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दीवन हो धन्य जो है दैसे तुन ले श्री कथा श्री
कथा तान्यहं शिवतानहं
आवधी परवेश्वरं गरुणाजर
गंगाजर हे महेश्वरं शंतरा शिवसंतरा
शंतरा अभयंतरा
जन्म मकड रूपे थावो एक दूद ही थावो गर्न रक्ष सिव
की बांधा जाल पर वो जल गाया सिव इच्छा थी भू
लिंद को बचा ले भग भग अगनी में
प्याग प्राण सिव का नाम ले कर मकडी ले हाई दया सिव कोई दय था
गज ने रत्नों को हटाया दिन्य सूंद से नैलाया शिव प्रदिभाती होना
मेरी अजित है रोजित हुआ राग बैठा सूंद में गजा के दिरा
पीड़त गज फिर सर पेड़ से टकरा के देख उसकी भक्ती हुए शिव बड़े
प्रदिभाती
आपकी पीड़ा और मेरी पीड़ा
में
कोई भीद नहीं। जल्द ही श्री काल हस्ती में देवी ग्यान प्रसुन नामविका के रूप में
आपकी ही पूजा होगी। और आप अपने दर्शन करने वालों को भक्ती, ग्यान, वहराज्य
और मुक्ती ब्रदान करेंगी। परन्तु ये संभव कैसे होगा?
सती, मानव का
सं
वो समय आने ही वाला है जब आयू बढ़ाने वाला वायू लिंग सब के दोरा पूजा जाएगा
जहां वन है वहाँ ज्यान से पुर्ण तपोवन का निर्मान होगा
एक बालक जन ले चुका है जो कई पीड़ियों का उधार करेगा जो जुगों का
अंदकार मिठा कर सारे संसार
जिस पर आपको इतना विश्वास है
देवी मा कह रही है एक प्राण के बदले सेक्डो प्राण बचा लेंगी मा एक बार फिर से
बली ये जीवन मा का दिया हुआ है
पूरे कबिले में फैल गई और इस बली से मृत्यी का वो चक्र समाप्त होगा चलो देवी
जोड़ो रमन करो
इंसानों को जो चाहे कहलो लेकिन बगवान को नहीं नहीं बगवान नहीं है बाबा अगर होता
तो मैं उसे बार देता बार देता बार
देता
बीच को देखकर ये कौन अनुमान लगा सकता है कि ये इतने बड़े वरक्ष में बदल जाएगा ठीक
उसी तरह बून को देखकर ये कौन जान सकता है कि सीप के मुँ में जाकर वो मोती बन जाएगा
तिन्ना अब जीवन भर भले ही मेरी भक्ती से दूर भागे एक दिन वही
भ
कुछ नहीं हुआ तुम्हारे बच्चे को। मेरे बच्चे की रक्षा करके तुमने मुझे नए
जीवन दिया है। हमारे लिए तुमने बच्चे की रक्षा करके। अरे अरे ये क्या कर रही है।
गंगा।
तेरे
बच्चे को बचाने वाला यह मनुष्य नहीं है। हमारी
देव
पिन्तु ये मनुश्य हर बच्चे की रक्षा करेगा ये मेरा वचन है धिन्नाडू का वचन
इसे भी सुननी है सुनो वो जन्म से ही भाधूर है मानो यूज जंगल ने ही उसे शिकार की गुन
सिखाई हो वैसे उसकी आंखे बिलकुल हमारी जैसी है लेकिन उसकी दृष्टी बड़ी ही तीक
है बच्चबड में तिनना एक दिन जंगल में लकड़ी चुनने गया
तब
उसे पत्तों में दबा हुआ एक नुकिला डंडा बिला बाग तिन्ना को खूर रहा था और तिन्ना
बाग को जैसे ही बाग तिन्ना की ओर लपका तिन्ना ने डंडे का नुकिला हिस्सा उसकी
में खूब दिया फिर क्या था डंडा बाग की गर्दन के आर पार और
जं�
बच्चमन पे शुरू हुआ शिकार का खेल वो आज तक खेल रहा है क्या बाबा कितनी बार एक ही
कहानी सुनाएंगे आप तो सुनाते सुनाते नहीं तकते पर ये बच्चे बार बार सुनकर ठक गए
होंगे आज के बाद ये सब बंद कर दीजिए तुम्हारी कहानी जितनी
बा
तो वो तुमारी तरफ वीर कैसे बनेंगे?
क्या रे थिन्ना, आज कोई भी शिकार नहीं मिला. एक काम करते हैं, अलग -अलग जाकर
हैं.
कौन हो तुम हमारे गाउं के तो नहीं लगते हो ताड़ के पेड़ की तरह लंबे हो बोलते क्यों
नहीं क्या हुआ बोल नहीं सत्य बहरे हो क्या घमंडी हो
तिमरा नमली तरीय मुयल कर चिर्चे बाड़ी
अचानक से गायब हो गई
भूत
थी क्या ऐसी भूत के लिए तो मैं भूत बन जाओ
बिना हमारी आज्या के कबीले में कैसे आए? अरे ज्यादा झुके तो घिर जाएंगे ज्यादा उठे
तो गर्दन कट जाएंगे गुरुजी बस करो देखी कौन है आप लोग? हम आप सभी को सब्य बनाने
लिए सुरण मुखी नदी को पार करके आए हैं हम पंडित हैं, महा
पिलका चोड़ेश्व शर्मा और इनका नाम जिलका तंकू भटू शर्मा है
ये मेरी बेटी है नेमली
ये क्या किया नेमली
इतनी सारी विभूती लगा ली क्या शिव जी कितारा शम्शान में गुम कर आ रही हो शिव जी
सिर्फ शम्शान में ही रहती है ये किसने कहा मा
चुप हमारे इस वंश में
देही राजकर्ति आ रही है हमें ही तलवार पकड़ने का अधिकार है
तुम अगर इसी तरह से पूजा पाट में लगी रहोगी तो इस कभीले की रक्षा कौन करेगा इस
अधिकार का क्या होगा ये अधिकार हमें देने वाले भी शिव जी ही है न
आपने
दे
आप इसकी भगते का भूत उतार कर शासन करने के गुण सिखाईए इसे इस कभीले की सबसे महा
राणी बनाईए मुझसे भी अच्छी हाँ बना देंगे शेर को भी ये गुण हमने ही
सिखाए थे और जंगल का राजा बना दिया था तो ठीक है मेरी बेटी को
भी इस कभीले की म
गुरू जी आप मा की बातों को भूल जाए मुझे सपने में हर दिन वायूलिंग के दर्शन हो रहे
हैं एक बार दिखा दीजे ना क्या बात कर रही हो वायूलिंग के आसपास कोई भी नहीं जा सकता
क्योंकि भद्रगण उसकी रक्षा करते हैं मगर वायूलिंग की पूजा क�
शतुरवेद वेदांग पर जिनका अधिकार है ऐसे जान मूर्ती।
फिर झुकाएं तो वो श्रीकाल हत्तीश्वर।
और फिर उठाएं तो शाक्षात काल भैरव है वो।
येवल उने ही वायुलिंग को देखने का अधिकार है।
परम भक्त है वो।
कर दो
कर
दो
शिवाया कैसा दिव्य ये कैसा भव्य ये वायू लिंग रूकम देख तेरा ये महान
रूप शिवतन्य हो गए हम जवी जंगर भी है शिव में
नव ग्रहा भी है शिव में
है धरती भी है शिव में है आकाश भी है शिव में
है सर जग के सार शिदाम चार गंगा की धार
सर्वाय, भवाय, त्रिनेत्राय, नील कंथाय,
भस्वांद रागाय, ओम नमः शिवाय। हे
जगत्वरंधर, मैं आपकी प्रान लिंग सुरूप को प्रणाम करता हूँ। जिस
भूमी पर आपने मारकंडिये को आशिरवात दिया, उन्हें साथ चिरंजीवियों का वर्धान द आज
मैं उसी पावन स्थेल पर खाला हूँ महारेव। आप स्वयं कैलाश परवत पर विराजमान हैं।
किन्तु आपके दया दिश्टी यहां दक्षिर कैलाश तक है। आपने ही हम गिशी अगस्ति के
वन्शजों को इस वायू लिंग की सुती करने का शिर्वाद दिया है।
य इसे
अपावित्र नहीं होने दूँगा, ना कभी इसे खंडित होने दूँगा, ये मैंने अपने पिता को
दिया है। चारो वेदों की देवी मा गायत्री के वेदों को साक्षि मान कर,
मैं अपने यद्यो पवीत की सबद लेता हूँ। वायू लिग्य के रहस्य को
सरक्�
क्या रे टिक्की, उस दिन माली की गोडी ने पूंच हिलाई तो तू उसके पीछे भागा, कल तू
शिवंगी की गोडी के चक्कर लगा रहा था, आजकल सैयम खोता जा रहा है तू, बस एक ही होनी
चाहिए, जैसे मेरी है, जंगल में मिली वो सुन्दर भूत,
गुस्ता मत हो, म
ये वायो लिंक का रास्ता बता उस पत्थर का रास्ता लेकिन वहाँ पर क्यों जाना है उस
पत्थर से क्या काम है है कुछ काम तू बस रास्ता बता यहां से सीधे चले जाओ चार
को पार करने के बाद स्वर्ण मुखी नदी आएगी नदी पार करने पर भद्रगणों
मारे मा को पता है कि तुम माली से प्रेम करती है। उन्हें पता लगा तो मेरे प्रांट
लेंगी।
हम
बहुत दूर से आए हैं और प्यासे हैं। हमारी प्यास बुझाओगी। हाँ लीजे ना। ये प्यास
पानी से नहीं बुझेगी। इसके लिए तो कभीले की छोरी चाह
कर दो
पीट पर वार नहीं करते माली, जाने दे। कौन है लोग थिन्ना, कभीले में आज से पहले
इन्हें कभी नहीं देखा।
तु जानता है तुने किसके
आदमियों को मारा है, अब मेरा भाई आएगा। कौन है तेरा भाई?
