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इज़रायल और ईरान इनकी दुश्मनी बरसों पुरानी है।
[सूत्रधार]: इज़राइल ने हमेशा माना कि ईरान उसके वजूद को मिटाना चाहता है।
ईरान कभी न्यूक्लियर पावर ना बने, इसलिए इज़राइल
एक-एक करके ईरान के न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को निशाना बनाता गया।
यह कहानी 13 फरवरी 2012 की है,
जब ईरान ने तीन जगह इज़राइली डिप्लोमैट्स को निशाना बनाया।
जॉर्जिया, थाईलैंड और तीसरा... इंडिया।
(बादल गरजने की आवाज़) (ट्रक के हॉर्न की आवाज़)
(लोगों के बात करने की आवाज़)
(लोगों के बात करने की आवाज़)
(ट्रक के हॉर्न की आवाज़)
(बरसात होने की आवाज़) (गाड़ी चलने की आवाज़)
(लोगों के बात करने की आवाज़)
[मालिक]: चल जल्दी हाथ चला। [वेटर]: जी, जी।
[गुंडा 1]: ओये! लगा दे! [मालिक]: साहब के लिए थाली लगा दे।
[मालिक]: चल, छोटे, फटका मार जल्दी। फटाफट।
(ज़मीन पर कूदने की आवाज़) (चिंताजनक पार्श्व संगीत)
[गुंडा 1]: अरे, वो नमक-वमक तो ला दे थोड़ा! और घी लेके आ!
[मालिक]: उधर देख, क्या चाहिए।
(दुविधाजनक पार्श्व संगीत)
[राजीव]: विजय।
मेरी फैमिली को धमकी किसने दी थी?
[विजय]: जीजे ने।
[राजीव]: और मेरे घर में चिट्ठी किसने डाली थी?
[विजय]: साले ने।
(बरसात की आवाज़) (पुलिस जीप के साइरन की आवाज़)
[गुंडा 1]: जनाब, आप तो लेट हो गए।
इब तो मामला लोकल पुलिस के हाथ में है।
[विजय]: बेटे, बाप में ना सिखाया करते बाप कैसे बने हैं।
(गुण लोड करने की आवाज़)
(गोली चलने की आवाज़) (बर्तनों के ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
[राजीव]: मकवाना गैंग का हिस्ट्री शीटर था।
पहले गन उसने निकाली। पंचनामा कर लेना।
[विजय]: सर, भाभी जी का फोन आ रहा है।
[विजय]: गाड़ी निकालो। [राजीव]: सॉरी, साइलेंट पे था।
[काजल]: तो फिर फोन रखने का क्या मतलब है?
आ गई?
[राजीव]: आती होगी।
(बच्ची के हँसने की आवाज़)
[राजीव]: डोंट वरी। केक आ ही रही है।
[काजल]: राजीव कहाँ हो तुम? [राजीव]: गुड़गाँव में ही हूँ।
[काजल]: मतलब, तुम नहीं गए।
तो फिर स्पेलिंग कौन चेक करेगा?
[राजीव]: ट्रस्ट मी कोई स्पेलिंग मिस्टेक नहीं होगी।
[काजल]: एंड प्लीज़ टाइम पे आना।
[राजीव]: पक्का।
[राजीव]: क्या? [विजय]: सर, फोन।
[विजय]: हूँ? [राजीव]: ओह।
[राजीव]: किसके मैसेजेस हैं? देखें ज़रा। [विजय]: अरे, सर।
[विजय]: सर, सर! गाड़ी लग जाएगी, सर।
[राजीव]: मम्मी के दो नाम हैं?
आराधना, कल्पना। (गोपाल के हँसने की आवाज़)
[विजय]: गोपाल जी, बहुत हँसी आ रही है आपको।
(बटन दबाने की आवाज़)
(ट्रैफिक की आवाज़)
[फूलवाली बच्ची]: ले लो, ले लो, फूल ले लो। ताज़े-ताज़े फूल ले लो।
अंकल, अंकल, फूल ले लो ना। ताज़े फूल हैं।
ले लो, ले लो, फूल ले लो। ताज़े-ताज़े फूल ले लो।
(रहस्यमयी पार्श्व संगीत)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(काँच के टुकड़े होने की आवाज़)
(बम धमाके की आवाज़)
[बेटी]: बाबा!
[राजिव]: हैप्पी बर्थडे। आप कितने साले के हो?
[बेटी]: सात साल।
(पुलिस जीप के साइरन की आवाज़)
[ख़तरी]: प्रेशर कितना है पता है ना तुम्हे?
अपने सारे रिसोर्सेज़ यूज करो इसके पीछे कौन है ये पता करो।
[नीरज]: जी, सर।
[हिमाद्री]: ये तुम्हारा राजीव कहाँ है?
[ख़तरी]: राजीव? पक्का?
वो तो ऑब्सेस्ड है, भई, अभी मकवाना गैंग से।
[नीरज]: ऑब्सेस्ड नहीं, सर। मकवाना ने उसकी फैमिली को धमकाया है।
[हिमाद्री]: अरे, तुम ग़लत समझ रहे हो।
ऑब्सेशन इज़ गुड।
ऑब्सेस्ड वाला ही तो काम आएगा ना, नीरज।
[नीरज]: बट, सर।
आप तो जानते हैं, सर, उसका स्वभाव कैसा है।
वो पागल है, सर।
[हिमाद्री]: ये प्रॉब्लम एडवांटेज बन सकता है इस केस में।
[रिपोर्टर 1]: जैसा कि आप देख सकते हैं कि धमाके के बाद काफ़ी अफरातफरी मची हुई है।
यहाँ एम्बुलेंस भी मौजूद है, लेकिन अब तक किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं है।
पुलिस... (साइरन की आवाज़)
[राजीव]: आरएडब्लू यहाँ क्या कर रहा है?
[नीरज]: इज़राइली एम्बेसी की गाड़ी।
काउंसिल जनरल की वाइफ, दो बच्चे, ड्राइवर,
बॉडीगार्ड और दो पैदल चलने वालों को मिलाकर सात घायल।
[नीरज]: दो गंभीर हालत में हैं। [राजीव]: बच्चे?
[नीरज]: लकीली ज़्यादा सीरियस नहीं हैं।
लेकिन बेचारी वाइफ को 50 परसेंट से ज़्यादा बर्न्स हुए हैं।
(रिपोर्टर्स के बोलने की आवाज़)
[राजीव]: सर, इनसे कहो फज़लू से दूर रहे।
बहुत मुश्किल से हाथ आया है।
[हिमाद्री]: वो तुम्हारे कोई काम का नहीं है।
वो बलोची को वापस बलोच भेज दो।
हमें बड़ी मछली को पकड़ने के लिए ये छोटी मछली चाहिए।
[राजीव]: पैर रखते ही ठोक देंगे उसको। ये उसके लिए सेफ नहीं है।
[नीरज]: गाय्ज़, गाय्ज़, प्लीज़। बाद में बहस कर लेना।
इस केस पर ध्यान दें, हाँ?
[राजिव]: केस?
[राजीव]: केस? मतलब? [नीरज]: फॉरेनर पर अटैक हुआ है।
वो भी एक डिप्लोमैट है। ये ज़रूरी केस है।
[राजीव]: सर, मेरे पास ऑलरेडी आईएम और मकवाना केस है।
[हिमाद्री]: मकवाना, जो तुम्हारी फैमिली को धमकी दे रहा है।
एक 6 साल की बच्ची आईसीयू में है, अपनी ज़िंदगी से जूझ रही है।
और उसका बाप कोई पुलिस वाला नहीं, जो मुजरिम को पकड़ के सज़ा दिला दे।
डिसाइड कर लो।
मैंने इसे एडवांटेज समझा, शायद यही मेरी ग़लती है।
मुझे पता था कि वो थोड़ा सरफिरा है।
लेकिन इतना बड़ा? ये बाद में पता चला।
[विजय]: सीनियर हैं। बहुत सीनियर हैं, हाँ।
[राजिव]: वो कैसी है?
[जोशुआ]: सर्जरी हो गई है, पर अभी भी आईसीयू में है।
[राजिव]: तुम मुझे क्या बता सकते हो?
[जोशुआ]: ये इज़रायल पर हमला है।
[राजिव]: इंडिया में।
[जोशुआ]: इज़रायल के दुश्मन हर जगह हैं।
[राजिव]: मुझे कोंसुल से बात करना है।
[जोशुआ]: समय आने पर।
वैसे, फ़िक्र मत करो।
अब से ये मामला 'हमारा' है।
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[राजीव]: लड़की कहाँ है?
[विजय]: सफ़दरजंग में। बर्न यूनिट।
[राजिव]: छह साल की हिंदुस्तानी बच्ची अपनी ज़िंदगी के लिए लड़ रही है।
तो अब से ये मामला 'हमारा' है।
[वार्ड बॉय 1]: संभल के।
[वार्ड बॉय 1]: वार्ड में रखना। [वार्ड बॉय 2]: हाँ, आराम से।
[वार्ड बॉय 1]: साइड। [वार्ड बॉय 2]: जल्दी।
[वार्ड बॉय 1]: जल्दी। [वार्ड बॉय 2]: पीछे हट, पीछे हट।
[वार्ड बॉय 1]: हाँ, आराम से।
(वार्ड बॉय के ज़ोर लगाने की आवाज़)
[डॉक्टर]: सेफ्टी से इन्हें अटेंड कर सकते हैं।
इन्हें एंटीफंगल्स रख रखिये।
[वार्ड बॉय 1]: स्ट्रेचर निकाल लो। [वार्ड बॉय 2]: हाँ।
[वार्ड बॉय 2]: चलो।
[डॉक्टर]: 70 पर्सेंट से ज़्यादा बर्न्स हैं, वाइटल ऑर्गन्स भी इफेक्टेड हैं।
[डॉक्टर]: हम केमिकल को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
(लोगों के बात करने की आवाज़) (मेडिकल उपकरण की आवाज़)
[राजीव]: इसकी फैमिली?
[नर्स 1]: बस एक भाई है, जो बाहर बैठा है।
(राजीव के आह भरने की आवाज़) (कुर्सी पर बैठने की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत)
[फूल वाली बच्ची]: 'ले लो, ले लो, फूल ले लो। प्यारे-प्यारे फूल ले लो।' (राजीव सोचते हुए)
'अंकल-अंकल, फूल ले लो ना।' (राजीव सोचते हुए)
(साइरन की आवाज़)
[फूल वाली बच्ची]: 'थैंक यू।' (राजीव सोचते हुए)
(वॉकी-टॉकी पर बात करने की आवाज़)
[नर्स 1]: डॉक्टर! डॉक्टर! [डॉक्टर]: मूव फास्ट।
(मेडिकल उपकरण की आवाज़)
(मेडिकल उपकरण की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत) (फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
[काजल]: यो, आरके?
सच में?
आ रहे होना?
[राजीव]: 40 मिनट में पहुँच जाऊँगा।
(दुखद पार्श्व संगीत)
[राजीव]: भूख लगी है?
[सभी बच्चे]: हैप्पी बर्थडे टू यू। (गाते हुए)
हैप्पी बर्थडे, डियर पीहू। (गाते हुए)
हैप्पी बर्थडे टू यू। (गाते हुए)
(सभी बच्चों के चीयर करने और हँसने की आवाज़)
[काजल]: हा! वाओ!
(सभी बच्चों के चीयर करने और हँसने की आवाज़) [काजल]: हूँ!
[काजल]: तुम्हें कुछ दूँ? ये वाला ट्राई करोगे?
