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[एक बच्ची की आवाज़] माँ!
माँ!
माँ!
[झाड़ हिलने की आवाज़]
माँ!
माँ…
माँ बुला रही है।
माँ!
-माँ बुला रही है। -माँ बुला रही है।
-माँ बुला रही है। -माँ बुला रही है।
माँ!
माँ!
[डरावनी आवाज़ आती है]
माँ!
माँ!
[दोबारा डरावनी आवाज़ आती है]
खड़े रहो तुम दोनों।
पढ़ो ये।
-केवमैन। -केवमैन।
मिस, ये केवमैन क्या होता है?
मानव विकास
तुम होते हो, और तुम होते हो।
एकदम आदिमानव!
बैठो दोनों के दोनों।
सॉरी, मिस।
कौन लड़ता है ऐसे?
ठीक है, आज हम पढ़ेंगे केवमैन क्या होता है।
आज से हजारों साल पहले
हम जैसे अभी दिखते हैं, जैसे अभी जी रहे हैं, वैसे नहीं रहते थे।
हमारे पास ना पहनने को कपड़े थे,
ना स्कूल थे, ना किताबें थी।
एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए हमें पैदल ही जाना पड़ता।
घर बनाने नहीं आते थे हमें।
तो हम गुफाओं में रहते थे।
इनको कहते थे केवमैन।
फिर एक केवमैन को ध्यान आया
कि अगर हम सब साथ रहें, तो सुरक्षा बढ़ जाएगी।
उसने सबको समझाया और सब साथ रहने लगे।
इस तरह बना उनका एक समाज।
इस समाज में फिर उन्होंने रूल्स, रेग्युलेशन, प्रथाएँ बनाई
जिनसे वो सब सुकून से जी सकें।
पर क्या आपको लगता है कि आज हम सब सुकून से जी रहे हैं?
-नहीं। -नहीं।
मैडम जी, प्रिंसिपल सर ने आपको बुलाया है।
क्लास के बाद आती हूँ।
तुरंत बुलाया है जी।
ठीक है।
चलिए, आप किताब निकाल के पढिए, मैं आ रही हूँ।
अस्वीकार
आपकी एप्लिकेशन अप्रूव नहीं हो सकती।
आपकी बेटी को घर से स्कूल करने की परमिशन नहीं दे सकता।
सर, लेकिन--
देखिए, बाकी पैरेंट्स भी कहना शुरू कर देंगे कि उनके बच्चे घर से स्कूल करें।
तब क्या होगा?
सर, लेकिन उसकी असली प्रॉब्लम है, मैंने बताया था आपको।
आपने बताया था, पर इतना सीरियस है?
सर। सर, एक सेकंड। सर, सुनिए।
इ… शा…
नी।
[हकलाते हुए] रा-नी।
शाबाश, मेरी बच्ची।
[कूकर की सीटी बजने की आवाज़]
जाओ-जाओ।
[हकलाते हुए] बाहर मत आना।
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
इशू… नहीं!
[साक्षी] सर, इशानी धूप में बाहर नहीं जा सकती, सर।
उसको धूप से एलर्जी है।
[अंग्रेज़ी में] अगर आप चाहते हैं तो मैं मेडिकल रिपोर्ट जमा कर सकती हूँ।
पर, सर, समझिए ना, प्लीज़। उसका स्पेशल केस है, सर।
स्पेशल केस?
आप हैं स्पेशल केस, मिस साक्षी।
ये नौकरी आपकी कैसे लगी? इंस्पेक्टर समर ने स्पेशल केस कह कर लगवाया।
इशानी के एडमिशन फॉर्म में बाप के नाम की जगह अपना नाम लिखवा लिया, क्यों?
"स्पेशल केस!"
[अंग्रेज़ी में] और अब ये मदद?
देखिए, लोग बातें कर रहे हैं।
आप इंस्पेक्टर समर के घर में रह रही हैं।
वो हर महीने आपसे मिलता है।
सॉरी, वो आपका पर्सनल मैटर हो सकता है।
पर आप इशानी को स्कूल भेज दीजिएगा,
नहीं तो उसे नाइट स्कूल में डाल दीजिए।
माँ!
दिखाओ।
रानी माँ ने बताया तुमने क्या किया है आज।
सॉरी।
पर मैं सूप नहीं पीऊँगी।
देखो, सूप तो पीना पड़ेगा, इशानी।
नहीं। पहले कहानी सुनाओ।
कहानी? मुझे नहीं आती कहानी।
रानी माँ कहानी सुनाएँगी।
रानी माँ को नहीं आती, आप ही सुनाओ।
मैं नहीं पीऊँगी वरना।
ठीक है। तो फिर अगर सूप पीना बंद किया,
तो कहानी भी बंद हो जाएगी।
डील?
डील।
ठीक है।
एक बार एक छोटी सी बच्ची थी…
उसको दुष्ट सूरज बहुत परेशान करता था।
इशू!
[साक्षी की आवाज़] वो कहीं घर से बाहर ही नहीं निकल पाती थी।
क्या करती है?
[इशानी की आवाज़] मेरी तरह बहादुर लड़की थी?
एकदम तुम्हारी तरह बहादुर लड़की थी।
बाय।
[साक्षी की आवाज़] फिर पता है उसकी मम्मी ने क्या किया?
[इशानी की आवाज़] क्या किया?
उस बच्ची की मम्मी ने उसके लिए एक ऐसा सूप बनाया…
ऐसा सूप बनाया, जिसे पीते ही…
बच्ची में उड़ने वाली मैजिक पावर आ जाए।
वाह!
[साक्षी की आवाज़] बच्ची फिर वो सूप एक बार में ही झट से पीने लग गई।
और कुछ ही दिनों में बच्ची के बड़े, मजबूत पंख निकल आए…
और वो खूब ऊँचा उड़ने लगी।
[इशानी की आवाज़] उसके पंख कितने बड़े थे?
[साक्षी की आवाज़] बहुत बड़े थे…
एरोप्लेन जितने बड़े थे।
फिर एक दिन जब दुष्ट सूरज गहरी नींद में सो रहा था…
बच्ची अपने पंख फैला के
उड़कर उसके पास पहुँच गई।
उसे जगा के बोली,
"ए सूरज! मुझे तंग करना छोड़ दो!"
वो सूरज इतना गुस्सा हो गया, आ के बोला,
"तू! छोटी सी बच्ची, मुझे सिखाएगी?
देख मैं क्या करता हूँ!"
पता है बच्ची ने क्या किया?
क्या किया?
बच्ची ने…
बिना डरे सूरज के मुँह पे ज़ोर से पंच मारा।
गुड आफ्टरनून, सर।
[साक्षी की आवाज़] उस पंच के बाद,
सूरक इतना डर गया, इतना डर गया…
-बाय। -बाय!
