All language subtitles for Jagannath 1996

af Afrikaans
ak Akan
sq Albanian
am Amharic
ar Arabic
hy Armenian
az Azerbaijani
eu Basque
be Belarusian
bem Bemba
bn Bengali
bh Bihari
bs Bosnian
br Breton
bg Bulgarian
km Cambodian
ca Catalan
ceb Cebuano
chr Cherokee
ny Chichewa
zh-CN Chinese (Simplified)
zh-TW Chinese (Traditional)
co Corsican
hr Croatian
cs Czech
da Danish
nl Dutch
en English Download
eo Esperanto
et Estonian
ee Ewe
fo Faroese
tl Filipino
fi Finnish
fr French
fy Frisian
gaa Ga
gl Galician
ka Georgian
de German
el Greek
gn Guarani
gu Gujarati
ht Haitian Creole
ha Hausa
haw Hawaiian
iw Hebrew
hi Hindi
hmn Hmong
hu Hungarian
is Icelandic
ig Igbo
id Indonesian
ia Interlingua
ga Irish
it Italian
ja Japanese
jw Javanese
kn Kannada
kk Kazakh
rw Kinyarwanda
rn Kirundi
kg Kongo
ko Korean
kri Krio (Sierra Leone)
ku Kurdish
ckb Kurdish (Soranî)
ky Kyrgyz
lo Laothian
la Latin
lv Latvian
ln Lingala
lt Lithuanian
loz Lozi
lg Luganda
ach Luo
lb Luxembourgish
mk Macedonian
mg Malagasy
ms Malay
ml Malayalam
mt Maltese
mi Maori
mr Marathi
mfe Mauritian Creole
mo Moldavian
mn Mongolian
my Myanmar (Burmese)
sr-ME Montenegrin
ne Nepali
pcm Nigerian Pidgin
nso Northern Sotho
no Norwegian
nn Norwegian (Nynorsk)
oc Occitan
or Oriya
om Oromo
ps Pashto
fa Persian
pl Polish
pt-BR Portuguese (Brazil)
pt Portuguese (Portugal)
pa Punjabi
qu Quechua
ro Romanian
rm Romansh
nyn Runyakitara
ru Russian
sm Samoan
gd Scots Gaelic
sr Serbian
sh Serbo-Croatian
st Sesotho
tn Setswana
crs Seychellois Creole
sn Shona
sd Sindhi
si Sinhalese
sk Slovak
sl Slovenian
so Somali
es Spanish
es-419 Spanish (Latin American)
su Sundanese
sw Swahili
sv Swedish
tg Tajik
ta Tamil
tt Tatar
te Telugu
th Thai
ti Tigrinya
to Tonga
lua Tshiluba
tum Tumbuka
tr Turkish
tk Turkmen
tw Twi
ug Uighur
uk Ukrainian
ur Urdu
uz Uzbek
vi Vietnamese
cy Welsh
wo Wolof
xh Xhosa
yi Yiddish
yo Yoruba
zu Zulu

Original subtitles

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

शांति

इस वक्त कौन हो सकता है? आप खाइए मैं

देखती हूं।

[प्रशंसा]

कौन है आप? तुम नहीं जानता तुम्हारा

मिस्टर जानता है। क्या हाल है सर? क्या

चाहते हो? इस वक्त क्यों आए हो? जानते

नहीं हमारे खाने का टाइम है। सॉरी सर।

लेकिन ये तो हमारा बदमाशी का टाइम है। सर

बैठे-बैठे हमको एक आईडिया आया। हम सोचा

तुम्हारा कोई बच्चा नहीं है। अकेले मियां

बीवी है। तो तुम्हारे मरने के बाद

तुम्हारा पत्थर का कदान हमें आना चाहिए।

इसीलिए हम आपको अपना बाप बनाने के वास्ते

आए हैं सर। बदतमीज

दो टके के ठेकेदार तुम्हारी ये मजाल।

अपनी खदान का एक बार ठेका तुमको क्या दिया

कि तुम उसी के मालिक बनना चाहते हो।

निकल जाओ यहां से। बाकी रही खदान की बात।

वो मैंने सरकार को देने का फैसला कर दिया

है। नाउ गेट आउट फ्रॉम हियर। वरना धक्के

मार के बाहर निकाल दूंगा।

बहुत बोलता है रे तू।

बहुत बोलता है।

बहुत बोलता है रे तू। बहुत बोलता है। अब

तेरा टाइम अब हो गया।

भाग

तुमको सोचने के वास्ते हम और टाइम देता

हूं।

तुम जो बोला

उसे भूल जाऊंगा।

हम जो बोला

उसे याद रखना।

नमस्कार भजंग बाबू ऑल इंस्पेक्टर इस एरिया

के टॉप ऑफिसर इंस्पेक्टर बलबन कहो कैसा

आना हुआ वैसे ही जैसे हर बारात हैं गरमा

गरम हड्डी लेकर इ बार हम उस खदान के मारे

की खबर लाए हैं ऊ ससुर ने थाने में

तुम्हारे खिलाफ रपड़ दर्ज कर दी है क्या

है ना भुजिंग बाबू बड़ा आदमी और बड़े आदमी

की कंप्लेंट तो लेनी ही पड़ती है। अब

एक्शन लेना ना लेना तो हमारे हाथ में है

ना।

हमारे विचार में भुजंग बाबू उस ससुरे को

बढ़िया सी हड्डी डाल दी जाए। भूतनी का

बेटा चबाता रहेगा। नहीं इंस्पेक्टर।

वो आम कुत्ते जैसा नहीं है जो हड्डी लेना

जानता है। ये तो स्पेशल टाइप का खडूस

कुत्ता है जो हड्डी टुकड़ा देना जानता है।

इसीलिए हम उसे एक बार और मिलना चाहते हैं।

छोड़ मुझे भुजंग ये तू ठीक नहीं कर रहा

याद रख तुझे पछताना पड़ेगा भुजंग बदमाश

मैं कह रहा हूं छोड़ दो मुझे छोड़ दो अरे

भुजंग याद रख अच्छा नहीं कर रहा तू

छोड़ दो इन्हें कोई है भगवान के लिए कोई

तो बच्चा कोई है

[संगीत]

सर सर ये लास्ट टाइम हम तुमको बोलता है

फटाफट इन कदान के कागज पे साइन कर दो वरना

हमारा पैर इस गाड़ी के ब्रेक से हट जाएगा

और तुम फोकट में लटक जाओगे।

लोग यही समझेंगे कि बिना बच्चे के जीने से

अच्छा तुमने मरना पसंद किया खुदकुशी करके।

भजन

ये मत भूल कि मेरे बाद तेरा नंबर आएगा। सर

आप बचपन से ही इतना जिद्दी है क्या? लगता

है आपका ज़िद मरने के बाद ही टूटेगा।

इसीलिए मां-बाप का

टाइम अप कर देता हूं।

[प्रशंसा]

[संगीत]

अरे अरे आ गया हमारा बबुआ आ गया भाई कितनी

देर से हम इंतजार कर रहे थे इतना बड़ा हो

गया बिल्कुल बड़े बाबू की तरह बह रानी

जानती हो जब ये छोटा सा था तो हमारी गोदी

में खेला करता था हमारे कपड़े खराब कर दिए

तीनू चाचा यहां के केस टेकर है ये रानी

नहीं आओ अपना मकान देख लो। हमने सब ठीक कर

दिया है। अगर कोई भूल ले गए हो तो बूढ़े

को माफ कर देना। नहीं ऐसी आओ बेटा

देख के पढ़ते।

छोटे बाबू ये बताओ कि छुटका कहां है? अजय

उसके इंजीनियरिंग के एग्जाम्स चल रहे हैं।

दो-ती दिन में खत्म हो जाएंगे। आ जाइए।

अच्छा अच्छा। अच्छा बबानी ये बताओ कि घर

ठीक-ठाक लग रहा है ना? बहुत अच्छा। मगर

रसोई घर कहां है? आइए बताता हूं।

ये कुछ

₹40 ₹40

किस बात के? बात के नहीं काम के। आपका

इतना सामान गाड़ी से अंदर लेके आया ना

उसकी मजदूरी। पर तुमसे किसने कहा कि वो

सामान गाड़ी से यहां लेकर आओ। देश की हालत

में। क्या मतलब? देखिए साहब देश में

बेकारी बहुत बढ़ गई है। और काम तो बोलता

नहीं कि मेरे पास और करो। इसलिए मैं खुद

काम के पास जाता हूं। उसे करता हूं और

अपना हक मांगता हूं।

लेकिन मांगते बहुत ज्यादा हो। साहब अगर

आपको ज्यादा लग रहा है तो उसका आधा दे

दीजिए। और अगर आधा भी ज्यादा लग रहा है तो

आधे का आधा दे दीजिए। और अगर आधे का आधा

भी ज्यादा लग रहा है तो आधे के आधे का आधा

दे दीजिए। आप आप आदमी अच्छे लग रहे हैं

इसलिए आज का काम फ्री। नहीं नहीं नहीं

ये लो। जो आदमी मेहनत करता है उसको उसकी

मेहनत का मेहनताना मिलना चाहिए। शुक्रिया

साहब। सुनो।

जी साहब। नाम क्या है तुम्हारा? गिरजा।

इसीलिए गिरगिर कर आ रहे थे तुम। अच्छा

साहब।

संभल के गिरजा साहब। हां गिरजा। अरे

ओ हो हो हो

जानते हो दीनू चाचा

मैंने खुद कह कर अपना तबादला यहां करवाया

है।

मेरा रिश्ता इस जगह से कभी नहीं टूटा

बल्कि मैंने तो अजय और भारती से कहा कि

रानीगढ़ ही वो जगह है जिसे मैं अपनी

कर्मभूमि बनाना चाहता हूं। क्योंकि यही तो

मेरी जन्मभूमि है।

बल्कि मेरा तो यही सपना है कि मैं अपनी

आने वाली औलाद का जन्म भी यही देखूं।

उसे यहां की मिट्टी में पालूं, पोसू, बड़ा

करूं। ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा।

भगवान तेरा सपना पूरा करेगा।

लेकिन यहां बहुत कुछ गलत हो रहा है। क्या

गलत हो रहा है दीनू चाचा? अब तुम सरकारी

वकील बन के आए हो तो धीरे-धीरे सब पता चल

जाएगा।

लगता है दीनू चाचा तुम जानते बहुत कुछ हो

मगर बता नहीं रहे हो। बताएं भी तो कैसे

बताएं बबुआ

यहां डर का राज है। जुल्म की हुकूमत है।

दीनू चाचा मैंने अपनी डैडी से एक बात सीखी

थी। वो हमेशा कहा करते थे कि बहादुर आदमी

जिंदगी में सिर्फ एक ही बार मरता है। मगर

कायर ना जाने कितनी मौतें मरता है। हम्म

[संगीत]

[प्रशंसा]

अरे दीनू चाचा आप इतनी रात गए जाग रहे

हैं? हां बबुआ नींद नहीं आ रही है।

दीनू चाचा ये आवाज कहां से आ रही है?

बबुआ ये बाजार में एक लोहार की दुकान है।

वहीं से आवाज आ रही है। लोहार की दुकान?

हां। इतनी रात गए? हां ये कोई मामूली

लोहार नहीं है बबुआ। क्या मतलब? अरे बबुआ

कहां से आया है पता नहीं। कौन है ये भी

मालूम नहीं। रात भर काम करता है। दिन को

सोता है। लोग डरते भी हैं और सड़ाते भी

हैं। दिखने में बहुत खूंखार लगता है लेकिन

अंदर से बहुत नरम है।

गहरी चोट खाई हुई कोई आत्मा है। दिलचस्प

आदमी लगता है। क्या नाम है? जगन्नाथ।

[संगीत]

जगन्नाथ

[संगीत]

जितना अच्छा दिखता है उतना अच्छा चलेगा

क्या?

चला के दिखाऊं क्या?

कम बोलता है, अच्छा बोलता है। काम की बात

कर। हां, ये नए किस्म के बंदूक का नक्शा

है। ये सिर्फ तुम ही बना सकते हो। इसे

AK-47 कहते हैं। हम इसे 87 में बना चुका

हूं। पता है। बन जाएगा।

₹ लाख लगेगा। पांच क्या? 10 लाख ले लो।

हमें सिर्फ ₹5 लाख चाहिए। ठीक है। ये

पेशगी लो।

हम पैसा काम होने के बाद लूंगा।

अच्छा ऐ

नक्शा छोड़ जाओ।

अच्छा टाइम पास करता है।

[संगीत]

अरे भाई कोई ओए कोई नहीं है। सिर्फ

जगन्नाथ है। हां जगन्नाथ भाई ये हथौड़ा

कितने का? हम

₹60 का। पैसा रखो और चलते बनो। अब हम सो

रहा हूं। हां हां जगन्नाथ भाई माफ करना।

तुम्हारी नींद खराब की। ये पैसे कहां

रखूं?

नए हो का इतना नहीं पता। जी हां, अभी-अभी

नया सरकारी वकील बनकर आया हूं यहां।

तो तुम सरकारी आदमी हो। जी हां।

ये चीज बिकाऊ नहीं है। पर अभी-अभी तो

तुमने इसकी कीमत ₹60 कही थी। हम अभी-अभी

कह रहा हूं कि यह चीज बिकाऊ नहीं है। हम

सरकारी आदमी के पैसे से अपने खींचे को

खराब नहीं करना चाहता। मगर क्यों?

[संगीत]

[प्रशंसा]

सुनिए जी आप यहां के नए सरकारी वकील साहब

हैं ना? जी हां। क्यों? क्या मैं आपसे

आपसे पांच मिनट बात कर सकती हूं? हां हां।

क्यों नहीं? आइए अंदर चल के बात करते हैं।

आइए। जी।

लीजिए बहन जी रोइए मत ये पानी पी लीजिए

आपके पति को सबके सामने बदमाश घसीट कर ले

गए किसी ने आवाज तक नहीं उठाई ये बात तो

समझ में आती है

उसके बाद आपके पति की लाश मिली डर के मारे

किसी ने कुछ नहीं कहा ये ये भी समझ में

आता है। लेकिन पुलिस

पुलिस की लाचारी के किस्से और लापरवाही के

कारनामे तो सुने गए हैं। मगर बदमाशी के

अफसाने वो भी दिन दहाड़े। यह पहली बार सुन

रहा हूं मैं। जानती हैं आपके इस पति के इस

केस की फाइल में एक भी काम का कागज नहीं

है। सबूत और गवाहों की बात तो दूर एक ढंग

का पंचनामा भी नहीं बनाया गया है।

लगता है यहां की पुलिस को उसकी उड़ान से

उतार कर नीचे जमीन पर लाना होगा।

क्या नाम बताया आपने उस बदमाश इंस्पेक्टर

का? बलवंत। ए इंस्पेक्टर फालतू बात मत

करना। आज तुमको वकील ने वारंट के साथ भेजा

है। कल हथकड़ी का नंबर आएगा। परसों क्या

फांसी का फंदा बैठेगा मेरे गले में? जानता

है?

हम कोर्ट का सिर्फ फोटो देखा है। आज तक

किसी में हिम्मत नहीं पड़ी हमें असली

कोर्ट दिखाने का। भुजंग बाबू आप तो बिला

वजह चिंतित हो रहे हैं। सिर्फ आधे घंटे की

तो बात है। बस जाना है और आना है और

तुम्हारे आने से पहले हम वो काली वर्दी

वाले अफसर के मुंह में हड्डी डाल देंगे।

अरे भुजंग सेठ अगर आपके केस में कोई

झोलझाल हुआ तो हम बैठे हैं ना आपके बनाए

हुए लॉ कॉलेज के स्टूडेंट। हां ठीक है ठीक

है लेकिन हमको फालतू में बुला के बिठाने

का नहीं फोन करके

करेक्ट टाइम पे बुलाने का नमस्कार वकील

बाबू हम है यहां के थाना इंचार्ज

इंस्पेक्टर बलवंत ओ

तो आप हैं इंस्पेक्टर बलवंत जी हां

इंस्पेक्टर बलवंत

मैं भुजंग की इस फाइल में उसकी केस स्टडी

कर रहा था। इसमें कोई एक ऐसा पॉइंट भी

नहीं मिला मुझे जिससे प्रोसीक्यूशन यानी

हमें इस केस में कोई जीतने की उम्मीद हो।

वकील बाबू केस का जितना या हारना पुलिस

डिपार्टमेंट का काम नहीं। हमरा काम तो

केवल मुजरिम को पकड़ना है और कोर्ट में

पेश करना है। और ये काम बड़ी खूबी से

निभात है। नहीं। मुजरिमों को सिर्फ पकड़ना

ही तुम्हारा काम नहीं है। इंस्पेक्टर

बलवंत मुजरिमों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करना

भी तो तुम्हारा काम है।

वरना मुजरिमों को बिना सबूत के जज के

सामने पेश करने से तो हम बेवकूफ साबित हो

जाएंगे। तो का आप अपने आप को समझदार समझत

हो वकील बाबू। क्या फरमाया आपने?

