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गेमी गेमी नाटातार मनोरमा
मंगराज मेरा मतलब नाम उसका है मनोरमा मंगराज इस
वाक्या इस अचली वाक्या को जो मेरे साथ घट चुका है एक
उडियानी उमरदार औरत के साथ मैंने चुदाई की थी उसके चुद
का चटनी बनाया था मैंने गुटे ओडियानी माई किनारो बिया
को गेनी थी दी बिया तारा एकदम बालवा बिया
मतलब चूत उसका एकदम ज्यांटिया चूत था बालदार चूत था इस
वाक्या को मैं एकदम अलग तरीके से आज तक की मैं सुनाना चाहता हूँ जितना भी मैंने
सुनाया है क्योंकि
आ तो
जो उडिया है उनको भी समझ में आ जाए मैं हिंदी में बोलूंगा जरूर लेकिन बीच बीच में
उडिया टज रखूंगा ही रखूंगा मनोरमा
मंगोराज मेरे
दादा जी के पुराने जमाने से बाबा आदम के जमाने से एक रिष्टेदारी एक दोस्ती चली आ
रही थी
मोहन्त मंगराज के खानदान से मोहन्त मंगराज
मेरे पापा के दोस्ते हैं क्योंकि हमारे रियल इस्टेट का बिजनेस है तो
इस तरीके से मैं गया था अगर कोई अच्छी जगा मिल जाएं पापा ने भी कहा था वहां के पापा
के दोत जो हैं महंतम अंगराज वो वहां के जमीनदार हैं बहुत सारी खेती वाडिये हुन की
और बहुत सारे जमीन हैं जिसमें खेती नहीं होती बंजर हो चुका है वहां पे कुछ काम
किया जाता अगर हमारे काम के कुछ लायक हो तो बेटा जाके देखो वहां �
जब मैं वहाँ गया था इसी चक्कर में कि मुझे ऐसे ही जगा बहुत पसंद है
और पापा ने कहा है कि कुछ जगा पसंद आए तो देख लेना इसी साप से मैं
गया था मुझे पता नहीं था कि मेरी मुलाकात महंतमंगराज ये तो अंकल के साप से होंगे
जमिनदार हैं
गाउ
वाइट से मेरी मुलाकात हो जाएगी नाम था
मनोरमा मंगोराज पचात से जादा उमर की होंगी
लेकिन दिखने में काफी खुशुरत बधर एकदम गठीला एकदम मोटा
चर्वी वाली मांग में भर भर के लाल सिंदूर लगाती थी एकदम कपाल तक
जो सप्ताए खंडे मुझे महंत मंगराज रा अवेली ताको ओडियारे
कहनती बंगला कोठा कहनती
जो साता दिन मुझे महंत मंगराज रा
कोठारे रही थीले जेते वेले भी मुझे मनरमा मंगराज को एकोटिया पाए ताको नंगला करी की
दोड़े दिये आओ ताको नचेई नचेई गेहिंची ता बारू अभ्यारे। हॉल रे,
गादुहा गरे, पाई खेना भितरे। बेड उपरे, खट़ा उपरे, से कौन कौन
खट़ा। सपो जगारे, एमिति की, ताको बगी चारे नहीं की भी, एकला।
लंगला करी की, गेहिंची।
मेरा मतलब जो साथ दिन मैं, हाँ करीब करीब साथ दिन, एक अवता के करीब वहाँ
रहा, और जब मी मैं उसे अकेला पाता था, उसे नंगा करके दोड़ा देता
था, उसे नंगी नचवाता था, हॉल, किचेन,
यानि के रसोई खर, पखाना के अंदर भी मैंने उसको चोदा है
से पाइखना घर अवितरे थुकुलु है की बसे की मुत्तु थाए परिश्रा करु थाए
ताको देखिवा पाए मोते भारी मजा लागे खाली सिये बोली नो आपनो जानी चुन दी जैती की
माई के नामानु को मुत्तिवा पाए देखिवा पाए मोते बहुत बहुत लागे
एम मेरा मतलब है
जब भी वो उक्डू बेट कर उस पखाना के अंदर पेशाब करती है मूतती है मैं उसे
देखने जरूर जाता हूँ On special demands वैसे आप सभी तो
जानते हैं कि उमरदार औरतों को मूतते हुए देखना मुझे कितना पसंद है बहुत सादा
जब मैं वहाँ पे नया नया
मने जते बड़े मुझ सते बड़ो कु नुआ नुआ जाई थिली, सते बड़ो कु मुझ सोई तो बहुत
सम्मान और भल भावर कथावरता करु थिला, लेकिन जैसे जैसे वक्त बिता,
जैसे जैसे मैंने उसको नंगी किया, और उसने मेरे नंगे डंडे को देखा,
और
अंडों
किन्तु जेमिती जेमिती समय बिती चालीला गुटे दी दिनो जाई सारीला मु ताकु जेते
बड़े नंगडी कली और सिये मत जेते बड़े लंगडा देखीला मुरो एते बड़ो लंगडा
बांडो तापरे मुरो एते बड़ो बड़ो जुलू थुबा अंडा दी ताकु
दे
से जमीदारियानी हे जाए बेदुआनी माई की ना।
जमीदारियानी पालटी जाए महा बेदुआनी माई
की ना।
तको पाई खेना भी तेरे नहीं था गंडी रे गही थे ले
मेरे कहने
का मतलब यह है कि जिस दिन मैं वहाँ से लोटा लोट रहा था उससे पहले
रात मैंने उसे पखाना में लेकर पखाना में अंदर ले
जाकर उसकी गाण में चोदा था
अब चलों तु आरंभो करीबा आपनों को मुख कहूँची डिटेल्स रे पुरा तन्न तन्न
करी पूरा घटना अब चलिए मैं शुरू करता हूँ
पूरी डिटेल में पूरी बात पूरी घटना आपके सामने रख रहा हूँ
प्रस्तुत कर रहा हूँ वाक्या सच्चा है
आपनो समझतो तो जानती मोरो गुटिये नियमो खाईबा,
सोईबा और गेहीबा आप सबी तो जानते हैं मेरा
एक ही रूल है खाना, जवना और जोधना अरे अरे हाँ
हाँ मने पड़ला मु जित्ते बड़े भी बेदवानी कु गिहे हैं से
तापाटी रू सबड़े गुटे स
मेरा मतलब मैं जब भी इस माधार चोट और आरत को चोटता हूँ इसके
मों से एक ही आवाज निकलती है एक ही शब्द और वो है
मुझे
आज भी याद है
बारिश हो रही थी जब मैं वहाँ पहुँचा, हाला कि बारिश का सिजल नहीं था।
मोहन्ता
अंकल ने मेरा स्वागत किया, उनका एक ट्राडिशन है, तो उन्होंने फूलों से स्वागत