कालमूक।
मेरा भाई कालम मानव नहीं तानव है
पचास आई थे, अगर हमें वायो लिंक ले जाने दिया होता, तुम लोग बच जाते
हैं, पर अब मेरा भाई आएगा, लाखों की सेना के साथ उचाल लाएगा,
तुम्हारे घर, तुम्हारे जंगर को मिट्टी में मिला कर,
वायो लिंक ले जाएगा, तुम्हारे आत्मियों क
अब तक हमने हर शत्रों का सामना किया है हमारी शांती बंग करने वालों को दंड अवश्य
बिलेगा देवी की कृपा से यदि वो हम पर आक्रमनी ना करे तो अच्छा होगा उसके पास
की सेना है हम क्या करेंगे मुखे जी पोचा है लाखों क्यों ना हो देख लेंगे
पीर चलाना बाते बनाने जैसा आसान नहीं है। यदि युद्ध जीतना
है तो देवी मा की पूजा करनी ही होगी। यदि इन्हें क्रोध आ गया तो ये मनुष्य का रक्त
पीएंगी। सब के सब मारे जाएंगे। चलो मारे माने एक बात तो सही कही।
मरना तो एक दिन सबको ह
क्या लगता है पत्थर के सामने कद्दू फोड़ने और नीमू फेंगने से युद्ध जीते जाते तो
अस्तर शस्त्र किस काम के सेना रखने का क्या उद्देश होता एक बल्शाली शेर दस जंगली
हाथियों को मारने का सामर्च रखता है और हम केवल एक ही बान से उस
शेर
को म
क्या है वो हतारों में हो, या लाखों में क्यों न हो, लड़ेंगे हम, ये मेरा वचन है,
धिनाडू का वचन, वो ऐसे हमें युद जिताना
चाहती है, कभी लेके सारे दुखों की जड़िये मारे मा ही है, मुझे लगा ही था, तु जब भी
अशान्त होता है, मा की समाधी के
पा
मैं किसी देवी को नहीं मानता बाबा जानता हूँ इसलिए मैंने भी अपनी विश्वास को कभी
तुछ पर त्वपा नहीं तुझे अपने की तरीके से जीवन जीने दिया पर दूसरों की विश्वास का
सम्मान मुझे अनुशिक नहीं लगता बेटा जिन प्रथाओं पर म
बात मान ले बेटा, खा ले, खाने पर क्रोध नहीं।
काल
मुक का सामना करना है तो, पांचों कभीलों को एक जुट होना होगा। उसका सामना करने के
लिए हम अकेले ही समर्थ हैं बाबा। तिन्ना, जैसे बैसे शत्रुगों
बल्शाली समझना मूर्ता है, उसी तरह आहंकार क
और ये सभी कबीले पुरानी दुश्मनी भूल कर एक साथ युद करने आ जाएंगे। बाहरी शत्रु
बल्शाली हो, तो सबको साथ आना ही होगा। वो साथ में तो आ जाएंगे बाबा, लेकिन शत्रु से
लड़ने के लिए नहीं, केवल आपत में लड़ने के लिए
आएंगे
जिनका धर्म ही बायूलिंग की रश्चा करना है उन महान योद्धा कमपाडू और उनके भजगडों का
हम स्वागत करते हैं
महान
योद्धा मुंडाडू और उनके पुत्र वेबुली का हम स्वागत करते हैं
महिला प्रधान कभीले की नाईका, पन्नगा और राजकुमारी नेमली का हम स्वागत करते हैं।
जंगल के महान योधा नाधनाधडू और उनके पुत्र
राजकुमार थिननाडू का हम स्वागत करते हैं।
आदनादा, काल मुक्तो तुम्हारे कभीले पर हमला करने के लिए आ रहा है, तो हमें क्यों
बुलवाया है यहाँ? हम क्यों साहिता करें? वो केवल हमारा शत्रू नहीं है,
हम सभी का शत्रू है.
ओहो! और उसका हमला सभी कभीलों का सरवनाश कर सकता है. वो यहाँ
वायूलिं�
पन्नगा के बारे में अगर किसी
ने कुछ भी कहा तो मैं अपनी गदा से उसे मिक्टी में मिला दूँगा। तू क्या करा दे
बेबुली। आजा देख लेते हैं तुझे। आजा। शांत हो जाईए। शांत हो जाईए।
हम सभी के पूरो जेकी हैं। उन्होंने इस जंगल को पाँच बागों में बादा। और हम सब को
एक इस्सा
दिया।
पता है मैं हाथ जोट कर आप सभी से विनती करता हूँ.
बाबा, आप ऐसे विनती क्यों कर रहे हैं? हमारे कबिले और सारे कबिलों की सुरक्षा के
लिए, मुझे अपना सर जुखाने में कोई आपती नहीं. मेरे होते हुए आप किसी के सामने सिर
नहीं जुखाएंगे.
आपके
सम्मान
ये संकत की खड़ी है छोटे हो या बड़े सबको दुश्बन का सामना करना है हम मिलकर लड़ेंगे
थिननाडू के नेतर्जों में लड़ेंगे पुहार पुहार बेपुली नायक पनेंगे बेपुली की गदा
उठाने के लिए तीन आदमी चाहिए ऐसा ताकतवर इंसानी हमार
जो थिननाडू को अपना नायक चाहते हैं वो अपना हाथ उठाए
पाँच कभीलों में से तीन कभीले के लोगों ने थिननाडू को अपना नायक सुनने का निर्णा ही
लिया है अब से थिननाडू ही हमारा नायक है
वो
नायक बन गया है बाबा
बन तो गया है पर रहेगा तब जब जीवत बचेगा
वो अपनी जाओं बचा करा गया।
सद्यों
से जो सुना था वो सत्य है। पोध बिनाडू के रक्षक अभी जीवित है।
चेंचू, भील, इरुला, पुलिंद जैसे आधिवासी कपिले वहां के
रक्षक है। बुप्पो सोमी।
वायूलिंग मरे हुए लोगों को भी जीवित कर देता है वायूलिंग की हवा रेथ को भी सोनो
देती है तुमने ही कहा था बस वायूलिंग को लेने गए मेरे भाई को मानने वाले
तिन्नारों को मार डरूँगा मैं तिन्नारों को उसके
लोगों को उसके कभीले को उसके
ज
वायू लिर को खा लाओंगा मैं
शिव जी देखिए मैं आपके लिए केले,
खर्बूज, अमरूद, शहज ये सब लेकर आयू आप पेट भर के खाना स्वामी
ओरे गिलिका, तो ये इस बक्षी की भक्षी देखकर क्या लगता है रे? गुरू जी, देखे
लगता है हम ना सही, लेकिन नेमली को वायूलिंग के दर्शन कराने, भविश्य में कोई
अवश्य आएगा. हाँ, मुझे भी यही लगता है, बिल्कुल यही
लगता
जाने ही लगना चाहिए था वही लग गया
देख
तो कैसे इतने सारे फल एक किमा देख एक किमा देख बिना रुके खाने जा रहा है खाने देता
है गुरुजी आपकी जांग से बड़ी तो उसकी बुजाय है पीस के रख देगा आपको सही कहा
शिव जी ने मेरे सारे फल खा लिये हाँ शिव जी नहीं सारे फल खा लिये शिव जी नहीं शिव
जी नहीं खा लिये देखो देखो शिव जी शिव जी
ए
तू है शिव जी को चड़ा ये फल खाने में शर्म नहीं आती
हाँ इसमें शर्म कैसी
पत्थर अगर खाने लगे तो हम क
पत्थर को अगर पत्थर ना कहूँ तो और क्या कहूँ रात कुमारी?