(विजय के हँसने की आवाज़)
[दिव्या]: सर, सुकून एनजीओ से बात हो गई है।
थोड़े टाइम में आके बच्ची को लेकर जाएंगे।
(सभी बच्चों के बात करने की आवाज़)
[हिमाद्री]: 'एक 6 साल की बच्ची आईसीयू में है' (राजीव सोचते हुए)
'और उसका बाप कोई पुलिस वाला नहीं, जो मुजरिम को पकड़ के सज़ा दिला दे।' (राजीव सोचते हुए)
(मेडिकल उपकरण की आवाज़)
[वार्ड बॉय 1]: राजीव को मनाने के लिए नेशन के साथ-साथ एक मासूम इमोशन की भी ज़रूरत थी।
(डोरबेल बजने की आवाज़)
[काजल]: वो लोग आ गए। [दिव्या]: वो रहा। [राजीव]: ओके।
[राजीव]: रेयान।
[राजीव]: इधार आ। [काजल और एनजीओ से महिला]: नमस्ते।
[काजल]: कैसी हैं आप? [एनजीओ से महिला]: ठीक हूँ।
[काजल]: कुछ लेंगी आप? [एनजीओ से महिला]: जी, नहीं। शुक्रिया। [राजीव]: अपना ख़याल रखना। ओके।
[राजीव]: थैंक यू बोला? [रेयान]: थैंक यू।
[राजीव]: बाय बोलो। [रेयान][: बाय। [बच्चे]: बाय।
(मेडिकल उपकरण की आवाज़)
[राजीव]: आज उस लड़की की जगह पीहू भी हो सकती थी।
मैग्नेटिक फ्रैगमेंट्स मिले हैं।
बम को कार से चिपका दिया गया था।
नाइट्रोग्लिसरीन और पोटैशियम क्लोराइड का मिश्रण, और टीएनटी हल्की मात्रा में था।
[हिमाद्री]: तो, इसका मतलब क्या है?
[राजिव]: ये बम हाई इम्पैक्ट के लिए बना ही नहीं था।
[हिमाद्री]: तुम क्या कहने की कोशिश कर रहे.... [राजीव]: सर!
[ख़तरी]: बैठो, बैठो, प्लीज़ बैठो।
सुधरेगा नहीं हमारा पड़ोसी, ना?
यह स्पष्ट रूप से आतंकवादी हमला है।
[राजिव]: सर, क्या मैं कुछ बोल सकता हूँ?
ये कोई ऑर्डिनरी टेररिस्ट नहीं है।
इसमें शायद आर्मी का कनेक्शन हो सकता है।
[ख़तरी]: चलो, इन लोगों को एक्सपोज़ करते हैं।
कल सुबह तक सारी रिपोर्ट होनी चाहिए मेरे पास।
[नीरज]: सर, डिटेल एनालिसिस में थोड़ा वक़्त लगेगा।
[ख़तरी]: आई डोंट केयर। ये आर्मी वाला कनेक्शन उस रिपोर्ट में डाल देना।
मुझे कुछ तो चाहिए आगे भेजने के लिए।
और डिले को फेलियर माना जाएगा।
और नीरज, वो... मेरे लॉन फर्नीचर का क्या हुआ?
[नीरज]: सर... वो रास्ते में है, सर।
[ख़तरी]: ठीक है।
[राजीव]: ये पाकिस्तान का काम नहीं लगता।
[नीरज]: मतलब?
[राजीव]: सर, आपने सुना है कभी कि लश्कर या हिज़बुल ने
एक भी गाड़ी ठीक से ना उड़ाई हो?
[नीरज]: हाँ, भाई। कहाँ हो?
अरे, बाहर क्या कर रहे हो? अंदर तो पहुँचाओ।
सुनवाएगा, यार।
कंटिन्यू।
[राजीव]: सर, मैं कह रहा था कि उन लोगों को ना पब्लिसिटी मिलेगी, ना चंदा।
[नीरज]: पर फेल्ड अटेम्प्ट भी तो हो सकता है।
[राजीव]: क्या पाकिस्तानी इज़राइली एम्बेसी की गाड़ी टार्गेट करेंगे?
अमेरिका उनके सर पे बैठा है।
[नीरज]: जी, सर। वो फर्नीचर पहुँच गया आपका, सर।
जी, सर।
जी, सर।
जय हिंद, सर।
सुनो, जब एविडेंस मिल जाए ना, फिर डिस्कस करेंगे।
[शैलजा]: जॉर्जिया।
[हिमाद्री]: टोटल कितने? [शैलजा]: तीन।
[हिमाद्री]: बैंकॉक मिलाके? [शैलजा]: यस, सर।
[शैलजा]: सभी इज़राइली एम्बेसी के पास।
बम्स भी सिमिलर हैं। बाक़ी इंफॉर्मेशन जल्दी मिल जाएगी।
[शैलजा]: शायद आरके सही है।
[हिमाद्री]: कौन आरके?
[शैलजा]: वही पागल, जिसे लगता है ये पाकिस्तान का काम नहीं है।
[हिमाद्री]: ग़ुस्सैल वाला।
[नीरज]: इस वक़्त तो कुत्ते भी नहीं भौंक रहे।
[नीरज]: क्या है इतना अर्जेंट? [राजीव]: सर, रीज़न मिल गया।
[राजीव]: तीनों बम्स में सिमिलैरिटी है।
[नीरज]: गो ऑन।
[राजीव]: इज़राइल-ईरान लव स्टोरी का एक इंपॉर्टेंट चैप्टर।
दानिश इब्राहिम।
ईरान के थर्मल डेटोनेटर पर काम कर रहा था।
[दानिश]: ईसमे... ईसमे...
[शूटर]: हे, दानिश!
(गोली चलने की आवाज़) (लोगों के चिल्लाने की आवाज़)
(गोली चलने की आवाज़) (लोगों के चिल्लाने की आवाज़)
[राजीव]: इसको मारके इज़राइल ने उस प्रोग्राम को 6 महीने पीछे धकेल दिया।
फ़रहान अब्बासी. ईरान के एटॉमिक एनर्जी ऑर्गेनाइज़ेशन का हेड।
यूएन की नॉन सैंक्शंड न्यूक्लियर एक्टिविटीज़ करने वालों की लिस्ट में
उसका नाम सबसे टॉप पे था।
(गाड़ी चलने और ब्रेक लगने की आवाज़)
(धमाके की आवाज़)
[नीरज]: तो इज़राइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स और जनरल्स को मारा।
[राजीव]: और ये ईरान का बदला है।
हमारे लोग बस कोलेटरल डैमेज।
[नीरज]: बास्टर्ड्स।
रैपिड फ़ायर, फोर-सेकेंड सीरीज़!
(गोलियाँ चलाने की आवाज़)
[नीरज]: यह उतना तेज़ नहीं था, राजीव।
[राजीव]: सर, डिपेंड करता है सामने कौन है।
[नीरज]: दिखाओ।
[शैलजा]: शाहीन सुलतानी, बैंकॉक ब्लास्ट का सस्पेक्ट।
ईरानी है।
[राजीव]: पिछले साल इंडिया भी आया था।
रेज़ा अब्बासी नाम के एक आदमी के साथ।
[शैलजा]: रेज़ा कौन है? [राजीव]: एक और ईरानी है।
[राजीव]: यह भी ब्लास्ट के दिन इंडिया में नहीं था।
[शैलजा]: तो यह जॉर्जिया वाला है।
[राजीव]: कन्फर्म नहीं हुआ है।
लेकिन इनका कोई लोकल सपोर्ट ज़रूर होगा।
बिना उसके इतना बड़ा कांड किया ही नहीं जा सकता।
[शैलजा]: और ये लोकल सपोर्ट कौन है?
[नीरज]: माफ़ करना।
[शैलजा]: यह एक अंतर्राष्ट्रीय मामला है।
विशेष रूप से इज़रायल का।
[राजीव]: इंटरनैशनल! इज़राइल टार्गेट हो सकता है।
लेकिन अटैक हमारी ज़मीन पे हुआ है। हमारे लोग ज़ख्मी हुए हैं।
हमारे लोग मरे हैं।
इससे यह हमारा मामला है।
[शैलजा]: तीन कंट्रीज़ में ब्लास्ट हुआ है।
तो तुम्हें पसंद आये या ना आये, ये एक इंटरनैशनल मामला है।
और हम साथ में काम नहीं करेंगे,
तो ये फाइल कब, कहाँ, दब जाएगी, पता ही नहीं चलेगा।
[नीरज]: उस टाइमिंग पर काम करो, राजीव।
और हमें उस कॉफ़ी के लिए मिलना चाहिए, है ना?
(गोलियाँ चलाने की आवाज़)
[ऑफिसर 1]: मैम, मैम, मैम, मैम! सर अभी झपकी ले रहे हैं।
और यूज़ुअली, हम उन्हें इस टाइम डिस्टर्ब नहीं करते हैं।
[शैलजा]: कोई बात नहीं। आई कैन वेट।
[ऑफिसर 1]: मैम, कॉफ़ी? [शैलजा]: नो थैंक्स।
[ऑफिसर 1]: मैम, आप प्लीज़ बैठिए।
[ऑफिसर 1]: मैं सर को कॉफ़ी देकर आता हूँ। [शैलजा]: थैंक यू।
(कंप्यूटर के बीप की आवाज़)
(बीप की आवाज़)
(कुछ सामान नीचे गिरने की आवाज़)
[ऑफिसर 1]: शिट!
(ढक्कन पलटने की आवाज़) (पन्ने उठाने की आवाज़)
[राजीव]: ये शाहीन सुल्तानी है? [ऑफिसर 1]: हूँ।
[राजीव]: इसने वीज़ा के लिए कब अप्लाई किया था?
[ऑफिसर 1]: आ... सर, पिछले साल।
[राजीव]: फोन नंबर क्या था वीज़ा फ़ॉर्म पे?
[ऑफिसर 1]: सर, कोई ईरानी नंबर था।
[राजीव]: विजय! [विजय]: हूँ?
[राजीव]: इंडियन आईएलडी गेटवे चेक कर। [विजय]: हाँ।
[ऑफिसर 1]: सर, एक इंडियन नंबर से काफ़ी बार कॉन्टैक्ट हुआ है। [राजीव]: हूँ!
[ऑफिसर 1]: ये नंबर है 8860484549।
[राजिव]: ठीक है। सब लोग 8860...
[ऑफिसर 1]: 484549।
[राजिव]: 484549।
मुझे लगता है कि हमारे पास एक लीड है।
(फैक्स मशीन की आवाज़) [शैलजा]: आ... (शैलजा के मुस्कुराने की आवाज़)
[शैलजा]: ये आ... पार्किंग लॉट में गिर गया था।
[राजीव]: ओह, थैंक्स।
[राजीव]: ओह! [ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: हैप्पी फादर्स डे
[शैलजा]: लेके गए इसे स्कीइंग?
[राजीव]: अभी तक तो नहीं।
एक बात बताओ।
तुम अपनी कंट्री से ज़्यादा प्यार करती हो या...
अपनी जॉब से?
[शैलजा]: ना कोई छुट्टी,
बाथरूम के साइज़ का ऑफिस, मशीन की बेकार कॉफ़ी,
घटिया इन-हैंड सैलरी,
9 टू 5 की जगह, 24-7,
और सफल जाँच के बाद ना पेपर में कोई फोटो, ना मेडल,
इतनी अच्छी जॉब से ज़्यादा कोई अपनी कंट्री को कैसे प्यार कर सकता है?