…कि जब भी बच्ची घर से बाहर निकलती,
सूरज डर के छुप जाता।
उस बच्ची का नाम पता है क्या था?
[इशानी की आवाज़] क्या था?
[साक्षी की आवाज़] रात्री। यानि "रात।"
मैं रोज़ स्कूल जाऊँगी, माँ।
मैं तो रात्री हूँ।
मैं रात्री हूँ! मैं रात्री हूँ!
मैं रात्री हूँ! मैं रात्री हूँ!
रुको। पहले क्रीम लगा दूँ।
मम्मा, हम एरोप्लेन खरीद लें?
एरोप्लेन क्यों?
एरोप्लेन से जाऊँगी और सूरज को एक पंच मार कर आऊँगी!
-ठीक है। हम एरोप्लेन खरीद लेंगे। -हैलो, मिस रात्री।
-समर, हाय। -हाय, साक्षी।
-कैसी हो? -परफेक्ट टाइमिंग है!
क्यों?
आज रात का सूप तुम पिलाना इसे।
अरे बाप रे, आप तो बहुत भारी हो चुकी हो।
सूप पी-पी के भारी हो गई।
ये कौनसा सूप है भाई?
चॉक्लेट सूप है ना! पी-पी के मोटी हो रही है।
चॉक्लेट सूप?
अरे आप तो बहुत लकी हो, आपको चॉक्लेट सूप मिलता है।
अच्छा, मेरा गिफ्ट कहाँ है?
सॉरी, भूल गया।
अच्छा, इतना मुँह फूल गया आपका, नौटंकी?
अच्छा, ठीक है। पहले खाना, उसके बाद गिफ्ट।
सब लोग मुझे खाना खिलाने के पीछे पड़े रहते हैं।
खाना खा कर के मेरे सारे दाँत टूट जाएँगे!
तभी तो तुम सूप पी रही हो।
अच्छा, आप जानती हैं मैं आपके लिए क्या गिफ्ट लाया हूँ।
क्या?
छोटे से चूहे के दो दाँत लाया हूँ।
जब आप वो दाँत लगाकर ये सूप पिएंगी ना, तो पता है कैसे दिखेंगे?
चलो सूप पियो।
चलो।
छी! गंदा!
अब आँखें बंद करो और हंडरेड तक काउंट करो।
मम्मा यूँ गई और समर अंकल की कार से आपका गिफ्ट लेके आएँगी।
मुझे भी आना है।
अरे आप कैसे आओगी, बाहर अंधेरा है ना।
तो मैं कहाँ डरती हूँ अंधेरे से।
यहाँ भी तो है।
मैं डरती हूँ ना अंधेरे से।
बाहर अंधेरे में एक दुष्ट राक्षस है।
और वो मेरी इशू को ले गया तो?
ना बाबा।
आप यहाँ सो जाओ। मम्मा यूँ गई और यूँ आई।
आप बुद्धू बना रहे हो ना?
मैं क्यों बुद्धू बनाऊँगी?
ओके।
सात साल से तुम्हारे घर रह रहे हैं।
वक़्त का पता ही नहीं चला।
पर अब से तुम हमसे रेंट ले लिया करो, प्लीज़।
मेरी माँ का घर है,
माँ होती तो कभी तुमसे रेंट नहीं लेती।
और पैसे का क्या है…
इशानी को देखकर सारा स्ट्रेस दूर हो जाता है।
वो भी तुम्हें मिलने के लिए बहुत इंतज़ार करती है।
[अंगेज़ी में] हर चीज़ के लिए थैंक यू, समर।
तुमने बहुत किया है।
सात साल पहले
[समर की आवाज़] मैंने बस अपनी ड्यूटी की है, साक्षी।
मैंने ऐसा केस पहले कभी देखा ही नहीं था।
एक आदमी अपनी प्रेग्नेंट बीवी को गाँव ले आता है।
उसके माँ-बाप पहले तो उसका अच्छे से ख्याल रखते हैं,
लेकिन फिर उनका बर्ताव बदलने लगता है।
वो वहाँ से भागना चाहती है लेकिन वो उसे जाने नहीं देते।
उसे तीन दिन तक खेतों में अकेला छोड़ देते हैं।
उन तीन दिनों में उसके साथ अजीब सी घटनाएँ होती हैं।
♪ लुक्का-छुप्पी… ♪
[समर की आवाज़] उसे चीखती हुई औरतों…
माँ बुला रही है।
…और बच्चों की आवाज़ें सुनाई देती हैं…
[पानी में गिरने की आवाज़ आती है]
…जो उसे एक डरावनी कहानी बताने की कोशिश करती हैं।
कहानी राजबीर और उसके परिवार की।
राजबीर और उसके परिवार को बेटा चाहिए था,
इसलिए वो बार-बार उसकी शादी कराते।
लेकिन हर बार उसकी बेटी पैदा होती,
और वो लोग माँ और बेटी को मार देते।
[नवजात बच्चों के रोने की आवाज़ें]
[समर की आवाज़] ये राजबीर की चौथी शादी थी।
लेकिन इस बार वो लड़की कहानी पलट देती है।
-मैं दिखाऊँ तुझे! -बस!
बहुत हो गया!
[समर की आवाज़] अपने बच्चे को बचाने के लिए,
वो रजबीर और उसके माँ-बाप को मार देती है।
[राजबीर के चीखने की आवाज़]
बताइए?
सरेंडर करना है, सर।
[एक हवलदार] सर, यहाँ तो कोई नहीं है।
पक्का यही घर है?
बॉडी तो--
यहीं थीं।
बेवकूफ तो नहीं बना रही?
आपको बेवकूफ बनाने के लिए मैं मर्डर कुबूल कर लूँ?
तो बॉडी कहाँ गईं?
वो…
वो कजला जी का है, राजबीर के बाप का।
अगर किसी ने बॉडी हटा दी हों तो?
संभाल के।
आराम से, साक्षी। आराम से। साँस लो। हालत तो देखो अपनी। आराम से।
और सुनो मेरी बात, तुम्हें किसी से भी डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। समझ गई मेरी बात?
मैंने इस गाँव के बारे में बहुत कुछ सुना है।
वैसे भी ना तो कोई बॉडी है, ना सबूत है,
और ना ही कोई गवाह।
कानूनी तौर पर मैं तुम्हें अरेस्ट नहीं कर सकता।
[अंग्रेज़ी में] इसलिए प्लीज़, शांत हो जाओ।
[अंग्रेज़ी में] शांत हो जाओ।
अगर राजबीर ज़िंदा है…
तो वापस ज़रूर आएगा…
हम दोनों के लिए।
आराम से। संभाल के लेके जाओ इन्हें।
-आराम से। आराम से। -आ जाओ। आ जाओ, संभाल के।
सब ठीक हो जाएगा। आराम से।
बेटा है या बेटी?