एक फूलों की माला, अरे ये तो गेंदा फूल है।
गेंदा फूल मेरे गले में माला रूप में डाली और मेरा अंदर तक स्वागत किया साथ में
दो तेन स्टाफ थे घर के ही थे बारीश बहुत
जोरों से हो रही थी ये शाम डलने वाली थी महंता अंकल ने कहा
जाओ बिटा तुम्हारे लिए कमरा तयार है जाके वहाँ पे
चें
कमरा, अरे वापरे, मादर चोत ये तो पूरा ही, इतना
बड़ा महल है, यहां तो कोई नया आएगा, तो खो जाएगा,
खेर मुझे जो कमरा दिया गया था, मैं वहां जाके चेज किया,
तप्स नहीं, मुझे वो कमरा दिखाया, मैं बातरुम जाके तोड़ा फ्रेश हुआ,
बारिश बहुत योरों सोरों से हो रही थी मैं आया टावल चेंज करके मैं
अपने नाइट वेर पहन ही रहा था कि बाहर किसी ने दरवाजा खट खटाया
कुंडी
की आवाज सुनकर मैं बाहर गया और दरवाजा खुला बाहर खुद
महंतमंगराज थे और उनके साथ उनका एक स्टाप था, बिटा
आओ, कुछ खा पी लेते हैं, तुम इसने दूर से आए हो, सो गए थे क्या,
नहीं, नहीं, आ रहा हूँ, चलिए,
हम
खाना खाई रहे थे, दस्तर खान बड़ा अच्छा लगा था, बहुत सारे अच्छे अच्छे
पकवान थे, वेज़ भी था, नॉन वेज़ भी था, मोहन तो मंगराज के बारे में मैंने जैसा
था, वो वैसे नहीं हूँ, मतलब दिख पे ऐसे खुन खा रही, मतलब ये बड़ी बड़ी मूचें, ये
बुरे बाल, डाइ किया हुआ था, ये बड़ी, मतलब चश्मा, ये
बहुत
ब� खाना खाते खाते पूछ लिया अंकल से, अंकल आप अखेले ही हो यहां, मतलब आप और
आपके स्टाफ्ट हैं, घर में और कोई नहीं हो गया, अंकल ने मुस्कुलाते हुए था,
नहीं वेदा, आप यांकी है न, और उनकी तबियत थोड़ी नासाज है,
चर्दी हो गयी है, य
सुस्त लग रही थी, मैं गया था अभी उनके कमरे में, मैंने कहा भी कि
तुम आये हो, लड़का आया है, मिल तो लो, वो बहुत ही सुस्त थी,
अभी तो पता नहीं रजाई ओड़ के सोवी गई होंगी,
तुम खाओ, तुम खाओ, जी, जी, और को नहीं
रहता, मेरा मतलब इतन
आप दोनों ही मतलब मैं कुछ समझा नहीं। मंगराज
अंकल ने लंबी सांस लेते हुए कहा, क्या बताओ
बेटा, तुम्हारे ही उमर के मेरे सारे बेटे हैं, बेटिया हैं, साथ बच्चे हैं
मेरे, लेकिन सब बाहर रहते हैं, कोई इसे हिंदुस्तान में रहता है, तो कोई
�
यही बिजनेस के चक्कर में कोई नौकरी के चक्कर में यहां तो हम
दो बुढ़े बुढ़ी अकेले ही रह रहे हैं साथ में
यह सारे स्टैप्स पुष्टेनी जमाने से हमारे बाब दादा के जमाने से चली आ
रही है तो यह सब भी वही काम करते हैं माली वगेरा हैं खाना बना
लोग हैं जाडू पोचा कटका लगाने के लिए और हवेली की रखवाली करने के
लिए। ये सब आप दादा से वारसे में मिलिये हमें। तुम खाओ न बेटा खाओ।
अगर बात शुरू की तो ये सारी दुखवरी कहानिया खतम नहीं होगी।
अब तुम को ही देख लो। त�
सारी जिम्मेदारिया संभाल रहे हो। अब देखो ना तुम यहां आये भी हो तो अपने पिता के
काम के लिए ही। घूमने फिरने तोड़ी आये हो। लेकिन जब तक आये हो
जगा भी देख लेना और हर जगा घूम भी लेना। वैसे तुम्हारे पिता कहे
रहे थे कि
तुम्ह
हाँ अंकर बिल्कुल मुझे ऐसी जगा बहुत पसंद है शेहरों में ऐसी जगा मिलती नहीं है ना
बच्चपन में मैं जब गाउं में था तो तब ये मुझे अच्छा लगता था इसलिए काम के बीच
में मैं कभी कभी आही जाता हूँ ऐसी जगाओं पे हाँ
खाना खा ही रहे
कोलिडर में से एक औरत आती हुई मुझे दिखाई दिया, शाम ढल रही थी, एक
सफेद साडी में, अंदर उसने कुछ नहीं पहना था, कोई ब्लाउज भी नहीं पहना था,
बाल एकदम बिक्रे हुए थे, मांग में लाल सिंदूर भर भर
के, कहीं यही तो मनोरमा मंगराज नह
मैं जो निवाला ले रहा था, वो मेरे हातों में रहे गया, आधा निवाला मूँ में रहे गया,
मेरी पलके नहीं जपक रही थी, मनोरमा मंगराज को देखी की,
मोर अधाब हातों मुठा हाते रहे, अधाब हातों मुठा मुहरे रही गला, मो मुहर सेमिती
खोला कुखोला,
आ�
कही की न थे धड़ा साड़ी थे थे भी तेरे ब्लाउज बोली किची भी किची पिंडी न थे न
क्लियर देखा जाओ थे ला ट्रांसपरेंट थे ला न वो सफेद साड़ी ट्रांसपरेंट थे न
कटन वाली सुता साड़ी थे ला पूरा ट्रांसपरेंट
मैं इतना सोच ह
मुहित की भाबुची सियाम पखरे से की ठिया है गला एकदम, अरे ठाओ ठाओ खाओ खाओ,
बोसी ठाओ, बोसी ठाओ, अरे रहने दो, रहने दो बेटा, बेटे रो, बेटे रो, खाओ ना
खाओ, ये जुबान से उसकी पहली बार निकली थी,
दरसल उसको देखके मैं
खड़ा ताको
देखी की मू ठिया ही न थिली मोरो बांडो ठिया ही जाई थिला लंगला
बांडो मार्केट रे गौरम गाई को देखी की जेमिती
संधर और ठाती फुली जाए बांडो ठिया ही जाए ठीक सेमिती
बीच बाजार में एक गरम गाई को देखकर जैसे
सान का छाती चोड़ा हो जाता है, लंड खड़ा हो जाता है, एकदम
मेरा वही हालत था, अंटी आकर डाइनिंग टेबल पर बेट गई,
अंकल ने इशारे में अंटी से कहा, मुझे सब समझ में आ रहा था,
उन्होंने इशारे में कहे ही दिया उनसे, कपड़े कम, अंदर कुछ
नहीं अंटी
