारी बहन कुमारी
सुभद्र करेगी आप पधारने की कृपा
कर की कामना पूरी
करम
शकर कन्या तुम्हारी सेवा से हम संतुष्ट
हुए वर मांगो महात्मा श्री कृष्ण की बहन
को किस वस्तु की कमी हो सकती है जो दूसरे
से मांगे श्री कृष्ण की बहन होने के घमंड
में साधु महात्मा का तिरस्कार करने की फूल
ना करो
राजकुमारी तुम ना कहो तो भी हमारी अंतर
दृष्टि साफ साफ देख रही है कि तुम्हारी
मनोकामना क्या है क्या है
सुन तुम्हारी कन्या को सदा मनवांछित व की
कामना होती है तुम्हारे मन में भी एक
धनुर्धारी वीर पुरुष बस गया है तुम्हारी य
प्रेमा तुरा
उसी को देखना चाहती है तुम्हारे रोम रोम
में भी उसी प्रीतम को पाने की लालसा जाग
उठी है सच कहो कन्या क्या ये झूठ
है अच्छ तो तुम ना मांगो तो भी सेवा का फल
देना साधु संत का धर्म है शीघ्र ही तुम्हे
अपने प्रीतम का दर्शन
होगा तुम्हारी आशाएं पूर्ण होंगी सुभ
[संगीत]
महात्मा तुम हमारे अतिथि ना होते तु मुझे
सुभद्र कहने वाले तुम्हारे इस जीव को बा
से छेद कर छली बना देते तुम्हारी इस दाढ़ी
का एक एक बाल नच कर चन की तरह बिखेर देते
तुम्हारी आख निकाल लेते कन्या साधु का
अनादर करने से पहले साधु भक्त बलराम के
क्रोध का परिणाम सोच लो यह सोचने से पहले
तुम जैसे स्वादु को झाड़ू से ड़कर बाहर
नहीं निकाला तो मेरा नाम भी सुभद्रा नहीं
बम बम
शंकर भक्तों की मनोकामना पूरी कर बम बम
शंकर भक्तों की मनोकामना पूरी
कर
भोले
धनुर्धारी
सदे अभी मन की बात मुह पर नानाना सु
तुम्हारे भैया कृष्ण के सोचे हुए नाटक का
पहला अंक समाप्त होता
है और दूसरे अंक में रव तक यात्रा में से
तुम्हारा हरण
होगा बड़ा है बाका मेरा
[प्रशंसा]
देवरिया प्यारा ये
नंदलाल हे आज है धन्य जन्मदिन इसका
अरे
दरे
नगरों पे ताल
[संगीत]
मथुरा में जन में गोकुल में खेले मथुरा
में जन में गोकुल में खेले फिर आए द्वारका
धाम श्याम जी का क्या
कहना गोपियों के प्यार में माखन चुरा के
दुनिया में हुए
बदनाम श्याम जी का क्या
कहना क्या कहना हो हो क्या कहना श्याम जी
का क्या कहना
[संगीत]
बचपन में थे बड़े नटखट ये कान्हा नटखट ये
कान्हा बस दिन का धंधा था सबको
सताना सबको सताना
जगरिया पटते कभी चुनरिया झटक कभी गूंज में
भटकते कभी घाट पर मटकते कभी गगरिया पटकती
कभी चुनरिया जटक कभी गूंज में भटकते कभी
घाट पर मटकते कभी
हो अद्भुत थे सब इनके काम श्याम जी का
क्या
कहना मथुरा में न में गोकुल में खेले फिर
आए द्वार का धाम श्याम जी का क्या
कहना क्या कहना हो हो क्या कहना श्याम जी
का क्या कहना
[संगीत]
बाहर से कुछ है भीतर से कुछ है हमरे ये
गोविंद
गोपाल हमरे ये गोविंद
गोपाला गुरी गुरी गुड़ियों से ब्रिज वालो
पे लट्टू बड़े थे ये
लाला लड्डू बड़े थे ये
लाला गोरे पतन जहां जहां रछ नयन जहां जहां
नई चितवन जहां जहां वशीकरण जहां जहां गोरे
बदन जहां जहां रछ नयन जहां जहां नई चितवन
जहां जहां वशीकरण जहां जहां
[संगीत]
हो वहां वहां इनका मुकाम श्याम जी का क्या
कहना मथुरा में जन्मे गोकुल में खेले फिर
आए द्वार का धाम श्याम जी का क्या
कहना गोपियों के प्यार में माखन चुरा के
दुनिया में हुए बदनाम
श्याम जी का क्या
कहना क्या कहना हो हो क्या कहना श्याम जी
का क्या कहना
[संगीत]
सुनीता को छोड़
दे छोड़ दे नहीं तो मैं तेरी छाती चीर
डालूंगा मुझे ललने वाले
ब आज तुम्हारा कम भी चूर हो
[संगीत]
जाएगा i
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
i'm
[संगीत]
हे
[संगीत]
[संगीत]
नाथ के अवतार श्री बलराम जी आपने इस पाती
को मारकर हमारा दुख दूर कर दिया आपकी जय
होयो सु का कर ले गया अरे वो योगी नहीं
अर्जुन था
[प्रशंसा]
[संगीत]
आज मैं योगी वेश को पलंक लगाने वाले
पाखंडी अर्जुन का फ का डालू
भैया रुक जाइए भैया हट जाओ मेरे रास्ते से
कन्हैया शांत होए भैया यह सब बखेड़ा
तुम्हारा है च जा य से ना ये क्या हो रहा
है
बहन का तो जहां संयोग था चली ग अब क्या
भाई भाई आपस में लड़कर संसार को यह बताना
चाहते हैं इनका प्रेम क्षणिक था मुझे किसी
से प्रेम नहीं मेरा कोई भाई नहीं मुझे कोई
नहीं
चाहिए तुम भी दूर हो जाओ मेरी आंखों के
सामने से चली जाओ क्रोध से भाग्य का लेख
तो नहीं बदला जा सकता भैया हा ना शांत
होकर विचार कीजिए वो भाग्य की ही तो बात
थी जब आप लोगों ने रुक्मिणी का हरण किया
था
ठीक है जहां मेरी आज्ञा या इच्छा का आदर
नहीं वहां मेरे रहने का भी कोई अर्थ नहीं
भैया
भैया यदि आप मुझे दोषी समझते हैं तो मैं
प्रतिज्ञा करता हूं कि आज आपकी इच्छा या
आज्ञा के बिना मैं कुछ भी नहीं
करूंगा आपकी शक्ति अनंत
है आपकी करुणा अनंत
है आप स्वयं अनंत
है भया आप मुझे क्षमा करके आप द्वारका
पधारिए भैया आप द्वारका
पधार
कन्हैया ना जाने क्यों तुम्हारी अमृत जैसी
वाणी सुनकर मैं सब कुछ भूल जाता हूं भैया
[संगीत]
कया चाहती हूं कि मरने से पहले वाग दन के
अनुसार तुम्हारी पालि पुत्री सुरेखा और
अभिमन्यु का ब्याह अपनी आंखों से देख लो
बलराम जी तथा श्री कृष्ण की सम्मति लेकर
तुरंत समाचार दो ताकि मैं सुभद्रा और
अभिमन्यु को लेकर द्वारका आ जाऊ सबकी
कुशलता चाहती हूं और सबकी मनोकामना पूरी
करने के लिए भगवान से प्रार्थना करती
हूं दुखियारी
कुंती सुरेखा के विवाह की बात मेरे मन में
भी कब से घूम रही है तो फिर तुरंत
हस्तिनापुर संदेश भिजवा देना चाहिए भिजवा
देता हूं पर कुंती बुआ को नहीं सम्राट
दुर्योधन को यह क्या कह रहे हैं
नाथ सुरेखा का वाग दन अभिमन्यु के साथ आप