छोरी।
[समर की आवाज़] इशानी को बचाने के लिए तुमने जो किया, साक्षी,
वो सिर्फ एक माँ ही कर सकती थी।
एकदम तुम पर गई है।
हैं जी?
हाँ? मुझ पे गया?
ये…
ये बहुत ही अच्छी डर्मेटोलॉजिस्ट है।
इशानी को इसके पास ले जाना।
ये बहुत दूर है, समर।
तो?
सात साल बीत चुके हैं, साक्षी।
अगर कोई होता तो अब तक सामने आ जाता। [अंग्रेज़ी में] मेरी बात मानो।
अब कोई खतरा नहीं है।
मैं समझती हूँ, समर।
पर माँ हूँ ना!
इस डर का क्या करूँ?
बाहर निकलना शुरू कर दो।
डर अपने आप खत्म हो जाएगा।
[बाहर से अजीब आवाज़ें आती हैं]
[रिमोट कंट्रोलर के बटन दबाने की आवाज़]
माँ!
माँ!
रानी माँ!
रानी माँ!
रानी माँ!
[घड़ी की सुई टिकटिकाने की स्पष्ट आवाज़]
रानी माँ!
रानी माँ!
[रेडियो में लोक संगीत बजता है]
[हकलाते हुए] इशू!
इशू!
इशू!
इशू!
इशू!
ए! ए!
-ए! -छोड़!
-ए, चुप! -इशू… इशू!
-दरवाज़ा खोल। खोल दरवाज़ा! -इशू!
-चुपचाप चढ़ जा गाड़ी में! -इशू!
दरवाज़ा बंद कर।
चल रे!
बाय।
-गुड नाइट। -गुड नाइट।
अरे एक मिनट। इशानी का गिफ्ट रह गया।
-अरे हाँ! -ये उसे बहुत पसंद आएगा।
है क्या ये?
एरोप्लेन।
दरवाज़ा क्यों खुला है?
साक्षी?
रानी?
रानी?
रानी?
इशू?
रानी?
इशू?
[पुलिस के सायरन की आवाज़]
[समर] चार-चार कांस्टेबल की दो टीम बना लो।
एक को मैं लीड करूँगा, एक को तुम करो।
[एक पुलिसवाला] ज़रूर, सर।
दो टीम इशानी को ढूँढने के लिए निकल रही हैं।
हम जल्दी उन्हें ढूँढ लेंगे।
इशानी मिल जाएगी, साक्षी।
मैं प्रॉमिस करता हूँ, मैं उन दोनों को वापस ले आऊँगा, जल्द ही।
समर, कुछ ही देर में सुबह हो जाएगी।
इशानी को जल्दी वापस लाना पड़ेगा।
डरो मत। मैं कह रहा हूँ ना तुमसे। मिल जाएगी।
-समर, मैं भी साथ चलूँ, प्लीज़? -नहीं।
इशानी और रानी वापस आए, तो यहाँ पर किसी को तो होना होगा।
तुम यहीं रुको, डरो मत।
बस दरवाज़ा लॉक कर लेना।
इशू…
तुम ठीक हो?
[मोबाइल की घंटी बजती है]
हैलो?
[समर] साक्षी, इशानी का पता चल गया है।
यहाँ से कुछ दूर एटीएम में वीडियो रिकॉर्ड हुआ है।
एचपीआईबी
उसे ताऊ लेकर गया है।
वो राजबीर के गाँव का मुखिया है।
[साक्षी] समर…
समर, वो उसे खेत ले गया होगा।
इशानी के साथ कुछ बहुत बुरा होने वाला है!
जय हिन्द, सर।
जय हिन्द।
-[एक हवलदार] जय हिन्द, सर। -[दूसरा हवलदार] जय हिन्द, सर।
बाकी लोग कहाँ हैं?
सर, वो विधायक जी के बेटे की शादी है ना, सबकी ड्यूटी वहीं लगी है।
कोई दिखा तो नहीं यहाँ पे?
नहीं, सर।
[समर] बारह घंटे से बच्ची लापता है।
[रहस्यमयी संगीत बजता है]
साक्षी।
समर, ये…
क्या है ये?
इशानी का ड्रेस।
कोई बच्चा यहाँ छोड़ के भाग गया।
-दूबे जी! -जी, सर।
रुको यहीं पे।
समर!
समर।
तुम यहीं रुको।
-दूबे। -जी, सर।
सारे रास्ते चेक करो।
-जी, सर। -जी, सर।
फैल जाओ। वहाँ पे चेक करो, अंदर।
हाँ जी, सर।
-कोई दिखा? -सर, यहाँ भी कुछ नहीं मिला।
इधर भी कोई नहीं दिख रहा।
-कोई नहीं है। -समर।
[एक लड़का] भाग!
ए, गोली मत चला। गोली मत चलाना, बच्चे हैं।
यहाँ से बाहर मत निकलना।
अरे पकड़ो उसको।
इधर आ! इधर आ!
हट! परे हट!
ए पकड़ो इन्हें।
जा, अंदर जाके ढूँढ।
राजबीर?
जा, अंदर घुस जा! उधर अंदर घुस जा।
-घुस! -हाँ, सर।
-तू ठीक है? तू ठीक है? -जी, सर।
तू चल अंदर जा।
-कहाँ हैं? कोई बच्चा मिला? -नहीं दिखे।
उस तरफ देखते हैं।
[समर] साक्षी।
वो भाग गए, सर।
साक्षी?
साक्षी।
साक्षी!
[बच्चों की असपष्ट आवाज़ें आती हैं]
[एक बच्चा] ए खींच। खींच!
अरे चल ले ना यार।
[तकलीफ से साँस लेने की आवाज़]
[दूसरा बच्चा] अरे खींच।
-खींच ना! -खींच
-खींच। -[साक्षी के चीखने की आवाज़]
[एक बच्चा] अरे जल्दी खींच!
[दूसरा बच्चा] अरे खाता ही क्या है वो!
सर, काफी ढूँढा मैडम को,
लेकिन मैडम कहीं नहीं मिल रही हैं।
[असपष्ट बातचीत की आवाज़]
सात साल से हम…
जिस माँ-बेटी को रात-दिन एक करके हम ढूँढते रहे।
उस तपस्या का फल आज मिला है।
हमारी प्रथा को तोड़ने वाली राजबीर की जिद्दी घरवाली और उसकी छोरी
को हम उसकी सही जगह पे वापस ले आए।
[हरियाणवी में] हमारा ये प्रण भी पूरा हो गया।
ताऊ, मेरी घरवाली और बेटी गाँव में वापस आ गए।
अब तो मुझे माफ़ कर दो।
कुनबे में वापस ले लो।
मैंने अपनी वफ़ादारी का सबूत दे दिया है।
ये तो प्रधान जी तय करेंगे।
दासी।
प्रधान जी मान गए!