ने अंसुनी कर दी उनकी बात, जैसे उन्होंने उनको एक्स्प्रेशन से ही
नेगलेट कर दिया हो, आंटी आची की डाइनिंग टेबुल रे बस पड़ ले,
इशारारे ही सही, लेकिन कही ले, अंकल आंटी को
इशारारे कही ले, खाली शाड़ी टा कौन पिनी के आज �
बिलाटा ठिया आईची, तमारा तमारा कांड अज्ञान होली किसी नहीं। मैं ये पटो को
देखिली, आंटी तांको हे अज्ञान कलाभडिया एक्स्प्रेशन देखी चुपचा बसे पड़ले।
से जाहो एथिरे फाइदा तो मोर, मो तो देखी पाड़ी
बिना, से बड़ा �
वो जो भी हो, इसमें फाइदा तो मेरा ही है ना, वो बड़े बड़े थन अंदर से दिख रहे थे,
हिल रहे थे, टंगे हुए, सिर्फ हिल रहे थे। मुझे
मिसाल ही नहीं मिला, क्या कहूं, कठल, पके हुए कठल, या
बड़े बड़े टंगे हुए, दशेरी आम, या प, क्य
ये सब सोचकर ही मैं एक के बाद एक निवाला ले रहा था और उनको देखी रहा था कौन
कोई भी पाचिला बड़ा बड़ा पणस एक्जम्पल उधारन कौन देबी मिसाल कौन
देबी दसहरी आमब पाचिला वाला बाई कौन पले ही आमब ना कौन
कोई भी आपना मने किची उ
मुखाली देखुछी भाता मुठा कु मुखाली देखुछी भाता मुखाली देखुछी
भाता मुखाली
देखुछी
चावली क्यों खा रहे हो, मटन तो लो, ये लो मैं देती हूँ,
ऐसा कहे कर उन्होंने मटन मेरे थाली पे डाल दिये, सर्व कर दिया, दो लेक्टिस दिये थे
उन्होंने मुझे, खाना खाने के
बाद उस रात उस शाम मुझे किसी पल के नहीं,
मैं बिस्तर में इधर से उधर और उधर से इधर हो रहा था, हाथ पेर मार रहा था, कुछ
देखा ना हो, लेकिन मनोरमा मासी के उस दो टंगे हुए थानों को मैंने देखा है,
ओई, ओई, ए, से दिनों राती रे तो सुन्दिया बड़े मुझे निदो हला नहीं जो मारू,
बे
ये जुलू थुबा दुधो दीटा कली मौतर आत्रे देखा गुला आया हाये
रात
से नीन में उठकर मैंने देखा घड़ी की तरफ ये तो बारा बजर है
मुझे सपने में भी मन और मा अंटी के दूद ही दिखाई दे रहे हैं
सन ही दिखाई दे रहे हैं
मैंने अपने डंडे को देखा एकदम खड़ा हो चुका था टावेल में, करूं भी तो क्या करूं,
ये बाप का माल थोड़ी है कि मनोरमा अंटी को जाकर पकड़ लूँ और चोदरा लूँ,
हो नहीं सकता ना, सुबह तो कम से कम होने दे यार, मैं अपने डंडे से खोद बात क
आखिरकार मैंने हार कर थक कर जाके बात्रुम में हाथ गाड़ी चलाई
जी हाँ आपको समझ में आ गया होगा मैं जादा कुछ नहीं बोलूंगा मूर लंगड़ा बांड़ो यारे
ठिया है जय थिला जित्ते बुझेले बुझू न थिला कौन हो वो मूर ही बांड़ो
बाध्य
पाइखना कम्मड भीतरे, पाइखना कम्मड भीतरे, पाइखना कम्मड भीतरे, पाइखना कम्मड
भीतरे, पाइखना कम्मड भीतरे, पाइखना कम्मड
भीतरे, पाइखना कम्मड
भीतरे,
कम से कम 45 मिनिट हाथ गाड़ी चलाने के बाद मैं अपने मंजिल में पहुँचा
मेरे डंडे ने माल निकालना शुरू किया और एक बहंकर
चिलाखर मैंने उस कमोड के अंधर अपना माल छोड़ना
शुरू किया
फाइनली गुटे लंबा होसो छड़ी की मुं
सांती हली फाइनली एक लंबी ठेठे कार छोड़कर
मैं आखिर कार शांत हुआ
मैंने
बाहर आके दिखा बालकनी में बारीश खतम हो चुकी थे लेकिन नजारा
बहुत ही सुन्दर था, बहुत ही मनमूहक था, बस इस वक्त तो मेरा दिल, मेरा डंडा,
मेरे अंडे, आप जानते हैं, एक उमरदार औरत को ही ढूनती है, मौनसूर
मेरा फेवरेट मौसम है, ये माहौल और भी मादक था, मैं साथ ही ढून रहा
था, पार्टनर
ढून
� उसके बालदार का आख जब तक नहीं सुंखूंगा रात को नीन नहीं आएगी मैंने इधर उधर देखा
कहीं कोई आदमी नहीं मैं तो ढूंढ रहा था मेरी आखे तो
ढूंढ रही थी उस मादरजात औरत को मौ आखी
तो खोजू थेला से ही जमी दर्यानी बेद्वानी को
कौ
आधी रात हो चुकी है क्या दर्शन मिलेगा वो तो नंगी
देवी के शायद नहीं अरे हाँ मंगराज अंकल ने तो कहा था ना कि
मनुरमा एंटी को थोड़ी सी बुखार है तबियत नासाज है वो बाहर कैसे आ सकते है शायद सो
गई होंगी लेकिन अब मैं क्या करूँ
मैं फिर चला बात्रुम की ओर और फिर हाथ गाड़ी चला ही मादर चोद मु पूनी चल
लिया उथरे बात्रुम भी तरोको पूनी हाथ गाड़ी चले बापाई
एथरवी से ही 45 मिनिटी इस वारी वही 45 मिनिट कम से कम लगा
मंजिल तक पहुँचने के लिए एक
लंबी हसी छोड़ कर मैंने अपना माल छोड़ा उस कमोड के अंदर
इस वार तो मैं उत्तेजना के मारे रो पड़ा था क्योंकि मैं सोची रहा
था वो टंगे हुए तनो के बारे में मनोरमा मंगराज। एत्थर
तमु उत्ते जनारे कांदी पके थली। भाबू थली से ही मनोरमा मंगराजर
दीठा बड़ा बड़ा टंगा है थिवा हलू थवा जलू थवा
दुधः।
सुबहे करीब करीब चार बज रहे थे तब ठंडी ठंडी हवा मुझे लगी
तभी जाके मुझे थोड़ी नीद आई थी चेन की सांस मिली थी
आप थोड़ा सो सकता हूँ
सुभे मेरी नीद खुली बाजा की आवाज के साथ मैंने बालकनी में जाके देखा
सुरच किरन तो आ रही थी गड़ी में साथ बज चुके थे मैंने उपर
से एक स्टैप से पूछा ये किस बात का बाजा बज रहा है
अरे भाई कोई थे बाजा बाज ची
उन्होंने कहा ग्राम