जरा दोबारा कहने की जहमत करेंगे आप? बेशक

परंतु शब्दों में नहीं।

ई बैग मा ई केस की फाइल है। देख तो लो।

[संगीत]

ई हड्डी आप नजराने के तौर पर रख सकत हो

वकील बाबू बशर्ते आप कोर्ट मा जज के सामने

बेवकूफ बनकर खड़े रहने को तैयार हो अब

फैसला आपको करना है कि आप समझदार हैं या

बेवकूफ हैं

इतना समझदार तो हूं मैं इंस्पेक्टर बलवंत

कि मुझे रिश्वत देने के जुर्म में मैं

तुम्हें सलाखों के पीछे कैद करवा सकता

हूं।

वाकई आप बड़े बेवकूफ है वकील बाबू। क्योंकि

नोटों से भरा ई बैग आपको किसी ने लाके

दिया। आपने अपने हाथों से उसे खोला। मैंने

तो उसे छुआ तक नहीं। मगर यह रिश्वत है जो

मुझे तुम्हारी आंखों के सामने दी गई है।

मैंने मैं तो यहां था ही नहीं।

सबूत आपके पास है नहीं। और गवाही ई देगा

नहीं हड्डी डाल के।

साहब भुजंग बाबू आ गए हैं।

से जाके कह दियो। यस सर।

[प्रशंसा]

चलते हैं।

आई एम मिस्टर पब्लिक प्रोसक्यूटर।

मिसेज मोहन सिन्हा का इल्जाम है भुजंग

बाबू के खिलाफ कि इन्होंने इनके पति मोहन

सिन्हा का कत्ल किया है। इसका कोई सबूत

या कोई गवाह है आपके पास? जी नहीं योर

ऑनर।

पुलिस की रिपोर्ट में गवाह और सबूत का कोई

जिक्र ही नहीं है।

लेकिन एक बात जरूर है सरकमस्टशियल एविडेंस

यानी हालात का इशारा

मिस्टर भुजंग की ओर है। हालात के इस इशारे

को जुर्म साबित करने के लिए

कोई सबूत कोई गवाह है आपके पास?

जी नहीं फिलहाल तो नहीं है। तो फिर आप

अदालत का वक्त क्यों जाया कर रहे हैं?

मैं चंद दिनों की मोहलत की दरखास्त करना

चाहता हूं। यू आर ऑनर। हो सकता है इस बार

पुलिस कोई गवाह ढूंढने में कामयाब हो जाए।

पुलिस अपनी तहकीकात पूरी कर चुकी है। यौन

हमका कोनू सबूत कोनू गवाह नहीं मिला। ई तो

एक बहुत ही सिंपल सा सुसाइड केस लगता है।

यानी कि आत्महत्या। ये ये झूठ बोल रहा है

सरकार।

जहां भूजंग में मेरे पति को मारा। वहां 10

20 नहीं 50 60 आदमी थे। और वो सब अंधे

नहीं थे बहरे नहीं थे। सिर्फ पुलिस ये

कैसे कह सकती है कि किसी ने कुछ देखा

नहीं। कुछ सुना नहीं।

श्रीमती जी आप कहती हैं कि आपके घर के

सामने अंधे और बहरे नहीं रहते। लेकिन मौके

वारदात पर जब पुलिस पहुंची तो वहां अंधे

बहरे तो क्या लूले और लंगड़े भी नहीं थे।

क्योंकि वहां कोई था ही नहीं।

यू आर ऑनर।

कोई गवाह और सबूत ना मिलने की वजह से मेरा

मौकल बेकसूर साबित होता है। इसलिए मैं

अदालत से अपील करता हूं कि मेरे मौकल को

इज्जत से बरी करें।

मिस्टर पब्लिक प्रोसकटर

आप कुछ कहना चाहते हैं? नहीं नहीं साहब

मुझे कुछ कहना है।

पुलिस चाहे कुछ भी कहे साहब लेकिन सब अंधे

बहरे नहीं होते हैं। मैं मैं गवाही दूंगा।

जज साहब मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देखा

है।

योर ऑनर।

मुझे खुशी है कि मुर्दों की बस्ती में कोई

तो मर्द निकला।

मैं दीनाना जी को इस केस में गवाह के रूप

में पेश करने की इजाजत चाहता हूं। योर ऑनर

परमिशन

ग्रांटेड

आइए तिनारा जी आइए।

गीता पर हाथ रख के कसम खाइए कि जो कहूंगा

सच कहूंगा। सच के सिवा कुछ नहीं कहूंगा।

मैं जो कहूंगा सच कहूंगा।

हां धेनू चाचा आप इस अदालत को यह बताइए कि

आपने क्या देखा और क्या सुना। साहब मैंने

देखा कि भुजंग और उसके आदमी सड़क के

बीचोंबीच मोहन बाबू को ऐसे मार रहे थे

जैसे वो उन्हें जान से मार देना चाहते

हैं। और क्या देखा?

फिर मैंने देखा कि वो उन्हें गाड़ी में

डाल के ले गए। चाचा

तुमने भुजंग बाबू और उनके साथियों को मोहन

सिन्हा को मारते देखा? जी हां, मैंने अपनी

आंखों से देखा है। मरते देखा साहब जिस तरह

से वो मार रहे थे उससे तो अंदाजा अंदाजा

नहीं तुमने मरते देखा

जी नहीं

योर ऑनर तो मतलब बिल्कुल साफ है। इस आदमी

की गवाही से यह साबित नहीं होता कि भुजंग

बाबू और उसके साथियों ने मोहन सिन्हा का

कत्ल किया है। कत्ल नहीं किया तो कत्ल

करने की कोशिश तो की। मामला कत्ल का है।

कत्ल करने की कोशिश का नहीं। कोशिश के

बगैर कत्ल नहीं होता। मिस्टर भाटिया

योर ऑनर। किसी इंसान पर कातिलाना हमला

करने की सजा तो भुजंग बाबू को मिलनी ही

चाहिए। नहीं नहीं इस इंसान की गवाही से

सिर्फ पब्लिक प्लेस में शांति भंग करने का

इल्जाम साबित होता है।

ये अदालत मिस्टर भुजंग को सात दिन के कैद

और ₹200 जुर्माना करार देती है।

मैं वापस आने तक इसको जिंदा रखना।

मैं खुद इसका टाइम अब करूंगा।

[प्रशंसा]

[संगीत]

क्यों डॉक्टर मैं बीमार नहीं तो

घायल तो हूं ना।

चल मेरा नाम ले रजिस्टर में।

[संगीत]

[संगीत]

टिकट प्लीज

एक टिकट रानीगढ़ दो टिकट

50 पैसे और दो 50 पैसे और दो तुम नहीं

सुधरोगे गिरजा वो क्या है मैंने तुम्हें

स्टेशन पे देख लिया था एक लड़की का अकेले

सफर करना ठीक नहीं इसलिए मैंने कहा चलो

तुम्हारा बॉडीगार्ड बन के साथ चलता हूं और

फिर एक बस की टिकट में एक बॉडीगार्ड मिलना

कितना इतना अच्छा है और ऊपर से मैं कुछ ले

भी नहीं रहा।

भाई साहब खड़े क्यों हैं? तीन आदमी की जगह

है। बैठ जाइए।

हटिए जरा। इधर आ जाओ ना।

बैठने दो बेचारे को। हो रहा हूं। हो रहा

हूं।

थैंक यू। कोई बात नहीं। मैं आपसे नहीं

इनसे बात कर रहा हूं। आप रानीगढ़ जा रही

हैं? जी हां। अरे मान ना मान। मैं तेरा

मेहमान हम कहीं भी जा रहे हो आपको इससे

क्या मतलब? जी मुझे सर्किट हाउस जाना है

और रानीगढ़ बस स्टॉप से सर्किट हाउस का

रास्ता मुझे नहीं मालूम। सर्किट हाउस? वो

नए सरकारी वकील साहब से मिलने। जी वो मेरे

बड़े भाई हैं।

बड़े भाई। अरे पहले क्यों नहीं बताया मैं

खामखा आप पे नाराज हो रहा था। वो क्या है

साथ में कोई जवान लड़की हो ना? तो आदमी

ऐसे ही सब पे शक करने लगता है। ये है

गिरजाक। हर किसी का बिन बुलाया मेहमान। अब

देखिए ना कुछ ही देर पहले इसने अपने आप को

मेरा बॉडीगार्ड बना लिया। वो भी तब तक जब

तक कोई खतरा ना हो। जहां खतरा नजर आया ये

9 दो 11 हो जाएंगे।

लेकिन आप चिंता मत कीजिए। मैं आपका साथ

नहीं छोडूंगा। मैं आपको सर्किट हाउस

पहुंचा दूंगा। कहिए कैसे जाएंगे? टैक्सी

में, ऑटो में, टांगे में या टांगों पर?

मुबारक हो। आपको अपना गाइड मिल गया। लेकिन

जरा संभल कर इसकी कीमत अदा करनी पड़ेगी।

है ना?

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

आप भी कमाल करती हैं।

मैं

मैं आपको लेने स्टेशन गया था। और आप कहीं

नजर ही नहीं आई।

देखिए मैं आपके लिए गाड़ी लाया हूं। हां

चलिए मेरे साथ चलिए।

देखिए आप एक शरीफ लड़की की तरह मेरे साथ

गाड़ी में चलिए। ये बस में जाना अच्छा

नहीं लगता है। हां चलिए

चलिए ना

चलिए चलिए।

आप अपनी मर्जी से जा रहे हैं या

अगर आप खुद ना जाना चाहे तो आपको कोई

जबरदस्ती नहीं लेके जा सकता।

[संगीत]

[प्रशंसा]

भाई

[प्रशंसा]

आइए आइए बैठिए रहीम मैडम को बैठने दे

संभाल के ये आप उसकी बातों को बुरा मत

मानिएगा उसकी बातों को मैंने भी बुरा नहीं

माना बिलकुल नहीं माना

कौन था ये मंगा बस यूं समझ लो कि सारा

रानीगढ़ इन लोगों के इशारों पर चलता है

मैं तो कहूंगा कि मंगा जैसे लोगों के साथ

पंगा मत लेना कहीं उस लड़की को बोलो। नहीं

नहीं नहीं कुछ नहीं उसकी चिंता मत करो। वो

शहर में डॉक्टरी पड़ती है। अपनी हिफाजत

खुद कर लेगी। अरे ड्राइवर साहब चलो भाई

गाड़ी ले लो। चले ना चलो चलो चलाओ गाड़ी।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

नीचे उतरने की जरूरत नहीं है। पलट जाओ।

आधे घंटे के बाद यही बस वापस जाएगी। हां,

आधे घंटे बाद जाएगी। अच्छा है ना? अंदर

इंतज़ार कर लेंगे। आ जाओ अंदर गुरु। शट अप।

मुझे तो यहीं उतरना है। जमीन पर पैर मत

रखना। क्यों? जमीन तेरे बाप की है क्या?

[संगीत]

[संगीत]

खबरदार

हमारे बीच में कोई नहीं आएगा।

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

अरे ओ उग्रवादी, हिंसा फैला तो गांधी के

देश मा हैं? झगड़ा मैंने नहीं शुरू किया

इंस्पेक्टर साहब। इसने किया। वो देखिए बस

के दरवाज़े पे चिप-चिपकाई है। ज्यादा बक-बग

नहीं, चला थानेवा। लेकिन इंस्पेक्टर साहब,

मेरी बात लेकिन लेकिन कुछ नहीं। अंदर ले

जाऊंगा और सारी हवा निकाल दूंगा हड्डी डाल

के। देखिए इंस्पेक्टर साहब मैं एक शरीफ

आदमी हूं और इस शहर के नए प्रोसकटर अरविंद

कपूर का छोटा भाई हूं। ओ

तो तुम अरविंद कपूर के छोटे लल्ला हो।

पब्लिक प्रोसकटर के भाई हैं। सीधी तरह

चलाओ। नहीं तो धक्के मार के ले जाऊंगा।

चला

इंस्पेक्टर तुम नहीं जानते तुम कितनी बड़ी

गलती कर रहे हो। बगैर किसी जुर्म के तुम

मुझे लॉकअप में नहीं बंद कर सकते। खामोश।

एक भी लफज़ जबड़े से बाहर निकाला ना तो

जिंदगी भर पछताना पड़ेगा बबुआ। साहब आपके

भाई को पुलिस पकड़ के थाने ले गई। कब? कहां

से? अभी बस के अड्डे से।

क्या बात है? इंस्पेक्टर बहुत मशरूफ दिखाई

दे रहे हो। अंधे हो का? जो दिखाई दे रहा

है वही काहे पूछत हो? इंस्पेक्टर।

कहिए सरकारी वकील साहब। का बात है?

उस ओर तो तुम देखते नहीं जहां भुजंग बड़े

से बड़ा जुर्म करता है। उन लोगों की चीखो

पुकार तो तुम्हें सुनाई नहीं देती जिन पर

भुजंग बड़े से बड़ा अत्याचार करता है।

आपको दर्द कहां हो रहा है? काहे हो रहा

है? इ हम अच्छी तरह समझते हैं वकील बाबू।

परंतु हम का करें? हम तो कानून की हड्डी

हैं। इसलिए मजबूर हैं। सड़क पर दंगा करते

आम जिंदगी में खलल डालते। अमन और शांति को

भंग करते हमने तुम्हारे भाई को गिरफ्तार

किया है। और हमका पूरा यकीन है कि जो दफा

हमने लगाई है ऊ के तहत तुम अदालत में अपने

भाई के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग

करोगे। ठीक उसी तरह जिस तरह तुमने भजन

बाबू के लिए की थी।

यह सच्चाई तुम्हारे बाप की जागीर नहीं है

जिसे तुम अपनी मर्जी से तोड़ मरोड़ सको।

इंस्पेक्टर बलवंत।

फिलहाल यह रहे मेरे भाई की जमानत के

कागजात।

तकलीफ तो होगी तुम्हें।

दर्द भी होगा, कहां होगा, कितना होगा यह

भी मैं जानता हूं। पर क्या करूं? मजबूर

हूं ना इंस्पेक्टर बलवंत। बड़ा भाई जठरा

पढ़ लिया हो तो जल्दी रिहा कीजिए मेरे भाई

को।

भैया

भैया।

एक बात हड्डी से बांध लो बबुआ के इलाके

में होने वाले किसी भी जुर्म का ना तो

कोनू गवाह होत है और ना ही कोनू सबूत

पुलिस की हड्डी मजबूर है और जनता की हड्डी

लाचार

ऐसा क्यों भैया

वो इसलिए अजय

कि यहां के लोग अंधे और बहरे हो चुके हैं।

उनकी आंखों पर भुजंग के गुंडों के डर की

पट्टी बंधी हुई है। और उनके कानों में इन

वर्दी वाले गुंडों के डर की रुई ठुसी हुई

है। तुम्हारा भाई आजाद है। तशरीफ़ ले जाइए।

सच इतना कड़वा तो नहीं होता इंस्पेक्टर

बलवंत जितना तुम्हें लग रहा है। हम आजा

आजा।

भाभी

तुम

यहां क्या कर रही हो? तुम इसे जानते हो?

हां भाभी बहुत अच्छी तरह से जानता हूं

इसे। अच्छा

देख रही हूं घर आके भाभी से मिलने से पहले

तुम बहुतों से मिल चुके हो। बहुतों से

नहीं भाभी इनसे जिनसे पहली बार मिलने से

ही अफसोस होने लगता है। अरे भाई क्यों इस

मासूम को दोष दे रहे हो? बैठो बैठो।

तुम्हारी मुसीबतों की कहानी तो उन उन

गुंडों से शुरू होती है ना। गुंडों से

नहीं भैया इनसे शुरू होती है। इनकी मैंने

तलफदारी की और ये बस से उतर कर मटक कर

गुंडों के साथ चली गई। मैंने ऐसा क्यों

किया? जानना चाहते हैं आप? जी। आप इस

इलाके में नए हैं। आप नहीं जानते मंगा एक

पागल आदमी है। वो कुछ भी कर सकता था। वो

बस को आग भी लगा सकता था। और उसकी वजह से

कितने मासूम लोग मारे जाते थे। अरे जाने

दीजिए मैडम। मेरे होते हुए बस में आग लगा

देता। आग लगाने से पहले मैं उसी को जलाकर

राख कर देता। मगर यह बेचारी कैसे जानेगी

कि हमारे देवर जी इतने बड़े पहलवान हैं?

जी

पहलवान अरे भाई साहब आपके भाई तो चैंपियन

है, हीमैन है, हीरो हैं। अरे इन्होंने

मंगा को ऐसे दो चार हाथ जमाए कि उसको दिन

में भी तारे नजर आने लगे। मैं तो आपका फैन

हो गया हूं। ओए ओए ओए ओए ओए मेरा फैन बनकर

तू मुझसे पैसे तो नहीं मांगेगा ना? अरे

देखिए देखिए चैंपियन आप मेरी फैनगिरी का

मजाक में तोड़ा ये देखिए मैंने आपका सामान

यहां तक पहुंचाया पैसे लिए नहीं आप मुसीबत

में फंसे इनको खबर देने आया पैसे मांगे

नहीं लेकिन अगर आज शाम को आप लोग मेरे

मोहल्ले में नहीं आए तो यहां आने और

न्योता देने के पैसे मांगूंगा हां क्या हो

रहा है तेरे मोहल्ले में अरे आज मेरे

चचेरे भाई की शादी है जीचा जी पायल को

जीचा जी

आपके लिए रिहाई के आर्डर लाया हूं हां हां

मांगा तभी मेरा बदन आज ज्यादा ही खुश लग

रहा है और हाथ में भी अलग टाइप का खुजली

हो रहा है।

खुजली तो होगी ना जीजा जी दीनू चाचा की

याद जो आ रही है

बस आज आपकी यहां सजा खत्म हुई।

और वहां दीनू चाचा की जिंदगी खत्म हुई।

बहू रानी घर में नमक खत्म हो गया। मैं

बाजार से अभी लेकर आता हूं। चूल्हे पे दाल

चली हुई है। आप जरा ध्यान रखिएगा। ठीक है।

[संगीत]

अरे शंकर ए शंकर अरे

क्या हो रहा है?

धीरू चाचा धीरू चाचा आज आप घर से बाहर

क्यों निकले? जाइए जाइए घर जाइए। क्यों?