हूँ?
[राजीव]: विजय, चेक किया नंबर किसका था?
[विजय]: सर, नंबर है अफ़शर हुसैनी के नाम पे।
[राजीव]: लोकेशन?
[विजय]: पहाड़गंज, होटल चाणक्य। सर, ये भी ईरानी सिटिज़न है।
[राजीव]: ईरानी? [विजय]: ईरानी।
[राजीव]: गाड़ी निकालो। [विजय]: चलो रे पहाड़गंज।
[विजय]: दिव्या, तू चली जा सीडीआर के लिए मोबाइल कंपनी।
इसके नंबर की ना सारी जीपीएस लोकेशन निकालो।
ये कहाँ-कहाँ गया, किस-किस से कॉल किया इसने,
पूरी की पूरी लिस्ट चाहिए।
[ऑफिसर 2]: मैम, यही हैं सीडीआर।
[मैनेजर]: कमरे में रहता था, सर।
मतलब... आ... हाँ! न... नहीं। मतलब...
मतलब, टिप अच्छी देता था, सर।
[राजीव]: कॉफ़ी? [शैलजा]: नो थैंक्स।
[मैनेजर]: सर, कहा कि प्राइवेसी चाहिए, तो हमने दे दी।
प्राइवेसी देने में हम नंबर वन हैं, सर।
[राजीव]: काली, बिना शक्कर के।
[मैनेजर]: सर। [राजीव]: जल्दी।
[विजय]: सर।
देखो। अफ़सर हेलमेट लेकर सामने वाले मैकेनिक के पास जा रहा है।
देखो, ये छोरा भी यही लग रहा है।
(छोरे के कराहने की आवाज़)
[छोरा]: साहब, बाइक का बहुत शौकीन था, साहब।
तो रोज़ नयी-नयी बाइक लेकर जाता था।
आख़िरी दिन बोला कि सबसे फास्ट बाइक चाहिए।
3,000 रुपये दे रहा था।
फिर तो मैंने उसे अपनी बाइक दे दी, साहब।
मैंने कुछ नहीं किया, साहब। मुझे छोड़ दो, साहब।
[राजीव]: हाँ, दिव्या। कुछ मिला? [दिव्या]: हाँ, सर।
[दिव्या]: अफ़सर का सीडीआर।
ब्लास्ट के दिन दोपहर को 1 घंटा
वो औरंगज़ेब रोड और इज़रायली एंबेसी के पास रहा।
फिर 3 बजे वो तुगलक रोड के पास था।
4:10 पे वो पहाड़गंज गया और... और 5:20 पे वो पहाड़गंज से निकला।
लास्ट कॉन्टैक्ट... इंटरनैशनल एयरपोर्ट।
वहीं फोन बंद कर दिया।
सर, अफ़सर दो नंबर्स के टच में था।
डिटेल्स पता करने में थोड़ा टाइम लगेगा।
[राजीव]: एयरपोर्ट पे लास्ट कॉन्टैक्ट करके अफ़सर का फोन बंद हो गया।
[विजय]: और सर, जो दो इंडिया में नम्बरों से कॉन्टैक्ट में था ना वो, सर,
वो भी बंद पड़े हैं।
(फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
[राजीव]: हेलो?
जी, बोल रहा हूँ।
जी, मैं आ रहा हूँ।
कैसा है अब?
[एनजीओ से महिला]: उठता है, पढ़ता है, खाता है, सोता है।
पर दूसरे बच्चों के जैसे हँसता-बोलता नहीं है।
इसकी दीदी के अलावा इसका कोई था ही नहीं।
ज़िंदगी बहुत लंबी है, राजीव साहब।
ये ठीक हो जायेगा।
[रेयान]: फिर पानी अंदर जाता है। [राजीव]: हूँ। ये करो।
[राजीव]: करो।
करो।
(फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
[राजीव]: हेलो।
[ऑफिसर 1]: सर। [राजीव]: बोल।
[ऑफिसर 1]: फुटेज मिल गया।
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[विजय]: अच्छा! इज़रायली एंबेसी के बाहर की सीसीटीवी फुटेज।
सर, दे दी इन लोगों ने।
पहले तो बहुत इतरा रहे थे, हमारा मैटर है, हमारा मैटर है।
[राजीव]: देसी तरीक़े से मैटर समझाओ, तो बड़े-बड़े मैटर्स सॉल्व हो जाते हैं।
ये स्कूटी ब्लास्ट से पहले एम्बेसी के बहुत चक्कर मार के गई है।
वैसे, ताजमहल तो है नहीं,
जो कोई बार-बार देखने आए।
(लोगों के बातचीत करने की आवाज़) (उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[विजय]: सर। [राजीव]: हूँ।
[विजय]: ये स्कूटी तो पिछले 6 महीने में बहुत बेची गई है इधर-उधर।
वैसे, थोड़ी ना कोई विंटेज कार है ये।
[राजीव]: लंबा ओनरशिप पैटर्न रखा गया है,
ताकि पुलिस भटकती रहे।
(फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
[विजय]: हाँ, दिव्या। सुन, स्कूटी के लास्ट ओनर की डिटेल भेज रहा हूँ नंबर के साथ।
पैटर्न देख के पता करियो कोई ईरानी कनेक्शन तो नहीं कर रहा है।
[ऑफिसर 3]: अरे, गोपाल।
[गोपाल]: फरमाइए। [ऑफिसर 3]: सुन।
[ऑफिसर 3]: मैसेज में जिन्होंने दिल खोलकर रख दिए।
[गोपाल]: क्या बात है!
[विजय]: अरे, वकील आया है, भाई। हटा देना इसने।
उसने डराने लगा।
[विजय]: समोसे लो, भाई। [गोपाल]: अरे, इधर सुनिए। इधर।
[गोपाल]: दिल से निकले मेरे अलफ़ाज़ का गला घोट देती थी। [वकील]: तुम्हारे पेपर आ गये।
[विजय]: अच्छा।
[वकील]: घर और गाड़ी सब कुछ ले लिया।
[विजय]: वर्दी तो छोड़ दी।
पर ठीक है।
हमें तो अपनों ने लूटा। ग़ैरों में कहाँ दम था।
(साइन करने और फाइल बंद करने की आवाज़)
[विजय]: ओके, भाई साहब।
[विजय]: चलो। समोसा ले जाओ। [वकील]: थैंक यू।
(फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़) (चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(कंप्यूटर स्क्रीन पर कुछ चलने की आवाज़)
[गोपाल]: गुम हुए भीड़ में तुम, तो क्या।
अरे, भाई। छोड़ आए हो अपने क़दमों के निशान।
[ऑफिसर 1]: सर, मुझे मोबाइल कंपनी से अभी-अभी फोन आया है।
वो कह रहे हैं कि एक नंबर एक्टिव हुआ है पुरानी दिल्ली में।
[राजीव]: कम ऑन। लेट्स गो।
चलो रे, चलो। पार्टी ख़त्म कर रहा है। चल रे!
अरे, हाथ-मुँह धोलो! अरे, आओ। सब अलर्ट। (गन लोड करने की आवाज़)
[राजीव]: चलो! [गोपाल]: जल्दी, जल्दी।
(गाड़ियाँ चलने और उछलने की आवाज़)
[विजय]: सुनो, भाई साहब। मेडिकल से वसंत कुंज।
अगले 5 मिनट सारे सिग्नल ग्रीन।
[गीत]: वो लड़के जो सबसे...
[राजेश]: हेलो? [राजीव]: हेलो।
[राजीव]: कौन बोल रहा है?
[राजेश]: फ़ोन तूने किया है। तू बता। तू कौन है?
[राजीव]: सॉरी।
रॉन्ग नंबर।
[गीत]: वो लड़की जो सबसे अलग है।
[राजीव]: बादशाह का गाना बज रहा था।
गाना ख़त्म होने तक का टाइम है हमारे पास।
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
(उत्तेजक पार्श्व संगीत) [गीत]: मेरा पिया घर आया, ओ राम जी!
(उत्तेजक पार्श्व संगीत) मेरा पिया...
(लोगों के बात करने की आवाज़)
(लोगों के बात करने की आवाज़) (डायल टोन बजने की आवाज़)
[राजेश]: हेलो।
हेलो!
[गीत]: वो लड़की जो सबसे अलग है। वो लड़की जो...
हाँ, यहाँ क़दम-क़दम पर लाखों हसीनायें हैं।
हम मगर ये दिल का सौदा देने तुझे आये हैं।
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[विजय]: चल! उस तरफ़!
दिव्या, पीछे से जा! पीछे से!
[दिव्या]: रुक।
ओ, किधर जा रहा है?
(टिन शेड टूटने की आवाज़)
(काँच की बोतल टूटने की आवाज़)
(आतंकवादी 1 के कराहने की आवाज़)
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[महिला 1]: पागल है क्या? कहाँ-कहाँ से चले आते हैं?
[विजय]: चल, चल। चल, टार्ज़न।
रेस ख़त्म नहीं हुई। चल। (आतंकवादी 1 के कराहने की आवाज़)
गाड़ी वेट कर रही है तेरी। चल।
हाँ! शाबाश, शाबाश। (आतंकवादी 1 के चिल्लाने की आवाज़)
ये बता। अफ़शर हुसैनी को किस तरह जानता है?
जवाब क्यों नहीं दे रहा? क्या पूछा तुझसे? (आतंकवादी 1 के कराहने की आवाज़)
अरे, टार्ज़न, क्या पूछ रहा हूँ मैं? (आतंकवादी 1 के कराहने की आवाज़)
ना बोलेगा?
ऐ! ज़्यादा ऐ नहीं करनी है। (आतंकवादी 1 के कराहने की आवाज़)
(आतंकवादी 1 के रोने की आवाज़) कौन है? कौन है सच-सच बता। मैं नहीं रुकने वाला।
हाँ। अरे, बावले! कौन है बता?
कौन है बता?
[विजय]: सर, दल्ला है, सर।
राजेश शर्मा।
अफ़शर हुसैनी को लड़कियाँ सप्लाई करता था।
और बार-बार किसी लैला का नाम ले रहा है।
बाक़ी बम के बारे में कुछ नहीं जानता। आत्मा खुलवा दी इसकी।
मेरे हिसाब से तो सच बोल रहा है।
[नीरज]: तो होटल से कुछ नहीं मिला क्या?
[विजय]: सर, ट्रेस तो मिले हैं।
टीएनटी और पोटेशियम क्लोराइड के कमरे में।
तो ये बात पक्की है कि बम इन्होंने कमरे में बनाया है।
सर। सर, दिव्या का फोन आया था।
वो कह रही है कि स्कूटर के लास्ट ओनर का पता चल गया है
और वो उसे ट्रैक कर रही है।
[राजीव]: लेट्स गो।
कम ऑन, कम ऑन।
(गाड़ी चलने की आवाज़)
[शैलजा]: कहाँ हो तुम? [दिव्या]: आरके पुरम की तरफ़ निकली हूँ।
[दिव्या]: टार्गेट शंकर विहार क्रॉस कर गया है।
[राजीव]: तुम पहले पहुँचोगे। वेट फॉर बैकअप टू एंगेज।
[दिव्या]: यस, सर।
सेक्टर 9 की तरफ़ मुड़ा।
[राजीव]: लेट्स गो।
[दिव्या]: 30 सेकंड में मलाई मंदिर क्रॉस कर जाएगा।
[शैलजा]: अरे! लेफ्ट, लेफ्ट! मलाई मंदिर यहाँ है।
[राजीव]: शॉर्टकट।
(कचरे के ढेर से गाड़ी के टकराने की आवाज़)
[राजीव]: गाड़ी का नंबर, दिव्या।
[दिव्या]: डीएल 3सीबीडब्लू 3737।
[राजीव]: गॉट इट। आईआईटी की तरफ़ जा रहा है।
सब रेडी रहो।
[राजीव]: ड्राइवर की शक्ल देखी? [शैलजा]: घंटा!