ही कर चुके हैं संसार क्या कहेगा संसार
कहेगा कि बलराम ने अपनी पालि पुत्री
कौरवों को देकर राजनीति में एक नई मोड़ ली
है ये नहीं कहेगा कि द्वारकाधीश ने अपनी
पुत्री का वाग दन तोड़कर अपनी मर्यादा को
कलंकित किया है यह नहीं कहेगा कि अपनी
फूपी बहन और भांजे को संकट के समय ठुकरा
करर आपने अपनी निर्बलता का परिचय दिया है
देवी एक जात का दूसरी जात से एक देश का
दूसरे देश से और एक राज का दूसरे राज्य से
मिलन निर्बलता की नहीं सद्भावना की निशानी
है संसार की भलाई के लिए अपने लाभ को छोड़
देने में मर्यादा कलंकित नहीं होती बल्कि
ऊंची होती है मैं कौरव पांडव और यादवों को
एक धागे में बांधकर यह बताना चाहता हूं कि
एकता ही मनुष्य का सबसे बड़ा बल है इसी
विचार से मैंने सुरेखा का विवाह दुर्योधन
के बेटे लक्ष्मण से ठीक किया
है यदि आप क्रोध ना करें तो मैं कुछ कहूं
भैया तुम यही कहोगे कि सुरेखा का विवाह
अभि मन्नू से कर दे किंतु सुन लो मैं बहन
नहीं दे सकता
तो कन्या देकर भी अपना उद्देश्य पूरा
करूंगा परंतु मैं कहां बाधा डाल रहा हूं
भैया यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं अपने हाथ
से निमंत्रण पत्रिका लिखकर सम्राट
दुर्योधन को भेज दू श्री कृष्ण दूध को आज
ही चला जाना
चाहिए
काकी
काकी काकी काकी क्या हुआ सुरेखा पिताजी
मेरा वागन तोड़कर दुर्योधन के पुत्र से
कुमार लक्ष्मण से
नहीं नहीं तेरे काका ऐसा नहीं होने देंगे
पर काका तो अपने हाथ से दुर्योधन को
निमंत्रण पत्रिका लिख रहे हैं मैंने अपने
कान से सुना है काकी मैं यह नहीं होने
दूंगी तू विश्वास रख पर तू य बात सच सच
बताना अभिमान को तू शुद्ध मन से चाहते है
ना तो संसार की ऐसी कोई शक्ति नहीं जो
शुद्ध प्रेमी का मिलन रोक सके त धीर स्तर
मुझ पर भरोसा रख जा
काकी बहुत आनंद में है कोई शुभ काम करके
आए हुए लगते हैं हां हां मैं कोई अशुभ काम
करने के लिए थोड़ी मथुरा छोड़कर द्वार का
आया हूं सो तो आपकी अंगुली में लगी हल्द
रोली साक्षी दे रही
है कटाक्ष ना करो
देवी मैंने रव तक परवत पर भैया को वचन
दिया है कि मैं उनके किसी भी बात का विरोध
नहीं
करूंगा मैं अपना वचन पालन करूंगा तो मैं
भी सुरेखा को दिया हुआ वचन पालूंगी याद
रखिएगा अभिमन्यु बालक है पर अर्जुन का है
अपमान सहन नहीं कर सकेगा यादवों के दांत
इकट्ठे कर देगा
हां हमारे दिन ही बुरे हैं बेटा अभि मन्नी
ना तेरे ताऊ पिता और काका का बनवास होता
ना बलराम भैया तुझसे सुरेखा का गगन तोड़कर
सुधन के बेटे से ब ठीक करती आसू मत ब मां
यह पांडव का अपमान है इस अपमान का बदला
मैंने सुरेखा का हरण करके ना लिया तो मैं
धनु अर्जुन का पुत्र नहीं द्वार का पहुंच
दो रास्ता छोड़ दो हमें द्वारका जाना है
इधर से कोई नहीं जा सकता हमें भी कोई रोक
नहीं सकता
[संगीत]
हमारे सैनिकों से अपने काल को भेजने वाला
कौन
है
बोलो बोल क नहीं वो कौन
[संगीत]
है हम भटक तो नहीं गए मां तुम यही ठहरो
मैं रास्ता देख कर आता
[प्रशंसा]
[संगीत]
घटो
कट
घटो
कट
[संगीत]
घटो घटो
[संगीत]
[संगीत]
अ अभि
मन अभी मन
[संगीत]
[संगीत]
दु
[संगीत]
मायावी माया छलना है जो कायरो का सहारा है
तुझ में बल तो असली रूप में सामने आ असली
रूप भी दिखाता
[संगीत]
हूं y
[संगीत]
j i
मां बेटा मैंने शत्रु को मार दिया बहुत
अच्छा किया बेटे बहुत अच्छा किया
चलोगे
ब मेरे लाल मेरे बेटे क्या हो गया तुझे
क्या हो गया मेरे लाल
कुंती पूछेगी तो क्या उत्तर दूंगी तेरे
धनुर्धारी पिता को तेरे ताव महाबली भीमस
को कौन सा मुह
दिखाऊंगी हाय रे क्रूर विधाता मेरे आचल के
इस खिले हुए फूल को मजल कर तुझे क्या मिला
निर
बहन मैं तुम्हारे जेठ की पत्नी डि हूं
क्या तुम मेरे देवर की पत्नी वीर अर्जुन
की पत्नी हो
क्या तुम सुभद्रा हो हां बहन मैं वही अ
भाग हूं तो क्या ये मेरा भाई बन्नू
है
भैया मैं तुम्हारा अपराधी हूं भैया मैंने
तुम्हारी हत्या की है मैं हत्यारा हूं
भैया भाई की हत्या का दंड मुझे मिलना नहीं
चाहिए जिन हाथों से मैंने तुम्हारा प्राण
लिया है मैं इन पापी हाथों को तोड़
डालूंगा तोड़ डालूंगा तोड़ ल
[संगीत]
अभी मन के शरीर में प्राण बाकी
[संगीत]
है तुरंत जाओ कंदरा से अमृत की झारी ले
आओ आंसू पूछो सुभद्रा यह घटना अनजाने में
हो गई तुमने आने से पहले सूचना दे दी होती
तो ऐसा ना होता तो द्वारका जा रहे थे बहन
सुना कि बलराम भैया ने सुरेखा का वाग दन
अभि मन्य से तोड़कर दुर्योधन के बेटे
लक्ष्मण से ब्याह ठीक कर लिया है तो इसने
हट पकड़ लिया और सुरेखा का हरण करने की
प्रतिज्ञा कर ली अब तुम बताओ
बहन ये अकेला क्या करता अब मनू अकेला नहीं
है काकी इसका भाई भी इसके साथ
है मैं महाबली भीमसेन का बेटा गटोत्कचया
कि भरे लगन मंडप में कौरवों की नाक काटकर
सुरेखा का हरण नहीं किया तो आग में जलकर
अपने प्राण छोड़ दूंगा
[संगीत]
बेटा मेरे लाल कहां कहां वो दुस्ता
अमन ये तेरे बड़े भैया घट उत्क
है बड़े भैया
भ सम्राट दुर्योधन मैं आपकी भलाई चाहता
हूं इसलिए कहता हूं विवाह के अवसर पर हंसी
हंसी में कुछ ना कुछ गड़बड़ी हो ही जाती
है आप बारात लेकर जा रहे हैं तो सावधानी
से जाना ही ठीक होगा क्यों शकुनी जी हम
असावधानी नहीं है मुनिराज श्री कृष्ण अपने
भांजे से संबंध तोड़कर अपनी भतीजी का
विवाह दुर्योधन के बेटे से करने के लिए
तैयार हो गया तो इसमें अवश्य कोई भेद हो
सकता है भेद क्या हो सकता है मामा यह तो
हमारे दिन फिरने का लक्षण है कि पांडवों
का पक्ष कृष्ण ने छोड़ दिया तुम नहीं