क्या बात है? आज भुजंग की सजा खत्म हो गई

और वो आजाद हो गया है।

इंस्पेक्टर साहब इंस्पेक्टर साहब

इंस्पेक्टर साहब मुझे बचाइए बचाइए मुझे।

वो मुझे मार डालेगा रोकिये उसे। कौन किसे

मार डालेगा? किसे रोकूं? इंस्पेक्टर साहब,

भूजंग उसके आदमी चारों तरफ फेल हुए हैं

मुझे मारने के लिए। तुमका कैसे मालूम कि

तुमका भुजंग बाबू जान से मारना चाहत है

साहब भूल गए आप उस दिन कचहरी में आपके

सामने मुझे धमकी दी थी

ई तरह की धमकियों पर अगर पुलिस वाले

कारवाई करने लगे ना तो पुलिस वाले थाने

मनाही लोगों के घरों में चौकीदारी करते

दिखाई देंगे क्या कह रहे हैं आप साहब सब

कुछ तो कीजिए वो भुजंग मुझे जान खामोश

भुजंग बाबू ने अपनी सजा काट ली है अब वो

एक आजाद शहरी है हम कुछ नहीं कर सकता हूं

हड्डी डाल के कुछ कीजिए साहब

और फिर घटना हुए बिना पुलिस तो कुछ कर ही

नहीं सकत हवलदार ले जा इनको साहब आप मुझे

मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। याद रखना

मेरा खून आपकी गर्दन पे होगा इंस्पेक्टर

याद रखना तोड़ दो मुझे

[संगीत]

ओ ओ

ओ

[संगीत]

बहुत बोलता है रे तू।

बहुत बोलता है।

अब तेरा टाइम अप हो गया।

बीनू चाचा

अरे वो तो चले गए।

आरती भारती मैं चलता हूं। दिन भर कोर्ट

में हूं। ओके। देखिए तीनू चाचा काफी देर

से बाजार गए हैं। जाते हुए जरा देखते

जाइएगा और उन्हें जल्दी घर भेज दीजिए। ओके

हुजूर ओके

हवलदार लाश का ठिकाना लगाई दियो। पीू चाचा

ठहरो

ओ गॉड

इंस्पेक्टर बलवंत

ये ये कैसे हुआ?

यहां ना तो किसी ने कुछ देखा है और ना

सुना है।

इस वर्दी का कुछ तो ख्याल करो इंस्पेक्टर

बलवंत।

ये लाश किसी जानवर की नहीं एक इंसान की

है। एक बूढ़े लाचार बेसहारा इंसान की। और

आप इसे इस तरह उठवा रहे हैं जैसे ये लाश

नहीं कोई कचरा हो। जिसे आप अपने मालिक का

रास्ता साफ करने के लिए उठवा कर बाजू में

रखवा देंगे।

इंस्पेक्टर बलवंत यहां जो कुछ भी हुआ है

वो किसी वीराने में नहीं भरे बाजार में

सबके सामने हुआ है। वकील बाबू ई तोहार

अखाड़ा नहीं तोहार अखाड़ा वो कचहरी की चार

दीवारी का बीच है। वहां चलाइएगा अपना

पैतरा हड्डी डाल के। अब दफा हो जाइए यहां

से। चला जाऊं। यह देखने के बाद भी कि एक

थानेदार कत्ल की वारदात की तहकीकात करने

के बजाय उस पर पर्दा डालने की कोशिश कर

रहा है। आप अभी और इसी वक्त पंचनामा बनाइए

इंस्पेक्टर बलवंत और पूछिए इन सब लोगों को

इस हादसे के बारे में। पूछे

अभी पूछत है इसी वक्त पूछत है

गांव वालों आप लोगों में जोनु भी इ हत्या

के बारे में कुछ भी देखा हो सुना हो या

जानत हो वो हमारे संग थाने चलने को तैयार

हो जाए चलिए

अरे

देखा वकील साहब मैदान एकदम साफ हुई गवाह

हड्डी हटा के

मैदान साफ हुआ नहीं

साफ कर दिया है तुमने

मगर एक बात याद रखना

मैं इस मैदान में किसी ना किसी को लाकर ही

रहूंगा

[प्रशंसा]

[संगीत]

अरे आइए आइए श्रीमान वकील साहब ए कुर्सी

दे रे

क्या चलेगा ठंडा या गरम

कहिए कैसा आना हुआ तुम अच्छी तरह जानते हो

कि मैं क्यों आया हूं मैं कोई अंतर्यामी

या तांत्रिक तो हूं नहीं हां अंदाजा लगा

सकता हूं जब टाइम अप हो जाता है तो बकरा

कसाई खाने में जाता है काटने के लिए और

कसाई जाता है काटने के लिए। अब तुम ही

बताओ कि तुम बकरे हो या कसाई। तुम जैसे

बकरे के लिए तो मैं कसाई था, कसाई हूं और

कसाई रहूंगा।

मुझ पर इस उपकार का कोई खास कारण? हां।

दीनू चाचा का कातिल। दीनू चाचा।

ये दीनू चाचा कौन है? वही अपना सर्किट

हाउस का चौकीदार। हां, बहुत बोलता था।

सच बोलता था।

सच बोलने की बीमारी ने उसका

टाइम अप कर दिया।

वकील साहब, यह तुम्हारा मेरा फाइट नहीं

है। वरना मैं तुम्हें अब भी खलास कर देता।

जाओ।

क्यों फोकट में तुम मेरा टाइम खराब करने

आए हो? मैं तुम्हारा टाइम खराब नहीं

तुम्हारा टाइम अप करने आया हूं। अरे ये तो

मेरे ही गले पड़ रहा है।

वकील साहब किस बिना पे तुम ये नेक काम

करने जा रहे हो।

जानते हो बिना सबूत के बिना गवाह के तुम

कचहरी में कैसे लगोगे?

ठीक वैसे जैसे बिना कपड़े का कोई आदमी गलत

मिसाल दे रहे हो तुम भुजंग।

सही मिसाल मैं तुम्हें देता हूं। सुनो

कानून एक ऐसा अजगर है जो कहां छुपा बैठा

है तुम नहीं जानते। जिस दिन उसकी गिरफ्त

में आ गए

बिना चबाए निगल जाएगा तुम्हें।

[संगीत]

अब इसके टाइम के बारे में सोचना पड़ेगा।

बहुत रात हो गई। चलो सो जाओ।

तुम सो जाओ भारती। मुझे कुछ काम करना है।

कोई काम नहीं करना। मैं तुम्हें तुमसे

ज्यादा जानती हूं। समझती हूं। बस करूं ये

सोच-सच के परेशान होना और चलो सो जाओ।

अरविंद

तीनों चाचा की मौत से मुझे भी धक्का

पहुंचा है। मगर इसका मतलब ये तो नहीं। तुम

समझती नहीं हो भारती। मेरी मजबूरी, मेरी

बेबसी, मेरी लाचारी यह है कि मैं उन सब

लोगों को जानता हूं। जिन्होंने दिन दहाड़े

सड़क पर राह चलते लोगों की आंखों के सामने

दीनू चाचा का कत्ल किया है और मैं कुछ

नहीं कर सकता

क्योंकि सबूत तो ये लोग गायब कर देते हैं

और कोई गवाह इनके खिलाफ सबूत देने को

गवाही देने को आता नहीं है

और फिर इससे बढ़कर ताज्जुब की बात क्या है

भारतीय कि यहां मुजरिम जुर्म करता है वो

भी खुलेआम

और ऊपर से कह कहे लगाकर कबूल भी करता है

कि मैंने यह जुर्म किया है मगर कानून

उसे पकड़ना तो दूर उससे हाथ भी नहीं लगा

सकता। हाथ लगाना तो दूर की बात है भैया।

यह कानून तो उसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं

देख सकता। भुजंग जैसे लोगों की दहशत के

सामने कमजोर है कानून। उसकी दौलत के सामने

गरीब घिस गया। घिस घिस कर पुराना हो गया

है कानून।

तुम कानून नहीं जानते अजय।

किसी भी चीज को जाने बिना रिजेक्ट नहीं

करना चाहिए।

तुम लोगों में मेरा मतलब है कि युवा पीढ़ी

यानी यंगर जनरेशन में खराबी यही है। तुम

लोग समझते हो जो चीज पुरानी है वो नकारा

है। हमारे समझने की बात नहीं है भैया। यही

सच है। आप चाहे जो भी कर लो लेकिन भुजंग

को दीनू चाचा के मौत की सजा कानून नहीं दे

सकता। दीनू चाचा जैसे लोगों की मौत के साथ

में इंसाफ मरता रहा है।

और मरता रहेगा। तुम्हारा यह सोचने का

अंदाज सही नहीं है। अजय इंसाफ अमर है।

इंसाफ कभी नहीं मरता। उफ भैया आप जानते

हैं आपका प्रॉब्लम क्या है? आप एक बहुत

अच्छे इंसान हैं। अमावस की अंधेरी रात में

जलते हुए उस दिए की तरह जो जल तो रहा है

लेकिन उसकी रोशनी अंधेरे को नहीं मिटा

सकती। और आपका अच्छा होना बुराई की

मौजूदगी का एहसास दिलाता है। लेकिन उसे

मिटा नहीं सकता। सवाल अच्छे और बुरे होने

का नहीं है अजय। सवाल है कानून में

विश्वास रखने का। अगर लॉ एंड ऑर्डर ना हो

तो जानवर और इंसान में फर्क क्या रह

जाएगा? ये कानून का रास्ता।

[संगीत]

एक मिनट।

एक मिनट अजय।

भोजंग पर काबू पाने का रास्ता मुझे नजर आ

रहा है।

[संगीत]

का चाहिए तुमसे कुछ पूछना चाहता हूं। किस

बारे में?

दीनू चाचा की मौत के बारे में।

पहली बार मौत देखी है क्या?

यहां रहोगे

तो बहुत मौत देखोगे।

रोज यहां कोई ना कोई मरता रहता है।

मरता नहीं मार दिया जाता है। और यही बात

मैं तुमसे पूछना चाहता हूं कि तुमने क्या

देखा?

हम ना कुछ देखता हूं ना कुछ सुनता हूं। ये

कैसे हो सकता है? तुम्हारी दुकान के सामने

दिन दहाड़े खुलेआम एक इंसान को जान से मार

दिया जाता है और तुम कुछ देखते नहीं कुछ

सुनते नहीं हम दिन में सोता हूं लगता है

झूठ बोलने की कुछ खास प्रैक्टिस नहीं है

तुम्हें वकील बाबू

हम कभी झूठ नहीं बोलता हूं खबरदार अगर कभी

ऐसा इल्जाम हम पर लगाया तो तो हम तुम जान

से मार डालोगे

भुजंग ने भी यही कहा था उसमें और तुम्हारे

में भी कोई फर्क नहीं।

[संगीत]

ओम

[संगीत]

दीनू चाचा कहता था कि लोहार देखने में तो

बहुत खूंखार लगता है मगर अंदर से बहुत

नर्म है वो एक गहरी चोट खाई हुई आत्मा है

वो

क्या देखा था उसने तुम्हारे में जो ये सब

बातें कही थी उसने

तीनू चाचा मेरा कोई नहीं लगता था

मगर वो यहां पैदा हुआ था यहां मर गया और

ताज्जुब की बात है कि उसकी मौत पर एक भी

इंसान को कोई फर्क नहीं पड़ा

उसके कत्ल का कोई एक भी सबूत नहीं कोई एक

भी गवाह नहीं

[प्रशंसा]

जब मैं छोटा था

ये जगह ऐसी नहीं थी।

[संगीत]

लोगों के चेहरे पर डर नहीं हंसी थी। एक का

दर्द दूसरा बांटता था।

भाईचारी और दोस्ती की भावना भरपूर थी।

मगर आज लगता है सब कुछ मर गया है।

हां हां मरे हुए और डरे हुए लोगों में कोई

फर्क नहीं होता है। अब तुम चलो यहां से।

हम अपना काम करूंगा।

ठीक है। तुम यहां नहीं बोलोगे तो मैं

वारंट निकलवा कर तुम्हें पुलिस स्टेशन

बुलवाऊंगा।

और वहां तुम्हारा मुंह खुलवाऊंगा। ओए अगर

हम नहीं चाहो तो तुम क्या तुम्हारा बाप भी

हमारा मुंह नहीं खुलवा सकता है। समझा?

और रही वारंट की बात

तो वो तुम्हें यहां कभी नहीं मिलेगा।

[संगीत]

नहीं मिला ना वारंट वकील साहब।

तुम आ गए हो तो वारंट भी आ जाएगा। अरे हम

तो अपनी मर्जी के मालिक हैं वकील साहब।

वारंट में तो दो-तीन लोगों की मर्जी चलती

है। अभी-अभी तुम्हारा इंस्पेक्टर आएगा और

कहेगा हम का बताएं वकील साहब

हम बहुत कोशिश किए रहे परंतु का करें शाम

के 5:00 बज गए। हम का बताएं वकील साहब हम

तो बहुत कोशिश किए रहे परंतु का करें शाम

के 5:00 बज गए थे।

तुम्हारी वारंट वाली धमकी तो नाकाम हो गई

वकील बाबू।

अब पूछो का पूछना चाहते हो? पूछो।

मैं ये जानना चाहता हूं कि तुम रात में

क्या काम करते हो और किसके लिए करते हो।

हम सिर्फ उतना ही बताऊंगा वकील साहब।

जितना हम बताना चाहूंगा। नहीं तुम वो सब

कुछ बताओगे जो मैं जानना चाहता हूं।

हमारे बारे में जितना कम जानोगे वकील

साहेब

तुम्हारी सेहत के लिए उतना ही अच्छा

रहेगा। जानता तो सब कुछ हूं मैं तुम्हारे

बारे में। अंधेरी रातों में लोहा पिघलाकर

तुम किसके लिए क्या-क्या बनाते हो सब कुछ

पता है मुझे। पर मैं तुम्हारे मुंह से

सुनना चाहता हूं।

हम जब तक नहीं चाहूं हमारा मुंह कौन खुलवा

सकता है वकील साहब।

लेकिन हां

अगर तुम ₹ लाख हमको दो तो हम तुमको सब कुछ

बता दूंगा।

₹ लाख हम इतने सारे रुपए क्यों?

पूछो मत कुछ। सिर्फ यह बताओ दे सकते हो या

नहीं दे सकते? नहीं नहीं सरकार गवाही के

लिए किसी को रुपएवपए नहीं देती।

कोई बात नहीं वकील बाबू अगर रुपए नहीं दे

सकते हो तो हमारी बातचीत

समझो यहीं खत्म

रुक जाओ जगन्नाथ

अगर बताना कुछ नहीं है तो कुछ सुनते जाओ

इस इलाके में जुल्म और अन्याय की हुकूमत

चलती है। इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है

यहां।

एक शैतान ने जिसका नाम भुजंग है लोगों के

रोए रोए में अपना डर बिठा दिया है। दहशत

पैदा कर दी है। क्या कोई एक ऐसा मर्द नहीं

है यहां जो भुजंग के सामने खड़ा हो सके?

उसके गुंडों को जुल्म करने से रोक सके।

धीरे-धीरे ये इलाका कब्रिस्तान और श्मशान

घाट में बदल जाएगा। और तुम होके सच बोलने

के लिए रुपए मांग रहे हो कि तुम्हारे अंदर

यहां कुछ है या नहीं?

यह पूछने उस वक्त आना था वकील साहब जब

हमारे सीने में आग नहीं लगी हुई थी। अब

हमसे कोई नहीं पूछ सकता। शराब की बोतल और

कोयले की भट्टी यही दो जानते हैं हमें।

अंदर की आग को बाहर निकालोगे तभी तो लोग

जान पाएंगे तुम्हें। सुन नहीं सकोगे वकील

साहब। जल जाओगे।

कानों में शीशा पिघलने लगेगा।

दहकता हुआ अंगारों की तरह सच कोई सुन नहीं

सकता।

मैं समझता हूं कि जितना तुम चीख रहे हो

उतना दर्द नहीं है तुम्हारे अंदर

और जितना तुम ये भड़क रहे हो ना उतनी आग

भी नहीं है तुम्हारे अंदर। वकील साहब हम

तुम्हारी चाल को अच्छी तरह समझता हूं और

हम तुम्हारी चाल में नहीं आने वाला।

अगर नहीं मालूम तो इतना जान लो वकील साहब।

कि हम सारी दुनिया को अपना तलवा के नीचे

रखता हूं।

हम खुद अपनी मर्जी से चल के यहां आया हूं।

सिर्फ तुम्हें यह बताने के लिए कि हम

भुजंग के खिलाफ गवाही दे सकता हूं। हम

गीता की कसम खाकर डंके की चोट पे उसके

गिरेबान पे हाथ डाल सकता हूं। लेकिन क्या

तुम्हारा कानून फांसी का फंदा उसके गले तक

पहुंचा सकता है? नहीं वकील बाबू नहीं। कहा

है कि तुम्हारा कानून कमजोर है। वो कभी भी

टूट सकता है। वक्त आने पर बिक भी सकता है।

अरे तुम्हारा कानून तो एक ऐसी दीवार है

जिसमें हजारों छेद है। एक ऐसी हथकड़ी है

जो किसी भी चाबी से खुल सकती है। हम

तुम्हारे ऐसे कानून के लिए ना कभी कुछ

बोलूंगा और ना ही कुछ करूंगा।

आइए

बैठिए।

सब ठीक है। चिंता की कोई बात नहीं। मां और

बच्चे दोनों अपनी-अपनी जगह बिल्कुल ठीक

हैं। सिर्फ तनाव और चिंता से दूर रहना

होगा। यही तो मुश्किल है डॉक्टर। क्यों?

तनाव और चिंता से मुक्ति कैसे मिल सकती

है? जबकि मेरे पति दिन रात लीन रहते हैं

अपने काम में। काम ही उनकी पूजा है।

ऐसा हाल है जैसे कि रानीगढ़ की समस्याओं

को अपना लिया हो। हर वक्त यहां के मसलों

को हल करने का ही सोचते रहते हैं। मैं समझ

सकती हूं। फिर भी आपकी सेहत की समस्या पर

ध्यान देना भी जरूरी है। नहीं तो सिर्फ

आपको ही नहीं बल्कि आपके बच्चे की जान को

भी खतरा हो सकता है। अजय इस बात को मामूली

बात मत समझना। तुम सबको मिलकर किसी भी

हालत में यह देखना है कि तुम्हारी भाभी को

कोई परेशानी ना हो। भाई आजकल बहुत परेशान

है।

दीनू चाचा के केस में कानूनी तौर पर भुजंग

के खिलाफ अभी तक कुछ भी नहीं कर पाए।

कानून की कमजोरी एक लाचारी बनकर उन्हें

अंदर ही अंदर खाए जा रही है। मुझे तो लगता

है कि अब उनकी मदद के लिए मुझे ही कुछ

करना पड़ेगा। अगर किसी तरह हम मंगा से

कबूल करवा लें कि दीनू चाचा के कत्ल में

वो भी भुजंग के साथ था। तो भुजंग को फांसी

के फंदे से कोई नहीं बचा सकता। वो कैसे?