[शैलजा]: उसको पता चल जाएगा हम उसका पीछा कर रहे हैं।
साला आज ही ट्रैफिक कम होना था।
[राजीव]: रेडी रहो। हमें उसे आगे से ब्लॉक करना है।
[दिव्या]: जी, सर।
(गाड़ी रिवर्स घुमाने और फिसलने की आवाज़)
[राजीव]: उसे पता चल गया है कि हम उसका पीछा कर रहे हैं।
एम्स की तरफ़।
(ट्रैफिक की आवाज़)
[राजीव]: अब, साउथ एक्स।
अपनी स्थितियाँ बनाए रखें।
(गाड़ियों के ब्रेक लगाने और फिसलने की आवाज़)
[राजीव]: ये जा कहाँ रहा है?
[लैला]: मुझे लगा आप मुझे ढूँढ रहे हैं।
तो मैंने सोचा आपके ऑफिस ही आ जाऊँ।
[राजीव]: बात करनी है।
अंदर।
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
[शैलजा]: पहले आप।
[हिमाद्री]: सर।
[होम सेक्रेटरी]: आई होप इनवेस्टिगेशन अच्छी चल रही है।
[हिमाद्री]: सर, प्रिलिमिनरी रिपोर्ट्स के मुताबिक
[हिमाद्री]: यह पाकिस्तान का काम नहीं लगता।
[होम सेक्रेटरी]: मैं रिपोर्ट नहीं माँग रहा हूँ, हिमाद्री जी।
ईरान और इज़राइल के बीच जो भी हो, हमें क्या?
ना कुछ लेना, ना देना।
क्या मैं सही हूँ?
[हिमाद्री]: जी, सर।
[होम सेक्रेटरी]: हमारा फोकस सिर्फ़ हमारी जनता के इंटरेस्ट पर होना चाहिए।
और ये जो छह महीने के अंदर-अंदर
ईरान के साथ जो इंपॉर्टेंट गैस डील होने वाली है,
उससे देश की जनता का 45,000 करोड़ बच जायेगा।
बहुत बड़ी फिगर है, नहीं?
[हिमाद्री]: जी, सर।
[होम सेक्रेटरी]: वो क्या है ना, हिमाद्री जी,
इज़राइल टेक्नोलॉजी देता है और ईरान तेल।
दोनों ही... देश के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
(ट्रैफिक की आवाज़)
[हिमाद्री]: क्या मुझे तुम्हें याद दिलाने की ज़रूरत है?
इंटरनैशनल मैटर में इंटरनैशनल एजेंसीज़ इन्वॉल्व होंगे।
[नीरज]: और क्या मुझे तुम्हें याद दिलाने की ज़रूरत है, हिमाद्री?
एक 6 साल की बच्ची मरी है।
[हिमाद्री]: प्लीज़! मुझे वो इमोशनल बकवास मत बताओ।
मैं राजीव नहीं हूँ।
[नीरज]: तुम ही इनसिस्ट कर रहे थे ना कि राजीव को इस केस में डालिए।
वो मनमौजी है, यार।
[हिमाद्री]: तुम समझ नहीं रहे हो, वो प्रोटोकॉल तोड़ेगा।
मारे हम जाएंगे।
[नीरज]: लेकिन ये तो पहले सोचने वाली बात थी ना।
[हिमाद्री]: गाड़ी रोको।
तुम्हारे राजीव को बोलो इस केस से हट जाए।
ये आईएम, मकवाना, सब मर गए क्या?
[शैलजा]: हम कोशिश कर रहे हैं, सर।
एक सेकेंड।
जी, सर।
[विजय]: सर, बार-बार वही एक लेडीज़ है, जो दिख रही है।
वो भी पूरी कवर होकर चल रही है, तो किस तरह पता चलेगा यही है?
[राजीव]: ज़ूम कर।
(उपकरण के स्कैन करने की आवाज़)
[राजीव]: यहाँ ज़ूमर कर।
[नीरज]: पहचानने में बिल्कुल नहीं आ रही।
[राजीव]: खैर, इसे देखो।
[शैलजा]: चलो, फिर से स्टार्ट करते हैं।
अफ़शर हुसैनी को कैसे जानती हैं आप?
[लैला]: मैं एक लेक्चर के लिए तेहरान गई थी।
[शैलजा]: कौन सा लेक्चर?
[लैला]: इंटरनैशनल रिलेशन्स।
[शैलजा]: इंटरेस्टिंग।
[लैला]: मैं जानती हूँ। (दरवाज़ा खोलने की आवाज़)
(दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)
[राजीव]: हमने अफ़सर के फोन की मैपिंग की है।
आपका फोन...
बात मान लीजिए। डिटेल्स मैच करती है।
[लैला]: हाँ, मान लिया।
[शैलजा]: इतनी देर तक क्या बात होती रही?
[लैला]: वो मेरे लेक्चर्स के ऑर्गेनाइज़र्स में से एक था।
उसे अरब-इज़राइल कॉन्फ्लिक्ट पे मेरी ओपिनियन सही लगती थी।
जब वो इंडिया आया, तो मैंने थोड़ा घुमा दिया,
क्योंकि ईरान में वो मेरा गाइड था।
[राजीव]: ये आप हैं।
[लैला]: लगता तो नहीं।
(राजीव के मुस्कुराने की आवाज़)
[राजीव]: रिंग और निशान तो आप ही की लगती है।
[शैलजा]: आपके घर के बाहर एक टू-वीलर पार्क मिला।
कवर करके नंबर छुपाया गया था।
[राजीव]: आपने अफ़सर को दिल्ली में घुमाया।
इज़रायली एंबेसी के पास भी ले गई।
[लैला]: वो क्या कहते हैं?
अतिथि देवो भव।
[राजीव]: अतिथि देवो भव। हूँ।
ये आपके घर से मिला।
ओह! लगता है आप इज़राइल से
काफ़ी नफ़रत करती हैं।
मतलब, नो वासुदेव कुटुम्बकम?
[लैला]: क्या मुझे वकील की ज़रूरत है?
मुझे लगता है कि मुझे वकील को बुलाना चाहिए।
ये मेरा हक़ है।
(राजीव के मुस्कुराने की आवाज़)
[राजीव]: एचबीओ कम देखा करो, लैला जी।
हम लॉ फॉलो करते हैं, ताकि ऑर्डर मेंटेन रहे।
शराफ़त को कमज़ोरी समझोगी, तो...
दिल्ली पुलिस तो वैसे भी बदनाम है।
[नीरज]: हो सकता है सच बोल रही हो।
आजकल इंटरनेट पे लोग ज्ञान तो बाँटते ही रहते हैं ना।
[राजीव]: ओवर स्मार्ट है। जो जानती है, वो बोल नहीं रही है।
[नीरज]: मिनिस्ट्री इशारे तो यही दे रही है कि गैस डील की वजह से
शक की सुई पाकिस्तान की तरफ़ घूमनी चाहिए।
[राजीव]: और इंसाफ़ लिटरली गया तेल लेने।
कबूतर के आँख बंद करने से बिल्ली गायब नहीं हो जाती है।
[नीरज]: अरे, आरके।
रिलैक्स।
अभी तक सुई घुमाई नहीं है।
लेकिन इससे कुछ निकलवाओ, यार। और जल्दी।
ओह!
बाहर ये जो मीडिया वाले हैं ना, ज़रा प्यार से।
डेमोक्रेसी के हत्या का प्रवचन सुनने के मूड में नहीं हूँ।
ओके।
(चिंताजनक पार्श्व संगीत) (कंप्यूटर में स्कैन करने की आवाज़)
[लैला]: फाइनली।
मैं अपने वकील को बुला रही हूँ।
हाथ तुम्हारा नहीं है।
रिंग तुम्हारी नहीं है।
लेकिन फोन तुम्हारा है।
स्कूटी तुम्हारे घर के बाहर मिली है।
और तुम्हारा फोन शाहीन सुल्तानी, रेज़ा अब्बासी और अफ़शर हुसैनी के फोन के साथ
इज़रायली एंबेसी बहुत घूमा है।
उस दल्ले ने भी तुम्हें अफ़सर के साथ काफ़ी देखा है।
बहुत है तुम्हें यूएपीए में अंदर करने के लिए।
वकील तो दूर की बात।
एक साल तक तुम सूरज भी नहीं देख पाओगे।
लैला का कनफेशन।
मोबाइल फोन रिकॉर्ड्स।
सीसीटीवी फुटेज।
और हमारे इनवेस्टिगेशन के रिपोर्ट के बाद
ये क्लियर हो गया है कि तीनों ईरानियन सिटिज़ंस
शाहीन सुल्तानी, रेज़ा अब्बासी और अफ़शर हुसैनी
ब्लास्ट के पहले इंडिया में थे।
तीनों ने इज़रायली एंबेसी की रेकी की थी।
होटल चाणक्य में मैग्नेटिक बम असेंबल हुआ था।
लेकिन ब्लास्ट के पहले शाहीन थाईलैंड गया।
रेज़ा जॉर्जिया।
और वहाँ उसी दिन ब्लास्ट किए, जिस दिन इंडिया में ब्लास्ट हुआ है।
(रिक्शा की घंटी बजने की आवाज़)
[राजीव]: इंडिया के ब्लास्ट के टाइम पे सिर्फ़ अफ़शर हुसैनी प्रेज़ेंट था।
(गाड़ी चलाने की आवाज़) (ट्रैफिक की आवाज़)
[राजीव]: उस गाड़ी पे मैग्नेटिक बम लगाने वाला हाथ अफ़शर हुसैनी का था।
लेकिन उस हाथ को थाम रखा था शाहीन सुल्तानी और रेज़ा अब्बासी ने।
जब तक ऐसे हाथ काटे नहीं दिए जाते,
तब तक इंडिया को कोई सीरियसली नहीं लेगा।
[राजीव]: हमें इन तीन ईरानियों को एक मैसेज भेजने की ज़रूरत है:
शाहीन सुलतानी,
रेज़ा अब्बासी,
और हमारा ख़ास आदमी, अफ़शर हुसैनी।
[रिपोर्टर 1]: अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की है
कि ईरान के दो संदिग्ध आतंकियों - शाहीन सुलतानी और रेज़ा अब्बासी
की हत्या के पीछे कौन था। (फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
दोनों की मौतें अजीब तरह से एक जैसी हैं।
इज़रायल ने साफ़ इनकार किया है कि उनका इससे कोई लेना-देना है।
और अब तक किसी ने इन हत्याओं की ज़िम्मेदारी नहीं ली है।
[सैयद]: बस 2 दिन पहले ही मैंने उससे बात की थी, इतनी जल्दी ये कैसे हो सकता है?
- (रोने की आवाज़) - उसे स्ट्रोक कैसे हो गया?