समझोगे भांजे मैं अच्छी तरह जानता हूं
कृष्ण बड़ा धूर्त है वो यदि गंगा में खड़ा
होकर यह कहे कि उस ने पांडवों का पक्ष
छोड़ दिया है तो भी मामा शकुनी मानने के
लिए तैयार नहीं हम तो पूरी सेना के साथ
बारात लेकर जाएंगे पूर्णिमा को ब्याह है
ना पहुंच जाएंगे तब तक तुम चैन से रहो तो
ना जाने फिर कब आओगे काकी का दर्शन कब
होगा कृष्णा मामा से तुम डरते हो तो यही
रहो मैं अकेला जाऊंगा ना ना बेटा घट कुछ य
अति चंचल और दुसी है इसे अकेले मत जाने
देना आप चिंता ना करें काकी द्वारका
जाएंगे हम दोनों और लौटेंगे
तीनों चलो भैया सुरेखा बिना तुम्हारी भूख
प्यास मर गई है तो आओ मेरी पीठ पर
भैया डरो नहीं भैया आ जाओ मेरी पीठ पर
अच्छा
भैया भैया मैं आ गया मैं आपके पास एक
प्रस्ताव देकर आया हूं भैया तुम्हारा
प्रस्ताव क्या होगा मैं जानता हूं किंतु
मेरा निश्चय नहीं टल सकता मैं ये कहने आया
हूं कि अर्जुन तुम्हारे मित्र है मन हमारा
भांजा है सुभद्रा हमारी बहन है और बागन
हमने किया है ये सब सुन सुनक मेरे कान ब
हो चुके कन्हैया आप बिना सुने ही उत्तेजित
हो रहे हैं भैया नारायण नारायण उत्तेजना
बढ़ाने वाली कोई बात ना हो तो हलदर जी
अवश्य सुनेंगे
कहो यदि आप मुझे अनुमति दें तो सुरेखा का
कन्यादान देने की अभिलाषा मेरी है
कन्यादान जैसा शुभ काम आपके हाथ से हो तो
हलदर जी को तो आनंद होगा तो ये पहले कह
दिया होता फि आपने मुझे बोलने ही कहां
दिया
भैया कृपा निधान बारात नगर के पास आ
पहुंची भैया आज्ञा हो तो स्वागत की तैयारी
करूं हां हां विवाह का सारा बोझ तुम पर ही
तो है जाओ जो आजा
भैया देखा नारद जी भाई हो तो ऐसा हो और
क्या समधी के स्वागत की कितनी चिंता है
प्रभु को काकी काकी बारात भी आ गई और काका
ही स्वागत करने गए हैं ये भले ही गए हो
बारात जिस रास्ते से आए है उसी रास्ते से
लौट भी जाएगी और
सुना है मेरा कन्यादान भी काका ही करेंगे
पर तेरे काका के साथ हम आठ में से एक भी
वेदी पर बैठे थब ना तू चिंता ना कर सुरेखा
तेरा
विवाह अभि मन से ही कराऊ काकी अब मैं
द्वारका के राज बव में जाता हूं वहां सब
लोगों को पहचान लू और उसके बाद सुरेखा को
ले आऊ मैं भी चलता हूं भैया अरे तुम बचपन
से वहां रहे हो वहां लोग तुम्हें पहचान
जाएंगे और सारा खेल बिगड़ जाएगा किंतु
सावधान भैया कृष्ण मामा भी बड़े जादूगर है
अरे कृष्ण मामा तो मुरली बजाते रह जाएंगे
और मैं अपना काम करके आ
जाऊंगा स्वागत कराए स का शिष्टाचार तो
करना ही पड़ता है आपको जो करना है व कीजिए
पर सुरेखा का विवाह दुर्योधन के बेटे
लक्ष्मण से नहीं होगा अरे अरे ये क्या कह
रहे हो देवी कन्यादान तो हमको ही करना है
हमको नहीं
आपको तो असहयोग आंदोलन करने की ठनी
है अब समझ में आ गया कि सत्य भामा जामवंती
आदि मुह फुला क्यों बैठी है आ में से एक
भी आपके साथ पर नहीं बैठ कन्यादान के लिए
कोई नवी ब ला परतु मैंने तो कन्यादान करने
का भैया को वचन दिया है देवी व मिथ्या ना
हो और मैंने सुरेखा को अभिमान से विवाह
कराने का वचन दिया है व भी मिथ्या
हो सच तो यह है देवी कि भावी मिथ्या नहीं
होती
[संगीत]
माया भी गोत कश के सामने
[संगीत]
माया कृष्ण मामा मुरली बजाते रह जाएंगे और
मैं अपना काम करके आ जाऊंगा अब जाओ करो
अपना काम कृष्ण मामा
मुझे अपनी माया का घमंड हो गया था
[संगीत]
मामा अब मुझे क्षमा कर
[संगीत]
दीजिए मेरा आशीर्वाद है
घटोक जिस कार्य के लिए तुम आए हो उसमें
मेरी भी सहायता मिलती
रहेगी सुरेखा का कक्ष इधर
नहीं उधर है
[संगीत]
के मनने पुकारा किसी और को और बारात लेक
टपक पड़ा कोई
और दुल्हन को तो देख
लिया अब चलू दुल्हा कौरव कुमार लक्ष्मण को
भी देख लो
[संगीत]
सिता
जी अरे बाप रे चाचा जी अरे बाबा
जी अरे बाप अरे बाप रे बाप रे चाचा
जी बा
अ
[संगीत]
ब अजीत पदत ण महाशय जी पग में नहीं रहना
चाहते तो हथेली प आ जाइए
[संगीत]
प्राण
प्यारे ओ प्राण
प्यारे प्राण
प्यारी देखो ना यहां सब के सब मुझे छेड़ते
[संगीत]
हैं ऐसा बोलिएगा
मत क्यों लोग समझेंगे दुल्हा जी बुद्धू है
स
[संगीत]
लड्डू मैं आपके लिए लड्डू लाई हूं ये
लड्डू मेरे लिए है सब के
सब मैं खाऊं खाइए
ना मेरा दा ससुराल के लड्डू है ना आपके
दांतों से प्यार हो गया होगा
आ अरे चिड़ने से कहीं मन का दूल्हा मिल
जाए तो कहो आज से हम भी ना खुला कर बैठ
जाए तुम सब चली जाओ अरे अरे अरे
अरे तुम कौन हो
नक नधा नधा अभिमन्यु की प्रियतमा
सुरेखा सुरेखा
नक हा
सुरेखा सुरेखा तो मैं
हूं धना धना तुम भी सुरेखा मैं भी सुरेखा
तान तान ता धा धा सच है कौन कौन है धोखा
धोखा तुम हो तुम कोई थग नहीं हो ध धा तिता
तत तत थई थई तत थई थई तत छनन छम छनन छम
छननन छम सच हो तो प्रीतम को अपने अभी यहां
दिखला सकती
हो नहीं तथ थ त थई थई त त दिग दिग थई दिग
थई दिग दिग थई मैं अपने प्रीतम प्यारे को
चाहो तो दिखला सकती
हूं दि
त त ता आ
ता
आ
स्वामी
स्वामी डरो मत सुरेखा मैं महाबली भीम सेन
का बेटा और तुम्हारे अमन का बड़ा भाई गोत
विश्वास करो अब मनू के कहने पर मैं
तुम्हें यहां से ले जाने के लिए आया आओ इस
आसन पर बैठ
जाओ द्वारका की गुफा में बेचारा मनू हमारी
बाट देख रहा
हो
भैया स्वामी सुरेखा
स्वामी और अब मैं तुम्हारे विवाह का सामान
जुटाने के लिए माया बाजार लगाने जा रहा
हूं फिर नकली माल उधर बारातियों के पास और
उनका असली माल अपने पास तब तो भैया मैं भी
तुम्हारा साथ दूंगा तुम अपनी माया से मुझे
भी बदल देना
अच्छा आइए कहिए आपकी क्या सेवा
करें अब