कर दो कर दो कर दो
कर
दो
तेरे सीने में गोप दूँ ये खंजर मेरे हृदय में सिर्फ तुम बसी हो इसमें खंजर के लिए
कोई जगा नहीं है ताड के पेड की तरह नमबा है
एक लड़की के वार से गिर गया?
एक वार मैं हाथी को जित कर सकता हूँ.
लिकिन तुम्हें देखनी की बाद मैं ही जित हो गया.
अगर सच में बलवान हो, तो युद्ध जीतो, ना कि मुझे.
मैं युद्ध भी जीतूंगा, राजकुमारी, और तुम्हें भी जीतूंगा.
य
लाद लादा मैं अपनी बेटी शिवंगी का ब्या थिननाडू से करने का प्रस्ताव लेकर आई हूँ।
वो थिननाडू मा पर भरुसा नहीं करता। आप पर भी भरुसा नहीं करता मारे मा। उससे शिवंगी
का ब्या क्यों। थिननाडू अभी इस युद्ध का नायक
है।
कल दह के बाद धिननडु शिवंगी की बात को अन्फुना नहीं कर पाएगा नाहीं मेरी बात टाल
पाएगा मेरी प्यारी मोधनी
इतना क्यों शर्मा रही है कल तक तो जगड रही थी उससे अब केवल उसी की बात है
भले ही मैं उससे जगड रही थी पर वो दिल का बुरा नहीं ह
सब की साहिता के लिए तैयार रहता है शक्ति, धैरे, इमानतारी, चरित्र
सब कुछ तो है उसके पास कौन सा गुण नहीं है थिननाडू में ये तो करी अरे इतने
सारे फल वाह इतने
सारे ताड के फल
ये लो पकड़ो इससे
वो भी रोग दी.
मैंने अच्छा निशाना लगाया ना एक फल तूड़ना था तुमने तो ऐसा निशाना लगाया कि तारे ही
गिर गए कितना पादिश्ट लग रहा है
छोड़ो, छोड़ो, कुछ नहीं हुआ, छोड़ो, मैं ठीक हूँ. ओह, इतने बलवान बनते हो, और
परेशान ऐसे हो रहे हो, जैसे आँखी चली गई हो.
बाबा कहते हैं कि मेरी आँखें बिल्कुल मेरी मा जैसी हैं.
मा को तो अधिक दिनों तक नहीं देख पाया.
किन्तु �
करते हैं
तु मेरा आत्मा तु मेरा है
जहाँ
मैं कैसी ये दिल में हल चल चाहूं मैं तुछको पल पल कैसा तेरा ये जादू मुन
मेरा भी है ये जंशर सताई जो दिल पर या है हुआ मैं ना चाहूं कह
दे जो दिल में
खो जाने दे मुझको अभ्यूम धीमी धीमी चल रहे ही सासों में ही इन
सपनों की दुनिया में ही रहना मुझे ये सपना ही जीने देना मुझको जगा है
सच्ये सनम ये कोई सपना नहीं है तेरा ये चादू है या तेरा नशा
छाया थोड़ा भौगलपन है खोया मेरा ये मन है
और कितने दिन ऐसे छुप छुप कर प्रेम करेंगे माले हमें बिहा कर लें
क्यों?
इन्ना
मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, क्या है ये?
इस पत्थर को अपना रक्त चढ़ा कर, क्या हमें शट्टी मिलेगी?
आज के बाद यहाँ किसी की बली नहीं चढ़ेगी.
जिन्ना, मैं बली के लिए दिया हूँ. चुप कर बारी, तुझे इस पत्थर को अपना रक्त नहीं
दे
इसके बदले अपनी मा पहन बेटियों की पूजा करो उनके सम्मान करो जो इस पत्थर की तरह
बलिदान मांगती नहीं बलिदान देती है जब तक मैं इस कभीले में हूँ यहाँ किसी की बली
नहीं दी जाएगी मैं ये कभी नहीं होने दूँगा ये मेरा वचन है
हिन
राणू
क एक मा अपने बच्चे को जन देती है उसका पालन करती है उसके लिए स्वयं चलती है
की जान तो एक जंगली पशू भी नहीं लेता एक रक्त के प्यासे पत्थर को तुम मा कहते हो
यदि ये पत्थर हमारी देवी का स्वरूप है तो इसे हमारी रक्षा में शत्रों का
एक मनुष्य के बदले सौ को जीवन दान देने का व्यवसाय करने वाली ये मूर्ती
पेडियो
से चली आ रही प्रथा पर सवाल उठाने वाले तुम होते कौन हो हमारी प्रथा को नहीं
वाला नायक कैसे हो सकता है मारे मा की बात देवी की आग्या है
उन्हीं
तुनाती कैस
नहीं मानता, जिस पत्थर को पतीना नहीं आता, उसे नहलाते हो,
जिस पत्थर में साथ नहीं उसका ब्यार आचाते हो, जिनने सर्दी, वर्षा, धूब का
अनुभव तक नहीं, उनके लिए मंदिर बनवाते हो.
और एक सोला हजार गोपियों के साथ राज रचाता है। उनके सामने ये फिन्ना कभी तुकेगा।
ओहो,
भगवान की ही बुराई कर रहा है। तो जिसने इमली से मैं बिहा करने वाला हूँ, उसके साथ
जंगल में खूनना, उसमें बुराई नहीं है क्या। किसने कहा कि मैं त�
मैंने वचन दिया है। तुम्हारे ब्याग के निर्णय का मुझे अधिकार है। नहीं है। अपनी
बेटी की इच्छा जाने बिना किसी भी माता पिता को उसका ब्याग कराने का कोई अधिकार
नहीं। मैंने थिनाडू को अपना मान लिया है। और उसी से ब्याग
करूँगी।
तो दोनों में द्वन्ध होगा और वो लड़की उसी से भ्याग करेगी जो उसमें जीतेगा। तुम
दोनों अपने अपने शस्त्र इस्तेमाल कर सकते हो। एक के प्रान लेने के लिए मुझे किसी
शस्त्र की आवश्यकता नहीं। केबल मेरे बातों की चक्ती ही पर्याप्त है
देखता हूँ तेरी भुजाओं में कितना बल है
हुआ है
पहले तुझे मारूंगा और उसके बाद नेमली से द्या कर उसका अनंद लोगा
और फिर मेरे कभीले का हर एक आदमी उसका अनंद लेगा
अपने बाबा की जान ले फिर इसकी जान लेना उसके बाद कबिले में
सब की जान लेना बाबा
आप सब कहीं नहीं जाएंगे। जिसने हमारी देवी का तिरस्कार किया। जिसने अपने बड़ों का
अनादर किया। सदियों पुरानी परंपरा का अब्बान किया। वो से यह राणे का अधिकार।
तुने हमारे कबिलों में शतुरता पैदां की। हमारी एकता को नस्करने
व
जो कुछ भी हुआ वो क्यूं हुआ वो आपने भी तो देखा आप अकेले मुझे इस सब का दोशी नहीं
ठहरा सकते मैंने निर्णे कर लिया है तेरे लिए इस कभीले में कोई इस्तान नहीं चला जा
बाबा अब तक अपनी मा की समाधी पर रोने जाता था न अगर नहीं गया �
कुछ के कारण निर्दोश भी दंडित हो जाता है। रिदय से बड़ा कोई नियाय धिश नहीं होता।
वो तब जानता है कि उजित क्या है और अनुजित क्या।
मैंने
फिननारू से प्रेम किया है। और उसे सब्याह करूँगी उसके बारे में बात करना तो जूर
सोचना भी मत नहीं तो इसी समय तुझे जान से मार दूगे
महादेव, इश्वर से संसार है और परीजनों से संसकार है, ऐसा आप ही कहते हैं.