वो लोग सब बाजा बजाते हुए महल के अंदर भी घुसे तब मुझे पता चला कि हाँ ये
एक रसम है जो गाओं के जो ठाकुर साहब होते हैं जो जमीनदार होते हैं
उनको मिला के ठाकुर और ठाकुरायन मिला के ग्राम देवी को एक स्पेशल
रसम देते हैं
मैं वासी ले
ही अचानक से मैंने देखा कि ये मनोरमा अंटी एकदम लाल साढी में
आई ये लाल पड़ा मातें बे सिंदूर एकदम गाउंगी
ठकुरायन लग रही था बज़े में ठकुरायन तो है वो गाउंगी राम देवी लग रही
था एकदम लेवी फिर
मेरा नंडा खड़ा हुआ खड�
जब हम चाय की चुसकी ले रहे थे मैं मंगराज अंकल और
मनोरमा एंटी
मैं देख रहा था कि अंकल की एंटी से पढ़ती नहीं है बिलकुल दोनों में एक लब्स
भी बात कित नहीं हुई तोरा आधे गंटे हो चुके हैं बस मैं बात
कर रहा हूँ तो मंगराज अंकल से या फिर मैं बात कर रहा हूँ तो मनुरमा
एंटी से लेकिन उन दोनों में आप
किन्तु मुँ देखिये अखु पाईली जानी पाईली अंकल और आंटी भीतेरे पट्टू नहीं
से माने दी जण को भीतेरे कथा भरता जमाग करू नहांती मुँ
अंकल को से तो कथा याली मुँ आंटी को से तो कथा याली से माने भी मुँ से तो कथा याली
किन्तु से दी ज�
मुझे बस ना से जानी मुझे मोरो नुआ सीकार मिड़ी गोला
मुझे खुश्बू आ रही है मेरे ने
शिकार मैं चाय पी रहा था बिसकिट खा ही रहा था और
लैप्टोप पे कुछ काम कर ही रहा था कि इस वक्त मुझे अंकल ने कहा कि बिटा मैं
अभी दोपेर को निकल जाओंगा, एक जगा है यहां से, 20 -25 किलिमेटर की दूरी पर होगी,
वहां पे एक जमीन की डिल करनी है, हमारी पुरानी जमीन है, मैं
कल सुबह आओंगा, वहां पे आज मैं दोस्त के यहां रहे जाओंगा, तुम अपना ध्यान रखना ठीक
है, मैं सार
मुरो सबु लेजर एंड जेनरल्स चेक कर थेली, एकाउंट चेक कर थेली, एइ समयरे मते
अंकल कहिले की, अरे बापा मु आजी गुड़े जगा कुजी भी,
गुड़े जमी रो किना भी का हिसाब अच्छी, आमहर ही जमी, पुरुना जमी ते, आजी मु सेटी
जीबी,
ए
कमरो खाईवे पेवारो दाई दोसे पुराने वे चिंता करो ने
मुखाई की चिंता करीबे
मैं क्यूं चिंता करूँ मुझे तो मेरे शिकार से मतलब है
बहुत बढ़िया, बहुत अच्छा है आंटी, बहुत भुला ही थी आंटी,
दोपहर को जब हम खाना खा रहे थे, पास में स्टेप्स तो थे, क्योंकि अंकल ने
कह दिया था, और आंटी भी मुझे परोस रही थी, खुद भी खा रही थी, वही लाल साडी
में थी, और एक ओरे
खड़ा वेले खाई ला बड़ू कु आमें से डाइनिंग टेबल ले बसी की खाऊ थेलू सबू स्टाप्स
पाखरे थेले काही किना अंकल कही थेले तांकू मंगराज अंकल महंत मंगरा जे बहुत भला
खार करे तांकर अंडी सदी टा मते बहुत भल लागे एनिवे अंकल
को
व
ये चे ही नाली खाड़ीटी पीन थीले, लाल टुक टुक, आउ गोटे
ओरेंज कलर और कमड़ा कलर और ब्लाउस टे पीन थीले, मैंने सिर्फ एक
टीज़ेट पहनी हुई थी उपर और नीचे एक बॉक्सर बस, मु उपरे
गोटे बेनियन पीन थीली बस, आउ तड़े गोटे
ने बॉक्सर के अंदर कुछ नहीं पहना था, कच्चा नहीं पहना था,
बॉक्सर भी तरह, चोड़ी पिंजे नहीं थी,
खाईला बड़े आंटी रोसे दुधधी
था कु, मुहन नहीं थी, खाऊ थी, अरे ब्लाउस पिंजे ले कौन हो बो, ता दुधधी था
एते बड़ो ब�
खाना खाते वक्त मैं अंटी के वो दोनों थनों को देख रहा था अरे ब्लाउस पहनने से क्या
होगा इतने बड़े बड़े थे इतने भारी थे कि ब्लाउस पहनने के बाद भी वो हिलते
डूलते नजर आ रहे थे ब्लाउस के अंदर थे अंटी मुझे एक टक में देखी जा
र
थिया ही जाई थिला, असे बॉक्सर भी तरू, वो खाई सरी की
पातो धोई ली, मैंने खाना खाके हाथ धोया,
अब के अंटी, मासुची,
रूम को जाओ जी, जब मैं ये कहके जाने लगा कि मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ, तो एकदम
से उन्होंने मुझे टोकते हुए कहा
रोहू ना एड़ी बसा टिके कौन सिधा पड़े वो रूम कू बसा हाँ
उन्होंने अपने उडियानी सिरक्टिव अंदाज में कहा था कि बैठ
जाओ क्या सीधे कमरे में चले जाओ के हाँ बैठो ना
माई कॉर्ड ये आवाज इतनी माधक थी
कि मेरा डंडा अंदर से फुदक
मात्तार जौत। से जौत स्टाइल रे कही ले मोरो भांड़ा दी
थरौ उपर तड़ा ही गला। मो भितरे चड़ी पिंदी ही न थी।
आपना समझते जानी चांती न। मो भांड़ा ते बोड़ा, अंडाउडा को कित्ते
लंबा। मोरो बक्सर थरी उठी ला, आव आंटिंग क
अरे छोटो छुआ हेले भी जानी पारी वो, इतने बोड़ो बांड हो, पोतड़ा बॉक्सर वितरे केमते
लुजी करो ही वो, ठी आही कोला, छोटा बच्चा भी समझ जाएगा, इतना बड़ा डंडा
ऐसे बॉक्सर के अंदर कैसे चुप के रह सकता है, जब इतनी
इजडक्ट
जेनु तेनु प्रकारे मु से सुपा पुरे बसी तगली, हेले मुरो
लंगला बांड़ोरो, हरकत मु आउ लुचे ही पारली नहीं, छुपे ही पारली नहीं, ये
पतला बक्सर कोनो संभाली पारी पो, आंटिंग को नज़र पूरा, असे पलक जोपको
नहांती, तांकर पलक प�
तुम चड़ी नहीं पहनते क्या?
सेमो ते सिदा ही प्रश्न पचारी देले, प्वस्चेन कर देले, तमे
चड़ी पीन हुनो की?