वो तुम मुझ पर छोड़ दो। गुड आईडिया। तुम

बातों ही बातों में मंगा से कहलवा लो। मैं

उसकी आवाज रिकॉर्ड कर लेता हूं।

कह तो दिया ठीक है जी। फिर उसे क्या कहता?

चोट लग गई।

मैं फिर पूछता हूं कैसा लगा ये निशान? कौन

है इसका जिम्मेदार?

[संगीत]

अजय

वकील बाबू का छोटा भाई

लेकिन मैंने उसे बहुत मारा ले लिया उससे

बदला उसकी मैंने बहुत पिटाई की हमारे

कानून में पिटाई के बदले पिटाई नहीं सफाई

होता है वो भी जड़ से जड़

यानी वकील बाबू भुजंग बाबू

ये जड़ जरा मोटे किस्म की है सरकारी वकील

है वो सब कुछ हिल जाएगा

इसलिए जो कुछ भी करना हो सोच समझ करना

होगा किसी दूसरे टाइप से। तुम ठीक बोलता

है।

उसके टाइम मिशन का

टिक टिक बंद करने का टाइप भी दूसरा होगा।

[संगीत]

पागल आदमी लगता है बेवकूफ कहीं का। अबे

जगन्नाथ भाई तुम सही वक्त पर आए तो मेरी

जान बची। अरे मगर हमारी बोतल नहीं बची।

देखो तो। अंधों की तरह गाड़ी चलाता है। ना

दाई देखता है ना बाएं। किसी की जान चली

जाती तो। वैसे जगन्नाथ भाई आपका हां

अरे कहां चल दिए

इसे मेरी जान बचाने के बदले में कीमत ना

समझना वो तुम्हारी भरी हुई बोतल को ना

बचाने के बदले में एक नई बोतल की रकम है

ये मगर हमरी भी एक शर्त है शर्त

हमारे साथ पीना होगा

ओके आइए

[संगीत]

हमेशा अकेले ही पीते हो।

अकेलापन तुम्हें बहुत पसंद है।

हम अकेला जीता हूं। अकेला पीता हूं।

ना कोई हमारा ना हम किसी का।

कल तक ये बात सच थी। मगर आज सच नहीं है।

मेरी जान बचाकर तुमने यह साबित कर दिया है

कि इंसानियत के नाते तुम मेरे दोस्त हो और

तुमसे नई जिंदगी पाकर

मैं भी हमेशा के लिए तुम्हारा दोस्त हो

गया हूं। ये जो रिश्ता तुमने अभी-अभी

जोड़ा है समझो यहीं शुरू हुआ और यहीं

खत्म।

कहा है कि हम कोनो रिश्ता में विश्वास

नहीं रखता हूं। मगर तुम्हारी आंखें तो कुछ

और ही बता रही है। इनमें साफ दिखाई दे रहा

है कि तुम एक चोट खाए हुए जख्मी फरिश्ते

हो। बंद करो ये बकवास। तुमको हमारे साथ

शराब पीनी हो तो पियो। नहीं तो दफा हो

जाओ।

नहीं जगन्नाथ

आज मैं ऐसे नहीं जाऊंगा।

अपने बीते हुए कल पर जो दरवाजा तुमने बंद

कर रखा है, आज मैं उसे खोल कर ही जाऊंगा।

कुछ और नहीं तो कम से कम एक दिलचस्प

किस्सा तुम्हें आज जरूर सुना कर जाऊंगा।

सन 1980 में

आजादपुर सेशन कोर्ट में एक केस आया था। एक

अमीर व्यापारी सेठ और सरकार के बीच

उस केस का प्रिंसिपल विटनेस जिसके बिना पर

पूरा केस खड़ा था उसका नाम था

जगन।

जानते हो सरकार वो केस हार गई और उस

मुलजिम को बाइ्जत बरी कर दिया गया। वो

मुलजिम कोई और नहीं था। उस व्यापारी सेठ

का बेटा राकेशनाथ था।

लेकिन वो राकेशनाथ इस केस के बाद कहीं चला

गया।

शायद शहर छोड़कर या फिर देश छोड़कर।

नहीं

दुनिया छोड़कर चला गया। और वो जगन लोग

कहते हैं कि व्यापारी सेठ से कुछ पैसे

लेकर चुपचाप कहीं चला गया। ना जगन ने पैसे

लिए और ना ही वह चुपचाप चला गया।

हम वैसा नहीं हूं जैसा दिखता हूं।

हमरा भी एक हराभरा परिवार था।

हमरी बीवी तो गुजर चुकी थी।

लेकिन हमरा एक ठो बच्चा था।

बिरजू

हमार बचवा

बापू बापू हम आ गए अरे बिरजू आजा हमार

बचवा आजा आजा बिरजू बापू आप हमको ₹5 लाख

देंगे ₹5 लाख अरे भैया ₹5 लाख तो बहुत

ज्यादा होता तो क्या हुआ लेकिन हमको ₹5

लाख चाहिए क्योंकि जब हम बड़े होंगे ना तब

गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोलेंगे जिसमें

सब बच्चे मुफ्त में पढ़ाई कर सकेंगे क्यों

बापू अरे वाह वाह वाह बबुआ ₹5 लाख से गरीब

बच्चन के लिए स्कूल बनवाएगा। ये तो बड़ी

खुशी की बात है बुआ। अरे वाह वाह ₹5 लाख

फिर तो हम कहीं से जरूर इंतजाम करेंगे।

घर में बिजली लगाने के पैसे ना होने की

वजह से फुटपाथ पर खंभे की रोशनी में हम

बिल्जू को पढ़ाता।

हम बिरजू का मां, हम ही बिरजू का बाप। उसी

रोशनी में हमारा बिरजू पड़ता और हम उसको

टुकड़ु-टुक देखता रहता।

प्यास लगने पर जब हम बिजू के खातिर पानी

लाने निकला तो हमें क्या पता था

कि हमारा बिजू

हमारा बिजू प्यासा रह जाएगा।

यकवा एकक

सामने से नशे में तुत एक अमीर सेठ का

लड़का गाड़ी चला कर आया और

[संगीत]

[प्रशंसा]

बिरजू

एक ही क्षण में हमरा खुशी से भरा दुनिया

उजड़ गया। हम बर्बाद हो गया। हमरा बिरजू

हमेशा हमेशा के लिए हमसे जुदा हो गया। हम

कानून को अपने हाथ में लेना नहीं चाहता

था। और इंसाफ को अपने हाथ से जाने नहीं

देना चाहता था। वकील साहब ने मदद करने का

पूरा विश्वास दिलाया।

हमको हमरा बच्चा

लेकिन जब हम अदालत में खड़ा हुआ तो

धीरे-धीरे वही विश्वास हमसे दूर होने लगा।

वकीलों की बहस का रंग देखकर सिर्फ इतना

समझ में आया कि जो कुछ भी वो लोग कह रहे

थे वो गलत था। सरासर गलत था।

और हुआ वही

जिसका डर था। जब अदालत में फैसले की घड़ी

आई। यह अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि

रास्ता बंद होने के बावजूद

जगन्नाथ का अपने बच्चे के साथ रास्ते पर

बसना गैरकानूनी था। रही बात राकेशनाथ की।

उसका जुर्म सिर्फ यही साबित होता है कि वो

बेहिसाब गाड़ी चला रहा था। जिसके लिए उसे

यह अदालत ₹900 जुर्माने की सजा देती है।

इंसाफ की हार ने हमें तोड़ दिया। हमें

हमें चकनाचूर कर दिया।

हमारा बिरजू हमारा बछुआ का इंसाफ हमें

नहीं मिला। हम हम खड़े-खड़े मर गए।

लेकिन जब हम बाहर आया और कानून की रक्षा

करने वालों के हाथों ही इंसाफ का गला

घुटते देखा तब हम एक ही झटके में एक ही

झटके में सब कुछ समझ आ गया और तब हम हम

नहीं रहा

जगन भी जगन नहीं रहा

हम जगन से जगन्नाथ बन गया

हम जगन्नाथ बन गया जगन्नाथ बन हम जगन्नाथ

बन गया।

सीने की भड़ास को पूरी तरह बाहर निकालने

के बाद भी हमें आज तक चैन नहीं आया। वकील

बाबू।

हम उस दिन से लेकर आज तक

जल रहा हूं।

तड़प रहा हूं।

तड़प रहा हूं।

हां जगन्नाथ तुम तप रहे हो। तप रहे हो

नफरत की आग में। और इस नफरत की आग से

तुम्हें मुक्ति उसी दिन मिलेगी जिस दिन

तुम अपने बेटे बिरजू के नाम स्कूल बनाओगे।

हां

लेकिन इस नेक काम की नीव अच्छे काम से

पड़नी चाहिए। तुम खुद ही सोचो जगन्नाथ

एक मौत का हथियार बनाने वाला इंसान जिंदगी

का मधुर गीत कैसे गा सकता है?

अपने दिल और दिमाग को अच्छे रास्ते पर

डालो। पैसे खुद ब खुद आ जाएंगे। स्कूल भी

बन जाएगा। और इस नेक काम के लिए तुम्हें

अगर मेरी जरूरत पड़े तो बुलाने में कभी

देर मत करना।

मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं। हमेशा

जगन्नाथ अब मैं चलता हूं। अच्छा

वकील बाबू

तुम अच्छे आदमी हो। अच्छा आदमी है। इसीलिए

तो हमें अच्छा नहीं लगता। आज उसने जगन्नाथ

लोहार के दिल के लोहे को पिघलाने की कोशिश

की। कल उसके दिमाग को पिघलाने में कामयाब

हो सकता है। अरे भुजंग बाबू ऊपर वाले ने

हर इंसान के अंदर एक कमाल की रग रखी है।

जिसे कहते हैं दुखती रग। जिसके हल्के से

दबाने से मजबूत से मजबूत आदमी को भी नानी

याद आ जाती है और वो मैदान खाली कर देता

है। आखिर कहना क्या चाहते हो? सिर्फ इतना

कि वकील बाबू की दुखती रह गए उसका परिवार।

उसकी गर्भवती पत्नी और जान से प्यारा छोटा

भाई। आपके छोटे से इशारे पर छोटे से भाई

पर छोटा सा हमला।

और फिर टाइम अप।

[प्रशंसा]

[संगीत]

अजय

अजय बचाओ अजय

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

इधर इधर

[संगीत]

अजय इधर आ। आ इधर।

तेरे कपड़ों से पेट्रोल की भूख क्यों आ

रही है?

पेट्रोल

क्या हुआ भैया? वो मंगा ने अचानक हमला कर

दिया। तो क्या वो पेट्रोल डाल के तुम्हें

जला देना चाहते थे? देखा? देखा तुमने? वो

लोग इसके खून के प्यासे हो गए। इसे जान से

मार देना चाहते हैं। ऐसी बात नहीं है

भाभी। मैं अपनी हिफाजत खुद करना जानता

हूं। उन लोगों से कोई अपनी हिफाजत नहीं कर

सकता। अजय अरविंद तुम इसे क्यों नहीं

समझाते? कानून का साथ होते हुए भी जब

तुम्हें मुश्किल हो रही है तो यह बेचारा

निहत्ता उन शैतानों से कैसे मुकाबला कर

सकता है? मैंने तुमसे कहा था ना अजय कि इस

झमेले में मत पड़ना। उनसे दूर रहना। कोई

जबरदस्ती आके इसके सर पर गिरे तो ये

बेचारा क्या कर सकता है? मैं तुम्हारे

सामने हाथ जोड़ती हूं। भगवान के लिए इसे

यहां से भेज दो। आज ही शहर भेज दो। नहीं

भाभी मैं यहां से नहीं जाऊंगा। मैं क्या

किसी से डरता हूं जो भाग जाऊं? देखा जवान

खून कैसे खौल रहा है? भोजन की दुश्मनी

तुमसे है और बदला वो अजय से लेगा। अजय

बेटा तू यहां से चला जा वरना तुझे कुछ

होने से पहले मैं अपनी जान दे दूंगी। भाभी

तो खामखा परेशान होती है। कुछ नहीं होगा

मुझे। जो कुछ भी हुआ है। उसके बाद अगर

भगवान भी कहे कि कुछ नहीं होगा। मैं यकीन

नहीं करूंगी।

तुझे यहां से जाना ही होगा।

तुझे मेरी कसम।

[संगीत]

ओम

[संगीत]

सुनिए।

मैं अजय हूं। सरकारी वकील का छोटा भाई।

क्या काम है? बोलो। एक बंदूक चाहिए। हां।

कितने पैसे लगेंगे?

वो तो हम बाद में बताऊंगा। पहले यह बताओ

किस लिए चाहिए? इस इलाके में जीने के लिए

क्योंकि इस इलाके के लोग सिर्फ बंदूक की

भाषा समझते हैं। फिलहाल तो मैं यहां से जा

रहा हूं लेकिन जब आऊंगा क्या आप मुझे

बंदूक देंगे? हां दूंगा। क्या ये आपका

वादा है? हां, वादा है जगन्नाथ का वादा।

हम जो कहता हूं वो करता हूं। जो करता हूं

वो कहता हूं। क्या हो जाएगा?

शुक्रिया भैया। सुनो

भैया कहा है तो हमारी एक बात याद रखो।

मारने के लिए तो बंदूक चाहिए।

लेकिन जिंदा रहने के लिए

शक्ति चाहिए, हिम्मत चाहिए, हौसला चाहिए,

अपने भैया की तरह कलेजा चाहिए।

जाओ।

अरविंद

आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा?

हर वक्त खोए-खोए से रहते हो।

जहां बैठे हो असल में वहां मौजूद ही नहीं।

हर चीज की शुरुआत होती है और उसका अंत भी

होता है। अगर इस केस की शुरुआत हुई है तो

इसका अंत भी होना है। वही तो वही तो मैं

भी चाहता हूं कि भुजंग नामी शैतान के राज

का अंत हो जाए। खत्म हो जाए उसकी दहशत।

मगर कैसे?

कानून के सारे कायदे तौर तरीके उसके सामने

नाकाम होते जा रहे हैं। तो गैरकानूनी

तरीकों से काम लेने का सोचो। क्या क्या

क्या मतलब? मतलब यह कि जैसे शास्त्रों में

कहा गया है कि भलाई के लिए कहा गया एक झूठ

सैकड़ों सच से ज्यादा मायने रखता है। तुम

भी वैसा क्यों नहीं करते? भूजन को उसी की

जुबान में क्यों नहीं जवाब देते? तुम भी

एक झूठा गवाह क्यों नहीं खड़ा कर देते?

झूठा गवाह सच्चाई के लिए अरविंद मैं चलकर

कहूंगी कि भूजन को कत्ल करते हुए मैंने

अपनी आंखों से देखा है। फिर देखना तमाशा।

मगर तुम तो मौके वारदात पर मौजूद नहीं थी।

यह बात उनको साबित करने दो।

वो लोग कुछ साबित करें ना करें। मगर आज

तुमने यह साबित कर दिया भारती कि तुम हर

तरह से एक वकील की अधंगिनी हो। परंतु ये

तो आपका परिवार है। आपकी पत्नी है। क्यों?

क्या एक सरकारी वकील की पत्नी होने के

नाते किसी के खिलाफ गवाही नहीं दे सकती?

फॉर योर काइंड इनफेशन। मिस्टर बलवंत। यह

मेरी पत्नी होने के अलावा इस आजाद मुल्क

की एक आजाद नागरिक भी है। परंतु ई मौका

वारदात पर मौजूद नहीं थी। तुमको कैसे

मालूम? क्या तुम थे वहां?

इसका मतलब है तीनों के मर्डर केस की फाइल

फिर खुलेगी। अवश्य खुलेगी और इस बार इंसाफ

हुए बिना नहीं बंद होगी।

क्योंकि इस बार हमारे पास एक चश्मदीद गवाह

भी है।

अब आप अपने भुजंग बाबू के लिए गिरफ्तारी

का वारंट हासिल करेंगे और उन्हें सलाखों

के पीछे डालेंगे। चलिए

[संगीत]

[हंसी]

अरेस्ट तो हम कर लेंगे वकील बाबू। परंतु

हड्डी अटक गई है। वो क्या है कि आज शनिवार

है, 5:00 बज चुके हैं। कल रविवार है, कोरड

बंद है। तो वारंट तो आपको सोमवार को ही

मिलेगा।

ओके मिस्टर बलवंत। एक बात कान खोल कर सुन

लो। सोमवार सुबह-सुबह मैं भुजंग बाबू को

सलाखों के पीछे देखना चाहता हूं।

अंडरस्टुड?

[संगीत]

ठहर जाइए।

तुम पुलिस वालों से यही प्रॉब्लम है।

हमेशा गलत टाइम पे आते हो। बाद में आओ।

परंतु ई बार हम सही टाइम पर सही बात करने

आए हैं। उ वकील के बच्चे ने नई हड्डी अटका

दी है। उ ससुर अपनी पत्नी को तुम्हारे

खिलाफ गवाह बनाकर पेश करना चाहत है।

तो ये वकील बाबू का नया आईडिया है। अच्छा

लगा अमित।

लेकिन यह आईडिया हमें फिनिश कर सकता है।

इसीलिए

वकील बाबू के स्टोरी को दी एंड लगाना

पड़ेगा। परंतु ये काम बड़ी होशियारी से

करना होगा।

तुम फिक्र मत करो इंस्पेक्टर।

यह काम होशियारी से ही नहीं बल्कि हम सफाई

से भी करेंगे।

यह खून हमारे हाथ होगा।

लेकिन यह खून का निशान

किसी और के हाथ पे होगा। किसका?