जितने दोनों ही त्याग दिया, वो आपका सबसे बड़ा भक्त होगा.
अवश्य होगा देवी.
समुद्र का जल आकाश में उड़ता है, परवत उपर गिरता है,
जर्नों में उचलता है, नदि वैसे ही जीव
भी एक लंबी यात्रा करके अपने शिव में लोटता है। यात्रा के दुखों को सेह कर ही
शिव मिलाब के लिए शुद्ध हो पाता है। थिलनाडू भी अब आत्मशुद्धी के अंतिम चरण
पहुँच गया है। इतना विश्वास प्रभू। सारे ज�
इसके हातों का कौशल, बाहों का बल, मन का संकल्प और आत्मा का सत्य देखकर भी जान
सकी कि ये कौन है?
पिरात, इस वराह के कारण मेरी तपत्या भंग हुई है। विवश हो मुझे इसे मारना पड़ा। ले
जाओ इसे। ले जाओ इसे अर्थात। दान कर रहा है क्या है।
यहाँ खेट मेरा है। यह भूमी मेरी है। यह वराह भी मेरा है। निगल
यहाँ से। इतना आहंकार।
त
तुझसे भी निपूर कोई धनूरधर है ये जानकर बनवाजी बालक का अंगूठा कटवाने वाला तू ही
न चला जा ने तो तेरा सिर कट दूँगा तेरात तुम मातर मेरा ही नहीं
वरन मेरे कुल का भी उपहास कर रहे हो अपना सामर्थ दिखाने के लिए मेरा एक बान
ही
मुझसे पहले निशाना लगा सकता है तू?
बाल चलाना तेरे वश की बात नहीं बच्चे तो ले अभी तलवार ले और इसी से अपना
कोचर
एक रात का इतना साथ की दनुर्धारी अर्जन के समक्ष खड़ा रहे और संभाव कौन है ये
आहंकार बड़ी से बड़ी विद्या को भी नष्ट कर देता है मालक। आहंकार की पराज़े से ही
विजय का आरम होता है।
महादेव,
परमेश्वर, शिवशंकर, धन्य हो गया मैं।
जटा जूट धारी, साक्षात परम पिता परमेश्वर ही जब सम्मुक
खड़े हो, तो कोई विजय की कल्पना भी कैसे कर सकता है?
समस्त विश्व को धन और भिद्या की शिक्षा प्रदान करने वाले, आपके समाशे तुछ प्राणी,
आपका ही अनुग्रह प्राप्त करने के �
तुम्हारी योंग्यता को परखना अति आवश्यक था जिसके लिए तुमने तपस्या की उसे सुइकार
करो हे ईश्वर कईवल्य रूप करुणा के सागर
आपके दिव्य दर्शन से मेरे सारे राग द्वेश मिट गए
हैं प्रभू अब ना कोई दिव्यास्तर प्राप्त करने
अब तो मुझे स्वर्ग का सुख पाने की भी कोई इच्छा नहीं रही है प्रभू। अपनी
करुणा और दया का अनुक्रह देकर अपनी शरण में ले लीजिये प्रभू।
आपकी सिवा में ही मुझे मोक्ष प्राप्थ हो माधि। वो तो इस
जन्म में संभव नहीं है अच्
महबाहू,
तुम्हारा पुनर जन्म थिननाडू के रूप में होगा तब पूरे भागती भाव के साथ पूरे मन से
शिव कहे कर एक बार भुकारना मैं तुम्हें मोक्ष के मार पर ले चलूँगा
पुर्ण
रूप से स्वच्च वस्तर पर कोई चोटा सा दाग हो तो क्या उसे धूना नही
बगवान कृष्ण के स्वर्ग जाने के बाद उनकी सोला सस्त्र गुपियों की रक्षा करने का वचन
दिया था अर्जुन में। किन्तो उसे पूरा नहीं कर पाया था और उसे कोया जाती के हाथो हार
का सामना करना पड़ा। ऐसे ही कुछ दाग धोने के लिए अर्जुन को
थि
क्या इस जन्म में उसे आपके चरणों में थान प्राप्त होगा नीलकंट?
नीलकंट हूँ मैं देवी, तिनाडू के सारे विश पीकर उसे संपुर्ण शुद्धी प्रदान करने के
लिए तैयार हूँ.
प्रतिक्षा केवल उस शण की है, जब तिनाडू ये जान लेगा कि मैं
देखिये पन्नगा राणी, आपने यहां हमें नेमली को सिखाने के उद्देशे से बुलाया था, पर
इसे उसकी आवशक्ता नहीं। देखो नेमली, जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा तुमने पा ली है,
अब अपने प्रेम के लिए तुम सारे संसार से लड़ सकती हो।
पंड
नेमिली मेरी बात ना मान कर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो समझना मैं तुम्हारे लिए
मर चुके हूँ कदम बढ़ा चुकी हूँ मा जो फिन्ना के साथ फेरे लेकर ही रुकेंगे यही
अंतिम देड़ा है मेरा
बाबा ने कभीले से बाहर कर दिया, इसलिए दुखी होना थे ना?
ऐसा नहीं है.
बाबा अगर मुझे अगनी में कूदने को कहेंगे तो मैं कूद जाओंगा.
मुझे अपनी चिंता नहीं है.
मुझे केवल बाबा की चिंता खाय जा रही है.
जीवन कभी ना कभी आपको किसी मो
कश्ट भी सेहना पड़ता है, पर उसका सामना करने पर ही, आप स्वयम को
जानते हैं,
रिष्टों को पहचानते हैं, जीवन का अर्थ समझते हैं।
मेरे
पास न पिता का सम्मान है, न कबिले की शक्ती, तुम सब छोड़ कर मेरे पास क्यों
इने मिली?
तुम ही मेरा सम्मान हो। और तुम ही मेरी शक्ति।
मेरा रोम रोम यहीं तुम्हारे साथ है। तुम्हारे बिना रहने का सोच भी नहीं
सकती। लेकिन रहोगी कहां?
तुम्हारे बाबा ने तुम्हें गुटिया बनानी नहीं सिखाई।
खाओगी क्या?
शिकार करना तो आता है न तुमको बातें किसे करोगी?
मैं बातें करने में समय बरबाद नहीं करोगी
बिया कर ले?
तो चलो किसी मंदिर में चलते हैं
ये मेरी मा की समाधी है और इससे बड़ा मंदिर मेरे लिए और कोई नहीं।
मा, हम
बाबा की अनुमती के बिना बिया कर रहे हैं। आशिर्वात दीजिए।
आज से मेरा जीवन तुम्हारा है धिन्ना।
मैं वर्षा के मेगों की तरह नहीं, जो गरज कर बरस कर चले जाएं, मैं हवा की तरह हूँ,
जब तक मेरे प्राण रहेंगे, मैं हवा की तरह हमेशा तुम्हारे आसपास रहूंगा,
ये मेरा वचन है,
इन नाडल का वचन,
लेके पूरी हुए मैं भी मिला तू है जबते अब हाल भी मेरा
ऐसा ही कुछ है दिल चाहता कुछ है और कहता कुछ
है तो किसने कैती बेचेनी है पापना तू
तो क्यों है परेशान
ये तुम्हें बुलाने के लिए बनाया.