अब तीन दिन तक…
ना गाँव से कोई बाहर जाएगा…
ना आएगा।
अगर सबकुछ ठीक रहा,
तो गाँव की खुशहाली और हरियाली वापस आ जाएगी।
जो राजबीर की जिद्दी घरवाली और उसकी छोरी
अपने साथ ले गई थी।
तीसरे दिन की धूम,
न्यारी होगी।
उस दिन राजबीर की छोरी का समर्पण होगा।
और समर्पण से पहले…
राजबीर की जिद्दी घरवाली की बलि चढ़ेगी।
ये राजबीर जब अपनी घरवाली का सिर काट के प्रधान जी के पैरों में रख देगा,
तो ही कुनबे का पूत कहलाएगा।
इशानी कहाँ है? इशानी कहाँ है?
मेरी बच्ची कहाँ है?
क्या करने वाले हो उसके साथ?
ए! औकात में रह! ज़्यादा उड़ मत।
शर्म नहीं आती तुमको?
पूरे परिवार की बलि दे दोगे तुम?
क्या मिलेगा तुम्हें उससे?
अरे मेरे परिवार को तो तू खा गई, भूल गई क्या?
इशानी!
बैठ!
[एक महिला के चीखने की आवाज़]
वो आ गई!
[एक बच्चा हरियाणवी में] अरे लड़की को खींच! मर्द नहीं है तू!
खींच।
-अरे खींच-खींच! -अरे ना-ना, इससे ना होने वाला।
-खींच रहा हूँ। -अरे ज़ोर लगा ज़ोर।
आने दे, आने दे।
अरे चुप हो जाओ।
चल-चल, आने दे।
अरे हट।
हमें सुन लेंगे।
चल।
चल।
अरे चलो।
-[छोटा बच्चा] ए बंद कर। -अरे बंद कर।
-ए! -अरे कुंडी लगा जल्दी।
-[एक बच्चा] कुंडी लगा। -ए! खोलो! खोलो!
खोलो ये!
ए! ए! कौन हो तुम?
-ओए, चिल्ला मत। वो सुन लेंगे! -खोलो इसे!
-चलो रे! -भाग, भाग! अरे भाग!
ए, कहाँ जा रहे हो? खोलो इसे।
ए, कहाँ जा रही है?
तुम कौन हो?
शालीन।
चल, चुपचाप बैठ जा।
तुमने मेरी माँ को देखा है?
मुझे उनसे मिलना है।
मुझ बहुत डर लग रहा है।
यहाँ नहीं है।
मैंने बहुत बुरा सपना देखा।
मुझे अभी उनके पास जाना है।
दासी माँ ने कहा है, तू अपनी माँ से नहीं मिल सकती।
तुम मुझे बुद्धू बना रहे हो ना?
तो क्या तुम भी अपनी माँ से नहीं मिल सकते?
मेरी माँ तो कब की मर चुकी।
अब तो दासी माँ ही मेरी माँ हैं। और तेरी भी।
गटक ले।
क्या है ये?
काढ़ा है।
दासी माँ ने बनाया है, जड़ी बूटी वाला।
नहीं, ये तो सूप है।
मैं नहीं पीऊँगी सूप।
नहीं पिया तो गुस्सा हो जाएगी वो।
सह नहीं पाएगी तू उसका गुस्सा।
मैं नहीं पीऊँगी ये।
पीना तो पड़ेगा तुझे।
और अगले तीन दिन तक तुझे यही मिलेगा, और कुछ नहीं।
मैं नहीं पीऊँगी ये।
ये दासी माँ कौन हैं?
[बेचैन साँसों की आवाज़]
कौन हो तुम?
कौन हो तुम?
सुनो, सुनो!
सुनो, हमने कुछ नहीं किया। हमें क्यों यहाँ बंद करके रखा है?
सुनो, मेरी बच्ची बहुत छोटी है, और बीमार है।
धूप में बाहर नहीं जा सकती, वो मर जाएगी। मैं कह रही हूँ आपसे
-वो मर जाएगी! -ए!
सुन!
और याद रख।
बीमार नहीं है वो, शक्ति है उसमें।
उसका समर्पण हमारे लिए खुशहाली लाएगा।
समर्पण मतलब?
उसको अब तेरी ज़रूरत नहीं है।
समर्पण मतलब?
क्या करने वाली हो उसके साथ? सुनो!
-सुनो-- -ए, शहर की चिड़िया!
चोंच बंद रख अपनी।
इतने सवाल तो कोई मर्द भी नहीं करता।
चुपचाप पड़ी रह अपने कोने में,
जब तक तू मर नहीं जाती।
देखि, प्लीज़। सुनिए, प्लीज़ मुझे एकबार मेरी बच्ची दिखा दो।
वो ठीक तो है?
मुझे अपनी बच्ची के पास ले चलो। मुझे निकालो यहाँ से, प्लीज़।
[रोते हुए] सुनिए! प्लीज़!
[अजीब सी आवाज़ निकालती है]
तेरी छोरी अब मेरी है!
भूल जा उसे!
ताऊ,
मुझे अपने माँ-बाप की मौत का बदला चाहिए।
देख, राजबीर,
तू अपनी छोरी को पैदा होते ही मार नहीं पाया।
अच्छा हुआ।
उसकी बीमारी ही उसकी शक्ति है,
जो हमारी प्रथा को बनाए रखेगी।
जिस दिन प्रधान जी उसका समर्पण स्वीकार कर लेंगे ना,
उस दिन तेरी किस्मत बदल जाएगी।
तू कुनबे में वापस आ जाएगा।
उसके बाद अपनी घरवाली की गर्दन काट के अपने माँ-बाप की मौत का बदला ले लेना।
मैं तो सभा में ही उसकी गर्दन मरोड़ देता,
पर उन औरतों की चिल्लाने की आवाज़ों ने मेरा दिमाग खराब कर दिया।
वो आवाज़ें फिर से जाग गई हैं।
पर चिंता ना कर।
तीन दिन में वो भी हमेशा के लिए दब जाएँगी।
बस, अब दासी अपना काम ठीक से कर दे।
-दासी कर पाएगी। -ए!
आवाज़ नीची रख।
दासी की शक्तियाँ बिलकुल जहर हैं।
उसका काला साया सब देख सकता है, सब सुन सकता है।
वो किसी पर पड़ जाएगा,
तो अपशकुन हो जाएगा।
अब अगले तीन दिन में दासी तेरी छोरी का भरोसा जीत के
उसे समर्पण के लिए तैयार कर देगी।
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
दासी माँ, इसने काढ़ा नहीं पिया।
आपने मेरी माँ को देखा?
मेरी माँ कहाँ हैं?