जगन्नाथ। ओए बबुआ

एक अवला

[संगीत]

अगर तुम हमारे लिए खोल रहे हो

तो रहने दो।

कहा है कि हम हर किसी के साथ नहीं पीता

हूं। वो तो हमको अच्छी तरह मालूम है। तुम

हर किसी के साथ नहीं लेकिन किसी किसी के

साथ पीते हो। ह मतलब?

मतलब यह कि तुम सिर्फ अच्छे आदमी के साथ

पीते हो। हम बुरे का पूरा अच्छा तो नहीं

बन सकते। हां,

अच्छा आदमी बनने की जरूर कोशिश कर सकता

हूं।

मेरा इशारा वकील बाबू की तरफ है जिसे तुम

बहुत पसंद हो और मैं बिल्कुल नहीं। देखो

हमें घुमा फिरा के बात करने की आदत नहीं

है और ना ही करने की कोई जरूरत है। काम की

बात करो। देखो जगन्नाथ बात बहुत आगे बढ़

चुकी है और बढ़ाया तुम्हारा दोस्त वकील

बाबू ने। उसके साथ मेरा कोई लेना देना

नहीं है। फिर भी हाथ धो के मेरे पीछे पड़ा

हुआ है। आखिर हमारी किस बात की लड़ाई है?

अच्छे और बुरे की। फिर तुम यह भी जानते

होंगे कि इस अच्छे और बुरे की लड़ाई में

जीत किसकी होगी?

अरे नहीं नहीं मैं तो एक बात बोल रहा था।

देखो जो बोलना है जल्दी बोलो। आखिर

तुम्हें चाहिए क्या? मैं तो यह बता सकता

हूं कि मुझे क्या नहीं चाहिए। मुझे

दुश्मनी नहीं चाहिए। मुझे नुकसान नहीं

चाहिए। किसी का भी नहीं। मैं तो दुश्मनी

का लकीर दोस्ती से मिटाना चाहता हूं। वो

कैसे? मैं यह चाहता हूं कि मैं वकील बाबू

से सुलह सफाई कर लूं। अगर मैं अकेला

जाऊंगा वो दरवाजा तक नहीं खोलेगा। अगर मैं

तुम्हें साथ ले जाऊंगा तो कम से कम मेरी

बात तो सुनेगा। मैं यह चाहता हूं कि वकील

बाबू मुझे यह बता दे कि अदालत में किन-किन

जुर्मों का किस तरह कुबूल करूं।

ताकि मुझे कम से कम सजा मिले। बस और कुछ

नहीं। सिर्फ बातचीत।

सिर्फ बातचीत

और कुछ नहीं।

यह याद रख तुम्हारे साथ ना ही को यार होगा

और ना ही तुम्हारे पास को हथियार होगा।

और अगर हमसे जरा भी चालाकी करने की कोशिश

की

तो हम तुमको बर्बाद करने में कोई कसर नहीं

छोडूंगा। ठीक है जगन्नाथ

हम काली हाथ चलेगा

और मां कसम हमारा भी रिकॉर्ड है। आज तक हम

काली हाथ किसी को नहीं मारा।

और हमारा भी रिकॉर्ड है कि हमारे खाली हाथ

से भी आज तक कोई नहीं बचा।

चलो

आई।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ए हिलना नहीं हम बुलाऊंगा तुम्हें पहले हम

जाता हूं

वो जगह आ गया वो यहां भी आ गया दरवाजा मत

खोलना भगवान के लिए दरवाजा मत खोलना मैं

तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं बात क्या है

भारती? मुझे मालूम नहीं क्या बात है। मगर

मेरा दिल घबरा रहा है। ऐसा लगता है कुछ

अशुभ होने वाला है। दरवाजा मत खोलो। ए

वकील बाबू अरे दरवाजा खोलो।

हम हो हम जगन्नाथ। अरे हम अपने साथ भुजंग

को भी लाया हूं भाई। अरे जगन्नाथ भी साथ

में है और तुम। तुमने मुझे बताया नहीं।

अरे अंदर आने दो उसे। पहली बार घर में आया

और तुम कहती है दरवाजा मत खोलो। मगर भुजब

उसके साथ है। दरवाजा मत खोलना। तो क्या

हुआ? अरे डरने का कोनो बात नहीं है वकील

बाबू।

तुम्हारी हिफाजत की जिम्मेदारी हम पे है।

हम भुजंग को इसलिए साथ लाया हूं कि तुमसे

बातचीत होके सुलह सफाई हो सके। ऐसी भी

क्या बात है? जो सिर्फ आधी रात पहुंच सकती

है। कल सुबह नहीं हो सकती। उसे कह दीजिए

कल सुबह आए। बोलिए ना मुझे बहुत डर लग रहा

है। अरे इसमें डरने की क्या बात है? सुनो

भाटी। वो जंग से हमको डरने की कोई जरूरत

नहीं। उल्टा भुजंग को हमसे डरना चाहिए।

क्या बिगाड़ लेगा हमारा? हां।

अरे जगन्नाथ अंदर आओ ना। देखो वकील बाबू

हम

[प्रशंसा]

अरे

नहीं नहीं

[प्रशंसा]

आगे बोलो। नहीं नहीं ये नहीं हो सकता। हां

आगे खोलो। परमेश वकील बाबू खूनी कातिल

तुम्हारी वजह से मेरे पति ने दरवाजा खोला

तुम्हारे कहने पर तुम खोनी हो कातिल हो

छोड़ दो मेरे पति को आप आप हिम्मत रखो आप

हिम्मत रखो आप हम पे भरोसा आप हम पे भरोसा

करो आप हम पे भरोसा करो वकील बाबू वकील

बाबू वो वकील बाबू

[संगीत]

आ

[प्रशंसा]

[संगीत]

अब

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

डॉक्टर साहिबा आप देखिए आप बचा लीजिए।

किसी भी तरह से बचा लीजिए। डॉक्टर साहब आप

वकील वकील बाबू को बचा लीजिए। आप फिक्र मत

कीजिए। मैं अभी ऑपरेशन की तैयारी करती

हूं।

आप मेरे साथ चलिए

मैं यहीं रहूंगी। ओके।

मत रो

[संगीत]

ये लो दीदी ज्योति अलमारी से खून की

बोतलें निकालो अच्छा

हेलो डॉक्टर

उस वकील की जान बचाने की ट्राई मत करना

वरना फ्री में तेरी जान चली जाएगी देखो

मिस्टर मौत की धमकी मुझे मेरी ड्यूटी करने

से नहीं रोक सकती। मैं अपना फर्ज निभा कर

ही रहूंगी।

जग जगन्नाथ

जगन्नाथ

अब तो तुम बोलोगे ना।

अब तो तुम खामोश नहीं रहोगे ना।

अब तो तुम खामोश।

ना

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

भुजा

आज हम तुम्हारी मौत बनके आया हूं। हुज

हुजा

हुज हुजा

[संगीत]

हरामजादे

तूने उस मासूम की मौत को हमारे सर के ऊपर

डाल के अपनी मौत को अपने पास बुला लिया

है। हम तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा हरामजादे।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ए इस फाइटर को उस इंस्पेक्टर बलवंत के पास

लेके जाओ। इसकी जो भी बची कुची जान है वो

निकाल देगा।

[संगीत]

[संगीत]

उतारो ससुरे का नीचे।

[प्रशंसा]

ओम

[संगीत]

तो हम झूठ की औलाद हैं। अरे ओ लहुरवा

चाय पिलवाऊं।

बहुत गर्मी लागत है। पंखा चलवाऊं तो हर

टेटवा में इस सन हड्डी अटकाऊंगा।

ना तो निगल सकोगे और ना ही उगल सकोगे। एक

बार हमार हाथ खोल दे इंस्पेक्टर।

तुम्हारी हड्डियों की कसम।

हम तुम्हारी हड्डी से हड्डी ना बचा दूं।

तो हमारा नाम जगन्नाथ नाही।

ये देखो।

ससुर में जान अभी तक बाकी है। हम तोका

जंगल में ले जाएंगे। जवाबी हमले का नकली

केस बनाई के हम तूका गोली मार दे मतबल समझ

गए ना लहरवा फेक एनकाउंटर

ले चल का

[संगीत]

ये

[संगीत]

ह

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ओम

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

जगन्नाथ की कहानी तो खत्म हो गई जीजा जी

लेकिन मेन कहानी अभी भी बाकी है। उस वकील

की पत्नी हमारे रास्ते का लास्ट प्रॉब्लम

हां

उसका खत्म होना बहुत जरूरी है जीजा जी

बहुत जरूरी

हां

उसके जिंदगी के टाइम बम को आज रात में

ब्लास्ट कर देंगे

[संगीत]

[संगीत]

भाभी

[संगीत]

मार डाला मार डाला मेरे पति को

मार डाला तेरे भैया को

मुझे क्यों नहीं मारा मुझे मौत क्यों नहीं

आती दी मुझे क्यों नहीं मारा? ऐसा मत कहो

भाभी। भैया के बाद अब इस दुनिया में

तुम्हारे सिवा मेरा है ही कौन? और अगर तुम

ऐसा कहोगी तो मैं कैसे जिऊंगा?

हम लोग क्यों आए थे यहां? क्यों आए थे

रानी गण? सिर्फ इसलिए कि तुम्हारे भैया के

चिता को आग लगाए।

क्यों आए थे यहां? मत रो भाभी प्लीज।

प्लीज मत रो। भैया तो आज भी हमारे साथ है।

उनका बच्चा तुम्हारे पेट में है। अपने लिए

नहीं। तो अपने आने वाले मुन्ने के लिए तो

तुम्हें जीना ही पड़ेगा। नहीं नहीं अजय

मैं उनके बगैर नहीं जी सकती। मैं तुम्हारे

भैया के बगैर नहीं जी सकती। मुझे तुम्हारे

भैया ला दो। मुझे तुम्हारी

अजय इनका पल्स बिल्कुल ड्रॉप हो रहा है।

मैं कुछ दवाइयां लिख कर देती हूं। तुम

फौरन लेकर आओ वरना इनकी जान को खतरा है।

जल्दी

[संगीत]

क्यों डॉक्टर?

फ़ में बहुत डायलॉग बोल रही थी।

अब चुपचाप मुझे वकील बाबू के बीवी के पास

लेके चल।

चल

नहीं तो तेरे सारे डायलॉग एक ही झटके में

निकाल लूंगा।

चलो

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

आ

[संगीत]

हो आ

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ओ

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

आ

समझ

hm

[संगीत]

आह

[प्रशंसा]

[संगीत]

क्या हुआ? पता नहीं। शायद पेट्रोल खत्म हो

गया। अब क्या होगा?

[संगीत]

अब्बा

[संगीत]

अरे मैं कब से ढूंढ रहा था आप लोगों को

शुक्र है आप लोग मिल गए चलिए मेरे साथ

जल्दी आइए आइए ना

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ज्योति

भाभी

डॉक्टर साहिबा

डॉक्टर साहिबा

[संगीत]

ये सब कैसे हुआ?

पूजा

पूजा

जो भारती की जान के पीछे पड़ा है। तुम जाओ

उनको बचाओ।

नहीं

ओम

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

ये जगह खतरे से बिल्कुल खाली है। घबराने

की जरूरत नहीं। मैं जाके खाने पीने का

इंतजाम करता हूं और अजय बाबू को ढूंढता

हूं। और जाते-जाते मैं बाहर से ताला मार

देता हूं। चाबी तुम्हें दे देता हूं ताकि

किसी को शक ना हो कि तुम अंदर हो। हां आओ।

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

भाभी कहां है पता है? हम तो बोल ना मुंह

से तो हाथ हटाओ। भाभी और दीदी दोनों

सुरक्षित है। मैंने उन्हें अपने मामा के

गोडाउन में रख दिया है। लेकिन भैया भाभी

के लिए इस वक्त दवाइयां बहुत जरूरी है।

[संगीत]

ज्योति

जो तुम मेरे लिए कर रही हो।

एक सगी बहन भी अपनी बहन के लिए नहीं करती।

नहीं भाभी ऐसा मत कहो।

[संगीत]

भाभी भाभी

[संगीत]

यहां का चप्पा चप्पा ढूंढ निकालो।

जाओ और खाली हाथ नहीं आना।

[प्रशंसा]

[संगीत]

ओम

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

पकड़ो उसे पकड़ो कहीं भागने ना पाए

[प्रशंसा]

[संगीत]

भाभी भाभी ये लो

[संगीत]

[हंसी]

लल्ला कनिक जरा हड्डी पर जोर तो डालो। अब

अगर भागते हुए आदमी पर गोली चलाएंगे तो

गोली तो पीठ में ही लागेगी ना। यही वास्ते

तो तुम्हें उल्टा बांध रखा है हड्डी डाल

के।

चलो भगवान को याद कर लियो। अब तुम्हारी

हड्डी का राख होने का टाइम आ गया है।

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

अजय भैया भाभी की जान खतरे में है।

या

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[संगीत]

अजय ये ले

तू मेरी फिक्र मत कर जा

यहां से

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

हम जो कहता हूं वो करता हूं जो करता हूं

वो कहता हूं। हमने कहा था ना कि अगर तेरी

हड्डी से हड्डी ना बजा दी तो हमरा नाम भी

जगन्नाथ ये ले

[संगीत]

या

[संगीत]

या

[संगीत]

कल हम लोग यहां आए तो थे लेकिन अंदर जाके

देखा नहीं क्या है। जरूर कुछ दाल में काला

है। जाओ जाके ताला तोड़ के देखो अंदर क्या

है। चलो

क्या हुआ? गुल्ली लोग आ गए।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

आ

ढूंढो

[संगीत]

उस ओर चला नहीं जाता।

उस ओर चला नहीं जाता।

[संगीत]

भाभी

हो

वो लोग यहां भी आ गए

ढूंढो उसे वो यहीं कहीं होंगे ढूंढो ढूंढो

[संगीत]

हो

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

उ

नहीं नहीं

चलो

[संगीत]

उ

[संगीत]

भाभी लड़का हुआ है। तुम मेरी फिक्र मत

करो।

इसे यहां से दूर ले जाओ।

इसे बचा लो।

यह मेरे पति की आखिरी निशानी है। प्लीज़

क्योंकि

मत सोचो जाओ।

[संगीत]

टिक टिक टिक टिक भाग रही

[संगीत]

[प्रशंसा]

अरे

[प्रशंसा]

भागी

[संगीत]

[प्रशंसा]

हे मिस्टर

हमको तू और तेरा गर्लफ्रेंड नहीं चाहिए।

हमको सिर्फ तुम्हारा भाभी चाहिए। फटाफट

बता वो कहां है?

जल्दी बता नहीं तो

मैं खुद मालूम करूंगा।

ए मैडम

तू जहां भी चुपी है जल्दी बाहर निकल।

नहीं तो इस बच्चे को नीचे गिरा के उसका

टाइम अप कर दूंगा। नहीं मेरे बच्चे को

छोड़ दो। मेरे बच्चे को छोड़ दो। मैं आ गई

हूं। मैं आ गई हूं। मेरी बच्ची को छोड़

दो।

जान

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[प्रशंसा]

[संगीत]

आ

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

पकड़ ले पकड़ पकड़ ले

अगर तू मेरी नहीं होगी ना तो मैं तुझे

किसी और का भी नहीं होने दूंगा मार

डालूंगा मार दूंगा तुझे मार दूंगा

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[संगीत]

आ

[संगीत]

आ

[संगीत]

यू

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

जगन्नाथ भैया

आप इंसान नहीं देवता हैं।

[संगीत]

[प्रशंसा]

आ

[संगीत]

[संगीत]

ओम ओम

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

तुम लोगों को तो मैं जिंदा इंसानों में

ढूंढ रहा था। इस कब्रिस्तान में क्या कर

रहे हो? बैंक का माल कहां छुपाया है?

तुम्हारी कब्र में छुपाया है।

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

इतनी रात गए आप यहां क्या कर रही हैं? मैं

आप ही से पूछ रहा हूं। मेरी गाड़ी खराब हो

गई थी। मदद मांगने के लिए उस तरफ गई तो

देखा ये लोग कब्रिस्तान में कुछ छिपा रहे

थे। ये लोग शहर के मालूम में बदमाश है।

बैंक लूट कर माल छिपा रहे थे। खैर ये लोग

तो मिल गए। माल भी मिल जाएगा। आइए मैं

आपको घर छोड़ दूं। आइए

[संगीत]

गुड नाइट। गुड नाइट। थैंक यू। वेलकम।

सुनिए

क्या मैं अपने अजनबी दोस्त के बारे में

जान सकती हूं? बदमाशों की मरम्मत करना

शरीफों की हिफाजत आप ही के शहर में रहता

हूं। इंस्पेक्टर विजय और आपकी तारीफ मुझे

रेनू कहते हैं। बहुत सुंदर नाम है आपका।

हां, आपको एक बार पुलिस स्टेशन आना

पड़ेगा। सिर्फ एक बार जी।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

और घर में कौन-कौन है? दिलो जान से प्यार

करने वाले एक डैडी थे वो भी चल बसे। अकेले

डर नहीं लगता।

लगता था लेकिन अब नहीं। आ

[संगीत]

साहब आप देख नहीं रही मैं क्या कर रहा

हूं।

[संगीत]

[संगीत]

मैं जानती हूं तुम्हारे इरादे। चलो पहले

शेव बनाओ। अरे शेव तो बाद में भी हो सकती

है। तो मैं कौन से कोई भागे जा रही हूं।

मेरा दिल अब कर रहा है। मेरा भी वहां

निकल।

[संगीत]

[संगीत]

अरे, अरे विजय। अरे क्या हुआ? एक बाल्टी

पानी की देना जरा देखो पानी चला गया।

अच्छा एक मिनट।

ये लेके आया। दरवाजा खोलो।

दरवाजा खोलो। बाल्टी नहीं आ रही है। अरे

ये क्या कर रहे हो? बाहर जाओ। जाओ ना।

देखो कोई आया।

[संगीत]

क्या बात है? टेलीग्राम

जिस बात का डर था वही हुआ है। क्या हुआ?