इसे एक बार बजाने पर तुम्हें मेरे लिए पानी लाना है. दू बार बजाने पर खाना लेकर
है.
और तीन बार बजाने पर?
मुझसे प्रेम करना है.
फिर तो बहुत ही जल्द तूट जाएगा ये.
हमेशा तीन बार ही बजा�
इतने जानवर भी भाग जाएगा, और मैं भी तुरल तुम्हारे पास आ जाओंगा, ठीक है?
एक ही जनम तो कापी नहीं।
उस पत्थर के स्थान पर मेरे जपने
देखो।
हर धड़कन में तू ही सनाओ आदा हुआ
आदा दिल मेरा अब से लेके पूरी हुए मैं भी मिला तू है
जब से अब हाल ये मेरा ऐपा ही कुछ है दिल
चाहता कुछ है और कहता कुछ है तुझ से कैसी
बेचेरी है पापना तू तो
है परेशान
पिताजी, कमपाडू आपसे एक एहम बात करना चाहता है। स्वामी, वायू
लिंग पर लुटेरों की कुद्रिष्टी पढ़ने वाली है। सूचना मिली है दूर देश से। लाखू की
संख्या में सेना वायू लिंग को लेने की मंशा से आ रही है। ये असंभाव
है। जिसक
जिनकी नेत्र खुली से ब्रह्मान भस्म हो जाए उन्हीं के सब है। शंकर की सेना कहीं ने
कहीं तैयार हो रही होगी। सिवो हम।
नादा नादा, अमावस्त्या के दिन जगडा हुआ था। और अब पुर्णिमा भी निकल गई। पर
मेरा पुत्र अभी तक मुर्चित
पड़
इसलिए उस दिन नादनादडू ने तिननाडू को यहां से निशकासित किया था अगर हम सब मिलकर
नहीं लडेंगे तो अपने बेटे को निशकासित करने के इनके त्याग का क्या मूल रह जाएगा
मैं लडने के लिए तैयार हूँ हमें इसी समय अपने कभीले के सैनिकों
को य
ने आकरबन कर दिया है अपने अपने हतियार उठा लो
प्रियों और बच्चों को यहां से जल्दी निकालो और उन्हें सेतु के उस पार ले जाओ
गंपडू
जाके वाली की सहायता भरो तभी लोगों को सेतु पार करवाओ ये पाड़ियां केवल उस चोटी
सेतु से जुड़ी हैं पहले तुम सब पार करो मैं अब स्वय आउँगा
उसके रसियां कर देना एक भी शत्र उसके पार न जाने पाए जाओ
नादा नादा जब इसे तू पार करेंगे तो अच्छी का अपनी है तयार रहना तू
आप इसमें यहां कैसे हैं?
तुझरे, बात करने का मनता बेटा.
हाँ, कहिए. इस संसार में एक और परंपराएं हैं, एक और धर्म हैं, किन्टो
धर्म सबसे उपर हैं.
तुमारे निश्कासन का आधर परंपराएं थी, धर्म नहीं था. बिना किसी भाई की सत्य बोलना
और
सत्य
सच कहूं तो, मैं भी बिल्कुल यही करना चाहता था, किन्टो कर
नहीं पाया, मैं जानता था कि सारी परंपराएं सही नहीं होती, किन्टो
मैं उनका विरोध करने का साहस ही नहीं जुटा पाया, मैं भी
तुमते सत्य पर चलना सीखना चाहता था, लेकिन माता पिता
हमेशा ब� किन्तु मेरे आदश तो तुम हो, वैसे भी एक
बच्चे का भविश्य केवल उसके माता पिता पर निर्भर नहीं करता, वो निर्भर करता है
उसके कर्मों पर,
सत्य के मार पर, चलने के उसके दर्टा पर, लेकिन सत्य तो सामने होकर
भी चिपा रहता है, इच्छा, आहंकार,
भ
जीवन एक समान नहीं रहता, सत्य और असत्य के बीच जो बेच छिपा है,
उसे जान कर अपने जीवन में परिवर्तन लाना ही सबसे बड़ी सीख है,
जो मैं नहीं कर पाया, तुम सत्य का मार मत चोड़ना देना, अपने हिरदे की सुनना,
अपनी बुद्धी से निलने लेना, �
परंपरा को थोड़ कर भी उसके आसु पोचना, पता है, जब तु मा की कोख में
था, मैंने उससे कहा था, हमारे वंस में एक देजिस्वी बालक का जन्म होने वाला है,
जिसका नाम सदाए, सूरी की तरह चमकेगा, और बेटा,
अब तेरे गुनों की कारण ही, तेरे पिता का सम
मेरा दिन आएगा
तेरे बाबा हमारे कभीले के सारे कभीलों के लिए आदर्श थे हमें इनका शव कहीं नहीं मिल
रहा था लेकिन ये नदी हमें उन तक ले गई ना था ना था बहुत महान
थे अपनी जान की परवाखे बिना कभीले की औरतों और बच्चों की जान बच रहे
बाबा की अंतिम क्रिया तब तक नहीं होगी जब तक मैं उसे ना मार दूँ
जितने मेरे बाबा को मुझसे छीना है
ये मेरा वचन है धन्नाडू का वचन
कहा
है धन्नाडू बहुत बड़ा योद्धा है तो छिप क्यों रहा है सामने क्यों नहीं आता हरगोश
का शिकार करने वाला काल मुख को मार पकता है क्या
कल नंदी घाटी में तू अपने जीवन की भीख मागेगा यदि साहस है तो अवश आना
कहीं युद्ध लड़े, अन्गिनत युद्धाओं को मारा, लेकिन जिसका अंधेरे में इतनी दूर से
लक्ष नहीं चूका, और जिसने तुम्हें चुनौती देख कर बुलाया है, ये तिननारूस हमारी
युद्धा नहीं है, मेरी मानो वापन।
बप्पा स्वामी,
हम वा
लेकिन तिनारों को माने के बाद उस वालु लिंको साथ ले कर
जाएंगे
गिरेंगा संगार।
अपनी रक्षबा के पर वो जीते शड़बर जो
नहीं पूरे बन को
जटाटवी जटाटवी
जटाटवी
अब ये युद्ध समाप्त करना ही होगा टिके
आपको मार कर दी काश मैं आपको वापस ला पाता बाबा
तु रुख जा थिन्ना। ये कबिला
तेरा है। हम सब तेरे हैं। अब तु ही इस कबिले का मुखी है। रुख जा थिन्ना। हमें
कर मत जा। बाबा की आग्या थी कि मैं ये कबिला छोड़ कर चला जा। वो जीवित नहीं है
मुझे उनकी आग्या का पालन करना ह
ये क्या कर रही हो नेमली, मैं सुबह सुबह लगडियां लाने जंगल में जाता हूँ, और तुम
पत्थर की पूजा शुरू कर देती हो। आज महाशिव रात्री है थिनना। रात्री, दिन का समय है
नेमली, अभी रात्री कैसे हो सकती है भला, कुछ भी कहती हो, कुछ भ�
खीर बनाई है और मुझे खाने से मना कर रही हूँ?
इसे मैं खा लेता हूँ.
क्या है ये? मैं खीर भी नहीं खा सकता?
ये तुम्हारे लिए नहीं, शिव जी के लिए है. भूख लगी है तो खा नहीं सकता क्या?
अभी इसे उठा कर जंगल में फेक देता हूँ, तब ही तुम्
अपनी मा और कबिले को छोड़ कर आई थी तब भी इतनी दुखी नहीं थी जितनी इस पत्थर के लिए
हो अब तुम्हें ये पत्थर मुझसे भी प्रिय हो गया बच्चों की तरह हट मत करो क्या बोला
हट कर रहा हूँ हट मैं कर रहा हूँ या तुम या तुम अपना
विवेक
वो हर जगह व्याप्त है उन्होंने ही हमें जन्म दिया है संसार में सब कुछ उनके कारण
सब कुछ ये पत्थरी करता है जंगल में आग ये पत्थर लगाता है सूखा ये करता है जिससे फसल
नष्ट होती है और लोग फूखे मरते हैं संसार में मनुश्यों के जितने भी
द
सबसे बड़ा सत्या.