दूर में कुछ स्टाफ्स थे, उनको उन्होंने चिला कर कह दिया,
तम में सबु जाओ, मैं ठीक है सिवन याओ, आमें पर्शनल कथा हो
जू, तम
मतलब कि तुम सब जाओ आना नहीं हम यहाँ पे पर्सनल बाते कर रहे हैं समस्त चाली गले
एत्ते बोड़ो भौंगड़ा एत्ते बोड़ो राजमहल
महलो रहाओ केही बोली ना आनती राजवास रहाओ केही भी ना आनती
तांकरो सबू रही बारो जित्ती की सबू स्टाप क�
उनके जितने भी स्टाप्स क्वाटर हैं इतने बड़े राज प्रासाद में राज महल में वो सब
दूसरी तरफ थे अगर वो चल के भी आएंगे तो कम से कम आदा किलोमेटर का रास्ता होगा और
वैसे भी एंटी ने तो मना कर ही दिया है तो कोई आने नहीं वाला और वैसे भ
जब सब चले गए अंटी मेरी तरफ देखी रही थी कुछ देर जब वो बैठी रही और मैं
भी चुपचाब बैठा रहा क्या ही कहता मैं क्योंकि गलती तो पकड़ी गई है वो मेरे और
आकर बैठ गए और मेरे कंधे पे धीरे से अपना बाहिना हाथ रखते हुए कहा सं
क्या समलता नहीं है तुमसे ये जवानी का वक्त ही ऐसा है समलते नहीं समलता
उन्होंने मेरे से बहुत सारी बातें ओडिया में की उसको सबको तो मैं ओडिया में बोल
नहीं सकता लेकिन उन्होंने जिस तरीके मैं ओडिया में बोला था वो हिंदी में बया नहीं
किया जा सकता �
वैसे वो सारी बातें मैं आपको हिंदी में अभी बताता हूँ ट्रांसलेट करके उन्होंने
क्या बोला था यकीन जानी है एक भी शब्द एक भी लब्ज मैं नहीं छूड़ूंगा आपको सब
बताऊंगा उनकी बातों में एक कामुक्ता थी भयंकर
कामुक्ता उन्होंने
तो जो आर्कतें कर रहे थे, संडास में जाकर वो सब मुझे पता है।
ये मो कानो बाखोरे आसी की मो थे कोहिले।
उन्हें इसी वर्षोरे बाहाई के ये गोरों को आज दिली। उन्हें इसी वर्षोरे मते ये लाणी
आज दिके पंचाफ़न वर्षो। मुरो बाहाँ गोरों को केते वर्षो येगोला। हिसाब कर दिया।
छत्तीस वर्षो हो जी। छत्तीस वर्षो मा क्या। मुरो बड़ो �
बिहार को पानी तिके बिभार करी पाला ने ये बोसली गया। निचे को कूची महंत मंगराज।
अरे मंगराज ना तू पांडराज। तू सला बोसली गया। तू सला कोटे चका।
काली कण केइ केइ की। जुआ जन्म करते ले सब होई जाए। माईके ना कोबी रुक्ख।
अ
पूरा बालु आप या देखिने तुम्हारा होसूरी जीवो यार बाई जी आसे की 36 बर्सोरे मुँ
एही कोठा वितरे बहुन दोची एही महल वितरे बहुन दोची ना कोड़े बाहर को जाई पारूची ना
एही पूरा मुदे जाडूची मुँ अरीजी भी तुम्हे कि�
आज देरी बात है
जरी जाओची, जरी जाओची, जरी जाओची, आओ मो बांडर,
ओ बस्ता, पूरा ठिया, पूरा खड़ा खड़ा सिपाई,
जो चीज उन्होंने,
उडिया में की थी उसको हिंदी में मैं पूरा ही ट्रांसलेट कर रहा हूँ आप सुनिये अगर
आपका ढंडा खड़ा वही के वही नहीं हो गया तो आप इस अजीवो गरीव हैरतंगेज
वाक्या को यहीं पे छोड़ के चले जाना मैं मना नहीं करूँगा लेकिन
दावा है मेर
और जिस इंटेंसिटी में पुस्पुस आया था एक बार सुन लीजिए दावा ही मेरा आप
जा नहीं पाएंगे वो मेरे कान के पास आखर
अपने होटों से
अंदादा लगा लो 36 साल 36 साल 36 साल में एक एक एक एक एक करके इस बुढ़व ने
इस बुढ़व ने हाँ तुमने सही सुना इस माधार चूत बुढ़व ने इस चूत से एक नहीं दो नहीं
तीन नहीं चार नहीं पांच नहीं छे नहीं पुरे के पुरे साथ बच्चे
पैदा
लेकिन एक औरत को जो सुख मिलना चाहिए वो सुख मुझे ये दे नहीं पाया इतना चोटा सा
है उसका चोटा सा लंड मेरे इस बड़े पालदार चूत से वो थोड़ा सा पानी भी निकाल पाया
सिर्फ बच्चे पेड़ा करने से कोई राजा नहीं बन जाता
कोई
पाप इतना बड़ा कोटी है, लेकिन कोई फायदा नहीं, मुझे ये बुढ़ाओ कहीं जाने ही नहीं
देता, मैं तो सिदा सिदा कहता हूँ, ये एक नपूंच सके, नपूंच सके, चक्का है चक्का,
सिर्फ बच्चे पेदा करने से कुछ नहीं होता, मैंने चोट, मैं आज ही
वैसे
ए ए तुम इधर देखो प्लीज ए ए देखो ना ए जी तुम इतनी जगा घूमते हो इतनी औरतों से
मिलते हो इतने लड़कियों से मिले होगे लेकिन मैं तुमसे धावे के साथ कहता हूँ
ग्यारेंटी देता हूँ ये चीज ग्यारेंटी सुनलो मेरी बात मानलो मेरी बात
मु�
मुझे होश कर दो जूद रालो मैं तुम्हें आशिर्वाद करूँगी
बहुतों को जूदा होगा तुम्हें आज एक ठकुरायन की जूद को जूदो
बहुत माई किना को गही थी वो तुम्हें आजी गोटे जॉमी दरियानी रो
पालवाबिया को गही दिया ग्यम ग्यम
ग्यम निकाल कर
उस सोफे के उपर ओंग कर बैठ गई, एक जंग को उपर
उठाया, और साडी को नीचे से नावी तक उपर उठाया, मैंने घौर
से देखा, उसकी जांटिया बालदार काली चूत, अंदर उसने कोई
कच्ची नहीं पहनी थी, और इस दोरान उसकी चूत पानी छोड
र
गेवू गेवू गेवू गुंगरालू एकदम जाटिया जूत ऐसे जूत को
देखकर मेरा ही क्या किसी का भी नियत खराब हो सकता है नियत आलत
खराब हो जाएगी मेरे डंडे से पानी निकला शिरू हो गया था और डंडा एकदम 180
डिगरी में खड़ा हो गया था साड़ी टेक
बाड़वा बियारो चुटी उड़ा सबू कुञ्चु कुञ्चिया थीला
आको देखी की मुंकण कहारी भी नियत
खराब है जीवो मोरो लंगला बांड़ा तोय असी डिगरी
रिठी आहे जाए थेला आओ खाली टोक टोक टोक टोक कर थेला
मेरे मुँ से लार टपकने लगा था।
मैं इधर उधर देखने लगा।
ठकुराइन ने कहा, मनोरमा अंटी ने कहा,
कौन भाबुज़ा, किची भाबो नहीं, एतिकी केही
आसीवे नहीं। मेरी आखें बड़ी हो गई
थी। मेरे मुझे लाट तपक नहीं लगा था उसके जोध को देखकर। उसने कही भी
आखिर में किस बात का इंतिजार कर रहे हो। क्या सोच रहे हो। कोई नहीं आने वाला
यहां। सारे नौकर हैं। अच्छा वो
बताना भूल गया था। उडिया में गेहू का मतलब होता है। जो�
उसने एक बार जोर थे ग्यम् ग्यम् ग्यम् कह
कर अपनी पूरी साड़ी उतार कर नीजे रख दी
पूरा फर्ष पे गिरा दिया सेबे धही
पूरा कामो बानो रे जर जरी तही मुहरू जोर रे पूनी से सब्दो भार कोला
ग्यम् ग्यम्
आउ तर लाल टॉक टॉक साडी को बाहर करिकी, से फ्लोर
पर पकई दला, एबेस ये पूरा नंगुडी,
नंगुडी देबी,
नंगुडी ठकुराडी, अब
वो पूरी नंगी, नंगी देबी, नंगी ठकुराडी,
यह सही मिती चूप चाप अलाजु की भावरे ठिया है जी मोता कू गोड़ोरू मुंड़ो
पड़ जन्त और मुंड़ोरू गोड़ो पड़ जन्त देखू जी वो वैसे ही
बिना शर्म के एकदम बेशर्म की तरह वैसे ही खड़ी हुई
है स्टेचर की तरह एक हाथ कमर में
रख
ठीक कोई तिलाई है, आब होडिया माई के ना, बारों बार मिली बे नहीं,
सही कहा था इसलिए, इसकी तरह औरत नहीं मिलेगी, बार बार,
मैंने अपना निकर उतार कर नीचे फेक दिया, और मेरे डंडे को देख कर, वो एकदम खुश
होने लगी, उसके आँखों में चमाक आ
उसे मिति से फ्लोर परे लोंगडा बसी की ता गांडी को तब्बी आवासन
को सुंगी वक्वारम भकोली गोटे परे गोटे
फिर से शुरू किया, अब उसके गांड में मैं पूरा सुंगने लगा, नाग उठेट दिया मैंने,
एबे तागांडी ने पूरा नाग को पूरे दिली, एबे
डीप सुंगी भी,
स्वर्क, स्वर्क, एकदम जन्नत,
जन्नत, मैंने उसे बैट से उठा कर सोबा सेट के उपर
आके बिठाया, हाथ पकड़ कर, फिर उसके यूद को उसको
कुतिया बना कर पीछे मैंने पोच डे लिया और सुंगने लगा अपनी नाग से,
मोबांड पूरा रेटी थेला, पूरा तैयार, मुता कू, गेहिबा कू, उद्यत
हुआंते, से मोबांड कू धोरी पकेला हातरे, मेरा लंड एकदम तैयार था,
नंगा लंड, हाँ, मैं उसको चोदने की तैयारी कर रहा था, और जब मैंने
चोदना चाहा, तो उसने अपने
दो
मैंने मजलेना शुरू किया।
पिछवाड़ा के छेद से चाट थी अपने जीव से और मैं डंडे तक सरवोट लेती।
से पूरा मोरो पच्छो गांडी कुनारू जी बोलो गई की चाटी बारंब
करे और चूसी आने पूरा मोरो अंडा देटा को छोई की चाटी
की मोरो पूरा डंडे तक सरवोट लेती।
करीब करीब 45 मिनट हो चुका है, लेकिन उसका चूसना बंद नहीं हो रहा, बलकि और बढ़ता जा
रहा
है।
गुतिया का पोज लेने को का और पीछे से अपना डंडा सही पोज में करके अपने कमर
को हिलाके गांड को हिलाके उसके चूत के अंधर एकी वार में घुसेट दिया
ताको गोटे माई कुकुरो रो पोज न भापाई कोही की मने डॉगी स्टाइल
सबु जानी थी बे मुँ प�
एकदम ठीक ता बिया द्वारपा घरे रखी की छेप परे
ठाप दबापें पड़ी ला ने काई की ना ता बिया रूप पच पच पानी बाहर कोड़ थला
मो ना को एकदम उता ता बिया को चाटी की मो पच पटो
मन टाको हले की गांडी की हले की पोज नहीं गली मो डाधी टा ह
निष्चय कर ली जे गोटीयी जटकारे पुरा भित्रो को पुरे देवी टाइट बिया
निष्चय कर ली आमेने एकी जटके के अंदर कितना भी टाइट क्यों ना हो अंदर
अगोजेट धूँगा में हे ठकुरायन तेरी चूद मेरा लंड
हे ठकुरानी तो बिया मुरो
थरप करे रहे उन्हों, दी थरप पसला, किंतु पूरे ही देली पूरा, अंडा देटा खाली बाहर
है। एक बार मैंने ही दो बार में घुसा है, लेकिन घुसा दिया पूरा, मेरे अंडे ही दो
बाहर है। मैं लंबी लंबी
सांसे लेने लगा, उसके जूत के अंदर की गरमी म
मैंने उससे पूछा, अब मारू?
मुँ ठाकुराणी को बच्चा रही, एबे मारी भी?
जे कोहिला, जबर्दस्त आगो पीछे करी की मारो?
उसने कहा, जबर्दस्त आगे पीछे करके ही
मारो? इसी के साथ उसने, एक शब्द फिल्पे कही वही शब्द और
उसके साथ साथ मैंने कोई वक्त नहीं लिया उसने कहा यहूं यहूं यहूं
यहू यहू और यहू यहू यहू यहू
इतनी गिली कर दिया अपने खोफा
पहली
बार मिजडने वाला था फर्स्ट टाइम प्रथम धर पाई ताब बिया वितरे मुझ हडिवा को जाओची
ताब बिया रे फर्फेक्ट ठाप पदेई की मुझ
मांड़ो को पूरा पूरेई देली और गुठे बयानो को रड्डी छाड़ी की ताब वितरे सबु माल
छाड़ी देली
मैंने सही ठीक की चीज हमारा बहुत ही लूज। स्यम होते कुंड़ी की जाबुड़ी की दर्ध है।
ता चुट्टी को मुझे सुंगी ली।
कुछ देहर हम वहीं बेठे। वो मुझे
एकदम कसके पकड़के बेठी हुई थी। उसके बालों को अपने हाथों में लेकर मैंने स
अब वो फिर से मेरे अंडों को चूसना चाहती थी, मैं अब उसको गोध में उठा
कर, बहुत भारी भरकम थी, लेकिन गोध में उठा कर उसको ले गया, और अपने बेटरूम की तरब
चला गया, फिर ठुकाई शुरू कर दी, उसने उस
रात मेरी तबियत से ली, और मैंने उस
उस रात रात भर हमने खाना पीना कम किया चुदाई जादा की जी हाँ एक्सरसाइज जादा किया
मेरे कमरे में उसके कमरे में होई होई क्या बात थी क्यूंकि
नौकरों का घर जो स्टाप कटर होता है वो पीछे की तरफ था और पुरा महल खाली
था तो वो और मैं रात भर कि�
टेर्रेस, बालकनी, कोई ऐसी जगा हमने नहीं छोड़ी रात भार करते रही।
रात्ती सारा आमेदी जणों माती थीलू। काई किना, जैतू,
स्टाप मानकर क्वाटर चव पच्चो पटे थीला, त्यणकरी पूरा कुठी रे आमेदी जणों ही
थीलू। रोसेई गर,
पाइ� छातो ऊपरे,
बालकनीरे, सबु जगारे, आमे ही आमे, आमरो ही जलोबा।
सकाड़ो ही गोला, किन्तु खेड़ो जाली
थाए। एतिकी बेरे महन्त मंगराजरो
गाड़ी असीबरो साउन हेला। मु ताको सेटी रखी की
कहीली, एतिके थाओ, परे मौका देखी की करीबा।
कि मुझे अंटा हले हले मोरों मित्र को पड़ेली सेता गांडी
हले हले तारों मित्र को पड़ेला रात भर हमारी चलती रही सुबह भी हो गई
लेकिन हम मश्यूल हैं इसी वक्त अंकल
काड़ी आ गई महंत मंगराज सुबह हो गई है ना
मैंने उसे गोद से उतार कर नीचे कहा, बस अभी के लिए इतना रखते
हैं, वो बार बार मना कर रही थी, मानने को तयार नहीं थी, मैंने उसके गाल पर एक पप्पी