पियाजी की तरफ से ट्रांसफर ऑर्डर आ गया।

मंगलपुर जाना है। कब? आज शाम की गाड़ी से।

आज? आज क्यों? अभी क्यों नहीं चले जाते?

तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे मैं आपकी मर्जी

से जा रहा हूं। तुम्हें तो मालूम है ना

मैंने कोशिश की। अब ना मंजिल हो गई तो मैं

क्या करूं?

खैर

चार दिन के बाद तुम्हें डर मिल जाएगा। फिर

तुम आ जाना। चार दिन ये चार रातें

तुम्हारे बिना कैसे गुजरेंगी? यहां का

अकेलापन। ये अकेलापन तो कुछ दिनों की बात

है मैम साहब।

फिर हमारा एक चांद सा बेटा होगा।

फिर तुम मैं और वो छोटा तीनों मिलकर

मंगलपुर में बहुत सुंदर सा घर बनाएंगे। और

अगर चार दिन में क्वार्टर ना मिला तो तो

मैं खुद ईटा और लेकर शुरू हो जाऊंगा। अरे

एक पलंग के लिए चार दीवारें और एक छत की

जरूरत होती है ना और फिर जब तुम मंगलपुर

आओगी तो मैं उस पलंग को तुम्हारे मनपसंद

फूलों से ऐसे सताऊंगा

कि तुम्हें फिर से सुहागरात याद आ जाएगी।

विजय

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

आ गई तुम?

मुझे मालूम था तुम जरूर आओगी।

तुम इंस्पेक्टर विजय की बीवी हो ना? हां

लेकिन वो पिछले दो दिन से तुम्हारे लिए

रोज स्टेशन आता रहा है और तुम आज आ रही

हो? हां मुझे परसों आना था लेकिन आज के

लिए तो मैंने उन्हें टेलीग्राम दे दिया

था। अबे इंस्पेक्टर

मंगलपुर के मंगू को आज तक के जिसने भी

हथकड़ी पहनाने की कोशिश की ना उस साले की

यहां से हमेशा के लिए बदली हो गई। और तेरे

इस वर्दी और हथियार के बल पे तो कोई बच्चा

भी हथकड़ी पहना देगा। अबे अगर मर्द हो तो

उतार दो हथकड़ी और अगर दम हो ना तो फिर

पहना देना अपने हाथों से। खोल दो इसकी

हथकड़ी।

क्या

[संगीत]

हट

[संगीत]

या

[संगीत]

उठ

[संगीत]

मंगल फूल को मंगू दादा

ये टेलीकॉम कब आया है दो घंटे हुए साहब

ओ गॉड चुरा और काफी देर हो गई। इसका मतलब

है ना मेरा इंतजार कर रही होगी।

यहां कब तक इंतजार करोगी? अंदर ऑफिस में

आकर बैठ जाओ। नहीं मैं अब चलती हूं। नहीं

नहीं। इस इलाके में शाम के बाद कोई घर से

बाहर नहीं निकलता।

कुछ ही देर में रात के भयानक साए बढ़ने

लगेंगे और मैं अंधेरे से नहीं डरती। आप

सिर्फ मुझे रास्ता बता दीजिए। मैं चली

जाऊंगी। तुम्हें यकीन है तुम वहां तक

पहुंच पाओगी। खैर तुम जाना ही चाहती हो तो

यहां से सीधी चली जाओ। आगे जाकर तीन

रास्ते मिलेंगे। बीच की पगडंडी से चली

जाना। जल्दी अपनी मंजिल पर पहुंच जाओगी।

शुक्रिया।

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं। सामान 100

बरस का पल की खबर नहीं।

[संगीत]

मैं

[संगीत]

[संगीत]

जय

[संगीत]

विजय

विजय

विजय

[संगीत]

लेकिन इस वक्त उसको अकेले जाने कैसे दिया?

वक्त बादशाह है इंस्पेक्टर। उसी के हुक्म

से लोग मिलते हैं। उसी के हुक्म से बिछड़

जाते हैं। लेकिन वो गई कहां? जिसे जाना है

उसे कौन रोक सकता है? कह कर तो गई थी

पुलिस स्टेशन जा रही हूं। पुलिस स्टेशन

[संगीत]

[संगीत]

जय

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

कोई है

[संगीत]

कोई है?

[संगीत]

[संगीत]

ओम

[संगीत]

[संगीत]

मैं

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

श्री

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

हाय

[संगीत]

मुझे तुम्हारी प्यार भरी बाहों में आकर

ऐसा लगता है जैसे मुझे सारी दुनिया मिल

गई। बस अब तो एक ही तमन्ना है मरो तो

इन्हीं बाहों में

[संगीत]

विजय सब्र से काम दो विजय

विजय

विजय

ना जाने बेचारी ने किस मनूस घड़ी मंगलपुर

में कदम रखा था।

चलो कम

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

जिसने भी मेरे ख्वाबों की दुनिया को उधड़ा

रहो

एक दिन मैं उसकी समाधि यही बनाऊंगा।

[संगीत]

अब फिर जब तुम आओगे तो मैं उस परम को

तुम्हारे मनपसंद फूलों से ऐसे सजाऊंगा

कि तुम्हें फिर से सुहागरात याद आ जाएगी।

[संगीत]

तुम्हारी दिमागी हालत मैं समझता हूं विजय

और मेरी पूरी हमदर्दी तुम्हारे साथ है।

आई एम सॉरी टू से।

तुम्हारी बीवी की मौत ना तो खून का केस है

और नहीं खुदकशी बल्कि औरों की तरह

तुम्हारी बीवी भी खौफ दहशत और खून की कमी

की वजह से मरी है। व्हाट? हां विजय तुम तो

उस फैल को बहुत अच्छी तरह से जानते हो।

क्योंकि हर लाश में एक ही जैसा जख्म का

निशान ये काम कभी किसी जानवर का नहीं हो

सकता। यह काम इंसान का है और अगर वो इंसान

है तो वो इंसान

विजय

जंगलों के पार पहाड़ियों के पीछे जो कबीले

बसे हुए हैं

कहीं ये काम उनका तो नहीं हो सकता।

कबीला

आ

[संगीत]

आ हा हा

[संगीत]

सुनो इस पूरे जंगल में इस पहाड़ी में बसे

वाले जितने भी कबीले हैं उनमें एक भी मर्द

औरत ऐसी है जो पढ़ना जाने जो लिखना जाने

नहीं लेकिन हमरा राजा बेटा आज शहर से चार

नहीं छह नहीं पूरे 10 किताब बांध के आवा

है सीख के आवा है आज हम सब लोगों के सामने

एक फैसला सुनाते हैं कि हमरे बाद इस कबीले

का सरदार

लेकिन लेकिन हम जानत है राजा

कि तोहरा साहू की बेटी रानी से हमेशा से

मिलन रहा है। तू रानी से ना मिले यही कारण

हम तोहका शहर पड़े खातिर भेज दिया। अब तू

रानी से ना मिलना। कारण साहू हमरा दुश्मन

है। और अगर तूने हमरे दुश्मन की बेटी से

मिलने की कोशिश की तो नहीं

तू हमको मानते बापू हम तो तू अब राजा के

खातिर हमसे जुबान लड़ावत है। इतनी हिम्मत

खबरदार जो तूने कुठरिया से कदम बाहर रखा।

चल उठ।

आओ आओ सरदार एक ही कब्र का अगर तो राजा

बेटा हम बिटिया के संग मिल गया तो ओ हम

जिंदा कब्र में ताड़ दे आइयो कब्र में हाथ

से अपने मिट्टी डाले और तू भी सुन ले अगर

तोरी रानी इस पार हमका मिल गई तो उसका हाथ

पांव काट के फेकेंगे उसको खाने के लिए चील

कुत्ते तू अपनी सांसे भेज देना समझ लेना

चिल्ला मत भेज दूंगा हट

[संगीत]

चलो हम यहां से भाग चले वरना ये लोग हमको

जान से मार डालेंगे। चल

नहीं दरोगा जी हम आदिवासी भी इंसान हैं।

कोई जंगली जानवर नहीं। हम अपने दुश्मन का

खून बहाते जरूर हैं। अच्छा सरदार इस जंगल

में तुमसे अलग रस्मो रिवाज वाला और कोई

कबीरा है? नहीं दुर्गा साहब कोई नहीं।

यहां सिर्फ दो कबीले हैं। एक रामगढ़ वासी

और एक भीमागढ़वासी।

फिर कौन सा वो खूनी साया है जो मंगलपुर को

वीरान बना रहा है?

राजा

[संगीत]

चल

[संगीत]

यहां तो कोई भी नहीं हूं। अच्छा तू ऐसा कर

तू अंदर बैठ मैं देख कर आता हूं। शायद य

कहीं गया होगा। हां

[संगीत]

राजा

[संगीत]

रानी

रानी

रानी

[संगीत]

अरे यहां तो कोई भी नहीं है रे राजा हमको

तो बहुत डर लगत है रे

[संगीत]

जय जय

[संगीत]

जी

वो घोड़ा गाड़ी हमें यहां ले आई है। कहां

के रहने वाले हो? जी जंगल पास पहाड़ी के

पीछे हम घर से भाग आए हो क्या? नहीं नहीं।

हम शादी करना चाहते हैं। तो तुम इतने डरे

हुए क्यों हो? नहीं नहीं। डरे हुए नहीं।

हम बहुत थके हुए हैं।

और भूखे भी हैं। जी हां, रानी को बहुत भूख

लगी है। भूख और

प्यास किसे नहीं लगती? हां जी। एक गिलास

पानी मिलेगा।

[संगीत]

लो प्यास बुझा लो। ये बीवी है हमारी।

मुझसे

पानी पी लो।

आज से तुम दोनों हमारे मेहमान हो। आओ

हमारे साथ। आओ

[संगीत]

ये आशा है तुम्हारे छोटे भाई ठाकुर सूर्य

प्रताप सिंह की धर्मपत्नी नो और आशा

तुम्हारे पास वाले कमरे में इस बच्ची को

ठहरा दो जी जब तक शादी नहीं हो जाती

बच्चों

एक साथ नहीं रहते

आओ मेरे साथ

[संगीत]

मेरा तुम्हारा कमरा और वो नहाने का जल्दी

से नहा धो के तैयार हो जाओ। मैं तुम्हारे

खाने का इंतजाम करती हूं।

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

क्या देख रहे हो? नया मेहमान

सलीम बहुत कमजोर हो गया है।

ये देखिए कितना भराभरा हुआ जिस्म है ठाकुर

साहब। देखिए

देखिए ना।

अपने बीवी से कह दो जल्दी खाना लगाएं।

ये मीना है। नमस्ते।

हमारे स्टेट मैनेजर सिद्धू की बीवी।

सिद्धू,

मेरा नाम है। नमस्ते। आप लोग शुरू कीजिए

ना। आप भी आइए ना। बच्चों,

दरअसल हम लोग उसूल के पाबंद हैं। रोजाना

शाम ढलने से पहले ही खा लेते हैं। बैठो।

शुरू करो। शुरू करो।

[संगीत]

[संगीत]

यह है ठाकुर सूर्य प्रताप सिंह। बड़े

ठाकुर के छोटे भाई। नमस्ते। और ये हैं

हमारे नए मेहमान। भाई साहब अगर मुझे पहले

पता होता कि हमारे घर में ऐसे दो मेहमान

आए हैं तो मैं शिकार खेलने जाता ही क्यों?

[संगीत]

[संगीत]

और कुछ चाहिए? जी नहीं शुक्रिया। इनके लिए

जामे हयात का इंतजाम करो।

[संगीत]

अरे ये तो हमारे सामने आकर रुक गई। हमारी

हर चीज मेहमानों के सामने आकर रुक जाती

है। जी हां। आपकी घोड़ा गाड़ी भी आकर

हमारे सामने ऐसे रुक गई थी। जा में हयात

पेश करो।

जाओ अपने कमरे में जाके सो जाओ। अच्छा जी।

ओम

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

ओम

[संगीत]

[संगीत]

जय

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

[प्रशंसा]

कानून जिसे जुल्म और समाज जिसे गुनाह

समझता है। वो चीज तुम्हारी वजह से हमारी

रूह की गिजा बनकर रहती है। तुम हमारी मौसी

हो।

तुम्ही ने हमें यह लज्जत बख्शी है। हम

वादा करते हैं हर रात यह नायाब तोहफा पहले

तुम्हारे होठों को छुएगा।

हम

रानी

अरे ओ रानी

रानी

अरे ओ रानी

अरे ओ रानी

ना जाने कहां चली गई है अरे ओ रानी

[संगीत]

ओम

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

हो

[संगीत]

रानी रानी

[संगीत]

अरे रानी इतना बड़ा महल जैसा घर और यहां

कोई नौकर चाकर भी नहीं है और तुमने देखा

यहां के सभी लोग अपना काम खुद ही करते

हैं। कुछ भी है कि यहां के लोग हमको बहुत

प्यार से देखत है। वो तो सिर्फ प्यार से

देखत हैं। हम तो कब भागो भागो भागो भागो

भागो भाग जाओ। जिंदगी बचाना चाहते हो तो

भाग जाओ। नहीं तो प्रोफेसर साहब तुम्हें

मां

[संगीत]

पागल है। तुम लोगों ने नाश्ता कर लिया? जी

जी नहीं। अरे तुम दोनों अपने सेहत का

ख्याल रखा करो और किसी चीज की जरूरत हो।

सिद्धू को कहना। अच्छा जी। सिद्धू

सलीम पर ध्यान रखना। अब तो सलीम पर ध्यान

रखना ही पड़ेगा। ठाकूर साहब ये सलीम कौन

है? मेरा बेटा है साहब। मेरा बेटा है वो।

आज दो महीने हो गए। पूरे दो महीने। खुदा

जाने कहां घूम गया। मैं मैं पागलों की तरह

उसे तलाश कर रही हूं। लेकिन उसका कोई पता

नहीं चला। साहब मैंने दुनिया भर की

मन्नतें मांगी। कितने ही रोज़े रखे लेकिन

वो नहीं आया। पता नहीं मुझे नहीं आया। मैं

कितना प्यार करता हूं मुझसे। वो भी मुझे

बहुत चाहता था। उनके मरने के बाद वो तो

मेरा सहारा था। देखिए हिम्मत से काम

लीजिए। आपका बेटा मिल जाएगा। नहीं आप सब

झूठ बोलते हैं। आप सब झूठे हैं। मैं कहती

हूं कहां है मेरा बेटा? कहां है मेरा

सलीम? कहां है मेरा?

आप भगवान पे भरोसा रखिए। आपका बेटा सलीम

मिल जाएगा। अरे तुम्हारे में शक्ल क्या

तुम मेरे सलीम को जानते हो? आपने सुना

साहब आपने सुना ये ये कहता है मेरा सलीम

मिल जाएगा। इसकी तुम्हारी जरूर कबूल होगी।

परवरदिगार आलम अपने हबीब के सदका मैं तेरे

बीवी की गोद मेरे बेटे तुझे चांद से बेटा

हूं। तेरी हर मुराद पूरी हो। चांद से बेटा

होगा। फिर तुम मैं

और वो छोटा हम तीनों मिलकर मंगलपुर में एक

बहुत सुंदर सा घर बनाएंगे।

विजय

विजय

सर

विजय

मैं तुम्हारी तकलीफ समझता हूं।

लेकिन समझ में नहीं आता। मंगलपुर कस्बे का

यह सातवां केस है और न जाने कितने ऐसे

जुर्म हुए होंगे जिनका किसी को पता भी

नहीं चला होगा। ऐसे कितने केस हुए होंगे

जो हमारे इल्म में भी नहीं आए होंगे।

बड़े शर्म की बात है। इतने छोटे से इलाके

में खूनी रहता है लेकिन कोई नहीं बता सकता

है कि वो कौन है।

हीरो ये प्रोफेसर साहब हैं। हफ्ते में एक

दिन पढ़ाते हैं। तनख्वाह भी नहीं लेते।

लेकिन अक्सर देखता रहता हूं मैं इनके पीछे

कुत्ते भौकते रहते हैं। शायद इनके काले

कोट को देख के भौकते होंगे। हां यार इसके

छोटे भाई के पीछे भी कुत्ते भौकते हैं।

[संगीत]

आपका शिकार

शुक्रिया

निशाना तो बहुत अच्छा लगा लेकिन ठाकुर

शिकारी इंस्पेक्टर कोई अनाड़ी नहीं कि

निशाना चुक जाए। क्या आप रोज सिखा सकते

हैं? मैं पूछूं आप रोज खाना खाते हैं अब

तो

अच्छा तो शिकार ही आपकी भूख है। और अगर

बदकिस्मती से शिकार ना मिले तो

मैं किस्मत पर नहीं इंस्पेक्टर अपनी बंदूक

पे भरोसा करता हूं। वैसे

आप जंगल में कौन सा शिकार ढूंढने आए हैं?

कानून का आदमी हूं ठाकुर। हर मुजरिम मेरा

शिकार है

और मैं उसी की तलाश कर रहा हूं।

[संगीत]

कातिल बहुत चालाक है सर क्योंकि कई दिनों

से उसने मंगलपुर के गांव वालों पर हाथ

नहीं डाला। सिर्फ अजनबी मुसाफिर ही कातिल

के शिकार हो रहे हैं।

दरअसल विजय अपनी बीवी के कत्ल की वजह से

बहुत जज्बाती हो गया है। गांव के हर आदमी

पे शक करने लग गया है। अच्छा वो लोग हम पर

ही शक कर रहे हैं क्या? कौन आप पे शक कर

रहा है बड़े ठाकुर?