ना उसे सपर्च कर सकती हो, ना सुन सकती हो, ना वो सुनता है, ना कभी बोलता है. सब
मिठ्या है.
मुझसे प्रेम करने से पहले तो कोई प्रश्न नहीं पूछा. तो फिर शिव जी के बारे में
प्रश्न क्यों?
क्योंकि तुम्हें मैंने अपनी
आ
देखता हूँ शिकार कहते नहीं मिलता। कुछ नहीं मिला तो लोटूंगा भी नहीं।
आपकी दिव्य वायूलिंग का लाब इस संसार को कौन देगा?
महादेव शास्तरी के मन में भक्ती है शिवांगी, कि तु हृदय में भक्त होने का
है. उसो तो स्वेम हमारा परिचे नहीं, वो संसार से हमारा परिचे क्या करवाएगा, लेकिन
थिननाडू करवा सकता �
सारे संसार को दे पाता तो क्या हम उसकी सहायता नहीं करेंगे मृत्यून जय पत्नी का
आदेश है मानना तो हो गई किन्तु थिननाडू करम से बंदा है भगवती और उसे स्वेम ही
उस करम को तोड़ना होगा अंदकार में सांब भी लटक रहा है और रसी भी दुर गए जो
भे
उसकी कोई साहिता संभव नहीं। यदि आज वो अपने मुख से शिव नाम का उच्चारण नहीं
तो इस जनम में उसकी मुक्ती संभव नहीं होगी। अब ये कैसी परीक्षा स्वाद...
रोद...
भूख लगेगी अपने आप आएगा, फटी इंसान।
क्या हुआ?
नेमली कहाँ है?
अब उसके बारे में क्यों पूछ रहा है? वो तो ब्याह करके चली गई। लेकिन तू ठीक हो गया,
मैं बहुत खुश हूँ। ब्याह हो गया, क्या कर रहा है?
छोड़ूंगा नहीं उसे। म
जब उसका अनंद लूँगा नहीं नहीं ये पाप है पाप देख हमारे इस कभिले में शादी शुदा
लड़की मा समार होती है और तू एक बार तो उसके हाथों हार चुका है दुबारा क्यों
इन आडू के मरने की बात करने के स्थान पर मेरे
मरने की बात कर रहे हो नही
नमो भूतनाथाई, नमो शक्तिस्वरुपाई, नमो बायू
लिंगिस्वराई, आज आपकी रात्री है प्रभू, आज की रात्री आपके लाश में
महा तांडव करते हैं, समस्त ब्रह्मान्ड महा शिवरात्री के उसल पर
आपकी आराजना में लीन हो जाता है, काला दिपती.
मुझे आशेवाद दीजिए कि मेरी पूजा अर्चता बिना किसी अर्चन के पूजा नहीं हो
जाए। ओम नमस्यवाद।
शिव जी धिन्ना के इस ब्रहम को अब आप ही दूर कीजिए स्वामी
पूर्ण से उड़ी चली सब तेरे आजे, जरते जो बात उनको दिखे, दरगे वो सत्य सा
तेरे भागे,
आये तो शम्मू बच्चे, जोड़े तरंग रग रग में बल्की,
अब जो कहें जो शुरुकार, आये पितल में शुरुके बल्की.
प्रेंद से पूछ कर देखे और हाँ कमपा को सुनाई नहीं देगा सारी विवस्था कर कर आया
मैं शास्त्री भाई ऐसी अभध्रता से मात करता है तुझे जाता
है तो किसके सामने ख़ड़ा है अधोर मुखर्चना विदिविधान द्याता हूँ मैं वेद वेदांग
पारन्यत हूँ मैं समस्त लोग का कल्यान सोचता हूँ निर्मल मन शुद्धतन संपूर्ण
जिवल एक बात्र महापंडित बहाधेव शास्त्री हूँ मैं आये पाबा
ये जो बोर रहे थे
त
जहाने की अनुमति नहीं है यही परंपरा है जही मियम है यह परंपरा भी तुम्हारी ही देन
होगी यह सर्यों पुरानी है मूर्ख यह उन रिशी मुनियों की पेन है जिनोंने स्वयं
सास्त्र लिखे है उनका हर अक्षर नियम है क्या वो अक्षर रिशी मुनियों ने बराय
थ
तब दमरू के नाथ से अक्षरों का जन्म हुआ और उड़ी अक्षरों से भाषा जन्मे ही पारभाती
का जन्म भाषा और व्याकरण से बहुत पहले हो चुका था
शास्त्री तुम्हारे चड़ावे
के वत्र महादेर तक पहुँचे निये उसका तो पता नहीं किन्तु
अर्ण
स्वाबी मुझसे क्या भूल हो गई शमा करे स्वामी ओ
नमस्चिवाई
तुम्हारा अपना ही समझा?
पहले कभी आपको यहां देखा नहीं. तुम्हारे साथ ही तो रहता हूँ. तुमने ध्यान नहीं
होगा. मैं भोखा हूँ.
भोजन मिल जाये तो.
स्वामी जी, आज महा शिवरात्री है.
उपवास होता है.
पती को भी नहीं चूने दिया.
शि एक रहनी को भगवान के साथ साथ पती को भी भोजन कराना चाहे शिव को भी स्वय मन
पूर्णा देवी भोजन दिती है स्वामी जी ये आपके लिए नहीं है
वैसे
ये सब तुम्हें किसने सिखा है बड़े बुढ़ोने और उन्हें उनके बड़े बुढ़ोने
उनके भी बड़े बुढ़ों से बड़ा मैं हूँ.
मैं जैसे खाऊंगा, आख मूद कर मानने लगोगी.
ए, कौन हो तुम? लाद क्यों मारी?
गूल से लगे मित्र.
मैं तो अपने मार्थ से जा रहा था, किन तो तुम यहां दिख गए.
सोचा तुम से बाते करता चल.
भूख ल
जाओ यहाँ से। चला जाओंगा। इतना तो बता
दो। क्रोधे किस पर हो। तुम्हें बताने से मेरा क्रोध कम हो जाएगा। क्या
मेरी पत्नी को बुद्धी दे सकते हो तुम। मुझे भूजन कराने से मना कर दिया है उसने।
कहती है आज महा शिवरात्री है। मुझे भी �
तो समस्या क्या है?
एक बार तुम भी शिव का नाम लेकर देख लो। चायद ये क्रोध मिट जाए। मस्तिश्क में जोड़
जन है। क्या पता वो समाप्त हो जाए। हो हो हो। तो तुम्हें
नेमली ने भेजा है। तुम मेरे बारे में जानता नहीं है। मैं किसी के नहीं
सु
तुम्हारी महाशिवरात्री भंग नहीं होने दूँगा। क्या तुम मुझसे ये
वस्तर लोगे। कोई भी आम वस्तर मेरे शिव की सोभा नहीं बना सकता। सबसे पवित्र और सबसे
शुद्ध रेश्मी वस्तर ही महादेव पर सशजित होता है। किन्तु जिस रेश्मी वस्
वो क्या मश्रियों का जूठा नहीं होता?
शिवलिंग पर जो दूध तुमने चड़ाया, उसे किसी बश्रेय ने पहले ही जूठा किया होगा ना?
तो महादेव को जूठन चड़ाते हो क्या?
चुक कर दुष्ट, महादेव ने इने कभी जूठन नहीं कहा, तो तू कौन होता ह
ये तहंकार है जो निकट वविश्य में अस्री भक्ती से दूडेगा तब तु जानेगा कि अस्री
भक्ती होती क्या है मुझसे बहान शिववक्त है इस सिस्थी में कोई नहीं
उरत रखना भूखे रहना नहीं है। बगवान को पाने का एक मार्ग है। किन्तु हर मनुष्य का
मार्ग अलग -अलग है। किसी को भी बरपूर्वक भक्त नहीं बनाय जा सकता। स्वामी जी,
मैं आपको जानती तो नहीं। लेकिन आप भी धिन्ना की तरह ही बातें कर रहे ह�
बट के हो को मार्क पर लाना ही तो मेरा काम है।
गर से भी ऐसे इक्रोदित हो कर आयो। पत्पी से कलह के बाद बुद्धी भ्रमित
हो जाती है। तुझे कैसे पता? बिया हुआ है तेरा?