[संगीत]
नारायण नारायण इस विवाह का रंग ही अनोखा
है सम आप विशाल बारात लेकर आए और आपके
वैभव और गौरव की बातें सुनकर दूर दूर से
आए हुए सौदागरों ने द्वारकापुरी के बाहर
मेला लगा दिया मेला तब तो हाथी घोड़े बैर
भैंस गधे सभी बिकने आए होंगे किंतु मैं तो
गधा लूंगा गजट चुप रहो हो गया जी सम्राट
नगर में चर्चा है कि सौदागरों के सामानों
का मूल्य चुकाने वाला यादवों में कोई भी
नहीं नारद जी
यादव हमारे संबंधी हुए उनकी प्रतिष्ठा
हमारी प्रतिष्ठा है सौदागर के सामान का जो
भी मूल्य होगा वो हम चुकाएंगे हम उनकी हार
देखने अवश्य चलेंगे नारायण नारायण
[संगीत]
काका जी ऐसी गदा मुझे ले दीजिए ना इससे
मैं आ
तोडूंगा
मूर्ख चल
बेटा ये
लीजिए अरे तेरा सतिया ना जाए तू जोरी है
या मैं गले का हार मांगती हूं तू पांव की
चीज बताता है हे मेरे साथ हंसी मत करना
हां वरना सर तोड़ दूंगी जानते हो मैं कौन
हूं गौरव रानी लवंगी अरे धीरे बोलो अ
सुनने वाले क्या सोचेंगे कौरव रानिया ऐसी
उट होती है क्षमा कर
दीजिए आप ये लीजिए हा आप सुंदर जियो जियो
जरी जियो देखो अच्छा इन सब के मूल्य क्या
है कुछ नहीं महारानी हमारी दुकान में अदला
बदली का नियम है आप अपने अलंकारों से बदल
लीजिए
अच्छा क्यों समधन हां हां सौदा तो अच्छा
है और क्या ये अलंकार पहनेगी तो द्वारका
तो याद आएगी ही अच्छा सुनिए मैंने सब ले
लिए मैंने भी ले
लिए मैंने ली मैंने बिल्ली
कोई नहीं है चलो बा चले मम ला
मम
मम जानता
नहीं हम हसनापुर के
राजकुमार दरका के होने वाले जवाई है और
ससुराल में देते नहीं लेते हैं अगर हम
चाहे तेरी दुकान की दुकान दहज में ले सकते
हैं कहने दे ससुर जी से हां चलो जान जान
क्या बात है ये लीजिए दाम मानता
[संगीत]
है एक तो मेरी ससुराल में हाठ लगाता है
ऊपर से हम पर जादू करता है तेरे हाथ की ता
उ देंगे तेरी खाट उ देंगे हा कहने दो ससुर
जी से
कने ससुर जी मेरे नहीं है
[संगीत]
होय अरे कर लो बाल मा प्यार मौसम बढ़िया
है अरे कर लो बाल मा प्यार मौसम बढ़िया
है हर बार बार ना आए जवानी चिड़िया
है अरे बार बार ना आए जवानी चिड़िया है
[संगीत]
चंपा महका फिली चमेली पिया बनो मत
जोगी चपा मेह का फिली चमेली पिया बनो मत
जोगी ऐसे में मत रूठो राजा जी बड़ी बद
बदनामी होगी हमारी बड़ी बदनामी होगी पिया
जी जरा हाथ थाम लो हमारे संग घूम खाम
लो अरे दगा बाज ये उम्र बड़ी
[संगीत]
गड़बड़ियां बाज ये उम्र बड़ी
गड़बड़ियां बार ना आए जवानी चिड़िया है
अरे बार बार ला आए जवानी चिड़िया है
[संगीत]
पतली रे पतली चुंदड़ी पहन के चांद के
टुकड़े
आए पतली रे पतली चुंदड़ी पहन के चान के
टुकड़े
आए प्रेमनगर में देखो साधना चिकने मुखड़े
आए साजना चिकने मुखड़े आए ल चकती ये बाहे
देख
रस लिए निगाह देख
लो अरे खोलो ये काहे मन की बंध की वड़िया
है अरे खोलो ये काहे मन की बंध की वड़िया
है हर बार बार ना आए जवानी चिड़िया
है हरे बार बार लाए जवानी चिड़िया है
[संगीत]
अरे हाय अरे हाय हाय अरे हाय हाय हाय हाय
हाय
मैंने एक पहेली बझी हां एक पहेली बझी अरे
वह अरे वाह वाह अरे वाह वाह वाह वा वा वाह
मुझे बड़ी दूर की
सूझी वाह अरे वाह अरे वाह वाह मुझे बड़ी
दूर की सूझी वो क्या रहेगी नहीं चटक मटक
ये रहेगी नहीं तड़क भड़क ये हां रहेगी
नहीं चटक मटक ये रहेगी नहीं तड़क भड़क
ये ये आज नवेली नार कल की बुढ़िया है य ये
आज नबली नार कल की बुढ़िया है हां बुढ़िया
है हां बुढ़िया
है बारबार ना आए जवानी चिड़िया
अरे बार बार लाए जवानी चिड़िया
है करलो बाल मा प्यार मौसम बढ़िया
है बार बार ना आए जवानी चिड़िया
है अरे बार बार ना आए जवानी चिड़िया
है भानुमती जी इन नया अलंकारों में तो आप
ऐसी शोभती है कि हस्तिनापुर के लोग देखकर
दांतो तले उंगली दबा लेंगे सहज में थोड़ी
मिले समदिन ढूंढते ढूंढते दांतों को पसीना
आ गया था हां अरे जी वो जोरी और फिर असली
नकली की परक सबको कहां होती है
बहन और क्या जोहरी की कसौटी एक बार धोखा
खा सकती है पर हमारी समरा कीी की आंखें
कभी धोखा नहीं खाती अरे समदिन हम भी
हस्तिनापुर की रहने वाली हैं हमारी आंखों
में कोई क्या धूल झोके उससे पहले हम उसकी
नाक ना काट लेंगे हां जी आवा
जारही समधिन बहू को तो बुलवा लो मधुमती जी
जा सुरेखा को बुलाला अभ जा जा जल्दी जा
भानुमती जी हमारी सुरेखा जितनी तन से
सुकुमार है उतनी मन से भी कोमल है प्यार
से रखिएगा इसकी चिंता मत करो समधिन हम सब
भी तो ससुराल में ही आके तगड़ी हुई है
हमारी ये आया बनी रही तो हम बह को कभी गो
से नहीं उतरने देंगे हां
सुरेखा यहां है और वहां राज भवन में विवाह
की तैयारी हो रही है कुछ गड़बड़ भी ना मचे
और विवाह का आनंद भी आ जाए इसलिए मैं वहां
जाता
हूं कहा की तैयारी है कन्यादान की मेरे
बिना ही तुम्हारी जगह सुपारी रख लूंगा अभी
तो बा द्वारे भी नहीं लगी तुम नहीं जानती
देवी दूल्हा आ गया दुल्हन उसके पास चली गई
और पुरोहित नार जीी भी पहुंच गए नारद जी
हां हां द्वारिका की गुफा में सुरेखा और
अभिमन्यु का ब्याह हो रहा है बवी ब्याह
वाह प्रभु और भैया को आपने वचन दिया है सो
मैंने वचन कन्यादान का दिया है सो पालन
करने जा रहा हूं मैंने यह थोड़ी कहा है कि
लक्ष्मण को सुरेखा का कन्यादान दूंगा अब
मैं यहां पल भर भी ठहर नहीं सकता देवी
वहां सभी लोग मेरी बात देखते होंगे आ होता
आओ मुहूर्त बीत रहा है मैं तो आपके आगे
च महारानी जी मैं सारा भवन की सुरेखा का
कहीं पता
नहीं पता
[संगीत]
नहीं वो रही सुरेखा तो आओ बेटी कहां थी