हमसे कहिए हम उसेने

शराफत के जुर्म में हवा हालात में बंद कर

देंगे। इंस्पेक्टर

हमारा ख्याल है कि हम पहली बार मिल रहे

हैं

और ये बेतक्लुफी

हमें बिल्कुल पसंद नहीं है। हमारी नौकरी

ऐसी है साहब हमें कातिल तो पसंद करते ही

नहीं।

और

शरीफ और भले आदमी हमसे दूर खड़े रहते हैं।

वर्दी पहन कर अगर किसी की दुकान में घुस

जाए तो लोग समझते हैं

दुकानदार को गिरफ्तार करना आए। मैं तो

सुना है कि आपके यहां जानवरों की ताजा

खाली मिलती है। इंस्पेक्टर जब पुलिस अब

जानवरों का भी पोस्टमार्टम करने लगी।

नहीं डॉक्टर साहब जिस इलाके में इंसानों

का पोस्टमार्टम हो नहीं सकता वहां आप

जानवर की बातें कर रहे हैं। वैसे ये सारी

चीजें आप

दुकान में ही रखते हैं या घर में भी कोई

नहीं।

आपको जो चाहिए

वो सब इस दुकान में मिलेगा।

आप ठीक कहते हैं बड़े ठाकुर।

क्या ये सच है ठाकुर साहब? शेर के मुंह

अगर इंसान का खून लग जाए फिर वो जानवर

नहीं खाता। हां किसी हद तक। और अगर इंसान

के मुंह इंसान का खून लग जाए तो

सलीम मेरे सलीम को देखा तुमने? भाईजान

मेरा बेटा मेरा सलीम कहीं नजर आया तुमको।

कोई भी जवाब नहीं देता। खुदा के लिए मेरे

सलीम को ढूंढ के लाया था दो। मेरा बेटा

मुझे लौटाया था। सलीम सलीम सलीम मेरा

सलीम। बेचारे का एक ही बेटा था। पता नहीं

कहां गुम हो गया। इंस्पेक्टर

बजाय लोगों पर शक करने से अच्छा है कि

गरीब मां के बच्चे का पता लगाओ। बेचारी

दुआ देगी तुमको।

मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं

ठाकुर साहब। कोशिश?

उसकी सारी कोशिशें बेकार है भाई साहब।

क्योंकि

चींटी को हाथी के सूंड तक पहुंचने के लिए

बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।

तुम ठीक कहते हो सूर क्योंकि इंस्पेक्टर

विजय हमारी शतरंज का एक जख्मी प्यादा है।

कितना दौड़ेगा और कब तक। ठाकुर साहब, बच्चे

आ गए। आओ, आओ बच्चों, हम तुम्हारा इंतज़ार

कर रहे थे। देखो बाजार से हम तुम्हारे लिए

क्या लाए हैं।

क्यों? कैसा है? अच्छा है। सीमा इसे पहना

दो। और सिद्धू जी

खाने का टेबल लगाओ। जी साहब।

[संगीत]

शुक्रिया।

लाओ दूसरा पहना देती हूं। जी कोई बात नहीं

मुझे इसकी जरूरत नहीं है।

अच्छा जी तो हम चलते हैं। चलो रानी।

[संगीत]

[संगीत]

पी

[संगीत]

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

रानी ओ रानी राजा रानी ए राजा का बात है

रे चल रानी हम यहां से भाग चले का है रे

का बात है रानी कल रात हम का देखे का देखा

रे हम देखे वो तीनों ठाकुर धोखा उठाकर ले

जा रहे थे कहां ले गए थे तुझे ए राजा तूने

जरूर कोई सपना देखा होगा अरे ये सपना नहीं

सच्चाई है। जान बचाना चाहते हो तो भाग जाओ

यहां से। भाग जाओ।

ये देखो। ये देखो एक ऐसा निशान इसके हाथ

में भी होगा।

[संगीत]

[प्रशंसा]

एक दिन तुम लोग भी मुझे बनाते जाओगे। भाग

जाओ यहां से। यहां से भाग जाओ।

[प्रशंसा]

[संगीत]

सिद्धू

सिद्धू सिद्धू सिद्धू सिद्धू सिद्धू

सिद्धू सिद्धू

[संगीत]

जी ठाकुर साहब

ठाकुर के बच्चे जख्मी परिंदे पिंजरा तोड़

कर निकल भागे हैं। इससे पहले कि उनकी

उड़ान हमारी इज्जत और शहरत के महल को

चूरचूर कर दे उनको फौरन ही गिरफ्तार कर

लेना चाहिए।

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

राजा

हेलो

[संगीत]

हेलो

ये तो जानना पड़ेगा तुमको

पड़ गई

[संगीत]

कहां जाएगा?

देख लेता हूं।

अरे

चलो देख लेता हूं।

[संगीत]

चल

तू भी चल

[संगीत]

हे

एक्सक्यूज मी हेलो गुड इवनिंग अपन ओपनहार

से कह सकता है कि आप फेमस मंगलपुर स्टेशन

के फेमस रेलवे स्टेशन के फेमस स्टेशन

मास्टर है मिस्टर फेमस और अपन है फेमस

जर्नलिस्ट मिस्टर माइकल

आई एम राइट अपने राइट देखो का अपने लेफ्ट

देखो। काइक को। कुछ नज़र आया? हं? कुछ भी

नहीं। ओनली व्हील। जहां कुछ नज़र ना आए उसे

वीराना कहते हैं। वीराना? राइट? लेफ्ट।

मास्टर जी। मास्टर जी, आप पहले ड्रिल

मास्टर थे क्या? नो रिस्पॉन्स। मास्टर जी।

अंकल

ये रेलवे स्टेशन पे स्ट्राइक है क्या?

क्यों? नो कुली, नो दुकान, नो चाय, नो

कॉफी, नो खिड़की विंडो, टिकट विंडो। खिड़की

थी। बंद कर दी गई। काहे को? पिछले दो साल

में इस स्टेशन पर दो ही आदमी उतरे हैं। दो

साल में ओनली टू पैसेंजर्स और आज तीसरा

साल शुरू हुआ है। वेरी गुड। देन मैं 30

आदमी। वो दोनों यहां से वापस नहीं गए।

काहे को? इस स्टेशन पर जो उतरता है वापस

नहीं जाता। तुम भी जाओगे। यस व्हाई नॉट।

तो ऐसे करो अंधेरा होने से पहले पहले इस

सीधी पगडंडी से चले जाओ। हम्म। खुदा करे

ये तुम्हारी जिंदगी का आखिरी सफर ना हो।

काहे को? आप मेरे को डरा रहे हैं लेकिन

मैं डरने वाला नहीं। आपने महबूब खान की

पिक्चर नहीं देखी जिसमें था मुद्दई लाख

बुरा चाहे तो क्या होता है। वही होता है

जो मंजूर खुदा होता है। दैट्स राइट। मंजूर

गॉड होता है।

ओ द घोड़ा फॉर मी घोड़ा ब्रदर्स

थैंक यू थैंक यू गुड इवनिंग हेलो नो

रिस्पांस पर काहे को

जोड़ी रोमांस प्लीज गिव मी वन फोटोग्राफ

थैंक यू अभी हम तुम्हारा फोटो टाइम्स ऑफ

इंडिया में छुपाएगा इवनिंग न्यूज़ में

छुपाएगा ब्रिटि में छुपाएगा, बुलेटिन में

छुपाएगा, फिल्म फेयर में छुपाएगा और फिर

तुमको हार्ड फिल्म का हीरो बनाएगा और फिर

तुमको फिल्म फेयर अवार्ड दिलाएगा। डोंट

फॉरगेट मी। वैसे लोग भूल जाते हैं। अभी हम

तुमको तुम्हारे ड्राइवर का फोटो लेता है।

जॉकी का जॉकी का मत पूछना काहे को जॉकी

जॉकी जॉकी जॉकी ड्राइवर मिस्टर ड्राइवर।

नो ड्राइवर आई थिंक गया है। डोंट वरी टेक

योर टाइम जब तक हम रेस्टिंग आते हैं।

ब्रदर

[संगीत]

ओ ग ब्रदर्स तुम हमको यहा काहे को दिस इज

नॉट फेयर अपुन का आर्ट फिल्म का

कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल हां

ओ ओ गॉड द हॉरर द टेरर द भयानक

द गेट ओ गॉड प्लीज हेल्प मी

मुदई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है वही

होता है जो मंजूर गॉड होता है

[संगीत]

ओ अपना शिट उधर पहले आओ

[संगीत]

[संगीत]

थैंक यू स्माइल प्लीज

थैंक यू थैंक यू थैंक यू

हटा

काहे को भाग काहे को?

अरे अपन काहे को

तो कौन है? अरे मेरे को बोल के खुद ही भाग

गया। काहे को? छोड़ दो हमें। छोड़ दो हमें।

छोड़ दो।

[संगीत]

सिद्धू तुम्हारी जरा सी लापरवाही हम सबके

लिए फांसी का फंदा बन सकती थी।

तुम्हें इसकी सजा मिलेगी और गिनगिन के

मिलेगी।

[संगीत]

आ

[संगीत]

बस करो छोटे ठाकुर

अब हम इसे सजा देंगे।

बड़े ठाकुर

मुझे माफ कर दीजिए।

अब ऐसी गलती नहीं होगी।

ठीक है सिद्धू। हमने आज तुमको माफ़ कर

दिया। लेकिन याद रखना इसके आगे किसी भी

जश्न में तुम शामिल ना हो सकोगे।

नहीं नहीं ठाकुर साहब। नहीं नहीं

आप भी चाहे तो मुझे कोड़े मार लीजिए। लेकिन

ऐसी सजा मत दीजिए।

नहीं ठाकुर साहब मुझे अपने साथ ही रखिए।

मैं आपका हर हुक्म मानने के लिए तैयार

हूं। सिद्धू आखिर को तुम हमारे बचपन के

साथी हो। हमारे छोटे भाई समान

इस खुशी में आज हम एक साथ दो शिकार का

[संगीत]

[संगीत]

शैतान

मेरी बीवी को तूने मुझसे छीन लिया था ना

हम सरकार हम कहां मंगलपुर के बेगुनाहों का

खून पीने वाले मैं तुझे जिंदा नहीं

छोडूंगा रुक जाइए इंस्पेक्टर साहब क्यों

इस गरीब को मार रहे हैं आप यही वो आदमी है

जिसके कानून को तलाश है यही आदमी मेरे

कईयों का खून पी चुका है मैं। नहीं नहीं

नहीं ये खून पीता नहीं। ये तो खराब खून

चूस के फेंक देता है। ये तो हम देहातियों

का देहातियों का इलाज करता है। आइए मेरे

साथ आइए। ये देखिए।

लेकिन ये निशान कैसा? ये सींग का। सींग का

निशान है। इसी से खराब खून खींच के बाहर

फेंक दिया जाता है।

कौन है जो इसका गलत इस्तेमाल कर रहा है?

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

वो फोटोग्राफर का बच्चा ज्यादा शोर मचाने

लगा तो मैंने उसे राजा और रानी के साथ

बांध दिया है।

अच्छा है। सभी मेहमान एक ही जगह पे रहेंगे

तो उनकी पहरादारी और खातेदारी करने में

आसानी होगी। वरना उस फोटोग्राफर्स को

कभी-कभी मुझे भी घबराहट होने लगती है।

काहे को? खाना तो खा। अरे अपन काहे को?

अपुन तुमको बोला 10 टाइम्स बोला कि अपुन

हंगर स्ट्राइक पर है। फिर ये खाना काहे

को?

ब्लड जूस आर कमिंग। यू ब्लड सगस शैतान की

टोली डेविस गैंग। अपुन तुमको जिंदा नहीं

छोड़ेगा। यू बैड लक पीपल। अपुन अपना खून

पसीना पैसा खर्चा करके इधर काहे को आया?

तुमको वर्ल्ड के अंदर फेमस करने का वास्ते

आया। आई मीन यू नीड पब्लिसिटी। लेकिन

तुमने अपना खून पिगा काहे को? बट डोंट

फॉरगेट ये एक जर्नलिस्ट का खून है। इसके

अंदर पॉलिटिक्स, इकोनॉमिक्स, फिजिक्स इतना

जर्म्स है कि तुम्हारा पेट के अंदर जाकर

हंगर स्ट्राइक करेगा, पोस्टर लगाएगा, नारा

लगाएगा और फिर तुमको अपना-अपना लाइफ का

चेयर छोड़ना पड़ेगा। खामोश काहे को? कितना

डिक्टेटरशिप काहे को? अपुन क्या रोने कुपन

नहीं सकते? अपुन फरियाद पर नहीं कर सकते।

आज शाम को इसी की फरियाद सुनेंगे।

[संगीत]

ए ऐ तुम अपन का रूम में आया। काहे को?

मुझे प्यास लगी है। प्यास लगी है। अपन का

रूम में मटका नहीं है। मुझे पानी नहीं

चाहिए।

मैं तुमसे अपनी प्यास बुझाऊंगा। काला

[हंसी]

ड्रैकुला क्रॉस से डरता है। द क्रॉस इज

डेंजरस फॉर ड्रैकुला।

कितने भाई हैं?

चार होते तो

[हंसी]

वो भी अपन का खून पीते।

हे ठाकुर तेरे दांत बहुत भयानक है रे। ये

दांत अपन को दे दे ठाकुर।

ये दांत अपन को दे दे ठाकुर। ये दांत अपन

को दे दे ठाकुर। हाथ नीचे कर। दांत नीचे

कर। हट। दांत नीचे।

हट हट हट हट हट हट हट हट हट

हट

हट हट

[संगीत]

[हंसी]

जीमा जिस्म के लिए वही काम करता है जो एक

पायलट हवाई जहाज के लिए।

जिस्म का हर हिस्सा उसका हुकुम मानता है।

अब देखिए दिमाग दो हिस्सों में बटा हुआ

है। जिस तरह टाइप की मशीन कागज पर हमारी

सोची हुई या लिखी हुई बात टाइप कर देती

है। उसी तरह जिस्म की नसों की हर हरकत

दिमाग पर आकर छप जाती है। सर हमारे जिस्म

में जो खून बनता है वो नसों के जरिए हमारे

हर हिस्से में फैल जाता है। क्या यह भी

दिमाग के हुक्म से? यह जो नसें दिमाग में

नजर आती हैं, क्या यह खून सप्लाई करती हैं

इस वक्त?

[संगीत]

सर इसलिए कि आप बायोलॉजी के एक मशहूर

प्रोफेसर हैं। सर लोग कहते हैं कि मंगलपुर

में जितने भी कत्ल हुए उन सभी का खून किसी

ना किसी इंसान ने ही पिया है। सर क्या

इंसान इंसान का खून

सर ये कुत्ते हमेशा आप ही को देखकर क्यों

भौकते हैं? कुत्ते क्यों भौकते हैं? कत्ल

कैसे होते हैं? ये तुम्हारे सारे सवालों

का जवाब हमारी हवेली में मिलेगा। गोविंद

किसी दिन अकेले चले आओ। मगर आपकी हवेली तो

बहुत दूर है सर।

मंगलपुर के चौराहे के पास हर शाम हमारी

घोड़ा गाड़ी तुम जैसे सवाल पूछने वालों का

इंतजार करती है।

[संगीत]

[संगीत]

गाड़ी लाओ

[संगीत]

[संगीत]

गाड़ी पीछे लो।

चलो

आगे चलो।

गाड़ी पीछे चलो।

[संगीत]

गाड़ी रोको।

[संगीत]

इसका मतलब है

मरने वाला टेनी से टकरा के मरा है।

इंस्पेक्टर साहब यही पेड़ मेरे भाई का

कातिल है। नहीं

कातिल ये पेड़ नहीं कोई और है।

लेकिन कौन है वो?

क्या आप लोग बता सकते हैं ऐसी कौन सी

सवारी है जिसकी ऊंचाई 9 10 फीट की हो जो

इस सड़क से गुजरती हो?

[संगीत]

आप बता सकते हैं इस गांव का सबसे पुराना

आदमी कौन है? साहब स्टेशन मास्टर इस गांव

का सबसे पुराना आदमी है।

स्टेशन मास्टर बहुत समझाया लेकिन वो नहीं

माना। मानता भी कैसे? जर्नलिस्ट क्यों

ठहरा? जर्नलिस्ट। हां अपना नाम माइकल बता

रहा हूं। माइकल

यानी एक और। लेकिन खान साहब मैं जिस लाश

की बात कर रहा हूं वो किसी और की लाश थी।

और इस बार मरने वाले के बदन में खून था।

खान साहब आप ये बता सकते हैं इस गांव में

कौन सी ऐसी ऊंची सवारी है जिसको ऊंचाई कुछ

910 फीट की हो। 910 फुट।

वो तो ठाकुरों की घोड़ा गाड़ी है।

[संगीत]

[प्रशंसा]

[संगीत]

लगता है बहुत दिनों से इसका इस्तेमाल नहीं

हुआ।

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

कौन इंस्पेक्टर

मैं समझा कोई चोर घुस आया है। हम पुलिस की

वर्दी में भी

आपको चोर नजर आएंगे। पुलिस की वर्दी तो

इंस्पेक्टर, बैरुपे और ड्रामे वाले भी

पहनते हैं।

आप ठीक कहते हैं ठाकुर साहब।

चोर और कातिल

किस वक्त

किस भेष में मिल जाए?

यह जानना

बहुत मुश्किल है। लेकिन ताज्जुब है आपके

यहां तो हर चीज

हर चीज ऑटोमेटिक है। यहां किस लिए आए हो?