दोनों की मौत दिल के दौरे से कैसे हो सकती है? कुछ तो गड़बड़ है।
नहीं, नहीं, नहीं, मेरी बातों को ध्यान से सुनो।
संपर्क में रहना। मैं तुम्हारे कॉल का इंतज़ार कर रहा हूँ।
[अफ़शर]: जल्दी करो।
[सैयद]: मुझे जाना है, मैं बाद में तुम्हें कॉल करूँगा।
(फ़ोन पटकने की आवाज़) [ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: फिलिस्तीन को आज़ाद करो
[सैयद]: असल में, उसने कुछ नहीं किया।
(सैयद के रोने की आवाज़)
[सैयद]: सब मेरी ही ग़लती है।
[अफ़शर]: सैयद,
तुम इस तरह ख़ुद को दोष मत दो।
वो मेरा भी भाई था।
लेकिन अभी हमें निकलना होगा।
(हाँफने की आवाज़)
[अफ़शर]: तुम्हें ये नहीं चाहिए।
मुझे ये नहीं चाहिए।
अगर तुम आज़ाद होना चाहते हो, तो पढ़ो।
[बूढ़ा आदमी]: इज़रायल अमर रहे।
[अफ़शर]: ठीक है।
ठीक है।
ठीक है।
तो तुम नहीं पढ़ोगे, हाँ?
[बूढ़ा आदमी]: इज़रायल अमर रहे।
(हथोड़े से मारने की आवाज़) (उत्तेजक पार्श्व संगीत)
(बीप की आवाज़)
[अफ़शर]: क्या तुम्हें लगता है कि तुम कभी इसका इस्तेमाल भी कर पाओगे?
[जवान 1]: चलो बाहर निकलो।
वापस जाते समय इसे क्लेम कर लेना।
[अफ़शर]: मैं तुम्हें क्लेम करूँगा।
ये क्या है?
[जवान 2]: ऑटोप्सी रिपोर्ट है। रेज़ा अब्बासी और शाहीन सुलतानी की।
दोनों की ज़हरीली गैस से मौत हुई है।
एक तेज़ असर करने वाला केमिकल, जिससे अचानक हार्ट अटैक आता है।
[अलावी]: देखो, अफ़शर।
[अलावी]: हर कोई ये जानना चाहता है कि
आख़िर रॉबी है कहाँ?
[अफ़शर]: मुझे नहीं पता कहाँ है।
[अलावी]: तुम्हें नहीं पता? [अफ़शर]: नहीं, मुझे नहीं पता।
[अलावी]: सच में नहीं पता? [अफ़शर]: नहीं पता।
[अलावी]: देखो, तुम्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि तुम्हें पैसे कौन दे रहा है।
इसलिए तुम्हें सिर्फ़ और सिर्फ़ वैसा ही करना चाहिए, जैसा हम कहते हैं।
वो ये जानते हैं कि तुम मेरे लिए काम करते हो।
ये जो आदमी है, ये जंग छेड़ सकता है,
समझ रहे हो तुम?
[अफ़शर]: मलेशिया और थाईलैंड।
मुझे जानना है, मेरे लड़कों ने वहाँ पर आख़िरी दिन क्या किया?
मुझे वहाँ पर मौजूद हर एक सीसीटीवी के फुटेज का एक्सेस चाहिए होगा।
(गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)
[अलावी]: अफ़शर,
देखो, हम एक परिवार की तरह हैं।
और परिवार हार-जीत में एक साथ रहता है।
बैठ आओ।
अफ़शर,
मैं तुम्हें वो फुटेज दिलाता हूँ।
तुम रॉबी को ढूँढोगे।
ठीक है?
(गाड़ी चलने की आवाज़)
[अफ़शर]: मुझे लिफ्ट का फुटेज दिखाओ।
जल्दी।
वकील पर फोकस करो।
ये वाला दिखाओ।
हाँ, यहीं पर।
इसे फॉलो करो।
यही चलने दो।
रुक जाओ।
लड़की को फॉलो करो।
रुक जाओ।
ये तो वही लड़की है।
प्ले करो।
अब रुक जाओ।
मुझे शाहीन का फुटेज दिखाओ।
दोनों फुटेज एक साथ दिखाओ।
ये सब इज़रायल में नहीं किया है!
ये हिंदुस्तान ने किया है।
(ठक-ठक करने की आवाज़)
[अधिकारी 1]: देवियों और सज्जनों, सबका ध्यान चाहता हूँ, प्लीज़।
मैं सीईओ को अमंत्रित करना चाहता हूँ कि वो कुछ शब्द कहें।
[सीईओ]: देवियों और सज्जनों,
बहनों और भाइयों,
[अलावी]: मेरे साथ बाहर चलो। [सीईओ]: ये मेरी ख़ुशनसीबी है...
[सीईओ]: और सौभाग्य है कि आप सभी का स्वागत कर रहा हूँ।
हाँ, बिलकुल।
जो लोग वफ़ादार कमर्चारी हैं,
मैं उन्हें बधाई देता हूँ, क्योंकि इस महीने
हमने अपने लक्ष्य पूरी तरह से हासिल कर लिए हैं।
[करीम]: तुम कर क्या रहे हो?
[अलावी]: ये इज़राइल ने नहीं किया है।
[करीम]: तो फिर किसने?
[अलावी]: इसके पीछे हिंदुस्तान है।
इन्होंने हमारे आदमियों को मारा।
और तुम यहाँ उनके साथ चाय पी रहे हो!
[करीम]: ये लोग तो सिर्फ़ बिज़नसमैन हैं।
इन्हें कुछ नहीं पता होगा।
[अलावी]: तो फिर बताओ उन्हें।
इस डील को किसी भी तरह कैंसल करो
और चीनियों को दे दो।
तुम्हें जो भी करना पड़े, वो करो,
लेकिन इन लोगों को उकसाओ, समझ गए?
[करीम]: हम इसमें ऑफिशियली कुछ नहीं कर सकते।
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[करीम]: मुझे ज़रा सोचने दो।
[अधिकारी 1]: ये तो लाइन क्रॉस कर गया।
फ्रेंडली नेशन है।
ईरानियंस को नहीं मारना चाहिए था।
इससे तो
गैस डील हाथ से चला जाएगा।
[होम सेक्रेटरी]: माफ़ करना, सर। मुझे एक फ़ोन कॉल आया है।
हेलो।
क्या?
गैस डील कैंसल करेंगे? पागल समझा है?
देखो, देखो, देखो... किसी भी चीज़ को सहमति मत देना।
10 दिन में डील साइन होनी है।
मैं देखता हूँ कि मैं क्या कर सकता हूँ।
सर, ये रॉ तो इज़राइल के साथ
ईरान में गुप्त ऑपरेशन कर रहे हैं।
[सर]: क्या?
ईरान तो पुराना दोस्त है।
बंद करवाओ।
[शैलजा]: भारत तुम्हारा युद्धक्षेत्र नहीं बन सकता।
[जोशुआ]: बकवास है।
[शैलजा]: बकवास तो ये है कि तुमने तस्वीरें लीं
या ये कि वो ईरानी प्रतिनिधि थे?
[जोशुआ]: ओहो, बस भी करो!
[शैलजा]: वो ग़लती मत करो, जो ईरानियों ने की थी।
अपनी लड़ाइयाँ कहीं और लड़ो।
[जोशुआ]: वैसे, वहाँ क्या हो रहा है?
[शैलजा]: अभी हो रहा है, आरके...
आरके तेहरान में एंटर कर रहा है।
मुझे तुम्हारी मदद चाहिए, जोशुआ।
[जोशुआ]: मैं कोशिश कर रहा हूँ। [शैलजा]: तुम पूरी कोशिश नहीं कर रहे।
[जोशुआ]: मेरे लोग इसकी इजाज़त नहीं देंगे।
[शैलजा]: तो हम किसी ऐसे को ढूँढ लेंगे, जो इसकी इजाज़त देंगे।
[नीरज]: क्या लगता है?
[शैलजा]: उनको पता चल गया है। आरके तेहरान पहुँच जाएगा।
मुझे उम्मीद है कि वो मदद करेंगे। हे भगवान!
[दिव्या]: गेट चेंज है। बी42।
(फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
[विजय]: सर, कोई दिक्कत हो गई क्या?
[राजीव]: सर। [नीरज]: कोई सवाल मत करना, आरके।
[नीरज]: मिशन रोक दिया गया है। वापस आ जाओ।
[राजीव]: सर, बोर्डिंग चल रही है, सर। तेहरान पहुँचने के बाद हम लोग...
[नीरज]: तुम्हें तेहरान नहीं, दिल्ली पहुँचना है, आरके। दिल्ली!
क्या तुम मुझे सुन रहे हो?
और इसे एक ऑर्डर समझो।
और अगर नहीं आओगे ना, तो वापस कभी नहीं आ पाओगे।
हेलो।
[राजीव]: आवाज़ कट रही है, सर।
[राजीव]: सर, हेलो। [नीरज]: हेलो।
[राजीव]: हेलो, सर। [नीरज]: सुन रहे हो ना?
[नीरज]: हेलो। आरके, वापस आ जाओ! फ़ौरन!
सुन लिया था उसने, सर। आ जाएगा वो।
[हिमाद्री]: 'उस दिन हम ऑर्डर्स फॉलो कर रहे थे।'
'और वो इसका परमानेंट सॉल्यूशन ढूँढ रहा था।'
[विजय]: क्या बात हो गई, सर?
[राजीव]: वापस आने के ऑर्डर्स, धमकी, जो भी समझो।
दिल्ली की टिकट करवा दो।
6:30 बजे।
[ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: अबू धाबी तेहरान
(फ़ोन के रिंगटोन बजने की आवाज़)
[शैलजा]: आरके, तुम अपनी जॉब से ज़्यादा प्यार करते हो
या अपनी कंट्री से?
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
[दिव्या]: हाय, बेबी!
[दिव्या]: बेबी... कितने साल की है? [बच्ची की माँ]: एक साल।
[दिव्या]: कितनी प्यारी है। [बच्ची की माँ]: धन्यवाद।
(उत्तेजक पार्श्व संगीत)
(हवाई-जहाज़ के उड़ने की आवाज़) [ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: अज़रबैजान - अबू धाबी
(हवाई-जहाज़ के लैंड होने की आवाज़) [ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: अबू धाबी
(दुविधाजनक पार्श्व संगीत)
(उत्तेजक पार्श्व संगीत) (गाड़ी के रुकने की आवाज़)
[धर्मेश]: अस-सलामु अलयकुम, मेरे पाकिस्तानी भाई!
[राजीव]: वा अलयकुमु स-सलाम!
(गाड़ी का दरवाज़ा खोलने की आवाज़)
[दिव्या]: ये तो धर्मेश जैन है। (गाड़ी का दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)
[धर्मेश]: आओ जो! आओ जो!
[धर्मेश]: ख़ुश-आमदीद! [दिव्या]: चिट फंड स्कैम का मास्टर माइंड।
[दिव्या]: नौ सौ करोड़ खा गया और डकार तक नहीं आई।
[धर्मेश]: सही बोला, बहन।
पैसे से अपुन को हद से ज़्यादा प्यार है,
लेकिन थोड़ा बहुत देश प्रेमी भी हूँ।
चलो। आओ, आओ। आओ, आओ।
[गीत]: ...मैं उत्थे दिल छोड़ आया। (धर्मेश के चुटकी बजाने की आवाज़)
[धर्मेश]: मुझे ये गाना पसंद है।
तुम्हें ये पसंद है?
आहा!
पीछे एक बैग होगा, भाई।
देखो ज़रा।
अब मैं आपको कैसे जानता हूँ, ये मत मुझसे पूछना।
इंडिया में जिस मोहतरमा ने अपना हाथ आपके सर पे रखा है ना,
उसपे भरोसा रखो। हाँ?