जी उद्यान में
आ बेटी अपनी सासू जी के पांव पढ़ो हां हां
बहू अच्छे-अच्छे लक्षण सीख लो लो पांव
पढ़ो अच्छा अच्छा पहले बड़ी सासू जी के छू
उसके बाद छोटि यों के बहुत समझदार है सुखी
रहो मुझसे लाज कैसी बेटी अब तो मैं ही
तुम्हारी मां हूं आओ मेरी गोद में बैठो
आओ आओ सब लोग मिलकर बहू को सजा दो मामी
जीला समधन लगता है बहू को घी दूध बहुत कुछ
खिला पिला दिया है देखने में ही फूल की
छड़ी है बहू जरा नीचे बैठो तो मुझे तो आप
ही की गोद अच्छी लगती है अच्छा अच्छा फिर
बैठ लेना मैं पांव तो सीधा कर लूं उतरो ना
भली वो दल है खड़ी भर के लिए बहू गोद में
बैठी नहीं तो तुम्हारे पैर टूटने लगे आओ
बहू मेरी गोद में बैठो
आओ मेरी कमर में चमक आ गई उतरो तो बहू अरे
क्या नाच नचा रखा बहू को हस्तिनापुर का
नाम डुबो रही हो कमर में बल नहीं तो बैठा
क्यों हो बह आओ मेरी गोद में बैठो आओ बेटा
आओ
आओ बैठो जरा पेट बचा के बेटा धीरे से अरे
मैया मेरा पेट हाय
दैया मेरा हार मेरा
टीका मेरा चंदन हार मेरा
झमका अरे मेरे गहने कहां गए अरे सर्व
मांगल्य मांगल्य शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण त्र गौरी
नारायनी
[संगीत]
नमोस्तुते अरे बाप रे
क्या हु क्या हुआ जीवन घबराता है मां अरे
बेटा पहले पहले जब हाथ मिलते हैं तो ऐसे
ही होता है और फिर कलेजे में धड़ाधड़
धड़ाधड़ धड़ाधड़ धड़ का होता है मुझे
अच्छी तरह याद है वो दिन जाओ जाओ जाओ जाओ
जाओ जाओ बैठो
[संगीत]
बुड्डी बहू बुड्ढी नहीं तू अंधा है आया है
बाप दादा की नाप कटाने के लिए चल बैठ जा
जा बेटे बैठ जा बैठ
[संगीत]
जाै मा जी
अरे कुछ बोलेगा भी के आ कर
बंदरी तुझ जैसे गधे को सुंदरी भी बंदरी
दिखाई देगी चल चुपचाप जाके बैठ जा नहीं तो
कोरा वंश का बीज भी नहीं रहेगा आप भी चलिए
ना अरे गे प्यार तुझे करना है कि मुझे चल
जा ब
[संगीत]
[संगीत]
मुझे ब नहीं करना है पर मुझे तो ब्या करना
है पति देव जी हाथ पकड़ा है तो भाग कर
जाएंगे
[हंसी]
[संगीत]
कहा मैं भीम सेन का
[संगीत]
बेटा कर सुन ले सुरेखा का विवाह मनू से
गुफ में
होका और आज दलान को लेकर वहा से जा रहा हं
जिसम साहस हो वो आए
मावी और काकी जानती है कन्यादान किसने
दिया कृष्ण मामा ने कृष्ण भैया तो हम
पांडवों के आधार है बेटा
किंतु दुर्योधन इसका बैर लिए बिना चुप
नहीं बैठेगा बनवास के बाद वो नि ही युद्ध
ठने का युद्ध होगा घन खोर युद्ध होगा और
ये युद्ध भारी पड़ेगा भगवन क्योंकि बलराम
जी ने दुर्योधन को गदा युद्ध में अजय बना
दिया है नारायण नारायण आप चाहे जितना आकाश
में छेद करें देवर्षी परंतु हम दोनों
भाइयों में कभी आप फूट नहीं डाल
सकते इसमें फूट डालने की कौन सी बात है
प्रभु मैं तो वही कह रहा हूं जो बलराम जी
चाहते हैं भैया ये चाहते हैं कि अजय होने
के अभिमान में दुर्योधन के पाप का घड़ा
शीघ्र भर जाए व युद्ध के लिए उन्मत हो उठे
और फर पृथ्वी का भार हल्का हो जाए नारायण
नारायण प्रभु आपकी लीला तो मैं कुछ कुछ
जानता हूं किंतु सीधे साधे हलदर जी भी
खाने के दांत और और दिखाने के दांत और
रखते हैं ये नहीं जानता
देवर्षी भैया संसार के सामने ये उदाहरण
रखना चाहते हैं कि जहां चार बर्तन होते
हैं खड़क ही है परंतु भाई भाई ऐसे रहे कि
जैसे बलराम कृष्ण धेय एक निष्ठा एक संकल्प
एक इसी एकता से तो आप दोनों भाइयों ने
चुनचुन कर पापियों का संघार किया फिर भी
प्रभु एक बच गया है वो हजार हाथ
वाला आप कहां किसी को बचने देना चाहते
देवर्ष परंतु बलि पुत्र बाणासुर पापी नहीं
व तो भगवान शंकर का परम भक्त है शिव भक्ति
का विरोध मैं कहां कर रहा हूं प्रभु किंतु
वामन अवतार में आपने उसके बाप को पाताल
में पहुंचा दिया उसी का बदला लेने के
विचार से वह विष्णु भक्तों का कट्टर शत्रु
बन गया पृथ्वी से विष्णु का नाम ही मिटा
देना चाहता
देवर्षि भगवान शंकर और विष्णु तो एक ही है
किंतु प्रभु बाणासुर तो यह प्रचार कर रहा
है कि विष्णु और शंकर भगवान एक दूसरे के
शत्रु मुझे तो डर है कि उसके इस प्रचार से
भक्तों के साथ-साथ आप दोनों प्रभु में
टक्कर ना हो जाए आप चिंता ना कीजिए
देवर्षी समय स्वयं उसे समझा देगा कि भगवान
शंकर और विष्णु एक है आप कुछ भी समझिए
प्रभु किंतु बाणासुर का गर्भ खंडन नहीं
किया गया तो परिणाम भयंकर दिखाई देता
नारायण
[संगीत]
नारायण करपूर
[संगीत]
गौरम
करुणावतारं
संसार सारम
भुजगेंद्र
हारम
सदा
वसंतम
हृदयार
विंदे भव
[संगीत]
भवानी
हितम नमामि
ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय
ओम नमः
[संगीत]
शिवाय बम बम बम बम साम सदाशिव बम बम बम
बम बम बम बम बम सां सदा शिव से लो लगन
लगाए इस धरती पर प्रभु भक्तों को आज कभी
ना ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय ओम नमः शिवाय
[संगीत]
उड़ता जाता है काल का उड़न खटोला भर लो रे
भाई भर लो रे भाई प्रभु भजन से
झोला प्रभु भजन से झोला
ये जन्म बड़ा है
[संगीत]
सलोना माटी को बना लो
सोना हाथों में आया हुआ समय बेकार निकल ना
जाए ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय ओम नम
[संगीत]
शिवाय चरणों में प्रभू के डाल दो लोगों
डेरा लख चौरासी
का लख चौरासी का बड़ा विकट है
फेरा बड़ा विकट है
फेरा भगवान को सौप दो
नैया वो होंगे स्वयं कि वैया
[संगीत]
इस भव सागर से रने का है केवल यही
उपाय ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय बम बम बम बम साम सदा शिव से लो लगन
लगाए इस धरती पर प्रभु भक्तों को आज कभी