मैंने बहुत बुरा सपना देखा था।
माँ ठीक हैं ना?
गटक ले।
[भारी दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
छोरी ने काढ़ा पीना शुरू कर दिया है।
ये टिक जाएगी।
[तरल पदार्थ निगलने की आवाज़]
जा।
[खाली पेट की आवाज़]
[इशानी की धीमी आवाज़] माँ!
इशू।
इशू…
माँ!
इशू!
इशू?
इशू!
इशू?
इशू?
[इशानी रोते हुए] माँ…
[घुँघरूओं की आवाज़ आती है]
इशानी!
इशानी!
[गूँजती आवाज़] इशानी!
इशू!
इशू?
इशू?
[दौड़ते कदमों की आवाज़]
[इशानी की आवाज़] माँ!
इशू!
[गूँजती आवाज़] इशू?
इशू, मम्मा यहाँ हैं।
इशू!
इशू!
नहीं।
इशू!
इशू?
इशू?
-नहीं। -इशू!
इशू, मैं हूँ। इशू, रुको!
[बच्चे ब-ब-ब की आवाज़ निकालते हैं]
नहीं! मत करो।
-ये देख, छोरी। -छोरी। हाँ।
ए!
तुम यहाँ नहीं आ सकते।
[हरियाणवी में] हम छोरी देखने आए हैं,
कि कैसी दिखती है।
तू छोरी तो नहीं दिखा रहा,
ना तू हमारे जैसा छोरा दिखता है।
[हरियाणवी में] अच्छा ये बता, तू है क्या, शालीन?
[शालीन] भागो यहाँ से।
[एक लड़का] ए! तू चुप कर!
ये ले, शालीन!
-[दूसरा लड़का] ए, चल भाग। -ए, रुको!
[पहला लड़का] अरे पकड़ के दिखा!
माँ।
इशू!
रुक, बेटा। मैं हूँ।
इशू! इशू, डर मत।
इशू!
इशू!
माँ!
तुम कौन हो?
माँ बुला रही है।
तुम मेरी माँ को जानती हो?
-माँ बुला रही है। -माँ बुला रही है।
इशू।
इशू!
माँ?
इशू!
ये सच नहीं है।
ये सच नहीं है।
ये सब भ्रम है।
ये सब भ्रम है।
इशू।
मैं बाहर नहीं जा सकती।
-माँ बुला रही है। -माँ बुला रही है।
माँ!
माँ…
माँ!
शालीन।
[डरावनी और अजीब आवाज़ें]
ये भ्रम है।
ये सच नहीं है।
ये भ्रम है।
[एक महिला के रोने की आवाज़]
इशू?
[महिला के चीखने की आवाज़]
[महिलाओं के रोने की आवाज़ बढ़ती है]
[बोलने की आवाज़ नहीं आती]
चल, गटक ले।
ए छोरी, सुनता नहीं तुझे?
क्या चाहिए, ताऊ?
बच भी जाएगी ये?
कुछ नहीं होगा।
सही वक़्त पे मिल गई।
तेरे से प्रधान जी का इलाज़ नहीं हो पा रहा।
उम्र हो ली तेरी।
तेरा काला साया भारी पड़ रहा है छोरी पर।
वो काला साया प्रधान जी की देन है मुझे।
वही ढूँढ कर लाया है इसे।
अगर ये भी मर गई…
तो पता है ना क्या होगा?
[हरियाणवी में] बता रही हूँ ना,
कुछ नहीं होगा।
इससे पहले तीन छोरी मर चुकी…
तेरे हाथों!
बाहर की छोरी प्रधान जी की शक्ति के सामने टिक नहीं पा रही थी।
ये कमजोर नहीं है।
प्रधान जी को ठीक करने की शक्ति है इसमें।
तेरे बाद…
यही एक मिली है जिसमें कुनबे का खून है।
शक्ति तो होगी ही।
तो भरोसा रख।
और मुझे मेरा काम करने दे।
-वक़्त नहीं है मेरे पास। -सुन!
याद दिलाने की खातिर आया था।
जब से प्रधान जी बीमार हैं,
पूरे गाँव में सूखा पड़ा हुआ है।
और अगर प्रधान जी का ताप और चढ़ा
तो अबकी बार पूरा का पूरा गाँव भस्म हो जाएगा।
और उससे पहले तू और मैं!
डर मत, ताऊ।
प्रधान जी की घरवाली हूँ मैं।
उनकी ज़रूरत पूरी करना जानती हूँ।
समर्पण की चिंता मेरे ऊपर छोड़ दे।
तू जा!
[समर] तू इन खेतों के बारे में जानता है कुछ?
सर, मैं इतना जानता हूँ कि अकेले अंदर जाना खतरनाक है।
आप बैकअप आने तक रुक जाइए ना, सर।
बैकअप आना होता तो कब का आ जाता।
एक औरत के गायब होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
एक पुलिस ऑफिसर के गायब होने से शायद पड़े।
अगर मैं सुबह तक बाहर नहीं आया तो खबर पहुँचा देना।
ठीक है, सर।
ए सुनो! ताऊ जी बुला रहे हैं।
तेरे बस का ना है।
ताऊ जी बुला रहे हैं।
ताऊ जी।
[अंग्रेज़ी में] वॉइसनोट रिकॉर्ड कर रहा हूँ।
खेतों के बीच एक सूखा कुआँ है।
अंदर जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई है।
मुझे नीचे कुछ दिख रहा है। मैं नीचे उतार रहा हूँ।
दरवाज़े के अंदर से छोटी सी सुरंग जाती है।
फिलहाल तो यहाँ पर कोई नज़र नहीं आ रहा है।
मैं अंदर जा रहा हूँ।
करेक्शन, यहाँ पर सिर्फ एक नहीं, बहुत सारी सुरंगें जाती हैं।
[अंग्रेज़ी में] ये सुरंगों की भूलभुलैया है।
मुश्किल होने वाला है…
[अंग्रेज़ी में] इसमें टाइम लगेगा।
[अंग्रेज़ी में] इसमें टाइम लगेगा।
दुखता है?
ना।
मुझे तो दुखता है।
शक्ति है ये।
बड़ी होगी तो समझ जाएगी।
फिर से सूप?
मैं नहीं पीऊँगी।
पीना तो पड़ेगा।
जल्दी बड़ी नहीं होना तुझे?
आप बुद्धू बना रही हो ना?
मैं झूठ नहीं बोलती।
तो फिर एक कहानी सुनाओ।
प्लीज़।
एक राजा की कोई संतान नहीं थी।
उसे बेटा चाहिए था।
-तो-- -ऐसे कौन सुनाता है?