मेरे बिया से तुम्हें कह लेना। एक बार बिया रचाओ तब पता चलेगा। इतनी
द
किन्तु तुम्हारे गले में घंटी नहीं माला है। मेरे बच्चबन के मित्र के निशानी है।
याद दिलाता है कि संसार में न भगवान है न होगा। जब तुम्हारी ये अध्यानता
की माला तूटेगे। उस दिन तुम्हें अनुभाव होगा भगवान हर चड़े।
इस
रुख जाओ उस पर पैर मत रखो वो शिवलिन जैसा है रखुंगा तो क्या हो
जाएगा वो मार ना लेगा फिर तो रखता हूँ एक बार उसे देख ही लेता हूँ बुला लो उसे
इस काम के लिए शिव को आने की आवशिक्ता नहीं मैं हूँ
एक तुझे कैसे बाहर निकालता हूँ?
सवेरे से एक भी निशाना सही नहीं लग रहा सही तो लग रहा है बगवान को नहीं मानते
पर महा शिवरात्री में एक महा भक्त की तरह सद कुछ कर लिया और अंत में नारियल फोड़ कर
पूजा भी संपन्न कर ली तुमने मैंने?
पूजा की?
मैंने किसकी पूजा की?
स्वयम �
वायू लिंकी आज महा शिवरात्री पर तब से पहले नदी में स्नान
किया शरीर पर विभोती भी लगाई तुम
बेल पत्र
भी अरपनिकिये अनजाने में इस है लेकिन व्रत भी रखा
जिस कारण भगवान को भी आद करते रहे
मैं तुमें कुछ और समझ रहा था। लेकिन तुम और तुमारे भगवान अलग हीलीला कर
रहे हैं। ना मैंने कुछ किया, ना ये मेरा भगवान है। मेरा इस पत्थर से कोई संबंद
नहीं। कोई संबंद नहीं, फिर भी वायो लिंग को लूटने आये लुटेरों को
तुमन
ये भी अलग नहीं है ये भी तो पिता ही है जगक पिता
बसंतिम कारे बचा है रिदय से
शिर का नाम लेल तुम्हारी सारी इच्छाए पूर्ण हो
कहा जाएगी भागकर, तू कहीं भी भाग ले आज नहीं छोड़ूंगा।
तुम्हारी पत भी नहीं मिल रही। पूरे जंगल में ढूंढा। हाथी के पैरों के इतने बड़े
चिन्ने जो पहले कभी नहीं देखे। सर्प का केचुल और मकड़ी का जाल। वो भी इतने बड़ी
जिसका कोई अंत ही नहीं। लगता था इस जंगल के बारे में मुझे स
सब समझने की आवशक्ता भी नहीं भत्ती के लगस सारे प्रश्टों के उत्तर दे देती है जिनकी
इच्छा के बिना इस संसार में एक पत्ता भी नहीं हिलता उनकी शरण में जाकर देखो हो
है निमली मेल जे हर प्रयप्न करके देख ही लिये अंतिम प्रयास
शिव के
नाम
लोग पत्थर को भगवान कहते हैं। यह भगवान ही पत्थर है। वो मैं नहीं
जानता। निबली तुम पर भी विश्वास करती है और मुझ पर भी।
परन्तु आज उसने तुम्हारे लिए मुझ से जगडा किया। तो
ये, ये सपश्ट है कि तुम उसे अधिक प्रिय हो। �
पर मुझे तुम कभी समझ नहीं आए। आज से पहले मैंने तुमसे कुछ नहीं
मांगा है। आज पहली बार मांग रहा हूँ। अगर तुम्हारा अस्तित्व है,
तो मुझे बताओ मेरी नेमली कहाँ है। हे शिव शंकर।
निमली, निमली, निमली, निमली, निमली,
मुझे क्षमा कर दो, मुझे यह पर नहीं जाना चाहिए
था, तुम हमेशा मुझे वायोलिंग के दर्शन करवाने के लिए बोलते थे न,
अपने वर्षों बाद कृपा की वो भी मेरे पती और मुझे एक साथ आपके दर्शन का सभागे
देकर मैं धन्य हुई स्वामी तिन्ना तो हर दिन हम यहां आ सकते हैं ना अब शिवारादना
करूँगी मेरी नेमली इतनी दूर यहां क्यों आएगी इस वायोलिंग को ही घ
कहा देखिये वो तो बच पड़ नहीं कर रही थी
बूल हो गई शिव जी, कितना अग्यानी था मैं,
तुम हर पल पास थे मुझे आभास ही नहीं हुआ,
लगता है जैसे जीवन व्यर्थ हो गया,
देखो ना आज तक शिव भी नहीं बुला गया मुझसे,
पत्थर कहा मैंने तुम्हें,
कहा कि जब मिलोगे तो मैं तुम्हें चुनौती दूँगा। लेकिन तुमने मुझपर क्रोध नहीं
किया। अब समझ में आ रहा है मुझे।
मेरे शब्दों में, मेरी सोच में, मेरे वार में, पुकार में, जीत में,
तुम हमेशा साथ थे। पर मैं तुम्हें कल रात तक
ना �
लेकिन जब मैंने तुम्हें गले लगाया, इन हाथों से छुआ,
तुम्हें स्वयम को भूल गया,
मां के जाने के
बाद की
पीड़ा जो सालों से थी,
तुम्हारे स्पर्श मातर से बिट गई,
और बाबा के जाने के बाद मैं बिल्कुल आसहाय हो गया था।
पर अब तुम मेरे साथ हूँ। मेरे शिर्व मेरे
साथ है। ये
शिर्व। तुमने मुझे एक नया जन्म दिया है।
जहां देखता हूँ बस तुम ही दिखाई देते हो।
आकाश के बादलों में बानी की बूंदों, जंगल के पेड़ों में, खेतों की मेड़ों में,
पेड़ से लटके फल, जरनी का जल,
बैल के कूबड में, गाई के थन में, रिष्टी के कणकण में,
आकाश में, भूमी में, सब में तुम्हारा लिंग स्वरूप दिख रहा है
शि
और कितने रूप हैं, इतने छूटे की दिखते ही नहीं, या इतने
विशाल जो त्रिष्टी में नहीं समाते,
पीड़ा जानने के लिए उसे सहना
पड़ेगा, और जीवन समझने के लिए जीना,
आज से ये जीवन तुमारा,
तुमसे दूर नहीं जाओंगा,
ये मेरा वजन है दिम्ना का वजन
शिव महा देवा जान गया आज मैं तुम्हे शिव महा देवा खुल गई है
आखें अब मेरी शिव महा देवा जान गया आज मैं तुम्हे शिव महा
देवा आज मेरे मन की सारी दुविदाएं दूर हुई अब ये जाना आज तक
ये सांसे मेरी व्यर्त गई जीत जीत थक गया म
मैं कर्म हीन फिर भी तुमको पा गया
लग ये तारे जर नहीं अभिशेक करे तेरा पेड़ों की ये डालियां त्रिशूलिसी
लगे बेग है माते त्रिपुल्ग से विश्व ये
तारा शिव मैं लगे जादू तुम्हारा है चारो दिशाओं में
तब में उजाना है चंद्र कलाओं से
पूजा और भत्त क्या है कुछ न जानू मैं अब कभी न छूटे यूँ हाथ
थामलो मेरा बत तेरी कृपा की छाओ मेरा हूँ सदा हर घड़ी
मेरे सर पे शंबू हाथ हो तेरा
क्या मैं तुझे नहला दूँ बच्च की तरह क्या मैं सिंगार करूँ फूलू
से तेरा अपने ही घर के बच्चों की तरह तेरे संग
खेलू होके मगन देखो मैं स्वादिश ये मा से लाया हूँ ओ
शिवया बोलो तो मीता शह तुम्हे देदू बस यू ही उम्र
भर तुम्हे �
विश्मुशीत वर्षा में कैसे तुम रहे भला इस कथिंग परिस्थित में कैसे
तुम जिये भला अब रक्षक हूँ नित्र भी हुँ ताया भी तैया
पहले मिल जाते मुझे तो क्या बिगड़ता बोलू क्या ठीक है ये क्या थी
विवशता अब तो ना कभी छोड़ूँगा तुम्हें गब में
ताक चमा कर दो तुम मुझे धन्य हूँ जो तुने मुझे पे दया की
छाया में नी मुझे तेरी जटा की
चाहे मुझे पर जितना भी अब क्रोध तुम करो, चाहे अपने शूल से बेद
डालो तुम मुझे, चाहे अपने सरप से डतवा दो तुम मुझे, छूड़ू
मैं तो नाम बदल देना तुम मेरा.