ना ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय ओम नमः
शिवाय ओ नम
[संगीत]
शिवाय नारायण
नारायण आइए मुनिवर
पधारिए यहां महाराज बाणासुर को भगवान शंकर
की स्तुति करते देख रहा और वहा विष्णु लोक
में आपका गर्व खंडन करने की चर्चा चल रही
हमारा गर्व
खंडन
मुनिराज विष्णु लोक में जाकर
कहिए वासुर के गर्भ खंडन के स्वपन देखने
से पहले
वे भगवान शंकर के त्रिशूल
से स्वयं विष्णु के चक्र सुदर्शन की रक्षा
की चिंता करें यह आप क्या बोल रहे हैं
महाराज बाणासुर मुनिराज
य हम नहीं बोल रहे हमारे पिता श्री को
पाताल में ध देने वाले विष्णु के विरुद्ध
हमारा प्रतिशोध बोल रहा
है हमारे इस
देव भगवान शंकर का दिया हुआ हमारी सहस्त्र
बुझाओ का बल बोल रहा है और बोल रहा है
हमारी रक्षा हेतु दिया हुआ स्वयं महादेव
जी का वचन
नहीं होता महाराज बाणासुर जिन महादेव जी
ने आपको सहस्त्र बाहु बना दिया उन्हीं से
आप युद्ध ठनने पहुंच गए फिर भी वे आपकी
रक्षा का वचन दे दे यह आश्चर्य नहीं तो
क्या मुनिराज पहले शिवलोक में जाइए भगवान
शंकर स्वयं आपका आश्चर्य मिटा देंगे जाना
ही होगा ना
ना शंकर हर हर
हर हर
शंकर
नारायण
नारायण देव पधार भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं
तो भला बुरा पात्र कु पात्र कुछ देखते
सोचते ही नहीं देवसी आज य उलाहना किसके
बारे में लाए हैं आपके अभिमानी भक्त
बाणासुर के बारे में भगवन आपने उसे उसकी
रक्षा का वचन क्या दे दिया वानर के गले
में रुद्राक्ष की माला पड़ गई बाणासुर
आपको
अस्त्र मान रहा है और भगवान विष्णु का
संघार कराना चाहता है भगवान विष्णु का
संघार हां महादेवी और वो भी महादेव जी के
आज
देवर्ष भगवान विष्णु का और मेरा लक्ष्य एक
है हम एक ही है दो नहीं यह तो हम समझते
हैं भगवन किंतु आप दोनों दो है और एक
दूसरे के कट्टर शत्रु है यह प्रमाणित करने
के लिए बाणासुर ने तो अपनी कन्या को कारण
भी बना लिया अपनी कन्या को वाह महादेवी
भोलेनाथ तो भुल है ही किंतु आप भी बाणासुर
को दी हुई अपनी मानस पुत्री कुमारी उषा को
भूल गई बाणासुर ने अपने गर्भ खंडन के डर
से कुमारी उषा को दुर्ग में बंद कर रखा
दादाजी दादाजी क्या है दूत समाचार लाया है
कि हस्तिनापुर में श्याम काका ने दुधन के
पुत्री लक्ष्मण का स्वयं से हरण किया है
इसलिए दोनों को दुधन ने बंदी बना लिया है
भैया
कन्हैया भैया दुर्योधन को आपने जो गदा
युद्ध में प्रवीण किया उसका परिणाम क्या
हुआ आप जानते हैं क्या हुआ कौर ने हमारे
शाम को ही बंदी बना लिया है भया उसे मुक्त
करने के लिए हमें युद्ध करना होगा तुम
शांत रहो मैं अकेले हस्तिनापुर जाकर मम को
ले आता हूं केवल साम को ही नहीं साथ में
लक्ष्मणा को भी हा हा तो लक्षमी को ले
आऊगा
रक्षा कीजिए कीजिए श्री बलराम जी हमारी
रक्षा कीजिए रक्षा कीजिए यदु कुल भूषण
श्री बलराम जी हमारी रक्षा कीजिए राक्षस य
अधम राक्षस बलवल बारबार हमारे य को भ्रष्ट
कर डालता है पति से हमारी रक्षा कीजिए
बलराम जी रक्षा कीजिए
पधार पधारिए हमारी रक्षा
कीजिए ये रहा पलवल
मार तुम इन ऋषि मुनियों को बचाने आए हो
क्या बल बल को नहीं जानते मैं अधर्म हों
का नाश करना जानता
हूं या
[संगीत]
[संगीत]
बना
[संगीत]
पड़ेगी बम बनेगी
[संगीत]
म
[संगीत]
बए र
करिए बताइए
[संगीत]
नहीं
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
महात्मा जी मरे हुए पर हाथ उठाना धर्म
नहीं
हैता श्री बलराम जी की
जय ज हो श्री बलराम जी हस्तिनापुर में
पधारे हैं गुरुदेव हस्तिनापुर में कहां है
नगर के बाहर तंबू डालकर विश्राम कर रहे
हैं नगर के
बाहर समझ लो भांजे दाल में कुछ काला है हो
सकता है शाम को छुड़ाने के लिए बलराम जी
क्रोध में आए हो और यादव सेना भी लाकर
छुपाए हुए हो नहीं नहीं गुरुदेव कपटी नहीं
बहुत सीधे हैं चले उनका स्वागत करें चलते
तो
है पर चलने से पहले यह समझ लो भांजे
कि जहां तक गदा युद्ध सिखाने का प्रश्न है
वहां तो बलराम जी तुम्हारे गुरु हैं किंतु
जहां साम का प्रश्न है वहां वे केवल यादव
है और यादव में जो बहुत सीधे होते हैं वे
भी पालकी के बास होते हैं
गुरुदेव राज प्रसाद में पधार कर हमें पावन
कीजिए क से मुझे इतना कहना
है कि मेरे स्वागत के बदले वे मम और
लक्ष्मणा को मेरे साथ विदा कर दे शम के
साथ लक्ष्मण को भी बलराम जी यह विनती है
या चुनौती भाषा और भाव से तो इसे चुनौती
ही समझना चाहिए तो साम हमारा अपराधी है
उसे दंड दिए बिना नहीं छोड़ेंगे और
लक्ष्मणा द्वारका के चौकट पर पैर धरे ऐसा
तो स्वप में भी नहीं हो सकता दुधन स्वप्न
में ना होने वाली बात को भी साक्षात करने
की शक्ति बलराम में है और जरास के डर से
मथुरा छोड़कर भागे हुए बलराम की इस धमकी
का उत्तर देने की शक्ति सहस कोरव में भी
है चलो भांजे
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
स्वामी आप बलराम जी को जाकर मनाइए नहीं तो
हस्ती पुर को यमुना में डूबा ही समझिए नाथ
मम और लक्ष्मणा को ले जाकर उन्हें सौप
दीजिए
नाथ नारायण
नारायण बधाई देने आया हूं महादेव जी हलदर
जी ने हल से हस्तिनापुर को हिला
दिया इसमें बधाई देने की कौन सी बात है
देवर्ष वे मन पर रख ले तो पल भर में पूरी
वसुंधरा को हिला दे दादी जी दादी जी बलराम
दादाजी और श्याम काका के रथ आते दिखाई दे
रहे हैं तुझे अपनी काकी का मुंह देखने की
बड़ी इच्छा थी ना महादेवी अनिरुद्ध जी
काकी दादी का मुह देखते रहेंगे या किसी और
का भी देखेंगे यादवों में एक यही तो
कुवारे रह गए दादी जी मैं कृष्ण दादा जी