माँ की तरह सुनाओ।
"एक बार एक राजा था…" ऐसे सुनाओ।
एक वक़्त की बात है, एक राजा था।
उसकी कोई संतान नहीं थी।
उसने सूर्य महाराज की तपस्या की।
सूर्य महाराज की कृपा से उसके घर एक छोरी का जन्म हुआ।
लेकिन छोरी को देख के
राजा गुस्से में आग-बबूला हो गया।
गुस्सा क्यों?
क्योंकि राजा को छोरा चाहिए था, छोरी तो बिलकुल नहीं।
छोरी तो बोझ होती है!
राजा ने सूर्य महाराज से शिकायत की,
"मुझे तो छोरा चाहिए,
जो मेरे बाद मेरे वंश को आगे बढ़ाए।"
[बच्चे के रोने की आवाज़ आती है]
[दासी की आवाज़] "इस छोरी को मैं यहीं फेंक के जा रहा हूँ।"
सूरज भी क्रोध में तप गया, और बोला,
"इस छोरी को मैं अपनी अग्नि से अभी भस्म कर दूँगा।"
[बच्चे के दर्द से रोने की आवाज़]
और सूरज की तेज़ किरण से
छोरी का बदन झुलसने लगा।
उसका पूरा शरीर लाल हो गया।
रात्री की तरह।
रात्री कौन?
आपको रात्री की कहानी नहीं पता?
मैं हूँ रात्री।
हम्म।
अच्छा।
अब आगे सुन।
वो छोरी झुलसती रही,
जब तक सूरज थक के सोने नहीं चला गया।
फिर क्या हुआ?
छोरी तो मर ही गई थी समझो।
पर रात को…
एक गुफा से एक आदिमानव आया,
और वो छोरी को अपने साथ गुफा में ले गया।
और छोरी को छू के अपनी शक्ति से ठीक कर दिया।
कैसे?
क्योंकि आदिमानव एक राजकुमार था…
जो उन अंधेरी गुफाओं में रहा करता।
राजकुमार बहुत अकेला था…
पर अब उसके पास एक नन्ही सी छोरी थी।
जिसकी उसने जान बचाई थी।
[दरवाज़ा खुलने की आवाज़]
क्योंकि वो छोरी बहुत खास थी।
छोरी को भी राजकुमार से लगाव हो गया,
और वो उसकी सेवा करने लग गई।
[अंदर से डरावनी आवाज़ आती है]
[दासी की आवाज़] राजकुमार उसकी सेवा से बड़ा खुश हुआ,
और उसने छोरी को अपनी शक्तियाँ दे दी।
शक्तियाँ? पंख भी दिए थे क्या?
हम्म! बड़े मजबूत और काले पंख,
जो छोरी को सूरज से बचाया करते।
छोरी खुश रहने लग गई…
और जल्द ही एक बहुत सुंदर औरत बन गई।
राजकुमार तो जवान का जवान ही रहा।
फिर क्या हुआ?
फिर… राजकुमार ने छोरी से शादी कर ली।
और दोनों खुशी-खुशी रहने लग गए।
राजकुमार अभी भी ज़िंदा है?
हम्म, है तो।
वो मुझे भी पंख देंगे क्या?
आपके जैसे?
पता नहीं।
राजकुमार बीमार हो रखे हैं।
ओह।
पर अगर तू उनके पास जाएगी,
उनका अच्छे से ख्याल रखेगी…
और अगर वो तुझे पसंद करने लग गए…
तो तुझे भी वो पंख दे देंगे।
और अगर मैं उन्हें पसंद नहीं आई तो?
तो क्या वो मुझसे शादी नहीं करेंगे?
गटक जा।
[डर से कंपकंपाती साँसों की आवाज़]
मदद करो हमारी! मदद करो। हमारी बेटी को ढूँढ दो।
-मदद करो! -वो मार देंगे।
वो हमारी नन्ही बेटी हो मार देंगे।
वो धूप में नहीं जा सकती। उसे बचा लो।
वो दासी डायन है। लेगी हमारी बेटी को।
खा जाएगी उसको।
बचा लो। बचा लो हमारी बेटी को!
-बचा लो। -हमारी मदद करो। मदद करो!
बचा लो, बचा लो उन्हें!
मदद करो हमारी!
मेरी बेटी भी उस औरत के पास है।
[महिलाओं के रोने की आवाज़]
वो उसे कुछ कर तो नहीं देगी ना?
वो भी धूप में बाहर नहीं जा सकती।
आपको रास्ता पता है?
मेरी बेटी यहाँ आई थी बाहर। वो मेरे पास आई थी भाग के।
मैं उसे ढूँढ रही थी… और मैं गुम गई।
आपको रास्ता पता है? आपको रास्ता पता है?
आपको रास्ता पता है?
हम साथ चलते हैं। एक काम करते हैं, हम सब साथ चलते हैं।
आप चलो मेरे साथ, हम सारी बच्चियों को बचा लेंगे।
वो तो अकेली है, हम इतने सारे हैं।
आप सब चलो मेरे साथ, हाँ? हम सारी बच्चियाँ बचा लेंगे। आप भी बचा लेंगे।
आपको रास्ता पता है?
पता है?
उझे ले चलो प्लीज़ इशानी के पास।
वो मुझे ढूँढ रही थी। चलो, प्लीज़। साथ चलो मेरे।
हम सब साथ जाएँगे। हाँ, हम सब साथ जाएँगे।
आ जाओ। उसके पास जाएँगे…
अरे, डरो मत। चलो मेरे साथ। कुछ नहीं होगा।
हम इतने सारे हैं। आप चलो, आओ।
चलो। साथ जाएँगे। कुछ नहीं होगा।
यहाँ से जाएँगे। रास्ता ढूँढ लेंगे। बच्ची बचाएँगे।
आ जाओ, आ जाओ। सब साथ जाएँगे। आओ। आ जाओ।
यहाँ से जाएँगे।
-[जंजीरों की आवाज़ आती है] -[महिलाओं के रोने की आवाज़ें]
मैं खोलती हूँ!
[डरावनी आवाज़ आती है]
[चाकू से गला रेतने की आवाज़]
[महिला के चिल्लाने और आग लगने की आवाज़]
बचाओ!
[डरावनी आवाज़ आती है]
[इशानी के कराहने की आवाज़]
माँ!
माँ!
रानी?
रानी।
रानी!
रानी?
[रानी के रोने की आवाज़]
रानी।
रानी, मैं।
[दरवाज़ा बंद होने की आवाज़]
रानी…
रानी, मैं… मैं साक्षी।
[हरियाणवी में] अरे कहाँ?
रानी?
रानी?
रानी?
रानी? रानी?
रानी? रानी?
राजबीर!
मैं कुछ नहीं कर पाई, रानी।
मुझे माफ़ कर दो, रानी।
-माँ! -दासी माँ। दर्द हो रहा है इसे।
कुछ करो।
माँ!