दी, उसके थनों पर दो जकड के पप्पी दी, और कहा, बाद
मैं करेंगे, फिर मैं गाण हिला हिला कर
अप और वो अपनी
कमरे हिलाते हुए अपने कमरे के तरफ चली गई
उस दिन सुभे का नाशिता हमने किया लेकिन वो मजा
नहीं था क्योंकि सामने मंगराज अंकल बैठे हुए थे दोपर का खाना भी
खाया लेकिन वो मजा नहीं था क्योंकि सामने मंगराज अंकल बैठे हुए थे
और मैं उस महल के आखिर में उनका
एक स्टोर रूम है बड़ा सा मैं वहां गया मौका पाते ही
धकुराय मेरे पीछे पीछे आ गई और हमने वही खेल किया
पूरा स्टोर रूम सामने मेरा धवल पड़ा हुआ है उसकी साड़ी
पड़ी हुई है और दो नंगे बदन
सकारे आमें जड़क्या खाईलू
फेले जड़क्यारे से मजा न थेला काही किना सामनारे महंतम अंगराज बस थेले अंकल
जी दिनों बड़ो खाईबा भी खाईलू किन्तु से मजा न थाए काही किना सामनारे
बस थेले महंतम अंगराज जी आमें दी जण
मुरोबांडो टॉक टॉक तबिया पंच पंच वो कहवत है ना गरीब पेदा होना
गुना नहीं है लेकिन गरीब बनना गुना है सबसे बड़ा गुना तो सुबहे और दोपहर जैती गई
वैसी गई लेकिन रात को हम खेल करेंगे स्टोर रूम में राती
पाएं मुँ कोठी र
मो पछे पछे चुपचाप ठाकुराणी चाली चाली आसिला। आओ सेठी, आमे आमरो
खेलो आरम्म कर दल। पुरा चुपचाप। मो धीरे धीरे मार थाए। मोरो
टावेल तारो साठी गोटे जगरे चुपचाप रखी देखी। आमे आमरो खेलो आरम्म कर दल।
दीदी नरे ये बाड़ी धरीबार हम भोखला कहीं की ना ताको गही गही
तामुटारो मौवास्था रखे न देली। दो दिन में ही उसने
छड़ी उठाना शुरू कर दिया। क्यूंकि उसको जूद जूद कर उसके कमर की
हालत मैंने सही रखी नहीं थी।
लेकिन
इसका कब तक चलेगा। ऐसा तो बार बार नहीं हो सकता है। कितना दिन हम चुप -चुप के
मिलेंगे, भगवान ने हमारी बात सुन ली, और दीत रही थी न,
वहाँ पे सब पेंटिंग का चूना लगाने का काम शुरू हुआ, वहाँ पे एक तिवहार था,
लोकल जगा में एक तिवहार था, इसलिए पेंटिंग का काम करना शुरू किया
महंत अंकल ने वी कहा कि मुझे बहुत काम रहता है मैं बाहर जा रहा हूँ और
हमेशा शाम को ही लोटूंगा तुम जरा अपने अंटी के साथ रहे कर ये सारे
पेंटिंग का काम देखो जी हां जी हां मैं देख लूँगा अंटी के
साथ जी जी दर असल मैं अंदर से यही कह रहा था के मैं देख लोगा
एंटी का क्यूद मैंने एंटी से सारी
बात कह दी एंटी ने कहा एटी
सुन न बुढ़ा तो नहीं आमे कोई बाहर को जाए परिवानी मुझे पाखर कोड़ा बढ़िया
जागाते हो ची मुझे आजीबो जीबा ओय कोरिवा फोल मोस्ती मुबी होसे
की कहली तमर तो जीवा पाई जाते लाना भारो को बुले आ पाई चलो बुले ने भी जुआड़े कही
वो असा जीवा ठकुरान ने कहा था अजी सुनिये ना
बुढ़ो तो नहीं है अब हम कहीं भी थोड़ा गूमने जा सकते हैं मेरे
पास
मैंने कहा, आप मुस्कुराते हुए, हाँ, क्यों नहीं, आप भी तो चाहते थे, चलिए, आपको
गुमा के लाता हूँ, आपकी जिन्दगी को एकदम
बदल देता हूँ, और एक
रुमांटिक माहूल में हम दोनों जीएंगे, चलिए, हमने स्टाफ्स को
काम देखने के लिए कह
पहली दफा हम जब गए थे गाउं के अंदर दे कर गए और आखिर में गाँ
ठकुराणी मतलब गाउं की ठकुराण थी उनकी पूजा होती थी वहां
से इसने दो माला लिये थोड़े सिंदूर लिये और फिर
गाड़ी चलाना मैंने शुरू कर दिया आखिर में हम एक पुराने
मैं राजाओं की कोटी में पहुँचे, अरी यार, ये क्या है, उसने कहा, एटा
हमारा ही पुरुना, पुरुना घर, तमें टेंशन नहीं होना, आसवा, उसने कहा,
ये हमारा ही पुराना, पुराना कोटी है, तुम टेंशन ना लो, आओ जी आओ, उसने हाथ पकड़ कर
मुझे
मैंने अपने कपड़े उतारे, उसने अपने कपड़े उतारे, वो नंगी, मैं नंगा, हम दोनों
अब नंगे घूम रहे हैं, उस कोटी में, एक दुसरे
के काथ बातें शेयर कर रहे हैं, एमोशनल हो रहे हैं, कहीं बैट जाते हैं,
मज़ा है, इसका अलग ही मज़ा है, कभी
न और शुकुन
ही शुकुन हो और आप हाथ पकड़कर हाला कि मैंने तो उसका गांड ही पकड़ा हुआ था
खूब बाते करने लेंगे आपनों माने भी कि भी एंजुय करन तो एमती कोटी
पूरुना कोटी थीवा को वेधे माइक नागो नहीं की सांगरे जानतो मो सांगरतो मो ठ
बाहरे चुप जाप रखी देवे, थोई देवे, पूरा जीवे, दीज़न सरा हात्ता धरी की, लंग रही
चाली चाली, पूरा बुलीवे, से पूरा कोठी, इमोशनली कथावरता करीबे, जो थी चावा से इठी
बसी जीवे, यारो अलगा ही मचा,
कभी कभी तो मैं उसे को�
केते बेडे केते बेडे तो मुदखू से कोठी भीतरे लंगडा दोड़े दिये और लगाई
मुझा गांडी हलू दूओ दूधा हलू दूओ होय होय आहा
गान हिल रही हो थने हिल रही हो क्या कहने
अरे कभी दोड़ा के देखिये से नंगे मजाई मजाई
इसे कहते हैं एश उसने कहा था ना एश कराऊंगी सच मुझ करवा रही है
आपोनों समझ तो जानी चाहिए
मुझ ते माई के नमानां को मुझ ते वापाई के ते
मजा लागे मुझ तुथवे मुझ तांगु देखुथवे मुझ बहुत थर औनेक थर मुझ
ते वापाई नहीं
आप सभी तो जानते हैं मुझे उमरदार औरतों को ओकडू बेठा कर मोताने में
कितना मज़ा आता है उनको मोतते हुए देखने में मुझे बहुत खुशी होती है
बहुत मज़ा आता है आप सभी जानते हैं मैं उसे भी हाथ पकड़ कर
बिठा था था ओकडू वहाँ पीछे ए
अलगती जगा थी यहाँ पे मैं उसको मुता था था हाँ हाँ हाँ
निकालो निकालो बार करो बार करो बार करो ये
इता दरकार ये ही तो चाहिए मुझे आओ
बार करो आओ बार करो बार करो बार करो
कि वह निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल निकल
निकल निकल निकल
निकल
निकल
निकल
निकल निकल निकल पिंदुहु थेला, तेन कुरिता नाम रखी थेली, गेंडू मनोरमा, केते कौन नाम
रखी थे?