इसमें तमाम इनफॉर्मेशन है।
तुम लोग कौन हो, कहाँ से हो, कंप्लीट बैकग्राउंड इनफॉर्मेशन।
इसको ना पढ़ो, याद करो और जला डालो। सिंपल! (हँसते हुए)
ए, गाड़ी रोक।
गाड़ी रोक!
इससे बात करके कोई फ़ायदा नहीं है, इसके बग़ैर इसे सुनाई नहीं देगा।
ये तुम लोगों को होटल ड्रॉप कर देगा, फ़्रेश हो जाओ।
कल तुम लोगों को तेहरान के लिए निकलना है।
जय श्री कृष्णा!
[राजीव]: जय श्री कृष्णा!
[धर्मेश]: पटी गयो! (गाड़ी के चलने की आवाज़)
(गोलियों के खनकने और मैगज़ीन में डालने की आवाज़)
[दिव्या]: यहाँ पकड़े गए, तो सीधा फायरिंग स्क्वाड फ़ेस करना पड़ेगा।
[राजीव]: अच्छी बात है।
बुरा सोचो,
अच्छा होगा।
आह! (आहें भरते हुए) (बैग्स को ज़मीन पर फेंकने की आवाज़)
ये कौन सी जगह है?
[विजय]: सर, मजनू का टीला लग रहा है।
(गाड़ी के चलने की आवाज़)
[विजय]: ओये! ओ, बहरे! ओये!
[राजीव]: आगे बढ़ते रहो!
आगे बढ़ते रहो!
(राजीव के हाँफने की आवाज़)
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़)
[फहाद]: काफ़ी मज़ेदार माहौल है!
मैं फहाद हूँ। ये यूसुफ़ है।
[यूसुफ़]: आपका स्वागत है यहाँ।
[फहाद]: हम सब दोस्त हैं।
प्लीज़।
अगले 45 मिनट में, आपका प्लेन दिल्ली में लैंड करेगा।
तुम जानते हो इसका मतलब क्या है?
अब पानी सर से ऊपर जा चुका है।
[दिव्या]: अब तो सबको पता चल गया होगा कि हम दिल्ली नहीं पहुँचे।
[विजय]: और क्या? हमें ढूँढने के लिए मेनिफेस्ट स्कैन कर रहे होंगे।
[राजीव]: हमें आगे बढ़ते रहना है।
[यूसुफ़]: लेकिन पहले,
कुछ खा लो।
[शैलजा]: शिट!
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़)
[शैलजा का पति]: क्या हुआ, शैलजा?
[इन्वेस्टीगेटिव ऑफिसर]: सारा सर्च करो।
(फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)
[रॉय]: शिट!
[करीम]: श्रीमान रॉय, क्या आपको वो फ़ोटो मिल गए जो मैंने आपको भेजे थे?
[रॉय]: मैं देख रहा हूँ।
लेकिन उम्मीद है कि सरहद पर खड़ी तुम्हारी फ़ौज उस वक़्त मक्खियाँ नहीं भगा रही होगी,
जब वो ईरान में दाख़िल हो।
[करीम]: उसे अभी रोको, वरना अपना सामान बाँधो और निकलो।
[रॉय]: चुप! एकदम चुप!
अगर आपका ये सनकी तेहरान के अंदर घुसा, तो समझो ये गैस डील कैंसल।
फिर ख़ुद जवाब देना पीएम को।
धत् तेरे की!
(हथियारों को जाँचने की आवाज़)
[फहाद]: ठीक है, दोस्तों, वक़्त आ गया है।
[सैयद]: अज़रबैजान एयरपोर्ट पर उसे आख़िरी बार देखा गया।
लेकिन वो तेहरान की फ्लाइट में बैठा ही नहीं।
[सैयद]: ये देखो। [ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: कुमार - नो शो
[अफ़शर]: तो फिर वो कहाँ गया?
[सैयद]: वो अबू धाबी गया।
[अफ़शर]: अबू धाबी! [सैयद]: हाँ।
[अफ़शर]: अबू धाबी में कहाँ?
[सैयद]: हमें नहीं पता। वो गायब हो गया।
[अफ़शर]: वो गायब हो गया?
तुम सच में मुझे ये कह रहे हो?
सैयद,
जो साँप दिखाई नहीं देता, वही काटता है।
ढूँढो उन्हें।
लानत है तुम सब पर!
[हिमाद्री]: शैलजा, तुम्हारे भले के लिए मैं ये मान के चल रहा हूँ
कि ये आइडिया उस पागल का था,
तुम्हारा नहीं।
उसे कॉल करो।
[शैलजा]: हाँ, सुनो। आज थोड़ा लेट हो जाएगा।
ख़ाना फ्रिज में रख देना और दूध की थैली मैं सुबह ख़ुद अंदर ले आऊँगी।
हूँ।
[हिमाद्री]: कहाँ है राजीव कुमार?
[ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: एविडेंस
[रॉय]: मैं तुम्हारे साथ हूँ।
वो तुम्हें आरके तक पहुँचाएगा।
डील कैंसल मत करो।
[सैयद]: मुझे ये आदमी चाहिए।
(सिगरेट लाइटर जलाने की आवाज़)
(दरवाज़ा खोलने की आवाज़) [अफ़शर]: कौन है! (चिल्लाते हुए)
(क़दमों की आवाज़) (सैयद के कराहने की आवाज़)
[फौजी 1]: चलो, कपड़े पहनो!
(अफ़शर के हाँफने की आवाज़) (चिंताजनक पार्श्व संगीत)
[अलावी]: वाह-वाह! देखो तो कौन आया है?
अपना अफ़शर है।
अफ़शर ख़ान!
(अफ़शर के हाँफने की आवाज़) (गला पकड़ने की आवाज़)
[अलावी]: एक बड़ा आदमी, जो अब हुक्म मानना पसंद नहीं करता।
जानते हो, जब तुम मज़े कर रहे थे,
तब वो काफ़िर हमारे घर में घुसने की तैयारी कर रहा था।
ढूँढो उसे, इससे पहले कि देर हो जाए।
[अलावी]: ये राजीव कुमार तक पहुँचा देगा। [ऑनस्क्रीन टेक्स्ट]: धर्मेश जैन 6388902006
(आर्मी जीप के साइरन की आवाज़) (चिंताजनक पार्श्व संगीत)
[सैयद]: चलो!
[धर्मेश]: सरकार गिर गई है।
30 मिनट में रैली निकलेगी।
[शैलजा]: मुझे आख़िरी पल में बदलाव पसंद है।
(साइकल की घंटी बजाने की आवाज़) (क़दमों की आवाज़)
(धर्मेश के कराहने की आवाज़)
[गुंडा]: हम लोग इससे ज़्यादा और कुछ भी नहीं जान पाए।
बस उसके पास कई पासपोर्ट्स हैं।
और ऐसा लग रहा है कि वो लोग पानी के रास्ते से तेहरान जा रहे हैं।
[सैयद]: वो आज रात को तेहरान के लिए बोट पकड़ रहा है।
[अफ़शर]: तुरंत अपने लोगों को अल-अहीदी भेजो।
मुझे फ़र्क नहीं पड़ता तुम क्या करोगे, वो ईरान में नहीं घुसना चाहिए।
शर्म आनी चाहिए, बेवकूफ़!
[फहाद]: तुमने ही इंडियन मुजाहिदीन को ख़त्म किया था, है ना?
[राजीव]: एक जाता है, दूसरा पैदा हो जाता है।
चीयर्स।
[फहाद]: चीयर्स।
[युसूफ]: कुछ दिन पहले, लंदन में,
एक बूढ़ा आदमी किराने का सामान ख़रीदने गया था।
उसकी दो ख़ूबसूरत बेटियाँ थीं।
उसने उनके लिए चल्ला ख़रीदा,
एक मीठी इज़रायली रोटी है।
ज़ाहिर है, ये उनकी पसंदीदा होगी।
उसे अगवा कर लिया गया था।
उसका शव...
पाँच दिन बाद मिला।
हाथों को मेज़ में कील से गाड़ा गया था।
टॉर्चर किया गया।
उसकी पत्नी ने पाँच दिन पुरानी रोटी ले ली
और अपनी बेटियों को ख़ाने के लिए दे दी।
ये उनके ख़ाने के लिए थी।
मुझ पर एक एहसान करो...
जब भी अफ़शर मिल जाए,
हथौड़े से मार-मार के मार देना।
[राजीव]: तुम उन्हें मारते हो,
वो तुम्हें मारते हैं।
यहाँ कोई सही नहीं है।
और मैं कोई जज नहीं हूँ।
(क़दमों की आवाज़) (फ़ोर्कलिफ्टर के चलने की आवाज़)
(युसूफ के सीटी बजाने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (गुंडों के ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (उत्तेजक पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (गोली लगने और ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (गुंडों के कराहने की आवाज़)
[दिव्या]: शिट!
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
[विजय]: ए, दिव्या! दिव्या! दिव्या, हट! हट!
(बम धमाके की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत) (आग की लपटों की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत)
(विजय के हाँफने की आवाज़) (बंदूक को लोड करने की आवाज़)
(विजय के गुस्से में बड़बड़ाने की आवाज़) (क़दमों की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (गाड़ी के चलने की आवाज़)
(गाड़ी के टकराने और हॉर्न बजने की आवाज़) (बंदूक को लोड करने की आवाज़)
(रॉकेट लॉन्चर चलाने की आवाज़) (धमाके की आवाज़)
(गाड़ी के टुकड़ों के ज़मीन पर गिरने की आवाज़) (काँच के टूटने की आवाज़)
(जहाज़ के पानी में चलने की आवाज़)
(चेन्स के हवा में झूलने की आवाज़)
(दिव्या के कराहने की आवाज़)
(दिव्या के नाक सिकुड़ने और कराहने की आवाज़)
[सैयद]: कुछ घंटे पहले ईरान के लिए बोट निकली है।
राजीव कुमार उस पर है।
[शैलजा]: सर, हमें अभी भी नहीं पता कि वो आरके था या नहीं।
मुजाहिदीन-ए-खल्क हो सकता है या इज़राइल-ईरान की कोई नई झड़प।
मैं फिर से कह रही हूँ, सर, मैं...
[हिमाद्री]: एसआई विजय सोलंकी, बात तक करने की हालत में नहीं है।
और अबू धाबी पुलिस को एक मरा हुआ ट्रैवल एजेंट मिला।
मारने से पहले उसे बुरी तरह से टॉर्चर किया था।
आरके की फ़ोटो मिली उसके कंप्यूटर में।
साला! जहाँ जाता है, लाशें छोड़ के आता है।
[शैलजा]: मेरा काम पोर्ट पे ख़त्म हो गया।
उसके बाद उसकी ज़िम्मेदारी!
माफ़ करना, सर।
(दुखद पार्श्व संगीत) (क़दमों की आवाज़)
[कंपाउंडर]: आपका दोस्त वहीं रुक गया।
लेकिन वो महफूज़ है।
[रॉय]: जी, धन्यवाद। [अधिकारी 4]: हाँ, हेलो।
[रॉय]: धन्यवाद। [अधिकारी 4]: हाँ, इंतज़ार करो।
[रॉय]: विजय। [अधिकारी 4]: हाँ, और 2 दिन इंतज़ार करना पड़ेगा।
[रॉय]: अभी तक परमिशन नहीं मिली है।
तुम्हारा जो ये ऑपरेशन था, उसकी मंज़ूरी नहीं मिली थी।
इसलिए इंडिया चुप है, क्लेम नहीं कर रहा है।
[इन्वेस्टीगेटिव रिपोर्टर]: सर!