पीछे हट जा। हाथ मत लगा उसे।
माँ!
माँ!
माँ!
[दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़]
फिर भागी तू?
क्या सोच के भागी थी, कि बच जाएगी?
ज़्यादा होशियार समझ रही है अपने आप को?
देख ले, नर्क में आके गिरी है तू।
सिर्फ आवाज़ें हैं यहाँ पे।
रानी को मारा तूने?
रानी को मारा तूने?
हैं? रानी को मारा तूने?
पहले सुनैनी दिखती थी, अब तुझे रानी भी दिख गई?
फिर भ्रम हो रहा है तुझे?
तुझे सबके दर्द दिखते हैं ना? मेरा दर्द नहीं दिखता?
सात साल से तड़प रहा हूँ मैं।
तब तो तू बच गई थी,
अब तुझे कोई नहीं बचाएगा।
रानी जैसी औरतें इस नर्क में सूअर की मौत मरती हैं।
तू यहीं मारेगी!
राजबीर, तू बाप है उसका।
बेटी है वो तेरी।
मार देंगे उसे।
अंधा मत बन, राजबीर। इशानी को बचा ले, राजबीर।
अरे उसे तो पैदा होते ही मर जाना था।
उसके साथ जो हो रहा है वो गलत नहीं है…
वो प्रथा है हमारी।
छोड़ मुझे!
राजबीर, मुझे मार दे। इशानी को बचा ले प्लीज़।
-ए, चुप! -प्लीज़।
[अचानक अजीब आवाज़ आती है]
खुशखबरी है तेरे लिए।
मेरी तपस्या पूरी हुई।
तू माँ है उसकी।
तुझे मैं बधाई देने आई थी।
तेरी बेटी बड़ी हो गई।
समर्पण के लिए तैयार हो गई।
क्या मतलब?
औरत बन गई।
एक मिनट। सात साल की बच्ची है वो।
क्या मतलब "औरत" बन गई?
-[राजबीर] ए, चल! पीछे हट! -क्या कर रहे हो उसके साथ?
छोड़ दे उसे! राजबीर! मर जाएगी वो।
ए! छोड़ उसे!
राजबीर, उसे बचा लो प्लीज़। इशानी को मार देगी वो। राजबीर, क्या कर रहे हो? इशानी!
ए!
कहा था ना मैंने, कि तेरी बेटी मेरी किस्मत बदलेगी।
अरे तेरे जैसे कमजोर नहीं है वो।
ज़्यादा होशियार समझती है अपने आप को?
आज तेरी खाल उधेड़ता हूँ मैं।
तुझे कोई नहीं बचाएगा।
अब बता कितनी होशियार समझती है तू?
ले!
[महिलाओं के रोने की आवाज़ें]
[प्रधान की डरावनी आवाज़ें आती हैं]
-[दासी] प्रधान जी ने हामी भर दी। -हम्म।
छोरी तैयार है!
प्रधान जी ने लहू चख लिया!
और वो चाहते हैं कि आज आधी रात तक
ये समर्पण पूरा हो जाना चाहिए।
तैयारियाँ शुरू करो।
दर्द कम हुआ तेरा?
जल्दी तैयार हो जा।
आज बड़ा दिन है तेरा।
[दासी की आवाज़] याद रख…
मर्द प्रधान होता है।
औरत का कद जब मर्द की कमर तक आ जाए,
तो उसे मर्द की सेवा में लग जाना चाहिए।
यही प्रथा है।
बाकी औरतों जैसी तू कमजोर नहीं है।
प्रधान की सेवा करने की खातिर ही तेरा जन्म हुआ है।
तेरे समर्पण से ही तेरा सम्मान बढ़ेगा।
[इशानी की आवाज़] मम्मा, हम एरोप्लेन खरीद लें?
मैं रात्री हूँ! मैं रात्री हूँ!
[साक्षी की आवाज़] आँखें बंद करो, जल्दी।
[इशानी की आवाज़] नहीं! पहले एक कहानी सुनाओ।
[इशानी की आवाज़] तो मैं कहाँ डरती हूँ अंधेरे से।
यहाँ भी तो है।
[साक्षी की आवाज़] मैं डरती हूँ ना अंधेरे से।
बाहर अंधेरे में एक दुष्ट राक्षस है।
और वो मेरी इशू को ले गया तो?
रानी!
[झींगुर की आवाज़ आती है]
तुम्हें अपनी माँ की याद नहीं आती?
मेरी माँ तो जन्म देते ही मर गई।
मेरी एक जुड़वा बहन भी थी।
मार डाला उसको।
क्यों?
छोरी थी ना।
छोरियों को मार देते हैं।
मैं छोरा था, बच गया।
मुझे बहुत डर लग रहा है। माँ की बहुत याद आ रही है।
तेरे साथ कुछ गलत नहीं होने दूँगा मैं।
मैं ले चलूँगा तेरी माँ के पास।
चल।
ताऊ जी को कह देना, हम तैयार हैं।
कुछ घंटे में समर्पण हो जाएगा।
तुझे पता है ना…
क्या करना है तुझे अब।
वो तो मैंने पहले ही कर दिया, ताऊ।
मतलब?
भाग रही थी साली कुतिया,
मैंने भी ऐसी धुलाई की, मर गई होगी अब तक तो!
क्या? अरे बावला हो गया है क्या?
क्या बड़ी बात हो गई, ताऊ?
मरना ही तो था उसे।
अरे आहुति देनी थी उसकी!
सबके सामने!
फर्क पड़ता!
तेरी घरवाली की गर्दन प्रधान जी को नहीं, मुझे चाहिए थी।
गाँव की औरतों के मन में डर बैठाने की खातिर।
कि हमारी प्रथा से उल्टा चलने की सोची भी,
तो नतीजा देख लेना।
तूने सब गोबर कर दिया!
देख, राजबीर!
तू अपनी घरवाली को सभा में लेके आ…
ज़िंदा या मुर्दा।
सबके सामने उसकी गर्दन काट।
फिर बात बनेगी।
चुप। यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता कहाँ है?
-छोड़ो मुझे! -बाहर निकलने का रास्ता कहाँ है?
बाहर निकलने का-- बाहर निकलने का रास्ता कहाँ है?
चिल्लाना मत, वरना जान से मार दूँगा।
नाक में दम करके रखा है तुम लड़कों ने।
चुप बैठ।
रोना बंद कर दे। रोना बंद कर दे।
इशानी और साक्षी कहाँ हैं?
वो छोटी बच्ची और उसकी माँ, कहाँ हैं?
मैं सब बताऊँगा।
इशानी दूसरी तरफ है।
इशानी का समर्पण होने वाला है।
उसे प्रधान जी के पास ले जाएँगे।
कौन प्रधान जी?