बालवती,
बियावती, गांडीवती, गेंडू मनोरमा, गेंडू,
केते कौन नाम?
कितने ही नाम रख लिये थे मैंने?
बियावती, बालवती, यूथवाली, दूदवाली
थकुरान से प्यार के हिज़हार में उस पुरानी कोठी
में मैंने हर जगा लिख दिया था उसका नाम और खास करके उस बुढ़े
महंत मंगराज के लिए ही लिखा था उसको नीचा दिखाने के लिए
वाक्यू मंगराज तेरी वीवी अब मेरी है
खास करी की से बुढ़ा महंत मंगराज कु निच्चा देखेबा पाई, मु ता पाई भी कांथरे
लेखी दीते ली, वो क्यू मंगराज, तो माई की ना ये बड़ा मोरो
एबे, पूरा मोरो, ता गांडी, ता बिया,
ता काख, ता दुध, ता चूटी, ता दान्त, ता नक्खर
सब वो मोरा, उसका
थन, उसकी जांग है, उसका चूत का छेत, उसके गाण के छेत, उसके दांत, उसके
नाग, उसके नाखुर, उसकी हतेलिया, उसकी नाभी, उसके चूत के बाल, सब कुछ
मेरे है, वो पूरी तरीके से मेरी है, मेरी हो चुकी
है,
शिफुरा मोह रहे सारी चिगो टापाने
बेड़े बेड़े समोर मिल ले हमें रात तिरे भी पड़ाओ
गाड़ी थोई देखी बाहरे हमें कामो आरम्ब
कर लो जब भी वक्त मिलता था हम रात को भी कभी कभी निकल जाते थे चुप
चाप गाड़ी बाहर रखते कर हम अपना काम शुरू कर देते थे, नंगे घूमते थे,
फिर चुद्दन चुदाई करते थे, वो पुरानी कोठी इसकी साक्षी
है, सब कुछ उसी ने देखा है, से पुरुना कोठी हम प्रेमर,
संतक, साक्षी से सबु देखी जी,
लंगडा है कि जाओ, बुला
ग्यांगें कोरू सकाड़ हले जो रुकवा सू अब तो
वहां लेके तव्यत से मैंने उसकी बहुत बार गांड भी मारी है बहुत बार अब उसकी गांड
चोड़ी हो गई है वो एकदम तांगे फेला फेला कर चलती है ये उसका
लक्षन है कि मैंने उसकी गांड मार कर उसकी गा एबे तो
से पुरुना घरे नहीं की, पुरुना कोठीरे नहीं की, मु तारा बहुत रगांडी भी मारी ची,
मैं बहुत मारी ची, तारा लक्षण हो ची सिये, एबे तारा चंगधी टाको फाड़ी फाड़ी की
चाले, आउ ठेंगा भी धोड़ता है हातर, बिना ठेंगार से
चा
तोड़ दी मैंने, एक बार महंत मंगराल सामने बेठा
था, हम सुभे का नाश्टा कर रहे थे, तब वो छड़ी पकड़ के साड़ी पेहन के आई,
मुझे लगा अगर ये छड़ी पकड़ के ऐसे नंगी आ रही होती तो
कैसा होता, मेरे खुराफाती दिमाग में ये
आईडिया महंत
अंकलाव मु समनारु से नाली साढी पिंदी की, सिंदुला लगे की, से
ठेंगा धरी धरी आईला। मु कोईली जदी ये ठेंगा धरी की आसीवा,
किन्तु किछी पिंदी न थीवा, और नंगुडी थीवा, और नंगुडी ठाको राणी। कैमीती
हवा। से दिना एमो ता
उसी रात को ही मैंने उसे उस पुरानी कोठी में लिया था और उसको वैसे ही नंगी
करके डंडा पकड़वा के चलवाया था दोड़ा दिया था बहुत सारी वीडियोस भी बनाई थी
माधर जोत बहुत सुंदर दिख रही थी सेप पुरुना कोठा विथरे तको
सेप ठेंगा �
बहुत सुन्दर देखाओ तेला, बहुत वीडियो बनेची, फोटो बनेची, एमिती माईके ना लाइफ
आशीवा दरकार। वैसे औरतें, जिन्दगी में आनी चाहिए कभी
कभी, वरना जिन्दगी बोरिंग हो जाएगी, क्या कहते हैं। नहले,
जीवन उठाजे, एकदम
पुरना कोठी देखन तो आओ लंगडा दोड़न तो। माईकी ना को लंगडा दोड़े दियन तो।
जाये जाये सोच क्या रहे हैं। एक पार्टनर ढूंढिये ऐसा और पुरानी कोठी
ढूंढ कर उसे नंगी दोड़ा दिजिये। नंगी एकदम नंगी बदन में एक
भी
सु
जो दिनो मोरो से ठुआर शिवार थेला ठीक ता पुर्वो दिनो रातीरे मुता
कुछे पुरुना कुठी वितरे नहीं अपपर जापतो गही थीली अपपर जापतो गांडीरे
बियारे ता मुहरे भी बांड़ो पुरे थीली आये आये एवडा भुली होबो नहीं नहीं
चला कुछ कोई आप हो सब उजिन सब, एक्सपिरियंस को रिवा को था, एक्सपिरियंस
था,
जी दिन मैं आने वाला था, उसके ठीक पहले दिन रात में, मैं उसे उसी पुराने
कोठी में लेकर पेट भर के चुदा था, गांड में, चूत में, उसके मूँ में भी म
experience किया जा सकता है और कोई रात्ता नहीं है
माई किना को लंगडा दोड़े नाते तिलजी बनो रे आपनो किच्छी कोरे नाते
तो दोड़ान तो दोड़ान तो ये मैं अपने मन की बात आपके
सामने रख रहा हूँ वगर सिंदगी में किसी मोटे तगडे औरत को आपने
नंगी नहीं दोड़ाया है तो सिंदगी में
आप
दोड़ा के देखिये।
उस
दिन सुभे जब मैं लोट के आ रहा था, तो अंकल तो खुश थे, लेकिन आंटी बिलकुल खुश
नहीं थी, मेरी ठकुरायन बिलकुल खुश नहीं थी, लेकिन मुझे कहना ही पढ़ा।
बाई अंकल, बाई आंटी, बाई
ठकुरायन।
यहूँ यहूँ यहूँ
यहूँ
फालतर कोई भी नहीं
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