सुना है आपकी एक लेडी ऑफ़िसर अबू धाबी के एक इंसिडेंट में मारी गई।
[ख़तरी]: इंसिडेंट नहीं, ऐक्सीडेंट। ऐक्सीडेंट।
वो एक पर्सनल ट्रिप पर थी।
[इन्वेस्टीगेटिव रिपोर्टर]: सर, क्या आप मुझे ऐक्सीडेंट के बारे में और जानकारी दे सकते हैं?
आख़िर हुआ क्या था?
[नीरज]: डिपार्टमेंट को,
बल्कि हम सबको बहुत ज़्यादा अफ़सोस है।
[विजय]: दिव्या! (रोते हुए)
[नीरज]: एसआई दिव्या...
[नीरज]: सच में एक बहुत ही क़ाबिल ऑफ़िसर... [राणा]: वैसे...
[राणा]: वो मरी कैसे?
(जहाज़ के समुंदर में चलने की आवाज़) (जहाज़ का हॉर्न बजने की आवाज़)
[होम सेक्रेटरी]: देशप्रेमी सबको बनना है।
पर कभी-कभी नाक बचाने के लिए सर काटने पड़ते हैं।
कॉल लेने का टाइम आ गया है।
एक हफ़्ते में गैस डील साइन होनी है, किसी भी हाल में।
[नीरज]: लेकिन सर...
[होम सेक्रेटरी]: तो देख लो।
(रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
[अफ़शर]: तुम बहुत देर कर रहे हो!
एक...
[अफ़शर]: दो... [सैयद]: सारे पोर्ट्स सुरक्षित हैं।
[अफ़शर]: जल्दी करो! [सैयद]: अफ़शर!
[अफ़शर]: जल्दी करो!
[सैयद]: ये तुम क्या कर रहे हो?
[अफ़शर]: इसे देखो। ये सभी भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी हैं,
जो पिछले 24 घंटे में तेहरान में दाख़िल हुए हैं।
वो कहीं इस लिस्ट में छुपा हुआ है।
तो ढूँढो उसे! (चिल्लाते हुए)
[तामीर]: तेहरान में स्वागत है।
[सैयद]: ये... ये देखो, मुझे मिल गया।
रहमान ख़ान, पाकिस्तानी इलेक्ट्रीशियन,
मतलब, राजीव कुमार।
[रिपोर्टर]: उनका कहना है कि एसआई दिव्या राणा के मरने का अफ़सोस पूरे डिपार्टमेंट को है,
पर ये मौत कोई अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं, बल्कि एक दुर्घटना है।
एसआई दिव्या छुट्टी मनाने गई हुई थी अबू धाबी
और वहीं उनकी मौत हो गई।
(डोरबेल बजने की आवाज़) [रिपोर्टर]: मिनिस्ट्री... [वंदना]: पिहू!
[वंदना]: यहाँ बैठो। मैं अभी आई, ठीक है?
[तामीर]: रूम सर्विस।
[शैलजा]: मेरी कल ही आरके से बात हुई।
वो ठीक है।
[वंदना]: तुम्हें दिव्या के बारे में पता था?
[शैलजा]: नहीं।
[वंदना]: क्या मतलब?
तुम्हें कैसे नहीं पता था?
[शैलजा]: मेरा काम सिर्फ़ आरके को ईरान तक पहुँचाना था।
उसके बाद...
[वंदना]: क्या छुपा रही हो?
बोलो, बताओ मुझे। मैं संभाल लूँगी।
[शैलजा]: सच ये है कि...
ईरान उसे मारना चाहता है।
इज़रायल ने उसे धोखा दिया है।
और हिंदुस्तान...
ने उसे अकेला छोड़ दिया है।
(दुखद पार्श्व संगीत)
[वंदना]: जब भी आरके मिशन पे जाता है,
वो रोज़ एग्ज़ैक्ट्ली 10:20 को फ़ोन करता है।
थ्री रिंग्स मतलब कि वो ठीक है।
(घड़ी की टिक-टिक की आवाज़) (चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(वंदना के घबराने की आवाज़)
(घड़ी की टिक-टिक की आवाज़) (चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)
(फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)
(फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)
[वंदना]: आह! (आहें भरते हुए)
[तामीर]: आराम करो।
तुम्हें ज़रूरत है।
[होम सेक्रेटरी]: दोस्ती के नाम।
[जोशुआ]: दोस्ती के नाम।
[होम सेक्रेटरी]: तो, राजीव कुमार कैसा है?
[इज़रायली ऑफ़िसर]: माफ़ कीजिए। वो कौन है?
(कुर्सी के सरकने की आवाज़)
[होम सेक्रेटरी]: देखिए, हम...
हिंदुस्तान और इज़रायल, हमारा रिश्ता पुराना है और...
हमारा फ़र्ज़ है कि आपको चेतावनी दें...
मिशन रद्द कर दिया गया है,
अब ये आदमी अकेला है, वो... वो...
उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
असल में, वो थोड़ा सा पागल हो गया है।
(इज़रायली ऑफ़िसर के हँसने की आवाज़)
[इज़रायली ऑफ़िसर]: "ईश्वर जिन्हें नष्ट करना चाहता है,"
"उन्हें पहले पागल कर देता है।"
(होम सेक्रेटरी के हँसने की आवाज़)
[होम सेक्रेटरी]: चीयर्स।
[तामीर]: बुरी ख़बर है।
अब तुम अकेले हो।
[राजीव]: क्या मतलब?
[तामीर]: तुम्हारा देश तुम्हें छोड़ चुका है।
इस बदले को छोड़ दो और घर लौट जाओ।
पासपोर्ट्स, पैसे, कपड़े, और साबुन। (कपड़ों को बिस्तर पर डालने की आवाज़)
यहाँ से जितनी जल्दी हो सके निकल जाओ।
(राजीव के ज़ोर लगाने की आवाज़)
[राजीव]: मुझे वो ख़त्म करना है, जो मैंने शुरू किया है।
(बंदूक लोड करने की आवाज़) (राजीव के कराहने की आवाज़)
[तामीर]: मुझे मुश्किल में मत डालो, यार।
मेरी एक बेटी है, जो मेरी पूरी दुनिया है।
अगर उन्हें पता चला,
तो मुझे लटका देंगे।
(राजीव के लंबी साँसें लेने की आवाज़)
(बंदूक को ज़मीन पर फेंकने की आवाज़)
[तामीर]: ईरान,
इज़रायल,
भारत और अब अबू धाबी...
सब तुम्हारी मौत चाहते हैं।
तुम सबके लिए बहुत बड़ा ख़तरा बन चुके हो।
मेरे साथ रुक जाओ...
एक हफ़्ते के लिए।
जब मामला ठंडा होगा,
तब तुम घर जाओगे।
(वॉकी टॉकी पे आर्मी के अनाउंसमेंट की आवाज़) (क़दमों की आवाज़)
[करीम]: कोई किसी को इस तरीक़े से क्यों मारेगा?
हथौड़े से हत्या की गई है।
वो यूके का नागरिक था।
वो चुप नहीं बैठेंगे।
[अलावी]: ये तुम्हें कैसे मिला?
[करीम]: क्या फ़र्क पड़ता है, अलावी?
पहले तो तुम इंडिया में हमला करवाते हो।
[अलावी]: कम इंपैक्ट वाला बम था।
[करीम]: फिर भी एक मासूम हिंदुस्तानी लड़की की जान चली गई।
और तुम्हारा निशाना चूक गया।
हिंदुस्तान ने हमेशा बुरे वक़्त में हमारा साथ दिया है।
[करीम]: फिर भी रॉबी को मार दिया। [अलावी]: मैंने उसे नहीं मारा है।
[करीम]: ठीक है।
तो अब वक़्त आ गया है कि तुम अफ़शर को जाने दो।
उसे इज़रायल को सौंप दो।
उसका अपना एजेंडा है।
मेरी बात ध्यान से सुनो।
इस मामले में ईरान का नाम कहीं भी नहीं आना चाहिए। समझ गये?
समझ गए तुम?
टीम को स्टैंडबाय पर रखो।
[इज़रायली ऑफ़िसर]: उसका नाम क्या था?
[जोशुआ]: राजीव कुमार, दिल्ली पुलिस, स्पेशल सेल।
देखो, ये हमारे पास सबसे अच्छा मौक़ा है।
वो आदमी हमारा काम कर सकता है। वो अकेले ईरान में दाख़िल हो चुका है।
और अफ़शर को मारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
[राजीव]: अगर मैंने इसे पूरा नहीं किया, तो सब बेकार चला जाएगा।
[मोसाद ऑफ़िसर]: तो क्यों ना कुछ फाइटर जेट्स भी जोड़ लो,
और कुछ न्यूक्लियर सबमरीन भी?
[इज़रायली अधिकारी]: इतना सब एक पागल आदमी के लिए?
[जोशुआ]: हमें उसके बारे में ग़लत जानकारी दे दी गई थी।
[मोसाद ऑफ़िसर]: ये काम फटाफट निपट जाना चाहिए।
[इज़रायली ऑफ़िसर]: जोशुआ,
अगर कुछ भी गड़बड़ हुई...
[जोशुआ]: इज़रायल का नाम नहीं आएगा।
[नीरज]: मिशन रद्द कर दिया गया है। वापस आ जाओ। (राजीव सोचते हुए)
[विजय]: ए, दिव्या! दिव्या! दिव्या, हट! (राजीव सोचते हुए)
(बम धमाके की आवाज़)
[राजीव]: आज उस लड़की की जगह पिहू भी हो सकती थी। (सोचते हुए)
(मेडिकल उपकरण की आवाज़) (डॉक्टरों के बात करने की आवाज़)
(राजीव के हाँफने की आवाज़)
(डिश एंटीना को खींचने की आवाज़)
[तामीर की बेटी]: भाई होता, तो ये सब आसानी से ठीक कर देता।
(तामीर के ज़ोर लगाने की आवाज़)
[राजीव]: इसका भाई कहाँ है?
[तामीर]: छह साल पहले ही वो मारा गया था।
बम धमाके में!
कुछ... कहते थे कि इज़राइली थे
और कुछ कहते अपने।
(तामीर के हँसने की आवाज़)
[तामीर]: क्या फ़र्क पड़ता है।
वो मर चुका है।
लेकिन उस दिन जब वो निकला घर से (रोते हुए)
मेरे जूते पहनकर, (रोते हुए)
मैंने... मैंने महसूस किया... (रोते हुए)
दोस्त बनना चाहिए था। (रोते हुए)
मगर बाप नहीं।
(तामीर के सिसकने की आवाज़)
[तामीर]: काश...
काश, उस दिन गले लगाया होता।
[राजीव]: जो किसी मासूम की जान लेता है,
वो पूरी इंसानियत की हत्या करता है।
और जो कोई मासूम की जान बचाता है,
वो पूरी इंसानियत को बचाता है।
(बाज़र में लोगों के शोर की आवाज़)
[चायवाला]: चाय!
चाय!
चाय!
चाय!
[राजीव]: हम यहाँ क्यों आए?
[तामीर]: ताकि तुम समोसा खा सको।
समोसा हिंदुस्तानी नहीं, समोसा ईरानी है।
यहीं रुको, आता हूँ।
वहाँ उस समोसे वाले की उंगलियाँ गायब हैं।
वो मशहूर था बम बनाने के लिए।
और वो भी उस सैयद अली के लिए।
[राजीव]: अफ़शर हुसैनी का ख़ास आदमी।
और वो तुम्हारी मदद क्यों करेगा?