को समाचार देता
हूं नारद जी इस कामदेव के पुत्र अनिरुद्ध
का रूप देखते हुए मुझे तो डर बना रहता है
कि कहीं कोई देवांगना इसका हरण करके यदु
कुल में उल्टी गंगा ना ब
दे किंतु पृथ्वी पर भी देवांगना से बढ़कर
कन्याए है महादेवी
[संगीत]
[संगीत]
महादेवी महादेवी अनिरुद्ध जी का कहीं पता
नहीं है शन कक्ष में उनका पलंग भी नहीं है
क्या कहा अनि नहीं और पल भी
नहीं
ना सुना आपने शाम को आप छुड़ा ले आए तो
अनिरुद्ध का पलंग समेत कोई हरण कर ले गया
अनिरुद्ध का
हरण चिंता मत करो देवी यदुकुल के वंशज का
हरण करना सहज हो सकता है किंतु उसे छुपाकर
रोक रखना कठिन है महाराज बाणासुर की जय हो
दया निधान राजकुमारी उषा के महल में कोई
पुरुष प्रवेश कर चुका है
पुरुष असंभव मैंने अपने कानों से भनक सुनी
है अन दाता हम अपनी आंखों से
देखेंगे आओ हमारे
साथ आकाश पाताल एक कर दिया गया किंतु
अनिरुद्ध जी का कहीं पता नहीं चला प्रभु
नारायण नारायण पता कैसे चलेगा नारायण की
इच्छा बिना भला कुछ हो सकता है लीजिए
त्रिभुवन के समाचार केंद्र आ गए भैया इनसे
पूछे मुझसे क्या पूछना है प्रभु और आपके
होते हुए मैं कैदी कैसे सतां अनिरुद्ध जी
को बाणासुर ने बंदी बना रखा है
बासर कुछ बोलिए ना प्रभु आप अपने भक्त
राजा बली के पुत्र को मारना ना चाहते हो
तो ना सही किंतु द्वारिका में अपने पौत्र
और पौत्र वधु के स्वागत के लिए तो कुछ
कीजिए नारद जी बात क्या है स्पष्ट कहिए
भाभी जी यह भक्त और यह भगवान दोनों ही
हमें चक्कर में डाल र है चक्कर में तो
स्वयं चक्रधारी पड़ गए हैं देवी देव
कन्याओ का हरण करना तो यादव कुल की रीत है
किंतु यादव कुमार अनिरुद्ध का हरण करके
बाणासुर की कन्या उष ले गई य नई और उल्टी
रीत चल पड़ी सेना तैयार करवाओ सा जी
द्वारकाधीश का अपमान करने वाले को दंद दिए
बिना मैं नहीं रहूंगा किंतु भैया यह मेरी
आज्ञा है उस हजार हाथ वाले बासर को हलधर
का एक ही हल और कन्हैया का एक ही चक्र ध
चता देगा जो आजा
भैया नारद जी पधारे और कुछ गड़बड़ ना हो
ऐसा कभी हो सकता
है युद्ध की चुनौती बासर को युद्ध की
चनौती सहस बाहू को युद्ध की
चनौती आज बलराम और कृष्ण को पता
लगेगा बावर से टक्कर लेना स्वयं भगवान
शंकर से टक्कर लेना हर हर
शंकर शंकर
[संगीत]
जयरा ज जय
[संगीत]
[संगीत]
ये सब क्या होने जा रहा है संग्राम होने
जा रहा है बलराम श्री कृष्ण ने मेरे भक्त
बाणासुर को ललकारा है भगवान से भगवान का
संग्राम
[संगीत]
हा देवराज इ कहां चले नाथ बलराम और शंकर
जी का युद्ध देख नाथ ये ये क्या होने जा
रहा है कृष्ण और शंकर जी का युद्ध होने जा
रहा है पर्वतों है
त्राहि त्राहि
बोलो पर्वतो त्राहि त्राहि बोलो धरातल
आंखें अब खोलो संग्राम आज दो भगवानों का
है होने वाला संग्राम आज दो भगवानों का है
होने वाला दिशाओ है घटाओ है समुद्रों
हे
डोलो पर्वतों है
[संगीत]
एक और चक्रधारी है कृष्ण
मुरारी दूसरी ओर है शंकर प्रलयंकारी
एक और चक्रधारी है कृष्ण
मुरारी दूसरी ओर है शंकर प्रलयंकारी
मुठ भेड़ भयंकर होगी आज दोनों
में मुठ भेड़ भयंकर होगी आज दोनों
में गंगाधर से जूझ आज गिरधारी आज गिरधारी
पर्वतों
है त्राहि त्राहि
बोलो पर्वतो त्राहि त्राहि बोलो धरातल
आंखें अब खोलो संग्राम आज दो भगवानों का
है होने वाला संग्राम आज दो भगवानों का है
होने वाला दिशाओ है घटाओ समुद्र
है
लो पव है
[संगीत]
आंखों में भरकर अग्नि भुटिया
ताने दो प्रभु चले भूकंप धरा पर
लाने आंखों में भरकर अग्नि बरकटिया
ताने दो प्रभु चले भूकंप धरा पर
लाने मंदिरो आज है दिग दिगंत के
चीख मंदिरो आज है दिग दिगंत के
चीख कैलाश चला दवा रिका से है टकराने आज
टकराने पर्वतो
[संगीत]
है त्राहि त्राहि
बोलो पर्वतो त्राहि त्राहि बोलो धरातल
आंखें अब खोलो संग्राम आज दो भगवानों का
है होने वाला संग्राम आज दो भगवानों का है
होने वाला दिशाओ है घटाओ है समुद्रों
है डोलो
पर्वतों
[संगीत]
[प्रशंसा]
है आ
[प्रशंसा]
[संगीत]
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
तेरे हजार हाथ कट गए अब सावधान हो जा
चिंता
नहीं बा की य बझाए अभी शे
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
ंडी बाना थू सावधान सावधान कृष्ण
[प्रशंसा]
[संगीत]
[प्रशंसा]
क्या
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
वि
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
[संगीत]
[प्रशंसा]
[संगीत]
अ
[प्रशंसा]
इस प्रलय को रोकिए ब्रह्मा जी स्वामी को
समझाइए नारायण भगवान का क्रोध शांत कीजिए
विधाता ब्रह्मांड टूट कर गिर जाएगा पृथ्वी
रसातल में भस जाएगी ब्रह्मा जी इन दोनों
वजर को टकराने से आप ही रोक सकते
[संगीत]
हैं रोकना ही है तो तुरंत रोकि वरना कहीं
त्रिशूल और चक्र टकरा गए रोकने के लिए भी
कोई नहीं बच
पाएगा शांत भगवन शांत जिस बाणासुर के कारण
आप दोनों युद्ध कर रहे हैं उसका अभिमान तो
नष्ट हो गया अबन दोनों वज्र को टकराने से
रोकिए त्रिभुवन को प्रलय से बचाइए हम सब
पर दया कीजिए देवाधिदेव
[संगीत]
बलराम जी आप दोनों भाइयों की विजई हो हम
तो इसे आप ही की विजय मानते हैं प्रभु
अखंड ज्योति शरू
परमात्मा सहस्त्र बुझाओ का बल पाकर मैं
अभिमान में अंधा हो
गया आपने मेरी वो बुझाए काट कर
मेरे ज्ञान चक्षु खोल दिए अब अपनी शरण में
ले लो प्रभु नारायण नारायण धन्य है प्रभु
की लीला देखते ही देखते बाणासुर का गर्व
खंडन भी हो गया भगवान त्रिलोचन का वचन भी
रह गया और कुमारी उषा को दया ससुर भी मिल