[शालीन] प्रधान जी हमारे आदिमानव हैं।
हम सब उन्हीं के वंशज हैं।
वो धूप में नहीं जा सकते।
सदियों से गुफा में ही रहते हैं।
अब वो बीमार हो रखे हैं।
ताऊ कहता है,
उनको कुछ हो गया तो हमारा समाज खत्म हो जाएगा।
समर्पण ही उनकी उम्र बढ़ाएगा।
[समर] समर्पण मतलब?
[शालीन] शादी।
जो छोरी धूप में नहीं जा सकती, वही प्रधान जी की सेवा कर सकती है,
इशानी का भी समर्पण होने वाला है।
प्रधान जी तो ठीक हो जाएँगे,
पर इशानी नहीं बच पाएगी।
सभी छोरियाँ मर जाती हैं।
कोई भागने की कोशिश करेगी, तो धूप से मर जाएगी।
कोई तो प्रधान जी की गुफा में ही रह के मर जाती हैं।
क्या बात है?
तीन लड़कियाँ बैठी हैं उसमें।
मैं नहीं बैठूँगी।
कोई नहीं है।
चल, बैठ जा।
बैठ।
[शालीन] जो छोरी बच जाएगी, वो अगली दासी माँ बनेगी।
पर इशानी नहीं बच पाएगी।
मैं उसकी माँ से बताने जा रहा था।
कहाँ है, उसकी माँ कहाँ है?
जहाँ वो राजबीर गया है।
राजबीर ज़िंदा है?
मुझे लेकर चल उसकी माँ के पास। चल।
वैसे तुम लोग यहाँ पर रास्ता कैसे ढूँढते हो?
दीये के साथ-साथ चलेंगे तो हमें रास्ता मिल जाएगा।
साक्षी का पता लग गया।
[अंग्रेज़ी में] मैं उसके पास जा रहा हूँ।
ए!
ए!
[साक्षी की साँसों की आवाज़ गूँजती है]
मरी नहीं तू अब तक?
यहाँ तो कोई नहीं बचती।
[डरावनी आवाज़ में] मरना तो तुझे चाहिए था।
कितनी बार समझाया तुझे! समझ नहीं आता?
एक बार बच गया तू,
इस बार नहीं बचेगा!
[सभी औरतों की रोने की आवाज़ें]
साक्षी…
मैंने राजबीर को मार दिया।
संभल के।
समर।
तुम ठीक हो?
इशानी मिली?
इशानी सभा में पहुँच गई होगी।
चलो।
ये राजबीर कहाँ मर गया?
-पता नहीं। तूने देखा? -ताऊ जी।
बाहर पुलिस वाला देखा है मैंने।
-पुलिस वाले? -चलो रे!
-चलो! -हाँ, चलो-चलो।
संभल के।
अरे, देखो रे! ये रही छोरी।
ये दरोगा बचाने आया है तुझे, हाँ?
साक्षी।
तुम जाकर इशानी को ढूँढो।
इसको मैं देख लेता हूँ।
मुझे दूसरा रास्ता पता है।
चलो, जाओ।
ए, दरोगा, हट परे!
यहाँ हमारा कानून चलता है।
तुझे तो जाना पड़ेगा।
जाएगा तो तू, ताऊ, मेरे साथ।
अच्छा?
तेरा हिसाब तो मुझे पहले ही कर देना चाहिए था।
ए!
देख क्या रहे हो? जाओ!
ए, पकड़ो उसे!
[अचानक प्रधान की डरावनी आवाज़ आती है]
अब जा।
जा।
[डरावनी आवाज़ आती है]
डर मत।
पंख नहीं चाहिए तुझे?
तो जा।
आप भी मेरे साथ आ जाओ ना। प्लीज़?
दासी माँ!
हाथ कैसे लगाया?
वो मेरी दासी माँ हैं।
उनके अंदर शक्तियाँ हैं!
दासी माँ!
इस तरफ।
इशानी यहीं होगी। सभा यहीं पर है।
मैं नहीं डरती।
तू जा।
ए शहर वाली! अपनी हद में रह।
इशानी कहाँ है?
दरवाज़ा खोलो।
इसे खोलने का हक किसी का नहीं है।
और ना ही किसी में इतनी शक्ति!
जब प्रधान जी की इच्छा होगी, तो ही खुलेगा ये।
हट जा, दासी! हट जा!
ये प्रथा है हमारी।
सम्मान है ये! रखवाली हूँ मैं!
रखवाली?
दासी मानते हैं तुमको।
तुमको दिखाई नहीं देता?
एक दासी का कोई सम्मान नहीं होता, कोई मर्ज़ी नहीं होती।
चली जा! नहीं तो मार दूँगी।
यही तो तुम करती आई हो।
मार दो! काट दो! जला दो!
प्रथा के नाम पे तुम्हारे हाथ बाँध दिए गए हैं।
कमजोर बना दिया गया है तुम्हें!
जो मर गई, वो कमजोर थी।
मैं कमजोर नहीं हूँ!
तेरी छोरी कमजोर नहीं है!
कमजोर तो तेरा प्रधान है।
और उसे ज़िंदा रखने के लिए मेरी बेटी दासी नहीं बनेगी, जैसे तू बनी है!
[इशानी] माँ!
इशू!
इशू!
[प्रधान की डरावनी आवाज़]
माँ!
इशू!
इशू?
इशू!
इशानी!
इशू?
[दबी हुई रोने की आवाज़]
इशानी!
[इशानी के कराहने की दबी हुई आवाज़]
इशू!
इशू?
-इशू! -माँ!
इशू!
-माँ। -इशू।
इशू।
तू ठीक है?
तू ठीक है ना?
माँ, वो गंदा आदमी है।
मैं आ गई ना। कुछ नहीं होगा, हाँ?
चलते हैं यहाँ से। चलो।
आ गई तू?
यहाँ से निकल नहीं पाएगी।
ज़िंदा रहना तो बोल…
तक-तक-तक!
इसकी बात मत सुनना। ये भ्रम है।
-माँ! -माँ!
-माँ! -माँ!
-इशानी! -माँ! माँ!
-माँ! -माँ!
इशू?
इशू!
-माँ! -इशू।
इशू।
माँ।
माँ।
माँ।
इशू!
[प्रधान के कराहने की आवाज़]
माँ।
दासी माँ?
इशू।
अब से कोई छोरी दासी नहीं बनेगी।
[पुलिस के सायरन की आवाज़]
लो आ गए तुम्हारे बाप!
-अरे भाग रे! पुलिस आ गई! -चलो रे! भागो!
क्यों? निकल गई सारी मर्दानगी, हाँ?
दिन पूरे हो लिए तेरे, ताऊ!
इसे छोड़ देंगे तो ये फिर वापस आएगा।
इसे खत्म करना ही पड़ेगा।
माँ!
[लोकगीत बजता है]
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