[तामीर]: हूँ। तुम सही कह रहे हो।
मुझे पता है, वो नहीं करेगा।
[अफ़शर]: क्या हुआ? [समोसे वाला]: अफ़शर, कोई सैयद के बारे में पूछ रहा है।
[समोसे वाला]: सब ठीक है ना वहाँ पे?
[अफ़शर]: उसका हुलिया बताओ। कैसा दिखता है वो?
(हाथ धोने की आवाज़)
[अफ़शर]: ध्यान से सुनो।
ऑर्डर का इंतज़ार करो।
किसी से कुछ मत कहना। जो मैं कहूँ, बस वही करना।
सैयद से भी मत कहना।
[तामीर]: समझ गया।
ठीक है!
अभी उस समोसे वाले का ही फ़ोन आया था मुझे।
हमें फ़ुटबॉल मैच के टिकट मिल गए हैं।
सैयद का बेटा मैच में आज खेलने वाला है।
[राजीव]: तामीर!
तुम्हें ये सब करने की ज़रूरत नहीं है।
[तामीर]: बैठो गाड़ी में।
सुनो, तुम्हें प्लान पता है।
मुझे रास्ता पता है।
[अफ़शर]: सैयद। [सैयद]: हाँ?
[सैयद]: तुम लोगे? [अफ़शर]: नहीं, शुक्रिया।
[अफ़शर]: ये बताओ, क्या आज तुम्हारा बेटा खेल रहा है?
[सैयद] हाँ, क्वालीफ़ायर्स हैं।
[अफ़शर]: अरे, कैसे बाप हो तुम? जाओ, जाकर उसका मैच देखो, यार।
[अफ़शर]: जाओ, जाओ। [सैयद]: नहीं। (हँसते हुए)
[अफ़शर]: चलो, जाओ!
[सैयद]: पक्का जाऊँ? [अफ़शर]: अरे, बाबा! जाओ, पक्का जाओ।
[अफ़शर]: अच्छे बाप बनो। एक मैच से यहाँ पर कुछ फ़र्क नहीं पड़ेगा।
[सैयद]: चलो।
[अफ़शर]: सैयद,
उसे कहना अफ़शर अंकल को वो ट्रॉफ़ी चाहिए।
(सैयद के हँसने की आवाज़) (मधुर पार्श्व संगीत)
(गाड़ी की छत पर थाप मारने की आवाज़)
[सैयद]: रोनाल्डो!
मैं मैच देखने आ रहा हूँ।
(सैयद के हँसने की आवाज़)
[सैयद] तुम एकदम जम के मैच खेलना, अच्छे से। ठीक है ना?
[तामीर]: चलो।
[राजीव]: नहीं कर सकता। आसपास लोग हैं।
[तामीर]: सुनो, पागलपन मत करो।
निकलो!
(गाड़ी के हॉर्न बजाने की आवाज़) (गाड़ी के ब्रेक लगाने की आवाज़)
(गाड़ी के फलों की पेटियों से टकराने की आवाज़) (गाड़ी के हॉर्न बजाने की आवाज़)
(गाड़ियों के टकराने और स्किड होने की आवाज़) (गाड़ी के हॉर्न बजाने की आवाज़)
[तामीर]: बाहर निकल! अभी गाड़ी से बाहर निकल!
[सैयद]: नहीं, नहीं, नहीं, नहीं, नहीं! मेरी ग़लती नहीं है! [तामीर]: चल, बाहर निकल!
[तामीर]: यहाँ कोई रेस चल रही है? हाँ? [सैयद]: नहीं!
[सैयद]: नहीं! [तामीर]: क्या चल रहा है?
[सैयद]: क्या कर रहे हो तुम? [तामीर]: ऐसे चला रहा है, जैसे तेरी सड़क है!
(कंधे पर थाप मरने की आवाज़)
(गाड़ी पर सर पटकने की आवाज़) (सैयद के कराहने की आवाज़)
[राजीव]: पीछे हटो! पीछे हटो! (चिल्लाते हुए)
चलो! चलो! (गाड़ी के चलने की आवाज़)
[आतंकी 3]: उसे कोई ले गया।
[अफ़शर]: शहरीयाती स्ट्रीट पर है।
उसका पीछा करो।
(गाड़ी को तेज़ चलाने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(गाड़ी को तेज़ चलाने की आवाज़)
(गाड़ी के तेज़ चलने और टकराने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(चिंताजनक पार्श्व संगीत) (गाड़ी के तेज़ चलने की आवाज़)
(गाड़ी को तेज़ चलाने की आवाज़)
(गाड़ी को तेज़ चलाने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़)
(गाड़ी को तेज़ चलाने की आवाज़)
(गाड़ी का दरवाज़ा खोलने और बंद करने की आवाज़)
[राजीव]: ज़िंदा रहना। हूँ।
(गाड़ी से सैयद को बाहर खींचने की आवाज़) (सैयद के कराहने की आवाज़)
[तामीर]: तुम चलो... तुम चलो। (कराहते हुए)
(तामीर के कराहने की आवाज़) (तामीर के घुटनों के बल ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
[राजीव]: तामीर?
[राजीव]: तामीर? [तामीर]: हूँ?
(राजीव के ज़ोर लगाने की आवाज़)
[राजीव]: तामीर!
तामीर।
ज़िंदा रहना।
ज़िंदा रहना। तामीर। (तामीर को पानी पिलाने की आवाज़)
(बेसबॉल बैट से सर पर वार करने की आवाज़) (राजीव के कराहने की आवाज़)
(बंदूक से गोली चलाने की आवाज़) (सैयद के कराहने की आवाज़)
(सैयद के कराहने की आवाज़) (राजीव के कराहने की आवाज़)
(दुखद पार्श्व संगीत) (राजीव के कराहने की आवाज़)
(सैयद के कराहने की आवाज़) (राजीव के कराहने की आवाज़)
[राजीव]: तुम सिर्फ़ चारा थे।
बलि का बकरा साला!
[सैयद]: अफ़शर...
अफ़शर!
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (आतंकियों के कराहने की आवाज़)
[फौजी 1]: नीचे झुको! नीचे झुको! नीचे झुको!
[फौजी 2]: कंप्यूटर से हटो! [फौजी 1]: नीचे झुको! नीचे झुको!
[फौजी 1]: उस दरवाज़े की तरफ़ जाओ! घुटनों के बल! नीचे झुको अभी!
[फौजी 2]: नीचे झुको! [फौजी 1]: नीचे झुको!
[फौजी 2]: जाओ! निकलो! [फौजी 1]: हमें फ़र्क नहीं पड़ता! काम बंद करो!
[फौजी 2]: नीचे झुको! [फौजी 1]: मेरी बात सुनो!
(चिंताजनक पार्श्व संगीत)
[अफ़शर]: वो यहाँ है। अंदर है।
ढूँढो उसे! (गाड़ी का दरवाज़ा बंद करने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(बम धमाके की आवाज़) (मलबे के ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(आतंकी के ज़ोर लगाने की आवाज़) (रस्सी को हवा में घुमाने की आवाज़)
(आतंकी के कराहने की आवाज़) (लात मारने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (रोमांचकारी पार्श्व संगीत)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (अफ़शर के कराहने और ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
(अफ़शर के कराहने की आवाज़) (बंदूक लोड करने और कराहने की आवाज़)
(बंदूक से गोलियाँ चलाने की आवाज़) (अफ़शर के कराहने और ज़मीन पर गिरने की आवाज़)
(फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)
[अफ़शर]: अलावी! मुझे गोली लगी है। (कराहते हुए)
रिइनफ़ोर्समेंट भेजो। (कराहते हुए)
जल्दी! (कराहते हुए)
[अलावी]: तुम हो कहाँ?
मैं वहीं आकर तुम्हारी मदद करता हूँ।
अफ़शर, मेरी बात...
[राजीव]: ध्यान से सुनो।
जब एक सोल्जर किसी दूसरे सोल्जर को मारता है,
तो बात देश की होती है।
लेकिन जब एक आतंकवादी किसी मासूम की जान लेता है,
तो बात पर्सनल हो जाती है।
[अफ़शर]: राजीव कुमार!
आख़िर हम मिले, हाँ?
आह! (आहें भरते हुए) (फ़ोन की रिंगटोन बजने की आवाज़)
तेहरान में स्वागत है।
[अफ़शर की बेग़म]: हेलो। हेलो?
[राजीव]: अपनी पत्नी से बात करो।
[अफ़शर की बेग़म]: कौन है? कौन बोल रहा है? ज़ोर से बोलिए।
[राजीव]: उसे बता कि तुमने एक छह साल की बच्ची को मारा। [अफ़शर की बेग़म]: हेलो?
[अफ़शर की बेग़म]: कौन है? हेलो? अफ़शर?
आप ये सब क्या कर रहे हो, अफ़शर? सब कुछ ठीक है क्या?
[अफ़शर]: मेरी जान,
तुम एक बहादुर औरत हो।
तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। (रोते हुए)
मुझे माफ़ कर देना। (रोते हुए)
(अफ़शर के रोने की आवाज़)
[अफ़शर]: ये लो। (कराहते हुए)
ले लो इसे। (कराहते हुए)
मेरी तरफ़ से तोहफ़ा। (कराहते हुए)
(अफ़शर के सिगरेट फूँकने की आवाज़) (अफ़शर के हँसने की आवाज़)
[अफ़शर]: मुझे नहीं पता था, मैं इस तरह मारा जाऊँगा।
तुम एक सिपाही होना?
तो इसे एक सिपाही की तरह ख़त्म करो।
[राजीव]: किसने कहा मेरा काम ख़त्म हो गया है?
हमारी ज़मीन पर आकर लड़ने का किसी को हक़ नहीं है।
हिंदुस्तान में।
[अफ़शर]: तुम कहाँ जा रहे हो?
यहाँ आओ!
मेरी मदद करो।
मेरी मदद करो!
मुझे मार डालो!
सैयद!
उसे जाने मत देना।
मार डालो उसे! सैयद!
मार डालो उसे।
सैयद, मार डालो उसे! (चिल्लाते हुए)
सैयद! सैयद! (चिल्लाते हुए)
मार डालो उसे! तुम क्या कर रहे हो? (दरवाज़ा बंद और गाड़ी स्टार्ट करने की आवाज़)
सैयद, क्या कर रहे हो?
सैयद! तुम ये क्या कर रहे हो? (कराहते हुए)
सैयद! उसे जाने मत दो, सैयद!
उसे मार डालो! (गाड़ी को रिवर्स में चलाने की आवाज़)
तुम क्या कर रहे हो?
नहीं, सैयद।
सैयद, सब कुछ ठीक हो जाएगा। (कराहते हुए)
सैयद, मेरी तरफ़ देखो।
सैयद, मेरी तरफ़ देखो!
सैयद! मेरी तरफ़ देखो!
सैयद... सैयद, नहीं! आह! (गोली चलाने और अफ़शर के कराहने की आवाज़)
(गाड़ी चलने की आवाज़)
[हिमाद्री]: राजीव कुमार सिर्फ़ एक लड़की की मौत का बदला लेने तेहरान नहीं गया था।
उसने हज़ारों इंडियंस को कोलेटरल डैमेज होने से बचाया।
[नीरज]: तो फिर निकालो उसे वहाँ से। उतना तो बनता है ना?
[हिमाद्री]: मेडल तो नहीं मिलेगा।
इन्क्वायरी अलग से होगी।
[मददगार]: हूँ।
[नीरज]: देखो, तुम क्या कर सकते हो।
[हिमाद्री]: एक एहसान उधार रहा।
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