गए और बिना दक्षिणा पुरोहित जी भी मिल गए
धन्य हो प्रभु धन
[संगीत]
कौन अर्जुन कब आए दो एक क्षण पहले मैं भी
आया हूं श्री कृष्ण ओ सम्राट
दुर्योधन मुझे बड़ा आनंद हो रहा है आप
दोनों को एक साथ यहां आए देखकर एक साथ
नहीं पहले मैं आया हूं यह विनती करने कि
युद्ध में आप हमारी सहायता करें मैं भी
यही विनती करने आया हूं भगवन क्या आप
हमारी सहायता
करें तुम दोनों जानते हो कि मैं शांति
चाहता हूं और फिर मेरे लिए कौरव पांडव
दोनों समान है दोनों संबंधी हैं तो जो
पहले आया हो उसके पक्ष में यादव सेना सहित
आप
रहे मेरी दृष्टि पहले अर्जुन पर पड़ी है
इसलिए इनका भी अधिकार हो
गया अब यह समस्या सुलझाने का केवल एक ही
उपाय हो सकता
है और वह यह है कि एक और यादव सेना रहे और
दूसरी ओर मैं अकेला नि
शस्त्र क्योंकि इस युद्ध में शस्त्र ना
उठाने की मैंने प्रतिज्ञा की
है तो फिर हमारी ओर यादव सेना रहे और हम
श्री कृष्ण को ही पाकर संतोष कर
लेंगे चलो निर्णय हो
गया मैं बहुत प्रसन्न हो
गया कौरो पांडो में होने वाले महाभारत
युद्ध के जिस निर्णय से तुम्हें संतोष हुआ
है वो निर्णय संतोष जनक नहीं विनाशकारी है
धरती के टुकड़े के लिए मुझे तो ये युद्ध
ही र्थक लगता है
आप जानते हैं
भैया कि शांति के लिए मैंने कितना प्रयास
किया
है परंतु जहां अभिमानी और महत्वाकांक्षी
प्रवृत्तियां सीमा लाने लग जाती है वहां
युद्ध अनिवार्य हो जाता है भैया पर यह तो
सोचो यह युद्ध कौन किससे करेगा काका भतीजे
से मामा भांजे से बाप बेटे से भाई भाई से
और मित्र मित्र से इसमें पापी कम और पुण्य
आत्मा अधिक मरेंगे कन्हैया इस नर संघार
में यादव भाग नहीं ले सकते तुम भी नहीं
अर्जुन को मैंने वचन दिया है कि मैं
शस्त्र धारण नहीं करूंगा उससे विनाश लीला
में कोई अंतर नहीं पड़ सकता युद्ध भूमि
में तुम्हारा जाना ही आग में घी पड़ने के
समान
होगा शांति दूत केशव को मैं संग्राम में
नहीं देख सकता मैं तुम्हें नहीं जाने
दूंगा यह तो पांडवों के विश्वासघात होगा
भैया मेरा जाना अनिवार्य है नहीं तुम नहीं
जा सकते यह मेरी आज्ञा है परंतु मैं अपना
वचन भंग कैसे कर सकता हूं
भैया तो तुम्हें द्वारकाधीश की आज्ञा भंग
करनी होगी अपने भाई के साथ विश्वास घात
करना होगा भैया तुमने प्रतिज्ञा की है कि
मेरी इच्छा या आज्ञा के विरुद्ध कुछ नहीं
करोगे मैं इसकी साक्षी हूं नाथ किंतु उस
प्रतिज्ञा में द्वारकाधीश की आज्ञा नहीं
थी भाई का प्रेम
था मैं पूछती
हूं भाइयों का वो प्रेम उनका एक
थे एक निष्ठा एक संकल्प आज कहां है कहा
गया भत्र प्रेम का वो अनुपम उदार जो संसार
के सामने रखना चाहते थे आज भाई को भाई ऐसी
आज्ञा ही क्यों करना चाहता है जिससे वचन
भंग
हो बताइए ना बोलिए
इसलिए कि अकारण कौरव पांडव और यादवों के
लहू की नदी बहते हुए हजारों कुल वध की
मांग उड़ते हुए और लाखों होनहार बच्चों को
अनाथ होते हुए मैं नहीं देख सकता कभी नहीं
देख सकता
केशव मैं तुम्हारे वचन
में बाधक नहीं
बनूंगा मैं अब देश के कोने कोने में
पदयात्रा
करूंगा तीर्थों का जल माथे
चढ़ूंगा मैं आज
ही द्वारका छोड़कर जा रहा
नाथ मैं ही द्वारका में रहकर क्या
करूंगी आपके पल चिन्हो पर
चलकर मैं भी आप ही में विलीन हो
जाऊंगी
भा
भैया आपका पुरुष मेरा बल
था आपका स्नेह मेरा सहारा
था आपकी ममता का बंधन ही मेरे सुख का सा
राज था भैया क्या उसे आप तोड़
देंगे
भैया लक्ष्य के अंतिम चरण में आप मेरा साथ
छोड़ देंगे
भैया
कन्हैया विधि के विधान को कोई नहीं तोड़
सकता जब तक हमारा तुम्हारा संजोग था मैंने
साथ
दिया अब मेरी यही इच्छा है कि भाई की सुख
सुविधा के लिए संसार का हर एक भाई अपने
सुखों को त्याग कर एक उदाहरण
बने चलो
देवी
भैया
भैया
भैया जहां संयोग है वही भी योग है
कन्हैया दुख मत करना
[संगीत]
आपके वासुदेव को अब कौन
डांटे इसके सुख दुख
को अब कौन
समझेगा
वासुदेव रुक्मिणी सत्य भामा सत्या जावद को
धर देते रहना
[प्रशंसा]
[संगीत]
भावी बड़ी प्रबल
होती इस पर ना किसी का जोर
[संगीत]
चले
इसीलिए हो विवश
द्वारका
धीश युद्ध
की ओर
चले क्या
करते
गोविंद
महाभारत
था देश के भाग
में कूद पड़े कौरव पांडव
एक दिवस
धधकती आग
[संगीत]
में भगवान कृष्ण को अपना वचन
निभाना
पड़ा तो भिन्न दिशा में भाइयों को
जाना
पड़ा भगवान कृष्ण को अप ना वचन
निभाना
पड़ा तो भिन्न दिशा में भाइयों को
जाना
पड़ा हे बद्रीनाथ जय जय अण करो
भगवान
केदारनाथ जय
जय कल्याण करो भगवन
[संगीत]
काशी विश्वेश्वर
जय उद्धार करो
भगवन हे रामेश्वर जय जय बेड़ा पार करो
भगवन
[संगीत]
क्या हुआ रण में क्या
बतलाए लाखों दुलहन हुई
विधवा क्या हुआ रण में क्या
बतलाए लाखों दुलहन हुई
विधवा जब बेटों की चिताय जली तो
जब बेटों की ताए जली तो रोई कोटि कोटि
माताए चुपचाप प्रभु को यह भी दुख
उठाना
पड़ा दो भिन्न दिशा में भाइयों को
जाना पड़ा हे म्या वतार जय जय ओम शांति
शांति शांति हे कुर मावतार जय जय ओम शांति
शांति शांति वाराहा अवतार जय जय ओम शांति
शांति शांति नरसिंहा अवतार जय जय ओम शांति
शांति शांति हे वामना अवतार जय जय ओम
शांति शांति शांति हे प्रभु परशुराम जय जय
ओम शांति शांति शांति हे रघुकुल के राम जय
जय ओम शांति शांति
[संगीत]
शांति
उगा शति
का सूर्य धरा
पर
प्रग पुण्य
प्रकाश जगी धर्म
की ज्योति जगत
में हुआ पाप का
नाश सत्य हुआ सपना हलधर
का हुआ हर का
[संगीत]
काम जय जय जय श्री कृष्ण
जनार्दन जय जय श्री बलराम
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