मैं आया नहीं ठाकुर।

जबरदस्ती लाया गया। पुलिस के साथ

जबरदस्ती। हम

वैसे भी इंस्पेक्टर अगर पुलिस किसी के घर

में वर्दी पहन के घुस जाए तो लोग समझते

हैं उसे गिरफ्तार करने आई है।

मगर आज मैं खुद एक गिरफ्तार हो के चला

हूं। ठाकुर साहब

आपकी घोड़ा गाड़ी के हाथों। वैसे आपने

अपने घोड़ों को बहुत अच्छी ट्रेनिंग दे

रखी है। बेचारे कुछ माल का काम खुद ही कर

लेते हैं।

लेकिन उन घोड़ों को

पुलिस भर्ती की पहचान नहीं है। कौन सी

कहानी सुना रहे हैं वो इंस्पेक्टर। मौत की

कहानी सुना रहा हूं ठाकुर। आप ही का

स्टूडेंट गोविंद।

आपकी ही गाड़ी पर सवार था। एक पेड़ की शाख

से टकरा कर गिरा और मर गया। गोविंद हां

शायद शहर से आप ही से मिलने आ रहा था।

इंस्पेक्टर हम अपने घर में किसी को नहीं

बुलाते।

मौत को कौन बुलाता है छोटे ठाकुर

वो खुद ही आ जाती है। जिस तरह पहले लोगों

को मौत आई। जिस तरह मेरी बीवी की मौत आई।

और शायद कल

माइकल को भी मौत आ जाएगी। कौन माइकल? क्या

आप बेवकूफों जैसी बात करते हो? सूर्य

यह हमारे बिन बुलाए मेहमान हैं। इन्हें कह

दो कि यह हम ठाकुरों की हवेली है। कोई

सराया नहीं। यहां सिर्फ मेहमानों की इज्जत

होती है। मिस्टर इंस्पेक्टर। आपको शायद

मालूम नहीं कि प्रेस पसेस आर

प्रोसक्यूटेड। नेक्स्ट टाइम मेक इट अ

पॉइंट। कि इस हवेली में दाखिल होने से

पहले हमारी इजाजत या तो फिर सरकारी

इजाजतनामा लेकर आना। नाउ गो आउट जी गेट

आउट ठाकुर साहब आई से गेट आउट ऑफ माय

पैलेस

ठीक है लेकिन याद रखना ठाकुर साहब

अबकी बार

इजाजत नमाज साथ लेकर ही आऊंगा

[संगीत]

रेनो

रेनू

रेनू

ये प्यादा तो बड़ा खतरनाक नजर आता है भाई

साहब। सूर्य यह प्यादे तो सिर्फ हमारी

उंगलियों पर चलते हैं। हम जब चाहे

इन्हें जगह से हटा सकते हैं।

याद है इंस्पेक्टर एक दिन हमने तुमसे कहा

था कि हम तुम्हारी इस गांव से बदली करा

देंगे। आज हम तुम्हारी इस दुनिया से बदली

कराने आए हैं। मंगलपुर के मंगू दादा पिछली

बार तुम मार खा के जेल गए थे। अबकी बार

जहन्नुम में जाना चाहते हो। लेकिन लाश

उठाने के लिए तो चार आदमी की जरूरत होती

है। तुम तो सिर्फ तीन लाए।

[संगीत]

आ

[संगीत]

होश में आओ विजय तुम किस पर शक करते हो

जानते हो? जानता हूं सर। वो लोग बहुत अमीर

हैं। सिर्फ अमीर ही नहीं इस इलाके के सबसे

ज्यादा इज्जतदार घराने के लोग हैं। उनके

खानदान में आज तक किसी ने कोई जुर्म नहीं

किया। ना कानूनी ना समाजी और तुम उन पर शक

करते हो। ठाकुर साहब को तो लोग इंसान ही

नहीं फरिश्ता मानते हैं। शैतान को फरिश्ता

बनने में देर लग सकती है सर। लेकिन

फरिश्ते को शैतान मानने में नहीं।

ठाकुर साहब आप इंसान नहीं फरिश्ता हैं। आप

नहीं होते तो हम गांव वाले नंगे भूखे मर

जाते। ठीक कहती है मौसी ठाकुर फरिश्ता है

फरिश्ता। हां जो मैं कहता है तुम ठीक कहा

था। बड़े दयालु है ठाकुर साहब। अरे भैया ये

बड़े

देवता

[संगीत]

शान है। मंगल बहुत

हो

[संगीत]

डॉग हैज़ सिक्स सेंस एंड इट कैन स्मेल

बैड मैन

ये कुत्तों की किताबें कब से पढ़नी शुरू

कर दी तुमने? आपके लिए लाऊं सर। हैं?

देखिए इसमें लिखा है कि कुत्ते फौरन शैतान

को सुन लेते हैं। पढ़िए।

ये देखिए। डॉग हैज़ सिक्स सेंस एंड इट कैन

स्मेल बैड वूमेन। और मंगलपुर के लोगों में

ये बात मशहूर है सर। कि ठाकुर खानदान का

जब भी कोई बाहर निकलता है उसके पीछे

कुत्ते भोकना शुरू कर देते हैं। और ये

किताब और ये किताब साबित करती है कि वो

लोग खूनी है, कातिल है। इंसान की शक्ल में

दरिंद है। मिस्टर विजय होश में आओ अगर

तुमने जिद ना छोड़ी तो सर्विस गवा बैठोगे।

जिसकी जिंदगी छीन गई सर। उसे अब सर्विस की

क्या परवाह? सेक मी। सैक मी। इंस्पेक्टर

विजय जानते हो तुम क्या कह रहे हो?

हम सॉरी

विजय

दरअसल तुम्हारी बीवी की मौत ने

तुम्हें जज्बाती बना दिया है। जज्बाती

नहीं सर

तो ये पागल बना दिया है।

तीनों की मौत के बाद

मैं पागल हो गया हूं।

मेरे सारे सपने बिखर गए सर।

मुझसे छीन गई।

तेरा बसा बसाया घर उधर गया।

मैं कहीं का नहीं रहा।

और जिसने

जिसने मुझसे मेरा चैन छीना है,

मैं उन्हें चैन की नींद छूने नहीं दूंगा।

एक दिन मैं उन तमाम कातिलों को रंगे हाथ

पडूंगा। बिना किसी सबूत के कानून हमारा

कुछ नहीं बिगाड़ सकता। भाई साहब

छोटे ठाकुर अगर हमें गिरफ्तार करने के लिए

इस बार इंस्पेक्टर खुद

खुद ही सबूत बनकर चला आए तो

मुझे सबूत चाहिए खान साहब। और ये सबूत

मुझे हवेली में ही मिल सकता है। खान साहब

आप कभी हवेली में गए हैं? हां बहुत साल

पहले एक बार साधु से ही ले गया था। साधु

सिंह ये साधु सिंह कौन? ठाकुरों के मैनेजर

सिद्धू का बाप साधु सिंह। साधु सिंह हमारे

खानदान का वफादार नौकर था। फिर वो सिद्धू

का बाप भी है। मेरे ख्याल से वो

कभी हमारे खिलाफ जुबान नहीं खोलेगा। ठाकुर

जरूरत से ज्यादा खुदमादी

शेर को शिकारी का निशाना बना दी थी।

इससे पहले कि कोई मजबूरी साधु सिंह को

हमारा राज बताने पर मजबूर करे।

हमें अपने इस राजदार को

खत्म करना होगा।

[संगीत]

अंदाज

बड़ा भयानक है साधु सिंह

मेरा नाम कैसे जानते हो? कौन हो तुम?

इंस्पेक्टर विजय

मैं तुम्हारा सिर्फ नाम ही नहीं साधु सिंह

मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जानता हूं।

लेकिन ये तो बताओ ठाकुर धर्म प्रताप सिंह

की हवेली छोड़कर इस जंगल में क्या कर रहे

हो? ठाकुर मैं मैं किसी ठाकुर धर्म प्रताप

सिंह को नहीं जानता।

मैं मैं किसी को नहीं जानता।

फिर नाम सुनकर चौके क्यों?

ठाकुर का नाम सुनकर चौंकना ये साबित करता

है कि तुम इस खानदान के बारे में सब कुछ

जानते हो। नहीं मैं किसी ठाकुर को नहीं

जानता। मेरा मेरा किसी ठाकुर से कोई

ताल्लुक नहीं। लेकिन तुम्हें ये बहुत

अच्छी तरह मालूम है साधु सिंह।

हवेली में जो भी नया आदमी आता है वो वापस

नहीं जाता। कुछ दिनों बाद उसकी लाश जेल

में मिलती है। उस भयानक हवेली में कौन सा

ऐसा शैतान है साधु सिंह जो इंसानी खून से

अपनी प्यास बुझा रहा है? बताओ साधु सिंह

तुम्हें सब कुछ मालूम है? नहीं मैं कुछ

नहीं जानता। मुझे मुझे कुछ मालूम नहीं।

कुछ मालूम नहीं। ठीक है साधु सिंह। क्या

तुम्हें कुछ भी नहीं मालूम?

फिर मैं तुम्हारा वक्त बर्बाद नहीं करना

चाहता हूं।

दरअसल मैं तुम्हें एक सच्ची खबर सुनाने

आया था। शायद उसे सुनकर बर्दाश्त नहीं कर

पाओ।

जिस बेटे को तुम हवेली में जिंदा छोड़ आए

थे। पुलिस को छील में उसकी लाश मिली।

हां साधु सिंह। उसके जिस्म पर भी वही

निशान थे जो दूसरी लाशों पर पाए गए।

नहीं

वो मेरे बेटे के साथ ऐसा नहीं कर सकते

हैं।

ठाकुर मेरे बेटे का खून नहीं कर सकते।

नहीं आखिर सच्ची बात जबान पर आ ही गई।

ठाकुर

सा सिंह अब तो मुझे सब कुछ बता दो। साधु

सिंह तुम्हें सब कुछ मालूम है।

आज के बाद

किसी साधु सिंह का बेटा ठाकुरों के

जुल्मों का शिकार नहीं होगा। बता दो साधु

सिंह बता दो मुझे। मैं बता दूंगा। मुझे आज

भी राजपूत की वो लालाल भयानक आंखें

अच्छी तरह याद है।

जय गुरुदेव।

सिद्धि के लिए सात वर्ष की कठोर तपस्या

करने के बाद तपस्वी राजगुरु हमारे द्वार

पर पधारे। हम कृतार्थ हुए। गुरुदेव

अब हमारे पूर्वजों के छिपे खजाने को बताने

या प्राप्त करने का उपाय बताइए।

सुनो ठाकुर

हमने तंत्र विद्या से जो सिद्धि हासिल की

है उससे तुम्हारे पूर्वजों के छुपे हुए

खजाने का पता तो लग सकता है लेकिन उसके

लिए तुम्हें एक कार्य करना होगा खजाने को

प्राप्त करने के लिए मैं दुनिया का हर

अर्थ अनर्थ करने को तैयार हूं तो सुनो

ठाकुर तुम सबसे पहले महायज्ञ शुरू करो जय

तांत्रिक देवी नर मुंडाय

पिशाचय

स्वयं सहाय कपालिनी

जी नार मुंडाय

पिशाचय

स्वयं सहाय संप्रगामी

तांत्रिक देवी विराजमान

ओम

[संगीत]

[संगीत]

देगा ठाकुर

तांत्रिक देवी तुम्हारी तपस्या का फल

अवश्य देगी। तुम्हें 501 अमावस्या की रात

जाग कर देवी को प्रसन्न करना होगा। तपस्वी

हमें और क्या करना होगा? तुम्हें आहुति

देनी होगी ठाकुर

लेकिन तुम्हारे कुलगुरु होने के नाते

देवी को पहला तिलक हमारे रक्त का लगेगा।

[संगीत]

हमने अपना कर्तव्य पूरा किया ठाकुर गुरुवर

क्या हमें भी 501 बार अपने ही रक्त की

आहुति देनी पड़ेगी? जाओ जाकर जश्न मनाओ।

तुम्हें तुम्हारे प्रश्न का उत्तर खुद ही

जश्न मिलेगा। ठाकुर साहब, ठाकुर साहब,

ठाकुर साहब, मेरी बहन चंपा को कोई पता

नहीं। मैंने हवेली कोना-कोना छान मारा।

कहीं नहीं मिली। ना जाने कहां चली गई।

तलाश कर लीजिए। जी।

[संगीत]

आ

[संगीत]

ठाकुर

चंपा भाई

मैं समझ गया बलदेव सिंह ठाकुर का राज जान

गया था

इसलिए उसे ऊपर से नीचे फेंक दिया गया

और कुछ अरसे बाद

बड़े ठाकुर ने मरने से पहले

अपने बेटों के साथ-साथ

मेरे बेटे सिद्धू की भी शादी करवा दी

[संगीत]

और एक रात एक शोर सा हुआ।

[संगीत]

ठाकुर साहब इन लोगों ने जो कुछ देखा है आज

तक किसी ने नहीं देखा और हम अपने राजदार

को जिंदा रखने का खतरा नहीं ले सकते। अगर

जिंदा ही रहना चाहती हो तो आज के बाद इस

हवेली से बाहर नहीं निकलोगी। समझे? उस रात

मुझे यकीन हो गया कि खजाने की हवस ने

उन तीनों को शैतान बना दिया।

इसलिए उन्हें देखकर कुत्ते भागते थे। हां

बेटा।

लेकिन तुम हवेली छोड़कर क्यों चले आए?

एक रात किसी खटके से मेरी आंख खुली।

तो खिड़की में से मुझे तीन साए नजर आए।

उनकी खूंखार आंखें देखकर

मुझे ऐसा लगा

जैसे वो यह कह रही हो

कि अब

अब मेरी बारी है। मैं अपनी मौत से घबरा कर

हवेली छोड़कर जंगल चला आया।

लेकिन ये सारी बातें आपने पुलिस को क्यों

नहीं बताई? कैसे बताता

क्योंकि मेरा बेटा चोद में शामिल हो गया

था। पर वो घोड़ा गाड़ी वो लोग होशियार हैं

बेटा

दिमाग से काम लेते हैं। दरअसल घोड़ा गाड़ी

की पायदान पर एक स्प्रिंग लगा हुआ है।

उसके पायदान पर घोड़े की निगाह में खुद बख

खींच जाती है और घोड़े तेज रफ्तार से

भागने लगते हैं। हमेशा हवेली के दरवाजे पर

ही आकर रुकना उनकी आदत बना दी गई है। अब

मेरे साथ चलकर सारी बातें अफसर को बता

दीजिए। वो मुझे पागल समझते मेरी बात का

यकीन नहीं करते कि ठाकुर ही कातिल है।

[संगीत]

साधु सिंह मुझे माफ कर देना साधु सिंह

मैंने तुम्हें झूठ कहा था तुम्हारा बेटा

जिंदा है

साधु सिंह

साधु सिंह

[संगीत]

हम्म

भाई साहब ये पुलिस वाले की लाश है। यहां

मिली तो कानून हमें नहीं छोड़ेगा।

तुम ठीक कहते हो सूर उठा लो इसको।

हमारी हवेली के तहखाने में डाल दो साले

को।

इंस्पेक्टर तुम्हारी बीवी भी इसी रास्ते

से गई थी और आज तुम भी

कल तक बाकी सारे मेहमान भी तुम्हारे पास

पहुंचा दिए जाएंगे। आज हमारी 501 अमावस्या

की आखिरी रात है और आज ही हमारे रास्ते की

सारी रुकावटें दूर हो गई।

[प्रशंसा]

[संगीत]

तुम लोग हैरान हो कि ऊपर जाने वाला नीचे

कैसे आ गया?

लेकिन अबकी बार तुम लोगों के लिए ऊपर वाले

से मौत का पैगाम लेकर आया हूं ठाकुर।

अरे शैतानों

रेनू के कत्ल और सभी बेगुनाहों के खून का

हिसाब चुकाने आया हूं। इंस्पेक्टर

चिल्लाने की जरूरत नहीं है ठाकुर। मुझे

मालूम है इस भयानक हवेली में कदम रखने से

पहले इजाजतनामे की जरूरत होती है। और आज

मैं इजाजतनामा साथ लेकर आया हूं। ठाकुर

इंस्पेक्टर

[संगीत]

[हंसी]

तुम्हारे उस खिलौने के पटाखे तो हमारे हाथ

में है इंस्पेक्टर।

[संगीत]

ओम

[संगीत]

नहीं

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

नहीं नहीं नहीं

[संगीत]

ये क्या है?

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

चलो इंस्पेक्टर

[संगीत]

इंस्पेक्टर भाग जाओ इंस्पेक्टर इन सबको

लेकर भाग जाओ इंस्पेक्टर अब तुम नहीं बच

सकते ये सब

चलो कोई भी हवेली से बाहर जाने ना पाए

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

हो

[संगीत]

आ

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

जिंदाबाद

[संगीत]

हट जाइए

हट जाइए डॉक्टर साहब हट जाइए पकड़ लीजिए

पकड़ लीजिए रोक नहीं सकता

जल्दी चलो

जल्दी चलो

[संगीत]

ऐसे चलो सिंधु चलो जल्दी करो करो सिंधु

जल्दी चलो सिंधु सिंधु जल्दी चलो

[संगीत]

जल्दी जल्दी करो

सिद्धू जल्दी करो

[संगीत]

बहुत तेज सूर इनमें से कोई भाग भाई

[संगीत]

और दुनिया और

[संगीत]

लगता है पेट्रोल खत्म हो गया।

ओके

[संगीत]

[संगीत]

ओम

[संगीत]

[संगीत]

[संगीत]

राजा

[संगीत]

डरो मत राजा अब तुम लोगों का कोई कुछ नहीं

बिगाड़ सकता। जाओ तुम लोग मेरा एक छोटा सा

काम कर देना। ये कानून की चीज है। कानून

के हवाले करो। और तुम हमारे साथ नहीं

आओगे। वक्त बहुत कम है दादा। सबको

संभालना। जाओ।

[संगीत]

मैं यहां हूं ठाकुर।

ये मत समझो कि मैं तुम लोगों से डर कर भाग

रहा था। इस जगह को पहचानो। यह वो जगह है

जहां मुझे मेरे रेनू की लाश मिली थी और

मैंने इसी जगह खड़े होकर कसम खाई थी तो

मैं तुम लोगों की समाधि यही बनाऊंगा और आज

तुम इसी जगह पर खड़े हो ठाकुर कहीं ऐसा ना

हो कि तुम्हारी समाधि बन जाए

[संगीत]

[संगीत]

या

ओ

[संगीत]

विजय

विजय

अगर तुम चाहते तो उन्हें जिंदा पकड़ सकते

थे। कानून को हाथ में लेके तुमने अच्छा

नहीं किया। कानून तुम्हें सजा देगा।

आई एम सॉरी बेटे।

जी

Can't find what you're looking for?
Get subtitles in any language from opensubtitles.com, and translate them here.