क्या हो गया सिर्थी इतनी जल्दी पेट भर गया थोड़ा और खालो ना
बस थोड़ा तावा.
कहो नहीं ये पापी.
तो पापी, कहाँ नहीं रहे तू?
यहाँ आने का साहस कैसे किया?
जिसकी हाँ जैसे आया, ये चुमकर आया.
देखबाओ.
भीरे बोलिये ना.
इतना क्रोधित क्यों हो रहे हैं?
अभी तक शिव जी अच्छे से भोजन कर रहे थे। तुम्हारे आते ही रुख गए। इस मनुष्य की
जो कुद्रिष्टी आप पर पड़ी है, उसे मैं उतार देता हूँ।
अब चलिए थोड़ा और खाली जिये।
तुम सभात्र गण निद्रा वस्त हमें रहते हो उस दिन एक थूर दाया और आज एक पापी आ गया
वर्षों से जिस बायू लिंग्यों को मैंने पवित्र रखा है उसके पास तुमने इसे आने
दिया ए पापी तुम अब तक जीवित कैसे है भस्म क्यों नहीं हुआ
तु
तिन्ना, ये क्या है? क्या कर रहे हो तो? यहाँ पहुँचे कैसे?
कमपा, अभी शिव जी को बहुत भूख लगी है. मैं उन्हें भोजन करा रहा हूँ, उसके बाद बात
करेंगे.
ये ठीक नहीं है, तिन्ना.
तुम्हें ये नहीं करना चाहिए था.
कमपा, इस तुष्टे से �
तुम समझते क्यों नहीं हो?
बद फोड़ा साइज... तिन्ना!
पकड़ा उसने!
तिन्ना! चुक चुक मुझे!
मैंने काई फोड़ा!
कौन है ये? तिन्ना की पत्नी है! देख लिया ना!
इस पवित्र स्थान पर आने की मला है इसकी जीता की ये सब ना हो!
लोग कल्यान के लिए भगवान शिव ने इसी स्थान पर चुड़ा है और अब ऐसे मुनिष्य इसे
अपवित्त कर रहे हैं। लेकिन मैं तो यहां बद पूजा करने आया था। धौरत है तो। महारेव को
मांस चला कर अश्वद्ध कर दिया। यही थी तेरी पूजा। मैं
एक
तो तु इतना की ज्यान है, महारेव का निवास्थान कहा है। जिस भूमी में हम चलते
वायू श्वास में हैं, जो जल पीते हैं, जिस आकाश के नीचे हैं, जिस अग्नी से गर्मी
मिलती हैं, सर्वत्र शिव बत्ते हैं स्वामी। अब एक सब मत मोलना नीच, तुझ �
पिताजी इससे बात करने का कोई अर्थ नहीं कमपा नहीं क्या रहे हो मारो इसे
शिव की आँखों से आँचु बहरें।
लोगों के स्वामी की आँखों में आसू कहते हैं। सृष्टी को बचाने के लिए हलाल
हुए तो आपके आसू नहीं बढ़े। तो आप क्यों रो रहे हैं शिव जी। देवी पारवती ने जब
पुत्र का कटा सिर देखा तो वो बहुत रोई। लेकिन
आ
सच्ची, आप रोना बंद कीजिए, आप मत रोईए, मेरे लिए मत रोईए,
आपकी आगों से तो,
ये रख रहा है, शिव की आगों से रख रहा है, शिव की आगों से रख रहा है, मेरे शिव की
आगों से रख रहा है, ये तो अनर्थ हो गया, शिव जी की आगों से रख रहा ह
उपाई है सिर्फ जी, आपने ही तो हमें सिखाया है, गनेश जी को नया सिर
दिया था, हाथी का सिर लगाया था,
एक तहीं मैं आपको अपनी आखे दूँगा।
देख रही हो नेमली, सिवजी के आखों से रख नहीं बहरा
है।
देख रही हो नेमली, सिवजी के आखों से रख नहीं बहरा है।
देख रही हो नेमली, सिवजी के आखों से रख नहीं बहरा
है।
आप चिंता मत करना, अब मुझे पता है क्या करना है। एक आँख दिये, अब दूसरी भी
दूँगा। लेकिन शिव जी, तीसरी आँख से रक्त मत बहने देना हाँ। क्या है ना,
मेरे पास तो तीसरी आँख है ही नहीं।
एक शण रुकिये
शिव जी।
मैंने तुम्हें वचन दिया था कि मैं तुम्हें अपनी आँखों से कभी ओजल नहीं होने दूँगा।
शिव जी के लिए ये वचन तोड़ रहा हूँ। कमा कर देना।
पर तुम चिंता मत करना। शिव जी है ना रक्षा करेंगे। आप नेमली का ध्यान रखेंगे
ना शि�
अंतिम बार आपके दर्शन कर रहा हूँ। मेरा जीवन सफल
हो गया। जीवन का उत्तेश पूर्ण हो गया।
अब
मुझे आप पर पैर रखना होगा लेकिन जल्दी हटा लूँगा। क्योंकि मुझे आँख कहाँ पर लगानी
है वो मुझे समझ में नहीं आएगा ना।
अज़ भज़ श्री अमान दकाय बज़रे मदग जान दकाय भज़ना
भज़मा भज़सी भज़मा भज़या भज़मा शिवाय अज़ भज़ श्री
अमान दकाय बज़रे मदग जान दकाय ओम शिवा शिवा ओम
शिवा शिवा शिवा शिवा शिवा शिवाय नमः ओम शिवा
श
परभी स्वर्ण
इतना बड़ा नंभव नहीं त्याग ये
ब्रह्म था मुझे इस लोक में मुझसा
कोई नहीं देखी
भक्ती जब से तेरी खुल गई हैं
आखे में
रमसारा मन से निकल गया सिर जुक
गया में
शिवा वादम शिवा वेदम शिवा मोदम वन्दन भक्त शेष्ठा
नमा शिवा गीजम
शिवा भूजम शिवा भोजम शिवा राजम शिवा तेजम वन्दन आदिवाती
नमा शिवा दाद्रम शिवा कोप्तरम शिवा
छेत्रम शिवा छात्रम शिवा जग्रम शिवा बोजम
वक्ति का तुम शिखर मैं क्या हूँ कुछ भी ना शिव वक्त देखा ना इस जग में तुम जैसा हम
मुख तुम्हारे हूँ मैं दूलकन जैसा
जित तु स्वयं को
परिणाम की अपेक्षा के बिना किये गए किसी भी कार्या का फल अमुल्य होता है। तुमने
प्रसाद के रूप में जो आखे हमें दे दी हैं, उसी से अब हम हमेशा खिले मानव संसार
को देखेंगे। अब संसार में छोटे, बड़े, न्याय और अन्न्याय का ग्यान
हमें त�
तुमने दृष्टी प्रदान की। इसलिए आज से तुम इस संसार में कनपा के नाम से विख्षात
होगे। मैं प्रतीक्षा कर रहा था कि तुम कब मेरे सामने समर्पन करोगे।
किन्तु तुमारी अनन्य भक्ती ने आज मुझे तुमारे समुक आने पर बाद्य कर दिया।
आ�
इसलिए मैं तुम्हारा मंदिर स्वयं अपने मंदिर से भी उपर उचे पहार पर स्थापित करता
हूँ। वामी,
अब मुझे इस अंसार से कुछ नहीं चाहिए। मुझे इस जन्म और मृत्यू के बंधन से मुक्त कर
दीजिये प्रभू। अगर कुछ देना ही है तो अपने
च
अपने वचन को मैं कैसे तोड़ सकता हूँ मेरे अर्चन तिननाडू
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